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  • महिला टी20 विश्व कप फाइनल: कप्तान नेट साइवर-ब्रंट के अर्धशतक से इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को दिया 151 रन का लक्ष्य

    महिला टी20 विश्व कप फाइनल: कप्तान नेट साइवर-ब्रंट के अर्धशतक से इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को दिया 151 रन का लक्ष्य


    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में इंग्लैंड ने शुरुआती झटकों से उबरते हुए ऑस्ट्रेलिया के सामने 151 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए मुकाबले में कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी भरी नाबाद अर्धशतकीय पारी खेली, जबकि फ्रेया केम्प ने तेजतर्रार बल्लेबाजी करते हुए उनका शानदार साथ निभाया।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने महज 32 रन तक अपने दोनों सलामी बल्लेबाज एमी जोंस और डैनी वायट-हॉज के विकेट गंवा दिए। एमी जोंस 6 रन और डैनी वायट-हॉज 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं।

    इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और एलिस कैप्सी ने पारी संभालते हुए तीसरे विकेट के लिए 35 रन जोड़े। कैप्सी 20 गेंदों में 23 रन बनाकर आउट हुईं। कुछ ही देर बाद हीदर नाइट भी केवल 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं, जिससे इंग्लैंड का स्कोर 70 रन पर 4 विकेट हो गया।

    मुश्किल परिस्थिति में कप्तान ब्रंट ने फ्रेया केम्प के साथ शानदार बल्लेबाजी की। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए नाबाद 80 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। ब्रंट ने 53 गेंदों में 58 रन की नाबाद पारी खेली, जिसमें 5 चौके शामिल रहे। वहीं, फ्रेया केम्प ने 28 गेंदों में 44 रन बनाए और अपनी पारी में 4 चौके व 1 छक्का लगाया।

    ऑस्ट्रेलिया की ओर से किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, कप्तान सोफी मोलिनेक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक विकेट हासिल किया।

    151 रन के लक्ष्य के साथ इंग्लैंड ने मुकाबले में खुद को बनाए रखा, लेकिन दूसरी पारी में उसे ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को रोकने के लिए अनुशासित और आक्रामक गेंदबाजी की जरूरत थी। दूसरी ओर, छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व कप जीतने के इरादे से मैदान पर उतरी।

  • विमेंस टी20 वर्ल्ड कप में डैनी वायट-हॉज का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, एक संस्करण में 300 रन बनाने वाली पहली बल्लेबाज

    विमेंस टी20 वर्ल्ड कप में डैनी वायट-हॉज का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, एक संस्करण में 300 रन बनाने वाली पहली बल्लेबाज


    नई दिल्ली । इंग्लैंड की स्टार सलामी बल्लेबाज डैनी वायट-हॉज ने विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जिसे इससे पहले कोई भी महिला क्रिकेटर हासिल नहीं कर सकी थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में 8 रन की छोटी पारी खेलने के बावजूद उन्होंने टूर्नामेंट में अपने कुल रन 302 तक पहुंचाए और विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के एक ही संस्करण में 300 रन बनाने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं।

    डैनी ने पूरे टूर्नामेंट में सात मैचों में 60.40 की शानदार औसत से 302 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 42 चौके और दो छक्के निकले। लगातार बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने इंग्लैंड को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

    उनकी सबसे यादगार पारी श्रीलंका के खिलाफ आई, जब उन्होंने नाबाद 105 रन बनाकर टीम को बड़ी जीत दिलाई। इसके बाद उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ 16 रन, स्कॉटलैंड के विरुद्ध 7 रन, वेस्टइंडीज के खिलाफ 65 रन और न्यूजीलैंड के खिलाफ नाबाद 89 रन की शानदार पारी खेली। सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 12 रन का योगदान दिया और फाइनल में 8 रन जोड़कर इतिहास रच दिया।

    लॉर्ड्स में खेले गए खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए चार विकेट पर 150 रन बनाए। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और एमी जोन्स जल्दी आउट हो गईं। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और डैनी वायट-हॉज ने दूसरे विकेट के लिए 25 रन जोड़े। एलिस कैप्सी ने 23 रन बनाए, जबकि कप्तान नेट साइवर-ब्रंट 58 रन और फ्रेया कैंप 44 रन बनाकर नाबाद रहीं। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 80 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

    हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार बल्लेबाजी के दम पर लक्ष्य आसानी से हासिल कर सात विकेट से जीत दर्ज की और रिकॉर्ड सातवीं बार विमेंस टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड ट्रॉफी नहीं जीत सका, लेकिन डैनी वायट-हॉज का ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में दर्ज हो गया।

  • ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बरकरार, इंग्लैंड को हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार बना विमेंस टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन

    ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बरकरार, इंग्लैंड को हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार बना विमेंस टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन


    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए इंग्लैंड को 7 विकेट से हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार खिताब जीत लिया। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए मुकाबले में बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार बल्लेबाजी ने ऑस्ट्रेलिया को आसान जीत दिला दी। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया 2010, 2012, 2014, 2018, 2020 और 2023 में भी विश्व विजेता रह चुका है।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने महज 7 रन पर पहला विकेट गंवा दिया। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने पारी को संभालते हुए संयमित बल्लेबाजी की। उन्होंने फ्रेया कैंप के साथ अहम साझेदारी निभाई और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। साइवर-ब्रंट ने 53 गेंदों में 58 रन की नाबाद पारी खेली, जबकि फ्रेया कैंप ने 28 गेंदों पर 44 रन बनाकर इंग्लैंड का स्कोर 20 ओवर में 4 विकेट पर 150 रन तक पहुंचाया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, सोफी मोलिनेक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक विकेट लिया।

    151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी साधारण रही और जॉर्जिया वोल सिर्फ 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड ने दूसरे विकेट के लिए 100 रन की शानदार साझेदारी कर मैच पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया। लिचफील्ड ने 35 गेंदों में 48 रन बनाए, जबकि बेथ मूनी ने 49 गेंदों पर 64 रन की बेहतरीन पारी खेली। एलिस पेरी ने नाबाद 13 रन बनाकर टीम को 17.1 ओवर में जीत की मंजिल तक पहुंचा दिया।

    इंग्लैंड की ओर से शार्लेट डीन, लॉरेन बेल और सोफी एक्लेस्टोन को एक-एक विकेट मिला, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के सामने उनकी गेंदबाजी बेअसर साबित हुई।

    फाइनल में मैच जिताऊ पारी खेलने वाली बेथ मूनी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पूरे टूर्नामेंट में 7 मैचों में 238 रन बनाने और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी मिला।

    खिताबी जीत के बाद मूनी ने कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में आत्मविश्वास और निडर क्रिकेट खेली। उन्होंने कोचिंग स्टाफ, साथी खिलाड़ियों और कप्तान सोफी मोलिनेक्स की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि पूरी टीम ने एक-दूसरे का हर परिस्थिति में साथ दिया और इसी एकजुटता का परिणाम विश्व कप ट्रॉफी के रूप में मिला। कप्तान मोलिनेक्स के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनके शांत स्वभाव और बेहतर फैसलों ने टीम को पूरे अभियान में मजबूती दी।

    इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 विश्व कप में अपना दबदबा एक बार फिर साबित कर दिया और रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

  • विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026: मूनी के तूफान से ऑस्ट्रेलिया चैंपियन, 'प्लेयर ऑफ द मैच' और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' दोनों अवॉर्ड जीते

    विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026: मूनी के तूफान से ऑस्ट्रेलिया चैंपियन, 'प्लेयर ऑफ द मैच' और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' दोनों अवॉर्ड जीते


    नई दिल्ली । लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत की सबसे बड़ी नायिका सलामी बल्लेबाज बेथ मूनी रहीं, जिन्होंने शानदार अर्धशतक जड़ते हुए टीम को आसान जीत दिलाई। उनकी शानदार बल्लेबाजी के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ और पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया।

    इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 150 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ 17.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर छह विकेट से मुकाबला जीत लिया। ऑस्ट्रेलिया की जीत की नींव बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार साझेदारी ने रखी। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 67 गेंदों में 100 रन जोड़कर मैच पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया।

    बेथ मूनी ने 49 गेंदों पर 64 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 10 चौके शामिल रहे। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने सात मैचों में 238 रन बनाए और 47.60 की औसत से बल्लेबाजी की। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने फील्डिंग में भी पांच कैच लेकर अहम योगदान दिया। वह टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज रहीं।

