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  • गोंडा में अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय, संविधान की शपथ लेकर दूल्हा-दुल्हन ने लिए सात जन्म साथ निभाने के संकल्प

    गोंडा में अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय, संविधान की शपथ लेकर दूल्हा-दुल्हन ने लिए सात जन्म साथ निभाने के संकल्प



    नई दिल्ली। गोंडा में एक अनोखी शादी इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जहां आमतौर पर शादियां पारंपरिक रीति-रिवाजों, मंत्रों और धार्मिक रस्मों के बीच संपन्न होती हैं, वहीं जिले के नवाबगंज क्षेत्र में एक युवक ने संविधान की प्रस्तावना पढ़कर और उसकी शपथ लेकर विवाह रचाया। इस अनोखे “संवैधानिक विवाह” को लेकर अब सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक बहस छिड़ गई है।

    दरअसल, नवाबगंज ब्लॉक के ग्राम सतिया सुरजापुर निवासी जयश वर्मा, जो समाजवादी पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव के भतीजे बताए जा रहे हैं, ने अपनी शादी को अलग अंदाज देने का फैसला किया। उन्होंने पारंपरिक धार्मिक रस्मों के बजाय भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए विवाह किया और समानता, स्वतंत्रता तथा आपसी सम्मान के मूल्यों को अपने वैवाहिक जीवन का आधार बताया।

    शादी समारोह में मौजूद लोगों के सामने जयश वर्मा और उनकी जीवनसाथी ने संविधान के प्रति आस्था जताते हुए नई जिंदगी की शुरुआत की। इस दौरान समारोह में शामिल लोगों ने भी इस अनोखी पहल को उत्सुकता से देखा। शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया है।

    जयश वर्मा का कहना है कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में हर धर्म और समुदाय की अपनी परंपराएं हैं, लेकिन सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा भारतीय संविधान देता है। उनका मानना है कि जब संविधान हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करता है, तो जीवन के सबसे महत्वपूर्ण फैसले की शुरुआत भी उसी मूल भावना के साथ होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी परंपरा का विरोध करना नहीं, बल्कि संविधान में निहित समानता, न्याय और सम्मान के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना है। जयश के इस फैसले को कुछ लोग नई सोच और सामाजिक बदलाव की मिसाल बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे परंपराओं से अलग कदम मानकर चर्चा कर रहे हैं।

    फिलहाल गोंडा की यह अनोखी शादी लोगों के बीच बहस और जिज्ञासा दोनों का विषय बनी हुई है। कई लोग इसे आधुनिक सोच और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ी नई पहल बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक परंपराओं से हटकर उठाया गया साहसिक कदम मान रहे हैं।

  • ब्रज को बनाओ पूरी तरह सात्विक, प्रेमानंद महाराज की योगी सरकार से बड़ी मांग; मांस-मदिरा बैन पर फिर छिड़ी बहस

    ब्रज को बनाओ पूरी तरह सात्विक, प्रेमानंद महाराज की योगी सरकार से बड़ी मांग; मांस-मदिरा बैन पर फिर छिड़ी बहस



    नई दिल्ली। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने एक बार फिर ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा मुक्त बनाने की मांग उठाकर धार्मिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करते हुए कहा कि मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज मंडल की पवित्रता बनाए रखने के लिए यहां मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    अपने दैनिक सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ब्रज केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीलाभूमि है। उन्होंने कहा कि जिस धरती पर भगवान कृष्ण ने बाल लीलाएं कीं और प्रेम, भक्ति व करुणा का संदेश दिया, वहां मांस और मदिरा की बिक्री उचित नहीं मानी जा सकती। महाराज ने कहा कि ब्रज की पहचान उसकी आध्यात्मिकता और सात्विक संस्कृति से है, इसलिए इसकी गरिमा को बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने कहा कि हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से मथुरा, वृंदावन, बरसाना और गोवर्धन जैसे पवित्र स्थलों पर दर्शन और भक्ति के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ब्रज क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह धार्मिक और शांतिपूर्ण होना चाहिए। प्रेमानंद महाराज का मानना है कि यदि पूरे ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा मुक्त घोषित किया जाता है, तो इससे यहां की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।

    गौरतलब है कि इससे पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी ब्रज क्षेत्र में शराब और मांस बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली से मथुरा तक पदयात्रा निकालते हुए कहा था कि धार्मिक नगरी में शराब की दुकानों की मौजूदगी श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।

    हालांकि, इस मुद्दे पर पहले विवाद भी हो चुके हैं। कुछ समय पहले मथुरा में कुछ युवकों ने कथित तौर पर जबरन शराब की दुकान बंद कराने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था। प्रशासन ने साफ किया था कि कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

    अब प्रेमानंद महाराज के ताजा बयान के बाद ब्रज क्षेत्र में मांस-मदिरा प्रतिबंध की मांग फिर सुर्खियों में आ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ब्रज की धार्मिक पहचान से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इस विषय पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर संतुलित फैसला लिया जाना चाहिए।

  • 5500 साल पुराने हरिदेव मंदिर पर ताला, सेवा विवाद में आमने-सामने आए दो गुट; दर्शन बंद होने से श्रद्धालुओं में रोष

    5500 साल पुराने हरिदेव मंदिर पर ताला, सेवा विवाद में आमने-सामने आए दो गुट; दर्शन बंद होने से श्रद्धालुओं में रोष



    मथुरा। मथुरा के गोवर्धन स्थित प्राचीन ठाकुर श्री हरिदेव जी महाराज मंदिर में सेवा अधिकार को लेकर गोस्वामी समाज के दो गुटों के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ा कि शुक्रवार देर रात पुलिस ने मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया। इसके बाद श्रद्धालुओं का मंदिर में प्रवेश बंद हो गया और दर्शन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।

    स्थानीय लोगों और गोस्वामी समाज के सदस्यों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निजी विवाद के बीच पुलिस ने ऐतिहासिक मंदिर को बंद कर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है। लोगों का आरोप है कि मंदिर में विराजमान ठाकुर जी “कैद” हो गए हैं और नियमित पूजा-पाठ भी बाधित हो गया।

    विवाद के दौरान स्थिति और तनावपूर्ण तब हो गई जब कुछ लोग मंदिर के पीछे के दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने खुद को मंदिर परिसर में बंद कर लिया और जबरन सेवा करने का दावा करने लगे। वहीं दूसरा पक्ष आरोप लगा रहा है कि सेवा का अधिकार इस महीने उनका है, लेकिन विरोधी गुट अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठा है।

    गोवर्धन का यह हरिदेव मंदिर ब्रज क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र ब्रजनाभ ने कराई थी। करीब 5500 साल पुराने इस मंदिर को ब्रज के चार प्रमुख देव स्थलों में गिना जाता है, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    मुख्य द्वार बंद होने और मंदिर के भीतर तनावपूर्ण हालात के चलते पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन मंदिर बंद होने से श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

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  • झांसी-खजुराहो फोरलेन पर दौड़ते डंपर में लगी भीषण आग, टोल प्लाजा के बूथ-बैरियर जले; फायर ब्रिगेड पहुंचने में हुई देरी

    झांसी-खजुराहो फोरलेन पर दौड़ते डंपर में लगी भीषण आग, टोल प्लाजा के बूथ-बैरियर जले; फायर ब्रिगेड पहुंचने में हुई देरी



    नई दिल्ली। छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह झांसी-खजुराहो फोरलेन स्थित देवगांव टोल प्लाजा पर एक डंपर में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरे डंपर को अपनी चपेट में ले लिया और टोल प्लाजा के सेंसर बैरियर व बूथ तक पहुंच गई। करीब एक घंटे तक डंपर धू-धू कर जलता रहा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि चालक समय रहते कूद गया और उसकी जान बच गई।

    जानकारी के मुताबिक, MP16ZF8199 नंबर का डंपर बमीठा से छतरपुर की ओर जा रहा था। सुबह करीब 8 बजे जैसे ही वाहन देवगांव टोल प्लाजा पहुंचा, अचानक केबिन से धुआं उठने लगा। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी मानी जा रही है। चालक ने पहले खुद कंबल की मदद से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही मिनटों में लपटें तेज हो गईं और पूरा डंपर आग का गोला बन गया।

    डंपर में डस्ट भरी हुई थी, जिससे आग और तेजी से फैल गई। आग की ऊंची लपटों ने टोल प्लाजा के सेंसर बैरियर और बूथ को भी अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद टोल कर्मचारियों और यात्रियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन दमकल वाहन करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचा। तब तक डंपर पूरी तरह जल चुका था।

    फायर ब्रिगेड ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, टोल प्लाजा को 2 से 3 लाख रुपए तक का नुकसान हुआ है। वहीं डंपर पूरी तरह खाक हो गया। घटना के चलते फोरलेन पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    स्थानीय लोगों ने टोल प्लाजा प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी व्यस्त जगह पर आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। लोगों का कहना है कि अगर शुरुआती स्तर पर फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय होता, तो नुकसान कम हो सकता था। फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की जांच में जुटे हैं।

  • नोएडा में दर्दनाक मामला: जलती चिता से निकला मोनिका का शव, मौत पर उठे गंभीर सवाल

    नोएडा में दर्दनाक मामला: जलती चिता से निकला मोनिका का शव, मौत पर उठे गंभीर सवाल



    नई दिल्ली। नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक युवती मोनिका की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उसके शव को जलाने की कोशिश का आरोप लगा है। परिजनों ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    मृतका की मां रेनू नागर के अनुसार, घटना वाले दिन दोपहर करीब 2:50 बजे मोनिका ने उन्हें फोन किया था और रोते हुए कहा था कि उसके पति और ससुराल वाले उसे मार रहे हैं और प्रॉपर्टी अपने नाम कराने का दबाव बना रहे हैं। फोन कॉल के बाद कुछ ही घंटों में मोनिका की मौत की सूचना मिली।

    परिजनों का आरोप है कि गुरुवार शाम दादरी थाना क्षेत्र के घोड़ी गांव में मोनिका की हत्या के बाद उसके शव को जलाने की कोशिश की गई। परिवार का कहना है कि जब वे मौके पर पहुंचे तो ससुराल पक्ष के लोग शव को एक गाड़ी में ले जा रहे थे और पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे थे।

    बताया गया कि आरोपियों ने शव को बोडाकी मेट्रो स्टेशन के पीछे ले जाकर चिता पर रखा और उसे जलाने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली और मौके पर पहुंचकर पुलिस ने जलती चिता से शव को बाहर निकाला। हालांकि तब तक शव काफी हद तक जल चुका था।

    परिजनों के अनुसार, आरोपियों ने एक फॉर्च्युनर गाड़ी का इस्तेमाल किया, जिस पर “धर्मपाल सिंह चौधरी” नाम लिखा हुआ था। परिवार का दावा है कि उन्होंने गाड़ी का पीछा भी किया, लेकिन आरोपी टक्कर मारकर फरार हो गए।

    मोनिका की मां का आरोप है कि उनकी बेटी की शादी इसी साल 17 फरवरी को अनुज चौहान से हुई थी। शादी के बाद से ही उस पर 5 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अपने नाम कराने का दबाव बनाया जा रहा था। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी।

    पुलिस के अनुसार, शव इतना ज्यादा जल चुका था कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका है। फिलहाल इसे बर्न इंजरी के रूप में दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि विस्तृत जांच के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

    एसीपी दादरी प्रशाली गंगवार ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।

    इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। परिजन इसे सुनियोजित हत्या बताकर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    दो लाइन का सार:
    नोएडा में मोनिका की संदिग्ध मौत और जलती चिता से शव बरामद होने के मामले ने सनसनी फैला दी है। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर हत्या और प्रॉपर्टी के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

    Tags: Noida Crime, Dowry Case, Murder Investigation, Breaking News, Uttar Pradesh News, Domestic Violence, Police Investigation, Crime News

  • Ghaziabad: सर्विस सेंटर में गैस सिलेंडर और AC कंप्रेसर में ब्लास्ट… भीषण आग लगने से जले कई वाहन, एक बुजुर्ग की मौत

