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  • इंग्लैंड ने मैनचेस्टर में रचा इतिहास, भारत के खिलाफ सबसे बड़े लक्ष्य का किया सफल पीछा

    इंग्लैंड ने मैनचेस्टर में रचा इतिहास, भारत के खिलाफ सबसे बड़े लक्ष्य का किया सफल पीछा


    नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट से जीत दर्ज की। 191 रन के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लिश टीम ने 19 ओवर में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया और भारत के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे बड़े लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करने का नया रिकॉर्ड बना दिया।

    मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर इंग्लैंड ने 14 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इससे पहले वर्ष 2012 में इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 178 रन का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया था। इस जीत के साथ ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड की लगातार चौथी टी20 जीत भी दर्ज हुई।

    हालांकि लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने पहले ही ओवर में फिल साल्ट को बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया। इसके बाद जोस बटलर भी शून्य पर आउट हो गए। महज एक रन पर दो विकेट गंवाने के बाद इंग्लैंड मुश्किल में दिखाई दे रहा था।

    ऐसे समय में कप्तान हैरी ब्रूक और जैकब बेथेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए केवल 23 गेंदों में 50 रन जोड़कर मैच का रुख बदल दिया। ब्रूक ने सिर्फ 15 गेंदों में चार चौकों और तीन छक्कों की मदद से 39 रन की विस्फोटक पारी खेली।

    इसके बाद जैकब बेथेल ने जिम्मेदारी संभालते हुए नाबाद 76 रन बनाए। उन्होंने 46 गेंदों की अपनी शानदार पारी में पांच चौके और पांच छक्के लगाए तथा करीब 165 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। टॉम बैंटन ने भी 32 गेंदों में 39 रन बनाकर अहम योगदान दिया। अंत में जोफ्रा आर्चर 10 रन बनाकर नाबाद लौटे और टीम को जीत दिलाई।

    इससे पहले भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 190 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। अभिषेक शर्मा ने 43 रन की तेज पारी खेली जबकि ईशान किशन 49 रन बनाकर अर्धशतक से एक रन दूर रह गए। कप्तान श्रेयस अय्यर ने 37 रन का उपयोगी योगदान दिया।

    मिडिल और डेथ ओवरों में तिलक वर्मा ने सिर्फ 11 गेंदों में नाबाद 24 रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। वहीं महज 15 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले वैभव सूर्यवंशी ने 14 रन बनाकर अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई।

    हालांकि भारतीय गेंदबाज इस बड़े स्कोर का बचाव नहीं कर सके और इंग्लैंड ने आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर लक्ष्य हासिल करते हुए रिकॉर्ड जीत दर्ज कर ली। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने सीरीज में जोरदार वापसी की और मुकाबले को रोमांचक बना दिया।

  • एम्बाप्पे का जादू बरकरार, पैराग्वे पर जीत के साथ फ्रांस अंतिम आठ में, अब मोरक्को से भिड़ंत

    एम्बाप्पे का जादू बरकरार, पैराग्वे पर जीत के साथ फ्रांस अंतिम आठ में, अब मोरक्को से भिड़ंत


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने अपने चैंपियन अंदाज का शानदार प्रदर्शन करते हुए राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में पैराग्वे को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। फिलाडेल्फिया में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे ने पेनल्टी पर मैच का एकमात्र गोल दागकर टीम को जीत दिलाई। इस जीत के साथ फ्रांस अब अंतिम आठ में मोरक्को का सामना करेगा।

    मुकाबले की शुरुआत से ही फ्रांस ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार आक्रमण किए लेकिन पैराग्वे की अनुशासित रक्षापंक्ति ने पहले हाफ में उसे कोई स्पष्ट मौका नहीं दिया। फ्रांस के अधिकांश प्रयास दूर से लगाए गए शॉट तक सीमित रहे जिन्हें पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार ढंग से रोक दिया। मजबूत डिफेंस के दम पर पैराग्वे ने पहले हाफ में फ्रांस को गोल करने से रोके रखा।

    दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी गति और आक्रामकता बढ़ा दी। ओस्मान डेम्बेले ने कॉर्नर से बने मौके पर गोल करने की कोशिश की लेकिन गेंद साइड नेटिंग में चली गई। इसके बाद मनु कोने के लंबी दूरी के शक्तिशाली शॉट को भी ऑरलैंडो गिल ने बेहतरीन डाइव लगाकर बचा लिया।

    लगातार बढ़ते दबाव के बीच 69वें मिनट में फ्रांस को निर्णायक मौका मिला। डिजायर डूए को पेनल्टी बॉक्स के भीतर फाउल किए जाने पर रेफरी ने पेनल्टी दे दी। किलियन एम्बाप्पे ने बिना किसी गलती के गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद फ्रांस ने संयमित खेल दिखाते हुए यह बढ़त अंत तक कायम रखी और क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया।

    एम्बाप्पे के लिए यह मुकाबला कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। उन्होंने इस विश्व कप में अपना सातवां गोल दागा और गोल्डन बूट की दौड़ में अपनी दावेदारी और मजबूत कर ली। इसके अलावा विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में यह उनका 11वां गोल रहा। वह लगातार तीन अलग-अलग विश्व कप के राउंड ऑफ 16 मुकाबलों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए।

    मैच के बाद एम्बाप्पे ने कहा कि टीम को पहले से अंदाजा था कि पैराग्वे के खिलाफ मुकाबला आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस मैच ने साबित किया कि फ्रांस केवल आक्रामक फुटबॉल खेलने वाली टीम नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी जीत हासिल करना जानती है। उन्होंने कहा कि अब पूरी टीम का ध्यान क्वार्टर फाइनल में मोरक्को के खिलाफ होने वाले मुकाबले पर है क्योंकि मोरक्को एक बेहद मजबूत और संतुलित टीम है।

    अब फुटबॉल प्रेमियों की नजरें क्वार्टर फाइनल पर होंगी जहां फ्रांस और मोरक्को के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। दोनों टीमों ने राउंड ऑफ 16 में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है और सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: मोरक्को का दमदार प्रदर्शन, कनाडा को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: मोरक्को का दमदार प्रदर्शन, कनाडा को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मोरक्को ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में सह-मेजबान कनाडा को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। ह्यूस्टन में खेले गए इस मुकाबले में पहले हाफ तक दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला लेकिन दूसरे हाफ में मोरक्को ने आक्रामक खेल दिखाते हुए लगातार तीन गोल दागकर मुकाबले को पूरी तरह अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ कनाडा का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

    मुकाबले की शुरुआत कनाडा ने बेहद आक्रामक अंदाज में की। शुरुआती मिनटों में जोनाथन डेविड और तानी ओलुवासेई ने गोल करने के अच्छे मौके बनाए लेकिन मोरक्को के अनुभवी गोलकीपर यासीन बौनू ने शानदार बचाव करते हुए टीम को शुरुआती झटके से बचा लिया। पहले 45 मिनट तक दोनों टीमों ने जोरदार संघर्ष किया लेकिन कोई भी गोल नहीं हो सका।

    पहले हाफ के दौरान मुकाबला काफी तनावपूर्ण भी रहा। खिलाड़ियों के बीच कई बार तीखी भिड़ंत देखने को मिली और रेफरी ने कुल सात येलो कार्ड दिखाए। 40वें मिनट में मोरक्को के कप्तान अचरफ हकीमी और कनाडा के रिची लारिया के बीच धक्का-मुक्की से मैदान का माहौल भी गर्मा गया लेकिन दोनों टीमों ने संयम बनाए रखा।

    दूसरे हाफ की शुरुआत के साथ ही मोरक्को ने अपनी रणनीति बदली और इसका फायदा भी तुरंत मिला। 50वें मिनट में अचरफ हकीमी की फ्री किक पर अजेदीन ओनाही ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया और मोरक्को को 1-0 की बढ़त दिला दी।

    गोल खाने के बाद कनाडा ने बराबरी के लिए लगातार हमले किए लेकिन मोरक्को की मजबूत रक्षापंक्ति और यासीन बौनू की शानदार गोलकीपिंग के सामने उसके अधिकांश प्रयास नाकाम रहे। पूरे मैच में कनाडा के केवल तीन शॉट ही गोलपोस्ट तक पहुंच सके।

    मुकाबले के अंतिम चरण में मोरक्को ने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। 82वें मिनट में अजेदीन ओनाही ने अपना दूसरा गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया। इसके बाद इंजरी टाइम में सौफियाने रहीमी ने शानदार फिनिश के साथ तीसरा गोल करते हुए मोरक्को की 3-0 की यादगार जीत पर मुहर लगा दी।

    इस जीत के साथ मोरक्को अब क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया है जहां उसका मुकाबला पैराग्वे और फ्रांस के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से होगा। वहीं सह-मेजबान कनाडा भले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गया लेकिन उसने अपने घरेलू विश्व कप में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। कनाडा ने पहली बार विश्व कप में अंक अर्जित किए पहली जीत दर्ज की और पहली बार नॉकआउट चरण तक पहुंचकर अपने फुटबॉल इतिहास में नया अध्याय जोड़ा।

  • टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्षर पटेल का ऐतिहासिक धमाका, 100 विकेट का आंकड़ा छूने वाले भारत के पहले स्पिनर बनकर रचा नया कीर्तिमान

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अक्षर पटेल का ऐतिहासिक धमाका, 100 विकेट का आंकड़ा छूने वाले भारत के पहले स्पिनर बनकर रचा नया कीर्तिमान

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पटल पर अपनी फिरकी का लोहा मनवाते हुए एक बेहद ऐतिहासिक और दुर्लभ उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अक्षर पटेल ने यह विशेष मुकाम हासिल किया। उन्होंने इस मुकाबले में कसी हुई गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान हैरी ब्रूक का महत्वपूर्ण विकेट चटकाया। इस विकेट को हासिल करने के साथ ही अक्षर पटेल के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 विकेट पूरे हो गए हैं, जिसने उन्हें एक बेहद खास और विशिष्ट क्लब में शामिल कर दिया है।

    अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर से गुजर रहे 32 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल अब भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 100 विकेट का जादुई आंकड़ा छूने वाले चौथे गेंदबाज बन गए हैं। इस रिकॉर्ड की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह यह मुकाम हासिल करने वाले भारत के इतिहास के पहले स्पिन गेंदबाज हैं। उनसे पहले भारत के लिए यह उपलब्धि केवल तीन तेज गेंदबाजों ने ही हासिल की थी, जिसमें अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या का नाम शामिल है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में अब तक कई महान स्पिनरों ने टी20 प्रारूप में देश का प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन कोई भी इस प्रतिष्ठित आंकड़े तक नहीं पहुंच सका था, जिससे अक्षर की यह सफलता और अधिक मायने रखती है।

    अक्षर पटेल ने इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को छूने के लिए कुल 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। मैनचेस्टर टी20 मैच के पांचवें ओवर में जब उन्होंने हैरी ब्रूक को अपना शिकार बनाया, तो उन्होंने न केवल मैच में भारत की स्थिति मजबूत की बल्कि अपना नाम भी इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज करा दिया। भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अर्शदीप सिंह 134 विकेटों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह 121 विकेट और हार्दिक पंड्या 114 विकेट के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं। स्पिन गेंदबाजों की बात करें, तो अक्षर के बाद युजवेंद्र चहल इस सूची में सबसे करीब हैं, जिनके नाम 80 मैचों में 96 विकेट दर्ज हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में अक्षर पटेल ने अपनी कसी हुई गेंदबाजी और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर खुद को सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद और उपयोगी खिलाड़ियों में स्थापित किया है। मैच की शुरुआत में नई गेंद से गेंदबाजी करनी हो या फिर बीच के ओवरों में रनों की गति पर अंकुश लगाना हो, भारतीय कप्तान हर मुश्किल परिस्थिति में अक्सर अक्षर पटेल की ओर ही देखते हैं। उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विकेट के चारों ओर गेंद को टर्न कराने की कला और अत्यधिक दबाव वाले क्षणों में शांत रहकर विकेट निकालने की असाधारण क्षमता उन्हें समकालीन क्रिकेट में अन्य स्पिनरों से काफी अलग बनाती है।

