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  • नोएडा: निजी कंपनी में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार..

    नोएडा: निजी कंपनी में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार..


    नोएडा।
    यूपी (UP) के नोएडा (Noida) में प्राइवेट कंपनियों (Private Companies) के कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में पुलिस का एक्शन जारी है. नोएडा पुलिस (Noida Police) ने हिंसा में शामिल दो और आरोपियों (Two more accused) को गिरफ्तार किया है।

    दोनों आरोपी हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा बिगुल मजदूर दस्ता के एक्टिव सदस्य हैं. हिमांशु लगातार हिंसा के मुख्य आरोपी आदित्य आनंद के संपर्क में था. हिंसा के दिन वह नोएडा में ही मौजूद था. हिमांशु और सत्यम के खिलाफ पुलिस को भड़काऊ गतिविधियों को अंजाम देने के सबूत मिले हैं।

    इससे पहले पुलिस ने नोएडा हिंसा के मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये के इनामी आदित्य आनंद उर्फ रस्ती को तमिलनाडु के तिरुचापल्ली रेलवे स्टेशन से अरेस्ट किया था. पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसे रिमांड पर लेकर पूरे नेटवर्क और साजिश के अन्य पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।


    पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है आदित्य आनंद

    पुलिस जांच में सामने आया है कि पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद ने श्रमिक प्रदर्शन को हिंसा में बदलने की साजिश रची. उसने पूरे घटनाक्रम को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया. थाना फेज-2 में उसके खिलाफ पहले ही गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

    जांच में सामने आया कि बिहार के हाजीपुर का रहने वाला 28 वर्षीय आदित्य आनंद पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है. वह इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड है. आरोपी के खिलाफ 16 अप्रैल को कोर्ट से वारंट जारी हुआ था, जिसके बाद वह फरार होकर चेन्नई और फिर तिरुचिरापल्ली भाग गया था।

    पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय हिंसा तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है. एसटीएफ अब इस बात की जांच कर रही है कि इस साजिश के लिए फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट कहां से मिल रहा था. आने वाले दिनों में इस केस में कई और बड़े संगठनों के नाम सामने आ सकते हैं।

  • नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा

    नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा


    नोएडा।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Noida and Greater Noida) में हाल के श्रमिक प्रदर्शनों, श्रम कानूनों के उल्लंघन और कंपनियों में बढ़ते असंतोष के बीच प्रशासन ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ श्रम विभाग (Labor Department) ने 24 कंपनियों को मैनपावर सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों को राहत देते हुए 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि का ऐलान किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस जांच में प्रदर्शन के पीछे साजिश और बाहरी कनेक्शन के संकेत भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।


    203 मैनपावर एजेंसियों पर गाज

    श्रम विभाग ने गौतमबुद्ध नगर में श्रम कानूनों का पालन न करने वाली 203 मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ये एजेंसियां 24 कंपनियों में श्रमिक उपलब्ध कराती थीं, लेकिन जांच में सामने आया कि इन्होंने कर्मचारियों को मिलने वाले कई वैधानिक लाभ नहीं दिए।

    इन एजेंसियों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और इनके लाइसेंस निरस्त करने के साथ-साथ ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। श्रमिकों के बकाया भुगतान के लिए 1,16,05,067 रुपये का नोटिस भी जारी किया गया है, जबकि अन्य एजेंसियों की पहचान का काम जारी है।
    राकेश द्विवेदी, अपर श्रमायुक्त


    1 मई से लागू होगी 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि

    श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की है। इसके तहत गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी और मई में 7 से 10 तारीख के बीच भुगतान किया जाएगा। यह बढ़ोतरी संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की कटौती ही मान्य होगी, इसके अलावा किसी भी अन्य कटौती पर सख्त कार्रवाई होगी।


    सड़कों पर उतरे कर्मचारी

    नोएडा के सेक्टर-8 स्थित एक कंपनी के बाहर शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महिला और पुरुष कर्मचारी कंपनी गेट पर इकट्ठा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया।

