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  • काशी में गरजे सीएम योगी: सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए, ॐ जाप और सोमनाथ महोत्सव में गूंजे नारे

    काशी में गरजे सीएम योगी: सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए, ॐ जाप और सोमनाथ महोत्सव में गूंजे नारे



    नई दिल्ली। काशी विश्वनाथ धाम में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सनातन संस्कृति और भारत की आध्यात्मिक विरासत को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, वे इतिहास में खुद मिट गए हैं। योगी ने मुहम्मद गौरी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आक्रमणकारियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन वे भारत की आत्मा को कभी नहीं तोड़ सके। उन्होंने कहा कि भारत की चेतना अजर-अमर है और सनातन परंपरा आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी सदियों पहले थी।

    सीएम योगी ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर भारत के गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि काशी में आज भव्य और दिव्य धाम का स्वरूप दिखाई दे रहा है, जो भारत की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। इसी तरह सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की आध्यात्मिक शक्ति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दोनों मंदिर हमें यह संदेश देते हैं कि भले ही आक्रमण हों, लेकिन सनातन संस्कृति को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

    इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया और परिसर में ‘ॐ’ का जाप भी किया। कार्यक्रम के दौरान सोमनाथ मंदिर के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव का लाइव प्रसारण भी देखा गया। यह वही ऐतिहासिक मंदिर है जिसका 1951 में स्वतंत्र भारत में पुनः प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी।

    कार्यक्रम में धार्मिक माहौल देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने शंखनाद और डमरू वादन किया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। वहीं गुजरात से आई महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में ‘वोट फॉर भाईसाहब’ के नारे लगाए, जिससे माहौल राजनीतिक रंग भी लेता नजर आया।

    सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को फिर से वैश्विक पहचान दिला रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भारत अपनी परंपराओं पर उतना गर्व नहीं कर पाया, लेकिन अब देश अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और अपनी पहचान को मजबूती से स्थापित कर रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सोमनाथ मंदिर पर इतिहास में कई बार आक्रमण हुए और उसे नष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार वह फिर से अपने गौरव के साथ खड़ा हुआ। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है कि यहां विनाश अस्थायी है और सृजन हमेशा स्थायी रहता है।

    कार्यक्रम के अंत में सीएम ने कहा कि भारत के देवस्थल केवल पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी आस्था, संस्कृति और चेतना के प्रतीक हैं। इन्हें कोई शक्ति मिटा नहीं सकती और यही सनातन की सबसे बड़ी विशेषता है।

    इस पूरे आयोजन ने काशी में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को और भी भव्य बना दिया, जहां आस्था, इतिहास और आधुनिक भारत की सोच एक साथ दिखाई दी।

  • कानपुर : पत्नी मायके गई तो पति ने रचाई दूसरी शादी, स्नैपचैट से खुला राज; दहेज, अबॉर्शन और उत्पीड़न के गंभीर आरोप

    कानपुर : पत्नी मायके गई तो पति ने रचाई दूसरी शादी, स्नैपचैट से खुला राज; दहेज, अबॉर्शन और उत्पीड़न के गंभीर आरोप




    नई दिल्ली। कानपुर के चकेरी इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पत्नी के मायके जाने के दौरान पति ने चुपके से दूसरी शादी कर ली। इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा स्नैपचैट पर आई तस्वीरों से हुआ, जिसमें पति दूसरी महिला के साथ “पत्नी” लिखकर नजर आया। मामला सामने आने के बाद पीड़िता ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और गंभीर शारीरिक शोषण के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद उसे लगातार प्रताड़ित किया गया और दो बार जबरन गर्भपात कराया गया। महिला का कहना है कि ससुराल वालों ने खाने में दवा मिलाकर उसे नुकसान पहुंचाया, जिससे उसका गर्भ गिर गया। इसके अलावा, ननदोई पर भी कमरे में घुसकर गलत हरकत और शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाया गया है।

    शादी 2022 में एक मैट्रिमोनियल साइट के जरिए तय हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि शादी से पहले ही ससुराल पक्ष ने भारी दहेज की मांग की थी, जिसमें 50 लाख रुपये नकद, सोने के गहने और अन्य सामान शामिल थे। शादी के बाद भी लगातार पैसों की मांग और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना जारी रही।

    पीड़िता के अनुसार, मई 2025 में वह गर्भावस्था के दौरान मायके आ गई थी, और इसी दौरान पति ने दूसरी शादी कर ली। जब उसने इस बात की जानकारी परिवार से ली तो उसे टाल दिया गया और बाद में मामले की पुष्टि खुद सोशल मीडिया से हुई।

    पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों को बुलाकर बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

  • चंदौली में ‘मौत की ट्रेन’ का खौफ: 24 घंटे में दूसरी गोलीकांड से रेलवे में मचा हड़कंप

    चंदौली में ‘मौत की ट्रेन’ का खौफ: 24 घंटे में दूसरी गोलीकांड से रेलवे में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के चंदौली में रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महज 24 घंटे के भीतर दूसरी ट्रेन में हत्या की वारदात सामने आने से यात्रियों में दहशत फैल गई है। ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में युवक की हत्या के बाद अब कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस में एक यात्री को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। लगातार दो घटनाओं ने जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

    जानकारी के अनुसार, रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात करीब 1:30 बजे कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस डीडीयू जंक्शन से लखनऊ की ओर रवाना हुई थी। ट्रेन जैसे ही सिकटिया इलाके के पास पहुंची, तभी अज्ञात हमलावर ने बाथरूम के पास बैठे एक युवक के सिर में गोली मार दी। गोली चलते ही कोच में अफरा-तफरी मच गई और यात्री डर के मारे सहम गए। घटना की सूचना मिलते ही जीआरपी और आरपीएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    इससे पहले ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में भी एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और शव को ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया था। लगातार दूसरी वारदात के बाद रेलवे रूट पर सक्रिय आपराधिक गिरोहों और शराब तस्करी नेटवर्क की भूमिका को लेकर भी जांच तेज हो गई है। हालांकि पुलिस ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी एंगल की पुष्टि नहीं की है।

    एसपी जीआरपी प्रयागराज प्रशांत कुमार वर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम को एक्टिव कर दिया गया था और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। संदिग्धों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और यात्रियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि दोनों मामलों का जल्द खुलासा किया जाएगा।

    लगातार हो रही इन घटनाओं ने रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर रात में लंबी दूरी की ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों का कहना है कि ट्रेनों में पर्याप्त निगरानी और सुरक्षा जांच नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

  • नोएडा में पिज्जा शॉप पर बड़ा बवाल: थूककर खाना बनाने का आरोप, मालिक गिरफ्तार; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    नोएडा में पिज्जा शॉप पर बड़ा बवाल: थूककर खाना बनाने का आरोप, मालिक गिरफ्तार; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। नोएडा के सेक्टर-22 स्थित चौड़ा गांव में एक पिज्जा शॉप को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दुकान पर काम करने वाले शख्स मुजम्मिल पर पिज्जा तैयार करने के दौरान कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में गुस्सा भड़क गया और लोगों ने मौके पर पहुंचकर हंगामा किया।

    जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो में मुजम्मिल नाम का व्यक्ति पिज्जा तैयार करते समय संदिग्ध हरकत करता दिखाई दे रहा है। हालांकि आरोपी का दावा है कि वह आटे से धूल हटाने के लिए फूंक मार रहा था, लेकिन वीडियो के आधार पर स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

    मामला बढ़ने पर पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की फॉरेंसिक जांच और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में रोष है और वे खाद्य सुरक्षा व स्वच्छता नियमों के सख्त पालन की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और अगर कोई दोषी पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी।

  • X पर वायरल पोस्ट से गरमाई जौनपुर की सियासत: सपा सांसद प्रिया सरोज पर क्षेत्र से दूरी के गंभीर आरोप

    X पर वायरल पोस्ट से गरमाई जौनपुर की सियासत: सपा सांसद प्रिया सरोज पर क्षेत्र से दूरी के गंभीर आरोप




    नई दिल्ली। जौनपुर की राजनीति में समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स X पर एक कथित सपा समर्थक का पोस्ट वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। इस पोस्ट में सांसद पर क्षेत्र में सक्रिय न रहने और जनता के कामों से दूरी बनाए रखने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    वायरल पोस्ट में यूजर ने दावा किया है कि उन्होंने चुनाव के समय प्रिया सरोज और उनके परिवार के समर्थन में प्रचार किया था, लेकिन जीत के बाद सांसद क्षेत्र में कम सक्रिय रहती हैं और ज्यादा समय कथित तौर पर नोएडा और लखनऊ में बिताती हैं। पोस्ट में यह भी लिखा गया है कि अगर भविष्य में फिर से उन्हें टिकट दिया गया तो वह उनके खिलाफ प्रचार करेंगे।

    यह पोस्ट सीधे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा गया है, जिसके बाद मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। पोस्ट वायरल होने के बाद अलग-अलग यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ ने आरोपों का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत नाराजगी या राजनीतिक बयान बताया।

    कुछ अन्य यूजर्स ने भी सांसद की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में अधिक समय देना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने इसे पार्टी के अंदरूनी असंतोष के संकेत के रूप में भी देखा है।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रिया सरोज या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह बहस जौनपुर की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है और इसे आने वाले समय में राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
  • दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर फिर मौत का तांडव: तेज रफ्तार बाइक ट्रक से टकराई, दो युवाओं की दर्दनाक मौत

    दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर फिर मौत का तांडव: तेज रफ्तार बाइक ट्रक से टकराई, दो युवाओं की दर्दनाक मौत



    नई दिल्ली। गाजियाबाद में दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi–Meerut Expressway) पर एक बार फिर रफ्तार ने दो युवाओं की जान ले ली। यह दर्दनाक हादसा भोजपुर इलाके के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार बाइक आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई और दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।

    जानकारी के अनुसार, दीपू (18) और सागर (18) बाइक से दिल्ली से गाजियाबाद की ओर जा रहे थे। बाइक सागर चला रहा था और दीपू पीछे बैठा था। जैसे ही दोनों भोजपुर के पास पहुंचे, अचानक आगे चल रहे ट्रक ने ब्रेक लगा दिया। तेज रफ्तार में होने के कारण बाइक ट्रक से जा टकराई और दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे के बाद मौके पर पहुंची पेट्रोलिंग टीम ने दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, सागर ने हेलमेट पहना था जबकि दीपू बिना हेलमेट था, जिससे चोट और गंभीर हो गई।

    टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक चालक मौके से वाहन लेकर फरार हो गया। पुलिस अब ट्रक की पहचान के लिए एक्सप्रेसवे पर लगे CCTV फुटेज की जांच कर रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बाइक पर प्रतिबंध होने के बावजूद दोनों युवक करीब 30 किलोमीटर तक एक्सप्रेसवे पर कैसे पहुंच गए और किसी भी चेकिंग पॉइंट पर उन्हें रोका क्यों नहीं गया। इससे सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    हादसे के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मच गया है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय लोग लगातार हो रहे ऐसे हादसों को लेकर प्रशासन से सख्त निगरानी और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    कुल मिलाकर यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि नियमों की अनदेखी और तेज रफ्तार किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, खासकर हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर जहां छोटी सी गलती भी बड़ा हादसा बन जाती है।

  • अमरोहा में खून के रिश्तों का काला सच: नशे से परेशान परिवार ने ही कर दी बेटे की 5 लाख की सुपारी देकर हत्या

    अमरोहा में खून के रिश्तों का काला सच: नशे से परेशान परिवार ने ही कर दी बेटे की 5 लाख की सुपारी देकर हत्या



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक परिवार पर अपने ही 35 वर्षीय बेटे की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है। मामला डिडौली कोतवाली क्षेत्र के शमपुर गांव, अमरोहा का है, जहां सूखी गंगनहर में युवक दुष्यंत का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

    पुलिस जांच में सामने आया कि दुष्यंत लंबे समय से नशे का आदी था और आए दिन घर में विवाद और मारपीट करता था। इसी से परेशान होकर कथित तौर पर उसके परिवार ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची। आरोप है कि इस साजिश में छोटे भाई संकित ने अपने दोस्त के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।

    जानकारी के अनुसार, हत्या के लिए लगभग 5 लाख रुपये की सुपारी देने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि दुष्यंत को ईंट से सिर पर वार कर गंभीर रूप से घायल किया गया और फिर उसके शव को गंगनहर में फेंक दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

