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  • वैभव सूर्यवंशी पर दबाव न बनाएं भारत के लिए करेगा कमाल श्रीलंका के दिग्गज चमिंडा वास का बड़ा बयान

    वैभव सूर्यवंशी पर दबाव न बनाएं भारत के लिए करेगा कमाल श्रीलंका के दिग्गज चमिंडा वास का बड़ा बयान


    नई दिल्ली । श्रीलंका के महान तेज गेंदबाज चमिंडा वास ने भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को भविष्य का बड़ा सितारा बताते हुए क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों से अपील की है कि उन पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए। वास का मानना है कि महज 15 वर्ष की उम्र में वैभव ने जिस तरह की प्रतिभा और आत्मविश्वास दिखाया है वह उन्हें आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट का अहम खिलाड़ी बना सकता है।

    तेलंगाना टी20 लीग के दौरान हैदराबाद में बातचीत करते हुए चमिंडा वास ने कहा कि भारत लगातार विश्व स्तर के युवा क्रिकेटर तैयार कर रहा है और वैभव सूर्यवंशी भी उसी कड़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने और खुद को साबित करने के लिए समय की जरूरत होती है। इसलिए वैभव को भी बिना किसी अतिरिक्त अपेक्षा के अपने खेल पर ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए।

    वास ने विश्वास जताया कि वैभव सूर्यवंशी भविष्य में भारतीय टीम के लिए जरूर खेलेंगे और अपनी प्रतिभा से देश को कई यादगार जीत दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि इस युवा बल्लेबाज में सफल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने के सभी गुण मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ धैर्य और सही मार्गदर्शन की है।

    वैभव सूर्यवंशी पिछले दो वर्षों में भारतीय क्रिकेट का सबसे चर्चित युवा चेहरा बनकर उभरे हैं। आईपीएल 2025 में धमाकेदार शतक लगाने के बाद उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद इंडिया ए और भारत की अंडर 19 टीम के लिए भी उन्होंने अलग अलग प्रारूपों में बेहतरीन बल्लेबाजी की। उनके प्रदर्शन का सिलसिला आईपीएल 2026 में भी जारी रहा जहां राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए उन्होंने 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप अपने नाम की। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें भारतीय टी20 टीम में भी जगह मिली।

    चमिंडा वास ने तेलंगाना टी20 लीग की भी सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के घरेलू टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच देते हैं। उनके अनुसार राज्य स्तर पर नियमित टी20 प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को निखारने के साथ उन्हें आईपीएल और राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार करती हैं।

    उन्होंने कहा कि हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन की यह पहल सराहनीय है क्योंकि इससे कई युवा खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिला है। वास ने अपनी टीम पलामुरु स्ट्राइकर्स के युवा खिलाड़ियों की भी तारीफ करते हुए कहा कि टीम भले उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी लेकिन कई खिलाड़ियों ने अपनी बल्लेबाजी और खेल से प्रभावित किया है।

    भारतीय क्रिकेट व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए वास ने कहा कि देश के लगभग हर राज्य में टी20 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इससे खिलाड़ियों को लगातार प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने का मौका मिलता है और यही अनुभव उन्हें बड़े मंच पर सफल बनने में मदद करता है। उनका मानना है कि भारत की मजबूत घरेलू क्रिकेट संरचना ही लगातार नई प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सबसे बड़ा कारण है।

  • दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा

    दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा


    नई दिल्ली । टी20 विश्व कप 2026 में भारत की खिताबी जीत के अहम नायकों में शामिल विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती संघर्षों का भावुक किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की टीम में बार-बार जगह नहीं मिलने के बाद उनके पिता ने ऐसा फैसला लिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

    जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में बातचीत के दौरान संजू ने कहा कि बचपन में वह अपने दोस्तों को डीडीसीए की जैकेट पहनकर दिल्ली की टीम के लिए खेलते देखते थे। इससे उनके मन में भी दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने का सपना जगा। उन्होंने कई बार ट्रायल दिए, स्टेट कैंप तक पहुंचे और अच्छे रन भी बनाए, लेकिन अंतिम टीम में कभी जगह नहीं मिली।