    केवल गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि अक्षर पटेल ने निचले क्रम में आकर कई महत्वपूर्ण अवसरों पर बल्ले से भी टीम इंडिया के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है और मैच जिताऊ पारियां खेली हैं। यही कारण है कि आज वह क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारतीय राष्ट्रीय टीम का एक अनिवार्य और अटूट हिस्सा बन चुके हैं। 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेटों का आंकड़ा पार करना किसी भी आधुनिक गेंदबाज के करियर की एक महान व्यक्तिगत बानगी माना जाता है। खेल के प्रति उनके समर्पण और निरंतरता को देखते हुए क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि यदि उनका यह शानदार प्रदर्शन आगामी मैचों में भी इसी तरह जारी रहा, तो वह जल्द ही भारत के लिए इस प्रारूप में सबसे सफल गेंदबाज बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेंगे।

  • विराट कोहली, रोहित शर्मा और अभिषेक शर्मा भी नहीं कर सके थे जो कमाल, युवा वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 डेब्यू मैच में दो छक्के जड़कर रचा वह इतिहास

    विराट कोहली, रोहित शर्मा और अभिषेक शर्मा भी नहीं कर सके थे जो कमाल, युवा वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 डेब्यू मैच में दो छक्के जड़कर रचा वह इतिहास

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के युवा और उभरते हुए बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पटल पर कदम रखते ही एक ऐसा अनोखा कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है, जिसे विराट कोहली, रोहित शर्मा और अभिषेक शर्मा जैसे दिग्गज और आक्रामक बल्लेबाज भी अपने पदार्पण मैच में हासिल नहीं कर पाए थे। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी के बहुप्रतीक्षित डेब्यू का इंतजार आखिरकार समाप्त हुआ, जहां टीम के उप-कप्तान तिलक वर्मा ने उन्हें मैच से पूर्व डेब्यू कैप सौंपी। अपने इस पहले ही मुकाबले में वैभव ने अपनी बल्लेबाजी की आक्रामकता और निडरता का परिचय देते हुए इतिहास की किताबों में अपना नाम दर्ज करा लिया।

    अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में वैभव सूर्यवंशी हालांकि केवल 14 रन ही बना सके, लेकिन इस संक्षिप्त पारी के दौरान उन्होंने दो गगनचुंबी छक्के जड़े। उन्होंने मैच का पहला छक्का इंग्लैंड के सबसे तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की गति का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए फाइन लेग की दिशा में लगाया। इसके बाद चौथे ओवर की पहली गेंद पर उन्होंने तेज गेंदबाज जोश टंग की धीमी गति की गेंद को भांपते हुए मिड विकेट की दिशा में एक और शानदार छक्का जड़ा। इन दो छक्कों की मदद से वह भारत के उन गिने-चुने बल्लेबाजों की विशिष्ट सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू मैच में एक से अधिक छक्के लगाने का कारनामा किया है।

    वैभव सूर्यवंशी अब भारत के छठे ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने अपने टी20 पदार्पण मैच में एक से ज्यादा छक्के लगाए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस ऐतिहासिक सूची में पूर्व दिग्गज खिलाड़ी राहुल द्रविड़ और तेज गेंदबाज आशीष नेहरा जैसे नाम भी शामिल हैं। ‘द वॉल’ के नाम से प्रसिद्ध राहुल द्रविड़ ने भारत के लिए अपने एकमात्र टी20 मैच में इंग्लैंड के खिलाफ ही 21 गेंदों पर 31 रनों की पारी खेली थी, जिसमें उन्होंने तीन छक्के लगाए थे। वर्तमान भारतीय टीम के स्क्वॉड की बात करें, तो वैभव के अलावा केवल तिलक वर्मा और ईशान किशन ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने डेब्यू मैच में यह कारनामा किया था। तिलक वर्मा ने साल 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने डेब्यू पर तीन छक्के लगाए थे, जबकि ईशान किशन ने साल 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ चार छक्के जड़े थे।

