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  • West Bengal. चुनाव से पहले TMC ने किया SIR में काटे गए 90 लाख नाम फिर जोड़ने का ऐलान

    West Bengal. चुनाव से पहले TMC ने किया SIR में काटे गए 90 लाख नाम फिर जोड़ने का ऐलान


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) की तारीखें नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी हमले तेज होते दिख रहे हैं। भाजपा (BJP) ने जहां आज चुनावी घोषणा पत्र (Election Manifesto) में लोक लुभावन वादे कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश की है, वहीं TMC महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के हिन्दू कार्ड पर नया दांव चल दिया है। इतना ही नहीं बनर्जी ने चुनावों से पहले एक बड़ा ऐलान भी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी पार्टी टीएमसी फिर से सत्ता में आती है तो SIR में काटे गए सभी 90 लाख लोगों के नाम फिर से मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।

    एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में अभिषेक बनर्जी ने इसका ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतादाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग और भाजपा यह कहे कि जिन 90 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं, वे सभी बांग्लादेशी थे।


    63% नाम हिंदुओं के काटे गए

    AITC के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा, “…मैं यह भरोसा दिलाता हूँ कि जब TMC फिर जीतेगी, तो वोटर लिस्ट से हटाए गए सभी लोगों के नाम वापस जोड़ दिए जाएँगे।” उन्होंने कहा, “BJP और चुनाव आयोग को यह कहना चाहिए कि जिन 90 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे सभी बांग्लादेशी थे।” बनर्जी ने कहा, “उनके बयानों के अनुसार, इनमें से 63% नाम हिंदुओं के थे, तो फिर वे भी ज़रूर बांग्लादेशी या रोहिंग्या होंगे…यानी 90 में से 57 लाख हिन्दू बांग्लादेशी रोहिंग्या हैं।”


    6 माह में UCC लागू करेंगे: BJP

    बता दें कि बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने पर छह महीने के भीतर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू (यूसीसी) लागू की जाएगी और ‘बंगाल के सपूत’ को मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही ‘राम राज्य’ स्थापित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए कहा कि घुसपैठ और तुष्टीकरण के खिलाफ भाजपा के रुख को कल्याणकारी प्रयासों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के इस आरोप को भी खारिज किया कि भाजपा पश्चिम बंगाल के लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देगी। दूसरी तरफ, अभिषेक बनर्जी 63 फीसदी हिन्दू मतदाताओं के नाम काटे जाने के बहाने भाजपा को हिन्दू विरोधी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं और टीएमसी के पक्ष में ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।

  • असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'

    असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'


    दिसपुर।
    असम विधानसभा चुनावों (Assam Assembly elections.) के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो गया है। मतदान से महज कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के ‘गोमांस सेवन’ पर दिए गये बयान पर राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है। सरमा ने कहा कि गोमांस खाने में कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे निजी जगहों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुस्लिम भाई गोमांस खाते हैं, हम उन्हें मना नहीं कर रहे हैं। हम बस यही कहते हैं कि इसे घर के अंदर खाएं, सार्वजनिक स्थानों पर नहीं। मंदिरों के 5 किलोमीटर दायरे में या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर इसका सेवन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान से सियासी बवाल तेज हो गया है। विपक्ष इसे भाजपा (BJP) की दोहरी नीति बता रहा है।

    दरअसल, यह बयान मुख्यमंत्री के पिछले कई बयानों से बिल्कुल अलग है। कुछ दिन पहले जोरहाट में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि गाय का मांस खाने वालों को वह नहीं बख्शेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने तब कहा था कि असम में पशु संरक्षण कानून है, सार्वजनिक रूप से गोमांस खाने पर 3 साल की जेल हो सकती है। मैं गाय का मांस खाने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराऊंगा।

    विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा
    मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दलों ने हमलावर रुख अपनाया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, कि भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ। उन्होंने हिमंता के बयान वाला पोस्टर शेयर करते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

    वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने भी भाजपा पर तीखा प्रहार किया। पार्टी ने कहा कि ‘गाय माता’ भाजपा के लिए सिर्फ चुनावी हथकंडा है, जिसका इस्तेमाल दंगे और अशांति फैलाने के लिए किया जाता है। आप ने आरोप लगाया कि उत्तर भारत में भाजपा और उसके समर्थक ‘ रक्षा’ के नाम पर हत्याएं करते हैं, वहीं असम के उनके नेता कह रहे हैं कि गोमांस खाओ लेकिन घर में।

    पुराने बयान और कानून का प्रावधान
    बता दें कि इस महीने के शुरू में हिमंता बिस्वा सरमा ने असम जातीय परिषद (एजेपी) की उम्मीदवार कुंकी चौधरी की मां सुजाता गुरुंग चौधरी पर गोमांस खाने और ‘राष्ट्र-विरोधी व सनातनी-विरोधी’ होने का आरोप लगाया था। उन्होंने चुनाव के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। एजेपी ने इन आरोपों को फर्जी और राजनीतिक साजिश बताया है।

    असम पशु संरक्षण अधिनियम, 2021 गायों के वध पर पूर्ण रोक नहीं लगाता, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, रेस्तरां और सामुदायिक कार्यक्रमों में गोमांस के सेवन पर प्रतिबंध है। राज्य में दुकानों से गोमांस खरीदा जा सकता है और निजी स्थानों पर इसका सेवन किया जा सकता है। हाल ही में कैबिनेट ने होटलों और सार्वजनिक स्थानों में गोमांस पर और सख्ती की है।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने का आदेश…. बाम्बे हाईकोर्ट ने गोवा सरकार को लगाई फटकार

    छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने का आदेश…. बाम्बे हाईकोर्ट ने गोवा सरकार को लगाई फटकार


    मुम्बई।
    बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए गोवा (Goa) में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) की एक प्रतिमा को गिराने का आदेश दे दिया है। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने अवैध रूप से स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को हटाने का आदेश देते हुए कहा कि मोरमुगाओ पोर्ट प्राधिकरण (Mormugao Port Authority) की जमीन पर अतिक्रमण रोकने में सरकार ने गंभीर लापरवाही दिखाई है।

    जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस जमसांडेकर की पीठ ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुरक्षा की व्यवस्था करें, ताकि प्रतिमा को हटा कर पहले पहले जैसा बनाया जा सके। इससे पहले मोरमुगाओ पोर्ट प्राधिकरण ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि उसकी जमीन पर जबरन घुसकर स्थायी प्रतिमा स्थापित कर दी गई, जबकि इस संबंध में पहले ही पुलिस और अन्य अधिकारियों को शिकायत दी गई थी।


    क्या बोला हाईकोर्ट?

    इसके बाद हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक बड़े बंदरगाह की संपत्ति पर सीधा अतिक्रमण है और राज्य सरकार मूकदर्शक बनी रही। अदालत ने यहां तक कहा कि ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने अतिक्रमण करने वालों के साथ परोक्ष रूप से सहयोग किया है। अदालत ने पुलिस के हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस ने पहले ही कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी, इसके बावजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेट, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने 19 फरवरी को प्रतिमा के उद्घाटन को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।


    सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

    HC ने यह भी नोट किया कि उद्घाटन कार्यक्रम में स्थानीय विधायक संकल्प आमोणकर और अन्य राजनीतिक हस्तियां मौजूद थीं। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन और स्थानीय नेताओं के बीच किसी तरह की समझ बनी हुई थी और पोर्ट की जमीन की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि इसी जमीन पर प्रतिमा लगाने के लिए पहले विधायक की ओर से अनुमति मांगी गई थी, जिसे पोर्ट प्राधिकरण ने केंद्र सरकार की भूमि नीति के तहत खारिज कर दिया था।

    HC ने राज्य सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि पोर्ट प्राधिकरण को सार्वजनिक परिसर कानून के तहत ही कार्रवाई करनी चाहिए या अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर रहना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

  • CG: दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर' का कहर…., 83 सुअरों को मारकर दफनाया

    CG: दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर' का कहर…., 83 सुअरों को मारकर दफनाया


    दुर्ग।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग जिले (Durg district) में ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ (‘African Swine Fever’-ASF) संक्रमण पाए जाने के बाद 83 सुअरों को मार दिया गया है तथा संक्रमण से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जिले के धमधा विकासखंड में मुड़पार गांव के सुअर फार्म में ASF संक्रमण पाए जाने के बाद पशुपालन विभाग ने अन्य सुअर पालकों को सतर्क कर दिया है।

    उन्होंने बताया कि मुड़पार गांव में एक निजी सुअर पालक के यहां पिछले कुछ दिनों से सुअरों की मृत्यु हो रही थी और जब सुअर पालक ने इसकी सूचना जिला पशुपालन विभाग को दी, तब दो अप्रैल को पशुपालन विभाग सुअर फार्म पहुंचा और नमूना जांच के लिए भोपाल भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को रिपोर्ट में सुअरों में ASF की पुष्टि होने के बाद पशुपालन विभाग द्वारा 83 सुअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया गया तथा संक्रमण रोकने के लिए सुअरों के शवों को नियमों के अनुसार दफना दिया गया है।

    दुर्ग में पशु चिकित्सा सेवाओं के उप संचालक डॉक्टर वसीम शम्स ने बताया कि ASF एक ऐसी बीमारी है जिसका ना तो कोई इलाज है और ना ही अभी तक इसकी कोई वैक्सिन बनी है, इसलिए भारत सरकार के दिशानिर्देश के तहत वैज्ञानिक पद्धति से सुअरों को मारकर दफनाने का प्रावधान है।

    डॉक्टर शम्स ने बताया कि यह बीमारी केवल सुअरों से सुअरों तक ही फैलती है, अन्य किसी जानवर या इंसानो में इसका असर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि एक किलोमीटर क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है।

  • Rajasthan: सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 5 बच्चों की मौत…

    Rajasthan: सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 5 बच्चों की मौत…


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के सलूम्बर जिले (Salumber district) के 2 गांवों में रहस्यमयी बीमारी (Mysterious Disease) से 5 बच्चों की मौत हो गई है। इसको लेकर सूबे के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) के निर्देश पर उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज और जयपुर से विशेषज्ञों की टीमें जांच के लिए भेजी गई हैं। मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की कड़ी निगरानी करने के आदेश दिए हैं। बुखार के लक्षणों वाले बच्चों की सघन स्क्रीनिंग करने को कहा गया है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से पांच बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। इसको लेकर राजस्थान सरकार की ओर से जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को वस्तुस्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बुखार के लक्षण वाले बच्चों की सघन मेडिकल जांच कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।


    मांगी रिपोर्ट

    रहस्यमय बीमारी के फैलने की बात सामने आने पर राजस्थान सरकार ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित कर गहन जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि सलूम्बर में बच्चों की मौत का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तत्काल अधिकारियों को वस्तुस्थिति पता करने को कहा है।


    भेजी विशेषज्ञों की टीम

    सीएम ने अधिकारियों से मौत की वजहों का पता लगाने के साथ ही बीमारी की रोकथाम के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यही नहीं राज्य का स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया है। उसने तत्काल प्रभाव से आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित की है। साथ ही टीमों को बीमारी से प्रभावित गांवों में भेजा है।


    बच्चों की मौत का कारण पता करेंगी

    विशेषज्ञों की ये टीमें बच्चों की मौत का कारण पता करेंगी। साथ ही बीमारी से बचाव के संबंध में भी जरूरी कार्यवाही सुनिश्चित करेंगी। स्वास्थ्य निदेशालय, जयपुर से भी एक टीम भेजी गई है। मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने भी सोमवार रात को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की पूरी जानकारी ली।


    रोकथाम के उपाय लागू करने के निर्देश

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन के साथ अन्य अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा है। साथ ही मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए एंटीलार्वा, सोर्स रिडक्शन, फोगिंग के साथ अन्य रोकथाम के उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।


    टीमें तैनात करने के आदेश

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सलूम्बर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित गांवों और आस-पास के क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें तैनात करें। यही नहीं बुखार के लक्षण वाले बच्चों की गहन जांच सुनिश्चित करें। किसी भी बच्चे में लक्षण मिलें तो तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं। गंभीर बीमार बच्चों को तत्काल जिला चिकित्सालय या मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में रेफर करें।

  • पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल…. बोले- PM मोदी ने सौंपी 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी

    पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल…. बोले- PM मोदी ने सौंपी 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इसी महीने होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले सियासत में और ज्यादा गर्माहट बढ़ गई है। ऐसे में अब भारत के पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस (Former Indian Tennis star Leander Paes) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने मुझे युवाओं और खेल के लिए काम करने का एक स्पष्ट दृष्टिकोण दिया। उन्होंने मुझे 2036 ओलंपिक गेम्स के लिए भारत की दावेदारी से जुड़ी जिम्मेदारी दी है। मुझे इस देश में ओलंपिक लाने के लिए एक टीम के साथ कड़ी मेहनत करनी है। पेस ने यह बात शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत के दौरान कही।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें युवाओं और खेलों के लिए काम करने का साफ विजन दिया है। अब उनका लक्ष्य है कि एक मजबूत टीम के साथ मिलकर भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी दिलाई जाए। पेस ने कहा कि अगर भारत ओलंपिक की मेजबानी करता है, तो इससे देश की पहचान दुनिया में और मजबूत होगी और खेलों को बढ़ावा मिलेगा।


    राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में भी योगदान की चार- पेस

    पेस ने आगे कहा कि वह 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में भी योगदान देना चाहते हैं, खासकर अहमदाबाद में होने वाले संभावित आयोजन के लिए। इसके साथ ही उन्होंने अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।


    खुद को बताया बंगाली बॉय

    इस दौरान खुद को बंगाली बॉय बताते हुए पेस ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इंडोर टेनिस स्टेडियम और अच्छी खेल सुविधाओं की कमी है। उनका सपना है कि आने वाले 20 वर्षों में वे देश के 25 करोड़ बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं और उन्हें खेलों से जोड़ें।


    पेस ने इन देशों का दिया उदाहारण

    पेस यह भी कहा कि भारत को खेलों में आगे बढ़ने के लिए मजबूत स्पोर्ट्स कल्चर अपनाना होगा। पेस ने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिसा और ब्रिटेन जैसे देश, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं, वही ओलंपिक में भी सबसे ज्यादा पदक जीतते हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत को भी खेलों के बुनियादी ढांचे, ट्रेनिंग और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने में निवेश करना होगा। पेस के मुताबिक, खेल और खेल शिक्षा भारत को एक नई ताकत बना सकते हैं और युवा खिलाड़ियों का विकास देश के ओलंपिक सपने को पूरा करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा।

  • हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा

    हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा


    शिमला।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मौसम ने अचानक करवट ले ली है. एक तरफ अटल टनल (Atal Tunnel) के पास हिमस्खलन (एवलांच) (Avalanche) का खतरा बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी-बारिश (Hailstorm and Heavy storm – Rain) को लेकर ओरेन्ज अलर्ट जारी किया गया है. लाहौल-स्पीति प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के आसपास पर्यटकों और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।

    प्रशासन के मुताबिक, टनल के पास बाईं ओर की पहाड़ियां, आसपास का इलाका, चंद्रा ब्रिज और उससे जुड़ा क्षेत्र हिमस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गया है. हाल के दिनों में यहां पर्यटकों की भीड़ और अनधिकृत गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे जान-माल का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।

    जिला प्रशासन ने साफ आदेश दिया है कि इन संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. साथ ही ठेले-फेरी, अस्थायी दुकानें, फोटो प्वाइंट और किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि आपात स्थिति में राहत और ट्रैफिक प्रबंधन में कोई बाधा न आए।

    इधर शिमला समेत आसपास के इलाकों में शुक्रवार को ओलावृष्टि, बारिश और तेज हवाओं ने मौसम को बिगाड़ दिया. मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ओरेन्ज अलर्ट जारी किया है, जहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना है।

    इसके अलावा ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और सिरमौर जिलों के लिए 3 और 4 अप्रैल को येलो अलर्ट जारी किया गया है. वहीं 5 और 6 अप्रैल को भी कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है. 7 अप्रैल को राज्य के ज्यादातर मैदानी जिलों में भी ऐसा ही मौसम बना रह सकता है.

    मौसम विभाग के अनुसार 3 से 6 अप्रैल के बीच मनाली, कुफरी, नारकंडा, सोलंग वैली और सिस्सू जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इसके पीछे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर बताया गया है. मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि 7 से 9 अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है, जिससे ठंड और बढ़ेगी और जनजीवन प्रभावित हो सकता है.

  • LPG संकट: कर्नाटक में 300 से ज्यादा पंप हुए बंद…. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बढ़ाई सप्लाई

    LPG संकट: कर्नाटक में 300 से ज्यादा पंप हुए बंद…. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बढ़ाई सप्लाई


    बंगलूरू।
    कर्नाटक (Karnataka ) में इन दिनों ऑटो एलपीजी (Auto LPG.) की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि बंगलूरू और राज्य के कई हिस्सों में 300 से ज्यादा निजी एलपीजी पंप बंद (Over 300 Pumps Shut Down) हो गए हैं या आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (इंडियन ऑयल) (Indian Oil Corporation ) ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने पूरे कर्नाटक में ऑटो एलपीजी की सप्लाई काफी बढ़ा दी है, ताकि ऑटो रिक्शा और एलपीजी से चलने वाली गाड़ियों को ईंधन की कमी न हो।

    कंपनी के मुताबिक, अभी वह अपने 55 ऑटो एलपीजी डिस्पेंसिंग स्टेशनों (ALDS) के जरिए राज्य में जरूरत पूरी कर रही है। निजी पंप बंद होने के कारण अब ज्यादा लोग सरकारी पंपों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे यहां दबाव भी काफी बढ़ गया है। इंडियन ऑयल के अधिकारी वी. वेत्रिसेल्वाक्कुमार ने बताया कि कंपनी ने हालात को संभालने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि सप्लाई लगातार जारी रहे और लोगों को परेशानी न हो।


    क्या कहता है आंकड़ा, समझिए

    आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में इंडियन ऑयल के पंपों पर रोजाना बिक्री बढ़कर करीब 59.53 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, जबकि पिछले तीन महीनों में यह औसतन 43.4 मीट्रिक टन थी। यानी मांग में काफी बड़ा उछाल आया है।

    कंपनी ने दिलाया भरोसा
    इसके साथ ही कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए सभी क्षेत्रों में ईंधन की बराबर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। कुल मिलाकर, निजी पंपों के बंद होने से बनी स्थिति को संभालने के लिए इंडियन ऑयल पूरी तरह सक्रिय हो गया है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो।

  • 1984 दंगों के वकील एचएस फूलका ने थाना BHP का दामन… AAP से लड़ चुके हैं आम चुनाव

    1984 दंगों के वकील एचएस फूलका ने थाना BHP का दामन… AAP से लड़ चुके हैं आम चुनाव


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सीनियर वकील और आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के पूर्व नेता एच.एस. फूलका (H.S. Phoolka) अब भाजपा (BJP) में शामिल हो गए हैं। उनकी पहचान 1984 के सिख विरोधी दंगों के वकील के तौर पर रही है। वह लंबे समय तक इस मामले में केस लड़ते रहे हैं। उन्होंने 2019 के आम चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पराजय हो गई थी। फूलका ने दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली। इस मौके पर भाजपा की ओर से कई सिख चेहरे मौजूद थे। इनमें सीनियर नेता और मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ इस मौके पर मौजूद थे।

    यही नहीं पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और प्रवक्ता अनिल बलूनी भी उपस्थित थे। फूलका को पार्टी में शामिल कराने के पीछे अगले साल होने वाले पंजाब चुनाव को देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि एक सिख चेहरा और वह भी दंगों के वकील रहे नेता को एंट्री देने से भाजपा को फायदा मिल सकता है। भाजपा बीते कई दशकों से राज्य में सिखों के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। अकाली दल के साथ सालों तक गठबंधन में रही भाजपा अब सूबे में अकेली है। ऐसे में हिंदू वोटरों की पार्टी का तमगा मिले रहने से ही भाजपा खुश नहीं होगी। इसीलिए वह चाहती है कि सिखों के बीच भी पैठ बने।

    उनका स्वागत करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने अपने इरादे भी स्पष्ट कर दिए और कहा कि इससे भाजपा को पंजाब में ताकत मिलेगी। उनका कहना था कि इससे पंजाब में संगठन भी मजबूत होगा। पहले भी भाजपा ने कई सिख चेहरों को एंट्री दी थी, लेकिन बहुत सफलता अब तक नहीं मिली है। इन नेताओं में कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू, रवनीत सिंह बिट्टू आदि प्रमुख हैं। हालांकि अब सिद्धू बाहर हैं। इस मौके पर फूलका ने भी बात की और कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार की लीडरशिप में जिस तरह के हालात हैं। उनसे निपटने का दम सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी ही रखते हैं।

    रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ चुनाव लड़े थे फूलका
    फूलका ने कहा, ‘सिखों के मुद्दों पर पीएम मोदी ने निजी तौर पर रुचि दिखाई है। 1984 के दंगों को लेकर मेरे काम की उन्होंने सराहना की है।’ उन्होंने कहा कि भाजपा ने मदन लाल खुराना, सुषमा स्वराज और विजय कुमार मल्होत्रा जैसे नेताओं को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सिखों के मसले पर भाजपा ने काफी काम किया था। इसलिए अब मैं उसमें शामिल हो रहा हूं। फूलका ने 2019 का चुनाव लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ लड़ा था और हार गए थे। अब रवनीत सिंह बिट्टू भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं और केंद्र में मंत्री हैं।

  • Uttarakhand में मदसरों के संचालन पर सख्ती… 11 शर्तों के बाद ही मिलेगी धार्मिक शिक्षा देने की मान्यता

    Uttarakhand में मदसरों के संचालन पर सख्ती… 11 शर्तों के बाद ही मिलेगी धार्मिक शिक्षा देने की मान्यता


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में मदरसों (Madrasas) के संचालन को लेकर नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब अल्पसंख्यक प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि धारा-14 के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा किए बिना किसी भी मदरसे को धार्मिक शिक्षा (Religious Education) देने की मान्यता नहीं मिलेगी। इसके साथ ही सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से भी नए सिरे से मान्यता लेनी होगी। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में मदरसा संचालकों के बीच हलचल तेज हो गई है।

    शनिवार को अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जेएस रावत (JS Rawat) ने मदरसा संचालकों की बैठक बुलाई, जिसमें सभी को तय मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में मौलाना इफ्तिखार, कारी शहजाद और मौलाना रिहान गनी समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिकारियों ने साफ किया कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

    इस समय 482 मान्यता प्राप्त मदरसे
    प्रदेश में इस समय 482 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। देहरादून में 36 मदरसों को मान्यता मिली हुई है। मदरसा बोर्ड के निदेशक गिरधारी सिंह रावत ने देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने मदरसे नए मानकों पर खरे उतरते हैं।

    धार्मिक शिक्षा के नाम पर बरगलाना बर्दाश्त नहीं
    सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है। खासतौर पर वित्तीय लेनदेन, शिक्षकों की योग्यता और संस्थानों के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि धार्मिक शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
    मान्यता के लिए अनिवार्य शर्तें-
    – शैक्षणिक संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित हो।
    – संस्थान का शिक्षा परिषद से संबद्ध होना जरूरी है।
    – सोसायटी रजिस्ट्रार के पास संस्थान का पंजीकरण होना चाहिए।
    – संस्थान की जमीन सोसायटी के नाम पर दर्ज होनी चाहिए।
    – सभी वित्तीय लेनदेन संस्थान के आधिकारिक खाते से ही किए जाएं।
    – संस्थान की सोसायटी के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से हों।
    – छात्रों और शिक्षकों को किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
    – केवल डिग्रीधारी शिक्षकों की ही नियुक्ति की जाएगी।
    – शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में परिषद और प्राधिकरण के निर्देश लागू होंगे।
    – संस्थान ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिससे सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो।