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  • उत्तराखंड के चंपावत में 16 साल की किशोरी से गैंगरेप…. भाजपा नेता, एक अग्निवीर समेत 3 पर केस

    उत्तराखंड के चंपावत में 16 साल की किशोरी से गैंगरेप…. भाजपा नेता, एक अग्निवीर समेत 3 पर केस


    चंपावत।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चम्पावत (Champawat) में दोस्त संग शादी में गई 16 वर्षीय किशोरी (16-Year-old Teenager) दरिंदगी का शिकार हो गई। उसके दोस्त, भाजपा नेता समेत तीन लोगों ने चाकू नोक पर उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता एक सुनसान घर में निर्वस्त्र मिली। उसके हाथ-पैर भी बंधे हुए थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल तीनों फरार हैं। आरोपियों में एक अग्निवीर बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, पीड़ित के पिता ने तहरीर देकर बताया कि उनकी बेटी चम्पावत की एक दुकान में काम करती है। पांच मई की शाम को वह घर नहीं लौटी। फोन करने पर उसने बताया कि सल्ली निवासी उसका दोस्त विनोद सिंह रावत उसे एक शादी समारोह में ले गया है। लेकिन, देर रात तक वह घर नहीं लौटी। रात करीब डेढ़ बजे बेटी ने पिता को फोन किया, लेकिन तुरंत कट गया और फिर मोबाइल ऑफ हो गया। पिता ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी। बुधवार तड़के चार बजे पुलिस और ग्रामीणों को किशोरी सल्ली गांव में एक बंद कमरे में रस्सी से बंधी मिली।


    चाकू की नोंक पर दरिंदगी

    किशोरी ने बताया कि सल्ली निवासी 20 वर्षीय विनोद सिंह रावत, 30 वर्षीय नवीन सिंह और भाजपा नेता 45 वर्षीय पूरन सिंह रावत ने गले पर चाकू रखकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद तीनों ने रस्सी से बांधकर उसे कमरे में बंद कर दिया। कोतवाल बीएस बिष्ट ने बताया कि मामले की जांच एसआई प्रियंका मौर्या को सौंपी गई है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए हैं।

    पीड़ित किशोरी का मेडिकल कराकर उसकी काउंसलिंग कराई गई है। पूरन सिंह रावत पूर्व में तल्लादेश से भाजपा का मंडल उपाध्यक्ष और सल्ली गांव का प्रधान रह चुका है। भाजपा के तल्लादेश मंडल अध्यक्ष कैलाश सिंह बोहरा ने बताया कि कुछ समय पूर्व नई कार्यकारिणी के गठन में उसे पद से हटाया गया था।


    चम्पावत को चौथी गैंग रेप की वारदात ने दहलाया

    चम्पावत में हुए गैंगरैप की वारदात ने पहाड़ की शांत वादियों को झकझोर कर रख दिया है। गैंगरेप की घटना से महिला सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 13 साल के भीतर ही यह चौथी शर्मशार करने वाली वारदात है।


    पीड़िता के पिता ने कराया मुकदमा

    चम्पावत में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने देवभूमि को एक बार फिर से हिला कर रख दिया है। इस घटना ने एक बार फिर से महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता के पिता की दी तहरीर में कहा गया है कि तीन लोगों ने उसके साथ चाकू और धारदार हथियार बसूला को उसके गर्दन पर रख कर गैंग रेप किया। पुलिस पूछताछ में उसने ये भी बताया कि तीनों ने उसे रस्सी से बांध कर कमरे में बंद कर दिया। वैसे जिले में गैंगरेप की ये पहली वारदात नहीं है। इससे पूर्व भी जिले में गैंगरेप के मामले हो चुके हैं।


    पूर्व में गैंगरेप के मामले

    वर्ष 2003 में चम्पावत में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन को हिरासत में लिया गया था। अक्टूबर 2023 में सूखीढांग क्षेत्र में एक महिला के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। जबकि जुलाई 2024 में तल्लापाल बिलौना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ तीन युवकों ने दुष्कर्म किया था। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। बहरहाल जो भी हो गैंगरेप से महिला सुरक्षा पर खतरा है।

    चंपावत एसपी रेखा यादव ने बताया कि चम्पावत के सल्ली गांव में 16 साल की एक नाबालिग बालिका से सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई है। पीड़िता के पिता की तहरीर पर तीनों आरोपियों के खिलाफ चम्पावत कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    गैंगरेप का एक आरोपी अग्निवीर में भर्ती!
    आरोपी विनोद का चयन अग्निवीर में हुआ था। कुछ समय पूर्व बनबसा में हुई भर्ती के दौरान विनोद ने शारीरिक दक्षता और मेडिकल पास किया था। बताया जाता है कि विनोद का अग्निवीर का कॉल लेटर आना शेष था।


    फॉरेंसिक टीम ने जांच की

    चम्पावत। गैंगरेप की घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। फारेंसिक टीम ने सल्ली स्थित डेयरी के पास के कमरे में पहुंच कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के अनुसार फील्ड यूनिट ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित किए।


    पिता के संरक्षण में भेजी नाबालिग बालिका

    बुधवार को जिला अस्पताल में पीड़िता का मेडिकल चेकअप किया गया। जिसके बाद सीडब्ल्यूसी ने पीड़िता की काउंसलिंग की। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष आनंदी अधिकारी ने बताया कि काउंसलिंग में पीड़िता ने बीमार पिता के साथ रहने की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि इसके बाद पीड़िता को पिता के संरक्षण में भेज दिया। साथ ही किसी भी तरह की दिक्कत होने पर कमेटी को जानकारी देने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के बाद जांच अधिकारी पीड़िता को लेकर 164 के बयान लिए कोर्ट ले गई।

  • तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा… किसी भी दल के पास बहुमत नहीं, अब क्या करेंगे गवर्नर?

    तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा… किसी भी दल के पास बहुमत नहीं, अब क्या करेंगे गवर्नर?


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) की जनता ने इस विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में ऐसा फैसला सुनाया है कि वहां की राजनीति फंस सी गई है। किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। अभिनेता से राजनेता बने विजय (Vijay) की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (Tamilaga Vetri Kazhagam- TVK) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर इतिहास तो रच दिया है, लेकिन सत्ता से अभी भी दूर ही नजर आ रही है। उनके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी 117 विधायकों का समर्थन प्राप्त नहीं है। राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर (Governor Rajendra Arlekar) ने विधानसभा तो भंग कर दी है, लेकिन विजय को सरकार बनाने का न्यौता देने से पहले बहुमत का ठोस सबूत पेश करने को कहा है।

    आपको यह भी बता दें कि विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है। नियमों के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। इसके साथ पार्टी के विधायकों की संख्या 107 ही रह जाएगी। उन्हें बहुमत के लिए 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। इस चुनाव में सत्तारूढ़ डीएमके गठबंधन को 59, एआईएडीएमके गठबंधन को 47, कांग्रेस को 5 और पीएमके को 4 सीटें मिली हैं। अन्य छोटे दलों के पास 2 सीटें हैं। कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का एलान किया है, जिससे आंकड़ा 112 तक पहुंचता है। हालांकि, अभी भी 5 और सीटों की दरकार है। चर्चा यह भी है कि भाजपा के समर्थन से टीवीके और एआईएडीएमके के बीच भी बातचीत चल रही है।


    त्रिशंकु विधानसभा के हालात में क्या करेंगे राज्यपाल?

    नियमों के मुताबिक, जब किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो राज्यपाल के पास शक्तियां होती हैं। न्यायमूर्ति आरएस सरकारिया के अनुसार, राज्यपाल का मुख्य कार्य सरकार का गठन करवाना है न कि अपनी पसंद की विचारधारा वाली सरकार चुनना। राज्यपाल को सबसे पहले चुनाव पूर्व गठबंधन, उसके बाद सबसे बड़ी पार्टी और सबसे अंत में चुनाव बाद का गठबंधन को मौका देना होता है। यह उस स्थिति में होता है जब उनके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्याबल हो। मुख्यमंत्री को पद संभालने के 30 दिनों के भीतर सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा। बहुमत का फैसला राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर होना चाहिए।


    राज्यपालों के विवादित फैसले

    हालांकि, राज्यपालों ने अलग-अलग स्थितियों में अलग-अलग रुख अपनाए हैं, जिससे अक्सर विवाद पैदा हुए हैं। 2017 में गोवा और मिजोरम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन वहां के राज्यपालों ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुलाया क्योंकि भाजपा ने अन्य दलों के समर्थन के पत्र पहले पेश कर दिए थे। इसके एक साल बाद कर्नाटक में भी ऐसी ही स्थिति थी। यहां भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी। राज्यपाल ने बी.एस. येदियुरप्पा को शपथ दिला दी, लेकिन कांग्रेस और जेडीएस के चुनाव बाद गठबंधन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 24 घंटे के भीतर बहुमत साबित करने की चुनौती मिलने पर येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा।

  • 66 दिन पहले हुई थी शादी, अब तिरंगे में लौटा पति: जालौन में शहीद सिपाही के शव से लिपटकर रोती रही पत्नी, चारों जवानों को दी गई अंतिम सलामी

    66 दिन पहले हुई थी शादी, अब तिरंगे में लौटा पति: जालौन में शहीद सिपाही के शव से लिपटकर रोती रही पत्नी, चारों जवानों को दी गई अंतिम सलामी

    नई दिल्ली। हरियाणा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने जालौन पुलिस महकमे को गहरे सदमे में डाल दिया। ड्यूटी से लौट रहे चार पुलिसकर्मियों की मौत के बाद जब उनके पार्थिव शरीर जालौन पहुंचे, तो पूरा पुलिस लाइन शोक और सन्नाटे में डूब गया। बुधवार सुबह जैसे ही ताबूत पहुंचे, हर आंख नम हो गई। गार्ड ऑफ ऑनर के बीच जब अंतिम सलामी दी जा रही थी, तभी सबसे भावुक दृश्य सामने आया। सिपाही प्रदीप कुमार की पत्नी मयूरी वर्मा अपने पति के शव से लिपटकर बिलख-बिलख कर रो पड़ीं।

    मयूरी को महिला पुलिसकर्मियों ने संभालने की कोशिश की, लेकिन उनका दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा था। रोते-रोते वह बेहोश हो गईं। महज 66 दिन पहले ही दोनों ने सात फेरे लिए थे, और अब वही रिश्ता अचानक इस तरह टूट गया कि हर देखने वाले की आंखें भर आईं। वहां मौजूद हर शख्स इस मंजर को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रहा था।

    चारों शहीद पुलिसकर्मियों दरोगा मोहित यादव, दरोगा सत्यभान, कॉन्स्टेबल अशोक कुमार और सिपाही प्रदीप कुमार को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पुलिस लाइन में डीजी आलोक सिंह, आईजी आकाश कुलहरी और डीएम राजेश पांडेय समेत कई अधिकारियों ने कंधा देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद स्मारक पर गूंजती सलामी की आवाजें हर दिल को झकझोर रही थीं।

    बताया जा रहा है कि ये सभी पुलिसकर्मी हरियाणा में एक केस में दबिश देने गए थे। मंगलवार सुबह जब वे स्कॉर्पियो से लौट रहे थे, तभी कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे पर ओवरटेक के दौरान वाहन अनियंत्रित हो गया और सामने चल रही गाड़ी से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही चारों पुलिसकर्मियों और एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई।

    श्रद्धांजलि के बाद सभी पार्थिव शरीर उनके गृह जिलों के लिए रवाना कर दिए गए—कासगंज, कन्नौज, बांदा और रायबरेली। हर गांव और हर घर में मातम पसरा हुआ है, जहां इन जवानों का इंतजार अब कभी पूरा नहीं होगा।

    इस दुखद घटना के बीच राज्य सरकार ने परिजनों के लिए बड़ी घोषणा की है। डीजी आलोक सिंह ने प्रत्येक शहीद के परिवार को 1 करोड़ 90 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। यह मदद भले ही कुछ सहारा दे, लेकिन जो खालीपन इन परिवारों में आया है, उसे कोई भर नहीं सकता।

    यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि ड्यूटी पर निकले जवान हर दिन खतरे के साए में जीते हैं। उनके बलिदान के पीछे सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि टूटते हुए कई परिवारों की कहानी छिपी होती है।

  • PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार

    PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार



    नई दिल्ली। यूपी की चर्चित PCS अफसर ज्योति मौर्य और उनके सफाईकर्मी पति आलोक मौर्य का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ पारिवारिक नहीं बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है। प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात के बाद आलोक मौर्य ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे जल्द ही राजनीति में कदम रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि वे आगे आएं और समाज की सेवा करें, खासकर युवाओं के मुद्दों को लेकर।

    5 मई को जब डिप्टी सीएम का हेलिकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरा, तो आलोक मौर्य अपने समर्थकों के साथ स्वागत के लिए पहले से मौजूद थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करते हैं और वे भी उसी राह पर आगे बढ़ने की सोच रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला पार्टी और जनता की इच्छा पर निर्भर करेगा।

    इस बीच, ज्योति और आलोक के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मामला फिलहाल मीडिएशन सेंटर में है, जहां सुलह की कोशिशें जारी हैं। आलोक मौर्य का कहना है कि वे परिवार को टूटने से बचाना चाहते हैं और उम्मीद है कि जल्द कोई सकारात्मक नतीजा सामने आएगा। लेकिन दूसरी तरफ PCS अफसर ज्योति मौर्य ने साफ कर दिया है कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर अब कुछ नहीं कहना चाहतीं और पहले ही अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी हैं।

    गाजियाबाद में एडीएम प्रशासन के पद पर तैनात ज्योति मौर्य पहले भी कह चुकी हैं कि तलाक की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अब यह रिश्ता बच पाना मुश्किल है। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ चुका है कि मामला जिला कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जहां एक ओर आलोक ने गुजारा भत्ता की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है, वहीं ज्योति ने तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    आलोक मौर्य ने इस पूरे विवाद को एक बड़े सामाजिक मुद्दे से भी जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने पुरुषों के अधिकारों की बात करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ‘पुरुष आयोग’ बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुरुषों को अपनी बात रखने का मंच नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से कई लोग मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या तक कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इस विवाद ने पहले भी देशभर में बहस छेड़ दी थी, जब आलोक ने ज्योति पर अफेयर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में वे इन आरोपों को साबित नहीं कर पाए और वापस लेना पड़ा। दूसरी ओर, ज्योति मौर्य ने आलोक के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है, जो फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है।

    एक साधारण परिवार से निकलकर PCS अफसर बनने तक का ज्योति मौर्य का सफर जितना प्रेरणादायक रहा, उतना ही उनका निजी जीवन विवादों में घिर गया। अब इस पूरे मामले में राजनीति की एंट्री ने इसे और ज्यादा चर्चित बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि आलोक मौर्य सच में राजनीति में कदम रखते हैं या नहीं, और कोर्ट में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल विवाद किस दिशा में जाता है।

  • पंजाब में धमाकों से दहशत! BSF HQ और आर्मी कैंप बने निशाना, DGP ने बताया PAK लिंक,CM ने लगाया सियासी साजिश का आरोप

    पंजाब में धमाकों से दहशत! BSF HQ और आर्मी कैंप बने निशाना, DGP ने बताया PAK लिंक,CM ने लगाया सियासी साजिश का आरोप


    नई दिल्ली। पंजाब में एक ही रात के भीतर हुए दो धमाकों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है और सियासत भी गरमा गई है। जालंधर में बीएसएफ हेडक्वार्टर के बाहर और अमृतसर में आर्मी कैंप के पास हुए धमाकों को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

    मंगलवार रात करीब 8 बजे जालंधर के BSF चौक के पास एक एक्टिवा के नजदीक जोरदार धमाका हुआ। शुरुआती जांच में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति पॉलिथीन में लिपटा पैकेट एक्टिवा के पास रखकर भागता दिखा, जिसके कुछ ही सेकेंड बाद विस्फोट हो गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।

    इसके करीब तीन घंटे बाद अमृतसर के खासा इलाके में आर्मी कैंप को निशाना बनाते हुए ग्रेनेड अटैक की कोशिश की गई। बाइक सवार दो नकाबपोशों ने ग्रेनेड फेंका, जो दीवार से टकराकर फट गया। धमाके से कैंप की बाहरी संरचना को नुकसान पहुंचा और टीन शेड ढह गया, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

    घटनाओं के बाद पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने मौके का दौरा कर जांच की और कहा कि दोनों हमलों में IED का इस्तेमाल हुआ हो सकता है। उन्होंने शुरुआती तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की भूमिका से इनकार नहीं किया और इसे एक सुनियोजित साजिश बताया।

    वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ऐसे धमाके चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए कराए जा सकते हैं और इसके पीछे राजनीतिक साजिश भी हो सकती है।

    इस बीच, एक उग्र संगठन खालिस्तान लिबरेशन आर्मी (KLA) ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को धमकी भी दी है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां इस दावे की भी जांच कर रही हैं।

    इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और चंडीगढ़ समेत कई इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर मामले की हर एंगल से जांच कर रही हैं ताकि इस साजिश के पीछे के नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

    फिलहाल, एक रात में दो धमाकों ने पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। अब जांच के नतीजों पर ही आगे की तस्वीर साफ होगी।

  • राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!

    राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!



    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक याचिका पर आज महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह मामला कथित आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ा बताया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, याचिका में मांग की गई है कि राहुल गांधी और उनके परिवार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा विस्तृत जांच की जाए और इस मामले में नियमित आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

    यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है। मामले की सुनवाई पहले 6 मई को नए मामलों की सूची में शामिल थी, लेकिन याची की अर्जेंट अपील पर इसे चैंबर में सुनवाई के लिए मंजूरी दी गई। अब इस पर आज दोपहर 2:15 बजे सुनवाई होनी है।

    याचिकाकर्ता कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दावा किया है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीर जांच आवश्यक है। याचिका में सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग, गृह मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को भी पक्षकार बनाया गया है।

    इस पूरे मामले में आरोप है कि राहुल गांधी की संपत्ति उनके ज्ञात आय स्रोतों से अधिक हो सकती है, जिसकी जांच की मांग की गई है।

    फिलहाल अदालत में इस याचिका की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।

  • UP की सियासत में बड़ा धमाका तय? 10–15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज… कई मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरे करेंगे एंट्री!

    UP की सियासत में बड़ा धमाका तय? 10–15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज… कई मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरे करेंगे एंट्री!



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से टल रहा कैबिनेट विस्तार अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, 10 से 15 मई के बीच योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है, जिससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की पूरी संभावना है।

    बताया जा रहा है कि यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है, जहां संगठन और सरकार दोनों में बड़े स्तर पर फेरबदल देखने को मिल सकता है। इसी के साथ भाजपा नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव की तैयारी में है, जिसकी घोषणा कैबिनेट विस्तार के आसपास की जा सकती है।

    सूत्रों के मुताबिक, इस बार मंत्रिमंडल में कई नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की भूमिका में बदलाव या उन्हें संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। प्रदर्शन के आधार पर विभागों में फेरबदल भी तय माना जा रहा है।

    जातीय संतुलन साधने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ओबीसी और दलित वर्ग से नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है, वहीं ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज से भी कुछ नए नामों पर विचार किया जा रहा है। करीब एक दर्जन नामों पर मंथन जारी है, हालांकि अंतिम सूची अभी तय नहीं हुई है।

    इसके अलावा, सहयोगी दलों को भी साधने की रणनीति पर काम चल रहा है। अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी से एक-एक विधायक को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, ताकि गठबंधन में संतुलन बना रहे। साथ ही महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत 3 से 4 महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2027 के लिए मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करना है।

    अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम सूची में किन चेहरों को जगह मिलती है और किन मंत्रियों की भूमिका में बदलाव किया जाता है, क्योंकि यह फैसला आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

  • Bihar: CM सम्राट चौधरी आज बिहारवासियों को दे सकते हैं बड़ी सौगात…. बुलाई कैबिनेट बैठक

    Bihar: CM सम्राट चौधरी आज बिहारवासियों को दे सकते हैं बड़ी सौगात…. बुलाई कैबिनेट बैठक


    पटना।
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Chief Minister Samrat Chaudhary) ने छह मई यानी आज शाम पांच बजे मुख्य सचिवालय में कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) बुलाई है। मंत्रिमंडल विस्तार से एक दिन पहले की यह बैठक खास होने वाली है। वह राज्यवासियों को बड़ी सौगात दे सकते हैं। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को लेकर कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगा सकते हैं। उनके साथ दोनों उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव, मुख्य सचिव और सभी विभागों के सचिव मौजूद रहेंगे।


    दूसरी कैबिनेट में क्या हुआ था?

    इससे पहले वाली कैबिनेट की बैठक 29 अप्रैल को हुई थी। इसमें सीएम सम्राट चौधरी ने 63 प्रस्तावों पर मुहर लगाई थी। इसमें उन्होंने पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर पटना जू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई थी। गृह विभाग के आरक्षी शाखा की ओर से जानकारी दी गई कि सीएम सम्राट चौधरी ने भागलपुर, मुजफ्फरपुर, नालंदा एवं गयाजी में यातायात पुलिस के विभिन्न कोटियों में 485 पदों के सृजन एवं पूर्व से सृजित 1606 पदों को कर्णांकित करने की स्वीकृति प्रदान की थी। वही बिहार पुलिस अवर निरीक्षक एवं इसके समकक्ष सृजित 20937 पदों में से 50% पद प्रोन्नति के लिए चिन्हित करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई थी।

  • West Bengal: ममता बनर्जी के आवास से हटाए बैरिकेड्स… अभिषेक के दफ्तर से भी हटाई सुरक्षा

    West Bengal: ममता बनर्जी के आवास से हटाए बैरिकेड्स… अभिषेक के दफ्तर से भी हटाई सुरक्षा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) (Trinamool Congress – TMC) की करारी हार और सत्ता से बेदखल होने के एक दिन बाद, दक्षिण कोलकाता (Kolkata) में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) के आवास के बाहर लगाए गए बैरिकेड्स मंगलवार को आंशिक रूप से हटा दिए गए. साथ ही उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के ऑफिस से भी सुरक्षा हटा ली गई है. पुलिस का कहना है कि ये कदम आला अधिकारियों के निर्देश और सुरक्षा-व्यवस्था की नई समीक्षा के तहत उठाया गया है।

    जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी के 30बी हरिश चटर्जी स्ट्रीट स्थित आवास के आसपास सुबह से पुलिसकर्मी स्मार्ट बैरिकेड्स को हटाते नजर आए. हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन मौके पर मौजूद एक कोलकाता पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्हें सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर ये कार्रवाई की है। अधिकारी ने कहा, ‘हमने सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर काम किया है. कोई खास वजह नहीं बताई गई.’ आवास के पास पुलिस कियोस्क अभी-भी मौजूद है, लेकिन इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था आंशिक रूप से कम हो गई है.


    हाई सिक्योरिटी जोन में ढील

    ममता बनर्जी का निवास क्षेत्र अब तक एक उच्च-सुरक्षा क्षेत्र था, जहां वाहनों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रहती थी. स्थानीय निवासियों को भी अपने घरों तक पहुंचने के लिए पहचान पत्र दिखाना पड़ता था. बैरिकेड्स हटाने से अब इन प्रतिबंधों में काफी ढील मिल गई है. हालांकि, इलाके में एक पुलिस कियोस्क अभी भी मौजूद है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती अब काफी कम हो गई है।


    अभिषेक के ऑफिस से वापस ली सुरक्षा

    इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट स्थित ऑफिस से भी सुरक्षा हटा ली गई है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि परिसर से सुरक्षा बलों की वापसी हो चुकी है. ये कार्यालय पार्टी की महत्वपूर्ण गतिविधियों का केंद्र माना जाता रहा है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही यहां का सुरक्षा घेरा खत्म कर दिया गया है।


    नेताओं की सुरक्षा कवर की समीक्षा

    इसके अलावा कोलकाता पुलिस अब निवर्तमान टीएमसी सरकार के अन्य बड़े नेताओं की सुरक्षा की भी समीक्षा कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है. इस समीक्षा सूची में फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास और सुजीत बोस जैसे कद्दावर नेताओं के नाम शामिल हैं. आने वाले दिनों में कई अन्य नेताओं की सुरक्षा में भी बदलाव किए जा सकते हैं.

    आपको बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी को बीजेपी ने करारी शिकस्त देते हुए दो तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल किया है. बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि सत्तारूढ़ टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई है।

  • बिहार में मौसम का कहर: नरकटियागंज में आंधी से उड़ गए छप्पर, पेड़ गिरने से सड़कें जाम; बेतिया में आग से लाखों का नुकसान

    बिहार में मौसम का कहर: नरकटियागंज में आंधी से उड़ गए छप्पर, पेड़ गिरने से सड़कें जाम; बेतिया में आग से लाखों का नुकसान


    नई दिल्ली। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ने से भारी तबाही देखने को मिली। नरकटियागंज क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई घरों के छप्पर उड़ गए, पेड़ सड़कों पर गिर पड़े और यातायात बाधित हो गया। वहीं बेतिया में देर रात शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने लाखों की संपत्ति जलाकर राख कर दी।

    नरकटियागंज में अचानक आई तेज आंधी ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। अजुआ गांव के पास नरकटियागंज-व्यासपुर रोड पर पिंटू कुमार की हार्डवेयर दुकान का एस्बेस्टस छप्पर तेज हवा में उड़कर करीब 30 मीटर दूर जा गिरा। इस दौरान उनके मकान की दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

    गांव के ही बच्चा पटेल की झोपड़ी का छप्पर भी आंधी में उड़ गया, जिससे उनका परिवार पूरी रात खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गया। तेज हवा और बारिश के दौरान लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों पर भागते नजर आए।

    आंधी का असर यातायात पर भी पड़ा। नरकटियागंज-लौरिया रोड पर जयमंगलापुर के पास एक बड़ा पेड़ गिर गया, जिससे करीब आधे घंटे तक सड़क जाम रही। स्थानीय लोगों की मदद से पेड़ हटाकर यातायात बहाल किया गया।

    सेमरा चौक पर भी एक बड़ा आम का पेड़ उखड़कर गिर गया, जिससे एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। मौसम की मार फसलों पर भी साफ दिखी। बागान मालिकों के मुताबिक, आम और लीची की फसल को भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि बड़ी संख्या में कच्चे फल गिर गए। हालांकि बारिश से गन्ना, मूंग और उड़द की फसलों को फायदा मिला है।

    उधर, बेतिया के लाल बाजार इलाके में सोमवार रात करीब 12:15 बजे शॉर्ट सर्किट से दुर्गाशक्ति हार्डवेयर दुकान में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पास के गोदाम को भी अपनी चपेट में ले लिया।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। दुकान मालिक प्रकाश कुमार के अनुसार, इस हादसे में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

    एक ही दिन में आंधी-बारिश और आग की घटनाओं ने पश्चिम चंपारण में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रभावित लोग राहत की उम्मीद कर रहे हैं।