    संजू ने बताया कि एक ट्रायल के बाद जब चयनित खिलाड़ियों की सूची जारी हुई तो उसमें उनका नाम नहीं था। वह और उनके पिता चुपचाप घर लौट आए। घर पहुंचते ही उनके पिता विश्वनाथन ने मां से कहा कि अब परिवार को केरल जाना होगा। मां ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए कुछ साल रुकने की सलाह दी, लेकिन पिता अपने फैसले पर अडिग रहे।

    उन्होंने कहा कि पिता ने साफ शब्दों में कहा कि अब और इंतजार नहीं होगा। तीन दिन के भीतर टिकट बुक हुई और पूरा परिवार ट्रेन से केरल रवाना हो गया। वहीं से उनके क्रिकेट करियर का नया अध्याय शुरू हुआ और उन्होंने केरल की ओर से खेलना शुरू किया।

    संजू ने दिल्ली में अपने बचपन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस की फुटबॉल टीम से जुड़े थे और रोज अभ्यास के लिए जाते थे। खेल का माहौल देखकर बचपन से ही उन्हें भी खिलाड़ी बनने की प्रेरणा मिली। पुलिस कॉलोनी की सड़कों पर टेनिस बॉल से गली क्रिकेट खेलते-खेलते उनका क्रिकेट के प्रति जुनून बढ़ता गया।

    उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कभी फुटबॉल खेलने के लिए मजबूर नहीं किया। हालांकि वे फुटबॉल भी खेलते थे, लेकिन पिता ने उनकी बल्लेबाजी देखकर महसूस किया कि क्रिकेट में उनका भविष्य बेहतर हो सकता है। इसके बाद उन्होंने संजू और उनके भाई दोनों को क्रिकेट पर पूरा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

    संजू ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम (तत्कालीन फिरोज शाह कोटला) से जुड़ी एक खास याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार उनके पिता की वहां ड्यूटी थी। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध कर उन्हें नेट्स में अभ्यास करने का मौका दिलाया। संजू, उनके भाई और पिता ने करीब एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास किया। संजू ने कहा कि उन्हें आज भी समझ नहीं आता कि उस समय उनके पिता ने यह कैसे संभव किया, लेकिन वही पल उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।

    संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि प्रतिभा के साथ सही समय पर लिया गया साहसी फैसला और परिवार का अटूट विश्वास किसी भी खिलाड़ी की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

  • फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना और पहली बार इस वैश्विक मंच पर खेल रही केप वर्डे की टीम के बीच मियामी गार्डन्स में खेला गया मुकाबला फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण मुकाबले में अर्जेंटीना ने अंततः केप वर्डे को 3-2 से पराजित कर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली है। पश्चिमी अफ्रीका के तट पर स्थित एक बेहद छोटे से द्वीपीय देश केप वर्डे ने विश्व विजेता टीम को आखिरी पलों तक कड़ी टक्कर दी, जिससे चैंपियन टीम टूर्नामेंट से बाहर होते-होते बची।

    मैच का फैसला निर्धारित 90 मिनटों में नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में खींचा गया। अर्जेंटीना की जीत का निर्णायक मोड़ एक्स्ट्रा टाइम के 111वें मिनट में आया, जब क्रिस्टियन रोमेरो के एक दमदार हेडर को रोकने के प्रयास में गेंद केप वर्डे के डिफेंडर डाइनी बोर्जेस से टकराकर सीधे नेट में चली गई। बोर्जेस का यह ओन गोल अर्जेंटीना के लिए जीवनदान साबित हुआ, जिसने टीम को 3-2 की निर्णायक बढ़त दिला दी, जो मैच के अंतिम समय तक बरकरार रही।

    इससे पहले, मुकाबले की शुरुआत में अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी और कप्तान लियोनेल मेसी ने मैच के 29वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज के एक बेहतरीन लॉन्ग पास को नियंत्रित करते हुए गोलकीपर वोजिन्हा के ऊपर से शानदार शॉट लगाकर टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिलाई थी। इसके बाद एक्स्ट्रा टाइम के 103वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज ने खुद गोल दागकर टीम का स्कोर 2-1 कर दिया था। हालांकि, केप वर्डे की जुझारू टीम ने मैच में दो बार शानदार वापसी की। सिडनी लोपेस कैब्राल और डेरॉय डुआर्टे ने अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति को भेदते हुए दो बार बराबरी के गोल दागे, जिसने स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था।

    हार का सामना करने के बावजूद केप वर्डे की टीम ने अपने पहले ही वर्ल्ड कप अभियान से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया है। इस छोटे से देश ने ग्रुप चरण में स्पेन, उरुग्वे और सऊदी अरब जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ ड्रॉ खेलकर नॉकआउट चरण का टिकट कटाया था। अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में भी केप वर्डे के 40 वर्षीय अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा ने अद्भुत खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच के दौरान मेसी के पांच तीखे प्रहारों सहित कुल 10 शानदार गोल होने से रोके, जिसने अर्जेंटीना को लंबे समय तक बैकफुट पर रखा।

    इस मैच में किए गए गोल के साथ ही कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज कर लिए हैं। यह मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 20वां वर्ल्ड कप गोल था, जिसके साथ ही वह मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे से आगे निकल गए हैं। मेसी का वर्ल्ड कप के लगातार आठ मैचों में स्कोर करने का रिकॉर्ड भी अब और मजबूत हो गया है, जिसमें वे अब तक कुल 12 गोल कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना का सामना मिस्र की टीम से आगामी मंगलवार को अटलांटा में होगा।

  • सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले से पहले मैनचेस्टर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मॉर्कल ने टीम के शीर्ष क्रम को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक रुख स्पष्ट किया है। पिछले कुछ समय से 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को लेकर क्रिकेट जगत में भारी उत्सुकता देखी जा रही थी, लेकिन टीम प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि किसी एक नई प्रतिभा के आने मात्र से मौजूदा स्थापित ओपनिंग जोड़ी को तुरंत टीम से बाहर नहीं किया जाएगा। टीम प्रशासन का मानना है कि बड़े मंच पर देश को जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों को कुछ खराब पारियों के आधार पर टीम से ड्रॉप करना सही रणनीति नहीं है।

    वर्तमान दौरे पर भारतीय सलामी जोड़ी के दोनों बल्लेबाजों का प्रदर्शन काफी भिन्न रहा है। जहां एक ओर अभिषेक शर्मा ने अपनी पिछली तीन पारियों में एक अर्धशतक और 49 रनों की उपयोगी पारी खेलकर अपनी फॉर्म का परिचय दिया है, वहीं दूसरी ओर विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन लगातार संघर्ष करते नजर आए हैं। सैमसन के बल्ले से पिछली तीन पारियों में क्रमशः पांच, शून्य और एक रन की बेहद संक्षिप्त पारियां निकली हैं। इस असंतुलित फॉर्म के बावजूद कोचिंग स्टाफ ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन किसी भी खिलाड़ी की योग्यता का आकलन महज तीन मैचों के प्रदर्शन के आधार पर नहीं करता है, बल्कि उनके पिछले योगदान को पूरा महत्व दिया जाता है।

    गेंदबाजी कोच ने अनुभवी खिलाड़ियों का बचाव करते हुए कहा कि अभिषेक शर्मा पूर्व में टी20 क्रिकेट के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों में शुमार रह चुके हैं और संजू सैमसन विश्व कप विजेता टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही सैमसन का पिछला आईपीएल सीजन भी बेहद शानदार रहा था। ऐसी स्थिति में कोचिंग स्टाफ और प्रबंधन की यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने खिलाड़ियों के मुश्किल दौर में उनके साथ खड़े रहें और टीम के भीतर एक सुरक्षित तथा सकारात्मक सांस्कृतिक माहौल का निर्माण करें। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक अत्यंत युवा खिलाड़ी लगातार टीम का दरवाजा खटखटा रहा है, जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से काफी सुखद पहलू है।

    टीम प्रबंधन ने रणनीतिक तौर पर यह भी साफ कर दिया है कि केवल वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह देने के उद्देश्य से अन्य बल्लेबाजों की बल्लेबाजी पोजीशन में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। कोच के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को उसकी स्वाभाविक भूमिका और पसंदीदा पोजीशन से हटाना पूरी टीम के रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठिन परिस्थितियों में मैच जिताने वाले अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना पहली प्राथमिकता है, जिसके बाद ही परिस्थितियों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ शीर्ष क्रम का निर्धारण किया जाएगा।

    भले ही मोर्ने मॉर्कल ने वैभव सूर्यवंशी के आधिकारिक डेब्यू की किसी निश्चित तारीख या मैच का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस 15 वर्षीय खिलाड़ी की तकनीकी क्षमता और परिपक्वता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय ड्रेसिंग रूम के दबाव को झेलना और वहां सहज रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। वैभव ने अपने आत्मविश्वास और बेहतरीन व्यवहार से बेहद कम समय में सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल बिठा लिया है। अंतरराष्ट्रीय नेट सेशन्स के दौरान इस युवा खिलाड़ी ने अपनी बल्लेबाजी तकनीक से पूरे कोचिंग स्टाफ को बेहद प्रभावित किया है।

    शीर्ष क्रम के अलावा गेंदबाजी कोच ने भारतीय टीम के युवा गेंदबाजी संसाधनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट और नेट गेंदबाज के रूप में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव की परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रिंस की क्षमता टीम के लिए उपयोगी साबित हो रही है। इसके साथ ही चोट के बाद टीम में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की रफ्तार और आक्रामकता को भी भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाला संकेत बताया गया है।

  • विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा

    विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों विंबलडन का रोमांच करीब से देख रही हैं। इस दौरान उन्होंने टेनिस के महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तुलना करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता है।

    जियो हॉटस्टार से बातचीत में दीप्ति ने कहा कि जब भी नोवाक जोकोविच का नाम आता है तो सबसे पहले उनकी मानसिक मजबूती की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जोकोविच कभी हार नहीं मानते और चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण हों, उनका आत्मविश्वास और संयम हमेशा कायम रहता है। यही गुण उन्हें दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल करता है।

    दीप्ति ने कहा कि क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी की तुलना जोकोविच से की जा सकती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी हैं। उनके अनुसार धोनी मैदान पर हमेशा बेहद शांत दिखाई देते हैं और दबाव की स्थिति में भी उनके चेहरे पर घबराहट नहीं दिखती। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में कई मुश्किल मुकाबलों में टीम इंडिया को जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

    भारतीय ऑलराउंडर ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा समय में नोवाक जोकोविच उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों को खेलते हुए देखती आई हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जोकोविच की जुझारू मानसिकता और कभी हार न मानने वाले रवैये ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। अब वह उनके लगभग हर मुकाबले को फॉलो करती हैं।

    दीप्ति ने विंबलडन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनका लंबे समय से देखा गया सपना था। उन्होंने कहा कि वर्षों तक टीवी पर इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम को देखने के बाद पहली बार यहां लाइव मुकाबले देखने का अनुभव बेहद खास है। स्टेडियम का माहौल, दर्शकों का उत्साह और प्रतियोगिता का वातावरण उन्हें बेहद रोमांचित कर रहा है।

    जब उनसे पूछा गया कि यदि उन्हें विंबलडन में किसी तीन भारतीय खेल हस्तियों के साथ मैच देखने का मौका मिले तो वह किन्हें चुनेंगी, तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर का नाम लिया। दीप्ति का मानना है कि इन तीनों दिग्गजों के साथ बैठकर मैच देखने और खेल पर उनकी राय सुनना अपने आप में यादगार अनुभव होगा।

    दीप्ति शर्मा का यह बयान खेल जगत के दो महान खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी गहरी समझ को भी दर्शाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी खेल में प्रतिभा के साथ मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता ही महान खिलाड़ियों की पहचान होती है।

  • दिल्ली में सजेगा इंटर-स्कूल फुटबॉल का महाकुंभ, ओरिएंटल कप के चौथे संस्करण का आगाज 7 जुलाई से

    दिल्ली में सजेगा इंटर-स्कूल फुटबॉल का महाकुंभ, ओरिएंटल कप के चौथे संस्करण का आगाज 7 जुलाई से


    नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित इंटर-स्कूल फुटबॉल टूर्नामेंट ओरिएंटल कप का चौथा संस्करण 7 से 16 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इस बार प्रतियोगिता पहले से कहीं अधिक भव्य होगी। आयोजकों ने रिकॉर्ड पुरस्कार राशि के साथ 10 प्रतिभाशाली छात्र-एथलीटों के लिए कुल 2.5 लाख रुपये की छात्रवृत्ति योजना की भी घोषणा की है।

    इस वर्ष टूर्नामेंट में दिल्ली-एनसीआर के 45 से अधिक स्कूलों के करीब 1,500 खिलाड़ी भाग लेंगे। प्रतियोगिता के दौरान लड़कों की अंडर-17 और लड़कियों की अंडर-19 श्रेणियों में 50 से अधिक मुकाबले खेले जाएंगे। आयोजकों का मानना है कि यह प्रतियोगिता युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और प्रतिस्पर्धी माहौल में निखरने का बेहतरीन मंच उपलब्ध कराएगी।

    ओरिएंटल कप के संस्थापक फरीद बख्शी ने कहा कि इस टूर्नामेंट का उद्देश्य केवल मुकाबले आयोजित करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर फुटबॉल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि इस बार पुरस्कार राशि को दोगुने से भी अधिक बढ़ाया गया है और पहली बार 10 योग्य छात्र-एथलीटों के लिए 2.5 लाख रुपये की छात्रवृत्ति शुरू की गई है। इससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग मिलने के साथ उनके खेल और शिक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।

    बख्शी ने लड़कियों की बढ़ती भागीदारी पर भी खुशी जताई। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट के पहले संस्करण की तुलना में अब लड़कियों की टीमों की संख्या दोगुनी हो चुकी है और कुल प्रतिभागी टीमों में उनकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव स्कूल स्तर पर महिला फुटबॉल के प्रति बढ़ती रुचि और समान अवसरों की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    इस बार लड़कों की अंडर-17 प्रतियोगिता में 25 से अधिक टीमें मैदान में उतरेंगी, जबकि लड़कियों की अंडर-19 श्रेणी में 16 से अधिक टीमें भाग लेंगी। आयोजकों के अनुसार, यह 2023 में शुरू हुए टूर्नामेंट के लगातार बढ़ते प्रभाव और लोकप्रियता को दर्शाता है।

    ओरिएंटल कप की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। तब से अब तक यह प्रतियोगिता 55 से अधिक स्कूलों और गैर-सरकारी संगठनों को जोड़ चुकी है। पिछले तीन संस्करणों में 2,700 से अधिक युवा फुटबॉलर हिस्सा ले चुके हैं और 80 से अधिक मुकाबले सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। आयोजन समिति का लक्ष्य इसे देश के सबसे प्रतिष्ठित इंटर-स्कूल फुटबॉल टूर्नामेंटों में शामिल करना है।

  • अहमदाबाद में फीबा बास्केटबॉल वर्ल्ड कप 2027 क्वालिफायर की मेजबानी, भारत की नजर दमदार प्रदर्शन पर

    अहमदाबाद में फीबा बास्केटबॉल वर्ल्ड कप 2027 क्वालिफायर की मेजबानी, भारत की नजर दमदार प्रदर्शन पर


    नई दिल्ली। अहमदाबाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। शहर के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नारनपुरा में फीबा बास्केटबॉल वर्ल्ड कप 2027 एशियन क्वालिफायर विंडो-3 का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 2 जुलाई से 5 जुलाई 2026 तक चलेगी, जिसमें भारतीय पुरुष बास्केटबॉल टीम घरेलू दर्शकों के सामने दो मजबूत एशियाई टीमों कतर और लेबनान के खिलाफ चुनौती पेश कर रही है।

    भारतीय टीम ने अपने अभियान की शुरुआत 2 जुलाई को कतर के खिलाफ मुकाबले से की, जबकि 5 जुलाई को उसका सामना एशिया की मजबूत टीम लेबनान से होगा। यह दोनों मुकाबले भारत के लिए विश्व कप क्वालिफिकेशन अभियान में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि अहमदाबाद लगातार बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि महज एक सप्ताह पहले इसी परिसर में एवीसी पुरुष वॉलीबॉल कप का सफल आयोजन हुआ था और अब फीबा बास्केटबॉल वर्ल्ड कप 2027 एशियन क्वालिफायर की मेजबानी शहर की खेल क्षमता और आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रमाण है।

    उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगितियों को आकर्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है। इससे न केवल खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे बल्कि राज्य को वैश्विक खेल मानचित्र पर भी नई पहचान मिलेगी।

    भारतीय टीम इस समय हेड कोच स्कॉट फ्लेमिंग के मार्गदर्शन में नए सिरे से टीम निर्माण की प्रक्रिया में है। टीम का फोकस युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव दिलाने और भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करने पर है। हालिया फीबा रैंकिंग में भारत दुनिया में 76वें और एशिया में 14वें स्थान पर है। शुरुआती मुकाबलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद टीम घरेलू मैदान पर वापसी की उम्मीद के साथ उतर रही है।

    भारतीय टीम में कंवर संधू, प्रणव प्रिंस, प्रिंसपाल सिंह और हर्ष डागर जैसे युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल हैं, जिन्होंने हाल के टूर्नामेंटों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। घरेलू दर्शकों का समर्थन टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    अहमदाबाद में लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगितियों का आयोजन यह संकेत देता है कि शहर भविष्य में भी बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तेजी से तैयार हो रहा है। वहीं भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट न केवल विश्व कप क्वालिफिकेशन की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि एशियाई स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता साबित करने का भी सुनहरा अवसर है।

  • विंबलडन 2026: एलेक्जेंड्रा एला ने रचा इतिहास, पहली फिलीपीन खिलाड़ी बनीं जो तीसरे दौर में पहुंचीं

    विंबलडन 2026: एलेक्जेंड्रा एला ने रचा इतिहास, पहली फिलीपीन खिलाड़ी बनीं जो तीसरे दौर में पहुंचीं


    नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में फिलीपींस की युवा टेनिस स्टार एलेक्जेंड्रा एला ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार महिला एकल के तीसरे दौर में प्रवेश कर लिया। गुरुवार को ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले गए दूसरे दौर के मुकाबले में एला ने ऑस्ट्रेलिया की माया जॉइंट को 3-6, 6-2, 6-0 से हराकर न सिर्फ शानदार वापसी की, बल्कि विंबलडन के तीसरे दौर में पहुंचने वाली फिलीपींस की पहली खिलाड़ी बनने का गौरव भी हासिल किया।

    मुकाबले की शुरुआत एला के लिए चुनौतीपूर्ण रही। पहले सेट में माया जॉइंट ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 6-3 से बढ़त बना ली। शुरुआती झटके के बाद एला ने अपना खेल पूरी तरह बदल दिया और दूसरे सेट में बेहतरीन सर्विस तथा दमदार ग्राउंड स्ट्रोक्स की बदौलत 6-2 से मुकाबला बराबरी पर ला दिया।

    निर्णायक तीसरे सेट में 21 वर्षीय एला ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने शुरुआत में ही सर्विस ब्रेक हासिल कर दबाव बनाया और लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए 6-0 से सेट जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। पूरे मुकाबले में उनकी फिटनेस, संयम और आक्रामक खेल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

    यह जीत एला के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले वर्ष ईस्टबोर्न ओपन के फाइनल में उन्हें माया जॉइंट के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। उस मैच का फैसला तीसरे सेट के टाईब्रेक में 12-10 से हुआ था। विंबलडन में मिली यह जीत उनके लिए उस हार का बेहतरीन जवाब साबित हुई।

    महिला एकल के अन्य मुकाबलों में 21वीं वरीयता प्राप्त मैरी बौजकोवा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रांट को 7-5, 6-3 से हराकर तीसरी बार विंबलडन के तीसरे दौर में जगह बनाई। अब उनका सामना पिछले साल की क्वार्टर फाइनलिस्ट ल्यूडमिला सैमसनोवा से होगा, जिन्होंने 15वीं वरीयता प्राप्त डायना श्नाइडर को 6-4, 4-6, 6-2 से हराया।

    अमेरिका की एमा नवारो ने भी लगातार तीसरे वर्ष विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया। उन्होंने ओक्साना सेलेखमेतेवा को 3-6, 6-4, 6-1 से मात देकर शानदार वापसी दर्ज की। नवारो का अगला मुकाबला मार्टा कोस्त्युक और अन्ना ब्लिंकोवा के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा।

    एलेक्जेंड्रा एला की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल फिलीपींस के टेनिस इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि युवा खिलाड़ी अब ग्रैंड स्लैम स्तर पर बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।

  • महिला टी20 विश्व कप 2026: साइवर-ब्रंट की कप्तानी पारी से इंग्लैंड फाइनल में, दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराया

    महिला टी20 विश्व कप 2026: साइवर-ब्रंट की कप्तानी पारी से इंग्लैंड फाइनल में, दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराया


    नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने दमदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराकर पांचवीं बार फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। लंदन के केनिंग्टन ओवल में खेले गए मुकाबले में इंग्लिश टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट पर 169 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 129 रन ही बना सकी।

    इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एमी जोन्स 2 रन और डैनी व्याट 12 रन बनाकर आउट हो गईं, जबकि एलिसा कैप्सी भी सिर्फ 1 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। महज 23 रन पर तीन विकेट गिरने के बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और अनुभवी हीथर नाइट ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 133 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    कप्तान साइवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों में 75 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा। वहीं हीथर नाइट ने 47 गेंदों पर 58 रन की उपयोगी पारी खेली जिसमें छह चौके और एक छक्का शामिल था। दोनों की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत इंग्लैंड ने चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।

    दक्षिण अफ्रीका की ओर से शबनम इस्माइल और नॉनकुलुलेको म्लाबा ने दो-दो विकेट लिए लेकिन बाकी गेंदबाज इंग्लैंड की बड़ी साझेदारी को तोड़ने में सफल नहीं हो सके।

    170 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका को कप्तान लौरा वोल्वार्ट और ताजमिन ब्रिट्स ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े लेकिन इसके बाद टीम लगातार अंतराल पर विकेट गंवाती रही। वोल्वार्ट 17 रन बनाकर आउट हुईं जबकि एनेरी डर्कसेन, मारिजाने कैप, सुने लुस और क्लो ट्रायोन बड़ी पारी नहीं खेल सकीं।

    ताजमिन ब्रिट्स ने अकेले संघर्ष करते हुए 45 गेंदों में 51 रन बनाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। नादिन डी क्लर्क 14 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि बाकी बल्लेबाज इंग्लैंड के अनुशासित गेंदबाजी आक्रमण के सामने टिक नहीं सके।

    इंग्लैंड की ओर से लॉरेन बेल और चार्ली डीन ने दो-दो विकेट झटके। फ्रेया केम्प और लिन्से स्मिथ ने एक-एक विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया।

    इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पांचवीं बार महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया है। अब रविवार को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उसका मुकाबला छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से होगा। क्रिकेट प्रेमियों को खिताबी मुकाबले में महिला क्रिकेट की दो सबसे सफल टीमों के बीच रोमांचक टक्कर देखने को मिलेगी।

  • सीधे सेटों में जीते जेवरेव, बेरेटिनी और आर्थर फेरी ने भी अगले दौर का टिकट कटाया

    सीधे सेटों में जीते जेवरेव, बेरेटिनी और आर्थर फेरी ने भी अगले दौर का टिकट कटाया


    नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर जेवरेव ने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए पुरुष एकल के तीसरे दौर में जगह बना ली है। जर्मनी के स्टार खिलाड़ी ने फ्रांस के वैलेंटिन रॉयर को सीधे सेटों में 6-1, 6-3, 7-6(3) से हराकर जीत दर्ज की। वहीं इटली के माटेओ बेरेटिनी और मेजबान ब्रिटेन के युवा खिलाड़ी आर्थर फेरी ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर अगले दौर का टिकट हासिल कर लिया।

    फ्रेंच ओपन चैंपियन जेवरेव ने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और पहले दो सेट बेहद आसानी से अपने नाम कर लिए। तीसरे सेट में रॉयर ने कड़ी चुनौती पेश की और मुकाबले को टाई-ब्रेक तक पहुंचा दिया, लेकिन निर्णायक क्षणों में जेवरेव का अनुभव भारी पड़ा। दो घंटे चार मिनट तक चले मुकाबले में उन्होंने संयम बनाए रखते हुए जीत अपने नाम कर ली।

    जीत के बाद जेवरेव ने कहा कि लगभग ढाई सेट तक उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेला। इसके बाद उनका ध्यान थोड़ा भटका, जिसका प्रतिद्वंद्वी ने फायदा उठाने की कोशिश की। उन्होंने माना कि ग्रैंड स्लैम के आगे के दौर में ऊर्जा बचाकर रखना बेहद जरूरी होता है और सीधे सेटों में मिली जीत उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगी। जेवरेव ने यह भी कहा कि विंबलडन हमेशा से उनका पसंदीदा टूर्नामेंट रहा है और इस बार वह यहां बड़ी सफलता हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इटली के माटेओ बेरेटिनी ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए फ्रांस के आर्थर फिल्स को 6-4, 7-5, 3-6, 6-3 से मात दी। 2021 के विंबलडन उपविजेता बेरेटिनी ने सेंटर कोर्ट पर दमदार सर्विस और शानदार शॉट्स से मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। तीसरा सेट गंवाने के बाद उन्होंने बेहतरीन वापसी करते हुए चौथा सेट जीत लिया और 2023 के बाद पहली बार विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया।

    दिन का सबसे चर्चित प्रदर्शन ब्रिटेन के 23 वर्षीय आर्थर फेरी का रहा। उन्होंने फिनलैंड के ओटो विर्टानेन को 5-7, 7-6(3), 6-3, 6-3 से हराकर अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। पहला सेट हारने के बाद फेरी ने शानदार वापसी करते हुए लगातार तीन सेट अपने नाम किए। इस उपलब्धि के साथ वह वर्ष 2000 के बाद विंबलडन पुरुष एकल के तीसरे दौर में पहुंचने वाले केवल चौथे ब्रिटिश वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी बन गए हैं।

    फेरी का मुकाबला देखने के लिए प्रिंसेस ऑफ वेल्स भी कुछ समय तक स्टेडियम में मौजूद रहीं। हालांकि घरेलू दर्शकों और खास मेहमानों की मौजूदगी के बावजूद युवा खिलाड़ी पर किसी तरह का दबाव नहीं दिखा। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना खेल जारी रखा। हाल के सप्ताहों में भी उनकी फॉर्म शानदार रही है। वह बर्मिंघम और नॉटिंघम के ग्रास कोर्ट टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचे थे और पहले दौर में चौथी वरीयता प्राप्त बेन शेल्टन को हराकर बड़ा उलटफेर भी कर चुके हैं।

    जीत के बाद फेरी ने कहा कि जिस इलाके में वह बड़े हुए वहां से कुछ ही मिनट की दूरी पर स्थित विंबलडन में खेलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि स्टेडियम में परिवार, दोस्त और कई परिचितों की मौजूदगी ने उन्हें अतिरिक्त आत्मविश्वास दिया। अब तीसरे दौर में उनकी कोशिश इस शानदार लय को बरकरार रखते हुए अपने यादगार अभियान को आगे बढ़ाने की होगी।