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  • मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी

    मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही हलकों में चर्चा तेज कर दी। बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी गौ रक्षा यात्रा के तहत जिले में पहुंचे थे। इसी दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव उनसे मिलने पहुंचीं और उनके चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    कार्यक्रम के दौरान डिंपल यादव ने शंकराचार्य को शॉल भेंट की और जमीन पर बैठकर उनसे बातचीत की। इस मुलाकात में उन्होंने सबसे पहले कन्नौज की उस घटना का जिक्र किया, जिसमें शंकराचार्य को कथित तौर पर रात सड़क पर गुजारनी पड़ी थी। डिंपल यादव ने इस घटना को लेकर खेद जताते हुए माफी भी मांगी और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा।

    डिंपल यादव ने शंकराचार्य के गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे पर उनके साथ हैं और आगे भी सहयोग करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से शंकराचार्य का अपमान हुआ है, वह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। अपने बयान में डिंपल यादव ने कहा कि “प्रकृति ऐसे अपमान का जवाब जरूर देती है।”

    मुलाकात के दौरान शंकराचार्य ने भी अपनी यात्रा और गौ रक्षा आंदोलन की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का है और जब तक इसे संवैधानिक मान्यता नहीं मिलती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका अभियान नहीं रुकेगा।

    करीब एक घंटे चली इस मुलाकात के बाद शंकराचार्य किशनी के लिए रवाना हो गए। इससे पहले वे सपा नेता और पूर्व विधायक राजकुमार यादव के मैरिज हॉल में ठहरे हुए थे। बातचीत के दौरान डिंपल यादव ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को इस पूरे घटनाक्रम का दुख है और यदि उन्हें जानकारी होती तो बेहतर व्यवस्थाएं की जातीं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर इसे धार्मिक संत के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी समझा जा रहा है।

    कुछ महीने पहले ही लखनऊ में अखिलेश यादव ने भी शंकराचार्य से मुलाकात की थी, जहां वह उनके सामने जमीन पर बैठे नजर आए थे। उसी मुलाकात के बाद से दोनों के बीच संवाद और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।

    मैनपुरी की यह मुलाकात अब सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखी जा रही है, जिस पर आगे भी चर्चाएं तेज रहने की संभावना है।

  • यूपी में मौसम का अलर्ट: 38 शहरों में आंधी-तूफान की चेतावनी, 70 जिलों में बारिश की संभावना

    यूपी में मौसम का अलर्ट: 38 शहरों में आंधी-तूफान की चेतावनी, 70 जिलों में बारिश की संभावना


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। Uttar Pradesh के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान और बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार 38 शहरों में तेज हवाओं के साथ मौसम बिगड़ने की आशंका है, जबकि लगभग 70 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।

    लखनऊ सहित कई प्रमुख जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है। हालांकि तेज हवाओं और बदलते मौसम के कारण कुछ इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव प्री-मानसून गतिविधियों का हिस्सा है, जिसमें गर्म हवाओं और नमी के मिलने से बादल तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। इसी कारण कुछ स्थानों पर तेज बारिश और कहीं-कहीं आंधी जैसी स्थिति बन रही है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    शहरी इलाकों में भी मौसम का असर दिखाई दे रहा है, जहां दोपहर के बाद अचानक काले बादल छा गए और कई जगहों पर हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई।

    कुल मिलाकर यूपी में मौसम का यह बदला मिजाज अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत के साथ-साथ सतर्कता भी बरतनी होगी।

  • नोएडा हाईराइज में आग का तांडव: 12वें फ्लोर तक पहुंची लपटें, 6वीं मंजिल तक ही सीमित रही दमकल की धार

    नोएडा हाईराइज में आग का तांडव: 12वें फ्लोर तक पहुंची लपटें, 6वीं मंजिल तक ही सीमित रही दमकल की धार


    नोएडा। नोएडा के सेक्टर-75 स्थित IVY काउंटी सोसाइटी की 28 मंजिला इमारत शुक्रवार सुबह अचानक आग की चपेट में आ गई। आग 12वें फ्लोर पर स्थित एक फ्लैट में लगी और तेज हवा के कारण कुछ ही मिनटों में लपटें पूरे फ्लैट में फैल गईं। खिड़कियों से आग की ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार उठता रहा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

     दमकल की पहुंच 6वीं मंजिल तक ही सीमित
    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन शुरुआती राहत कार्यों में बड़ा संकट सामने आया। दमकल की साधारण गाड़ियों का पानी केवल 5 से 6वीं मंजिल तक ही पहुंच सका, जबकि आग 12वीं मंजिल पर विकराल रूप ले चुकी थी। इसी दौरान मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी देखने को मिली। एक व्यक्ति ने कहा कि सिस्टम की स्थिति बेहद खराब है और यह केवल “गमलों में पानी डालने जैसा” प्रतीत हो रहा है।

    हाइड्रोलिक क्रेन से पाया गया काबू
    स्थिति बिगड़ते देख फायर विभाग ने हाइड्रोलिक क्रेन को मौके पर बुलाया। इसके बाद ऊंचाई पर पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू हुई। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली।

    अफरा-तफरी में खाली कराई गई सोसाइटी
    आग लगते ही सोसाइटी में अफरा-तफरी मच गई। लोग सीढ़ियों के जरिए बाहर भागने लगे। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के टावर भी खाली करा दिए गए। फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय होने के कारण एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

    एक और घटना: PG रेस्टोरेंट में आग, 15 लोग सुरक्षित निकाले गए
    इसी बीच सेक्टर-52 स्थित ई-3 शताब्दी विहार के एक PG और रेस्टोरेंट में भी आग लग गई। प्रारंभिक जांच में आग का कारण फ्रीजर में शॉर्ट सर्किट बताया गया। दमकल विभाग ने समय रहते कार्रवाई करते हुए ऊपर फंसे 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

     हाईराइज फायर सेफ्टी की हकीकत उजागर
    नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में ऊंची इमारतों के लिए फायर सेफ्टी सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में उपलब्ध हाइड्रोलिक उपकरण अधिकतम 42 मीटर तक ही प्रभावी हैं, जबकि कई इमारतें 30 से 80 मंजिल तक पहुंच चुकी हैं। फायर विभाग भविष्य में 72 और 102 मीटर क्षमता वाली मशीनें लाने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन फिलहाल यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा रही।

    यह घटना स्पष्ट करती है कि तेजी से बढ़ते शहरी विकास के मुकाबले आपातकालीन सेवाओं की क्षमता अभी पीछे है। नोएडा की यह आग केवल एक हादसा नहीं, बल्कि हाईराइज सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी है।

  • Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी

    Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav ) और राबड़ी देवी (Rabri Devi) की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. दोनों नेताओं को पहले Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन अब उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी गई है. वहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की Y+ कैटेगरी की सुरक्षा पहले की तरह जारी रहेगी. जानकारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहले उन्हें सुरक्षा खतरों को देखते हुए Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, हाउस गार्ड और एस्कॉर्ट वाहन शामिल होते थे।

    हालांकि वर्तमान सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी शख्स की सुरक्षा उसके मौजूदा संवैधानिक पद और उपलब्ध खुफिया इनपुट के आधार पर तय की जाती है. चूंकि दोनों नेता लंबे समय से किसी सक्रिय प्रशासनिक या संवैधानिक पद पर नहीं हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

    दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की Y+ श्रेणी की सुरक्षा को बरकरार रखा गया है. सुरक्षा समिति का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होता है. इसके अलावा उनकी लगातार राजनीतिक गतिविधियों, जनसभाओं और दौरों को देखते हुए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने का फैसला लिया गया है.

    पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी कटौती की गई है. पहले उन्हें Y कैटेगरी की सुरक्षा मिलती थी, लेकिन अब उन्हें केवल एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी यानी अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाएगा. सुरक्षा में यह बदलाव मंत्री पद छोड़ने के बाद लागू होने वाले नियमों के तहत किया गया है।


    राजश्री यादव की सुरक्षा के लिए एक बॉडीगार्ड की तैनाती

    लालू यादव की बड़ी बेटी और सांसद मीसा भारती को अब तीन सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा कवर मिलेगा. यह व्यवस्था सांसदों के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तय की गई है. वहीं तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव को एक सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराया जाएगा. राजश्री का कोई राजनीतिक या संवैधानिक पद नहीं है, लेकिन परिवार की सार्वजनिक गतिविधियों और व्यक्तिगत सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक अंगरक्षक दिया गया है. इस तरह लालू परिवार के विभिन्न सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था को उनके वर्तमान पद और सुरक्षा मानकों के अनुरूप पुनर्गठित किया गया है।

  • TMC के विद्रोह में मुस्लिम MLA भी पीछे नहीं…. मुर्शिदाबाद के 9 में से 8 ने छोड़ा ममता का साथ

    TMC के विद्रोह में मुस्लिम MLA भी पीछे नहीं…. मुर्शिदाबाद के 9 में से 8 ने छोड़ा ममता का साथ


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) में हुए विद्रोह में टीएमसी (TMC) के अल्पसंख्यक विधायक (Minority MLA) भी पीछे नहीं हैं. इन विधायकों ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee .) की बजाय ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के साथ जाना ज्यादा बेहतर समझा है. मुर्शिदाबाद में TMC के जो 9 विधायक जीते थे उनमें से 8 ने ममता का साथ छोड़ दिया है और ऋतब्रत बनर्जी का दामन थाम लिया है।

    इस सूची में तृणमूल कांग्रेस के लंबे समय से विश्वसनीय और वरिष्ठ नेता जावेद खान के साथ-साथ काजल शेख जैसे प्रभावशाली नेता भी शामिल हैं। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इन मुस्लिम विधायकों को बगावत का भरपूर इनाम दिया है. बागियों में शामिल जावेद खान को विधानसभा में विपक्ष का उपनेता बनाया गया है. वहीं दूसरी ओर अखुरुज्जमां को चीफ व्हिप बनाया गया है।


    तृणमूल की ‘टूट’ बीजेपी के लिए बंगाल से ज्यादा दिल्ली में फायदेमंद

    एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले मंत्रिमंडल के चार अल्पसंख्यक मंत्री भी आंदोलनकारी विधायकों के इस समूह में शामिल हैं. ये विधायक हैं- जावेद खान, सबीना यास्मीन, गुलाम रब्बानी और अखरूजमां।

    तृणमूल के आंदोलनकारी खेमे के जिन अल्पसंख्यक विधायकों के नाम अब तक सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं – जावेद खान, अखरूजमां, काजल शेख, गुलाम रब्बानी, डॉ. मोशर्रफ हुसैन, इमानी बिस्वास, नियामत शेख, रेयात हुसैन, गुलशन मल्लिक, तौसीफुर रहमान, मुस्तफिजुर रहमान, बहारुल इस्लाम।

    लेकिन कुल आंकड़ा कही ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीतने वाले 34 मुस्लिम विधायकों में से 17 बागी खेमे में शामिल हो गए हैं।

    सबसे खास बात यह है कि मुर्शिदाबाद के 9 अल्पसंख्यक विधायकों में से 8 ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए हैं. अखरुजमां कहते हैं, ‘मुर्शिदाबाद जिले के 9 विधायकों में से 8 ने हमारा समर्थन किया है. हमने पार्टी के बहुमत के साथ खड़े रहने का फैसला किया है.’ केवल नव निर्वाचित विधायक और शिक्षाविद बाबर अली (जलंगी विधायक) ने ही पार्टी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

    रघुनाथगंज के विधायक अख्रुज्जमां को इस ‘विद्रोह’ के सूत्रधारों में से एक माना जा रहा है. अखरूजमां ने 2018 में कांग्रेस छोड़ दी थी और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे, तब शुभेंदु अधिकारी मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस के पर्यवेक्षक थे. इस बार वे ऋतब्रता के साथ आए हैं. जिले के दूसरे विधायकों शमशेरगंज के नूर आलम, सुती विधायक इमानी बिस्वास, लालगोला के अब्दुल अजीज, भगवानगोला के रियात हुसैन सरकार और हरिहरपारा के नियामत शेख तथा भरतपुर के विधायकों मुस्तफिजुर रहमान।

