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  • हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा

    हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा


    शिमला।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मौसम ने अचानक करवट ले ली है. एक तरफ अटल टनल (Atal Tunnel) के पास हिमस्खलन (एवलांच) (Avalanche) का खतरा बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी-बारिश (Hailstorm and Heavy storm – Rain) को लेकर ओरेन्ज अलर्ट जारी किया गया है. लाहौल-स्पीति प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के आसपास पर्यटकों और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।

    प्रशासन के मुताबिक, टनल के पास बाईं ओर की पहाड़ियां, आसपास का इलाका, चंद्रा ब्रिज और उससे जुड़ा क्षेत्र हिमस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गया है. हाल के दिनों में यहां पर्यटकों की भीड़ और अनधिकृत गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे जान-माल का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।

    जिला प्रशासन ने साफ आदेश दिया है कि इन संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. साथ ही ठेले-फेरी, अस्थायी दुकानें, फोटो प्वाइंट और किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि आपात स्थिति में राहत और ट्रैफिक प्रबंधन में कोई बाधा न आए।

    इधर शिमला समेत आसपास के इलाकों में शुक्रवार को ओलावृष्टि, बारिश और तेज हवाओं ने मौसम को बिगाड़ दिया. मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ओरेन्ज अलर्ट जारी किया है, जहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना है।

    इसके अलावा ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और सिरमौर जिलों के लिए 3 और 4 अप्रैल को येलो अलर्ट जारी किया गया है. वहीं 5 और 6 अप्रैल को भी कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है. 7 अप्रैल को राज्य के ज्यादातर मैदानी जिलों में भी ऐसा ही मौसम बना रह सकता है.

    मौसम विभाग के अनुसार 3 से 6 अप्रैल के बीच मनाली, कुफरी, नारकंडा, सोलंग वैली और सिस्सू जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इसके पीछे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर बताया गया है. मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि 7 से 9 अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है, जिससे ठंड और बढ़ेगी और जनजीवन प्रभावित हो सकता है.

  • LPG संकट: कर्नाटक में 300 से ज्यादा पंप हुए बंद…. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बढ़ाई सप्लाई

    LPG संकट: कर्नाटक में 300 से ज्यादा पंप हुए बंद…. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बढ़ाई सप्लाई


    बंगलूरू।
    कर्नाटक (Karnataka ) में इन दिनों ऑटो एलपीजी (Auto LPG.) की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि बंगलूरू और राज्य के कई हिस्सों में 300 से ज्यादा निजी एलपीजी पंप बंद (Over 300 Pumps Shut Down) हो गए हैं या आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (इंडियन ऑयल) (Indian Oil Corporation ) ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने पूरे कर्नाटक में ऑटो एलपीजी की सप्लाई काफी बढ़ा दी है, ताकि ऑटो रिक्शा और एलपीजी से चलने वाली गाड़ियों को ईंधन की कमी न हो।

    कंपनी के मुताबिक, अभी वह अपने 55 ऑटो एलपीजी डिस्पेंसिंग स्टेशनों (ALDS) के जरिए राज्य में जरूरत पूरी कर रही है। निजी पंप बंद होने के कारण अब ज्यादा लोग सरकारी पंपों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे यहां दबाव भी काफी बढ़ गया है। इंडियन ऑयल के अधिकारी वी. वेत्रिसेल्वाक्कुमार ने बताया कि कंपनी ने हालात को संभालने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि सप्लाई लगातार जारी रहे और लोगों को परेशानी न हो।


    क्या कहता है आंकड़ा, समझिए

    आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में इंडियन ऑयल के पंपों पर रोजाना बिक्री बढ़कर करीब 59.53 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, जबकि पिछले तीन महीनों में यह औसतन 43.4 मीट्रिक टन थी। यानी मांग में काफी बड़ा उछाल आया है।

    कंपनी ने दिलाया भरोसा
    इसके साथ ही कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए सभी क्षेत्रों में ईंधन की बराबर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। कुल मिलाकर, निजी पंपों के बंद होने से बनी स्थिति को संभालने के लिए इंडियन ऑयल पूरी तरह सक्रिय हो गया है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो।

