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  • RS चुनावः झारखंड से 2 सीट और 3 उम्मीदवार… आज मतदान के बाद शाम तक साफ हो जाएगी तस्वीर

    RS चुनावः झारखंड से 2 सीट और 3 उम्मीदवार… आज मतदान के बाद शाम तक साफ हो जाएगी तस्वीर


    रांची।
    झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए आज वोटिंग होनी है. मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधानसभा परिसर में बने मतदान केंद्र पर होगा. शाम तक रिजल्ट भी आ जाएगा. झारखंड की दो सीटों पर तीन उम्मीदवार होने की वजह से चुनाव दिलचस्प हो गया है।

    तीसरे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी है, जिनका समर्थन एनडीए कर रहा है. एनडीए के पास 24 विधायक हैं. इनमें बीजेपी के 21, AJSU, जेडीयू और LJP(R) का 1-1 विधायक है. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास 34 विधायक हैं।

    राज्यसभा की सीट जीतने के लिए 28 विधायकों का समर्थन चाहिए. पहली सीट पर JMM उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत तय है. लेकिन असली लड़ाई दूसरी सीट के लिए है. दूसरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी हैं. एनडीए को जीत के लिए सिर्फ 4 वोट और चाहिए, जबकि कांग्रेस के पास 14 वोट कम पड़ रहे हैं।

    राज्यसभा चुनाव के लिए इंडिया और एनडीए के बीच अपना कुनबा बचाना सबसे बड़ी चुनौती है. सोमवार को सीएम आवास पर कांग्रेस प्रभारी के राजू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद साफ कर दिया था कि गठबंधन की सरकार को समर्थन दे रहे सभी 56 विधायकों को 16 और 17 जून को सीएम हाउस में हाजिरी लगानी होगी. के राजू ने बताया था कि वहां डिनर के दौरान मॉक पोल भी होगा. विधायकों को भी शहर में ही रहने का निर्देश दिया गया है.

    इधर NDA ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए सभी 24 विधायकों को एक साथ रांची के रेडिसन ब्लू में रहने के निर्देश दिए है. दो दिन से विधायक यहीं हैं और यहीं से वोटिंग के लिए जाएंगे. यानी पॉलिटिक्स होटल में शिफ्ट हो गई है.

    जाहिर है ऐसा इसलिए किया गया है कि पोचिंग की संभावना न हो. एनडीए के नेता भी बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सोमवार को आयोजित गठबंधन के बैठक के बाद चौंकन्ना हो गए हैं. बैठक से 7विधायक नदारद थे. चंपई सोरेन समेत सरयू राय सरीखे नेता बैठक में नहीं थे।

    कांग्रेस के नेता भी आग में घी का काम ये कहकर डालते रहे कि NDA के तीन विधायक संपर्क में है. हालांकि बाद में चंपई सोरेन के साथ नाथवानी की तस्वीर सामने सोशल मीडिया पर आई और सरयू राय की भी तस्वीर देखने को मिली।


    इंडिया ब्लॉक के 56 विधायक, फिर क्यों चिंता?

    वहीं, कांग्रेस और JMM के दावे हैं कि जब हेमंत सरकार को 56 विधायकों का समर्थन है तो कहां चिंता का विषय है? 2सीट के लिए जीत के लिए 56 विधायकों की ही जरूरत है. लिहाजा दोनों सीट पर उनके ही उम्मीदवार जीतेंगे।

    दोनों गठबंधन ने बैठके की है. दोनों ने मॉक पोल भी किया है. संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्णा किशोर ने मंगलवार रात सीएम हाउस में बैठक के बाद बताया था कि दोनों सीट पर उनकी जीत होगी. मॉक पोल में कांग्रेस को 27 और JMM को 27 मत मिले थे.


    एनडीए को क्रॉस वोटिंग से उम्मीद

    इस बीच NDA की उम्मीदें कोर्स वोटिंग पर टिकी है और इंडिया ब्लॉक क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए हर कोशिश कर रहा है. इसी कोशिश पर उसकी जीत का दारोमदार है. एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी का कहना है कि भले ही 4 वोट कम है लेकिन झारखंड से वो 2008 और 2014 में भी राज्यसभा जा चुके हैं और सभी ने उनका काम देखा है. उनका कहना है कि अंतरात्मा की आवाज पर उन्हें जीत के लिए 28 वोट मिल जाएंगे।


    दो सीटों पर क्यों हो रहे हैं चुनाव?

    बीजेपी के सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल खत्म हो रहा. दूसरी सीट शिबू सोरेन की थी, जिनका निधन हो चुका है. हालांकि, शिबू सोरेन अगर होते तो उनका कार्यकाल भी खत्म हो जाता।

  • ममता बनर्जी को एक और झटका…..असली TMC के नाम और सिंबल पर दावा ठोकेंगे बागी सांसद!

    ममता बनर्जी को एक और झटका…..असली TMC के नाम और सिंबल पर दावा ठोकेंगे बागी सांसद!


    कोलकाता
    । पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता छिनते ही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को एक के बाद झटके मिले रहे हैं। रविवार को ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को गहरा जख्म देकर तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के बागी सांसदों ने अब त्रिपुरा की एक पार्टी संग विलय का फैसला कर लिया है। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) से मिलकर लोकसभा में अलग सीट की व्यवस्था करने की मांग भी की है। इधर पार्टी से नए-नए बागी हुए सुदीप बंदोपाध्याय ने रविवार को संकेत दे दिए हैं कि बागी खेमा अगले महीने टीएमसी के नाम और सिंबल पर अपना दावा ठोकेगा। ऐसे में यह चर्चाएं भी तेज हो गई हैं कि NDA को लोकसभा में अपना सबसे बड़ा सहयोगी मिलने जा रहा है।

    इससे पहले लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों की बगावत के बाद, बागी खेमे को जिस ‘हेवीवेट’ की तलाश थी, वह भी अब पूरी हो गई है। कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और लोकसभा में टीएमसी के संसदीय दल के नेता रहे सुदीप बंदोपाध्याय भी अब आधिकारिक तौर पर बागी गुट में शामिल हो गए हैं। बागी गुट में शामिल होते ही सुदीप बंदोपाध्याय ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक बयान में कहा है बागियों का त्रिपुरा नेशनल सिटीजंस पार्टी (NCP) में विलय केवल एक अस्थायी व्यवस्था है।


    क्या है प्लान?

    लोकसभा में टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों का समर्थन होने की बात दोहराते हुए सुदीप बंदोपाध्याय ने बागियों की लॉन्ग टर्म रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, “जब आप 2-तिहाई बहुमत के साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो यही सिस्टम है। आप पहले ही दिन जा के नहीं बोल सकते कि हमें पार्टी का सिंबल दे दो।” उन्होंने आगे कहा कि बागी खेमा जुलाई में चुनाव आयोग और कोर्ट के सामने आधिकारिक मांग रखेगा कि उन्हें ही असली तृणमूल माना जाए, क्योंकि हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। इसके बाद कोर्ट इस पर फैसला करेगा।

    गौरतलब है कि रविवार को तृणमूल कांग्रेस में संकट उस वक्त और गहरा गया जब बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक बेहद कम चर्चित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय की घोषणा कर दी। यह पार्टी अब लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार को समर्थन देगी। लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसदों की अगुवाई करने वालीं काकोली घोष दस्तीदार ने एक बयान में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने बिरला को सौंपे गए आवेदन पर साइन किए हैं। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई लोकसभा सदस्यों ने एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में अपना विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे।”


    त्रिपुरा की पार्टी है NCPI

    ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ त्रिपुरा की एक रजिस्टर्ड पार्टी है। हालांकि इसकी कोई खास राजनीतिक मौजूदगी नहीं है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन इसके उम्मीदवार या तो नोटा से पीछे रहे या उन्हें उससे बस कुछ ही ज्यादा वोट मिले। इस बीच भाजपा ने कहा है कि अगर टीएमसी के सांसद NDA का समर्थन करना चाहते हैं तो यह देश के लिए अच्छा होगा।


    बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी बनेगी TMC

    लोकसभा में अगर टीएमसी के इस खेमे ने NDA को समर्थन दिया तो पार्टी बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी भी बन सकती है। बता दें कि बीजेपी के पास केंद्र में फिलहाल NDA के दो बड़े सहयोगी का समर्थन है। इसमें आंध्र प्रदेश की टीडीपी में 16 सांसद और ​जनता दल (यूनाइटेड) के 12 सांसद शामिल हैं। अब 20 से ज्यादा बागी टीएमसी सांसदों के समर्थन ने सदन में NDA की संख्या 313 तक बढ़ सकती है।

  • Bihar: वैशाली में बंद गोदाम में छुपा रखी थी 70 लाख की प्रतिबंधित सिरप जब्त… 175 कार्टन जब्त

    Bihar: वैशाली में बंद गोदाम में छुपा रखी थी 70 लाख की प्रतिबंधित सिरप जब्त… 175 कार्टन जब्त


    वैशाली।
    बिहार (Bihar) के वैशाली जिले (Vaishali district) से नशे के अवैध कारोबार (Illegal Drug Trade) का एक बड़ा मामला सामने आया है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर औद्योगिक थाना क्षेत्र में स्थित सिपेट संस्था के पास एक बंद पड़े गोदाम में छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप (Banned Cough Syrup) बरामद किया है. इस कार्रवाई में पुलिस ने 175 कार्टन कफ सिरप जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत 60 से 70 लाख रुपये बताई जा रही है. बरामद की गई कुल मात्रा करीब 2100 लीटर है।


    गोदाम के अंदर कार्टन में छिपाकर रखी गई थी सिरप

    जानकारी के अनुसार पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि इस इलाके में एक बंद गोदाम का इस्तेमाल अवैध रूप से नशीले पदार्थों के भंडारण के लिए किया जा रहा है. सूचना की पुष्टि होने के बाद सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने दंडाधिकारी की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर गोदाम की तलाशी ली. जब गोदाम को खोला गया तो अंदर रखे गए कार्टनों को देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. वहां बड़ी संख्या में प्रतिबंधित कफ सिरप के कार्टन छिपाकर रखे गए थे।

    पुलिस ने सभी कार्टनों को जब्त कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है. हालांकि छापेमारी के दौरान मौके से किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी. लेकिन जांच में यह पता चला है कि इस गोदाम को पटना निवासी आकाश कुमार नाम के व्यक्ति ने लीज पर ले रखा था. प्रारंभिक जांच में उसके इस अवैध कारोबार में संलिप्त होने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद उसके खिलाफ औद्योगिक थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।


    नशे के रूप में इस्तेमाल होती सिरफ

    सदर एसडीपीओ सुबोध कुमार ने बताया कि बरामद कफ सिरप की बड़ी खेप को नशे के रूप में अवैध इस्तेमाल के लिए जमा किया गया था. उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाना था. इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध नशे के कारोबार को लेकर हड़कंप मच गया है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस पूरे रैकेट का खुलासा किया जाएगा और इसमें शामिल अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी.

  • बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार

    बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार


    मुजफ्फरपुर।
    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (Medical Entrance Examination) NEET का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. पिछले महीने ही पेपर लीक (Paper leak) के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे. मामला इतना बढ़ा कि परीक्षा को लेकर बड़े स्तर पर जांच शुरू हुई, कई गिरफ्तारियां हुईं और कई राज्यों में छापेमारी तक हुई. अब जबकि 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित होने जा रही है, उससे पहले बिहार (Bihar) से सामने आई एक घटना ने फिर अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.

    मुजफ्फरपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो NEET परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों और उनके परिजनों से ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) कर रहा था. गिरोह टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था. पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले गिरोह के मुख्य आरोपी को जेल भेजा जा चुका है. अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


    टेलीग्राम पर बिक रहा था फर्जी पेपर

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया पर ऐसे ग्रुप और चैनल चला रहे थे, जहां NEET परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था. छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनके पास परीक्षा से पहले ही पेपर पहुंच जाएगा और इसके बदले मोटी रकम मांगी जाती थी. परीक्षा की तैयारी में जुटे हजारों छात्र और उनके परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में ऐसे झांसों का शिकार बन जाते थे. आरोपियों ने इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर ठगी का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।


    एक सूचना और खुल गई पूरी परत

    मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, 2 जून को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से संचालित एक गिरोह NEET परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर उसे टेलीग्राम के जरिए बेच रहा है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बालूघाट स्थित एक किराये के मकान पर छापेमारी की. वहां से गिरोह के मुख्य आरोपी मनीष झा को गिरफ्तार किया गया. तलाशी के दौरान उसके कब्जे से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ. शुरुआती जांच में ही कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई।


    बनाई गई विशेष जांच टीम

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया. पुलिस अधीक्षक नगर के पर्यवेक्षण और एएसपी नगर-1 के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल के बाद पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में सफलता मिली. लगातार चलाए गए अभियान के दौरान नगर थाना क्षेत्र से हर्ष, अमन कुमार और कन्हैया कुमार उर्फ मानव को गिरफ्तार किया गया. वहीं सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से हर्ष कनोडिया को दबोच लिया गया।


    पूछताछ में खुला ठगी का तरीका

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे टेलीग्राम के माध्यम से छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क करते थे. उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि परीक्षा से पहले असली प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा. आरोपी पहले कुछ नमूना सामग्री भेजते थे और फिर ऑनलाइन भुगतान की मांग करते थे. रकम मिलने के बाद या तो फर्जी प्रश्नपत्र भेज दिया जाता था या फिर संपर्क तोड़ दिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से प्राप्त धनराशि मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती थी, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।


    मोबाइल से मिले अहम सुराग

    गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. पुलिस अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है. माना जा रहा है कि इनके जरिए कई राज्यों के छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किया गया था. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं. पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है।


    21 जून की परीक्षा से पहले अलर्ट

    अब जबकि 21 जून को परीक्षा आयोजित होनी है, पुलिस और प्रशासन अभ्यर्थियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि कोई भी संस्था, व्यक्ति या सोशल मीडिया चैनल परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करता है तो उस पर भरोसा न करें. विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया पर सक्रिय ऐसे गिरोह छात्रों की मानसिक स्थिति और भविष्य की चिंता का फायदा उठाते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध संदेश, लिंक या ऑफर से बचना जरूरी है।


    पुलिस की चेतावनी

    पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. मामले में अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. फिलहाल मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि परीक्षा सीजन शुरू होते ही साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को किसी शॉर्टकट के बजाय अपनी मेहनत और तैयारी पर भरोसा करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

  • कोलकाता एयरपोर्ट से हटेगी बांकड़ा मस्जिद…. रनवे से मात्र 240 मीटर पर दूरी पर है स्थित

    कोलकाता एयरपोर्ट से हटेगी बांकड़ा मस्जिद…. रनवे से मात्र 240 मीटर पर दूरी पर है स्थित


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में शुभेंदु सरकार (Shubhendu Sarkar) आने के बाद कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कोलकाता एयरपोर्ट (Kolkata Airport) पर बनी बांकड़ा मस्जिद (Bankada Mosque) को वहां से हटाया जाएगा। यह मस्जिद एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी एयरसाइड जोन के अंदर बनी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार, रनवे से कम से कम 240 मीटर की दूरी पर ही कोई निर्माण होना चाहिए। इस मस्जिद को अब वहां से हटाया जाएगा।

    कोलकाता एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे के नजदीक बनी बांकड़ा मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना को कन्फर्म किया है। एयरपोर्ट डायरेक्टर विक्रम सिंह ने कहा कि पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग को इस साल हज ऑपरेशन पूरा होने के बाद गिरा दिया जाएगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर मौजूद यह मस्जिद लगभग 130 सालों से भी पुरानी बताई जाती है।


    मस्जिद हटने से दिक्कतें होंगी दूर

    इस मस्जिद को वहां से हटाकर दूसरी जगह ले जाने से एयरपोर्ट पर आ रहीं तमाम ऑपरेशनल दिक्कतें दूर हो सकती हैं। बता दें कि पिछले कई दशकों में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रनवे से मस्जिद हटाने की कई कोशिश की थी। यहां तक कि ज्योति बसु, ममता बनर्जी की सरकारों में भी इसे हटाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिल की।


    रनवे के काफी करीब है मस्जिद

    विमानन अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद के रनवे के करीब होने से सुरक्षा, नेविगेशन और भविष्य के विस्तार में बाधा पैदा होती है। यह मस्जिद सेकेंडरी रनवे के छोर से लगभग 165 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि मानकों के अनुसार अधिक सुरक्षा दूरी होनी चाहिए। पिछले महीने राज्य में शुभेंदु सरकार बनने के बाद इसे हटाने के लिए बातचीत तेज हुई थी। मस्जिद प्रबंधन और प्रशासन के बीच भी बातचीत से सहमति बनाने की कोशिश की गई थी।

  • ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

    ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार


    मुंबई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने शुक्रवार अनिल अंबानी (Anil Ambani) के करीबी और रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन सतीश सेठ (Satish Seth) को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया है, जहां से ईडी को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है. अब उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है.

    एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को मुंबई में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के दो पूर्व अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया।

    उन्होंने बताया कि गिरफ्तार के बाद सतीश को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है. चूंकि ये मामले दिल्ली में दर्ज है तो जांच एजेंसी की टीम रिमांड अवधि में सतीश को दिल्ली लाकर अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ-जांच के लिए हिरासत की मांग करेगी।

    केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस साल मार्च महीने में ही सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. सीबीआई की टीम ने इस जांच के हिस्से के रूप में दोनों अधिकारियों के परिसरों और ठिकानों पर छापेमारी भी की थी. सीबीआई की इसी शिकायत को आधार बनाकर ईडी ने दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की है।

    सीबीआई के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) कुल 11 बैंकों के उस कंसोर्टियम (समूह) का एक प्रमुख सदस्य था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी. इसी स्वीकृत लोन में से 114.98 करोड़ रुपये की राशि में भारी धोखाधड़ी और वित्तीय हेरफेर करने का गंभीर आरोप इन दोनों अधिकारियों पर लगा है।

    बता दें कि सतीश सेठ को लंबे समय तक अनिल अंबानी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है जो रिलायंस ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे बैंक लोन फ्रॉड मामले में सतीश सेठ और गौतम दोशी दोनों की वास्तविक भूमिकाओं की गहराई से जांच कर रहा है।

  • TMC के 20वें सांसद के भी बगावत के चर्चे…. बागी गुट ने पार्टी सिंबल पर ठोका अपना दावा

    TMC के 20वें सांसद के भी बगावत के चर्चे…. बागी गुट ने पार्टी सिंबल पर ठोका अपना दावा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों (West Bengal Assembly elections) में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC) की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर मची बगावत अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है। टीएमसी के बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र भेजकर संसद में खुद को असली टीएमसी के रूप में मान्यता देने और पार्टी सिंबल पर अपना दावा ठोका है। इस चिट्ठी के सामने के बाद 20वें सांसद के बगावत की भी चर्चा तेज हो गई है।

    सूत्रों के मुताबिक, यह पत्र 18 मई का है जिस पर टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं। दिलचस्प बात यह है कि पत्र में हस्ताक्षर करने वालों के सीरियल नंबर 1 से 20 तक हैं, लेकिन 13वें नंबर के आगे किसी का हस्ताक्षर नहीं है। इससे यह राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी का कोई अन्य कद्दावर सांसद भी इस बागी गुट के संपर्क में है और सही समय पर सामने आ सकता है।

    बागी गुट की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “हां, मैंने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और हमने इसे काफी समय पहले ही स्पीकर को भेज दिया था।” वहीं, सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा कि इस पत्र से यह साफ हो जाता है कि लोकसभा में असली टीएमसी हम ही हैं।


    इन 19 सांसदों के हस्ताक्षर

    शुक्रवार को सामने आई चिट्ठी में जिन सांसदों के हस्ताक्षर हैं उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हालदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बंदोपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सयानी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे नाम शामिल हैं।


    बागी गुट के सामने क्या विकल्प

    लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। इनमें ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं, जो इस समय बागियों के मुख्य निशाने पर हैं। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए बागी गुट के पास दो मुख्य रास्ते हैं। बागी गुट खुद को मूल पार्टी बताकर चुनाव आयोग (EC) के पास जा सकता है। इसके लिए उन्हें विधायी बहुमत साबित करना होगा। दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। 28 सांसदों का दो-तिहाई यानी 19 होता है। यही वजह है कि बागी गुट 19 सांसदों के साथ सुरक्षित होने का दावा कर रहा है।

    हाल ही में अप्रैल में आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 राज्यसभा सांसदों ने इसी तरह दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा में अपना विलय कर लिया था। यदि टीएमसी के ये 19 सांसद भी भाजपा या एनडीए में सीधे विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता बची रहेगी।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पर पलटवार करते हुए एक्स लिखा, “गद्दार टीएमसी सांसदों को कानून नहीं पता। 2003 के 91वें संविधान संशोधन ने पार्टी में विभाजन या अलग ब्लॉक के प्रावधान को खत्म कर दिया है। सांसदों की संख्या मायने नहीं रखती, मूल राजनीतिक दल के 2/3 हिस्से का किसी अन्य दल में विलय होना जरूरी है। इन सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए।”

    भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है, लेकिन वह फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे टीएमसी का आंतरिक विस्फोट और उनके पापों का नतीजा बताया है। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने इस हफ्ते दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “हमने टीएमसी को नहीं तोड़ा, वे खुद एनडीए और राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन करने के लिए हमारे पास आए हैं। अब यह उन्हें तय करना है कि वे एकनाथ शिंदे या अजीत पवार का रास्ता चुनते हैं या नहीं।”

    हालांकि, इस कूटनीतिक बढ़त के बीच बंगाल भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में थोड़ा असंतोष भी है। भाजपा का एक धड़ा इन टीएमसी बागियों को पार्टी में शामिल करने और भविष्य में एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री पद दिए जाने की संभावना का खुलकर विरोध कर रहा है।


    केंद्र सरकार को क्या होगा फायदा?

    भले ही स्थानीय स्तर पर मतभेद हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के लिए यह बहुत बड़ी राहत होगी। लोकसभा में इन 19 सांसदों का समर्थन मिलने से मोदी सरकार को परिसीमन विधेयक और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे बड़े और कड़े नीतिगत कानूनों को आसानी से पारित कराने में भारी मदद मिलेगी। वहीं राज्यसभा में भी टीएमसी के 3 सांसदों सुखेन्दु शेखर, सुष्मिता देव और प्रकाश बड़ाईक के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों को भाजपा विधानसभा में बहुमत के दम पर आसानी से जीत लेगी।

  • केरल में सरकारी निगम को बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा लेना पड़ा महंगा…देने पड़े 25 हजार

    केरल में सरकारी निगम को बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा लेना पड़ा महंगा…देने पड़े 25 हजार


    कोच्चि।
    अक्सर कई जगहों पर प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं और लोग इसे मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन केरल (Kerala) में एक ग्राहक से बीयर की बोतल (Beer bottle Price Case) पर 10 रुपये ज्यादा वसूलना सरकारी शराब निगम को भारी पड़ गया। कंज्यूमर कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन (KSBC) को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

    क्या है पूरा मामला?
    केरल के पथानामथिट्टा में एक शख्स ने KSBC के आउटलेट से 650 ml की एक बीयर की बोतल खरीदी। इस बीयर की बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 170 रुपये छपा था, लेकिन आउटलेट के कर्मचारियों ने इसके लिए 180 रुपये (यानी 10 रुपये अतिरिक्त) का बिल थमाया।

    जब ग्राहक ने रेट में इस अंतर का विरोध किया, तो कर्मचारियों ने बदसलूकी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिल में जो राशि लिखी है, वही देनी होगी और अगर कोई आपत्ति है तो जाकर शिकायत दर्ज करा दें। इसके बाद परेशान ग्राहक ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता आयोग) का दरवाजा खटखटाया और मुआवजे की मांग की।


    शराब निगम ने दी ये दलील

    कंज्यूमर कोर्ट में KSBC ने 180 रुपये वसूलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसके बचाव में कई तर्क पेश किए। निगम का कहना था कि केरल सरकार ने ‘सोशल सिक्योरिटी सेस’ (सामाजिक सुरक्षा उपकर) लागू किया था और शराब की कीमतों में संशोधन हुआ था, जिस वजह से 10 रुपये ज्यादा लिए गए। निगम ने दलील दी कि गोदामों और सप्लाई चेन में पहले से रखी करोड़ों शराब की बोतलों पर नई कीमत का लेबल (Re-labeling) लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

    निगम ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने स्टॉक को नई कीमत पर बेचने की सरकारी अनुमति थी और आउटलेट पर नई कीमतों का नोटिस भी लगाया गया था। साथ ही, ग्राहक पर ही काम में बाधा डालने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार करने का आरोप भी मढ़ दिया।


    कंज्यूमर कोर्ट की अहम टिप्पणी

    पथानामथिट्टा उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज बेबी और सदस्य निषाद थंकप्पन की बेंच ने 3 जून को सुनाए गए अपने आदेश में निगम की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियम 18(2) स्पष्ट रूप से रिटेलर्स को पैकेट पर छपे रिटेल प्राइस से अधिक कीमत पर सामान बेचने से रोकता है। 170 रुपये की MRP वाली बोतल 180 में बेचना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

    किसी भी ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे सरकार के अंदरूनी आदेशों या फाइलों की जानकारी हो। एक उपभोक्ता के तौर पर ग्राहक केवल पैकेट पर दी गई जानकारी पर भरोसा करता है। बोतल पर छपा MRP ही ग्राहक और विक्रेता के बीच कॉन्ट्रैक्ट प्राइस है। कोर्ट ने कहा कि MRP से ज्यादा पैसा वसूलना ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019’ के तहत ‘सर्विस में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ है।


    क्या सुनाया गया फैसला?

    अदालत ने माना कि इस अवैध वसूली की वजह से ग्राहक को भारी मानसिक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ा। इस तरह के ट्रेंड को रोकने के लिए आयोग ने सख्त फैसला सुनाते हुए KSBC को आदेश दिया कि ग्राहक से वसूले गए 10 रुपये अतिरिक्त राशि को शिकायत दर्ज करने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ वापस किया जाए। मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये भी चुकाने होंगे। कुल मिलाकर कॉरपोरेशन को 30 दिन के भीतर ग्राहक को 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

  • ममता का साथ छोड़ NDA को सपोर्ट कर रहे TMC के बागी सांसद…. यूसुफ पठान भी गुट में शामिल

    ममता का साथ छोड़ NDA को सपोर्ट कर रहे TMC के बागी सांसद…. यूसुफ पठान भी गुट में शामिल


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के संसदीय दल पर संकट गहराता नजर आ रहा है। अधिकांश सांसदों के समर्थन का दावा करने वाले पार्टी के एक गुट ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का साथ छोड़कर NDA का समर्थन करने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि इन बागी सांसदों के गुट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। ये सारा घटनाक्रम तब हुआ, जब बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचीं थीं।

    टीएमसी की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पठान का नाम भी होने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि 20 सांसदों ने बगावत की है और जरूरत पड़ी, तो वह सभी का नाम बता सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं एक-एक कर सभी का नाम बता सकती हूं। हम 20 सांसद हैं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहती।’


    महुआ मित्रा ने साधा निशाना

    सोमवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पठान पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, ‘और यूसुफ पठान आप दिल्ली जा रहे हैं, क्योंकि आपको अमित शाह का कॉल आया है? थोड़ी हिम्मत तो रखो। आप भारत के लिए खेले हैं। हमारे जिले ने आपको बड़े अंतर से जिताया है। थोड़ी शर्म और रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखो।’


    लोकसभा सीट पर हो गया था बवाल

    हाल ही में खबरें आई थीं कि टीएमसी ने बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान को सीट से इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश की थी। साथ ही इसके लिए भी पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली की मदद ली गई थी। ऐसा इसलिए ताकि ममता बनर्जी सीट से उपचुनाव लड़ सकें। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पूर्व क्रिकेटर ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था। हालांकि, बाद में गांगुली ने इन दावों को खारिज कर दिया था।


    ओम बिरला को लिख दिया पत्र

    बागी गुट की प्रमुख बताई जा रहीं दस्तीदार ने NDA को अपने समर्थन की जानकारी देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखने का फैसला किया है। दस्तीदार ने बताया, ‘मेरे समेत टीएमसी के लगभग बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है।’


    भाजपा में शामिल होंगे बागी?

    सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने टीएमसी से तुरंत इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे राजग का समर्थन करने वाले एक अलग गुट के रूप में काम करने का इरादा रखते हैं, जो दलबदल रोधी कानून से बचने के लिए बनाई गई एक रणनीति है। टीएमसी के पास फिलहाल लोकसभा में 28 सांसद हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद रिक्त है। 20 सांसदों का समर्थन मिलने पर दलबदल रोधी कानून लागू होने से रोकने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत आसानी से प्राप्त हो जाएगा।

    एक सूत्र ने बताया कि बागी सांसदों के एक समूह ने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की। बैठक की एक कथित तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है। इस तस्वीर में, राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय, सांसद अबू ताहिर, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद खेरवाल, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और शताब्दी रॉय के साथ दिखाई दे रहे हैं।

  • तमिनाडु: BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए आंदोलन को जबदस्त समर्थन, 10 घंटे में जुड़े लाख से अधिक लोग

    तमिनाडु: BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए आंदोलन को जबदस्त समर्थन, 10 घंटे में जुड़े लाख से अधिक लोग


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) भाजपा (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K. Annamalai) के इस्तीफा देने के बाद नए राजनीतिक आंदोलन ‘इधु नम्मा इयक्कम’ (New Political Movement ‘Idhu Namma Iyakkam’) (यह हमारा आंदोलन है) को जबरदस्त जनसमर्थन मिल रहा है। भाजपा से इस्तीफा देने के बाद शुरू किए गए इस अभियान में सिर्फ 10 घंटे के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों जुड़ चुके हैं। अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया।

    अन्नामलाई ने लिखा कि यह समर्थन उनके साझा विजन और मिशन में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने सभी समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह आंदोलन जनता की भागीदारी से और मजबूत हो रहा है।


    पार्टी छोड़ने के बाद नई राजनीतिक दिशा

    भाजपा से इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि वह एक नए और समावेशी राजनीतिक मंच की शुरुआत कर रहे हैं, जो आगे चलकर एक पूर्ण राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे की जानकारी दे दी थी।

    अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे में कहा कि तमिलनाडु को लेकर उनके और भाजपा नेतृत्व के दृष्टिकोण में अंतर था, जिसके चलते उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद देते हुए कहा कि वर्षों तक उन्हें जो समर्थन मिला, वह उनके लिए महत्वपूर्ण रहा।


    दिल्ली दौरे के बाद बढ़ी थीं अटकलें

    हाल ही में अन्नामलाई ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महासचिव बी.एल. संतोष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। पार्टी को मात्र 3 प्रतिशत वोट शेयर मिला था, जिसके बाद राज्य इकाई में बदलाव और नए नेतृत्व की चर्चा शुरू हो गई थी।


    इस्तीफे के पीछे राजनीतिक समीकरण भी अहम

    उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब 2026 विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन दोबारा सक्रिय हुआ है। इसके बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। अन्नामलाई के एआईएडीएमके के कुछ नेताओं के साथ संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। उनके विवादित बयानों और वैचारिक मतभेदों के कारण कई बार राजनीतिक विवाद भी उत्पन्न हुए। हाल ही में कुछ नेताओं के इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में कई कार्यकर्ता उनके नए राजनीतिक आंदोलन से जुड़ सकते हैं।


    क्या बनेगा नई ताकत का केंद्र?

    राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्नामलाई का यह नया आंदोलन तमिलनाडु में एक मजबूत विकल्प बन सकता है। उनके सोशल मीडिया दावे और शुरुआती समर्थन को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस नए राजनीतिक प्रयोग का असर राज्य की राजनीति पर दिखाई दे सकता है।