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  • तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?

    तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?


    चेन्नई।
    सोमवार को आए तमिलनाडु विधानसभा (Tamil Nadu Assembly elections) के चुनावी नतीजों में हाल ही में बनी पार्टी टीवीके (TVK) ने कमाल कर दिया। अपने पहले ही चुनाव में टीवीके चीफ थालापति विजय (TVK Chief Thalapathy Vijay) की पार्टी ने तमिलनाडु के 108 सीटों पर जीद दर्ज की है। आज पूरे देश में नई बनी पार्टी टीवीके और थालापति विजय की चर्चा है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब थालापति विजय राजनीति में नहीं आना चाहते थे। राजनीति में आने से पहले अपने भविष्य को लेकर विजय थालापति असमंजस में रहते थे। आइए जानते हैं उन्हें किस बात का डर था और वो राजनीति में अभी क्यों नहीं आना चाहते थे।


    किस बात का था डर

    साउथ की फिल्मों में सुपरस्टार थालापति विजय बॉक्स ऑफिस पर एकदम हिट थे और प्रदेश की जनता भी उन्हें भगवान की तरह पूजती थी, लेकिन वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे। विजय के पिता भी चाहते थे कि वो राजनीति में आएं, लेकिन उनको अपने ऊपर पूरी तरह भरोसा नहीं था। अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर थालापति विजय निश्चित नहीं थे, इसलिए वो पार्टी नहीं बनाना चाहते थे।

    थालापति विजय ने अचानक क्यों बनाई पार्टी
    थालापति के माता-पिता उन्हें साल 2009 से ही राजनीति में लाना चाहते थे, क्योंकि पूरे तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता और फैन फॉलोइंग बहुत ज्यादा थी। लेकिन वो राजनीति में नहीं आए। इस दौरान वो चाहते थे कि प्रदेश में ऐसा वैक्यूम बने जब एक नई राजनीतिक पार्टी की जरूरत हो। साल 2016 में जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपनी साख खोती दिख रही थी। तमिलनाडु में मजबूत संगठन के बावजूद अपने शीर्ष नेताओं के बीच चल रही लगातार लड़ाई के कारण एआईएडीएमके ने अपनी राजनीतिक हैसियत को खत्म कर लिया। इस दौरान विजय थालापति ने एआईएडीएमके के खिलाफ बुगल फूंक दिया और बीजेपी को भी निशाने पर लिया।

    एआईएडीएमके के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और बीजेपी के खिलाफ सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर विजय ने जमीन पर अपना काम शुरू कर दिया। इस दौरान विजय को युवाओं और महिलाओं के बीच काफी समर्थन मिला। इसी समय विजय ने पार्टी बनाने का मन बना लिया और साल 2026 के चुनावों में कमाल करते हुए पहली बार में ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर आई।

  • शुभेन्दु 1 सीट से लड़ना चाहते थे….अमित शाह ने दिया 2 सीटों का फॉर्मूला… ममता को दिखाया 2021 का रीकैप

    शुभेन्दु 1 सीट से लड़ना चाहते थे….अमित शाह ने दिया 2 सीटों का फॉर्मूला… ममता को दिखाया 2021 का रीकैप


    कोलकाता।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी (Trinamool Congress supremo Mamata Banerjee) को 2021 का रीकैप दिखा दिया। सोमवार को जब नतीजे घोषित हुए तो एक बार फिर भाजपा हैवी वेट शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने उन्हें हरा दिया, लेकिन इस बार मैदान भवानीपुर का रहा। इसके अलावा अधिकारी ने नंदीग्राम से भी जीत दर्ज कर ली है। अब खबर है कि अधिकारी सिर्फ एक ही सीट से लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें दो सीटों से लड़ाने का फॉर्मूला केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने दिया था।


    जब अमित शाह ने बताई भवानीपुर की इनसाइड स्टोरी

    भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता था। इस बार भी वह इस सीट से चुनाव लड़ रहीं थीं। 2 अप्रैल को गृह मंत्री शाह भवानीपुर में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। तब उन्होंने कहा था, ‘शुभेंदु दा हमारे नंदीग्राम से लड़ना चाहते थे। मैंने शुभेंदु दा को कहा था कि सिर्फ नंदीग्राम नहीं, ममता के घर में जाकर उसको हराना है।’