    आंकड़ों के अनुसार 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद जिले की 22 सीटों में से 20 सीटें जीती थीं. तृणमूल कांग्रेस के सुनहरे दिनों में जब अभिषेक बनर्जी या ममता बनर्जी कोलकाता में बैठक बुलाते थे तो मुर्शिदाबाद जिले से बुलाए गए सभी विधायक लगभग एक दिन पहले ही कोलकाता में होटल बुक कर लेते थे, ताकि वे समय पर बैठक में पहुंच सकें और पीछे की पंक्ति में न बैठना पड़े. लेकिन इस विधानसभा चुनाव के बाद स्थिति बदल गई है।

    पिछले रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर पर हुई तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की बैठक में ये विधायक नजर नहीं आए. 2011 से ही मुस्लिम बड़ी संख्या में तृणमूल को वोट देते आ रहे हैं. ममता बनर्जी को लगता था कि मुस्लिम उनके स्थायी वोट बैंक रहेंगे. लेकिन इस चुनाव में पूरी तस्वीर बदल गई है।

  • प्रयागराज में सनसनीखेज हत्याकांड…. मकान से एक के बाद एक 4 शव बरामद

    प्रयागराज में सनसनीखेज हत्याकांड…. मकान से एक के बाद एक 4 शव बरामद


    प्रयागराज।
    यूपी (UP) के प्रयागराज (Prayagraj) के साउथ मलाका (South Malacca) में चार लोगों की निर्मम हत्या की बात फैलते ही पूरा इलाके में सनसनी फैल गई। मंगलवार दोपहर घर के भीतर से उठ रही तेज दुर्गंध ने जिस खौफनाक कांड से पर्दा उठाया, उसने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पुलिस को भी हैरान कर दिया। एक के बाद एक, चार शव बरामद होने की खबर फैलते ही साउथ मलाका चौराहे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर चार लोगों की इतनी बेरहमी से हत्या किसने और क्यों की?

    मकान से निकल रही दुर्गंध इतनी तीव्र थी कि चौराहे से गुजरने वाले राहगीरों तक को परेशानी हो रही थी। आसपास के दुकानदारों को पहले लगा कि किसी जानवर की मौत हुई होगी, लेकिन जब पुलिस ने मकान का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो पूरा मामला सनसनीखेज हत्याकांड में बदल गया। बताया जा रहा है कि शव करीब तीन दिन तक बंद कमरों में पड़े रहने के कारण सड़ने लगे थे, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई थी। चार हत्याओं की खबर फैलते ही आसपास के लोग अपने घरों और दुकानों से निकलकर घटनास्थल पर पहुंच गए। चौराहे पर देर शाम तक लोगों की भीड़ जुटी रही। घटनास्थल पर पुलिस कमिश्नर, अपर पुलिस आयुक्त, डीसीपी सिटी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और डॉग स्क्वायड की टीम घंटों जांच में जुटी रही।

    पुलिस को मकान से तीन मोबाइल फोन और हत्या में इस्तेमाल होने की आशंका वाली एक हथौड़ी भी मिली है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस आसपास के लोगों, किरायेदारों, रिश्तेदारों और परिवार से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। शहर के बीचोंबीच हुए इस सनसनीखेज चौहरे हत्याकांड ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है।


    चौथा शव किसका? सबसे बड़ा सवाल

    साउथ मलाका हत्याकांड की जांच में सबसे बड़ा सवाल भूतल स्थित कलर लैब से बरामद चौथे शव की पहचान को लेकर खड़ा हो गया है। पुलिस को आशंका है कि युवक की पहले दुकान के भीतर हत्या की गई और फिर केमिकल डालकर उसका चेहरा जला दिया गया, ताकि पहचान छिपाई जा सके। प्रथम दृष्टया माना जा रहा है कि शव वीरेंद्र वैश्य के बड़े बेटे अभिषेक का हो सकता है, लेकिन चेहरा बुरी तरह झुलस जाने के कारण इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस डीएनए परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से पहचान सुनिश्चित कराने की तैयारी कर रही है।