    खिताबी जीत के बाद मूनी ने कहा कि यह टूर्नामेंट टीम के लिए लंबे समय से सबसे बड़ा लक्ष्य था और इस सफर का अंत विश्व कप जीत के साथ होना बेहद संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में टीम में कई बदलाव हुए, लेकिन खिलाड़ियों ने एक-दूसरे का पूरा साथ दिया और आत्मविश्वास के साथ क्रिकेट खेला। उनके मुताबिक टीम ने पूरे अभियान में निडर और सकारात्मक सोच के साथ प्रदर्शन किया।

    मूनी ने टीम के सपोर्ट स्टाफ और कोचिंग ग्रुप की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि लंबे दौरे और खिलाड़ियों की छोटी-मोटी चोटों के बावजूद पूरे स्टाफ ने बेहतरीन काम किया, जिसकी बदौलत फाइनल में ऑस्ट्रेलिया अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम के साथ उतर सका।

    ऑस्ट्रेलियाई कप्तान सोफी मोलिनक्स की नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए मूनी ने कहा कि वह बेहद शांत स्वभाव की कप्तान हैं और दबाव की परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखती हैं। उनके नेतृत्व में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और विश्व कप जीतकर उनके नेतृत्व को यादगार सम्मान दिया।

    इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर महिला टी20 क्रिकेट में अपना दबदबा कायम रखा, जबकि बेथ मूनी ने अपने दमदार प्रदर्शन से साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में वह टीम की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक हैं।

  • विंबलडन में बड़ा उलटफेर: ओसाका ने नंबर-1 सबालेंका को हराया, पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं

    विंबलडन में बड़ा उलटफेर: ओसाका ने नंबर-1 सबालेंका को हराया, पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं


    नई दिल्ली । विंबलडन 2026 में सोमवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। जापान की स्टार टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका ने दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका को सीधे सेटों में 6-2, 7-6 (7-2) से हराकर पहली बार विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। सेंटर कोर्ट पर खेला गया यह मुकाबला 1 घंटे 28 मिनट तक चला, जिसमें ओसाका ने शुरुआत से अंत तक दमदार प्रदर्शन किया।

    चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन ओसाका के लिए यह जीत बेहद खास रही। 2026 में दोनों खिलाड़ियों के बीच हुए तीनों मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, 2018 यूएस ओपन के बाद यह पहला अवसर है जब उन्होंने सबालेंका को मात दी है।

    ओसाका ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और सटीक सर्विस व तेज ग्राउंडस्ट्रोक्स के दम पर पहले सेट को आसानी से 6-2 से अपने नाम कर लिया। दूसरे सेट में सबालेंका ने जोरदार वापसी की और मुकाबले को टाई-ब्रेक तक पहुंचाया, लेकिन निर्णायक क्षणों में ओसाका ने शानदार नियंत्रण बनाए रखते हुए टाई-ब्रेक 7-2 से जीत लिया और मैच अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ ओसाका ने पहली बार विंबलडन के अंतिम-8 में प्रवेश किया। इससे पहले वह कभी भी इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सकी थीं। मां बनने के बाद उनकी यह उपलब्धि शानदार वापसी का बड़ा संकेत मानी जा रही है और अब उन्हें खिताब की प्रमुख दावेदारों में भी गिना जा रहा है।

    दूसरी ओर, सबालेंका का लगातार 14 ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल में पहुंचने का सिलसिला टूट गया। उनका यह रिकॉर्ड 2022 यूएस ओपन से चला आ रहा था। साथ ही, 2020 यूएस ओपन के बाद पहली बार उन्हें किसी ग्रैंड स्लैम मुकाबले में सीधे सेटों में हार का सामना करना पड़ा।

  • फीफा वर्ल्ड कप में सबसे बड़ा उलटफेर, नॉर्वे ने पांच बार की चैंपियन ब्राजील को हराकर रचा इतिहास

    फीफा वर्ल्ड कप में सबसे बड़ा उलटफेर, नॉर्वे ने पांच बार की चैंपियन ब्राजील को हराकर रचा इतिहास