    घटना के अगले दिन शव मिलने के बाद गांव में हड़कंप मच गया। मृतक के सिर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए, जिससे हत्या की पुष्टि और मजबूत हो गई। पुलिस ने जांच शुरू की और जब परिवार से पूछताछ की गई तो मामला संदिग्ध लगा।

    एसपी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि मृतक का आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी चोरी और मारपीट जैसे मामलों में जेल जा चुका था। पूछताछ के बाद परिवार के कुछ सदस्यों ने अपराध में संलिप्तता की बात स्वीकार की है, जिसके बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    कुल मिलाकर यह मामला नशे, पारिवारिक तनाव और अपराध की ऐसी दर्दनाक कहानी बन गया है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है।

  • योगी का मास्टरस्ट्रोक: कैबिनेट विस्तार से PDA पर वार, 2027 चुनाव से पहले बदला पूरा सियासी गेम!

    योगी का मास्टरस्ट्रोक: कैबिनेट विस्तार से PDA पर वार, 2027 चुनाव से पहले बदला पूरा सियासी गेम!



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट विस्तार के जरिए एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका सीधा टारगेट समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूला (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को कमजोर करना माना जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार नए मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को शामिल किया गया है, जिसमें तीन OBC, दो दलित और एक ब्राह्मण नेता को जगह दी गई है। इसके साथ ही कुछ नेताओं को प्रमोशन भी दिया गया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

    इस विस्तार में खास ध्यान उन समुदायों पर दिया गया है, जो लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी से कुछ हद तक दूर माने जा रहे थे। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि हर वर्ग को सरकार में हिस्सेदारी दी जा रही है।

    विशेष रूप से ओबीसी और दलित समुदाय के छोटे-छोटे जातीय समूहों को शामिल कर बीजेपी ने अपनी “सोशल इंजीनियरिंग” को और मजबूत किया है। वहीं एक ब्राह्मण नेता को शामिल कर उच्च जातियों के संतुलन को भी बनाए रखने की कोशिश की गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह चुनावी रणनीति है, जिसका उद्देश्य 2027 से पहले सपा के PDA फॉर्मूला नैरेटिव को कमजोर करना है।

    हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह बदलाव चुनावी फायदा लेने की कोशिश है, जबकि बीजेपी का दावा है कि यह सामाजिक प्रतिनिधित्व और विकास आधारित प्रशासन का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर यह कैबिनेट विस्तार उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जहां जातीय समीकरण और वोट बैंक की राजनीति एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभाने वाली है।

  • तमिलनाडु नए सीएम के शपथ समारोह में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के बजा राज्य गीत, मचा सियासी संग्राम

    तमिलनाडु नए सीएम के शपथ समारोह में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के बजा राज्य गीत, मचा सियासी संग्राम


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) के नए मुख्यमंत्री (New Chief Minister) और टीवीके चीफ जोसेफ विजय (TVK Chief Joseph Vijay) के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तमिलनाडु के राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ (Tamil Thai Vazhthu) को देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बाद तीसरे स्थान पर गाए जाने को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं, ऐसे में इस घटनाक्रम ने राज्य के सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में रविवार को आयोजित भव्य समारोह में टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह के शुरुआत में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया गया, जबकि परंपरागत रूप से राज्य के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में गाए जाने वाले ‘तमिल थाई वजथु’ को वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया।

    इसी बात को लेकर विपक्षी दलों और टीवीके को समर्थन देने वाले सहयोगी दलों ने कड़ी नाराजगी जताई है. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के तमिलनाडु राज्य सचिव एम वीरपांडियन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ‘तमिल थाई वजथु’ को हमेशा सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में सम्मानपूर्वक गाया जाता रहा है और उसे उसका उचित स्थान मिलना चाहिए. उन्होंने टीवीके प्रमुख विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए।


    TVK के सहयोगी दलों ने जताई नाराजगी

    सीपीआई के साथ-साथ सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल जैसी पार्टियों ने भी टीवीके सरकार को समर्थन दिया है, इसलिए सहयोगी दलों की ओर से उठी यह नाराजगी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है. पीएमके संस्थापक एस रामदास ने भी बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार को सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वजथु’ को उचित सम्मान और प्राथमिकता सुनिश्चित करनी चाहिए. वहीं वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि तमिल पहचान और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।

    विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा. टीवीके विधायक एम वी करुप्पैया के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ग्रहण समारोह में भी ‘तमिल थाई वजथु’ को वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया था. इसके बाद यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ने लगा है. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा लंबे समय से बेहद संवेदनशील रहा है. द्रविड़ राजनीति की पूरी विचारधारा ही तमिल भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता के इर्द-गिर्द विकसित हुई है. ऐसे में मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ को प्राथमिकता नहीं दिए जाने को विपक्ष और सहयोगी दल तमिल पहचान की उपेक्षा के तौर पर पेश कर रहे हैं।


    विवाद पर टीवीके सरकार ने दी सफाई

    हालांकि, विवाद बढ़ने पर टीवीके सरकार में मंत्री आधव अर्जुन स्पष्टीकरण जारी किया. उन्होंने कहा, ‘नीरारुम कदलुथुदा… से शुरू होने वाला तमिल वंदना गीत तमिल समाज की 100 साल से अधिक पुरानी सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक है. तमिलनाडु सरकार ने इसे राज्य गीत का दर्जा दिया है और परंपरा के अनुसार राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत इसी गीत से होती है, जबकि अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है. हालांकि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह में पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम्, फिर राष्ट्रगान जन मन गण और उसके बाद तमिल थाई वजथु प्रस्तुत किया गया।

    आधव अर्जुन ने आगे कहा, ‘टीवीके सरकार इस नई व्यवस्था से सहमत नहीं है. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की ओर से बताया गया कि केंद्र सरकार के नए सर्कुलर के कारण ऐसा करना पड़ा. टीवीके सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में पुरानी परंपरा ही लागू रहेगी, यानी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वजथु’ से होगी और अंत राष्ट्रगान से किया जाएगा. पार्टी ने यह भी कहा कि देश के सभी राज्यों में राज्य भाषा के वंदना गीत को कार्यक्रम की शुरुआत में सम्मानपूर्वक स्थान मिलना चाहिए।

  • योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट

    योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) के तीसरे और आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) के साथ ही बीजेपी (BJP) ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए पॉलिटिकल टोन सेट कर दिया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को लखनऊ के लोक भवन में 6 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई और दो मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन किया. जिन 6 नए मंत्रियों ने शपथ ली उनमें से 5 दलित और ओबीसी समुदाय से हैं, जबकि एक मंत्री ब्राह्मण बिरादरी से.

    यह मंत्रिमंडल विस्तार किसी नए प्रयोग के बजाय स्पष्ट तौर पर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की रणनीति के तहत तैयार किया गया है. बीजेपी ने जातीय संतुलन साधने के लिए बेहद संतुलित और सोच-समझकर नए मंत्रियों के चुनाव किए हैं. पार्टी का फोकस ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोध और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाली अन्य जाति समुदायों पर रहा है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक और सामाजिक पकड़ को और मजबूत किया जा सके. यही कारण रहा कि मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में देर रात तक बीजेपी नेताओं का मंथन और बैठकों का दौर चला।

    इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पिछड़े और दलित वर्गों के प्रमुख समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया गया. भाजपा ने 2027 चुनाव से पहले इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सामाजिक और जातीय समीकरण साधने और अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की काट खोजने की कोशिश की है. मार्च 2022 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योगी 2.0 सरकार बनी थी, तब कुल 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी।


    कैबिनेट में 22 सवर्ण, 25 OBC और 10 दलित मंत्री

    उस समय मंत्रिमंडल में 21 सवर्ण, 20 ओबीसी और 8 दलित नेताओं को जगह दी गई थी. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य संख्या के लिहाज से राज्य के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 60 मंत्री हो सकते हैं. अब तीसरे और अंतिम मंत्रिमंडल विस्तार के बाद योगी सरकार के सभी 60 मंत्री पद भर चुके हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल में 22 सवर्ण, 25 ओबीसी और 10 दलित मंत्री हैं. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख मंत्री भी शामिल हैं।


    सवर्ण समीकरण में ब्राह्मण और ठाकुर चेहरे अहम

    यूपी कैबिनेट में 2022 में सवर्ण वर्ग से बनाए गए मंत्रियों में 7 ब्राह्मण, 8 ठाकुर, 3 वैश्य, 2 भूमिहार और 1 कायस्थ नेता शामिल थे. बीजेपी ने उस समय ब्राह्मण संतुलन साधने के लिए ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया था, जबकि जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाकर पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. साल 2024 में योगी मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार किया गया था, जिसमें 4 नए मंत्रियों को शामिल किया गया. इनमें 2 ओबीसी, 1 दलित और 1 ब्राह्मण नेता को जगह मिली थी।

    उस दौरान समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ आए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, सपा से बीजेपी में वासपी करने वाले दारा सिंह चौहान, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से अनिल कुमार और साहिबाबाद से बीजेपी विधायक सुनील कुमार शर्मा को मंत्री बनाया गया था. उस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई थी।


    विधायकों के सांसद चुने जाने के बाद खाली हुईं सीटें

    लोकसभा चुनाव 2024 के बाद योगी सरकार के दो मंत्री जितिन प्रसाद और अनूप वाल्मीकि संसद पहुंच गए. दोनों ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. जितिन प्रसाद शाहजहांपुर से सांसद बनने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए, जबकि दलित चेहरा अनूप वाल्मीकि हाथरस से सांसद चुने गए. इन इस्तीफों के बाद योगी मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 56 से घटकर 54 हो गई थी।

    कैबिनेट में जितिन प्रसाद का रिप्लेसमेंट मनोज पांडे
    जितिन प्रसाद के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद योगी मंत्रिमंडल में ब्राह्मण मंत्रियों की संख्या 8 से घटकर 7 रह गई थी. अब हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में रायबरेली जिले के ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर बीजेपी ने एक बार फिर ब्राह्मण संतुलन साधने की कोशिश की है. मनोज पांडेय के बागी होने के बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था और वर्तमान में वह निर्दलीय विधायक के रूप में विधानसभा के सदस्य हैं. मनोज पांडे को योगी कैबिनेट में काफी हद तक जितिन प्रसाद के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी ने दो साल बाद ही सही, लेकिन योगी कैबिनेट में फिर एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा शामिल कर सामाजिक और जातीय समीकरणों को संतुलित करने का संदेश दिया है।


    मंत्रिमंडल विस्तार के केंद्र में है जातिगत समीकरण

    मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए सदस्यों में कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक कैलाश राजपूत और अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर शामिल हैं. वाल्मीकि समुदाय से आने वाले सुरेंद्र दिलेर को भाजपा द्वारा दलित मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कैलाश राजपूत को मंत्री बनाकर पार्टी ने लोध मतदाताओं के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की है. शपथ लेने वाले अन्य मंत्रियों में पासी समुदाय से आने वाले फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान और वाराणसी के एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं, जिन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माना जाता है।

    हंसराज विश्वकर्मा को शामिल कर बीजेपी ने पूर्वांचल में गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने का स्पष्ट संदेश दिया है. हंसराज 34 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं. उन्होंने 1989 में बूथ स्तर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था और राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी. वहीं, कृष्णा पासवान के जरिए पार्टी ने गैर-जाटव दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. कृष्णा पासवान ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी. वह चार बार की विधायक हैं और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं. वह भाजपा की प्रमुख दलित महिला चेहरा मानी जाती हैं।


    भूपेंद्र चौधरी करेंगे वेस्ट यूपी व जाटों का प्रतिनिधित्व

    इसके अलावा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट में वापसी पश्चिमी यूपी में जाट प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है. उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में शामिल भूपेंद्र चौधरी मुरादाबाद के रहने वाले हैं और लंबे समय तक संघ और भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं. चौधरी वर्ष 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने. 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया और 2019 में कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज की जिम्मेदारी मिली. उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे की वजह सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य बनाए रखना है।


    दो मंत्रियों को प्रमोशन देने में छिपा है सियासी संदेश

    सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को मिली जिम्मेदारियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार बदलाव के साथ निरंतरता बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है. सोमेंद्र तोमर मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक और ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत राज्य मंत्री ​थे, सरकार में उनका कद बढ़ाकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कर दिया गया है. इसी तरह कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से विधायक अजीत पाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री थे. उनका भी प्रमोशन करके राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।