    पुलिस को यह भी संदेह है कि युवक की हत्या के बाद आरोपी पहली मंजिल पर पहुंचे और वृद्ध दंपती वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी अनीता और बेटी मीनाक्षी पर हथौड़ी या किसी भारी वस्तु से ताबड़तोड़ वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं चौथा शव किसी अन्य व्यक्ति का तो नहीं है और पहचान छिपाने के लिए चेहरा जलाया गया हो। इसी बिंदु को जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

  • लेक सिटी नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा… NGT ने दी चेतावनी

    लेक सिटी नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा… NGT ने दी चेतावनी


    नैनीताल।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) की सरोवर नगरी नैनीताल (Lake City Nainital) पर बढ़ते पर्यावरणीय खतरे को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal-NGT) ने बड़ा अलर्ट जारी किया है. मंगलवार को नैनीताल क्लब में आयोजित हाई लेवल समीक्षा बैठक में NGT के माननीय सदस्य और न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने साफ शब्दों में कहा कि यदि नदी-नाले, प्राकृतिक जलस्रोत और जलधाराएं नहीं बचीं तो पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिकी को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा.

    बैठक में नैनीताल के सामने खड़ी कई गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. इनमें नैनीझील का लगातार घटता जलस्तर, झील में बढ़ता प्रदूषण, कचरा प्रबंधन की समस्या, ड्रेनेज और सीवरेज नेटवर्क की स्थिति तथा जलस्रोतों पर बढ़ते अतिक्रमण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

    बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि नैनीझील का जलस्तर लगातार प्रभावित हो रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उन प्राकृतिक जलस्रोतों का कमजोर होना है जो सालों से झील को पानी उपलब्ध कराते रहे हैं. यदि समय रहते इन स्रोतों को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.


    वॉटर बॉडी और वेटलैंड से हटेगा अतिक्रमण

    अधिकारियों ने जानकारी दी कि नैनीताल शहर में कुल 13 वॉटर बॉडी और वेटलैंड मौजूद हैं. ये सभी बरसात के पानी को जमा करके धीरे-धीरे नैनीझील तक पहुंचाते हैं. यही जलस्रोत सर्दियों के मौसम में भी झील के जलस्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

    हालांकि समय के साथ इन वॉटर बॉडी और वेटलैंड पर अतिक्रमण बढ़ गया है. कई स्थानों पर पानी का प्राकृतिक प्रवाह और भराव भी बाधित हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि नैनीझील का घटता जलस्तर इसी समस्या से जुड़ा हुआ है.

    मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT सदस्य सचिव ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को सभी वॉटर बॉडी और वेटलैंड को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस दिशा में विशेष अभियान चलाया जा सकता है.

    बैठक में पर्यटन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों पर भी चर्चा की गई. अधिकारियों ने बताया कि पर्यटन सीजन के दौरान नैनीताल में लाखों लोग पहुंचते हैं. इससे शहर की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है, लेकिन कचरे और प्रदूषण का दबाव भी कई गुना बढ़ जाता है. NGT ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण सुनिश्चित किया जाए. साथ ही पर्यटन सीजन के लिए विशेष कचरा प्रबंधन योजना तैयार की जाए ताकि झील और आसपास के पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे.


    लाइट और ध्वनि प्रदूषण भी चिंता का विषय

    बैठक में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने लाइट पॉल्यूशन और ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया. विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कृत्रिम रोशनी और लगातार बढ़ता शोर वन्यजीवों, पक्षियों और पहाड़ की प्राकृतिक जीवनशैली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है. इसलिए इन दोनों समस्याओं पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत बताई गई.


    कचरा निस्तारण को लेकर तैयारी

    अधिकारियों ने बताया कि जिले के नगरीय क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 230 मीट्रिक टन कूड़ा गोलापार ट्रंचिंग ग्राउंड भेजा जा रहा है. वहां जल्द ही आधुनिक कचरा निस्तारण मशीन स्थापित की जाएगी. इसके अलावा पुराने कूड़े के बड़े हिस्से का निस्तारण भी किया जा चुका है.