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां नॉर्वे ने पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील को 2-1 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। न्यू जर्सी में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में एर्लिंग हालैंड ने दो शानदार गोल कर अपनी टीम को पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। दूसरी ओर ब्राजील के लिए नेमार का इंजरी टाइम में किया गया गोल केवल हार के अंतर को कम कर सका।

    मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने बेहद सतर्क अंदाज में की। पहले हाफ में दोनों पक्षों के डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन किया और किसी भी टीम को गोल करने का मौका नहीं दिया। हालांकि ब्राजील ने कई बार नॉर्वे के गोल पर हमला बोला, लेकिन हर बार गोलकीपर ओर्जन नायलैंड मजबूत दीवार बनकर सामने खड़े रहे।

    पहले हाफ के दौरान ब्राजील को वीएआर की मदद से पेनल्टी भी मिली। मैथियस कुन्हा पर हुए फाउल के बाद रेफरी ने पेनल्टी दी, लेकिन ब्रूनो गुइमारेस इस सुनहरे मौके को गोल में नहीं बदल सके। नायलैंड ने शानदार बचाव करते हुए पेनल्टी रोक ली। इसके अलावा उन्होंने गेब्रियल मार्टिनेली, विनीसियस जूनियर और अन्य ब्राजीली खिलाड़ियों के कई खतरनाक प्रयास भी विफल किए।

    दूसरे हाफ में ब्राजील ने आक्रामकता बढ़ाने के लिए बदलाव किए और युवा खिलाड़ी एंड्रिक को मैदान पर उतारा। 52वें मिनट में एंड्रिक के पास गोल करने का शानदार मौका भी आया, लेकिन वह उसे भुना नहीं सके। इसी चूक का फायदा नॉर्वे ने उठाया और धीरे-धीरे मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

    79वें मिनट में एर्लिंग हालैंड ने शानदार फिनिश के साथ नॉर्वे को 1-0 की बढ़त दिलाई। ब्राजील अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि 90वें मिनट में हालैंड ने अपना दूसरा गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल ने ब्राजील की वापसी की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया।

    इंजरी टाइम में ब्राजील को पेनल्टी मिली, जिस पर अनुभवी स्टार नेमार ने गोल कर स्कोर 2-1 जरूर किया, लेकिन तब तक मुकाबला नॉर्वे की मुट्ठी में जा चुका था। अंतिम सीटी बजते ही नॉर्वे के खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया, जबकि ब्राजील के खिलाड़ी मायूस नजर आए।

    इस जीत के साथ नॉर्वे ने अपने फुटबॉल इतिहास में पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया है। अब उसका मुकाबला 11 जुलाई को इंग्लैंड और मेक्सिको के बीच होने वाले मैच की विजेता टीम से होगा।

    ब्राजील के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई। टीम ने पूरे मैच में कई बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन खराब फिनिशिंग और नॉर्वे के गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन ने उसके विश्व कप अभियान का अंत कर दिया। दूसरी ओर एर्लिंग हालैंड ने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मुकाबलों में वह अपनी टीम के सबसे बड़े मैच विनर हैं।

  • ब्राजील के वर्ल्ड कप से बाहर होते ही नेमार ने कहा अलविदा, इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का किया ऐलान

    ब्राजील के वर्ल्ड कप से बाहर होते ही नेमार ने कहा अलविदा, इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का किया ऐलान


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील का सफर समाप्त होने के साथ ही विश्व फुटबॉल के एक सुनहरे अध्याय का भी अंत हो गया। स्टार फुटबॉलर नेमार जूनियर ने ब्राजील की हार के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। राउंड ऑफ 16 में नॉर्वे के हाथों 2-1 की हार के बाद भावुक नेमार ने कहा कि उन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ दिया और अब उनका अंतरराष्ट्रीय सफर समाप्त हो चुका है।

    34 वर्षीय नेमार ने मैच के बाद कहा कि उन्होंने हर संभव प्रयास किया लेकिन टीम को आगे नहीं ले जा सके। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत अमेरिका की धरती से की थी और अब उसी धरती पर अपने सफर का अंत कर रहे हैं। मैदान पर हार के बाद नेमार भावुक दिखाई दिए और साथी खिलाड़ियों के साथ उनकी आंखें भी नम नजर आईं।