    इस व्यक्तिगत उपलब्धि के बावजूद, मैनचेस्टर में खेले गए इस दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बोर्ड पर 190 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया था। हालांकि, मेजबान इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने इस बड़े लक्ष्य को 19वें ओवर में केवल चार विकेट खोकर हासिल कर लिया। इंग्लैंड की इस जीत के सूत्रधार जैकब बेथल रहे, जिन्होंने 76 रनों की नाबाद और मैच जिताऊ पारी खेली, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के पुरस्कार से भी नवाजा गया। इस हार के बाद भी वैभव सूर्यवंशी का यह निर्भीक प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

  • एंटीगुआ टेस्ट के पहले दिन श्रीलंका का दबदबा लाहिरू उदारा की शानदार बल्लेबाजी से वेस्टइंडीज बैकफुट पर

    एंटीगुआ टेस्ट के पहले दिन श्रीलंका का दबदबा लाहिरू उदारा की शानदार बल्लेबाजी से वेस्टइंडीज बैकफुट पर


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज और श्रीलंका के बीच एंटीगुआ के सर विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन श्रीलंका ने दमदार बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली। शुरुआती झटकों के बावजूद लाहिरू उदारा और कामिंदु मेंडिस ने शानदार साझेदारी कर मेहमान टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दिन का खेल पूरी तरह श्रीलंका के नाम रहा और वेस्टइंडीज के गेंदबाज लंबे समय तक विकेट के लिए संघर्ष करते नजर आए।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज निशान मदुष्का केवल 6 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद अनुभवी बल्लेबाज दिनेश चांदीमल भी महज एक रन बनाकर शेमार जोसेफ का शिकार बने। शुरुआती दो विकेट जल्दी गिरने के बाद ऐसा लगा कि वेस्टइंडीज मैच पर पकड़ बना लेगा लेकिन लाहिरू उदारा और कामिंदु मेंडिस ने शानदार संयम और आक्रामकता का परिचय देते हुए पारी को संभाल लिया।

    दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए 252 गेंदों में 215 रन की बेहतरीन साझेदारी की और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को लंबे समय तक कोई सफलता नहीं मिलने दी। कामिंदु मेंडिस ने 120 गेंदों में 84 रन की शानदार पारी खेली जिसमें 11 चौके शामिल रहे। हालांकि वह अपने शतक से चूक गए लेकिन टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही।

    दिन के सबसे बड़े नायक लाहिरू उदारा रहे जिन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 248 गेंदों में 188 रन बनाए। अपनी यादगार पारी में उन्होंने 21 चौके और 5 छक्के लगाए। वह दोहरे शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे लेकिन 188 रन पर आउट होकर बड़ी उपलब्धि से चूक गए। इसके बावजूद उनकी यह पारी श्रीलंका के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई और उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह बेअसर कर दिया।

    कप्तान धनंजय डी सिल्वा अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद बड़ी पारी नहीं खेल सके और 90 गेंदों में 33 रन बनाकर आउट हो गए। पहले दिन का खेल समाप्त होने तक कुशल मेंडिस बिना खाता खोले और सोनल दिनुशा 5 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। श्रीलंका मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है और दूसरे दिन टीम बड़ी बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी।

    वेस्टइंडीज की ओर से शेमार जोसेफ ने सबसे प्रभावी गेंदबाजी करते हुए दो विकेट हासिल किए जबकि जस्टिन ग्रीव्स और जायडेन सील्स को एक-एक सफलता मिली। हालांकि मेजबान टीम के गेंदबाज पूरे दिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके।

    पहले टेस्ट में हार और कुछ खिलाड़ियों की चोट के बाद श्रीलंका ने दूसरे टेस्ट के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में तीन बदलाव किए। प्रभात जयसूर्या लाहिरू उदारा और इसिथा विजेसुंडेरा को अंतिम एकादश में शामिल किया गया। इसिथा ने इस मुकाबले से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया जबकि पथुम निसांका और लाहिरू कुमारा चोट के कारण टीम से बाहर रहे। खराब प्रदर्शन के चलते कसुन रजिथा को भी अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली।

  • बांग्लादेश से वनडे जंग के लिए तैयार जिम्बाब्वे नगारवा को कप्तानी इनोसेंट काइया और सिकंदर रजा पर बड़ी जिम्मेदारी

