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  • गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून

    गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून


    अहमदाबाद।
    गुजरात सरकार (Gujarat Government.) ने विधानसभा (Assembly) से समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code.- UCC) बिल 2026 पास हो गया है। इस विधेयक का मकसद शादी, तलाक और विरासत जैसे विषयों के लिए सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था करना है। उत्तराखंड के बाद गुजरात ऐसा करने वाला दूसरा राज्य बनेगा। यह कानून राज्य के निवासियों और बाहर रह रहे गुजरातियों पर लागू होगा लेकिन अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है। बिल की मुख्य बातों में बहुविवाह पर रोक और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शामिल है।


    यूसीसी वाला दूसरा राज्य होगा गुजरात

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक विधानसभा से पारित होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पारित किया था।


    एक हफ्ते पहले सौंपी थी रिपोर्ट

    गुजरात सरकार की ओर से नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने यूसीसी के क्रियान्वयन पर एक हफ्ते पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक यह प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा। यही नहीं गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले राज्य के निवासियों पर भी यह कानून प्रभावी होगा।


    समान कानूनी ढांचा तैयार करना है मकसद

    यह प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं। विधेयक का मकसद राज्य में समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।


    एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक

    इस विधेयक में लिव-इन के रजिस्ट्रेशन और औपचारिक घोषणा के माध्यम से उनके समापन का प्रावधान किया गया है। यह बिल एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक लगाता है। इस विधेयक के मुताबिक, इस कोड के तहत शादी तभी मान्य मानी जाएगी जब शादी के समय दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी ना हो।


    अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन

    इस विधेयक का सड़कों पर विरोध भी शुरू हो गया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल के विरोध में अहमदाबाद के लाल दरवाजे पर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। इस कानून के विरोध में AIMIM भी है। AIMIM के कार्यकर्ता भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

  • CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण

    CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण


    छत्तीसगढ़।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलियों (Naxalites) की दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य व वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापाराव (Senior Naxalite Commander Paparao) ने अपने 17 अन्य साथी माओवादियों के साथ मंगलवार को बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। हथियार डालने वाले नक्सलियों में 11 पुरुष और 7 महिला नक्सली शामिल हैं। यह सरेंडर सुरक्षाबलों व राज्य सरकार के लिए एक अहम रणनीतिक सफलता है और 31 मार्च तक देश से माओवादी उग्रवाद के खात्मे की डेडलाइन के संबंध में सबसे अहम पड़ाव भी है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ कुटरू थाने में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें वहां से बस के जरिए जगदलपुर ले जाया गया। अब इस बारे में राज्य सरकार बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जानकारी दे सकती है।


    पापा राव पर घोषित था 25 लाख रुपए का इनाम

    दो दशकों से ज्यादा समय तक घने इंद्रावती-अबूझमाड़ जंगल इलाके में सक्रिय रहा पापा राव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े आखिरी बड़े कमांडरों में से एक है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पापा राव लगभग 25 वर्षों से जंगलों में सक्रिय था और इस दौरान कई बार सुरक्षा बलों के साथ उसकी मुठभेड़ भी हुई, लेकिन हर बार वह बच निकलता था। राज्य सरकार ने उस पर 25 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।

    पापा राव ने दक्षिण बस्तर में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमलों की साज़िश रची थी, जिनमें 2010 का ताड़मेटला हमला (तब के दंतेवाड़ा जिले में था, लेकिन अब सुकमा में है) भी शामिल है। इस हमले में 76 जवान मारे गए थे।


    सबसे अहम कमेटी का मुख्य सदस्य था पापा राव

    बस्तर संभाग और आसपास के राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) को इस प्रतिबंधित संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही है।

    अधिकारियों के मुताबिक पापा राव का समर्पण छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने बताया कि यह समर्पण देश के सबसे लंबे समय से चल रहे उग्रवादों में से एक के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।

    बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा, ‘नक्सली संगठन में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य तथा साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव का 17 अन्य साथियों के साथ पुनर्वास, क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के हमारे सतत प्रयासों में एक निर्णायक सफलता का प्रतीक है।’


    नक्सलियों ने AK-47 समेत अन्य हथियार भी सौंपे

    सुंदरराज ने बताया कि पापा राव, डिविजनल कमेटी सदस्य प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित कुल 18 माओवादियों के इस समूह ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा के साथ आत्मसमर्पण किया है। इनमें सात महिला नक्सली भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आत्मसपर्मण के दौरान एके-47 राइफलें तथा अन्य हथियार भी सौंपे।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार नक्सल संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है। सुंदरराज ने कहा कि सरकार की परिकल्पना और क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से रही आकांक्षा के अनुरूप, बस्तर अब एक नई ऊर्जा, नए उत्साह और सकारात्मक पहचान के साथ और अधिक सशक्त होकर उभरने की दिशा में अग्रसर है।


    दो दशकों में हुए कई हमलों में शामिल रहा था DKSZC

    उन्होंने बताया कि DKSZC बस्तर संभाग और पड़ोसी राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है और इसे प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही थी।

    सुंदरराज ने कहा, ‘हमें आशा है कि शेष बचे माओवादी, जो वर्तमान में छोटे-छोटे समूहों में भटक रहे हैं, भी आने वाले दिनों में हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेंगे।’ उन्होंने बताया कि साउथ सब जोनल ब्यूरो इलाके से जुड़े समर्पण करने वाले सभी 18 माओवादियों को औपचारिक रूप से मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी।


    पापा राव को मंगू के नाम से भी जाना जाता है

    इससे पहले दिन में, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिनके पास गृह मंत्रालय का प्रभार भी है, ने कहा कि राव, जिन्हें मंगू के नाम से भी जाना जाता है, बस्तर इलाके में अपने दल के एक दर्जन से अधिक सदस्यों के साथ समर्पण करेंगे। शर्मा ने कहा, ‘इस समर्पण के साथ ही, राज्य में उस वरिष्ठ स्तर का कोई भी नक्सली नेता सक्रिय नहीं रहेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ 31 मार्च, 2026 की तय समयसीमा तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।’


    ‘कभी पशुपति से तिरुपति तक फैला हुआ था रेड कॉरिडोर’

    अधिकारियों ने बताया कि यह समर्पण भाकपा (माओवादी) से जुड़े माओवादी नेटवर्क के बड़े पैमाने पर कमजोर पड़ने का संकेत है, जिसने सालों तक मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अपनी समानांतर सत्ता कायम रखी थी। उन्होंने कहा कि ‘रेड कॉरिडोर’ कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों से होते हुए ‘पशुपति से तिरुपति’ तक फैला हुआ था और नक्सलियों के प्रभाव वाले इस गलियारे को देश के लिए ‘सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती’ माना जाता था। अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में शासन-प्रशासन कमज़ोर पड़ गया था, और माओवादियों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच जोर-जबरदस्ती और सहमति, दोनों के जरिए अपना प्रभाव जमा रखा था।

  • हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप

    हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप


    पंचकूला।
    हरियाणा (Haryana) में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) में 590 करोड़ रुपये (590 Crore Rupees) के घोटाले के बाद अब एक और बैंक में स्कैम किया गया है. पंचकूला (Panchkula) के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) की शाखा में हरियाणा सरकार (Haryana Government) के करीब 160 करोड़ रुपये गायब मिले हैं. इसमें पंचकूला नगर निगम की पांच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का रिकॉर्ड नहीं मिलने से हड़कंप मच गया है. फिलहाल, जांच के आदेश दिए गए हैं. उधर, विजिलेंस ने इस संंबंध में केस दर्ज कर लिया है. बैंक कर्मचारियों और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने इस बैंक शाखा में कुल 16 एफडी करवाई थीं, जिन्हें पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ट्रांसफर किया गया था. हाल ही में जब निगम ने एफडी मैच्योर होने पर राशि वापसी के लिए पत्र लिखा, तो बैंक ने जवाब दिया कि संबंधित एफडी का कोई रिकॉर्ड उनके पास मौजूद नहीं है।

    इस खुलासे के बाद नगर निगम ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू की. अकाउंट अधिकारियों, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर की टीम ने दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सरकार और बैंक को भेजी. शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्जी तरीके से समान दस्तावेजों पर अतिरिक्त खाते खोलकर रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर की गई. मामले में एक महिला खाते में बड़ी राशि ट्रांसफर होने की भी आशंका जताई जा रही है. अहम बात है कि पैसा शैल कंपनियों के खाते में जमा किया गया था।

    घोटाले को छिपाने के लिए कथित तौर पर एफडी के रिन्यूअल दस्तावेज नियमित रूप से निगम को भेजे जाते रहे, जिससे अधिकारियों को संदेह नहीं हुआ. हालांकि, जब हालिया घोटालों के बाद राशि वापस मांगी गई, तब पूरा मामला उजागर हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इकोनॉमिक्स विंग) को जांच सौंपी गई है. साथ ही बैंक प्रबंधन ने भी शिकायत दर्ज कराई है. यह मामला करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें पहले ही अन्य बैंकों के नाम सामने आ चुके हैं. अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।


    महिला के खाते में ट्रांसफर हुआ पैसा

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार, एफडी के नाम पर बैंक में जमा कराई गई राशि को बैंक ने विभिन्न फर्जी खातों में ट्रांसफर किया है. मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये और 102 करोड़ की एफडी की मैच्योरिटी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा और फिर बैंक ने स्टेटमेंट में राशि ट्रांसफर दिखाई और बताया कि वास्तविक खाते में पैसा नहीं पहुंचा. जांच में पता चला कि स्टेटमेंट भी फर्जी थी और रकम गायब है. सूत्रों के अनुसार एक महिला के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है. बताया जा रहा है कि उसके परिवार में कुछ IAS -IPS अधिकारी हैं।


    पहले हुआ था 590 करोड़ रुपये का स्कैम

    गौर रहे कि इसके पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू बैंक में भी पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपये का गबन किया गया था. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कुल 590 करोड़ रुपये की राशि का फ्रॉड हुआ था, हरियाणा सरकार का यह पैसा हालांकि, बैंक ने बाद में लौटा दिया था, लेकिन इस मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

  • UP: रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग के अंतराल में बड़ा बदलाव… इन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    UP: रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग के अंतराल में बड़ा बदलाव… इन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत


    आगरा।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) में रसोई गैस सिलिंडर (LPG cylinders) के बुकिंग अंतराल (Booking Interval.) में तेल कंपनियों ने मंगलवार को बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग की समय सीमा अलग-अलग तय कर दी गई है।

    अब 5 किलो का ‘छोटू’ सिलिंडर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 16 दिन में, जबकि सामान्य उपभोक्ताओं को 9 दिन में मिल सकेगा। गैस की कालाबाजारी रोकने और खपत के सटीक आकलन के लिए जारी इस नई सूची का सबसे बड़ा असर जिले के 3.41 लाख उज्ज्वला लाभार्थियों पर पड़ेगा।

    नई व्यवस्था के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 14.2 किलोग्राम वाले सिलिंडर की बुकिंग का अंतर बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह सीमा 25 दिन निर्धारित की गई है। 10 किलो वाले कंपोजिट सिलिंडर 18 दिन में मिलेगा।

    दोहरे कनेक्शन वालों को 35 दिन बाद मिलेगा दूसरा सिलिंडर
    गैस सिलिंडर की किल्लत और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए तेल कंपनियों ने सॉफ्टवेयर में बड़े तकनीकी बदलाव किए हैं। अब दो सिलिंडर वाले ग्राहकों को रिफिल बुक करने के लिए कम से कम 35 दिनों का इंतजार करना होगा। वहीं, एक सिलिंडर वाले उपभोक्ताओं के लिए यह समय सीमा 25 दिन तय की गई है। जिला पूर्ति अधिकारी आनंद कुमार के मुताबिक, यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।


    गैस किल्लत के बीच बड़ा फैसला

    वहीं, आगरा में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति को लेकर मचे घमासान के बीच जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सिलिंडर सप्लाई करने वाली ऑयल कंपनियों और जिला पूर्ति अधिकारी के साथ अहम बैठक की। बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए डीएम ने साफ कर दिया कि अब व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उनके औसत उपभोग का केवल 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा ही आवंटित किया जाएगा।

    भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की नई गाइडलाइन का हवाला देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि उपभोक्ताओं को दो श्रेणियों में बांटा गया है। अस्पताल, रेलवे और शैक्षणिक संस्थान जैसी अति आवश्यक सेवाओं को उनके पिछले तीन माह के औसत उपभोग का 20 प्रतिशत कोटा मिलेगा।

    वहीं, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा जैसी आवश्यक सेवाओं को केवल 10 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में डीएम ने चेतावनी दी कि गैस सिलिंडरों की किल्लत के बीच यदि कोई एजेंसी, बिचौलिया या व्यक्ति जमाखोरी या घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक उपयोग में लिप्त पाया गया, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पूर्ति विभाग को निर्देश दिए कि इस नई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए ताकि वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।


    डबल सिलिंडर होने पर गैस बुकिंग अब 35 दिन बाद

    – उपभोक्ताओं की रसोई गैस से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती है। अब दो सिलिंडर वाले उपभोक्ता 35 दिन बाद गैस बुकिंग करा सकेंगे।
    – उज्ज्वला कनेक्शन धारक 45 दिन बाद सिलिंडर बुक करा सकेंगे। एकल वाले 25 दिन बाद सिलिंडर बुक करा सकेंगे।
    – नए नियम शहरी-ग्रामीण सभी क्षेत्रों में लागू होंगे। तय सीमा से पहले बुकिंग पर सिस्टम स्वतः ब्लॉक कर देगा।
    – 5 किलो घरेलू सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में नौ दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 16 दिन का अंतराल तय किया है।
    – 10 किलो कंपोजिट सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में 18 दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 32 दिन का अंतराल तय किया गया है।

  • CG: खल्लारी माता मंदिर में रोपवे केबल टूटने से नीचे गिरी ट्रॉली, महिला की मौत; 7 घायल

    CG: खल्लारी माता मंदिर में रोपवे केबल टूटने से नीचे गिरी ट्रॉली, महिला की मौत; 7 घायल


    महासमुंद।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के महासमुंद जिला (Mahasamund district) से रविवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां खल्लारी माता मंदिर (Khallari Mata Temple) में रोपवे ट्रॉली हादसे (Ropeway Trolley Accident) का शिकार हो गई, जिसमें एक महिला की जान चली गई, जबकि सात लोग घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और मौके पर चीख-पुकार गूंज उठी। हादसे के तुरंत बाद पुलिस को सूचना दी गई और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

    केबल टूटने से गिरी थी ट्रॉली
    जानकारी के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 10 बजे की है, जब मंदिर से श्रद्धालुओं को लेकर एक रोपवे ट्रॉली नीचे की ओर आ रही थी। इसी दौरान अचानक ट्रॉली का केबल टूट गया, जिससे वह अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई। ट्रॉली में कुल आठ लोग सवार थे, जो मंदिर में दर्शन कर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान हादसा हो गया और हादसे में एक श्रद्धालु की जान चली गई।


    एक महिला की मौत

    इस हादसे में आयुषी सतकर (28), निवासी रायपुर की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि आयुषी अपने परिवार या परिचितों के साथ नवरात्रि के अवसर पर माता के दर्शन करने पहुंची थीं। वहीं, हादसे में घायल हुए सात अन्य लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।


    राहत-बचाव कार्य जारी

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। ट्रॉली के गिरते ही आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

    इस मामले पर बात करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शुरुआती तौर पर केबल टूटने को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।

  • बंगाल में भगवान राम की प्रतिमा तोड़ी.. सिर काट ले गए बदमाश… गरमाई सियासत

    बंगाल में भगवान राम की प्रतिमा तोड़ी.. सिर काट ले गए बदमाश… गरमाई सियासत


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के नंदीग्राम में भगवान राम की प्रतिमा (Lord Rama Statue) के साथ तोड़फोड़ की घटना सामने आई है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के प्रमुख चेहरे शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम नवमी के उत्सव से ठीक पहले रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों ने वेटुरिया बस स्टैंड पर लगभग तैयार हो चुकी भगवान राम की मूर्ति का सिर काटकर ले गए। यह घटना पूर्वी मेदिनीपुर जिले (East Medinipur district) के नंदीग्राम के बूथ नंबर 122, ब्लॉक-2 में हुई है। अधिकारी ने इसे हिंदू आस्था पर हमला करार देते हुए कहा कि राज्य में ऐसे कृत्य अब आम हो गए हैं।

    शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी सरकार हिंदुओं के खिलाफ है और वोट बैंक की राजनीति के लिए गुंडों को बचा रही है। अधिकारी ने इसे जिहादियों की ओर से की गई कार्रवाई बताया और कहा कि तुष्टिकरण की नीति के कारण ऐसे हमले बढ़ रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें क्षतिग्रस्त प्रतिमा दिखाई गई है। उन्होंने सनातनियों से एकजुट होकर इस सरकार को विदा करने का आह्वान किया, क्योंकि ऐसी घटनाएं हिंदू त्योहारों से पहले स्थिति को बिगाड़ रही हैं।


    चुनावी माहौल और गरमाया

    यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी अहम है, जहां शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। नंदीग्राम वह स्थान है जहां 2021 में उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हिंदू देवी-देवताओं और मंदिरों पर हमलों को रोकने में नाकाम है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसी घटनाएं चुनावी माहौल को प्रभावित कर रही हैं। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी किया है।

    इस घटना ने राज्य में धार्मिक और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने इसे सनातन धर्म पर लगातार हमलों की श्रृंखला बताया और कहा कि ममता बनर्जी की सरकार के कारण स्थिति बदतर हो रही है। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी कि अगर दोषियों को सजा नहीं मिली तो स्थिति और बेकाबू हो सकती है। यह मामला अब चुनाव प्रचार में एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जहां भाजपा हिंदू भावनाओं को केंद्र में रखकर टीएमसी पर हमलावर है।

  • ढेकियाजुली में भीषण सड़क हादसा, 8 लोगों की मौके पर मौत

    ढेकियाजुली में भीषण सड़क हादसा, 8 लोगों की मौके पर मौत


    शोणितपुर (असम)।
    असम के ढेकियाजुली क्षेत्र में रविवार रात एक भीषण सड़क हादसे में आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा एक एम्बुलेंस और ट्रक के बीच आमने-सामने की टक्कर के कारण हुआ।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, एम्बुलेंस में सवार एक मरीज समेत कुल आठ लोग इस दुर्घटना में मारे गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि सभी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

  • Punjab: वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक सुसाइड केस में पूर्व मंत्री भुल्लर के खिलाफ FIR…. हो सकती है गिरफ्तारी

    Punjab: वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक सुसाइड केस में पूर्व मंत्री भुल्लर के खिलाफ FIR…. हो सकती है गिरफ्तारी


    चंडीगढ़।
    पंजाब (Punjab) के अमृतसर (Amritsar) में पंजाब वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (Punjab Warehousing Corporation) के जिला प्रबंधक (District Manager) गगनदीप सिंह रंधावा (Gagandeep Singh Randhawa) की आत्महत्या के मामले ने एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। अमृतसर पुलिस ने इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पंजाब के पूर्व परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और निजी सहायक (PA) दिलबाग सिंह उर्फ बागा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें आत्महत्या के लिए उकसाना (धारा 108), आपराधिक धमकी (धारा 351) और समान मंशा (धारा 3(5)) शामिल हैं।

    मृतक की पत्नी उपिंदर कौर ने अपनी शिकायत में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, पिछले कई महीनों से वेयरहाउस टेंडर के आवंटन को लेकर उनके पति पर भारी दबाव बनाया जा रहा था। आरोपी उन पर नियमों के विरुद्ध जाकर अपने पक्ष में टेंडर अलॉट करने का दबाव डाल रहे थे। आरोप है कि पूर्व मंत्री और उनके सहयोगियों ने रंधावा के साथ मारपीट की और उन पर पिस्तौल से वार भी किया। उन्हें इस हद तक अपमानित किया गया कि वे टूट गए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि रंधावा को बंदूक की नोक पर एक झूठा वीडियो बयान रिकॉर्ड करने के लिए मजबूर किया गया था। रंधावा को धमकाया गया था कि यदि उन्होंने बात नहीं मानी, तो गैंगस्टरों के जरिए उन्हें और उनके बच्चों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।


    सोशल मीडिया पर आया आखिरी वीडियो

    लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर रंधावा ने शनिवार तड़के करीब 5:30 बजे जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। अपनी मृत्यु से ठीक पहले उन्होंने एक छोटा वीडियो रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसी वीडियो और पत्नी के बयानों को पुलिस ने जांच का मुख्य आधार बनाया है।


    विपक्ष ने खोला मोर्चा

    इस घटना के बाद पंजाब की विपक्षी पार्टियों ने ‘आप’ सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रंजीत एवेन्यू स्थित रंधावा के आवास पर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और रविवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। रंधावा की आत्महत्या ने राज्य में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • Assam: CM हिमंत बिस्वा सरमा को गोली मारने की धमकी देने वाला गिरफ्तार, जानें क्या है पूरा मामला?

    Assam: CM हिमंत बिस्वा सरमा को गोली मारने की धमकी देने वाला गिरफ्तार, जानें क्या है पूरा मामला?


    ईटानगर।
    असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिश्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) को गोली मारने की धमकी देने के आरोप में एक व्यक्ति को अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के नाहरलागुन से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान डोलाहफुलबाड़ी गांव निवासी कृष्णा डोर्नाल (29) के रूप में हुई है, जिसे गुरुवार को गिरफ्तार किया गया।

    ईटानगर राजधानी क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक न्येलम नेगा ने बताया कि असम पुलिस ने सूचना दी थी कि आरोपी ने वॉट्सऐप के जरिए मुख्यमंत्री को धमकी भरा संदेश भेजा था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। पूछताछ के दौरान डोर्नाल ने पुलिस को बताया कि उसने शराब की एक दुकान से पैसे का गबन किया था। जब दुकान मालिक ने उससे हिसाब मांगा, तो उसने असम के मुख्यमंत्री के आधिकारिक ईमेल पर पैसे की मांग करते हुए संदेश भेजा।


    इंटरनेट से हासिल किया नंबर

    पुलिस ने बताया कि जब उसे कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने इंटरनेट से एक वॉट्सऐप नंबर हासिल कर मुख्यमंत्री को धमकी भरा संदेश भेज दिया। अधिकारियों ने बताया कि आगे की जांच के लिए आरोपी को असम पुलिस के हवाले कर दिया गया है। एसपी नेगा ने लोगों से संयम बरतने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह का दुरुपयोग या कानून का उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    नामांकन भर चुके हैं हिमंता

    गौरतलब है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा चुनाव के लिए जलुकबाड़ी विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया। सरमा ने नामांकन के दौरान कहा कि जनता का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और उसी के सहारे वे आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने नामांकन से पहले खानापारा वेटरनरी मैदान से कामरूप (मेट्रो) के उपायुक्त कार्यालय तक एक विशाल रैली निकाली। इस रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग शामिल हुए। पूरे रास्ते में समर्थकों का उत्साह देखने लायक था और जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। इस मौके पर उन्होंने लोगों से समर्थन और आशीर्वाद की अपील भी की।

    सरमा ने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में कहाकि जलुकबाड़ी की जनता उनके परिवार की तरह है और उनके आशीर्वाद से ही वह नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। उन्होंने अपनी मां के आशीर्वाद का जिक्र करते हुए कहा कि व्यस्तता के कारण भले ही वे उनके साथ अधिक समय नहीं बिता पाते, लेकिन उनकी मां का आशीर्वाद उन्हें लगातार असम की सेवा के लिए प्रेरित करता है। सरमा ने धार्मिक आस्था का भी उल्लेख किया और कहाकि मां कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के आशीर्वाद से उन्होंने यह नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने इसे अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक यात्रा बताते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

  • West-Bangal: SIR प्रक्रिया को गति देने के लिए 150 बाहरी जजों की तैनाती… लेकिन भाषा बनी बड़ी चुनौती

    West-Bangal: SIR प्रक्रिया को गति देने के लिए 150 बाहरी जजों की तैनाती… लेकिन भाषा बनी बड़ी चुनौती


    कोलकाता।
    प. बंगाल (West-Bangal) में एसआईआर प्रक्रिया (SIR Process) को रफ्तार देने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर दूसरे राज्यों से 150 से अधिक न्यायाधीशों की तैनाती की गई है। जमीनी स्तर पर इन बाहरी जजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है बांग्ला भाषा को समझना। कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) के पूर्व न्यायाधीशों को भी इस प्रक्रिया में जोड़ा गया है। ये सभी दावों-आपत्तियों के निपटारे, दस्तावेजों के सत्यापन और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में लगे हैं।

    इतनी बड़ी न्यायिक तैनाती के बावजूद कामकाज में सबसे बड़ी अड़चन भाषा बन रही है। एसआईआर के तहत आने वाले अधिकांश फॉर्म, दस्तावेज व गवाहों के बयान बांग्ला में हैं, जिन्हें दूसरे राज्यों से आए न्यायिक अधिकारी सीधे तौर पर समझ नहीं पा रहे हैं। बाहरी राज्य से आए एक न्यायाधीश ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि रोज सैकड़ों फाइलें देखनी होती हैं, जो बांग्ला में हैं। ऐसे में हर केस को समझने के लिए अनुवाद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, काम प्रभावित न हो, इसके लिए कई न्यायाधीशों को ट्रांसलेटर खुद रखने पड़ रहे हैं।


    फाइलें निपटाने में देरी संभव

    न्यायाधीशों के सामने भाषा की चुनौती का सीधा असर प्रक्रिया पर पड़ सकता है। बांग्ला न समझ पाने के कारण फाइलों के अनुवाद पर निर्भरता बढ़ रही है, जिससे मामलों के निपटारे में देरी संभव है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट सोमवार को जारी होगी। इसमें उन वोटरों के नाम शामिल होंगे, जिनके दावे सही पाए गए हैं। फिर अपील और ट्रिब्यूनल प्रक्रिया से अंतिम सूची तैयार होगी।


    एसआईआर की यह स्थिति

    कुल दावे-आपत्तियां : 60 लाख से अधिक, 27 लाख मामले अब तक निपटाए गए।
    हटाए गए नाम : करीब 63 लाख से ज्यादा, 30 लाख मामले पुनर्विचार/विचाराधीन…बड़े पैमाने पर जोड़-घटाव जारी है।