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  • UP की सियासत में बड़ा धमाका तय? 10–15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज… कई मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरे करेंगे एंट्री!

    UP की सियासत में बड़ा धमाका तय? 10–15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज… कई मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरे करेंगे एंट्री!



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से टल रहा कैबिनेट विस्तार अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, 10 से 15 मई के बीच योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है, जिससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की पूरी संभावना है।

    बताया जा रहा है कि यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है, जहां संगठन और सरकार दोनों में बड़े स्तर पर फेरबदल देखने को मिल सकता है। इसी के साथ भाजपा नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव की तैयारी में है, जिसकी घोषणा कैबिनेट विस्तार के आसपास की जा सकती है।

    सूत्रों के मुताबिक, इस बार मंत्रिमंडल में कई नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की भूमिका में बदलाव या उन्हें संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। प्रदर्शन के आधार पर विभागों में फेरबदल भी तय माना जा रहा है।

    जातीय संतुलन साधने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ओबीसी और दलित वर्ग से नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है, वहीं ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज से भी कुछ नए नामों पर विचार किया जा रहा है। करीब एक दर्जन नामों पर मंथन जारी है, हालांकि अंतिम सूची अभी तय नहीं हुई है।

    इसके अलावा, सहयोगी दलों को भी साधने की रणनीति पर काम चल रहा है। अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी से एक-एक विधायक को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, ताकि गठबंधन में संतुलन बना रहे। साथ ही महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत 3 से 4 महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2027 के लिए मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करना है।

    अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम सूची में किन चेहरों को जगह मिलती है और किन मंत्रियों की भूमिका में बदलाव किया जाता है, क्योंकि यह फैसला आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

  • Bihar: CM सम्राट चौधरी आज बिहारवासियों को दे सकते हैं बड़ी सौगात…. बुलाई कैबिनेट बैठक

    Bihar: CM सम्राट चौधरी आज बिहारवासियों को दे सकते हैं बड़ी सौगात…. बुलाई कैबिनेट बैठक


    पटना।
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Chief Minister Samrat Chaudhary) ने छह मई यानी आज शाम पांच बजे मुख्य सचिवालय में कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) बुलाई है। मंत्रिमंडल विस्तार से एक दिन पहले की यह बैठक खास होने वाली है। वह राज्यवासियों को बड़ी सौगात दे सकते हैं। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को लेकर कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगा सकते हैं। उनके साथ दोनों उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव, मुख्य सचिव और सभी विभागों के सचिव मौजूद रहेंगे।


    दूसरी कैबिनेट में क्या हुआ था?

    इससे पहले वाली कैबिनेट की बैठक 29 अप्रैल को हुई थी। इसमें सीएम सम्राट चौधरी ने 63 प्रस्तावों पर मुहर लगाई थी। इसमें उन्होंने पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर पटना जू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई थी। गृह विभाग के आरक्षी शाखा की ओर से जानकारी दी गई कि सीएम सम्राट चौधरी ने भागलपुर, मुजफ्फरपुर, नालंदा एवं गयाजी में यातायात पुलिस के विभिन्न कोटियों में 485 पदों के सृजन एवं पूर्व से सृजित 1606 पदों को कर्णांकित करने की स्वीकृति प्रदान की थी। वही बिहार पुलिस अवर निरीक्षक एवं इसके समकक्ष सृजित 20937 पदों में से 50% पद प्रोन्नति के लिए चिन्हित करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई थी।

  • West Bengal: ममता बनर्जी के आवास से हटाए बैरिकेड्स… अभिषेक के दफ्तर से भी हटाई सुरक्षा

    West Bengal: ममता बनर्जी के आवास से हटाए बैरिकेड्स… अभिषेक के दफ्तर से भी हटाई सुरक्षा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) (Trinamool Congress – TMC) की करारी हार और सत्ता से बेदखल होने के एक दिन बाद, दक्षिण कोलकाता (Kolkata) में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) के आवास के बाहर लगाए गए बैरिकेड्स मंगलवार को आंशिक रूप से हटा दिए गए. साथ ही उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के ऑफिस से भी सुरक्षा हटा ली गई है. पुलिस का कहना है कि ये कदम आला अधिकारियों के निर्देश और सुरक्षा-व्यवस्था की नई समीक्षा के तहत उठाया गया है।

    जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी के 30बी हरिश चटर्जी स्ट्रीट स्थित आवास के आसपास सुबह से पुलिसकर्मी स्मार्ट बैरिकेड्स को हटाते नजर आए. हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन मौके पर मौजूद एक कोलकाता पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्हें सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर ये कार्रवाई की है। अधिकारी ने कहा, ‘हमने सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर काम किया है. कोई खास वजह नहीं बताई गई.’ आवास के पास पुलिस कियोस्क अभी-भी मौजूद है, लेकिन इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था आंशिक रूप से कम हो गई है.


    हाई सिक्योरिटी जोन में ढील

    ममता बनर्जी का निवास क्षेत्र अब तक एक उच्च-सुरक्षा क्षेत्र था, जहां वाहनों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रहती थी. स्थानीय निवासियों को भी अपने घरों तक पहुंचने के लिए पहचान पत्र दिखाना पड़ता था. बैरिकेड्स हटाने से अब इन प्रतिबंधों में काफी ढील मिल गई है. हालांकि, इलाके में एक पुलिस कियोस्क अभी भी मौजूद है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती अब काफी कम हो गई है।


    अभिषेक के ऑफिस से वापस ली सुरक्षा

    इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट स्थित ऑफिस से भी सुरक्षा हटा ली गई है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि परिसर से सुरक्षा बलों की वापसी हो चुकी है. ये कार्यालय पार्टी की महत्वपूर्ण गतिविधियों का केंद्र माना जाता रहा है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही यहां का सुरक्षा घेरा खत्म कर दिया गया है।


    नेताओं की सुरक्षा कवर की समीक्षा

    इसके अलावा कोलकाता पुलिस अब निवर्तमान टीएमसी सरकार के अन्य बड़े नेताओं की सुरक्षा की भी समीक्षा कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है. इस समीक्षा सूची में फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास और सुजीत बोस जैसे कद्दावर नेताओं के नाम शामिल हैं. आने वाले दिनों में कई अन्य नेताओं की सुरक्षा में भी बदलाव किए जा सकते हैं.

    आपको बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी को बीजेपी ने करारी शिकस्त देते हुए दो तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल किया है. बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि सत्तारूढ़ टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई है।

  • बिहार में मौसम का कहर: नरकटियागंज में आंधी से उड़ गए छप्पर, पेड़ गिरने से सड़कें जाम; बेतिया में आग से लाखों का नुकसान

    बिहार में मौसम का कहर: नरकटियागंज में आंधी से उड़ गए छप्पर, पेड़ गिरने से सड़कें जाम; बेतिया में आग से लाखों का नुकसान


    नई दिल्ली। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ने से भारी तबाही देखने को मिली। नरकटियागंज क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई घरों के छप्पर उड़ गए, पेड़ सड़कों पर गिर पड़े और यातायात बाधित हो गया। वहीं बेतिया में देर रात शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने लाखों की संपत्ति जलाकर राख कर दी।

    नरकटियागंज में अचानक आई तेज आंधी ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। अजुआ गांव के पास नरकटियागंज-व्यासपुर रोड पर पिंटू कुमार की हार्डवेयर दुकान का एस्बेस्टस छप्पर तेज हवा में उड़कर करीब 30 मीटर दूर जा गिरा। इस दौरान उनके मकान की दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

    गांव के ही बच्चा पटेल की झोपड़ी का छप्पर भी आंधी में उड़ गया, जिससे उनका परिवार पूरी रात खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गया। तेज हवा और बारिश के दौरान लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों पर भागते नजर आए।

    आंधी का असर यातायात पर भी पड़ा। नरकटियागंज-लौरिया रोड पर जयमंगलापुर के पास एक बड़ा पेड़ गिर गया, जिससे करीब आधे घंटे तक सड़क जाम रही। स्थानीय लोगों की मदद से पेड़ हटाकर यातायात बहाल किया गया।

    सेमरा चौक पर भी एक बड़ा आम का पेड़ उखड़कर गिर गया, जिससे एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। मौसम की मार फसलों पर भी साफ दिखी। बागान मालिकों के मुताबिक, आम और लीची की फसल को भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि बड़ी संख्या में कच्चे फल गिर गए। हालांकि बारिश से गन्ना, मूंग और उड़द की फसलों को फायदा मिला है।

    उधर, बेतिया के लाल बाजार इलाके में सोमवार रात करीब 12:15 बजे शॉर्ट सर्किट से दुर्गाशक्ति हार्डवेयर दुकान में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पास के गोदाम को भी अपनी चपेट में ले लिया।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। दुकान मालिक प्रकाश कुमार के अनुसार, इस हादसे में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

    एक ही दिन में आंधी-बारिश और आग की घटनाओं ने पश्चिम चंपारण में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रभावित लोग राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

  • तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?

    तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?


    चेन्नई।
    सोमवार को आए तमिलनाडु विधानसभा (Tamil Nadu Assembly elections) के चुनावी नतीजों में हाल ही में बनी पार्टी टीवीके (TVK) ने कमाल कर दिया। अपने पहले ही चुनाव में टीवीके चीफ थालापति विजय (TVK Chief Thalapathy Vijay) की पार्टी ने तमिलनाडु के 108 सीटों पर जीद दर्ज की है। आज पूरे देश में नई बनी पार्टी टीवीके और थालापति विजय की चर्चा है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब थालापति विजय राजनीति में नहीं आना चाहते थे। राजनीति में आने से पहले अपने भविष्य को लेकर विजय थालापति असमंजस में रहते थे। आइए जानते हैं उन्हें किस बात का डर था और वो राजनीति में अभी क्यों नहीं आना चाहते थे।


    किस बात का था डर

    साउथ की फिल्मों में सुपरस्टार थालापति विजय बॉक्स ऑफिस पर एकदम हिट थे और प्रदेश की जनता भी उन्हें भगवान की तरह पूजती थी, लेकिन वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे। विजय के पिता भी चाहते थे कि वो राजनीति में आएं, लेकिन उनको अपने ऊपर पूरी तरह भरोसा नहीं था। अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर थालापति विजय निश्चित नहीं थे, इसलिए वो पार्टी नहीं बनाना चाहते थे।

    थालापति विजय ने अचानक क्यों बनाई पार्टी
    थालापति के माता-पिता उन्हें साल 2009 से ही राजनीति में लाना चाहते थे, क्योंकि पूरे तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता और फैन फॉलोइंग बहुत ज्यादा थी। लेकिन वो राजनीति में नहीं आए। इस दौरान वो चाहते थे कि प्रदेश में ऐसा वैक्यूम बने जब एक नई राजनीतिक पार्टी की जरूरत हो। साल 2016 में जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपनी साख खोती दिख रही थी। तमिलनाडु में मजबूत संगठन के बावजूद अपने शीर्ष नेताओं के बीच चल रही लगातार लड़ाई के कारण एआईएडीएमके ने अपनी राजनीतिक हैसियत को खत्म कर लिया। इस दौरान विजय थालापति ने एआईएडीएमके के खिलाफ बुगल फूंक दिया और बीजेपी को भी निशाने पर लिया।

    एआईएडीएमके के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और बीजेपी के खिलाफ सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर विजय ने जमीन पर अपना काम शुरू कर दिया। इस दौरान विजय को युवाओं और महिलाओं के बीच काफी समर्थन मिला। इसी समय विजय ने पार्टी बनाने का मन बना लिया और साल 2026 के चुनावों में कमाल करते हुए पहली बार में ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर आई।

  • शुभेन्दु 1 सीट से लड़ना चाहते थे….अमित शाह ने दिया 2 सीटों का फॉर्मूला… ममता को दिखाया 2021 का रीकैप

    शुभेन्दु 1 सीट से लड़ना चाहते थे….अमित शाह ने दिया 2 सीटों का फॉर्मूला… ममता को दिखाया 2021 का रीकैप


    कोलकाता।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी (Trinamool Congress supremo Mamata Banerjee) को 2021 का रीकैप दिखा दिया। सोमवार को जब नतीजे घोषित हुए तो एक बार फिर भाजपा हैवी वेट शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने उन्हें हरा दिया, लेकिन इस बार मैदान भवानीपुर का रहा। इसके अलावा अधिकारी ने नंदीग्राम से भी जीत दर्ज कर ली है। अब खबर है कि अधिकारी सिर्फ एक ही सीट से लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें दो सीटों से लड़ाने का फॉर्मूला केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने दिया था।


    जब अमित शाह ने बताई भवानीपुर की इनसाइड स्टोरी

    भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता था। इस बार भी वह इस सीट से चुनाव लड़ रहीं थीं। 2 अप्रैल को गृह मंत्री शाह भवानीपुर में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। तब उन्होंने कहा था, ‘शुभेंदु दा हमारे नंदीग्राम से लड़ना चाहते थे। मैंने शुभेंदु दा को कहा था कि सिर्फ नंदीग्राम नहीं, ममता के घर में जाकर उसको हराना है।’

    भवानीपुर सीट पर जीत के बाद अधिकारी ने बताया कि मतगणना के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री शाह लगातार उनके संपर्क में थे और इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले को लेकर चिंता जताई थी।


    शुभेंदु अधिकारी ने 17 हजार का अंतर कवर किया

    भाजपा नेता और टीएमसी प्रमुख के बीच भवानीपुर में रोमांचक मुकाबला देखने को मिला था। यहां शुरुआती दौर में अधिकारी ने लीड हासिल कर ली थी, लेकिन कुछ राउंड काउंटिंग के बाद बनर्जी आगे आ गईं थीं। यहां तक कि एक समय पर वह करीब 17 हजार मतों से आगे भी चल रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे राउंड बढ़े और अंतर कम होता गया।

    अंतिम नतीजा आया कि अधिकारी ने 20 राउंड की काउंटिंग के बाद बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। उन्हें कुल 73 हजार 917 वोट मिले थे। जबकि, बनर्जी को 58 हजार 812 वोट मिले। इस सीट पर तीसरे स्थान पर लेफ्ट नेता श्रीजीब बिस्वास रहे और चौथे पर महज 1257 वोट पाने वाले कांग्रेस नेता प्रदीप प्रसाद थे।


    डबल धमाका

    ऐसा ही नतीजा नंदीग्राम से भी देखने को मिला, जहां अधिकारी ने अपने पूर्व करीबी और टीएमसी प्रत्याशी पवित्र कर को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। यहां उन्होंने 1 लाख 27 हजार 301 वोट पाकर जीत दर्ज की। सीट पर कांग्रेस पांचवें स्थान पर रही और महज 794 वोट ही हासिल कर सकी।


    जीत के क्या बोले अधिकारी

    अधिकारी ने इसे निर्णायक राजनीतिक क्षण बताया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, जीत का प्रमाणपत्र दिखाते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि बनर्जी को उनके गढ़ में हराना प्रतीकात्मक और रणनीतिक, दोनों ही दृष्टि से अहम है। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत महत्वपूर्ण है। ममता बनर्जी को हराना काफी मायने रखता है।’

    अधिकारी ने दावा किया कि यह चुनाव परिणाम ममता के राजनीतिक करियर के अंत का संकेत है। उन्होंने कहा, ‘यह जीत हिंदुत्व की जीत है।’ उन्होंने दावा किया कि विभिन्न वर्गों, यहां तक कि अन्य दलों के पारंपरिक समर्थकों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन क्षेत्र में वामपंथी मतदाताओं के एक वर्ग ने उनका समर्थन किया, जिससे तृणमूल कांग्रेस विरोधी वोटों को एकजुट करने में मदद मिली।

  • CG: कबीरधाम जिले में पुल से नीचे गिरी बेकाबू कार…. 4 युवकों की मौत

    CG: कबीरधाम जिले में पुल से नीचे गिरी बेकाबू कार…. 4 युवकों की मौत


    कबीरधाम।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कबीरधाम जिले (Kabirdham district) में एक कार अनियंत्रित होकर पुल से नीचे गिर (Car Skidded off Bridge) गई। इस हादसे में कार पर सवार चार युवकों की मौत हो गई। दुर्घटना में दो अन्य घायल हो गए। घटना की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के पंडरिया इलाके में पांडातराई के करीब गड़ाई गांव स्थित एक छोटे पुल से तेज गति से जा रही कार अनियंत्रित होकर नीचे गई। इस घटना में अरमान अली (20), मोहम्मद सैफ (19), अनस अली (21) और कौनैन (19) की मौत हो गई तथा दो अन्य जुनेद रजा (21) और आरजू खान (19) घायल हो गए हैं।

    पुलिस को मिली सूचना के अनुसार, रायपुर के बिरगांव निवासी युवक एक कार में सवार होकर विवाह समारोह में शामिल होने पंडरिया के लिए रवाना हुए थे। रविवार देर रात जब वह गड़ाई गांव स्थित एक छोटे पुल के करीब पहुंचे तब उसकी कार अनियंत्रित होकर पुल से लगभग 50 फुट नीचे गिर गई। इस घटना में चार युवकों की मौत हो गई तथा दो अन्य घायल हो गए।

    अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया तथा शवों और घायलों को अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि घायल युवकों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

  • पश्चिम बंगालः कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना आज …. CAPF की 200 कंपनियां तैनात

    पश्चिम बंगालः कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना आज …. CAPF की 200 कंपनियां तैनात


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Election 2026) की मतगणना (Vote Counting) को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि काउंटिंग के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि व्यापक सुरक्षा इंतजामों के बीच मतगणना पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से कराई जाएगी। वोटों की गिनती से पहले हुई कई बैठकों में अग्रवाल ने साफ किया कि चुनाव आयोग ने कोई भी कसर नहीं छोड़ी है।

    पूरे राज्य में मतगणना केंद्रों (Counting centres) की सुरक्षा के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 200 कंपनियों को मतगणना केंद्रों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। इसके अलावा राज्य पुलिस, राज्य सशस्त्र पुलिस और CAPF मिलकर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। मतगणना केंद्रों के बाहर सभी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं।


    तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू

    मनोज अग्रवाल ने कहा, ‘सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। रिटर्निंग ऑफिसर (RO), असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (ARO), मतगणना एजेंट और सुपरवाइजर पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें कई बार प्रशिक्षण दिया जा चुका है। किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है, सब कुछ नियमों के अनुसार ही होगा।’ उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी स्तर पर लापरवाही या शरारत पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतगणना केंद्र के अंदर मौजूद कोई भी व्यक्ति अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी करता है, तो उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उन्होंने राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, एजेंटों और आम जनता से अपील की कि वे शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें, ताकि मतगणना बिना किसी बाधा के पूरी हो सके। अग्रवाल ने बताया कि चुनाव आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस महानिदेशक और अन्य सीनियर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें की हैं, ताकि किसी भी संभावित अशांति को पहले ही रोका जा सके। उन्होंने कहा कि पहले और दूसरे चरण के मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए थे और उम्मीद है कि मतगणना भी उसी तरह शांतिपूर्ण होगी।

  • Bihar: भागलपुर में विक्रमशिला ब्रिज का हिस्सा टूटकर गंगा नदी में गिरा… बड़ा हादसा टला

    Bihar: भागलपुर में विक्रमशिला ब्रिज का हिस्सा टूटकर गंगा नदी में गिरा… बड़ा हादसा टला


    नई दिल्ली।
    बिहार (Bihar) के भागलपुर (Bhagalpur) में रात को एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बचा. गंगा नदी (River Ganges) पर बना विक्रमशिला ब्रिज (Vikramshila Bridge) का एक हिस्सा अचानक टूटकर नदी में गिर (Broken fell River) गया. लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों की तेजी की वजह से पहले ही लोगों को हटा लिया गया था, इसलिए कोई नहीं मरा, कोई नहीं घायल हुआ।

    जिला अधिकारी नवल किशोर चौधरी के अनुसार, मौके पर मौजूद स्थानीय अधिकारी और SHO की सतर्कता की वजह से तुरंत लोगों को उस हिस्से से हटा लिया गया. लोगों को हटाने के करीब 15 मिनट बाद ही पुल का स्लैब गंगा नदी में गिर गया।

    घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विक्रमशिला ब्रिज को भागलपुर और नवगछिया दोनों तरफ से पूरी तरह सील कर दिया है. फिलहाल पुल पर सभी तरह का ट्रैफिक बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने बताया कि रात के समय वैकल्पिक रास्ता शुरू करना संभव नहीं था. जो लोग भागलपुर आना चाहते हैं, उन्हें फिलहाल मुंगेर के रास्ते आने की सलाह दी गई है।


    25 साल पुराना पुल, अब इस्तेमाल के लायक नहीं

    यह पुल साल 2001 में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था. करीब 4.5 किलोमीटर लंबा यह सेतु हजारों वाहनों और लाखों लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का प्रमुख साधन था. लेकिन महज 25 साल के भीतर ही इसका एक बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत इस पर आवाजाही रोक दी.


    प्रशासन ने वैकल्पिक रास्ते को लेकर क्या कहा?

    अब प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था बनाने और स्थिति को सामान्य करने के लिए काम कर रहा है. प्रशासन ने फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मुंगेर ब्रिज का सुझाव दिया है, जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है. अब यात्रियों को लंबा रास्ता तय करना होगा. परिवहन में समय और लागत दोनों बढ़ेंगे.

  • पश्चिम बंगाल: मुस्लिम बहुल सीटों पर टिके हैं चुनाव के नतीजे, 85 क्षेत्रों में 30% आबादी निर्णायक भूमिका में

    पश्चिम बंगाल: मुस्लिम बहुल सीटों पर टिके हैं चुनाव के नतीजे, 85 क्षेत्रों में 30% आबादी निर्णायक भूमिका में


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के 2026 विधानसभा चुनाव (2026 Assembly Elections) के नतीजे राज्य के जनसांख्यिकीय गणित, खासकर ‘मुस्लिम बहुल’ सीटों (Muslim-majority seats) पर टिके हैं। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में सत्ता की चाबी उन निर्वाचन क्षेत्रों में छिपी है, जहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2021 में इस वोट बैंक के बंपर समर्थन से सत्ता बचाने वाली ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) क्या इस बार बहुकोणीय मुकाबले में अपना एकाधिकार कायम रख पाएगी?


    2021 का एकतरफा समीकरण और टीएमसी का क्लीन स्वीप

    भारत की चुनावी प्रणाली में, अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में एक ही समुदाय की 30% से अधिक सघन आबादी हो, तो वह नतीजे तय करने की ताकत रखती है। आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 89 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 30% के महत्वपूर्ण मानक को पार करती है। कुछ अनुमानों के अनुसार राज्य की कुल 294 सीटों में से लगभग 85 से 110 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी इस 30% के महत्वपूर्ण वैचारिक और सांख्यिकीय मानक के पार है। वहीं करीब 112 निर्वाचन क्षेत्रों में यह 25% से अधिक है।

    पश्चिम बंगाल के राजनीति इतिहास पर गौर करें तो इन क्षेत्रों पर दशकों तक वाम मोर्चे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का निर्विवाद राजनीतिक एकाधिकार रहा था। हालांकि, 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद से, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस विशाल अल्पसंख्यक वोट बैंक पर अपना एकछत्र रणनीतिक प्रभुत्व स्थापित कर लिया, जिसने उन्हें 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार भारी बहुमत के साथ सत्ता में बनाए रखा।

    2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने 30% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली करीब 85 में से 75 सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज करते हुए लगभग क्लीन स्वीप किया था। ‘एक्सिस माय इंडिया’ के 2021 एग्जिट पोल के अनुसार, उस दौरान लगभग 75% मुस्लिम मतदाताओं ने एकजुट होकर टीएमसी को वोट दिया था। इसी एकमुश्त समर्थन ने भाजपा के आक्रामक अभियान को रोक दिया था। 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर टीएमसी ने दबदबा दिखाया था। मुर्शिदाबाद की 22 में से 20 सीटों पर टीएमसी जीती, दो सीटें बीजेपी को मिलीं। कांग्रेस और लेफ्ट का खाता नहीं खुला। मालदा की 12 सीटों में टीएमसी ने आठ और बीजेपी ने चार सीटें जीतीं। उत्तर दिनाजपुर में टीएमसी को सात और बीजेपी को दो सीटें मिलीं। बीरभूम की 11 में से 10 सीटें टीएमसी ने जीतीं, एक बीजेपी के पास गई। दक्षिण 24 परगना की 31 में से 30 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज की।


    भाजपा के लिए यह दीवार अभेद्य क्यों?

    भाजपा के लिए ये मुस्लिम बहुल सीटें एक दीवार की तरह काम करती हैं। 2021 में, 30% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली इन सीटों पर भाजपा केवल एक सीट जीत सकी थी। इसके विपरीत, जिन सीटों पर मुस्लिम आबादी 10% तक थी, वहां भाजपा का ‘स्ट्राइक रेट’ 42% था (77 में से 33 सीटें जीतीं)। जैसे-जैसे मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा, भाजपा का प्रदर्शन गिरता गया।

    2026: बहुकोणीय मुकाबला और वोटों के बिखराव का खतरा

    2026 का परिदृश्य 2021 के सीधे दो दलों के मुकाबले से पूरी तरह अलग और जटिल है। इस बार अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर टीएमसी के वोट बैंक में सेंधमारी के कई मोर्चे खुल गए हैं:

    वाम-आईएसएफ गठबंधन: वाम मोर्चे ने पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’ (ISF) से गठबंधन किया है। 2026 में आईएसएफ को गठबंधन के तहत 30 सीटें आवंटित की गई हैं। आईएसएफ दक्षिण 24 परगना (जैसे भांगड़) में टीएमसी को सीधी चुनौती दे रही है।

    कांग्रेस का स्वतंत्र अभियान: दशकों बाद कांग्रेस बिना वामदलों के समर्थन के अकेले चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अपने पुराने गढ़ वापस पाना है (जैसे मालतीपुर में मौसमी नूर की उम्मीदवारी), जो टीएमसी के आधार में सीधे सेंध लगाएगी।

    एआईएमआईएम की एंट्री: उत्तर दिनाजपुर जैसे उर्दू/सुरजापुरी भाषी बेल्ट में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी आक्रामक प्रयास कर रही है।


    मार्जिन की राजनीति और भाजपा का गणित

    भाजपा को बंगाल जीतने के लिए इस मुस्लिम किले को भेदना होगा या हिंदू बहुल सीटों पर भारी बढ़त बनानी होगी। चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, यदि स्वतंत्र रूप से लड़ रही कांग्रेस या आईएसएफ इन अल्पसंख्यक सीटों पर केवल 5% से 10% वोटों का भी बिखराव करने में सफल होते हैं, तो टीएमसी का वोट शेयर कम हो जाएगा। इस त्रिकोणीय लड़ाई का सीधा गणितात्मक लाभ भाजपा को मिलेगा, जो अपने 38% के स्थिर बहुसंख्यक (हिंदू) वोट बैंक पर मजबूती से टिकी हुई है।


    क्या होगा इस बार?

    चुनाव आयोग के’विशेष सघन पुनरीक्षण (एआईआर) अभियान के कारण मतदाता सूची से नाम कटने और नागरिकता खोने के डर ने इस बार मुस्लिम बहुल सीटों पर 96% तक का अभूतपूर्व मतदान सुनिश्चित किया है। चाणक्य स्ट्रेटीजीज के एग्जिट पोल के अनुसार, 71% मुस्लिम मतदाता टीएमसी के साथ मजबूती से लामबंद दिख रहे हैं।

    अगर यह एकमुश्त मतदान वास्तविकता में परिवर्तित होता है, तो टीएमसी लगातार चौथी बार सरकार बना सकती है। लेकिन अगर कांग्रेस, आईएसएफ और अन्य दलों के कारण इस वोट बैंक में जरा भी सेंधमारी हुई है, तो चुनाव परिणाम एक त्रिशंकु विधानसभा की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे में, मालदा और मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और आईएसएफ द्वारा जीती गई चंद सीटें अगली सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका निभाएंगी।