    नॉर्वे के खिलाफ मुकाबले में नेमार शुरुआती एकादश का हिस्सा नहीं थे और उन्हें दूसरे हाफ में बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतारा गया। इंजरी टाइम में उन्होंने ब्राजील के लिए एकमात्र गोल दागा जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी गोल भी बन गया। हालांकि उनका यह प्रयास टीम को हार से नहीं बचा सका और ब्राजील टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    नेमार ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में ब्राजील के लिए 130 मुकाबले खेले और रिकॉर्ड 80 गोल किए। इसके अलावा उन्होंने 59 गोल में असिस्ट देकर भी टीम की कई यादगार जीत में अहम भूमिका निभाई। वह ब्राजील के इतिहास में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय गोल करने वाले खिलाड़ी बनकर अपने करियर का समापन कर रहे हैं।

    साल 2010 में ब्राजील के लिए पदार्पण करने वाले नेमार ने एक दशक से अधिक समय तक टीम की अगुआई की। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में ब्राजील को रजत पदक दिलाने में अहम योगदान दिया। इसके बाद 2016 रियो ओलंपिक में कप्तान के रूप में टीम को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाकर देश का सपना पूरा किया। वर्ष 2013 में फीफा कन्फेडरेशन कप जीतने में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा।

    हालांकि इस विश्व कप से पहले उनकी फिटनेस को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। चोटों से जूझने के बावजूद उन्होंने टीम के लिए खेलने का फैसला किया और पूरे टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। विश्व कप के दौरान उनके सोशल मीडिया संकेतों से भी उनके संन्यास की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब उन्होंने आधिकारिक मुहर लगा दी है।

    ब्राजील के खिलाफ नॉर्वे ने शानदार प्रदर्शन किया। एर्लिंग हालैंड ने दो गोल कर अपनी टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचाया। ब्राजील ने कई आसान मौके गंवाए, जिसमें एक पेनल्टी भी शामिल रही। आखिरकार नेमार का इंजरी टाइम में आया गोल केवल हार के अंतर को कम कर सका।

    नेमार के संन्यास के साथ ब्राजील फुटबॉल का एक यादगार दौर समाप्त हो गया। अपनी शानदार ड्रिब्लिंग, बेहतरीन गोल और नेतृत्व क्षमता के दम पर उन्होंने दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई। उनका नाम हमेशा ब्राजील के महानतम खिलाड़ियों में सम्मान के साथ लिया जाएगा।

  • क्रिस्टियानो रोनाल्डो का बड़ा ऐलान, फीफा वर्ल्ड कप 2026 होगा आखिरी विश्व कप, बोले- स्पेन के खिलाफ आखिरी मैच नहीं चाहता

    क्रिस्टियानो रोनाल्डो का बड़ा ऐलान, फीफा वर्ल्ड कप 2026 होगा आखिरी विश्व कप, बोले- स्पेन के खिलाफ आखिरी मैच नहीं चाहता


    नई दिल्ली । पुर्तगाल के महान फुटबॉलर और कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनके करियर का आखिरी विश्व कप होगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इसका मतलब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से तत्काल संन्यास नहीं है। रोनाल्डो ने कहा कि वह अभी भी देश के लिए खेलना चाहते हैं और उनके भविष्य का फैसला कोई और नहीं बल्कि वह स्वयं करेंगे।

    स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले से पहले मीडिया से बातचीत में 41 वर्षीय रोनाल्डो ने कहा कि यह उनका अंतिम विश्व कप है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि स्पेन के खिलाफ होने वाला मुकाबला उनके करियर का आखिरी मैच नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब तक उनका कोई भी विश्व कप खराब नहीं रहा है और इस टूर्नामेंट में भी वह तीन गोल कर चुके हैं। उनकी कोशिश होगी कि स्पेन के खिलाफ भी गोल कर टीम की जीत में योगदान दें।

    इस विश्व कप में रोनाल्डो शानदार लय में नजर आए हैं। ग्रुप चरण में उन्होंने उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो गोल किए थे जबकि राउंड ऑफ 32 में क्रोएशिया के खिलाफ पेनल्टी को गोल में बदलकर विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में अपना पहला गोल दर्ज किया। इसके साथ ही उन्होंने लगातार छह फीफा विश्व कप संस्करणों में गोल करने का अनोखा रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। विश्व कप इतिहास में उनके नाम अब 11 गोल दर्ज हो चुके हैं और वह लगातार छह विश्व कप में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।

    संन्यास को लेकर लगातार उठ रहे सवालों पर रोनाल्डो ने दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह कब तक खेलेंगे इसका फैसला सिर्फ वही करेंगे। उनका मानना है कि चाहे वह मैदान पर हों या नहीं उनकी राष्ट्रीय टीम में हमेशा एक अहम भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि स्पेन के खिलाफ मैच में वह पूरी ताकत से खेलेंगे क्योंकि फुटबॉल को उन्होंने अपना सब कुछ दिया है और हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे।

    रोनाल्डो का अंतरराष्ट्रीय करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने पुर्तगाल के लिए अब तक 232 मैच खेले हैं और रिकॉर्ड 146 अंतरराष्ट्रीय गोल किए हैं। उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने 2016 में पहली बार यूरो कप का खिताब जीता था। इसके अलावा 2019 और 2025 में यूईएफए नेशंस लीग जीतने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

    विश्व कप के माहौल को लेकर भी रोनाल्डो काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी पहचान दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का जुनून है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग देशों के प्रशंसकों से मिलकर उन्हें महसूस होता है कि फुटबॉल केवल एक खेल नहीं बल्कि भावनाओं को जोड़ने वाला माध्यम है। यही प्यार उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देता है।

    क्लब और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को मिलाकर रोनाल्डो अब तक 976 गोल कर चुके हैं और उनका अगला बड़ा लक्ष्य 1000 गोल का ऐतिहासिक आंकड़ा छूना है। ऐसे में भले ही यह उनका आखिरी विश्व कप हो लेकिन फुटबॉल प्रेमियों को अभी भी मैदान पर रोनाल्डो का जादू देखने को मिलता रहेगा।

  • श्रीलंका की बढ़त बरकरार, लेकिन होप-ग्रीव्स ने संभाली वेस्टइंडीज की पारी, तीसरे दिन कैरेबियाई टीम का दबदबा

    श्रीलंका की बढ़त बरकरार, लेकिन होप-ग्रीव्स ने संभाली वेस्टइंडीज की पारी, तीसरे दिन कैरेबियाई टीम का दबदबा


    नई दिल्ली । एंटिगुआ के विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन वेस्टइंडीज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले में दमदार वापसी की। श्रीलंका की पहली पारी के विशाल स्कोर के जवाब में कैरेबियाई बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज ने पहली पारी में चार विकेट के नुकसान पर 318 रन बना लिए और मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।

    तीसरे दिन वेस्टइंडीज ने 58 रन पर एक विकेट से आगे खेलना शुरू किया। जॉन कैंपबेल और केवम हॉज ने दूसरे विकेट के लिए 89 रन जोड़कर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को लंबे समय तक सफलता से दूर रखा और स्कोर को 100 रन के पार पहुंचाया। हालांकि 31 रन बनाकर हॉज प्रभात जयसूर्या का शिकार बने।

    इसके बाद पहले टेस्ट में दोहरा शतक लगाने वाले आमिर जंगू से बड़ी पारी की उम्मीद थी लेकिन वह इस बार केवल 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने से श्रीलंका ने वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन जॉन कैंपबेल ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने 154 गेंदों पर 72 रन की बेहतरीन पारी खेली जिसमें 9 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। उनकी पारी ने टीम को मजबूत आधार प्रदान किया।

    कैंपबेल के आउट होने के बाद शाई होप और जस्टिन ग्रीव्स ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और श्रीलंका को दिनभर कोई और सफलता हासिल नहीं करने दी। दोनों बल्लेबाजों ने धैर्य और शानदार तकनीक का परिचय देते हुए पांचवें विकेट के लिए 174 रन की नाबाद साझेदारी कर डाली। यह साझेदारी 324 गेंदों तक चली और श्रीलंका के गेंदबाज विकेट के लिए तरसते रहे।

    दिन का खेल समाप्त होने तक शाई होप 173 गेंदों पर 86 रन बनाकर नाबाद थे। उनकी पारी में 9 शानदार चौके शामिल रहे। दूसरी ओर जस्टिन ग्रीव्स भी 162 गेंदों पर 85 रन बनाकर क्रीज पर डटे रहे। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे दिन बड़ी साझेदारी जारी रखने के संकेत दिए हैं।

    हालांकि वेस्टइंडीज अभी भी श्रीलंका के पहली पारी के 549 रन के विशाल स्कोर से 231 रन पीछे है। श्रीलंका की ओर से तीसरे दिन असिथा फर्नांडो और प्रभात जयसूर्या ने दो-दो विकेट हासिल किए लेकिन होप और ग्रीव्स की मजबूत साझेदारी के सामने गेंदबाज ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सके।

    इससे पहले श्रीलंका ने अपनी पहली पारी 9 विकेट पर 549 रन बनाकर घोषित की थी। लाहिरू उदारा ने 188 रन की शानदार पारी खेली थी जबकि कामिंदु मेंडिस ने 84 रन, सोनल दिनुशा ने 92 रन और कुशल मेंडिस ने 69 रन का योगदान दिया था। अब चौथे दिन की शुरुआत में वेस्टइंडीज की कोशिश श्रीलंका की बढ़त को कम करने और मैच में बराबरी हासिल करने की होगी।

  • इंग्लैंड ने मेक्सिको को हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह, जूड बेलिंगहम के डबल धमाके से 3-2 की रोमांचक जीत

    इंग्लैंड ने मेक्सिको को हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह, जूड बेलिंगहम के डबल धमाके से 3-2 की रोमांचक जीत


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड ने शानदार जुझारूपन दिखाते हुए मेक्सिको को 3-2 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। रोमांच से भरपूर इस मुकाबले में इंग्लैंड ने एक समय दो गोल की बढ़त बनाई और बाद में एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद मेक्सिको की जोरदार चुनौती को नाकाम कर दिया। इस हार के साथ मेक्सिको का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया, जबकि इंग्लैंड ने अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की कर ली।

    खराब मौसम के कारण देर से शुरू हुए मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। लगातार हमलों के बीच इंग्लैंड को पहली सफलता 36वें मिनट में मिली जब जूड बेलिंगहम ने शानदार गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके महज 98 सेकंड बाद बेलिंगहम ने एक और गोल दागकर इंग्लैंड की बढ़त 2-0 कर दी और मेक्सिको पर दबाव बढ़ा दिया।

    हालांकि मेक्सिको ने भी हार नहीं मानी। 42वें मिनट में क्विनोन्स ने गोल कर टीम को मुकाबले में वापस ला दिया। पहले हाफ की समाप्ति तक इंग्लैंड 2-1 से आगे था और मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ नजर आ रहा था।

    दूसरे हाफ की शुरुआत में इंग्लैंड को बड़ा झटका लगा जब डिफेंडर जारेल क्वान्सा को खतरनाक टैकल के कारण रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बाद इंग्लैंड को लगभग पूरा दूसरा हाफ केवल 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। बावजूद इसके टीम ने संयम बनाए रखा और आक्रामक रवैया नहीं छोड़ा।

    60वें मिनट में इंग्लैंड को पेनल्टी मिली जब मेक्सिको के गोलकीपर राउल रेंजल ने एंथनी गॉर्डन को पेनल्टी बॉक्स में गिरा दिया। कप्तान हैरी केन ने इस मौके को भुनाते हुए गेंद को गोल में पहुंचाया और टूर्नामेंट में अपना छठा गोल करते हुए इंग्लैंड की बढ़त 3-1 कर दी।

    इसके बाद 69वें मिनट में वीएआर समीक्षा के बाद मेक्सिको को भी पेनल्टी मिली। राउल जिमिनेज ने बिना कोई गलती किए गोल दागकर अंतर 3-2 कर दिया। अंतिम 20 मिनटों में मेक्सिको ने बराबरी के लिए लगातार हमले किए लेकिन इंग्लैंड का रक्षात्मक प्रदर्शन और गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड के शानदार बचाव उसकी उम्मीदों पर भारी पड़े।

    मैच के आखिरी क्षणों में पिकफोर्ड ने कई महत्वपूर्ण सेव कर इंग्लैंड की बढ़त बरकरार रखी और टीम को क्वार्टर फाइनल का टिकट दिला दिया। अब इंग्लैंड का अगला मुकाबला 12 जुलाई को नॉर्वे के खिलाफ होगा, जहां उसकी नजर सेमीफाइनल में जगह बनाने पर रहेगी।