    भवानीपुर सीट पर जीत के बाद अधिकारी ने बताया कि मतगणना के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री शाह लगातार उनके संपर्क में थे और इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले को लेकर चिंता जताई थी।


    शुभेंदु अधिकारी ने 17 हजार का अंतर कवर किया

    भाजपा नेता और टीएमसी प्रमुख के बीच भवानीपुर में रोमांचक मुकाबला देखने को मिला था। यहां शुरुआती दौर में अधिकारी ने लीड हासिल कर ली थी, लेकिन कुछ राउंड काउंटिंग के बाद बनर्जी आगे आ गईं थीं। यहां तक कि एक समय पर वह करीब 17 हजार मतों से आगे भी चल रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे राउंड बढ़े और अंतर कम होता गया।

    अंतिम नतीजा आया कि अधिकारी ने 20 राउंड की काउंटिंग के बाद बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। उन्हें कुल 73 हजार 917 वोट मिले थे। जबकि, बनर्जी को 58 हजार 812 वोट मिले। इस सीट पर तीसरे स्थान पर लेफ्ट नेता श्रीजीब बिस्वास रहे और चौथे पर महज 1257 वोट पाने वाले कांग्रेस नेता प्रदीप प्रसाद थे।


    डबल धमाका

    ऐसा ही नतीजा नंदीग्राम से भी देखने को मिला, जहां अधिकारी ने अपने पूर्व करीबी और टीएमसी प्रत्याशी पवित्र कर को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। यहां उन्होंने 1 लाख 27 हजार 301 वोट पाकर जीत दर्ज की। सीट पर कांग्रेस पांचवें स्थान पर रही और महज 794 वोट ही हासिल कर सकी।


    जीत के क्या बोले अधिकारी

    अधिकारी ने इसे निर्णायक राजनीतिक क्षण बताया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, जीत का प्रमाणपत्र दिखाते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि बनर्जी को उनके गढ़ में हराना प्रतीकात्मक और रणनीतिक, दोनों ही दृष्टि से अहम है। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत महत्वपूर्ण है। ममता बनर्जी को हराना काफी मायने रखता है।’

    अधिकारी ने दावा किया कि यह चुनाव परिणाम ममता के राजनीतिक करियर के अंत का संकेत है। उन्होंने कहा, ‘यह जीत हिंदुत्व की जीत है।’ उन्होंने दावा किया कि विभिन्न वर्गों, यहां तक कि अन्य दलों के पारंपरिक समर्थकों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन क्षेत्र में वामपंथी मतदाताओं के एक वर्ग ने उनका समर्थन किया, जिससे तृणमूल कांग्रेस विरोधी वोटों को एकजुट करने में मदद मिली।

  • CG: कबीरधाम जिले में पुल से नीचे गिरी बेकाबू कार…. 4 युवकों की मौत

    CG: कबीरधाम जिले में पुल से नीचे गिरी बेकाबू कार…. 4 युवकों की मौत


    कबीरधाम।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कबीरधाम जिले (Kabirdham district) में एक कार अनियंत्रित होकर पुल से नीचे गिर (Car Skidded off Bridge) गई। इस हादसे में कार पर सवार चार युवकों की मौत हो गई। दुर्घटना में दो अन्य घायल हो गए। घटना की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के पंडरिया इलाके में पांडातराई के करीब गड़ाई गांव स्थित एक छोटे पुल से तेज गति से जा रही कार अनियंत्रित होकर नीचे गई। इस घटना में अरमान अली (20), मोहम्मद सैफ (19), अनस अली (21) और कौनैन (19) की मौत हो गई तथा दो अन्य जुनेद रजा (21) और आरजू खान (19) घायल हो गए हैं।

    पुलिस को मिली सूचना के अनुसार, रायपुर के बिरगांव निवासी युवक एक कार में सवार होकर विवाह समारोह में शामिल होने पंडरिया के लिए रवाना हुए थे। रविवार देर रात जब वह गड़ाई गांव स्थित एक छोटे पुल के करीब पहुंचे तब उसकी कार अनियंत्रित होकर पुल से लगभग 50 फुट नीचे गिर गई। इस घटना में चार युवकों की मौत हो गई तथा दो अन्य घायल हो गए।

    अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया तथा शवों और घायलों को अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि घायल युवकों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

  • पश्चिम बंगालः कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना आज …. CAPF की 200 कंपनियां तैनात

    पश्चिम बंगालः कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना आज …. CAPF की 200 कंपनियां तैनात


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Election 2026) की मतगणना (Vote Counting) को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि काउंटिंग के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि व्यापक सुरक्षा इंतजामों के बीच मतगणना पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से कराई जाएगी। वोटों की गिनती से पहले हुई कई बैठकों में अग्रवाल ने साफ किया कि चुनाव आयोग ने कोई भी कसर नहीं छोड़ी है।

    पूरे राज्य में मतगणना केंद्रों (Counting centres) की सुरक्षा के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 200 कंपनियों को मतगणना केंद्रों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। इसके अलावा राज्य पुलिस, राज्य सशस्त्र पुलिस और CAPF मिलकर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। मतगणना केंद्रों के बाहर सभी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं।


    तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू

    मनोज अग्रवाल ने कहा, ‘सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। रिटर्निंग ऑफिसर (RO), असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (ARO), मतगणना एजेंट और सुपरवाइजर पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें कई बार प्रशिक्षण दिया जा चुका है। किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है, सब कुछ नियमों के अनुसार ही होगा।’ उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी स्तर पर लापरवाही या शरारत पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतगणना केंद्र के अंदर मौजूद कोई भी व्यक्ति अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी करता है, तो उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उन्होंने राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, एजेंटों और आम जनता से अपील की कि वे शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें, ताकि मतगणना बिना किसी बाधा के पूरी हो सके। अग्रवाल ने बताया कि चुनाव आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस महानिदेशक और अन्य सीनियर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें की हैं, ताकि किसी भी संभावित अशांति को पहले ही रोका जा सके। उन्होंने कहा कि पहले और दूसरे चरण के मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए थे और उम्मीद है कि मतगणना भी उसी तरह शांतिपूर्ण होगी।

  • Bihar: भागलपुर में विक्रमशिला ब्रिज का हिस्सा टूटकर गंगा नदी में गिरा… बड़ा हादसा टला

    Bihar: भागलपुर में विक्रमशिला ब्रिज का हिस्सा टूटकर गंगा नदी में गिरा… बड़ा हादसा टला


    नई दिल्ली।
    बिहार (Bihar) के भागलपुर (Bhagalpur) में रात को एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बचा. गंगा नदी (River Ganges) पर बना विक्रमशिला ब्रिज (Vikramshila Bridge) का एक हिस्सा अचानक टूटकर नदी में गिर (Broken fell River) गया. लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों की तेजी की वजह से पहले ही लोगों को हटा लिया गया था, इसलिए कोई नहीं मरा, कोई नहीं घायल हुआ।

    जिला अधिकारी नवल किशोर चौधरी के अनुसार, मौके पर मौजूद स्थानीय अधिकारी और SHO की सतर्कता की वजह से तुरंत लोगों को उस हिस्से से हटा लिया गया. लोगों को हटाने के करीब 15 मिनट बाद ही पुल का स्लैब गंगा नदी में गिर गया।

    घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विक्रमशिला ब्रिज को भागलपुर और नवगछिया दोनों तरफ से पूरी तरह सील कर दिया है. फिलहाल पुल पर सभी तरह का ट्रैफिक बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने बताया कि रात के समय वैकल्पिक रास्ता शुरू करना संभव नहीं था. जो लोग भागलपुर आना चाहते हैं, उन्हें फिलहाल मुंगेर के रास्ते आने की सलाह दी गई है।


    25 साल पुराना पुल, अब इस्तेमाल के लायक नहीं

    यह पुल साल 2001 में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था. करीब 4.5 किलोमीटर लंबा यह सेतु हजारों वाहनों और लाखों लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का प्रमुख साधन था. लेकिन महज 25 साल के भीतर ही इसका एक बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत इस पर आवाजाही रोक दी.