    बांग्लादेश से वनडे जंग के लिए तैयार जिम्बाब्वे नगारवा को कप्तानी इनोसेंट काइया और सिकंदर रजा पर बड़ी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड ने 15 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस बार टीम की कमान पहली बार तेज गेंदबाज रिचर्ड नगारवा को सौंपी गई है। यह उनके करियर का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है और अब उनकी अगुआई में जिम्बाब्वे मजबूत शुरुआत करने के इरादे से मैदान में उतरेगा।

    दोनों टीमों के बीच वनडे सीरीज की शुरुआत 6 जुलाई से होगी जबकि दूसरा मुकाबला 9 जुलाई और तीसरा व अंतिम मैच 11 जुलाई को खेला जाएगा। तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित होंगे जहां घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश जिम्बाब्वे करेगा।

    टीम में हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में शानदार शतक लगाने वाले इनोसेंट काइया की वापसी हुई है। काइया ने उस मुकाबले में 140 रन की बेहतरीन पारी खेलकर चयनकर्ताओं का भरोसा फिर से जीत लिया। उनके अलावा बेन कुरेन और ब्रायन बेनेट को भी वनडे टीम में शामिल किया गया है जिससे बल्लेबाजी क्रम और मजबूत नजर आ रहा है।

    जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी की जिम्मेदारी अनुभवी क्रेग एर्विन और हरफनमौला खिलाड़ी सिकंदर रजा पर भी रहेगी। दोनों खिलाड़ी लंबे समय से टीम की रीढ़ बने हुए हैं और उनसे एक बार फिर बड़ी पारियों की उम्मीद होगी।

    गेंदबाजी विभाग में ब्लेसिंग मुजारबानी टीम के सबसे अहम हथियार होंगे। उनके साथ ब्रैड इवांस न्यूमैन न्यामहुरी और अर्नेस्ट मसुकु तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती देंगे। वहीं स्पिन विभाग की जिम्मेदारी रयान बर्ल वेस्ली मधेवेरे और वेलिंगटन मसाकाद्जा संभालेंगे। विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी तदिवानाशे मारुमानी और क्लाइव मडांडे को सौंपी गई है।

    हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में जिम्बाब्वे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक पारी और 85 रन से जीत दर्ज की थी। उस मुकाबले में इनोसेंट काइया के शतक के अलावा क्रेग एर्विन ने 60 रन ब्रायन बेनेट ने 59 रन और वेस्ली मधेवेरे ने नाबाद 77 रन बनाए थे। गेंदबाजी में ब्लेसिंग मुजारबानी ने दोनों पारियों में कुल छह विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

    यह सीरीज जिम्बाब्वे के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले वर्ष अगस्त में श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने के बाद टीम पहली बार इस प्रारूप में मैदान पर उतरेगी। नई कप्तानी और संतुलित टीम के साथ जिम्बाब्वे की नजर घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए सीरीज अपने नाम करने पर होगी।

    जिम्बाब्वे की वनडे टीम
    रिचर्ड नगारवा कप्तान ब्रायन बेनेट रयान बर्ल बेन कुरेन क्रेग एर्विन ब्रैड इवांस इनोसेंट काइया क्लाइव मडांडे वेस्ली मधेवेरे तदिवानाशे मारुमानी वेलिंगटन मसाकाद्जा अर्नेस्ट मसुकु ब्लेसिंग मुजारबानी न्यूमैन न्यामहुरी और सिकंदर रजा।

  • फीफा वर्ल्ड कप में कोलंबिया का अजेय अभियान जारी घाना को हराकर अब स्विट्जरलैंड से होगी टक्कर

    फीफा वर्ल्ड कप में कोलंबिया का अजेय अभियान जारी घाना को हराकर अब स्विट्जरलैंड से होगी टक्कर


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में कोलंबिया का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। टीम ने राउंड ऑफ 32 मुकाबले में घाना को 1-0 से हराकर न केवल अपनी अजेय लय बरकरार रखी बल्कि अंतिम 16 में भी जगह पक्की कर ली। कैनसस सिटी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में कोलंबिया ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मैच के दौरान घाना पर दबाव बनाए रखा।

