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  • घाटी से सौहार्द्रपूर्ण तस्वीर… 36 साल बाद इस मंदिर में हुई रामनवमी पूजा, हिन्दुओं का साथ मुस्लिमों ने भी बढ़-चढ़कर लिया भाग

    घाटी से सौहार्द्रपूर्ण तस्वीर… 36 साल बाद इस मंदिर में हुई रामनवमी पूजा, हिन्दुओं का साथ मुस्लिमों ने भी बढ़-चढ़कर लिया भाग


    श्रीनगर।
    देश भर के कई हिस्सों में जहां रामनवमी (Ram Navami) के मौके पर सांप्रदायिक दंगे और हिंसा की खबरें आती हैं, वहीं कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) से एक सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण तस्वीर सामने आई है, जहां दशकों बाद साम्प्रदायिक एकता (Communal Unity) की मिसाल देखने को मिली। यहां के रघुनाथ मंदिर (Raghunath Temple) में 36 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार राम नवमी पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदू श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। ऐसे में श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके में स्थित रघुनाथ मंदिर गुरुवार को फिर से जीवंत हो उठा। करीब तीन दशक बाद यह मंदिर खुला है।

    हालांकि, इस मंदिर में नवीनीकरण और जीर्णोद्धार का काम अभी भी चल रहा है, फिर भी मंदिर प्रबंधन समिति ने रामनवमी के अवसर पर पूजा का आयोजन किया। प्रबंधन समिति के महासचिव सुनील कुमार ने कहा, “इस मंदिर में 36 साल में पहली बार रामनवमी पूजा आयोजित की जा रही है। हममें से कुछ लोग जम्मू से आए हैं, लेकिन देश और विदेश में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने दान देकर जीर्णोद्धार के कामों में सहयोग दिया है।” उन्होंने बताया कि मंदिर में चल रहे काम के कारण “मूर्ति स्थापना” (मूर्ति की स्थापना) नहीं हो पाई।


    कश्मीरी पंडितों का वापसी का समर्थन करें मुसलमान
    घाटी में कश्मीरी पंडित प्रवासियों की संभावित वापसी के बारे में कुमार ने कहा कि कश्मीरी मुस्लिम समुदाय के सहयोग के बिना ऐसी वापसी संभव नहीं होगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “सरकार को हमें फिर से बसाने में एक साल भी नहीं लगेगा, लेकिन कश्मीरी मुसलमानों को हमारी वापसी का समर्थन करना होगा।”

    पर्यटक और सुरक्षा बलों के जवान भी शरीक
    स्थानीय मुस्लिम गुलाम हसन भी समारोह में शामिल होने के लिए मंदिर में मौजूद थे। उन्होंने कहा, “कश्मीरी पंडित और मुस्लिम भाई हैं। हम दशकों से एक साथ रहते आए हैं।” रामनवमी मनाने के लिए शहर के विभिन्न मंदिरों में, जिनमें शंकराचार्य मंदिर भी शामिल है, विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गईं। पर्यटक और सुरक्षा बल भी इन उत्सवों में स्थानीय हिंदू आबादी के साथ शामिल हुए।

  • LPG संकट के बीच UP सरकार का बड़ा फैसला… गौशालाओं में लगेंगे गोबर गैस प्लांट..

    LPG संकट के बीच UP सरकार का बड़ा फैसला… गौशालाओं में लगेंगे गोबर गैस प्लांट..


    लखनऊ।
    खाड़ी युद्ध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों (Petroleum Products) की आपूर्ति पर मंडराते संकट के मद्देनजर यूपी सरकार (UP Government) बड़े पैमाने पर इसकी वैकल्पिक व्यवस्था करने जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में गोबर गैस प्लांट (Gobar Gas Plant) स्थापित करने की योजना है। शुरुआत में प्रदेश में संचालित 7527 गौशालाओं (Cowsheds) से इसकी शुरुआत करने की योजना है। बाद में पशुपालकों को भी इस योजना की परिधि में लाया जाएगा।

    वर्तमान में प्रदेश के 80 बड़े गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट की स्थापना की गई है जो पूरी तरह से क्रियाशील है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य एलपीजी रसोई गैस का विकल्प तैयार करना है ताकि अधिक से अधिक लोगों को राहत मिल सके। साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण किया जा सके। यूपी में छोटी-बड़ी कुल 7527 गौशालाएं अथवा गो आश्रय स्थल है, जिनमें 12.39 लाख गोवंशीय पशुओं को पाला-पोसा जा रहा है। इन गोशालाओं से प्राप्त होने वाले दूध की उपयोगिता तो है ही अब इनके अपशिष्ट विशेष कर एक-एक ग्राम गोबर के सदुपयोग की तैयारी की जा रही है।

    इन गोबर का उपयोग सिर्फ कम्पोस्ट या खाद के लिए ही न करके वर्तमान में ईरान-अमेरिका एवं इजरायल युद्ध के कारण रसोई गैस के सम्भावित संकट से निपटने के लिए भी करने की तैयारी है। इसके लिए रणनीति तैयार की गई है जो कम से कम ग्रामीण क्षेत्रों में राहत जरूर पहुंचाएगी। उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता की माने तो संकट की इस घड़ी में सस्ते गोबर गैस की व्यवस्था लोगों को भारी राहत देने वाला होगा। बकौल श्री गुप्ता, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्य को मिशन मोड पर शुरू करने के आदेश दिए हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।


    यूपी में गोवंशों एवं गोशालाओं की स्थिति

    प्रदेश में इस समय 7,527 गो-आश्रय स्थल है जो सरकार द्वारा संचालित एवं संरक्षित हैं। इनमें 12.39 लाख से अधिक गोवंश हैं। इनमें 6,433 अस्थायी स्थलों में 9.89 लाख गोवंश और 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख गोवंश पले हुए हैं। इसके अलावा 323 कान्हा गो-आश्रयों में 77,925 और 253 कांजी हाउस में 13,576 गोवंश पाले-पोसे जा रहे हैं। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख गौ पालकों को 1.83 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं।


    गोरक्ष पीठ में भी लगा हुआ गोबर गैस संयंत्र

    आयोग के अध्यक्ष कहते हैं कि सीएम योगी के गोरक्ष पीठ में स्थित गोबर का उपयोग वहां लगे गोबर गैस प्लांट में किया जाता है, जिसके गैस से लोगों के भोजन की व्यवस्था होती है। साथ ही पीठ के खेतों में गोबर की खाद यूरिया व अन्य पोषक तत्त्वों की जरूरतों को पूरी कर रही है। गुप्ता की मानें तो इस योजना के क्रियान्वयन से प्रदेश में बड़ी संख्या में गोबर गैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे जो पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करेंगे।

  • 50 पैसे का सिक्का 17,000 रुपये में नीलाम… ईरान की मदद के लिए 5 साल के बच्चे ने गुल्लक से किया था दान

    50 पैसे का सिक्का 17,000 रुपये में नीलाम… ईरान की मदद के लिए 5 साल के बच्चे ने गुल्लक से किया था दान


    नई दिल्ली।
    कश्मीर (Kashmir) की वादियों से इंसानियत और मासूमियत की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। श्रीनगर के डल झील (Dal Lake, Srinagar) स्थित ‘मीर बहरी’ इलाके में युद्ध प्रभावित ईरान के लिए आयोजित एक डोनेशन अभियान (Donation Campaign) के दौरान 50 पैसे का एक पुराना सिक्का 17,000 में नीलाम हुआ। यह सिक्का एक 5 साल के बच्चे ने अपने गुल्लक से दान किया था।

    युद्ध की विभीषिका झेल रहे लोगों की मदद के लिए इलाके में चंदा इकट्ठा किया जा रहा था। इसी दौरान एक पांच साल का बच्चा अपनी ‘पिगी बैंक’ (गुल्लक) लेकर पहुंचा। जब गुल्लक खोली गई, तो उसमें से अन्य पैसों के साथ 50 पैसे का एक सिक्का भी निकला, जो आजकल चलन में लगभग न के बराबर है। बच्चे की इस मासूम कोशिश ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।


    17,000 की ऐतिहासिक नीलामी

    बच्चे की भावना का सम्मान करने के लिए स्थानीय लोगों ने उस 50 पैसे के सिक्के की नीलामी करने का फैसला किया। देखते ही देखते बोली बढ़ती गई और अंत में यह दुर्लभ सिक्का 17,000 रुपये में नीलाम हुआ। सिक्के से प्राप्त यह पूरी राशि ईरान में राहत कार्यों के लिए भेजी जाएगी।

    स्थानीय निवासी जावेद अहमद सूफी ने बच्चे के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह घटना दर्शाती है कि दान का महत्व उसकी कीमत से नहीं, बल्कि देने वाले की भावना से तय होता है। उन्होंने कहा, “एक बच्चे के लिए उसकी गुल्लक की जमापूंजी सबसे कीमती होती है। अपनी सबसे प्रिय चीज को दूसरों की मदद के लिए दे देना ही सच्ची दयालुता है।”

    डाल झील के किनारे घटित इस वाकये की चर्चा पूरे श्रीनगर में हो रही है। लोग इस नन्हे फरिश्ते की तारीफ कर रहे हैं, जिसकी एक छोटी सी बचत ने युद्ध पीड़ितों की मदद के लिए एक बड़ी राशि जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश

    कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश


    नई दिल्ली: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का निर्देश मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह वही दफ्तर है जो लगभग 48 वर्षों तक कांग्रेस की पहचान बना रहा और पार्टी के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का गवाह रहा। सरकार की ओर से कांग्रेस को शनिवार तक इस भवन को खाली करने के लिए कहा गया है, जिससे यह मामला अब सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को केवल 24 अकबर रोड ही नहीं बल्कि 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस के दफ्तर को भी खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि कांग्रेस ने पिछले वर्ष कोटला मार्ग पर अपने नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ का उद्घाटन कर दिया था, लेकिन अब तक वह पूरी तरह से पुराने दफ्तर से शिफ्ट नहीं हो पाई है। पार्टी की गतिविधियां अभी भी अकबर रोड स्थित भवन में जारी हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

    कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे को लेकर मंथन चल रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि 24 अकबर रोड से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है, क्योंकि यह दफ्तर केवल एक कार्यालय नहीं बल्कि पार्टी के इतिहास और संघर्ष का प्रतीक रहा है।

    इस दफ्तर का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। ब्रिटिश शासन के समय यह भवन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास स्थान था। बाद में यह म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ खिन क्यी का निवास भी रहा, जिनकी बेटी आंग सान सू की ने आगे चलकर नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया। इस तरह यह भवन अंतरराष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

    कांग्रेस के लिए यह दफ्तर 1970 के दशक के अंत से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया। 1977 के चुनाव में हार के बाद जब पार्टी में विभाजन हुआ और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट को एक नए केंद्र की जरूरत थी, तब जी वेंकटस्वामी ने अपना बंगला पार्टी को उपलब्ध कराया। यहीं से कांग्रेस की राजनीतिक वापसी की कहानी शुरू हुई। इसके बाद यह दफ्तर इंदिरा गांधी के नेतृत्व से लेकर राजीव गांधी, पी वी नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक पार्टी का प्रमुख केंद्र बना रहा।

    समय के साथ इस भवन को पार्टी ने अपनी जरूरतों के अनुसार विस्तार भी दिया, लेकिन हाल के वर्षों में संगठन के पुनर्गठन के चलते पार्टी ने नया मुख्यालय बनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में कोटला मार्ग स्थित इंदिरा भवन’ का उद्घाटन किया गया, जो अब कांग्रेस का नया ठिकाना बन चुका है।

    अब जब सरकार ने पुराने दफ्तर को खाली करने का आदेश दिया है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक बदलाव भी माना जा रहा है। कांग्रेस इस आदेश को लेकर अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करने पर विचार कर रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस आदेश पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह अपने ऐतिहासिक दफ्तर को लेकर कोई कानूनी लड़ाई लड़ती है या फिर पूरी तरह से नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ से अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है।

  • गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून

    गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून


    अहमदाबाद।
    गुजरात सरकार (Gujarat Government.) ने विधानसभा (Assembly) से समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code.- UCC) बिल 2026 पास हो गया है। इस विधेयक का मकसद शादी, तलाक और विरासत जैसे विषयों के लिए सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था करना है। उत्तराखंड के बाद गुजरात ऐसा करने वाला दूसरा राज्य बनेगा। यह कानून राज्य के निवासियों और बाहर रह रहे गुजरातियों पर लागू होगा लेकिन अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है। बिल की मुख्य बातों में बहुविवाह पर रोक और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शामिल है।


    यूसीसी वाला दूसरा राज्य होगा गुजरात

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक विधानसभा से पारित होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पारित किया था।


    एक हफ्ते पहले सौंपी थी रिपोर्ट

    गुजरात सरकार की ओर से नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने यूसीसी के क्रियान्वयन पर एक हफ्ते पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक यह प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा। यही नहीं गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले राज्य के निवासियों पर भी यह कानून प्रभावी होगा।


    समान कानूनी ढांचा तैयार करना है मकसद

    यह प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं। विधेयक का मकसद राज्य में समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।


    एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक

    इस विधेयक में लिव-इन के रजिस्ट्रेशन और औपचारिक घोषणा के माध्यम से उनके समापन का प्रावधान किया गया है। यह बिल एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक लगाता है। इस विधेयक के मुताबिक, इस कोड के तहत शादी तभी मान्य मानी जाएगी जब शादी के समय दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी ना हो।


    अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन

    इस विधेयक का सड़कों पर विरोध भी शुरू हो गया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल के विरोध में अहमदाबाद के लाल दरवाजे पर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। इस कानून के विरोध में AIMIM भी है। AIMIM के कार्यकर्ता भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

  • CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण

    CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण


    छत्तीसगढ़।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलियों (Naxalites) की दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य व वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापाराव (Senior Naxalite Commander Paparao) ने अपने 17 अन्य साथी माओवादियों के साथ मंगलवार को बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। हथियार डालने वाले नक्सलियों में 11 पुरुष और 7 महिला नक्सली शामिल हैं। यह सरेंडर सुरक्षाबलों व राज्य सरकार के लिए एक अहम रणनीतिक सफलता है और 31 मार्च तक देश से माओवादी उग्रवाद के खात्मे की डेडलाइन के संबंध में सबसे अहम पड़ाव भी है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ कुटरू थाने में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें वहां से बस के जरिए जगदलपुर ले जाया गया। अब इस बारे में राज्य सरकार बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जानकारी दे सकती है।


    पापा राव पर घोषित था 25 लाख रुपए का इनाम

    दो दशकों से ज्यादा समय तक घने इंद्रावती-अबूझमाड़ जंगल इलाके में सक्रिय रहा पापा राव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े आखिरी बड़े कमांडरों में से एक है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पापा राव लगभग 25 वर्षों से जंगलों में सक्रिय था और इस दौरान कई बार सुरक्षा बलों के साथ उसकी मुठभेड़ भी हुई, लेकिन हर बार वह बच निकलता था। राज्य सरकार ने उस पर 25 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।

    पापा राव ने दक्षिण बस्तर में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमलों की साज़िश रची थी, जिनमें 2010 का ताड़मेटला हमला (तब के दंतेवाड़ा जिले में था, लेकिन अब सुकमा में है) भी शामिल है। इस हमले में 76 जवान मारे गए थे।


    सबसे अहम कमेटी का मुख्य सदस्य था पापा राव

    बस्तर संभाग और आसपास के राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) को इस प्रतिबंधित संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही है।

    अधिकारियों के मुताबिक पापा राव का समर्पण छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने बताया कि यह समर्पण देश के सबसे लंबे समय से चल रहे उग्रवादों में से एक के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।

    बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा, ‘नक्सली संगठन में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य तथा साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव का 17 अन्य साथियों के साथ पुनर्वास, क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के हमारे सतत प्रयासों में एक निर्णायक सफलता का प्रतीक है।’


    नक्सलियों ने AK-47 समेत अन्य हथियार भी सौंपे

    सुंदरराज ने बताया कि पापा राव, डिविजनल कमेटी सदस्य प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित कुल 18 माओवादियों के इस समूह ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा के साथ आत्मसमर्पण किया है। इनमें सात महिला नक्सली भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आत्मसपर्मण के दौरान एके-47 राइफलें तथा अन्य हथियार भी सौंपे।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार नक्सल संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है। सुंदरराज ने कहा कि सरकार की परिकल्पना और क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से रही आकांक्षा के अनुरूप, बस्तर अब एक नई ऊर्जा, नए उत्साह और सकारात्मक पहचान के साथ और अधिक सशक्त होकर उभरने की दिशा में अग्रसर है।


    दो दशकों में हुए कई हमलों में शामिल रहा था DKSZC

    उन्होंने बताया कि DKSZC बस्तर संभाग और पड़ोसी राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है और इसे प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही थी।

    सुंदरराज ने कहा, ‘हमें आशा है कि शेष बचे माओवादी, जो वर्तमान में छोटे-छोटे समूहों में भटक रहे हैं, भी आने वाले दिनों में हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेंगे।’ उन्होंने बताया कि साउथ सब जोनल ब्यूरो इलाके से जुड़े समर्पण करने वाले सभी 18 माओवादियों को औपचारिक रूप से मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी।


    पापा राव को मंगू के नाम से भी जाना जाता है

    इससे पहले दिन में, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिनके पास गृह मंत्रालय का प्रभार भी है, ने कहा कि राव, जिन्हें मंगू के नाम से भी जाना जाता है, बस्तर इलाके में अपने दल के एक दर्जन से अधिक सदस्यों के साथ समर्पण करेंगे। शर्मा ने कहा, ‘इस समर्पण के साथ ही, राज्य में उस वरिष्ठ स्तर का कोई भी नक्सली नेता सक्रिय नहीं रहेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ 31 मार्च, 2026 की तय समयसीमा तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।’


    ‘कभी पशुपति से तिरुपति तक फैला हुआ था रेड कॉरिडोर’

    अधिकारियों ने बताया कि यह समर्पण भाकपा (माओवादी) से जुड़े माओवादी नेटवर्क के बड़े पैमाने पर कमजोर पड़ने का संकेत है, जिसने सालों तक मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अपनी समानांतर सत्ता कायम रखी थी। उन्होंने कहा कि ‘रेड कॉरिडोर’ कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों से होते हुए ‘पशुपति से तिरुपति’ तक फैला हुआ था और नक्सलियों के प्रभाव वाले इस गलियारे को देश के लिए ‘सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती’ माना जाता था। अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में शासन-प्रशासन कमज़ोर पड़ गया था, और माओवादियों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच जोर-जबरदस्ती और सहमति, दोनों के जरिए अपना प्रभाव जमा रखा था।

  • हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप

    हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप


    पंचकूला।
    हरियाणा (Haryana) में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) में 590 करोड़ रुपये (590 Crore Rupees) के घोटाले के बाद अब एक और बैंक में स्कैम किया गया है. पंचकूला (Panchkula) के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) की शाखा में हरियाणा सरकार (Haryana Government) के करीब 160 करोड़ रुपये गायब मिले हैं. इसमें पंचकूला नगर निगम की पांच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का रिकॉर्ड नहीं मिलने से हड़कंप मच गया है. फिलहाल, जांच के आदेश दिए गए हैं. उधर, विजिलेंस ने इस संंबंध में केस दर्ज कर लिया है. बैंक कर्मचारियों और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने इस बैंक शाखा में कुल 16 एफडी करवाई थीं, जिन्हें पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ट्रांसफर किया गया था. हाल ही में जब निगम ने एफडी मैच्योर होने पर राशि वापसी के लिए पत्र लिखा, तो बैंक ने जवाब दिया कि संबंधित एफडी का कोई रिकॉर्ड उनके पास मौजूद नहीं है।

    इस खुलासे के बाद नगर निगम ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू की. अकाउंट अधिकारियों, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर की टीम ने दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सरकार और बैंक को भेजी. शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्जी तरीके से समान दस्तावेजों पर अतिरिक्त खाते खोलकर रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर की गई. मामले में एक महिला खाते में बड़ी राशि ट्रांसफर होने की भी आशंका जताई जा रही है. अहम बात है कि पैसा शैल कंपनियों के खाते में जमा किया गया था।

    घोटाले को छिपाने के लिए कथित तौर पर एफडी के रिन्यूअल दस्तावेज नियमित रूप से निगम को भेजे जाते रहे, जिससे अधिकारियों को संदेह नहीं हुआ. हालांकि, जब हालिया घोटालों के बाद राशि वापस मांगी गई, तब पूरा मामला उजागर हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इकोनॉमिक्स विंग) को जांच सौंपी गई है. साथ ही बैंक प्रबंधन ने भी शिकायत दर्ज कराई है. यह मामला करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें पहले ही अन्य बैंकों के नाम सामने आ चुके हैं. अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।


    महिला के खाते में ट्रांसफर हुआ पैसा

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार, एफडी के नाम पर बैंक में जमा कराई गई राशि को बैंक ने विभिन्न फर्जी खातों में ट्रांसफर किया है. मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये और 102 करोड़ की एफडी की मैच्योरिटी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा और फिर बैंक ने स्टेटमेंट में राशि ट्रांसफर दिखाई और बताया कि वास्तविक खाते में पैसा नहीं पहुंचा. जांच में पता चला कि स्टेटमेंट भी फर्जी थी और रकम गायब है. सूत्रों के अनुसार एक महिला के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है. बताया जा रहा है कि उसके परिवार में कुछ IAS -IPS अधिकारी हैं।


    पहले हुआ था 590 करोड़ रुपये का स्कैम

    गौर रहे कि इसके पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू बैंक में भी पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपये का गबन किया गया था. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कुल 590 करोड़ रुपये की राशि का फ्रॉड हुआ था, हरियाणा सरकार का यह पैसा हालांकि, बैंक ने बाद में लौटा दिया था, लेकिन इस मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

  • UP: रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग के अंतराल में बड़ा बदलाव… इन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    UP: रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग के अंतराल में बड़ा बदलाव… इन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत


    आगरा।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) में रसोई गैस सिलिंडर (LPG cylinders) के बुकिंग अंतराल (Booking Interval.) में तेल कंपनियों ने मंगलवार को बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग की समय सीमा अलग-अलग तय कर दी गई है।

    अब 5 किलो का ‘छोटू’ सिलिंडर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 16 दिन में, जबकि सामान्य उपभोक्ताओं को 9 दिन में मिल सकेगा। गैस की कालाबाजारी रोकने और खपत के सटीक आकलन के लिए जारी इस नई सूची का सबसे बड़ा असर जिले के 3.41 लाख उज्ज्वला लाभार्थियों पर पड़ेगा।

    नई व्यवस्था के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 14.2 किलोग्राम वाले सिलिंडर की बुकिंग का अंतर बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह सीमा 25 दिन निर्धारित की गई है। 10 किलो वाले कंपोजिट सिलिंडर 18 दिन में मिलेगा।

    दोहरे कनेक्शन वालों को 35 दिन बाद मिलेगा दूसरा सिलिंडर
    गैस सिलिंडर की किल्लत और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए तेल कंपनियों ने सॉफ्टवेयर में बड़े तकनीकी बदलाव किए हैं। अब दो सिलिंडर वाले ग्राहकों को रिफिल बुक करने के लिए कम से कम 35 दिनों का इंतजार करना होगा। वहीं, एक सिलिंडर वाले उपभोक्ताओं के लिए यह समय सीमा 25 दिन तय की गई है। जिला पूर्ति अधिकारी आनंद कुमार के मुताबिक, यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।


    गैस किल्लत के बीच बड़ा फैसला

    वहीं, आगरा में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति को लेकर मचे घमासान के बीच जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सिलिंडर सप्लाई करने वाली ऑयल कंपनियों और जिला पूर्ति अधिकारी के साथ अहम बैठक की। बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए डीएम ने साफ कर दिया कि अब व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उनके औसत उपभोग का केवल 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा ही आवंटित किया जाएगा।

    भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की नई गाइडलाइन का हवाला देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि उपभोक्ताओं को दो श्रेणियों में बांटा गया है। अस्पताल, रेलवे और शैक्षणिक संस्थान जैसी अति आवश्यक सेवाओं को उनके पिछले तीन माह के औसत उपभोग का 20 प्रतिशत कोटा मिलेगा।

    वहीं, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा जैसी आवश्यक सेवाओं को केवल 10 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में डीएम ने चेतावनी दी कि गैस सिलिंडरों की किल्लत के बीच यदि कोई एजेंसी, बिचौलिया या व्यक्ति जमाखोरी या घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक उपयोग में लिप्त पाया गया, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पूर्ति विभाग को निर्देश दिए कि इस नई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए ताकि वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।


    डबल सिलिंडर होने पर गैस बुकिंग अब 35 दिन बाद

    – उपभोक्ताओं की रसोई गैस से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती है। अब दो सिलिंडर वाले उपभोक्ता 35 दिन बाद गैस बुकिंग करा सकेंगे।
    – उज्ज्वला कनेक्शन धारक 45 दिन बाद सिलिंडर बुक करा सकेंगे। एकल वाले 25 दिन बाद सिलिंडर बुक करा सकेंगे।
    – नए नियम शहरी-ग्रामीण सभी क्षेत्रों में लागू होंगे। तय सीमा से पहले बुकिंग पर सिस्टम स्वतः ब्लॉक कर देगा।
    – 5 किलो घरेलू सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में नौ दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 16 दिन का अंतराल तय किया है।
    – 10 किलो कंपोजिट सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में 18 दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 32 दिन का अंतराल तय किया गया है।

  • CG: खल्लारी माता मंदिर में रोपवे केबल टूटने से नीचे गिरी ट्रॉली, महिला की मौत; 7 घायल

    CG: खल्लारी माता मंदिर में रोपवे केबल टूटने से नीचे गिरी ट्रॉली, महिला की मौत; 7 घायल


    महासमुंद।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के महासमुंद जिला (Mahasamund district) से रविवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां खल्लारी माता मंदिर (Khallari Mata Temple) में रोपवे ट्रॉली हादसे (Ropeway Trolley Accident) का शिकार हो गई, जिसमें एक महिला की जान चली गई, जबकि सात लोग घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और मौके पर चीख-पुकार गूंज उठी। हादसे के तुरंत बाद पुलिस को सूचना दी गई और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

    केबल टूटने से गिरी थी ट्रॉली
    जानकारी के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 10 बजे की है, जब मंदिर से श्रद्धालुओं को लेकर एक रोपवे ट्रॉली नीचे की ओर आ रही थी। इसी दौरान अचानक ट्रॉली का केबल टूट गया, जिससे वह अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई। ट्रॉली में कुल आठ लोग सवार थे, जो मंदिर में दर्शन कर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान हादसा हो गया और हादसे में एक श्रद्धालु की जान चली गई।


    एक महिला की मौत

    इस हादसे में आयुषी सतकर (28), निवासी रायपुर की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि आयुषी अपने परिवार या परिचितों के साथ नवरात्रि के अवसर पर माता के दर्शन करने पहुंची थीं। वहीं, हादसे में घायल हुए सात अन्य लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।


    राहत-बचाव कार्य जारी

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। ट्रॉली के गिरते ही आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

    इस मामले पर बात करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शुरुआती तौर पर केबल टूटने को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।

  • बंगाल में भगवान राम की प्रतिमा तोड़ी.. सिर काट ले गए बदमाश… गरमाई सियासत

    बंगाल में भगवान राम की प्रतिमा तोड़ी.. सिर काट ले गए बदमाश… गरमाई सियासत


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के नंदीग्राम में भगवान राम की प्रतिमा (Lord Rama Statue) के साथ तोड़फोड़ की घटना सामने आई है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के प्रमुख चेहरे शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम नवमी के उत्सव से ठीक पहले रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों ने वेटुरिया बस स्टैंड पर लगभग तैयार हो चुकी भगवान राम की मूर्ति का सिर काटकर ले गए। यह घटना पूर्वी मेदिनीपुर जिले (East Medinipur district) के नंदीग्राम के बूथ नंबर 122, ब्लॉक-2 में हुई है। अधिकारी ने इसे हिंदू आस्था पर हमला करार देते हुए कहा कि राज्य में ऐसे कृत्य अब आम हो गए हैं।

    शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी सरकार हिंदुओं के खिलाफ है और वोट बैंक की राजनीति के लिए गुंडों को बचा रही है। अधिकारी ने इसे जिहादियों की ओर से की गई कार्रवाई बताया और कहा कि तुष्टिकरण की नीति के कारण ऐसे हमले बढ़ रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें क्षतिग्रस्त प्रतिमा दिखाई गई है। उन्होंने सनातनियों से एकजुट होकर इस सरकार को विदा करने का आह्वान किया, क्योंकि ऐसी घटनाएं हिंदू त्योहारों से पहले स्थिति को बिगाड़ रही हैं।


    चुनावी माहौल और गरमाया

    यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी अहम है, जहां शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। नंदीग्राम वह स्थान है जहां 2021 में उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हिंदू देवी-देवताओं और मंदिरों पर हमलों को रोकने में नाकाम है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसी घटनाएं चुनावी माहौल को प्रभावित कर रही हैं। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी किया है।

    इस घटना ने राज्य में धार्मिक और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने इसे सनातन धर्म पर लगातार हमलों की श्रृंखला बताया और कहा कि ममता बनर्जी की सरकार के कारण स्थिति बदतर हो रही है। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी कि अगर दोषियों को सजा नहीं मिली तो स्थिति और बेकाबू हो सकती है। यह मामला अब चुनाव प्रचार में एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जहां भाजपा हिंदू भावनाओं को केंद्र में रखकर टीएमसी पर हमलावर है।