  • 1984 दंगों के वकील एचएस फूलका ने थाना BHP का दामन… AAP से लड़ चुके हैं आम चुनाव

    1984 दंगों के वकील एचएस फूलका ने थाना BHP का दामन… AAP से लड़ चुके हैं आम चुनाव


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सीनियर वकील और आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के पूर्व नेता एच.एस. फूलका (H.S. Phoolka) अब भाजपा (BJP) में शामिल हो गए हैं। उनकी पहचान 1984 के सिख विरोधी दंगों के वकील के तौर पर रही है। वह लंबे समय तक इस मामले में केस लड़ते रहे हैं। उन्होंने 2019 के आम चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पराजय हो गई थी। फूलका ने दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली। इस मौके पर भाजपा की ओर से कई सिख चेहरे मौजूद थे। इनमें सीनियर नेता और मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ इस मौके पर मौजूद थे।

    यही नहीं पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और प्रवक्ता अनिल बलूनी भी उपस्थित थे। फूलका को पार्टी में शामिल कराने के पीछे अगले साल होने वाले पंजाब चुनाव को देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि एक सिख चेहरा और वह भी दंगों के वकील रहे नेता को एंट्री देने से भाजपा को फायदा मिल सकता है। भाजपा बीते कई दशकों से राज्य में सिखों के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। अकाली दल के साथ सालों तक गठबंधन में रही भाजपा अब सूबे में अकेली है। ऐसे में हिंदू वोटरों की पार्टी का तमगा मिले रहने से ही भाजपा खुश नहीं होगी। इसीलिए वह चाहती है कि सिखों के बीच भी पैठ बने।

    उनका स्वागत करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने अपने इरादे भी स्पष्ट कर दिए और कहा कि इससे भाजपा को पंजाब में ताकत मिलेगी। उनका कहना था कि इससे पंजाब में संगठन भी मजबूत होगा। पहले भी भाजपा ने कई सिख चेहरों को एंट्री दी थी, लेकिन बहुत सफलता अब तक नहीं मिली है। इन नेताओं में कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू, रवनीत सिंह बिट्टू आदि प्रमुख हैं। हालांकि अब सिद्धू बाहर हैं। इस मौके पर फूलका ने भी बात की और कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार की लीडरशिप में जिस तरह के हालात हैं। उनसे निपटने का दम सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी ही रखते हैं।

    रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ चुनाव लड़े थे फूलका
    फूलका ने कहा, ‘सिखों के मुद्दों पर पीएम मोदी ने निजी तौर पर रुचि दिखाई है। 1984 के दंगों को लेकर मेरे काम की उन्होंने सराहना की है।’ उन्होंने कहा कि भाजपा ने मदन लाल खुराना, सुषमा स्वराज और विजय कुमार मल्होत्रा जैसे नेताओं को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सिखों के मसले पर भाजपा ने काफी काम किया था। इसलिए अब मैं उसमें शामिल हो रहा हूं। फूलका ने 2019 का चुनाव लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ लड़ा था और हार गए थे। अब रवनीत सिंह बिट्टू भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं और केंद्र में मंत्री हैं।

  • Uttarakhand में मदसरों के संचालन पर सख्ती… 11 शर्तों के बाद ही मिलेगी धार्मिक शिक्षा देने की मान्यता

    Uttarakhand में मदसरों के संचालन पर सख्ती… 11 शर्तों के बाद ही मिलेगी धार्मिक शिक्षा देने की मान्यता


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में मदरसों (Madrasas) के संचालन को लेकर नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब अल्पसंख्यक प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि धारा-14 के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा किए बिना किसी भी मदरसे को धार्मिक शिक्षा (Religious Education) देने की मान्यता नहीं मिलेगी। इसके साथ ही सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से भी नए सिरे से मान्यता लेनी होगी। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में मदरसा संचालकों के बीच हलचल तेज हो गई है।

    शनिवार को अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जेएस रावत (JS Rawat) ने मदरसा संचालकों की बैठक बुलाई, जिसमें सभी को तय मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में मौलाना इफ्तिखार, कारी शहजाद और मौलाना रिहान गनी समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिकारियों ने साफ किया कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

    इस समय 482 मान्यता प्राप्त मदरसे
    प्रदेश में इस समय 482 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। देहरादून में 36 मदरसों को मान्यता मिली हुई है। मदरसा बोर्ड के निदेशक गिरधारी सिंह रावत ने देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने मदरसे नए मानकों पर खरे उतरते हैं।

    धार्मिक शिक्षा के नाम पर बरगलाना बर्दाश्त नहीं
    सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है। खासतौर पर वित्तीय लेनदेन, शिक्षकों की योग्यता और संस्थानों के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि धार्मिक शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
    मान्यता के लिए अनिवार्य शर्तें-
    – शैक्षणिक संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित हो।
    – संस्थान का शिक्षा परिषद से संबद्ध होना जरूरी है।
    – सोसायटी रजिस्ट्रार के पास संस्थान का पंजीकरण होना चाहिए।
    – संस्थान की जमीन सोसायटी के नाम पर दर्ज होनी चाहिए।
    – सभी वित्तीय लेनदेन संस्थान के आधिकारिक खाते से ही किए जाएं।
    – संस्थान की सोसायटी के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से हों।
    – छात्रों और शिक्षकों को किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
    – केवल डिग्रीधारी शिक्षकों की ही नियुक्ति की जाएगी।
    – शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में परिषद और प्राधिकरण के निर्देश लागू होंगे।
    – संस्थान ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिससे सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो।

  • Kerala Elections : आसान नहीं राह… संगठन स्तर पर इन चुनौतियों से जूझ रही कांग्रेस

    Kerala Elections : आसान नहीं राह… संगठन स्तर पर इन चुनौतियों से जूझ रही कांग्रेस

    Congress

    चेन्नई। केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Elections) प्रचार के रफ्तार पकड़ने के साथ कांग्रेस (Congress) की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। पार्टी में जहां अंदरूनी झगड़े बढ़ रहे हैं, वहीं वह संगठन के स्तर पर भी कई मुश्किलों का सामना कर रही है। केरल में नौ अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। कांग्रेस (Congress) लगातार दस वर्षों से प्रदेश में सत्ता से बाहर है। केरल में हर पांच वर्षों में सरकार बदलती रही है, पर वर्ष 2021 में वामपंथी दलों (Leftist parties) की अगुआई वाले एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। ऐसे में यह चुनाव बेहद अहम है।

    कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती एकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल का आभाव है और वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए ताल ठोंक रहे हैं। ऐसे में पार्टी के लिए चुनाव के वक्त जमीनी स्तर पर तालमेल आसान नहीं है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सभी नेताओं को सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की हिदायत की है, पर प्रदेश कांग्रेस नेताओं का मानना है कि जीत की स्थिति में दिल्ली से किसी नेता को भेजा जा सकता है। इसलिए, वह सिर्फ अपनी सीट तक सीमित हैं।


    संगठनात्मक स्तर पर राज्य में पार्टी कमजोर

    देश कांग्रेस नेताओं का कहना है, वामपंथी दल कैडर आधारित पार्टियां हैं। हर विधानसभा में उनके पास कार्यकर्ता हैं। वहीं, यूडीएफ के घटकदल के तौर पर 95 सीट पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस संगठनात्मक स्तर पर बहुत ज्यादा मजबूत नहीं है। इसके साथ प्रमुख नेताओं के चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेस संगठनात्मक स्तर पर कमी से जूझ रही है। प्रदेश अध्यक्ष, तीन में से दो कार्यकारी अध्यक्ष, राज्य संगठनात्मक महासचिव और आठ जिला कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं। पार्टी के तमाम बड़े नेताओं के चुनाव लड़ने की वजह से निर्णायक निर्णय लेने के लिए संगठन में एक शून्य पैदा हो गया है।


    कांग्रेस के सामने 4 मुश्किलें

    1. मजबूत एलडीएफ सरकार: सत्ताधारी एलडीएफ ने कल्याणकारी योजनाओं व सुशासन के जरिए मजबूत आधार तैयार किया है। यूडीएफ के लिए इसका मुकाबला करना आसान नहीं।
    2.अंदरूनी कलह: कांग्रेस को वरिष्ठ नेताओं के बीच अंदरूनी गुटबाजी का सामना करना पड़ रहा है। गुटबाजी रोकने का लगातार प्रयास हो रहा है, पर प्रदेश नेता दावेदारी कर रहे हैं।
    3. सामाजिक और जातीय समीकरण : केरल की राजनीति सामुदायिक संगठनों और जातीय समीकरणों से प्रभावित होती है। कांग्रेस को धर्मनिरपेक्ष छवि और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन बनाना होगा।
    4. भाजपा की बढ़ती मौजूदगी: केरल में भाजपा बहुत मजबूत नहीं है, पर पार्टी लगातार जनाधार बढ़ाने का प्रयास कर रही है। वर्ष 2021 में भाजपा को 11% वोट मिला था।

  • बिहार में MP-राजस्थान जैसा प्रयोग नहीं चाहती है JDU…. CM नीतीश के उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा शुरू

    बिहार में MP-राजस्थान जैसा प्रयोग नहीं चाहती है JDU…. CM नीतीश के उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा शुरू


    पटना।
    बिहार की राजनीति (Politics of Bihar) में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) के संभावित इस्तीफे को लेकर अटकलें जारी हैं। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) को उम्मीद थी कि 26 मार्च को उनकी “समृद्धि यात्रा” समाप्त होने के बाद वह पद छोड़ देंगे, लेकिन जनता दल (यूनाइटेड) (Janata Dal (United) ने इस प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जेडीयू इस समय को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी के चयन में उसे पूरी तरह विश्वास में लिया जाए। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि वह भाजपा द्वारा मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह अचानक किसी कम चर्चित नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने जैसे प्रयोग नहीं चाहती है।

    बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार प्रभारी विनोद तावड़े पटना में मौजूद हैं और राज्य के नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। इसे सत्ता परिवर्तन की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संसद के उच्च सदन यानी कि राज्यसभा के लिए निर्वाचित होता है तो उसे 14 दिनों के भीतर राज्य विधानसभा की सदस्यता छोड़नी होती है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उसकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है।


    नीतीश कब तक देंगे इस्तीफा?

    बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिया है कि नीतीश कुमार 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नीतीश कुमार के करीबी संजय झा ने कहा है कि 14 दिन के नियम का पूरी तरह पालन किया जाएगा। नीतीश कुमार के 13 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने की संभावना है।


    कौन होगा नीतीश का उत्तराधिकारी?

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद के उत्तराधिकारी को लेकर बीजेपी में कई नामों पर चर्चा हो रही है, लेकिन जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि अगला मुख्यमंत्री वही होना चाहिए, जो नीतीश कुमार की पसंद का हो। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि नया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए और उनकी राजनीति की शैली को बनाए रखना जरूरी है।


    जेडीयू ने भाजपा के सामने रखी शर्तें

    जेडीयू ने यह भी जोर दिया है कि सरकार की सामाजिक संरचना में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। साथ ही पार्टी चाहती है कि नया नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी विश्वास में लेकर चले, जो अब राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि बिहार की राजनीतिक परिस्थिति मध्य प्रदेश या राजस्थान से अलग है, जहां बीजेपी ने अचानक मुख्यमंत्री के नाम घोषित कर सभी को चौंका दिया था। बिहार में समाजवादी विचारधारा की गहरी जड़ें हैं और एनडीए के सहयोगी दलों को भी पूरी तरह विश्वास में लेना जरूरी है।


    मंत्रिमंडल के फॉर्मूले में भी बदलाव संभव

    जेडीयू ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उसे गठबंधन में जूनियर पार्टनर की भूमिका निभानी पड़ी तो वह मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी के मौजूदा फार्मूले की समीक्षा और विधानसभा अध्यक्ष पद की मांग कर सकती है। पार्टी का मानना है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से जेडीयू कमजोर नहीं होगी, बल्कि वह बिहार की राजनीति में और अधिक समय दे पाएंगे।

    वहीं बीजेपी की ओर से इस मुद्दे पर सतर्क प्रतिक्रिया दी गई है। पार्टी के एक नेता ने कहा कि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि एनडीए के सभी सहयोगियों की सहमति से सत्ता का सुचारु हस्तांतरण होगा। कुल मिलाकर बिहार में सत्ता परिवर्तन को लेकर सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और जेडीयू व बीजेपी के बीच तालमेल इस पूरी प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

  • UP: बारात में डांस करते-करते दूल्हे के भाई का नया Iphone नाले में गिरा… शादी छोड़ लगा दी छलांग

    UP: बारात में डांस करते-करते दूल्हे के भाई का नया Iphone नाले में गिरा… शादी छोड़ लगा दी छलांग


    औरैया।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के औरैया जिले (Auraiya district) में बाराती (Wedding Procession) के लिए डांस के दौरान लापरवाही एक बुरे सपने में बदल गया है। भाई की शादी के लिए एक दिन पहले ही खरीदा आईफोन (iPhone 17 Pro) डांस के दौरान नाले में गिर गया। अचानक हुई घटना से युवक अवाक रह गया। उसने आव देखा न ताव, अपने नए नवेले आईफोन के लिए बारात छोड़ नाले पर कूद गया। युवक को इस तरह नाले में कूदते देख बाराती भी हैरान रह गए। एक तरफ बारात में आतिशबाजी होती रही और अन्य बाराती जश्न में डूबे रहे तो दूसरी तरफ युवक गंदे नाले में अपना फोन तलाश करता रहा। इसी दौरान कुछ लोगों ने वीडियो भी बना लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    बताया जाता है कि कानपुर का रहने वाला युवक औरैया में अपने फूफेरे भाई की शादी में शामिल होने आया था। बारात अपने पूरे रौ पर थी और बाराती नाच-गाने में लगे हुए थे। डांस के दौरान मोबाइल से फोटोग्राफी और सेल्फी का दौर भी चल रहा था। इसी दौरान तकिया चौराहे के पास युवक के हाथ से उसका आईफोन छिटक कर बगल से गुजर रहे नाले में गिर गया।


    उसी दिन खरीदा था मोबाइल, बारात छोड़ नाले में कूदा

    युवक ने बारात में आने से एक दिन पहले ही लिए आईफोन खरीदा था। ऐसे में मोबाइल के नाले में गिरते से उसे जोर का झटका लगा। फोन गिरते ही युवक बदहवास हो गया और बिना कुछ सोचे-समझे नाले में कूद गया। वह कभी हाथों से तो कभी पैर के सहारे नाले के कीचड़ और मलबे के बीच फोन को तलाशने लगा। युवक के नाले में कूदते ही कुछ लोगों ने वीडियो भी बनाना शुरू कर दया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है। कुछ देर पहले जश्न में डूबे युवक की लाचारी वीडियो में साफ देखी जा रही है।


    भीड़ जुटी, पर नहीं मिली सफलता

    युवक को नाले में मोबाइल तलाशते देख मौके पर स्थानीय लोगों और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। बारात में शामिल कुछ अन्य दोस्तों ने भी उसकी मदद करने की कोशिश की, लेकिन नाले की गहराई और उसमें जमा सिल्ट (गाद) के कारण मोबाइल का कहीं पता नहीं चला। काफी मशक्कत और घंटों की तलाश के बाद भी जब सफलता नहीं मिली, तो युवक हताश होकर बाहर निकल आया।

    इस घटना ने एक बार फिर सेल्फी के प्रति बढ़ते जुनून और उससे होने वाली दुर्घटनाओं की ओर ध्यान खींचा है। छोटी सी लापरवाही किस तरह से भारी पड़ जाती है, उसका भी उदाहरण देखने को मिला है।

  • UP: हरदोई में श्रीराम और माता कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी करने वाले सपा नेता गिरफ्तार, पार्टी ने भी निकाला