    मैच की शुरुआत से ही कोलंबियाई खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण रखते हुए लगातार आक्रमण किए। इसका फायदा टीम को 14वें मिनट में मिला जब लुइस जेवियर सुआरेज के शानदार पास पर जॉन एरियास ने बेहतरीन गोल दागकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। यह गोल अंत तक निर्णायक साबित हुआ और कोलंबिया की जीत की मजबूत नींव बन गया।

    पहले हाफ में कोलंबिया के पास बढ़त को दोगुना करने के कई अवसर आए। स्टार खिलाड़ी लुइस डियाज ने बॉक्स के भीतर से शानदार शॉट लगाया लेकिन गेंद लक्ष्य से बाहर निकल गई। इसके बाद जोहान मोजिका के हेडर को घाना के गोलकीपर लॉरेंस अती जिगी ने शानदार बचाव करते हुए गोल में जाने से रोक दिया। दूसरी ओर घाना ने भी कुछ जवाबी हमले किए लेकिन कोलंबिया की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उसके प्रयास सफल नहीं हो सके।

    दूसरे हाफ में भी कोलंबिया का दबदबा कायम रहा। 56वें मिनट में लुइस डियाज ने गेंद को गोलपोस्ट के भीतर पहुंचाया लेकिन वीडियो समीक्षा के बाद उन्हें ऑफसाइड करार दिया गया और गोल रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद कोलंबियाई टीम ने लगातार आक्रमण जारी रखे और घाना को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया।

    घाना की टीम पूरे मुकाबले में संघर्ष करती नजर आई। कोलंबिया के सशक्त डिफेंस और मिडफील्ड ने उसे खुलकर खेलने का अवसर ही नहीं दिया। यही वजह रही कि पूरे मैच के दौरान घाना का एक भी शॉट गोलपोस्ट के निशाने पर नहीं लग सका। अंतिम मिनटों में कोलंबिया ने संतुलित रणनीति अपनाते हुए अपनी बढ़त को सुरक्षित रखा और घाना की हर कोशिश को नाकाम कर दिया।

    इस जीत के साथ कोलंबिया ने अंतिम 16 में जगह बना ली है जहां उसका मुकाबला 8 जुलाई को वैंकूवर में स्विट्जरलैंड से होगा। स्विट्जरलैंड ने अपने पिछले मुकाबले में अल्जीरिया को 2-0 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया था। अब दोनों मजबूत टीमों के बीच होने वाला मुकाबला विश्व कप के सबसे रोमांचक मैचों में से एक माना जा रहा है।

  • रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में माराडोना का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ फिर चमके अर्जेंटीना के कप्तान

    रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में माराडोना का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ फिर चमके अर्जेंटीना के कप्तान


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी लगातार नए इतिहास रच रहे हैं। काबो वर्डे के खिलाफ खेले गए राउंड ऑफ 32 मुकाबले में मेसी ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम करते हुए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना का वर्षों पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

    इस मुकाबले में मेसी ने अपना नौवां विश्व कप असिस्ट दर्ज किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड डिएगो माराडोना के नाम था जिन्होंने अपने विश्व कप करियर में आठ असिस्ट किए थे। मेसी अब नौ असिस्ट के साथ इस सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं और एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ गोल करने वाले खिलाड़ी ही नहीं बल्कि अपनी टीम के लिए मौके तैयार करने में भी सबसे आगे हैं।

    मेसी ने काबो वर्डे के खिलाफ मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 29वें मिनट में अर्जेंटीना के लिए पहला गोल भी दागा। लिसेंड्रो मार्टिनेज के बेहतरीन पास को उन्होंने शानदार तरीके से गोल में बदलकर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। यह विश्व कप में उनके करियर का 20वां गोल भी रहा। इस उपलब्धि के साथ वह पहले ही विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी के रूप में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

    मेसी ने इस टूर्नामेंट में एक और खास उपलब्धि भी हासिल की। वह फीफा विश्व कप इतिहास के पहले खिलाड़ी बन गए जिन्होंने लगातार आठ मुकाबलों में गोल करने का रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा वह दो अलग अलग विश्व कप संस्करणों में सात सात गोल करने वाले पहले फुटबॉलर भी बन चुके हैं। विश्व कप 2026 में भी वह सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं जबकि फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे छह गोल के साथ उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी हैं।