    इसी तरह यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित एक बड़ी मोबाइल निर्माण कंपनी में भी कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आवाज उठाई। शिफ्ट बदलने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र हुए और नारेबाजी की, जिसके बाद अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली।


    उच्चस्तरीय समिति का दौरा और निरीक्षण

    श्रमिकों के आंदोलन को देखते हुए शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया और वहां काम कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की। समिति के सदस्य डॉ. एमकेएस सुन्दरम ने इकोटेक-3 स्थित एक फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जहां कर्मचारियों को दी जा रही सुविधाओं और स्किल डिवेलपमेंट ट्रेनिंग का जायजा लिया गया। इस दौरान यह भी देखा गया कि किस प्रकार कर्मचारी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।


    प्रदर्शन के पीछे साजिश के संकेत, जांच तेज

    श्रमिक प्रदर्शनों को लेकर पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि यह प्रदर्शन अचानक भड़का हुआ गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों को क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सऐप ग्रुप से जोड़ा गया था, जिन्हें तमिलनाडु और कर्नाटक से संचालित किया जा रहा था।

    इन ग्रुपों के माध्यम से भड़काऊ संदेश भेजकर श्रमिकों को उकसाया गया। सीसीटीवी फुटेज में 8 से 9 संदिग्ध लोगों को हुलिया बदलकर भीड़ में घुसते हुए देखा गया है। जांच में कुछ मोबाइल नंबर नेपाल से जुड़े पाए गए हैं, जबकि अन्य संदिग्ध कनेक्शनों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि कई आरोपियों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।

  • TCS धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा बढ़ा…. फरार HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज

    TCS धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा बढ़ा…. फरार HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज


    नासिक।
    टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) (Tata Consultancy Services – TCS) में यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। मामले की गंभीरता और इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए गठित विशेष जांच दल ने अब राज्य खुफिया विभाग (एसआईडी) (State Intelligence Department – SID)), आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) (Anti-Terrorism Squad -ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से तकनीकी सहायता मांगी है। उधर, जांच एजेंसियों ने फरार एचआर मैनेजर निदा खान की तलाश तेज कर दी है। 

    पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने बताया कि आरोपियों के संपर्कों और गतिविधियों की गहन छानबीन के लिए जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर सभी विवरण सौंप दिए गए हैं। अब तक कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें यौन उत्पीड़न, धमकी देकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस ने मामले में अब तक छह कर्मचारियों और यूनिट ऑपरेशन मैनेजर अश्विनी चैनानी को गिरफ्तार किया है, जो 28 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में हैं। हालांकि, मुख्य साजिशकर्ता एचआर मैनेजर निदा खान अभी भी फरार है।

    सुरक्षा के चलते वर्क फ्रॉम होम के निर्देश
    मामले के तूल पकड़ने के बाद टीसीएस ने नासिक कार्यालय में बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (बीपीओ) का परिचालन अस्थाई रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने सभी कर्मचारियों को अगले आदेश तक घर से काम करने के निर्देश दिए हैं। कंपनी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।

  • Delhi: रोहिणी की झुग्गियों में लगी भीषण आग, एक ही परिवार के 3 लोगों की जलकर मौत

    Delhi: रोहिणी की झुग्गियों में लगी भीषण आग, एक ही परिवार के 3 लोगों की जलकर मौत


    नई दिल्ली ।
    देश की राजधानी नई दिल्ली (New Delhi) में रोहिणी क्षेत्र की झुग्गियों (Rohini) और कबाड़ में लगी आग में तीन लोगों की मौत हो गई है। दमकल अधिकारी के अनुसार आग कल देर रात लगी। हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है और अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

    दिल्ली के रोहिणी जिला अंतर्गत बुध विहार थाना क्षेत्र के मांगेराम पार्क इलाके (Mangeram Park area) का यह मामला है. यहां मंगलवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक भीषण आग लग गई. आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते झुग्गियां आग की चपेट में आ गईं। इस अग्निकांड में एक ही परिवार के तीन लोगों की जलकर मौत हो गई. मरने वालो में पति, पत्नी और 2 साल की बच्ची शामिल है।