    UP: हरदोई में श्रीराम और माता कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी करने वाले सपा नेता गिरफ्तार, पार्टी ने भी निकाला


    हरदोई।
    यूपी (UP) के हरदोई जिले (Hardoi district) में सार्वजनिक सभा में भगवान श्रीराम (Lord Shri Ram) और माता कौशल्या (Mother Kaushalya) पर अभद्र टिप्पणी करते सपा के प्रदेश सचिव यदुनंदन लाल वर्मा (Yadunanand Lal Verma) का वीडियो वायरल होने पर शुक्रवार को जिले भर में हिंदूवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। शांति व्यवस्था बिगड़ती देख हरपालपुर कोतवाली पुलिस के उप निरीक्षक विजय शुक्ल की तरफ से आनन फानन प्राथमिकी दर्ज कर यदुनंदन लाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

    प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार पंकज ने बताया कि यदुनंदन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सपा के प्रदेश सचिव यदुनंदन लाल वर्मा की सार्वजनिक सभा का यह वीडियो हरपालपुर क्षेत्र का है लेकिन यह कब का है, यह साफ नहीं हो सका है। इस कृत्य के लिए सपा के भीतर भी यदुनंदन लाल की कड़ी आलोचना हो रही है।

    सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली ने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं पर यदुनंदन लाल वर्मा के ऐसे बयान से शर्म आ रही है। उन्होंने बताया कि यदुनंदन लाल वर्मा की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी गई है। वर्मा पर कार्रवाई के लिए प्रदेश संगठन को लिखा गया है। वह कई पार्टियों में रह चुके हैं और मनचले टाइप के नेता हैं। वायरल वीडियो में हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के कनत्थूखेड़ा गांव निवासी सपा के प्रदेश सचिव यदुनंदन लाल वर्मा भगवान श्रीराम पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिख रहे हैं।


    वीडियो वायरल होते ही हिंदूवादी संगठनों में उबाल

    वीडियो में वह भगवान श्रीराम, माता कौशल्या के साथ ही हिंदू धार्मिक ग्रंथों पर भी अभद्र और भ्रामक टिप्पणी की है। हालांकि वायरल वीडियो की पुष्टि संवाद न्यूज एजेंसी नहीं करती है। वीडियो वायरल होते ही हिंदूवादी संगठनों में उबाल आ गया। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से इस मामले में कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही।


    भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं यदुनंदन

    जिले भर में हिंदूवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई कर वर्मा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इससे पहले पुलिस यदुनंदन के पुत्र अनिरुद्ध मित्र लोधी को हिरासत में लेकर कोतवाली ले आई थी। यदुनंदन लाल वर्मा 2008 में हुए उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इसके पहले वह बसपा के टिकट पर भी दो बार किस्मत आजमा चुके हैं।

  • निवेश का बड़ा झटका: Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU यूपी में सिर्फ चार दिन में रद्द

    निवेश का बड़ा झटका: Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU यूपी में सिर्फ चार दिन में रद्द


    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में निवेशकों और सरकार के बीच बड़े समझौतों को लेकर जो उम्मीदें थीं, उन्हें उस वक्त झटका लगा जब राज्य सरकार ने ‘Puch AI’ कंपनी के साथ हुए 25,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौते यानी MoU को महज चार दिनों में रद्द कर दिया। यह फैसला तब आया जब कंपनी की वित्तीय स्थिति और दस्तावेजों की गहन जांच में कई संदिग्ध पहलू सामने आए।

    Invest UP के CEO विजय किरन आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर MoU की समीक्षा की गई थी। कंपनी को नोटिस भेजकर उसका बिजनेस प्लान, वित्तीय स्थिति और Detailed Project Report (DPR) मांगी गई। जवाब देने के लिए कंपनी को केवल तीन दिन का समय दिया गया, लेकिन इस दौरान कंपनी की तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

    सरकार की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी समय पर जरूरी दस्तावेज नहीं जमा कर सकी। वित्तीय स्थिति कमजोर पाई गई और निवेश के लिए फंड का स्रोत भी स्पष्ट नहीं था। इस वजह से यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जोखिम भरा साबित हुआ।

    योगी सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए Puch AI कंपनी के पास न तो पर्याप्त वित्तीय क्षमता थी और न ही भरोसेमंद दस्तावेज। निवेश में किसी भी तरह के संभावित जोखिम से बचने के लिए सरकार ने MoU रद्द कर दिया।

    इस मामले ने राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। विपक्ष के नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए थे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 25,000 करोड़ रुपये के इस निवेश को लेकर सरकार को घेरा था।

    उत्तर प्रदेश सरकार लगातार राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े समझौते कर रही है। इसी कड़ी में Puch AI के साथ यह महत्त्वाकांक्षी निवेश प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि शुरुआती जांच में ही कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, जिसके चलते यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही रद्द कर दिया गया।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी किसी भी निवेश प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और वित्तीय क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि राज्य में आने वाले निवेश सुरक्षित और प्रभावी हों और किसी तरह का वित्तीय या कानूनी जोखिम राज्य को प्रभावित न करे।

    इस फैसले से यह संदेश गया कि यूपी सरकार बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स में केवल भरोसेमंद और सक्षम कंपनियों के साथ ही आगे बढ़ेगी। Puch AI का मामला एक चेतावनी भी है कि वित्तीय और प्रबंधन संबंधी कमजोरियों वाले निवेश समझौतों को राज्य सरकार बढ़ावा नहीं देगी।

    अंततः, चार दिन में रद्द किया गया यह 25,000 करोड़ का MoU यह दिखाता है कि यूपी सरकार निवेशकों की विश्वसनीयता और परियोजनाओं की पारदर्शिता पर पूरी तरह ध्यान देती है और किसी भी तरह के जोखिम से राज्य को बचाने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाती है।

  • हैदराबाद में बेटी और प्रेमी ने मां की हत्या कर बेडरूम में दबाया शव, कंक्रीट से ढक दिया..

    हैदराबाद में बेटी और प्रेमी ने मां की हत्या कर बेडरूम में दबाया शव, कंक्रीट से ढक दिया..


    हैदराबाद के जवाहरनगर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक साल से लापता 40 वर्षीय महिला अंजू दासारी की हत्या का खुलासा हुआ है। महिला का शव उसी घर के बेडरूम की फर्श के नीचे दबा पाया गया, जहां उसकी छोटी बेटी रोशनी और उसके प्रेमी 22 वर्षीय ऑटो ड्राइवर मोंटी कुमार सिंह रह रहे थे।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक अंजू दासारी घरों में साफ-सफाई का काम करती थीं और उनकी हत्या का कारण यह था कि वह अपनी बेटी और मोंटी के रिश्ते के खिलाफ थीं। 17 अक्टूबर 2025 को बेटी ने पुलिस में मां की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन लगभग एक साल तक बेटी उसी कमरे में सोती रही, जहां उसकी मां का शव दबा हुआ था।

    मलकाजगिरि जोन के DCP सीएच श्रीधर ने बताया कि 17 वर्षीय बेटी के बयानों में विरोधाभास और कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) ने पुलिस को शक दिलाया। जांच में पता चला कि मोंटी का नाम इसमें सामने आया और दोनों ने हत्या की योजना बनाई।

    पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने शादी में रुकावट बनने के कारण अंजू की हत्या की। भय के कारण दोनों ने शव को घर के अंदर गहरा गड्ढा खोदकर दबा दिया और ऊपर से कंक्रीट की फर्श डाल दी ताकि बदबू बाहर न आए। बुधवार को फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में फर्श खोदा गया, जहां से महिला का सड़ा-गला कंकाल बरामद हुआ।

    पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम और डीएनए टेस्ट के लिए भेजा है। दोनों आरोपी गिरफ्तार होकर जेल भेज दिए गए हैं। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस खौफनाक साजिश में कोई अन्य बाहरी व्यक्ति शामिल था।

    यह मामला न केवल परिवार में आपसी विवाद और प्रेम संबंधों की सीमा को उजागर करता है, बल्कि यह बताता है कि कैसे अपराधियों ने पूरे साल तक एक भयानक रहस्य छिपाए रखा।