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  • MP: इंदौर में दूषित पानी से एक और मरीज की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 31 हुई

    MP: इंदौर में दूषित पानी से एक और मरीज की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 31 हुई


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर शहर (​​Indore city) के भागीरथपुरा क्षेत्र (Bhagirathpura area) में दूषित पानी (Contaminated Water) पीने से फैली बीमारी के कारण शुक्रवार को एक और मरीज की मौत हो गई। इसके बाद क्षेत्र में दूषित पानी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।

    मृतक की पहचान 72 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, एकनाथ सूर्यवंशी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद 29 दिसंबर 2025 को पहले शैल्बी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उन्हें 3 जनवरी 2026 को बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। यहां 4 जनवरी को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया। उनका इलाज करीब 30 दिनों तक चला, जिसमें वे 25 दिन से अधिक समय तक वेंटिलेटर पर रहे। गुरुवार शाम को परिजन अपनी सहमति से उन्हें डिस्चार्ज कराकर घर ले गए थे, जहां शुक्रवार को उनकी मौत हो गई।

    डॉक्टरों के मुताबिक एकनाथ सूर्यवंशी की दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं, लिवर खराब था और बीमारी का असर हार्ट और ब्रेन तक पहुंच गया था। दूषित पानी के कारण ज्यादातर मरीजों में मल्टी ऑर्गन फेल्योर की स्थिति बनी।

    इंदौर में हुई इस मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा 31 पहुंच गया है। मृतकों में उर्मिला यादव (69), नंदलाल पाल (75), उमा कोरी (31), मंजूला (74), ताराबाई कोरी (60), गोमती रावत (50), सीमा प्रजापत (50) जीवन लाल बरेडे (80), अव्यान साहू (5 माह), शंकर भाया (70), संतोष बिगोलिया (72), अरविंद लिखर (40), गीताबाई (60), अशोक लाल पंवार (70), ओमप्रकाश शर्मा (69), हरकुंवर बाई (75), रामकली, सुमित्रा बाई (50), श्रवण खुपराव (81), हीरालाल (65), सुनीता वर्मा (49), कमला बाई (59), भगवानदास (64), शुभद्राबाई (78), हेमंत गायकवाड़ (51), विद्या बाई (82), बद्री प्रसाद (63), राजाराम बौरासी (75), खूबचंद (63), लक्ष्मी रजक (62) और एकनाथ सूर्यवंशी (75) शामिल हैं।

    इधर, भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में अब तक 450 से ज्यादा मरीज इलाज के बाद डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। फिलहाल चार मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से तीन बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में और एक अरविंदो हॉस्पिटल में इलाजरत है। इलाके में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब भी 24 घंटे संचालित है और दो एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। फिलहाल डायरिया के एक-दो हल्के मामले ही सामने आ रहे हैं, लेकिन हालात सुधरने के बावजूद क्षेत्र के रहवासी अब भी सहमे हुए हैं।

  • प्रेम बाईसा की मौत:सनातनी साध्वी को परेशान करने की साजिश, BJP विधायक का CBI जांच का समर्थन, राजनीति और आस्था दोनों में उठे सवाल

    प्रेम बाईसा की मौत:सनातनी साध्वी को परेशान करने की साजिश, BJP विधायक का CBI जांच का समर्थन, राजनीति और आस्था दोनों में उठे सवाल


    नई दिल्ली। कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हलचल मचा दी है। अब इस मामले में बीजेपी विधायक स्वामी बालमुकुंद आचार्य ने भी सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया है और कहा है कि भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह मांग जायज़ है।

    बालमुकुंद आचार्य का बयान
    जयपुर की हवा महल सीट से बीजेपी विधायक स्वामी बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि वे आज ही राज्य के गृह राज्य मंत्री को पत्र सौंपेंगे और जांच की मांग को औपचारिक रूप देंगे।