    सिर्फ सरकार नहीं, जनता की भी जिम्मेदारी

    बैठक के अंत में डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है. इसके लिए आम लोगों की भागीदारी और जागरूकता सबसे अधिक जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह केवल नैनीताल की खूबसूरती बचाने का सवाल नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा मुद्दा है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहाड़ों के जलस्रोत सूख गए, झीलें प्रदूषित हो गईं और जंगलों को नुकसान पहुंचा तो आने वाले समय में पहाड़ों की पहचान और प्राकृतिक विरासत दोनों पर संकट गहरा सकता है. इसी वजह से NGT ने प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है.

  • पश्चिम बंगालः टूट की कगार पर ममता बनर्जी की पार्टी TMC…. अलग गुट बनाने चले 60 MLAs

    पश्चिम बंगालः टूट की कगार पर ममता बनर्जी की पार्टी TMC…. अलग गुट बनाने चले 60 MLAs


    कोलकाता।
    ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) टूट की कगार पर है। अटकलें हैं कि पार्टी के दो फाड़ हो सकते हैं और करीब 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को समर्थन देने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। संभावनाएं हैं कि बुधवार को विधायक एकजुट होकर पश्चिम बंगाल विधानसभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंप सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो पार्टी 60 और 20 के गुट में बंट जाएगी और ममता बनर्जी गुट से विपक्ष का दर्ज भी छिन जाएगा।

    कथित नए गुट के सदस्यों ने 80 में से 60 टीएमसी विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है। एक नेता ने अखबार से कहा, ‘मान्यता पाने के लिए हमारा पत्र तैयार है, क्योंकि असली टीएमसी तैयार है। हम बुधवार को बंगाल विधानसभा स्पीकर रतींद्रनाथ बोस को पत्र सौंप देंगे।’ कहा जा रहा है कि ये सभी विधायक ऋतब्रत बनर्जी की उम्मीदवारी को समर्थन दे रहे हैं।


    पश्चिम बंगाल के मंत्री ने बढ़ाई चर्चा

    पश्चिम बंगाल के मंत्री तापस रॉय ने मंगलवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस में महाराष्ट्र जैसी टूट होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।रॉय ने दावा किया कि तृणमूल ने कई ऐसे लोगों को शामिल किया, जिनका राजनीति से ज्यादा सरोकार नहीं था। उन्होंने दावा किया कि अब पार्टी के अंदरूनी मतभेद और अंतर्विरोध सतह पर दिखाई देने लगे हैं।


    ऋतब्रत बनर्जी विधायकों से मिले

    विधानसभा परिसर से बाहर आने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ऋतब्रत बनर्जी ने स्वीकार किया कि उनकी मुलाकात विधायक हॉस्टल में कुछ विधायकों से हुई और उनके साथ मुरमुरा खाया था। बनर्जी ने कहा कि वह ‘एक-एक दिन के हिसाब से आगे बढ़ने’ में विश्वास रखते हैं। उन्होंने 50 से ज्यादा विधायकों के उनके साथ आने की अटकलों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

    उन्होंने दावा किया कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता निर्वाचित करने संबंधी कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। बनर्जी के अनुसार, जिस कागज पर उनके हस्ताक्षर लिए गए थे, वह महज उपस्थिति दर्ज करने के लिए था। टीएमसी ने ऋतब्रत समेत दो विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था।


    विरोध प्रदर्शन में नहीं पहुंचे सांसद और विधायक

    ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद मंगलवार को पहली बड़ी राजनीतिक लामबंदी की, लेकिन एस्प्लेनेड के वाई-चैनल पर आयोजित धरना कार्यक्रम में कम भीड़ और कई सांसदों-विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। बनर्जी के विरोध प्रदर्शन के लिए वाई-चैनल के बस अड्डे के करीब एक धरना मंच तैयार किया गया था।

    यहां चंद्रिमा भट्टाचार्य, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, डेरेक ओ’ब्रायन, फिरहाद हकीम और अन्य वरिष्ठ नेता बनर्जी के साथ मौजूद रहे, लेकिन बड़ी संख्या में सांसदों और विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलों को और बल दिया।

  • कॉलोनियों में घुसा पानी, मथुरा समेत कई जिलों में बरसात का असर

    कॉलोनियों में घुसा पानी, मथुरा समेत कई जिलों में बरसात का असर


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार बदलते मौसम ने एक बार फिर तबाही और राहत दोनों के हालात पैदा कर दिए हैं। तड़के हुई मूसलाधार बारिश के चलते आगरा में हालात सबसे ज्यादा गंभीर रहे, जहां कुछ ही घंटों की बारिश ने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में जलभराव हो गया, सड़कें धंस गईं और वाहनों के फंसने की घटनाएं सामने आईं।

    आगरा में सबसे बड़ा हादसा उस समय हुआ जब एक फुटपाथ और सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। देखते ही देखते करीब 25 फीट गहरा गड्ढा बन गया, जिसमें ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली समा गई। वहीं, सड़क किनारे खड़ी कारें और अन्य वाहन भी गड्ढों में फंस गए या पलट गए। छीपीटोला इलाके में बारिश के दबाव से एक मकान भी गिर गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    शहर की कई कॉलोनियों में पानी घुस जाने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घरों के अंदर तक पानी भर गया और सड़कों पर घुटनों तक जलजमाव देखने को मिला। हालात इतने खराब हो गए कि कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना पड़ा।

    इसी तरह मथुरा में भी देर रात हुई बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालु घुटनों तक पानी में चलते नजर आए। बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी बाधित हुआ, हालांकि नमी के कारण लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के 9 जिलों में आंधी-बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी जारी है, हालांकि यह धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। इसके बावजूद अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 3 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जो 5 जून तक पूरे उत्तर प्रदेश को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी यूपी में छिटपुट बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। हवा की रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

    लखनऊ के मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल लू का खतरा नहीं है और आने वाले दिनों में भी तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि बारिश के कारण कहीं राहत है तो कहीं बाढ़ जैसे हालात ने चिंता बढ़ा दी है।

    कुल मिलाकर यूपी में मौसम का यह बदलाव लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आया है। जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर बारिश से हुई तबाही ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • IPL जीत के बाद आध्यात्मिक सफर पर विराट कोहली, पहुंचे वृंदावन आश्रम

    IPL जीत के बाद आध्यात्मिक सफर पर विराट कोहली, पहुंचे वृंदावन आश्रम


    मथुरा । आईपीएल 2026 में शानदार जीत दर्ज करने के बाद Virat Kohli एक बार फिर आध्यात्मिक यात्रा पर नजर आए। मंगलवार सुबह वे अपनी पत्नी Anushka Sharma के साथ वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने केली कुंज आश्रम में संत Premanand Maharaj के दर्शन किए।

    दोनों सुबह करीब 7 बजे आश्रम पहुंचे और मास्क पहनकर कार से उतरने के बाद नंगे पैर आश्रम परिसर में प्रवेश किया। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने उनका स्वागत किया। विराट और अनुष्का लगभग दो घंटे तक आश्रम में रुके और संत से मुलाकात की। बाहर निकलने पर विराट के माथे पर चंदन और त्रिपुंड लगा हुआ था, जबकि उनके हाथ में एक धार्मिक पुस्तक भी दिखाई दी।

    आश्रम दर्शन के बाद दोनों ने लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम का भी दौरा किया। खास बात यह रही कि इस दौरान भी वे नंगे पैर पैदल ही चलते नजर आए। इस यात्रा के दौरान उनकी सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव की झलक देखने को मिली।

    इससे पहले भी विराट और अनुष्का कई बार वृंदावन आ चुके हैं। इसी साल 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर भी दोनों ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए थे और सत्संग में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि पिछले तीन वर्षों में यह उनकी सातवीं मुलाकात है, जिसमें इस वर्ष की यह तीसरी यात्रा शामिल है।

    गौरतलब है कि हाल ही में Royal Challengers Bengaluru ने अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया था। इस मुकाबले में विराट कोहली ने अहम भूमिका निभाई थी और अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन भी बनाए थे।

    आईपीएल में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद कोहली का यह आध्यात्मिक दौरा एक बार फिर चर्चा में है, जहां क्रिकेट की सफलता के बाद उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्राथमिकता दी।