    प्रशासन ने वैकल्पिक रास्ते को लेकर क्या कहा?

    अब प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था बनाने और स्थिति को सामान्य करने के लिए काम कर रहा है. प्रशासन ने फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मुंगेर ब्रिज का सुझाव दिया है, जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है. अब यात्रियों को लंबा रास्ता तय करना होगा. परिवहन में समय और लागत दोनों बढ़ेंगे.

  • पश्चिम बंगाल: मुस्लिम बहुल सीटों पर टिके हैं चुनाव के नतीजे, 85 क्षेत्रों में 30% आबादी निर्णायक भूमिका में

    पश्चिम बंगाल: मुस्लिम बहुल सीटों पर टिके हैं चुनाव के नतीजे, 85 क्षेत्रों में 30% आबादी निर्णायक भूमिका में


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के 2026 विधानसभा चुनाव (2026 Assembly Elections) के नतीजे राज्य के जनसांख्यिकीय गणित, खासकर ‘मुस्लिम बहुल’ सीटों (Muslim-majority seats) पर टिके हैं। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में सत्ता की चाबी उन निर्वाचन क्षेत्रों में छिपी है, जहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2021 में इस वोट बैंक के बंपर समर्थन से सत्ता बचाने वाली ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) क्या इस बार बहुकोणीय मुकाबले में अपना एकाधिकार कायम रख पाएगी?


    2021 का एकतरफा समीकरण और टीएमसी का क्लीन स्वीप

    भारत की चुनावी प्रणाली में, अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में एक ही समुदाय की 30% से अधिक सघन आबादी हो, तो वह नतीजे तय करने की ताकत रखती है। आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 89 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 30% के महत्वपूर्ण मानक को पार करती है। कुछ अनुमानों के अनुसार राज्य की कुल 294 सीटों में से लगभग 85 से 110 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी इस 30% के महत्वपूर्ण वैचारिक और सांख्यिकीय मानक के पार है। वहीं करीब 112 निर्वाचन क्षेत्रों में यह 25% से अधिक है।

    पश्चिम बंगाल के राजनीति इतिहास पर गौर करें तो इन क्षेत्रों पर दशकों तक वाम मोर्चे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का निर्विवाद राजनीतिक एकाधिकार रहा था। हालांकि, 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद से, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस विशाल अल्पसंख्यक वोट बैंक पर अपना एकछत्र रणनीतिक प्रभुत्व स्थापित कर लिया, जिसने उन्हें 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार भारी बहुमत के साथ सत्ता में बनाए रखा।

    2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने 30% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली करीब 85 में से 75 सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज करते हुए लगभग क्लीन स्वीप किया था। ‘एक्सिस माय इंडिया’ के 2021 एग्जिट पोल के अनुसार, उस दौरान लगभग 75% मुस्लिम मतदाताओं ने एकजुट होकर टीएमसी को वोट दिया था। इसी एकमुश्त समर्थन ने भाजपा के आक्रामक अभियान को रोक दिया था। 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर टीएमसी ने दबदबा दिखाया था। मुर्शिदाबाद की 22 में से 20 सीटों पर टीएमसी जीती, दो सीटें बीजेपी को मिलीं। कांग्रेस और लेफ्ट का खाता नहीं खुला। मालदा की 12 सीटों में टीएमसी ने आठ और बीजेपी ने चार सीटें जीतीं। उत्तर दिनाजपुर में टीएमसी को सात और बीजेपी को दो सीटें मिलीं। बीरभूम की 11 में से 10 सीटें टीएमसी ने जीतीं, एक बीजेपी के पास गई। दक्षिण 24 परगना की 31 में से 30 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज की।


    भाजपा के लिए यह दीवार अभेद्य क्यों?

    भाजपा के लिए ये मुस्लिम बहुल सीटें एक दीवार की तरह काम करती हैं। 2021 में, 30% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली इन सीटों पर भाजपा केवल एक सीट जीत सकी थी। इसके विपरीत, जिन सीटों पर मुस्लिम आबादी 10% तक थी, वहां भाजपा का ‘स्ट्राइक रेट’ 42% था (77 में से 33 सीटें जीतीं)। जैसे-जैसे मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा, भाजपा का प्रदर्शन गिरता गया।

    2026: बहुकोणीय मुकाबला और वोटों के बिखराव का खतरा

    2026 का परिदृश्य 2021 के सीधे दो दलों के मुकाबले से पूरी तरह अलग और जटिल है। इस बार अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर टीएमसी के वोट बैंक में सेंधमारी के कई मोर्चे खुल गए हैं:

    वाम-आईएसएफ गठबंधन: वाम मोर्चे ने पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’ (ISF) से गठबंधन किया है। 2026 में आईएसएफ को गठबंधन के तहत 30 सीटें आवंटित की गई हैं। आईएसएफ दक्षिण 24 परगना (जैसे भांगड़) में टीएमसी को सीधी चुनौती दे रही है।

    कांग्रेस का स्वतंत्र अभियान: दशकों बाद कांग्रेस बिना वामदलों के समर्थन के अकेले चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अपने पुराने गढ़ वापस पाना है (जैसे मालतीपुर में मौसमी नूर की उम्मीदवारी), जो टीएमसी के आधार में सीधे सेंध लगाएगी।

    एआईएमआईएम की एंट्री: उत्तर दिनाजपुर जैसे उर्दू/सुरजापुरी भाषी बेल्ट में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी आक्रामक प्रयास कर रही है।


    मार्जिन की राजनीति और भाजपा का गणित

    भाजपा को बंगाल जीतने के लिए इस मुस्लिम किले को भेदना होगा या हिंदू बहुल सीटों पर भारी बढ़त बनानी होगी। चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, यदि स्वतंत्र रूप से लड़ रही कांग्रेस या आईएसएफ इन अल्पसंख्यक सीटों पर केवल 5% से 10% वोटों का भी बिखराव करने में सफल होते हैं, तो टीएमसी का वोट शेयर कम हो जाएगा। इस त्रिकोणीय लड़ाई का सीधा गणितात्मक लाभ भाजपा को मिलेगा, जो अपने 38% के स्थिर बहुसंख्यक (हिंदू) वोट बैंक पर मजबूती से टिकी हुई है।


    क्या होगा इस बार?

    चुनाव आयोग के’विशेष सघन पुनरीक्षण (एआईआर) अभियान के कारण मतदाता सूची से नाम कटने और नागरिकता खोने के डर ने इस बार मुस्लिम बहुल सीटों पर 96% तक का अभूतपूर्व मतदान सुनिश्चित किया है। चाणक्य स्ट्रेटीजीज के एग्जिट पोल के अनुसार, 71% मुस्लिम मतदाता टीएमसी के साथ मजबूती से लामबंद दिख रहे हैं।

    अगर यह एकमुश्त मतदान वास्तविकता में परिवर्तित होता है, तो टीएमसी लगातार चौथी बार सरकार बना सकती है। लेकिन अगर कांग्रेस, आईएसएफ और अन्य दलों के कारण इस वोट बैंक में जरा भी सेंधमारी हुई है, तो चुनाव परिणाम एक त्रिशंकु विधानसभा की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे में, मालदा और मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और आईएसएफ द्वारा जीती गई चंद सीटें अगली सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका निभाएंगी।

  • बिहार में एक और एनकाउंटर…. पूर्व बीजेपी MLC के भांजे की हत्या के मुख्य आरोपी को किया ढेर

    बिहार में एक और एनकाउंटर…. पूर्व बीजेपी MLC के भांजे की हत्या के मुख्य आरोपी को किया ढेर


    सीवान
    । बिहार पुलिस (Bihar Police) अपराधियों पर लगातार कहर बनकर टूट रही है। अब पुलिस ने रविवार की सुबह-सुबह एक और एनकाउंटर (Another Encounter) कर दिया है। सीवान जिले (Siwan district) में हाल ही में पूर्व बीजेपी एमएलसी मनोज सिंह (Former BJP MLC Manoj Singh) के भांजे की हुई हत्या के मामले के मुख्य आरोपी को अब पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है।भाजपा नेता व पूर्व एमएलसी मनोज सिंह के भांजे हर्ष सिंह की गत 29 अप्रैल को गोली मारकर हत्या करनेवाले मुख्य आरोपित सोनू यादव को पुलिस के साथ मुठभेड़ में रविवार की अहले सुबह ढेर कर दिया गया है। वह हुसैनगंज थाना क्षेत्र के सरेया का रहनेवाला है। गाड़ी सटने के विवाद में पूर्व एमएलसी के भांजा व बहनोई को गोली मार दी गई थी।

    इस गोलीबारी में बीजेपी नेता मनोज सिंह के भांजे हर्ष सिंह की मौत हो गई थी। भाजपा नेता के बहनोई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और इस गोलीबारी का एक वीडियो भी सामने आया था। इस वीडियो में आरोपी गोली चलाता नजर आ रहा था। पुलिस ने इस मामले के एक अन्य आरोपी छोटू यादव का भी कुछ दिनों पहले हाफ एनकाउंटर किया था। पुलिस ने छोटू यादव के पैर में गोली मारी थी।


    हर्ष के आरोपितों की कार बरामद, चालक गिरफ्तार

    बहरहाल आपको बता दें कि सीवान जिले के चर्चित हर्ष हत्याकांड में नगर थाना पुलिस ने घटना में प्रयुक्त वाहन कार और उसके चालक को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार चालक की पहचान हुसैनगंज थाना क्षेत्र के खरसंडा गांव निवासी दिलीप यादव के पुत्र सुनील यादव के रूप में हुई है। बता दें कि बीते 29 अप्रैल को कार से धक्का लगने के बाद पिता-पुत्र को गोली मार दी गई थी। इस हमले में पुत्र हर्ष सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले भर में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इसी क्रम में गुप्त सूचना मिली कि वारदात में इस्तेमाल गाड़ी जामो थाना क्षेत्र के मझौलिया गांव में देखी गई है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और वाहन सहित चालक को गिरफ्तार कर लिया था।

    नगर थाना पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार चालक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में शामिल अन्य अपराधियों को भी पकड़ लिया जाएगा।

  • गुरुग्राम में प्यार का क्रूर अंत… सनकी पति ने पत्नी और 4 बच्चों को सुलाया मौत की नींद, एक साथ उठी 5 अर्थियां

    गुरुग्राम में प्यार का क्रूर अंत… सनकी पति ने पत्नी और 4 बच्चों को सुलाया मौत की नींद, एक साथ उठी 5 अर्थियां


    गुरुग्राम।
    कहते हैं कि प्यार 7 जन्मों का साथ होता है और पिता बच्चों की ढाल, लेकिन गुरुग्राम (Gurugram) के वजीरपुर इलाके (Wazirpur area) में शनिवार की देर रात एक ऐसा मंजर सामने आया जिसने इंसानियत को शर्मसार (Shame on humanity) कर दिया और सुनने वालों की रूह कंपा दी. यहां कुछ सालों पहले जिस प्यार के लिए वादे और कसमें खाई गई थीं, उसका अंत 5 बेगुनाह जिंदगियों (Innocent lives) की लाशों के साथ हुआ.

    ​दरअसल शनिवार देर रात गुरुग्राम के वजीरपुर में एक मकान के अंदर जब पुलिस दाखिल हुई, तो वहां सन्नाटा पसरा था. कमरे के अंदर चार मासूम बच्चों और उनकी मां के बेजान शरीर पड़े थे. वे बच्चे जिन्होंने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था, अपने ही पिता की नफरत या सनक का शिकार हो गए. मौके पर पहुंची पुलिस ने पांचों शवों को कब्जे में लिया, वहीं पास में एक टूटा हुआ मोबाइल फोन भी मिला, जो शायद उस खूनी संघर्ष या आखिरी चीख का गवाह रहा होगा.

    आरोपी नाजिम (Nazim) ने दिल्ली की रहने वाली नजमा से प्रेम विवाह किया था. उस वक्त दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाईं थीं, पर किसे पता था कि अंत इतना वीभत्स होगा. इस घटना में नजमा 35 साल, इकरा 14 साल, सिफा 12 साल, खतिना 10 साल व आयन 8 साल की मौत हो गई, जबकि नजीम को हॉस्पिटल में दाखिल करवाया गया है।


    घटना की जांच में जुटी पुलिस

    एसीपी नवीन शर्मा के मुताबिक आरोपी पति ने पहले अपने चार नाबालिग बच्चों और पत्नी को जहर देकर मौत के घाट उतारा और फिर खुद भी आत्महत्या करने की कोशिश की. घर की वे दीवारें जो कल तक बच्चों की हंसी और शोर से गूंजती थीं, आज वहां सिर्फ मातम और सन्नाटा है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि पति ने ही इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है. हमने घटनास्थल से साक्ष्य जुटा लिए हैं और मामले की गहनता से तफ्तीश की जा रही है.

    ​इस घटना ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या एक इंसान इतना पत्थर दिल हो सकता है कि उसे अपने ही खून पर तरस न आए? वह कौन सी मजबूरी या नफरत थी जिसने एक पिता को कसाई बना दिया? फिलहाल आरोपी अस्पताल में है, लेकिन उन चार मासूमों और उनकी मां की मौत का हिसाब शायद कभी पूरा न हो पाए. ​गुरुग्राम पुलिस मामले की जांच में जुटी है और टूटे हुए मोबाइल से कुछ अहम सुराग मिलने की उम्मीद है.

  • UP में बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा नहाने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी…. 25 घायल

    UP में बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा नहाने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी…. 25 घायल


    शाहजहांपुर।
    यूपी (UP) के हरपालपुर (Harpalpur) से 60 यात्रियों को बैठाकर फर्रुखाबाद आ रही प्राइवेट बस (BUS) शाहजहांपुर (Shahjahanpur.) के अल्लाहगंज थाना क्षेत्र में गांव रघुनाथपुर के पास शुक्रवार को ओवरटेक करने के दौरान पलट गई। इससे 25 यात्री घायल हो गए। इनमें 11 को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। अन्य वहीं उपचार हुआ। बस में सवार अधिकांश यात्री बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) के चलते पांचाल घाट पर गंगा स्नान करने जा रहे थे।

    हरदोई जनपद के हरपालपुर से सुबह प्राइवेट बस में करीब 60 यात्री सवार हुए। चालक बस को तेजी भगा रहा था। कुछ यात्रियों ने उससे सही से बस चलाने के लिए भी कहा। पर उसने एक नहीं सुनी। इस बीच गांव रघुनाथपुर के पास आगे चल रहे वाहन को ओवर टेक करने के प्रयास में बस पलट गई। इससे चीख पुकार मच गई। पुलिस व आसपास के ग्रामीणों ने बस में फंसे लोगों को बाहर निकाला। इसमें 25 यात्री घायल हो गए। एंबुलेंस से 11 घायल यात्रियों को लोहिया अस्पताल भेजा गया है। इनमें से नौ को भर्ती कर लिया गया। दो यात्रियों को मरहम पट्टी के बाद छुट्टी दे दी गई। घटना की जानकारी होने पर एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम, एसडीएम सदर रजनीकांत पांडेय ने सीओ अभय वर्मा लोहिया अस्पताल में पहुंच कर मरीजों का हाल जाना है।

    हरदोई थाना पाली के गांव पांडेयपुरवा निवासी राधिका(45), नन्हीं देवी (60), सवायजपुर गांव सलउद्दीपुर के विश्व प्रताप सिंह (31), मिलरगवां की उमाकांती (55), माहरेपुर की गुड्डी (55), रामदेवी (65), अनुष्का (8) पुत्री प्रदीप पाल, नंदबाग के रामलड़ैते (47), जदुवीर सिंह (60), गोकुल बेहटा के गांव रामपुर मानपुर के रंजीत सिंह, अमरेखा के राजू (30) को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    लोहिया अस्पताल में भर्ती हरदोई जिले के थाना सवायजपुर क्षेत्र के गांव मिरगवां निवासी घायल उमाकांती के पुत्र राहुल ने बताया कि बस पलटने पर उनकी मां के कुंडल व छह हजार रुपये वहीं गिर गए थे। बस से निकालने के दौरान एक सिपाही ने कुंडल व रुपये उठा लिए थे। मांगने उसने कहा कि पहले अस्पताल जाकर इलाज कराओ बाद में थाने आकर ले जाना। पर जब राहुल रुपये व कुंडल मांगने गया तो सिपाही ने रुपये व कुंडल लेने से ही इनकार कर दिया। इससे परेशान व्यवस्था कोसता रहा।

  • पश्चिम बंगाल में Exit Poll से BJP में उत्साह….. दलितों के साथ मुसलमानों का वोट भी मिला

    पश्चिम बंगाल में Exit Poll से BJP में उत्साह….. दलितों के साथ मुसलमानों का वोट भी मिला


    कोलकाता।
    ज्यादातर एग्जिट पोल्स (Exit Polls) में इस बार पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भाजपा (BJP) की जीत का अनुमान लगाया गया है। गुरुवार को सामने आए टुडेज चाणक्य के एग्जिट पोल (Todays Chanakya Exit Poll) में भाजपा को बंपर जीत मिलती दिख रही। बीजेपी को 192 तो टीएमसी (TMC) को 100 सीटें मिल सकती हैं। दोनों के बीच 10 फीसदी वोट शेयर का अंतर रह सकता है। सर्वे में दावा किया गया है कि इस बार भाजपा को पश्चिम बंगाल में मुसलमानों का भी वोट मिल रहा, जबकि 67 फीसदी दलित भी भाजपा पर भरोसा जता रहे।

    टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल के अनुसार, भाजपा को आठ फीसदी मुस्लिम वोट मिल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस को 71 फीसदी वोट मुस्लिमों का मिल सकता है। 67 फीसदी दलित वोट भाजपा को, जबकि 22 फीसदी टीएमसी को मिलने का अनुमान है। 61 फीसदी ओबीसी वोट भाजपा के खाते में जा सकते हैं, जबकि 27 फीसदी वोट टीएमसी को मिल सकता है। 53 फीसदी एसटी वोट भाजपा को और 40 फीसदी टीएमसी को मिल सकता है। वहीं, इसमें तीन फीसदी प्लस माइनस मार्जिन दिया गया है।

    भाजपा 48 फीसदी वोटों के साथ इस बार राज्य में 192 सीटें जीत सकती है। इसमें मार्जिन 11 सीटों का दिया गया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा सकता है। ममता बनर्जी की पार्टी महज 100 सीटों पर सिमट सकती है। उसे 38 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, 14 फीसदी वोट अन्य के खाते में जा सकते हैं, जोकि सीटों में कन्वर्ट होकर दो होंगे। इसमें भी मार्जिन दो का रखा गया है।


    ममता ने उठाए एग्जिट पोल पर सवाल

    ममता बनर्जी ने विभिन्न एग्जिट पोल्स पर सवाल उठाते हुए टीएमसी की बड़ी जीत का दावा किया। बनर्जी ने भरोसा जताया कि चार मई को बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद TMC ही सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी गिनती के दौरान किसी भी तरह का खेल नहीं होने देगी। बनर्जी ने एक वीडियो संदेश में कहा, “एग्जिट पोल भाजपा के दफ्तर से आए हैं। ये आंकड़े मनगढ़ंत हैं, जिनका मकसद TMC कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना है।”

    ज्यादातर बंगाल एग्जिट पोल्स में भाजपा की जीत का अनुमान है। मैट्रिज के अनुसार, टीएमसी को 125-140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भाजपा 146-161 सीटें जीत सकती है। इसके अलावा, पी मार्क्यू के अनुसार, भाजपा को 150-175 सीटें, टीएमसी को 118-138 सीटें मिल सकती हैं। पोल डायरी के अनुसार, भाजपा 142-171 और टीएमसी 99-127 सीटें जीत सकती है। वहीं, पीपुल्स पल्स एग्जिट पोल ने बताया है कि टीएमसी की जीत होगी और उसे 177-187 सीटें मिल सकती हैं। भाजपा को 95-110 सीटें मिलेंगी।