    दमकल अधिकारी अजय शर्मा ने बताया कि बुध विहार में एक ऐसे भूखंड में आग लग गई, जहां झुग्गियां बनी हुई थीं और कबाड़ जमा किया जाता था। आग रात करीब 1:25 बजे लगी और छह दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। तीन लोगों की मौत हो गई। आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है।

    बताया जा रहा है कि जिस प्लॉट में आग लगी, वहां करीब 5-6 परिवार रहते थे. इनमें करीब 18 से 20 लोग थे, जो कबाड़ बीनने का काम करते हैं. देर रात अचानक लगी आग ने पूरे प्लॉट में रद्दी प्लास्टिक और रद्दी कबाड़ को अपनी चपेट में ले लिया. इससे झुग्गियों में रखा सारा घर का सारा सामान जैसे बेड कूलर, फ्रिज आदि जलकर खाक हो गया. इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के 3 लोगों (माता-पिता और 2 साल के मासूम) की मौत हो गई. आग की लपटें इतनी तेज थीं कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और ये मृतक परिवार बाहर नहीं निकल पाया. .

    मृतकों की पहचान मुसीबुर 25, मुरार 23, और मोइमोना 2 साल के रूप में हुई है. फिलहाल 3 शवो क़ो कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है. वहीं मृतक के रिश्तेदारों का आरोप है कि आग लगाई गई है, जिस कारण इतना बड़ा हादसा हो गया.

  • West Bengal. चुनाव से पहले TMC ने किया SIR में काटे गए 90 लाख नाम फिर जोड़ने का ऐलान

    West Bengal. चुनाव से पहले TMC ने किया SIR में काटे गए 90 लाख नाम फिर जोड़ने का ऐलान


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) की तारीखें नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी हमले तेज होते दिख रहे हैं। भाजपा (BJP) ने जहां आज चुनावी घोषणा पत्र (Election Manifesto) में लोक लुभावन वादे कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश की है, वहीं TMC महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के हिन्दू कार्ड पर नया दांव चल दिया है। इतना ही नहीं बनर्जी ने चुनावों से पहले एक बड़ा ऐलान भी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी पार्टी टीएमसी फिर से सत्ता में आती है तो SIR में काटे गए सभी 90 लाख लोगों के नाम फिर से मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।

    एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में अभिषेक बनर्जी ने इसका ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतादाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग और भाजपा यह कहे कि जिन 90 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं, वे सभी बांग्लादेशी थे।


    63% नाम हिंदुओं के काटे गए

    AITC के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा, “…मैं यह भरोसा दिलाता हूँ कि जब TMC फिर जीतेगी, तो वोटर लिस्ट से हटाए गए सभी लोगों के नाम वापस जोड़ दिए जाएँगे।” उन्होंने कहा, “BJP और चुनाव आयोग को यह कहना चाहिए कि जिन 90 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे सभी बांग्लादेशी थे।” बनर्जी ने कहा, “उनके बयानों के अनुसार, इनमें से 63% नाम हिंदुओं के थे, तो फिर वे भी ज़रूर बांग्लादेशी या रोहिंग्या होंगे…यानी 90 में से 57 लाख हिन्दू बांग्लादेशी रोहिंग्या हैं।”


    6 माह में UCC लागू करेंगे: BJP

    बता दें कि बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने पर छह महीने के भीतर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू (यूसीसी) लागू की जाएगी और ‘बंगाल के सपूत’ को मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही ‘राम राज्य’ स्थापित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए कहा कि घुसपैठ और तुष्टीकरण के खिलाफ भाजपा के रुख को कल्याणकारी प्रयासों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के इस आरोप को भी खारिज किया कि भाजपा पश्चिम बंगाल के लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देगी। दूसरी तरफ, अभिषेक बनर्जी 63 फीसदी हिन्दू मतदाताओं के नाम काटे जाने के बहाने भाजपा को हिन्दू विरोधी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं और टीएमसी के पक्ष में ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।

  • असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'

    असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'


    दिसपुर।
    असम विधानसभा चुनावों (Assam Assembly elections.) के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो गया है। मतदान से महज कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के ‘गोमांस सेवन’ पर दिए गये बयान पर राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है। सरमा ने कहा कि गोमांस खाने में कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे निजी जगहों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुस्लिम भाई गोमांस खाते हैं, हम उन्हें मना नहीं कर रहे हैं। हम बस यही कहते हैं कि इसे घर के अंदर खाएं, सार्वजनिक स्थानों पर नहीं। मंदिरों के 5 किलोमीटर दायरे में या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर इसका सेवन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान से सियासी बवाल तेज हो गया है। विपक्ष इसे भाजपा (BJP) की दोहरी नीति बता रहा है।

    दरअसल, यह बयान मुख्यमंत्री के पिछले कई बयानों से बिल्कुल अलग है। कुछ दिन पहले जोरहाट में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि गाय का मांस खाने वालों को वह नहीं बख्शेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने तब कहा था कि असम में पशु संरक्षण कानून है, सार्वजनिक रूप से गोमांस खाने पर 3 साल की जेल हो सकती है। मैं गाय का मांस खाने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराऊंगा।

    विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा
    मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दलों ने हमलावर रुख अपनाया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, कि भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ। उन्होंने हिमंता के बयान वाला पोस्टर शेयर करते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

    वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने भी भाजपा पर तीखा प्रहार किया। पार्टी ने कहा कि ‘गाय माता’ भाजपा के लिए सिर्फ चुनावी हथकंडा है, जिसका इस्तेमाल दंगे और अशांति फैलाने के लिए किया जाता है। आप ने आरोप लगाया कि उत्तर भारत में भाजपा और उसके समर्थक ‘ रक्षा’ के नाम पर हत्याएं करते हैं, वहीं असम के उनके नेता कह रहे हैं कि गोमांस खाओ लेकिन घर में।

    पुराने बयान और कानून का प्रावधान
    बता दें कि इस महीने के शुरू में हिमंता बिस्वा सरमा ने असम जातीय परिषद (एजेपी) की उम्मीदवार कुंकी चौधरी की मां सुजाता गुरुंग चौधरी पर गोमांस खाने और ‘राष्ट्र-विरोधी व सनातनी-विरोधी’ होने का आरोप लगाया था। उन्होंने चुनाव के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। एजेपी ने इन आरोपों को फर्जी और राजनीतिक साजिश बताया है।

    असम पशु संरक्षण अधिनियम, 2021 गायों के वध पर पूर्ण रोक नहीं लगाता, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, रेस्तरां और सामुदायिक कार्यक्रमों में गोमांस के सेवन पर प्रतिबंध है। राज्य में दुकानों से गोमांस खरीदा जा सकता है और निजी स्थानों पर इसका सेवन किया जा सकता है। हाल ही में कैबिनेट ने होटलों और सार्वजनिक स्थानों में गोमांस पर और सख्ती की है।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने का आदेश…. बाम्बे हाईकोर्ट ने गोवा सरकार को लगाई फटकार

    छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने का आदेश…. बाम्बे हाईकोर्ट ने गोवा सरकार को लगाई फटकार


    मुम्बई।
    बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए गोवा (Goa) में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) की एक प्रतिमा को गिराने का आदेश दे दिया है। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने अवैध रूप से स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को हटाने का आदेश देते हुए कहा कि मोरमुगाओ पोर्ट प्राधिकरण (Mormugao Port Authority) की जमीन पर अतिक्रमण रोकने में सरकार ने गंभीर लापरवाही दिखाई है।

    जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस जमसांडेकर की पीठ ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुरक्षा की व्यवस्था करें, ताकि प्रतिमा को हटा कर पहले पहले जैसा बनाया जा सके। इससे पहले मोरमुगाओ पोर्ट प्राधिकरण ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि उसकी जमीन पर जबरन घुसकर स्थायी प्रतिमा स्थापित कर दी गई, जबकि इस संबंध में पहले ही पुलिस और अन्य अधिकारियों को शिकायत दी गई थी।


    क्या बोला हाईकोर्ट?