    बालमुकुंद आचार्य ने यह भी कहा कि कुछ महीने पहले साध्वी के वीडियो और ब्लैकमेलिंग के मामले को भी इस जांच से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह पता लगाना जरूरी है कि सनातनी साध्वी को परेशान करने के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं थी।

    हालांकि  उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में राजस्थान पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। लेकिन अगर परिवार और भक्त संतुष्ट नहीं हैं, तो सीबीआई जांच पर विचार किया जाना चाहिए।

    राज्य के गृह राज्य मंत्री का बयान
    राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने जोधपुर में कहा कि साध्वी प्रेम बाईसा सनातन धर्म की प्रचारक थीं। उनकी मौत के बारे में कई तरह की बातें सामने आ रही हैं।
    परिवार का कहना है कि गलत इंजेक्शन लगाया गया, जबकि अस्पताल का दावा है कि वह मृत अवस्था में लाई गईं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर चर्चाएँ तेज हैं।

    उन्होंने कहा कि पुलिस सभी बिंदुओं की जांच कर रही है और ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ किया जाएगा।
    उन्होंने यह भी कहा कि जांच निष्पक्ष, स्पष्ट और बिना किसी दबाव के होगी। परिवार की सहमति से पोस्टमार्टम भी किया गया है, लेकिन रिपोर्ट अभी उनके पास नहीं आई है।

    मामले की संवेदनशीलता
    साध्वी प्रेम बाईसा के भक्तों की आस्था उनके प्रति होना स्वाभाविक है। ऐसे में इस मामले में स्पष्टता और निष्पक्षता की मांग बढ़ रही हैपुलिस जांच के बाद ही इस मामले का असली सच सामने आएगा।

  • गाय का मांस बेचकर आप राम राज्य की स्थापना करेंगे, शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम

    गाय का मांस बेचकर आप राम राज्य की स्थापना करेंगे, शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम


    नई दिल्ली। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर सरकार गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं करती है तो उसे छद्म हिंदू घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने गौ माता के मांस को भैंस का मांस बताकर बचाव किया, जो हिंदुत्व के खिलाफ है।

    शंकराचार्य ने कहा कि अब सरकार को हिंदू होने का प्रमाण देना होगा और वे 40 दिन में यह प्रमाण देने को कह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “गाय का मांस बेचकर आप डॉलर से राम राज्य की स्थापना करेंगे,” और यदि 10 मार्च तक गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं किया गया तो वे दिल्ली नहीं जाएंगे बल्कि लखनऊ में संत महंत आचार्य इकट्ठा करके आगे का निर्णय लेंगे।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि हिंदू होने की पहली शर्त गो रक्षा है और सरकार को बताना होगा कि उन्होंने गौ सेवा के लिए क्या किया। उन्होंने यूपी सरकार को महाराष्ट्र और नेपाल से सीखने की नसीहत दी और कहा कि भारत से गौ मांस का निर्यात अधिकतर उत्तर प्रदेश से होता है।

    उन्होंने कहा कि 24 घंटे में उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण माँगा गया था, जिसे उन्होंने जवाब दिया और अब योगी सरकार को 40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण देना होगा। शंकराचार्य ने साफ कहा कि अगर सरकार यह प्रमाण नहीं दे पाती तो उसे “कालनेमि”, “ढोंगी” और “छद्म हिंदू” कहा जाएगा।

  • वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के पास शुरू होगी मल्टीलेवल कार पार्किंग, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत

    वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के पास शुरू होगी मल्टीलेवल कार पार्किंग, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत


    नई दिल्ली। वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। मंदिर के पास लंबे समय से पार्किंग की समस्या बनी हुई थी, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। भीड़भाड़ वाले समय में मंदिर के आसपास वाहन खड़े करने की जगह न मिल पाने के कारण स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की ओर से मल्टीलेवल कार पार्किंग निर्माण की योजना बनाई गई थी।
    इस पार्किंग को तैयार कर लिया गया है, लेकिन रास्ते को लेकर कुछ विवाद चल रहा था।

    हाल ही में नगर निगम के अधिकारियों और प्रशासन ने इस विवाद को सुलझा लिया है। नगर आयुक्त ने स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पार्किंग को जल्द से जल्द चालू किया जाए। उन्होंने कहा कि यह पार्किंग श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा साबित होगी और मंदिर आने वाले लोगों को पार्किंग की समस्या से निजात मिलेगी।

    मल्टीलेवल कार पार्किंग से न केवल वाहन सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि मंदिर के आसपास ट्रैफिक जाम और भीड़-भाड़ को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पार्किंग का संचालन शुरू होने के बाद, श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए अधिक आरामदायक और सुरक्षित अनुभव मिलेगा। इससे पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि वृंदावन देशभर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

    नगर निगम ने बताया कि पार्किंग की क्षमता पर्याप्त है और इसे आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुसार बनाया गया है। पार्किंग में सीसीटीवी कैमरा, सुरक्षा गार्ड और व्यवस्थित वाहन प्रवेश एवं निकास व्यवस्था भी की गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि श्रद्धालुओं के वाहन सुरक्षित रहें और उन्हें पार्किंग की वजह से किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने भी पार्किंग के निर्माण का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे मंदिर के आसपास की सड़कें जाम नहीं होंगी और क्षेत्र में यातायात सुचारू रहेगा। साथ ही, यह पार्किंग आसपास के व्यवसाय और दुकानदारी के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर आधुनिक पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर हो और भीड़-भाड़ और अव्यवस्था की समस्या से छुटकारा मिल सके। बांकेबिहारी मंदिर जैसी प्रमुख धार्मिक जगहों पर यह कदम काफी सकारात्मक माना जा रहा है।

    इस पार्किंग के चालू होने से न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि मंदिर आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए भी यह राहत का संकेत है। नगर निगम ने आश्वासन दिया है कि पार्किंग के संचालन और प्रबंधन को प्रभावी ढंग से किया जाएगा और समय-समय पर इसमें सुधार भी किया जाएगा।

    इस प्रकार, वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं को अब बड़ी राहत मिलने वाली है। पार्किंग के चालू होने से मंदिर दर्शन में आसानी होगी और श्रद्धालु अपनी यात्रा का आनंद आराम से ले सकेंगे। यह कदम न केवल मंदिर प्रशासन, बल्कि पूरे शहर के लिए लाभकारी साबित होगा।

  • तेज लाउडस्पीकर से आमजन परेशान, जयपुर के परकोटा इलाके को लेकर विधानसभा में गूंजा मामला

    तेज लाउडस्पीकर से आमजन परेशान, जयपुर के परकोटा इलाके को लेकर विधानसभा में गूंजा मामला

    जयपुर।  राजस्थान की राजधानी जयपुर में मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों की तेज आवाज को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। बुधवार को राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाते हुए परकोटा क्षेत्र की कई मस्जिदों में नियमों से अधिक तेज आवाज में चल रहे लाउडस्पीकरों पर आपत्ति जताई।

    विधायक ने सदन में कहा कि परकोटा इलाके में कुछ मस्जिदों पर बड़े और अधिक संख्या में लाउडस्पीकर लगाए गए हैं, जिनकी आवाज निर्धारित ध्वनि मानकों से कहीं अधिक है। इससे आसपास रहने वाले नागरिकों, विद्यार्थियों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    नींद और पढ़ाई हो रही प्रभावित
    बालमुकुंद आचार्य ने बताया कि तेज आवाज के कारण स्थानीय लोगों की नींद प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों की पढ़ाई में भी व्यवधान आ रहा है। उन्होंने इसे आम नागरिकों के स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

    विधायक ने यह भी कहा कि कई बार स्थानीय लोग मस्जिद प्रबंधन से लाउडस्पीकर की आवाज कम करने का अनुरोध करते हैं, लेकिन अक्सर इस पर विवाद की स्थिति बन जाती है। इस संबंध में प्रशासन को पहले भी कई शिकायतें दी जा चुकी हैं, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

    रमजान के दौरान अतिरिक्त लाउडस्पीकरों पर चिंता
    विधायक ने विशेष रूप से रमजान माह के दौरान लगाए जाने वाले अतिरिक्त लाउडस्पीकरों पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि लाउडस्पीकरों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए, जिसमें तय समय और कानूनी ध्वनि सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो प्रशासन को कानून के तहत कार्रवाई करते हुए ऐसे लाउडस्पीकरों को हटाना चाहिए।

    ‘यह धर्म नहीं, आमजन की शांति का मुद्दा’
    बालमुकुंद आचार्य ने सदन में स्पष्ट किया कि यह मामला किसी धर्म विशेष के विरोध से जुड़ा नहीं है, बल्कि आम जनता की शांति, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से संबंधित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आमजन में असंतोष बढ़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

    अन्य विधायकों ने भी जताई चिंता
    इस मुद्दे पर सदन में मौजूद अन्य विधायकों ने भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जयपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई शहरी इलाकों में लाउडस्पीकरों की तेज आवाज एक गंभीर समस्या बन चुकी है। विधायकों ने सरकार से मांग की कि मौजूदा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और आम लोगों की शिकायतों को प्राथमिकता दी जाए।

    गौरतलब है कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों की आवाज को लेकर पहले भी कई बार विवाद और मांगें सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। विधायक बालमुकुंद आचार्य ने एक बार फिर प्रशासन से अपील की है कि कानून के दायरे में रहकर लाउडस्पीकरों की आवाज नियंत्रित की जाए, ताकि आम नागरिक बिना किसी परेशानी के सामान्य जीवन जी सकें।

  • CG News: रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के घर धर्मांतरण का खुलासा, चंगाई सभा की आड़ में चल रहा था खेल

    CG News: रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के घर धर्मांतरण का खुलासा, चंगाई सभा की आड़ में चल रहा था खेल



    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कथित धर्मांतरण का बड़ा मामला सामने आया है। गांधीनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत चंगाई सभा की आड़ में ईसाई मतांतरण कराने के आरोप में सरगुजा पुलिस ने सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो (66) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अंबिकापुर के नमनाकला स्थित उनके निवास पर बीते कई महीनों से प्रत्येक रविवार को नियमित रूप से चंगाई सभा आयोजित की जा रही थी।

    हर रविवार जुटती थी भीड़, बिना अनुमति हो रहा था आयोजन
    पुलिस जांच में सामने आया है कि ओमेगा टोप्पो के घर में हर रविवार बड़ी संख्या में लोग जुटते थे। इन सभाओं के लिए किसी प्रकार की प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी। एक रजिस्टर भी बरामद किया गया है, जिसमें सभा में शामिल होने वालों के नाम और हस्ताक्षर दर्ज थे।

    हिंदुवादी संगठनों के विरोध के बाद हुआ खुलासा
    25 जनवरी (रविवार) को चंगाई सभा की सूचना मिलने पर हिंदुवादी संगठनों से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे। उस समय घर के बाहर कई वाहन खड़े थे और भीतर करीब 50 से 60 लोग कथित प्रार्थना सभा में शामिल थे।

    संगठनों का आरोप है कि सभा के दौरान

    हिंदू धर्म के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही थीं

    लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था

    कम से कम 4–5 लोगों का मतांतरण कराने का प्रयास किया जा रहा था

    इसके बाद मामले की सूचना गांधीनगर थाना पुलिस को दी गई।

    पुलिस को रोका गया, रजिस्टर किया गया जब्त
    सूचना पर गांधीनगर पुलिस टीम नायब तहसीलदार के साथ मौके पर पहुंची। आरोप है कि आयोजकों ने पुलिस को सभा स्थल के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया।
    ओमेगा टोप्पो ने पुलिस से पहचान पत्र और जांच आदेश की प्रति मांगी, जबकि अन्य लोगों ने कहा कि प्रार्थना समाप्त होने के बाद ही बातचीत की जाएगी।हालांकि पुलिस ने मौके से सभा में शामिल लोगों का रजिस्टर जब्त कर लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि चंगाई सभा लंबे समय से नियमित रूप से आयोजित की जा रही थी।

    इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
    हिंदुवादी संगठन से जुड़े रोशन तिवारी की रिपोर्ट पर गांधीनगर पुलिस ने ओमेगा टोप्पो समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 और 299
    छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 5 (क)के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।

    थाने से लौटने के बाद हुई गिरफ्तारी
    पुलिस के अनुसार पूछताछ के लिए थाने बुलाए जाने के बाद ओमेगा टोप्पो बिना सूचना दिए लौट गई थीं। इसके बाद गांधीनगर पुलिस ने दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार किया।
    थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरोपित को न्यायालय में पेश किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और चंगाई सभा से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

  • छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, एपीके फाइल से खाते हुए खाली

    छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, एपीके फाइल से खाते हुए खाली


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों ने बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर ठगी का नया तरीका अपनाया है। नए बिजली कनेक्शन के डिमांड भुगतान के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए एपीके फाइल भेजकर मोबाइल फोन हैक किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। इस खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने उपभोक्ताओं के लिए एडवाइजरी जारी की है और सतर्क रहने की अपील की है।

    कंपनी के कार्यपालक निदेशक वीके साय ने बताया कि ठग उपभोक्ताओं को व्हाट्सएप पर संदिग्ध फाइल भेजते हैं और उसे डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। जैसे ही उपभोक्ता फाइल डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल हैक हो जाता है और खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा कभी भी कोई एपीके फाइल नहीं भेजी जाती और न ही उपभोक्ताओं से इसे डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।

    CSPDCL ने उपभोक्ताओं को चेताया है कि वे हमेशा अधिकारिक चैनलों से ही भुगतान करें। कंपनी किसी भी 10 अंकों के निजी मोबाइल नंबर से भुगतान लिंक नहीं भेजती। केवल CSPDCL-एस आईडी से आधिकारिक संदेश ही मान्य होते हैं। भुगतान केवल MOR बिजली एप, ATP केंद्र, आधिकारिक वेबसाइट या बिजली कार्यालय में ही करना चाहिए।

    उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क करें या नजदीकी वितरण केंद्र को सूचना दें। कंपनी ने चेतावनी दी है कि फर्जी एपीके फाइल डाउनलोड करने पर मोबाइल हैक होने के साथ-साथ बैंक खाते से पैसे भी चोरी हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नई तकनीक अपनाकर लोगों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। बिजली कनेक्शन और बिल भुगतान जैसे सामान्य मामलों में भी उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी अज्ञात लिंक या फाइल पर क्लिक न करें।

    CSPDCL ने यह भी बताया कि इस तरह के मामलों में विभाग सक्रिय रूप से निगरानी रख रहा है और साइबर अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक चैनलों का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वितरण केंद्र या टोल फ्री नंबर पर दें।

    इस चेतावनी के बावजूद कई उपभोक्ता अब भी धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और बैंक सुरक्षा के लिए दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (Two-Factor Authentication), मजबूत पासवर्ड और एंटीवायरस ऐप का इस्तेमाल जरूरी है। बिजली उपभोक्ताओं को अपने मोबाइल और बैंक खातों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना ही सबसे प्रभावी तरीका है।

    इस एडवाइजरी से स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर होने वाली साइबर ठगी गंभीर रूप ले चुकी है और उपभोक्ताओं को अपनी सावधानी बढ़ाने की आवश्यकता है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • छत्तीसगढ़ के जांबाजों का सम्मान: 77वें गणतंत्र दिवस पर 10 पुलिसकर्मियों को मिलेगा 'सराहनीय सेवा पदक'

    छत्तीसगढ़ के जांबाजों का सम्मान: 77वें गणतंत्र दिवस पर 10 पुलिसकर्मियों को मिलेगा 'सराहनीय सेवा पदक'


    रायपुर । 77वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ पुलिस के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के 10 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस यानी सराहनीय सेवा पदक के लिए चुना है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों प्रदान किया जाएगा। यह पदक उन जांबाजों को दिया जा रहा है जिन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, साहस और कार्यकुशलता से राज्य की कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में मिसाल पेश की है।

    इन 10 जांबाजों के नाम सराहनीय सेवा पदक

    सराहनीय सेवाओं के लिए चयनित अधिकारियों की सूची में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जमीनी स्तर पर तैनात जांबाज शामिल हैं ध्रुव गुप्ता: आईजी पुलिस मुख्यालय रायपुर। प्रशांत ठाकुर: डीआईजी एवं एसएसपी, सूरजपुर। श्वेता राजमणी: कमांडेंट, 19वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल जगदलपुर। रवि कुमार कुर्रे पुलिस अधीक्षक जिला कोरिया। कौशिल्या भट्ट: निरीक्षक पुलिस मुख्यालय, रायपुर। रोहित कुमार झा: सहायक महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय, रायपुर। कमलेश कुमार मिश्रा: निरीक्षक विशेष शाखा, पुलिस मुख्यालय। दल सिंह नामदेव: प्लाटून कमांडर। महेन्द्र कुमार पाठक: उप निरीक्षक जिला नारायणपुर।मनोज कुमार साहू: सहायक उप निरीक्षक जिला बस्तर। क्यों दिया जा रहा है यह सम्मान

    चयनित पुलिसकर्मियों ने अपने करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण मोर्चों पर खुद को साबित किया है नक्सल मोर्चे पर सफलता: कई अधिकारियों ने बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों और शांति बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशासनिक सुधार पुलिस मुख्यालय में तैनात अधिकारियों को उनकी अनुकरणीय कार्यशैली और संगठनात्मक सुधारों के लिए सम्मानित किया जा रहा है। अनुशासन और समर्पण: यह पदक उन कर्मियों को मिलता है जिनकी सेवा का रिकॉर्ड दागमुक्त और संसाधनपूर्ण रहा हो।

    राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक

    सराहनीय सेवा पदकों के अलावा, छत्तीसगढ़ के डीजी जेल हिमांशु गुप्ता को ‘विशिष्ट सेवाओं’ के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा, जो पुलिस सेवा का सर्वोच्च सम्मान है।

  • गणतंत्र दिवस 2026: छत्तीसगढ़ के खाकी वीरों का सम्मान, डीजी हिमांशु गुप्ता समेत 25 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक

    गणतंत्र दिवस 2026: छत्तीसगढ़ के खाकी वीरों का सम्मान, डीजी हिमांशु गुप्ता समेत 25 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक


    रायपुर। गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ पुलिस और जेल विभाग के लिए दोहरी खुशी की खबर सामने आई है। राज्य के 25 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक से नवाजा जाएगा। इनमें जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता का नाम प्रमुखता से शामिल है, जिन्हें ‘विशिष्ट सेवाओं’ के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य के 14 जांबाज पुलिसकर्मियों को वीरता पुरस्कार देने की भी घोषणा की गई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और चुनौतीपूर्ण अभियानों में उनके अदम्य साहस का प्रमाण है।

    राज्यपाल प्रदान करेंगे सम्मान

    इन सभी सम्मानित अधिकारियों और कर्मियों को सोमवार, 26 जनवरी 2026 को रायपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका द्वारा राष्ट्रपति पदक प्रदान किए जाएंगे।

    प्रमुख सम्मान और नामचीन चेहरे

    केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, छत्तीसगढ़ के पुलिस बेड़े में इन नामों की धूम है विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक: * हिमांशु गुप्ता जेल सुधारों और लंबी विशिष्ट सेवा के लिए।सराहनीय सेवाओं के लिए पदक प्रमुख नाम ध्रुव गुप्ता आईजी अअवि पुलिस मुख्यालय। प्रशांत ठाकुर डीआईजी एवं एसएसपी सूरजपुर।श्वेता राजमणी सेनानी, 19वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल छसबल जगदलपुर। रवि कुमार कुर्रे: एसपी कोरिया। कौशिल्या भट्ट निरीक्षक पुलिस मुख्यालय। रोहित कुमार झा: सहायक उपनिरीक्षक पुलिस मुख्यालय। कमलेश कुमार मिश्रा: निरीक्षक, विशेष शाखा पुलिस मुख्यालय।

    14 जांबाजों को वीरता पुरस्कार

    इस वर्ष छत्तीसगढ़ के 14 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया जाना राज्य की सुरक्षा रणनीति के लिए बड़ी उपलब्धि है। ये पुरस्कार विशेष रूप से उन जवानों को दिए जा रहे हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अद्वितीय शौर्य का प्रदर्शन किया है।

    गौरवशाली क्षण

    गणतंत्र दिवस पर मिलने वाले ये पदक न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण पर राष्ट्रीय मुहर हैं। विभाग में इस घोषणा के बाद उत्साह का माहौल है और इसे युवा पुलिसकर्मियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।

  • छत्तीसगढ़ 9 इनामी माओवादियों ने हथियार डाले, रायपुर रेंज नक्सलियों से मुक्त

    छत्तीसगढ़ 9 इनामी माओवादियों ने हथियार डाले, रायपुर रेंज नक्सलियों से मुक्त


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को कुल 47 लाख रुपए के इनाम वाले 9 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि इसके साथ ही रायपुर पुलिस रेंज अब नक्सलियों की मौजूदगी से पूरी तरह मुक्त हो गई है। रायपुर रेंज के धमतरी और गरियाबंद जिलों तथा ओडिशा के नुआपड़ा जिले में सक्रिय सभी सूचीबद्ध कैडर या तो मारे गए हैं या सरेंडर कर चुके हैं। सरेंडर करने वाले माओवादी कैडरों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष हथियार भी सौंप दिए। आईजी अमरीश मिश्रा ने बताया कि आत्मसमर्पण के पीछे माओवादी विचारधारा से मोहभंग, जंगलों में जीवन की कठिनाइयां और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का बड़ा प्रभाव रहा। हालांकि बस्तर रेंज और राजनांदगांव के कुछ हिस्सों में अभी भी माओवादी गतिविधियां जारी हैं।

    इनामी माओवादियों का विवरण

    9 में से दो महिलाएं हैं। सीतानदी एरिया कमेटी की सचिव ज्योति उर्फ जैनी 28 और डिविजनल कमेटी सदस्य उषा उर्फ बलम्मा 45 पर 8-8 लाख रुपए का इनाम था। बाकी छह कैडरों रामदास मरकाम 30 रोनी उर्फ उमा 25 निरंजन उर्फ पोडिया 25 सिंधु उर्फ सोमादी 25 पुनेम 18 पर 1 लाख रुपए का इनाम था।

    हथियारों की सौंपाई

    सरेंडर करने वाले माओवादियों ने दो इंसास राइफल, दो एसएलआर, एक कार्बाइन और एक मजल-लोडिंग बंदूक सहित कई हथियार पुलिस को सौंपे।

    छत्तीसगढ़ में बढ़ता आत्मसमर्पण

    इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में कुल 189 माओवादियों ने हथियार डाले हैं। 19 जनवरी को 45 लाख के इनाम वाले 9 माओवादियों ने गरियाबंद में सरेंडर किया था, जबकि 15 जनवरी को बीजापुर में 52 माओवादी 1.41 करोड़ से अधिक के इनाम ने आत्मसमर्पण किया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2025 में अब तक 1500 से अधिक माओवादियों ने हथियार डाले हैं।