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  • उत्तराखंड में हाई कोर्ट और जिला न्यायालय को मिली बम से उड़ाने की धमकी, मचा हडकंप

    उत्तराखंड में हाई कोर्ट और जिला न्यायालय को मिली बम से उड़ाने की धमकी, मचा हडकंप


    नैनीताल।
    पिछले चार दिनों से उत्तराखंड (Uttarakhand) में अदालतों ( Courts) को बम से उड़ाने की धमकी (Bomb Threat) का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को पुलिस विभाग में तब हड़कंप मच गया, जब हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) को ही बम लगाकर उड़ाने की धमकी मिली। अज्ञात मेल में जिला न्यायालय को भी धमकी मिली है। आनन-फानन में पुलिस विभाग ने सभी गेटों पर मेटल डिटेक्टर लगा लिए हैं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है।

    मिली जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार सुबह एक बार फिर अज्ञात ई-मेल आईडी से धमकी भरा संदेश मिलने से न्यायिक व्यवस्था में हड़कंप मच गया। इस बार मामला और गंभीर तब हो गया, जब जिला न्यायालय के साथ-साथ उच्च न्यायालय को भी धमकी भरा मेल प्राप्त हुआ।


    ड्रोन बम से हाई कोर्ट उड़ाने की धमकी

    ई-मेल में इस बार ड्रोन के माध्यम से न्यायालय परिसर को उड़ाने की बात कही गई है। धमकी मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। आनन-फानन में जिला न्यायालय के जज चैंबर और कोर्ट परिसर को खाली कराया गया। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। जिला न्यायालय के सभी प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं। पुलिस बल की संख्या बढ़ा दी गई है और परिसर में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सघन तलाशी ली जा रही है। बाहरी लोगों से पूछताछ भी की जा रही है।

    पुलिस डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्ता लगातार परिसर की गहन जांच कर रहा है। गुरुवार को जिला जज प्रशांत जोशी ने कोर्ट परिसर का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इधर, हाईकोर्ट में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है| एसपी क्राइम नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्रा ने बताया कि बम डिस्पोजल स्क्वाड से चेकिंग कराई जा रही है।


    चार दिनों से लगातार धमकी

    गौरतलब है कि पिछले चार दिनों से इस तरह की धमकी भरे ई-मेल आ रहे हैं। इससे पहले नैनीताल, उत्तरकाशी, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिला न्यायालयों को भी धमकी भरे ई-मेल मिले थे, हालांकि कहीं भी तलाशी में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

  • मौसम का डबल रंग: नोएडा-गाजियाबाद में बादल बरसेंगे, पूर्वांचल में साफ आसमान

    मौसम का डबल रंग: नोएडा-गाजियाबाद में बादल बरसेंगे, पूर्वांचल में साफ आसमान


    नई दिल्ली। 19 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश में आज मौसम का मिजाज साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। India Meteorological Department (IMD) के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बादल, हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना है, जबकि लखनऊ और प्रयागराज समेत पूर्वी हिस्सों में दिन चढ़ने के साथ आसमान साफ रहेगा और अच्छी धूप निकलेगी।

    नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर में सुबह हल्की धुंध देखने को मिल सकती है। दोपहर बाद कुछ इलाकों में बूंदाबांदी या हल्की बारिश के आसार हैं। 30–40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने गरज-चमक के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है। पश्चिमी यूपी में अधिकतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 11 से 16 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है।

    वहीं राजधानी लखनऊ और प्रयागराज में मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहेगा। सुबह हल्की ठंड और नमी के कारण हल्का कोहरा रह सकता है, लेकिन दिन में तेज धूप निकलने से मौसम सुहावना हो जाएगा। इन शहरों में अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 13 से 15 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। दिन के समय ठंड लगभग समाप्त हो चुकी है, हालांकि सुबह और रात में हल्की सिहरन बनी रह सकती है।

    आने वाले दो दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी के संकेत हैं। 20 फरवरी से पारा 30 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच सकता है, जिससे हल्की गर्मी का एहसास शुरू होगा। हालांकि पश्चिमी यूपी में 20 फरवरी को भी हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों की सलाह: सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़े पहनें, गरज-चमक के दौरान पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों, और यात्रा के दौरान सावधानी बरतें। कुल मिलाकर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम बदलता हुआ नजर आएगा, जबकि पूर्वी हिस्सों में लोगों को धूप और सुहावने दिन का आनंद मिलेगा।

  • असम राजनीति: गौरव गोगोई ने हिमंता बिस्वा सरमा को कहा ‘असम का जिन्ना’, भूपेन बोरा को कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता बताने पर कसा तंज

    असम राजनीति: गौरव गोगोई ने हिमंता बिस्वा सरमा को कहा ‘असम का जिन्ना’, भूपेन बोरा को कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता बताने पर कसा तंज



    नई दिल्ली। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने पूर्व कांग्रेस नेता भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने पर प्रतिक्रिया दी है। गौरव गोगोई ने कहा कि बीजेपी में शामिल होने वाले लोग अपने राजनीतिक सफर में महत्वहीन हो चुके हैं और भूपेन बोरा का भी यही हाल होगा। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें नेताओं को “हिंदू प्रमाण पत्र” देना बंद कर देना चाहिए और साथ ही कहा कि सरमा असम के जिन्ना हैं।

    गौरव गोगोई ने कहा कि बीजेपी पुराने कांग्रेस नेताओं से भरी हुई है, जो राज्य में कांग्रेस के 15 साल के शासनकाल में सबसे भ्रष्ट माने जाते थे। उन्होंने कांग्रेस को समंदर के समान बताते हुए कहा कि पार्टी हमारे पूर्वजों के अस्तित्व से बहुत पहले से मौजूद है और हम सब उसमें पानी की बूंदें मात्र हैं।

    भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा देने का कारण बताया कि उन्हें पार्टी में अपनी कोई जरूरत महसूस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें एहसास हुआ कि बीजेपी विरोधी वोट को एकजुट करने की जिम्मेदारी थी और अकेले कांग्रेस इसके लिए सक्षम नहीं थी। भूपेन बोरा ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है, बल्कि धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन गठबंधन वार्ता के मुख्य कर्ताधर्ता हैं।

    भूपेन बोरा ने यह भी कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनके इस्तीफे के बारे में एक शब्द तक नहीं कहा, जबकि उन्होंने पार्टी को आगे बढ़ाने में योगदान दिया था। गौरव गोगोई ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला असली कांग्रेस और पुरानी कांग्रेस के बीच होगा और बीजेपी में शामिल पुराने नेता चुनावी तौर पर कोई असर नहीं डालेंगे।

  • J&K: पहलगाम हमले के बाद बंद किए गए 14 पर्यटन स्थल फिर खुलेंगे, LG ने दिए आदेश

    J&K: पहलगाम हमले के बाद बंद किए गए 14 पर्यटन स्थल फिर खुलेंगे, LG ने दिए आदेश


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Lieutenant Governor Manoj Sinha) ने सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश के उन 14 पर्यटन स्थलों (14 Tourist Destinations) को फिर से खोलने का आदेश दिया, जिन्हें पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद बंद कर दिया गया था। उपराज्यपाल प्रशासन ने पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू कश्मीर में लगभग 50 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया था। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे।

    उपराज्यपाल कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘सुरक्षा की गहन समीक्षा और विचार-विमर्श के बाद, मैंने कश्मीर और जम्मू संभागों में एहतियाती तौर पर अस्थायी रूप से बंद किये गए और भी पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने का आदेश दिया है।’ इसके साथ ही, अस्थायी रूप से बंद किए जाने के बाद फिर से खोले गए पर्यटन स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 26 हो गई है।

    इससे पहले, पिछले साल 26 सितंबर को उपराज्यपाल ने 12 पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने का आदेश दिया था। सिन्हा ने कहा, ‘कश्मीर संभाग के 11 पर्यटन स्थलों- कोकरनाग में यूसमर्ग, दूधपथरी, दांडीपुरा पार्क, शोपियां में पीर की गली, दुबजान और पदपावन, श्रीनगर में अस्तनपोरा, ट्यूलिप गार्डन, थजवास ग्लेशियर, गांदेरबल में हंग पार्क और बारामुला में वुलर और वाटलाब – को तत्काल फिर से खोला जाएगा।’

    उन्होंने कहा कि जम्मू संभाग के तीन पर्यटन स्थल – रियासी में देवी पिंडी, रामबन में महू मंगत और किश्तवार में मुगल मैदान – भी तत्काल प्रभाव से फिर से खोले जाएंगे। सिन्हा ने कहा, ‘कश्मीर संभाग में तीन स्थल- गुरेज, अथवाटू और बंगस- और जम्मू संभाग में एक स्थल – रामबन में रामकुंड – बर्फ हटने के बाद फिर से खोल दिए जाएंगे।’


    23 फरवरी से शुरू हो रहे ‘खेलो इंडी शीतकालीन खेल’

    जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में 23 फरवरी से शुरू होने वाले ‘खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों’ (केआईडब्ल्यूजी) में 700 से अधिक खिलाड़ी और अधिकारी भाग लेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। स्की सहायक मोहम्मद रफीक चेची ने कहा, “इस सर्दी में अच्छी बर्फबारी हुई है, जिससे ‘स्कीइंग’ और ‘स्लेजिंग’ गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों का यहां आयोजन हो रहा है और इससे हमें अपनी आजीविका कमाने में मदद मिलेगी।”

    इस वर्ष ‘बर्फ स्पर्धाओं’ के लिए केआईडब्ल्यूजी का पहला चरण लद्दाख के लेह में 20 से 26 जनवरी तक आयोजित किया गया था, जबकि ‘हिम स्पर्धाओं’ के लिए खेलों का दूसरा चरण 23 से 26 फरवरी तक गुलमर्ग में आयोजित किया जाएगा। युवा सेवाओं और खेल विभाग द्वारा जारी एक वीडियो में चेची ने कहा, “गुलमर्ग तैयार है, आपका इंतजार है।”

  • Kerala: 10 माह की बच्ची ने 5 लोगों को दी नई जिंदगी… हादसे में मौत के बाद पैरेंट्स ने किया अंगदान

    Kerala: 10 माह की बच्ची ने 5 लोगों को दी नई जिंदगी… हादसे में मौत के बाद पैरेंट्स ने किया अंगदान


    तिरुवनंतपुरम।
    केरल (Kerala) से एक बेहद भावुक करने वाली कहानी सामने आई है। यहां पर हादसे में 10 महीने की एक बच्ची (10 Months Girl) बुरी तरह से घायल हो गई। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत के बाद उसके पैरेंट्स ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसके मुरीद प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) समेत तमाम सेलेब्स भी हो गए हैं। बच्ची के माता-पिता ने उसका अंगदान करने का फैसला किया। उनके इस फैसले की बदौलत पांच लोगों को नई जिंदगी मिली है। इस बच्ची का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी मौजूद रहे।


    कौन थी आलिन शेरिन

    जिस बच्ची का अंगदान किया गया, उसका नाम आलिन शेरिन है। उसके माता-पिता का नाम अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन है। यह लोग केरल के पाथनमथिट्टा जिले के रहने वाले हैं। पांच फरवरी को आलिन अपनी मां और दादा-दादी के साथ यात्रा कर रही थी। इसी दौरान गलत दिशा से आ रही कार ने उनके वाहन में टक्कर मार दी। इस हादसे में आलिन को बेहद गंभीर चोटें आईं। वहीं, उसकी मां और दादा-दादी भी गंभीर रूप से घायल हैं। शुरुआत में आलिन को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए कोच्चि ले जाया गया। बहुत कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी और डॉक्टरों ने 12 फरवरी को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।


    बताया गया ग्रीन कॉरिडोर

    महज दस महीने की बेटी को खोकर आलिन के माता-पिता गहरे दुख में थे। लेकिन इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जो नजीर बन गया। दोनों ने तय किया कि वह अपनी बच्ची का अंगदान करेंगे। इसके बाद हेल्थकेयर सिस्टम, पुलिस और आम लोगों ने गजब का तालमेल दिखाया। चूंकि सिविल एविएशन रूल्स के चलते रात में हेलिकॉप्टर ट्रांसफर संभव नहीं था। इसलिए केरल सरकार ने एंबुलेंस के जरिए अंगों को भेजने का फैसला किया। आनन-फानन में कोच्चि से तिरुवनंतपुरम के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।


    किसे दिए गए अंग

    इसके लिए कड़े ट्रैफिक प्रतिबंध लागू किए गए। पूरे रास्ते में मैनुअल सिग्नलिंग की व्यवस्था की गई। इसके जरिए 230 किलोमीटर की दूरी मात्र 3 घंटे और 20 मिनट में तय हुई। इसके बाद सुरक्षित तरीके सभी अंग गंतव्य तक पहुंचे। यहां पर एक निजी अस्पताल में छह साल की बच्ची को लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। वहीं, किडनी सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक 10 साल के बच्चे को लगाया गया। हार्ट वॉल्व तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज कैंपस को ट्रांसफर किया गया, जबकि कॉर्निया एक निजी अस्पताल के आई बैंक को डोनेट कर दिया गया।


    सबने की तारीफ

    महज 10 महीने की उम्र में बच्ची की दु:खद मौत और उसके माता-पिता द्वारा अंगदान के फैसले की केरल समेत तमाम जगहों पर तारीफ हुई। केरल के राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर ने कहाकि वह बच्ची के माता-पिता के इस फैसले बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिससे दूसरों को जीवन मिला है। अभिनेता कमल हासन ने भी पैरेंट्स को संबोधित एक भावुक संदेश लिखा। इस संदेश में उन्होंने लिखा कि बेबी आलिन पांच बच्चों को जिंदगी देकर गई है। अभिनेता मोहनलाल ने भी आलिन को लिटिल एंजेल कहा।

  • J&K में ‘म्यूल खातों’ के बढ़ते नेटवर्क का भंडाफोड़… राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में धन के दुरुपयोग की आशंका

    J&K में ‘म्यूल खातों’ के बढ़ते नेटवर्क का भंडाफोड़… राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में धन के दुरुपयोग की आशंका


    नई दिल्ली।
    सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में ‘म्यूल खातों’ (‘Mule Accounts’) के लगातार बढ़ते नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों को आशंका है कि इन खातों के माध्यम से भेजे गए धन का उपयोग अलगाववादी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों (Separatist and Anti-National Activities) के लिए किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि तीन साल में इस क्षेत्र में 8,000 से अधिक संचालित ‘म्यूल खातों’ की पहचान की गई है। साथ ही इनसे लेन-देन रोक दिया गया है, जिससे धन शोधन के एक जटिल नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उन्होंने इन खातों को साइबर अपराध श्रृंखला में ‘सबसे कमजोर, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी’ बताया। क्योंकि इन खातों के बिना हेर-फेर किए गए पैसे का क्रिप्टोकरेंसी में बदलना और इसका पता लगाना असंभव होगा।


    एजेंसियों को भी हिदायत

    अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों को बैंकों के साथ परामर्श करने के लिए कहा है। ताकि ‘म्यूल खातों’ की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाया जा सके और ऐसी वित्तीय धोखाधड़ी को सुविधाजनक बनाने वाले बिचौलियों की पहचान की जा सके। अधिकारियों को संदेह है कि एनआईए द्वारा 2017 में जम्मू-कश्मीर में अवैध धन के प्रवाह पर की गई कार्रवाई के बाद, राष्ट्रविरोधी तत्व ‘डिजिटल हवाला’ के एक नए मॉडल की ओर रुख कर सकते हैं, जिसमें बिचौलियों द्वारा प्राप्त राशि का उपयोग देश के खिलाफ गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।


    ऐसे करता है काम

    आमतौर पर, ‘म्यूल खाते’ उपलब्ध कराने वाला बिचौलिया व्यक्ति न तो पीड़ितों से संपर्क करता है और न ही फर्जी लिंक भेजता है। इसके बजाय, उनकी भूमिका गुप्त लेकिन महत्वपूर्ण होती है। वे ऐसे खातों की निरंतर आपूर्ति की व्यवस्था और रख-रखाव करते हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराधी अपनी पहचान उजागर किए बिना ठगी गए पैसे को प्राप्त पाने और ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। ये ‘म्यूल खाते’ अक्सर आम लोगों के होते हैं, जिन्हें कमीशन और न्यूनतम जोखिम के आश्वासन का लालच दिया जाता है। उन्हें यह कहकर अपने बैंक खातों का पूरा नियंत्रण, जिसमें नेट बैंकिंग विवरण भी शामिल हैं, सौंपने के लिए राजी किया जाता है कि इन खातों का उपयोग थोड़े समय के लिए किया जाएगा।


    बड़ी रकम की लेन-देन

    अक्सर एक ही साइबर अपराधी को एक समय में 10 से 30 म्यूल खाते उपलब्ध कराए जाते हैं। इतना ही नहीं कई मामलों में, बैंक खाते फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले जाते हैं, ताकि एक ही दिन में 40 लाख रुपए जैसी बड़ी रकम का लेन-देन बिना किसी संदेह के करना संभव हो जाता है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों का मानना है कि ‘म्यूल खाते’ उपलब्ध कराने वाले बिचौलिये सीधे तौर पर पीड़ित को शिकार नहीं बनाते, लेकिन कमीशन लेकर धन शोधन में अहम भूमिका निभाते हैं, जिसमें धोखाधड़ी से प्राप्त धन को तेजी से कई खातों में स्थानांतरित किया जाना और पकड़े जाने से बचने के लिए इसे छोटे-छोटे लेन-देन में विभाजित करना शामिल है।

  • ओडिशा में रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला… पिता ने ढाई साल के बेटे को 1 लाख रुपये में बेचा

    ओडिशा में रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला… पिता ने ढाई साल के बेटे को 1 लाख रुपये में बेचा


    भुवनेश्वर।
    ओडिशा पुलिस (Odisha Police) ने शनिवार को ढाई साल के एक बच्चे को बचाया, जिसे उसके पिता ने एक व्यक्ति को 1 लाख रुपये में बेच दिया था। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि आरोपी पिता और खरीदने वाले व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। नीलगिरी अधिसूचित क्षेत्र परिषद (Nilgiri Notified Area Council) के अंतर्गत बारिसाही गांव की यह घटना तब सामने आई, जब एक वायरल वीडियो (Viral Video) में पिता को संभावित खरीदार के साथ सौदेबाजी करते हुए दिखाया गया है। इसके बाद एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने नीलगिरी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

    वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। नीलगिरी के उपमंडल पुलिस अधिकारी प्रमोद कुमार मलिक ने कहा, ‘बच्चे को चिमिनीभाटी क्षेत्र से बचाया गया और उसे बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। आगे की जांच जारी है।’ उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने पिता की पहचान पेशे से राजमिस्त्री राकेश कुमार बेहेरा उर्फ ​​कुआ के रूप में की है जिसने कथित तौर पर पहली किस्त के रूप में 50,000 रुपये प्राप्त किए थे।


    आरोपी ने क्या कहा

    राकेश कुमार बेहेरा ने आर्थिक तंगी को इस कदम का कारण बताया। उसने पत्रकारों को बताया, ‘हमारे चार बच्चे हैं और हमें उनका पालन-पोषण करने में कठिनाई हो रही है। एक परिचित व्यक्ति ने खरीदार का इंतजाम किया और मैंने बच्चे को उसे सौंप दिया।’ पुलिस सूत्रों के अनुसार, बेहेरा ने दो बार शादी की थी और जिस बच्चे को कथित तौर पर बेचा गया था वह उससे अलग रह रही उसकी दूसरी पत्नी का है।

    ओडिशा के गंजाम जिले में शनिवार को चोरी के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि यह घटना जिले के भंजनगर पुलिस थाना क्षेत्र के सरदुला गांव में हुई। मृतक की पहचान 37 वर्षीय बनधर प्रधान के रूप में हुई है, जो कंधमाल जिले के जी. उदयगिरि पुलिस थाना क्षेत्र के कुरुमिंगिया गांव का निवासी था। अपर पुलिस अधीक्षक रंजन कुमार डे ने बताया, ‘प्रधान को शनिवार तड़के बचाया गया और भंजनगर के उप-मंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।’ प्रधान और दो अन्य लोग सरदुला निवासी सुशांत गौड़ा के बंद घर में लूटपाट में शामिल थे। उसने बताया कि भागते समय प्रधान गिर गया और उसका पैर टूट गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसकी बिजली के खंभे से बांधकर पिटाई की।

  • अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद किया बड़ा ऐलान, बनाएंगे नई राजनीतिक पार्टी

    अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद किया बड़ा ऐलान, बनाएंगे नई राजनीतिक पार्टी

    नई दिल्ली। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने अब राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखने का बड़ा ऐलान किया है। 13 फरवरी 2026 को विजय एकादशी के शुभ अवसर पर वृंदावन में बांके बिहारी जी के दर्शन के बाद उन्होंने घोषणा की कि सनातनी समाज के साथ मिलकर वे नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। उनका कहना है कि यह पार्टी वर्तमान व्यवस्था से अलग अपनी पहचान के साथ काम करेगी।

    अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि उनका उद्देश्य सनातनी समाज को राजनीतिक रूप से एक मजबूत विकल्प देना है। उन्होंने कहा, “जिस तरह सम्मान के साथ अपना दल, निषाद पार्टी और राजभर पार्टी काम कर रही हैं, उसी तरह हम अपनी सनातनी पहचान के साथ राजनीतिक रूप से सक्रिय होंगे। इसके लिए हमें गठबंधन करना पड़े या अकेले चुनाव लड़ना पड़े, हम इसके लिए तैयार हैं।”

    उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही वे भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष नई पार्टी के लिए आवेदन करेंगे। उन्होंने सनातनी समाज के लोगों का आभार जताया और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    अलंकार अग्निहोत्री का यह कदम उनके इस्तीफे के बाद लगातार चर्चा में रहा। बीते महीने उन्होंने यूजीसी एक्ट और अन्य मुद्दों पर विरोध जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि उनका इस्तीफा तत्काल स्वीकार नहीं किया गया और उन्हें सस्पेंड कर जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी।

    इस ऐलान के साथ ही अलंकार अग्निहोत्री राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय होने की ओर बढ़ चुके हैं और उनकी नई पार्टी आगामी चुनावों में सनातनी समाज के लिए राजनीतिक विकल्प के रूप में सामने आ सकती है।

  • महाराष्ट्रः मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके

    महाराष्ट्रः मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में पंचायत और नगर निकाय चुनाव (Panchayat and Municipal Elections) अब खत्म हो चुके हैं। चुनावों के खत्म होने के बाद ठाकरे बंधुओं की पार्टियों के बीच में एक बार फिर से तनाव देखने को मिल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों ने महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए। हालांकि, उद्धव गुट (Uddhav Group) और भाजपा की तरफ से इन आरोपों को खारिज कर दिया गया है।

    महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच उस समय से तनातनी चल रही है जब कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद, शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के समर्थन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी महापौर चुन लिया गया।

    राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की मुंबई इकाई के अध्यक्ष देशपांडे ने उद्धव गुट को आड़े हाथों लिया। कल्याण डोंबिवली स्थानीय निकाय में मनसे नेताओं द्वारा शिवसेना शिंदे गुट का समर्थन करने पर संजय राउत द्वारा की गई आलोचना का जिक्र कते हुए उन्होंने कहा कि जब शिवसेना (उबाठा) भाजपा का समर्थन करती है तो उसे सही आचरण माना जाता है लेकिन जब मनसे ऐसा करती है तो उसे गलत ठहराया जाता है। देशपांडे ने दावा किया, “चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के प्रत्येक पार्षद को एक करोड़ रुपये मिले, इसके अलावा अन्य प्रस्ताव भी दिए गए। एक निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए।”

    मुंबई में हुए निकाय चुनाव में शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था लेकिन वे भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर नियंत्रण हासिल करने से नहीं रोक सके। शिवसेना (उबाठा) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे पार्षदों को धन मिलने के आरोप का प्रमाण पेश कर दें तो वह इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर शिवसेना (उबाठा) नेतृत्व का अपमान करने का भी आरोप लगाया।

    देशपांडे ने संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के दौरान क्या उन्हें अंधेरे में रखा गया था या उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा और यह शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है। इसी बीच, संजय राउत ने बृहस्पतिवार को मुंबई में मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की। राउत ने संवाददाताओं से कहा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है और उसे स्थानीय शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के साथ अधिक गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी।

  • दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि पूजा और हिंदू रिवाज रोकने की गुहार …SC ने किया सुनवाई से इनकार

    दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि पूजा और हिंदू रिवाज रोकने की गुहार …SC ने किया सुनवाई से इनकार


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार (12 फरवरी) को कर्नाटक (Karnataka) स्थित अलंद लाडले मशाइक दरगाह (Aland Ladle Mashaikh Dargah) प्रबंधन की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें जिसमें दरगाह परिसर में हिंदू महाशिवरात्रि पूजा (Mahashivratri Puja) और दूसरे हिंदू रीति-रिवाजों पर रोक लगाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।

    दरगाह मैनेजमेंट ने भारत के संविधान के आर्टिकल 32 के तहत अर्जी दी थी, जो उन पार्टियों को राहत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की इजाज़त देता है जिनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। दरगाह प्रबंधन याचिका में दावा किया था कि दरगाह के धार्मिक स्वरूप को बदलने के लिए हर साल रणनीतिक तरीके से पूजा की अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप कर दरगाह के मूल धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की भी मांग की थी।

    हालांकि, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की थी कि हर मामला सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट लाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट प्रभावी नहीं हैं। जब कल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के सामने यह मामला आया, तो इस बेंच ने यह भी सवाल उठाया था कि पहले हाई कोर्ट जाने के बजाय आर्टिकल 32 की पिटीशन क्यों फाइल की गई।


    क्या है विवाद?

    यह विवाद उस दरगाह से जुड़ा है जो 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित मानी जाती है। दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नाम से पहचानी जाने वाली एक संरचना भी मौजूद बताई जाती है। ऐतिहासिक रूप से इस स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय पूजा-अर्चना करते रहे हैं, हालांकि 2022 में यहां पूजा अधिकार को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी।


    पिछले साल हाई कोर्ट ने दी थी पूजा की इजाजत

    गौरतलब है कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2025 में 15 हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर पूजा की अनुमति दी थी, जो भारी सुरक्षा के बीच सम्पन्न हुई थी। इससे पहले भी कोर्ट के आदेश पर सीमित संख्या में पूजा कराई गई थी। दरगाह प्रबंधन का कहना था कि बार-बार अंतरिम आदेश लेकर धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने की कोशिश की जा रही है, जो Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 के खिलाफ हो सकता है। इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखना जरूरी माना गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई हाई कोर्ट में होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला धार्मिक अधिकार, ऐतिहासिक दावों और कानून के संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।