    Ghaziabad: सर्विस सेंटर में गैस सिलेंडर और AC कंप्रेसर में ब्लास्ट… भीषण आग लगने से जले कई वाहन, एक बुजुर्ग की मौत


    गाजियाबाद।
    गाजियाबाद (Ghaziabad) से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां पटेल नगर में एयरकंडीशनर (AC) सर्विस सेंटर (Air Conditioner (AC) Service Center) में रखे गैस सिलेंडर (Gas Cylinder) और एसी कंप्रेसर में ब्लास्ट होने से आज तड़के भीषण आग लगी। आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग तीन मंजिला मकान में फैल गई। कई वाहन जल गए। फायर टेंडर ने मौके पर पहुंचकर बड़ी मशक्कत के बाद आग को काबू किया।

    इस दर्दनाक हादसे में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की जान चली गई, जबकि सर्विस सेंटर पूरी तरह जलकर खाक हो गया। घटना कमिश्नरेट गाजियाबाद के पटेल नगर स्थित प्लॉट नंबर एफ-87 ‘ऑन स्पॉट एयरकंडीशनर सर्विस सेंटर’ की है।


    तीन मंजिला पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया

    जानकारी के अनुसार, रात लगभग 03:05 बजे कंट्रोल रूम को सर्विस सेंटर में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। देखते ही देखते आग ने तीन मंजिला पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भीषण थी कि सर्विस सेंटर के भीतर रखे एसी के अंदर भरी जाने वाली गैस के सिलेंडरों और कंप्रेसरों में एक के बाद एक कई जोरदार धमाके हुए। सर्विस सेंटर घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है और आग इतनी भीषण थी की आस पास के घरों में फैलने की संभावना बनी हुई थी।


    फायर टेंडर्स के साथ मौके पर पहुंचे

    सूचना मिलते ही फायर स्टेशन कोतवाली से अग्निशमन अधिकारी अपनी टीम और फायर टेंडर्स के साथ मौके पर पहुंचे। वहीं विकराल आग को देखते हुए फायर स्टेशन वैशाली, साहिबाबाद और मोदीनगर से भी गाड़ियो को घटना स्थल पर बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पाया। फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से आसपास के दर्जनों घरों को जलने से बचा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।


    कितना नुकसान हुआ?

    परिसर के अंदर खड़ी 02 कारें और 10 मोटरसाइकिलें जलकर खाक हो गईं। आग और धमाकों के कारण तीन मंजिला इमारत को भी काफी नुकसान पहुंचा है। आग बुझने के बाद जब सर्च ऑपरेशन चलाया गया, तो ग्राउंड फ्लोर पर एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान 80 वर्षीय त्रिलोकी नाथ के रूप में हुई है। यह सर्विस सेंटर ओंकार तोमर नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है।

    आग किस वजह से लगी फिलहाल इसका पता लगाया जा रहा है। चूंकि इमारत में एसी के अंदर भरी जाने वाली गैस के सिलेंडर थे इस वजह से आग काफी तेजी से फैली। गैस सिलेंडरों के फटने ने स्थिति को और अधिक विकराल बना दिया।

  • झांसी सड़क हादसा: कार ने बाइक को मारी टक्कर, युवती की मौत, दोस्त घायल; शादी तय होने से पहले टूटा परिवार

    झांसी सड़क हादसा: कार ने बाइक को मारी टक्कर, युवती की मौत, दोस्त घायल; शादी तय होने से पहले टूटा परिवार


    झांसी। सदर थाना क्षेत्र के मून सिटी के पास गुरुवार को हुए भीषण सड़क हादसे में एक युवती की मौत हो गई, जबकि उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा उस समय हुआ जब एक तेज रफ्तार ईको कार ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

    हादसे में फरहा उर्फ फरबा (21) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक चला रहा विनोद तिवारी (24) घायल हो गया, जिसका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

    घर से निकली थी ट्रेन पकड़ने, बाइक पर कैसे पहुंची परिजन हैरान
    मृतका की मां ने बताया कि फरहा घर से अपनी बहन के यहां झांसी जाने के लिए निकली थी और उसे ट्रेन पकड़नी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने बेटी को ऑटो से भेजा था, लेकिन वह युवक की बाइक पर कैसे पहुंची, इसकी जानकारी परिवार को नहीं है।हादसे की सूचना पुलिस द्वारा मिलने के बाद जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो वहां बेटी का शव देखकर कोहराम मच गया।

    शादी तय थी, परिवार में चल रही थी तैयारियां
    परिजनों के अनुसार फरहा की शादी तय हो चुकी थी और जल्द ही शादी की तारीख भी फाइनल होनी थी। वह पांच बहनों में चौथे नंबर की थी। परिवार में पिता की चिकन शॉप है और घर में शादी की खुशियां मनाई जा रही थीं, लेकिन हादसे ने सबकुछ बदल दिया।

    कार की टक्कर से हुआ हादसा
    पुलिस के अनुसार फरहा और विनोद बाइक से जा रहे थे, तभी मून सिटी के पास तेज रफ्तार ईको कार ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में युवती की मौत हो गई और युवक घायल हो गया।

    पुलिस जांच में जुटी
    सदर थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, कैसरबाग कोर्ट परिसर के अतिक्रमण हटाने पर सख्ती, पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के निर्देश

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, कैसरबाग कोर्ट परिसर के अतिक्रमण हटाने पर सख्ती, पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के निर्देश


    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय परिसर के आसपास वकीलों और दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण को लेकर बड़ा और सख्त आदेश जारी किया है। अदालत ने साफ कहा है कि अवैध कब्जों को हटाने के लिए नगर निगम को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि कार्रवाई में कोई बाधा न आए।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अनुराधा सिंह और अन्य की याचिका पर की।

    कोर्ट ने नगर निगम से अतिक्रमण हटाने की पूरी कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है और अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है।

    नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में करीब 72 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें अधिकांश वकीलों के चैंबर और अवैध दुकानें शामिल हैं। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि इन अतिक्रमणों को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह हटाया जाए और जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता तुरंत दी जाए।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने पुलिस बल उपलब्ध न कराए जाने के कारणों से जुड़े डीसीपी स्तर के पत्र भी अदालत में प्रस्तुत किए।

    नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के लिए 12 मई की नई तारीख तय करने की जानकारी दी, जिस पर कोर्ट ने कहा कि प्रशासन सुनिश्चित करे कि उस दिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध रहे।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि अतिक्रमण से आम जनता, मरीजों और यातायात व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। पहले भी अदालत ने इस क्षेत्र में एंबुलेंस फंसने और मरीज की मौत जैसी गंभीर घटना का संज्ञान लिया था।

    अब हाईकोर्ट ने प्रशासन को 15 दिन के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

  • तमिलनाडु में फंसा पेंच… विजय के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए AIADMK-DMK मिला सकते हैं हाथ!

    तमिलनाडु में फंसा पेंच… विजय के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए AIADMK-DMK मिला सकते हैं हाथ!


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में सरकार बनाने को लेकर पेंच फंसता ही जा रहा है। किसी भी दल या गठबंधन के पास बहुमत नहीं होने के कारण अभी तक सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं हुआ है। इस बीच दक्षिण भारत (South India) के इस राज्य की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जिसकी कल्पना पिछले 50 वर्षों में किसी ने नहीं की थी। अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए राज्य के दो सबसे बड़े कट्टर प्रतिद्वंद्वी डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) हाथ मिला सकते हैं। दोनों को साथ लाने में भाजपा (BJP) बड़ी भूमिका निभा सकती है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, डीएमके के उदयनिधि स्टालिन गुट को डर है कि विजय का उदय पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (MGR) के दौर की याद दिला सकता है। एमजीआर ने अपने जीवनकाल में डीएमके को कभी सत्ता में नहीं आने दिया था। वहीं, जयललिता के निधन के बाद लगातार चार चुनाव हार चुकी AIADMK अपनी राजनीतिक वजूद बचाने के लिए इस गठबंधन पर विचार कर रही है।

    सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस गठबंधन को पर्दे के पीछे से समर्थन दे रही है ताकि कांग्रेस को सत्ता से दूर रखा जा सके। आपको बता दें कि अभी तक सिर्फ कांग्रेस ने ही अपने पांच विधायकों के साथ ऐक्टर विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है।


    क्या है प्रस्तावित फॉर्मूला?

    योजना के मुताबिक, ई. पलानीस्वामी (EPS) मुख्यमंत्री बनेंगे और DMK बाहर से समर्थन देगी। हालांकि पार्टी प्रमुख एम.के. स्टालिन और पुराने नेता इस अजीब प्रयोग से डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि इस बेमेल गठबंधन से समर्थकों के बीच भारी आक्रोश पैदा हो सकता है।


    विजय ने दी इस्तीफे की चेतावनी

    जैसे ही इस संभावित गठबंधन की खबरें फैलीं, विजय की पार्टी टीवीके ने बड़ा दांव चल दिया है। टीवीके ने घोषणा की है कि यदि DMK-AIADMK गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करता है, तो उनके सभी 108 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। यह कदम जनता और प्रशंसकों को सड़कों पर उतारने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।


    किसके पास कितनी सीटें

    आपको बता दें कि इस विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए। फिलहाल विजय की पार्टी टीवीके के पास सबसे अधिक 108 सीटें हैं। वहीं डीएमकी गठबंधन के पास 74 विधायक हैं। इनमें डीएमके 59, कांग्रेस पांच और अन्य की 10 सीटें हैं। एआईएडीएमके गठबंधन के पास यहां 53 सीटें हैं। वहीं, अन्य की संख्या 6 है।


    गवर्नर ने नहीं दिया सरकार बनाने का न्योता

    108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने विजय को सरकार बनाने का न्यौता देने से इनकार कर दिया है। राज्यपाल का कहना है कि विजय पहले 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाएं। कई दलों ने राज्यपाल की इस मांग की आलोचना की है। उनका तर्क है कि बहुमत सदन के पटल पर साबित किया जाना चाहिए, न कि राजभवन में। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है, जिससे राज्य में संवैधानिक संकट गहरा गया है।

    इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वामपंथी दलों और वीसीके की सहमति जरूरी है। विजय ने पहले ही इन पार्टियों से संपर्क साधा है, लेकिन वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।

  • यूपी में योगी सरकार का बड़ा संदेश: बिना सिफारिश मिल रही नौकरी, 9 लाख से ज्यादा नियुक्तियों का दावा

    यूपी में योगी सरकार का बड़ा संदेश: बिना सिफारिश मिल रही नौकरी, 9 लाख से ज्यादा नियुक्तियों का दावा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर राज्य की भर्ती प्रक्रिया और युवाओं को मिलने वाले रोजगार को लेकर सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया। लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिनमें 202 प्रोफेसर, रीडर, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स (आयुष विभाग), 272 अनुदेशक (व्यावसायिक शिक्षा विभाग) और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के 7 कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों की मौजूदगी रही।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में नौकरी पाने के लिए किसी सिफारिश या अनैतिक दबाव की जरूरत नहीं पड़ती है और पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगते थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने चयन आयोगों को जवाबदेही के साथ काम करने की व्यवस्था दी है, जिससे निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित हो रही है।

    सीएम योगी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य में 9 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में लगातार नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और यह चौथा बड़ा कार्यक्रम है, जिसमें हजारों युवाओं को अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिले, जिससे प्रदेश की विकास गति और तेज हो।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब पिछड़े राज्य की छवि से बाहर निकलकर एक मजबूत अर्थव्यवस्था और निवेश का केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है, उद्योगों की संख्या बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि हुई है। सीएम योगी ने कहा कि अब यूपी को कोई बीमारू राज्य नहीं कहता, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बन रहा है।

    कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने भी इस मौके पर सरकार की नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते थे, लेकिन अब पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में 14 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया और 7.5 लाख से अधिक को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने स्किल डेवलपमेंट योजनाओं और नए तकनीकी ट्रेड्स के विस्तार का भी उल्लेख किया।

    कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित अभ्यर्थियों से ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने की अपील की और कहा कि उनकी मेहनत ही प्रदेश के विकास की असली ताकत बनेगी।