    काबो वर्डे के खिलाफ मुकाबला अर्जेंटीना के लिए आसान नहीं रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर थीं और मैच अतिरिक्त समय में पहुंच गया। अतिरिक्त समय में मेसी के एक आक्रमण को रोकने की कोशिश में काबो वर्डे के खिलाड़ी डिने बोर्गस से आत्मघाती गोल हो गया जिसने मुकाबले का रुख बदल दिया। इसी गोल की बदौलत अर्जेंटीना ने रोमांचक मुकाबला 3-2 से जीतकर अगले दौर में जगह बनाई।

    विश्व फुटबॉल में लियोनेल मेसी का यह शानदार प्रदर्शन एक बार फिर उनकी महानता की पुष्टि करता है। लगातार रिकॉर्ड तोड़ते हुए वह न केवल अर्जेंटीना बल्कि विश्व फुटबॉल के इतिहास में अपने नाम को और अधिक सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा रहे हैं।

  • दूसरे टी20 में भी बारिश बन सकती है विलेन भारत इंग्लैंड मुकाबले पर मौसम की टेढ़ी नजर

    दूसरे टी20 में भी बारिश बन सकती है विलेन भारत इंग्लैंड मुकाबले पर मौसम की टेढ़ी नजर


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार को मैनचेस्टर के ऐतिहासिक ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाएगा लेकिन मुकाबले से पहले सबसे बड़ी चिंता मौसम को लेकर बनी हुई है। पहले टी20 मैच में बारिश के कारण इंग्लैंड की पारी शुरू ही नहीं हो सकी थी और मुकाबला रद्द करना पड़ा था। अब दूसरे मैच पर भी बारिश का खतरा मंडरा रहा है जिससे क्रिकेट प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है।

    मौसम पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार को मैनचेस्टर में पूरे दिन बादल छाए रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक दिन में बारिश की संभावना करीब 57 प्रतिशत है जबकि मैच के दौरान भी वर्षा होने के करीब 55 प्रतिशत आसार बताए गए हैं। शाम के समय लगभग दो घंटे तक बारिश होने का अनुमान है। ऐसे में यदि मौसम ने साथ नहीं दिया तो लगातार दूसरा मुकाबला भी प्रभावित हो सकता है।

    हालांकि भारतीय टीम चाहेगी कि इस बार पूरा मैच खेला जाए ताकि पहले मुकाबले में दिखाई गई शानदार बल्लेबाजी का फायदा उठाया जा सके। पहले टी20 में भारतीय बल्लेबाजों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 20 ओवर में सात विकेट पर 189 रन बनाए थे। युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने विस्फोटक अंदाज में सिर्फ 24 गेंदों पर 59 रन की शानदार पारी खेली थी। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी जिम्मेदारी निभाते हुए 47 गेंदों में 68 रन बनाए और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    मध्यक्रम में शिवम दुबे ने भी शानदार फिनिशिंग करते हुए 21 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए। हालांकि संजू सैमसन सिर्फ एक रन बनाकर आउट हो गए जबकि ईशान किशन खाता भी नहीं खोल सके। तिलक वर्मा भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाजों ने बड़ा स्कोर खड़ा किया था लेकिन लगातार बारिश के कारण इंग्लैंड की पारी शुरू नहीं हो सकी और मैच बेनतीजा समाप्त हुआ।

    ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भारत का रिकॉर्ड संतुलित रहा है। टीम इंडिया ने यहां अब तक दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं जिनमें एक में जीत और एक में हार मिली है। इस मैदान पर भारत ने अपना आखिरी टी20 मुकाबला वर्ष 2018 में खेला था जहां टीम ने इंग्लैंड को आठ विकेट से हराया था। उस मैच में केएल राहुल ने नाबाद शतक लगाकर टीम को शानदार जीत दिलाई थी।

    अब भारतीय टीम की कोशिश होगी कि मौसम साफ रहे और सीरीज में बढ़त हासिल करने का मौका मिले। दूसरी ओर इंग्लैंड भी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर वापसी करना चाहेगा। ऐसे में यदि बारिश बीच में बाधा नहीं बनी तो क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।