    इसके बाद हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक बड़े बंदरगाह की संपत्ति पर सीधा अतिक्रमण है और राज्य सरकार मूकदर्शक बनी रही। अदालत ने यहां तक कहा कि ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने अतिक्रमण करने वालों के साथ परोक्ष रूप से सहयोग किया है। अदालत ने पुलिस के हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस ने पहले ही कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी, इसके बावजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेट, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने 19 फरवरी को प्रतिमा के उद्घाटन को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।


    सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

    HC ने यह भी नोट किया कि उद्घाटन कार्यक्रम में स्थानीय विधायक संकल्प आमोणकर और अन्य राजनीतिक हस्तियां मौजूद थीं। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन और स्थानीय नेताओं के बीच किसी तरह की समझ बनी हुई थी और पोर्ट की जमीन की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि इसी जमीन पर प्रतिमा लगाने के लिए पहले विधायक की ओर से अनुमति मांगी गई थी, जिसे पोर्ट प्राधिकरण ने केंद्र सरकार की भूमि नीति के तहत खारिज कर दिया था।

    HC ने राज्य सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि पोर्ट प्राधिकरण को सार्वजनिक परिसर कानून के तहत ही कार्रवाई करनी चाहिए या अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर रहना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

  • CG: दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर' का कहर…., 83 सुअरों को मारकर दफनाया

    CG: दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर' का कहर…., 83 सुअरों को मारकर दफनाया


    दुर्ग।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग जिले (Durg district) में ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ (‘African Swine Fever’-ASF) संक्रमण पाए जाने के बाद 83 सुअरों को मार दिया गया है तथा संक्रमण से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जिले के धमधा विकासखंड में मुड़पार गांव के सुअर फार्म में ASF संक्रमण पाए जाने के बाद पशुपालन विभाग ने अन्य सुअर पालकों को सतर्क कर दिया है।

    उन्होंने बताया कि मुड़पार गांव में एक निजी सुअर पालक के यहां पिछले कुछ दिनों से सुअरों की मृत्यु हो रही थी और जब सुअर पालक ने इसकी सूचना जिला पशुपालन विभाग को दी, तब दो अप्रैल को पशुपालन विभाग सुअर फार्म पहुंचा और नमूना जांच के लिए भोपाल भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को रिपोर्ट में सुअरों में ASF की पुष्टि होने के बाद पशुपालन विभाग द्वारा 83 सुअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया गया तथा संक्रमण रोकने के लिए सुअरों के शवों को नियमों के अनुसार दफना दिया गया है।

    दुर्ग में पशु चिकित्सा सेवाओं के उप संचालक डॉक्टर वसीम शम्स ने बताया कि ASF एक ऐसी बीमारी है जिसका ना तो कोई इलाज है और ना ही अभी तक इसकी कोई वैक्सिन बनी है, इसलिए भारत सरकार के दिशानिर्देश के तहत वैज्ञानिक पद्धति से सुअरों को मारकर दफनाने का प्रावधान है।

    डॉक्टर शम्स ने बताया कि यह बीमारी केवल सुअरों से सुअरों तक ही फैलती है, अन्य किसी जानवर या इंसानो में इसका असर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि एक किलोमीटर क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है।

  • Rajasthan: सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 5 बच्चों की मौत…

    Rajasthan: सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 5 बच्चों की मौत…


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के सलूम्बर जिले (Salumber district) के 2 गांवों में रहस्यमयी बीमारी (Mysterious Disease) से 5 बच्चों की मौत हो गई है। इसको लेकर सूबे के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) के निर्देश पर उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज और जयपुर से विशेषज्ञों की टीमें जांच के लिए भेजी गई हैं। मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की कड़ी निगरानी करने के आदेश दिए हैं। बुखार के लक्षणों वाले बच्चों की सघन स्क्रीनिंग करने को कहा गया है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से पांच बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। इसको लेकर राजस्थान सरकार की ओर से जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को वस्तुस्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बुखार के लक्षण वाले बच्चों की सघन मेडिकल जांच कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।


    मांगी रिपोर्ट

    रहस्यमय बीमारी के फैलने की बात सामने आने पर राजस्थान सरकार ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित कर गहन जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि सलूम्बर में बच्चों की मौत का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तत्काल अधिकारियों को वस्तुस्थिति पता करने को कहा है।


    भेजी विशेषज्ञों की टीम

    सीएम ने अधिकारियों से मौत की वजहों का पता लगाने के साथ ही बीमारी की रोकथाम के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यही नहीं राज्य का स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया है। उसने तत्काल प्रभाव से आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित की है। साथ ही टीमों को बीमारी से प्रभावित गांवों में भेजा है।


    बच्चों की मौत का कारण पता करेंगी

    विशेषज्ञों की ये टीमें बच्चों की मौत का कारण पता करेंगी। साथ ही बीमारी से बचाव के संबंध में भी जरूरी कार्यवाही सुनिश्चित करेंगी। स्वास्थ्य निदेशालय, जयपुर से भी एक टीम भेजी गई है। मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने भी सोमवार रात को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की पूरी जानकारी ली।


    रोकथाम के उपाय लागू करने के निर्देश

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन के साथ अन्य अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा है। साथ ही मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए एंटीलार्वा, सोर्स रिडक्शन, फोगिंग के साथ अन्य रोकथाम के उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।


    टीमें तैनात करने के आदेश

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सलूम्बर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित गांवों और आस-पास के क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें तैनात करें। यही नहीं बुखार के लक्षण वाले बच्चों की गहन जांच सुनिश्चित करें। किसी भी बच्चे में लक्षण मिलें तो तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं। गंभीर बीमार बच्चों को तत्काल जिला चिकित्सालय या मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में रेफर करें।

  • पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल…. बोले- PM मोदी ने सौंपी 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी

    पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल…. बोले- PM मोदी ने सौंपी 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इसी महीने होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले सियासत में और ज्यादा गर्माहट बढ़ गई है। ऐसे में अब भारत के पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस (Former Indian Tennis star Leander Paes) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने मुझे युवाओं और खेल के लिए काम करने का एक स्पष्ट दृष्टिकोण दिया। उन्होंने मुझे 2036 ओलंपिक गेम्स के लिए भारत की दावेदारी से जुड़ी जिम्मेदारी दी है। मुझे इस देश में ओलंपिक लाने के लिए एक टीम के साथ कड़ी मेहनत करनी है। पेस ने यह बात शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत के दौरान कही।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें युवाओं और खेलों के लिए काम करने का साफ विजन दिया है। अब उनका लक्ष्य है कि एक मजबूत टीम के साथ मिलकर भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी दिलाई जाए। पेस ने कहा कि अगर भारत ओलंपिक की मेजबानी करता है, तो इससे देश की पहचान दुनिया में और मजबूत होगी और खेलों को बढ़ावा मिलेगा।


    राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में भी योगदान की चार- पेस

    पेस ने आगे कहा कि वह 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में भी योगदान देना चाहते हैं, खासकर अहमदाबाद में होने वाले संभावित आयोजन के लिए। इसके साथ ही उन्होंने अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।


    खुद को बताया बंगाली बॉय

    इस दौरान खुद को बंगाली बॉय बताते हुए पेस ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इंडोर टेनिस स्टेडियम और अच्छी खेल सुविधाओं की कमी है। उनका सपना है कि आने वाले 20 वर्षों में वे देश के 25 करोड़ बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं और उन्हें खेलों से जोड़ें।


    पेस ने इन देशों का दिया उदाहारण

    पेस यह भी कहा कि भारत को खेलों में आगे बढ़ने के लिए मजबूत स्पोर्ट्स कल्चर अपनाना होगा। पेस ने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिसा और ब्रिटेन जैसे देश, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं, वही ओलंपिक में भी सबसे ज्यादा पदक जीतते हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत को भी खेलों के बुनियादी ढांचे, ट्रेनिंग और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने में निवेश करना होगा। पेस के मुताबिक, खेल और खेल शिक्षा भारत को एक नई ताकत बना सकते हैं और युवा खिलाड़ियों का विकास देश के ओलंपिक सपने को पूरा करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा।