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  • महाराष्ट्र विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ विधेयक पेश

    महाराष्ट्र विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ विधेयक पेश


    मुंबई।
    महाराष्ट्र विधानसभा में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने शुक्रवार को ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ नामक विधेयक पेश किया। इस विधेयक का मकसद गैर-कानूनी धर्मांतरण पर रोक लगाना है।

    विधानसभा में यह विधेयक पेश करने वाले गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा, “बिल का मकसद धर्म की आज़ादी के अधिकार की रक्षा करना है। इसका मकसद ज़बरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच या शादी के ज़रिए किए गए गैर-कानूनी धर्मांतरण पर भी रोक लगाना है। बिल में गैर-कानूनी धर्मांतरण को ज़बरदस्ती, धोखाधड़ी, गलत जानकारी, ज़बरदस्ती, गलत असर या लालच देकर किया गया धर्मांतरण बताया गया है। बिल के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी दूसरे व्यक्ति को तोहफ़े, कैश, नौकरी, मुफ़्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर लाइफ़स्टाइल, या भगवान का का लालच देकर गैर-हिंदू धर्म में अन्य धर्म में बदलने की कोशिश नहीं कर सकती, जिसे लालच माना गया है। लालच, ज़बरदस्ती, धोखा या गलत जानकारी, ज़बरदस्ती या धमकी, धोखाधड़ी के तरीके और गलत असर डालना गैर-कानूनी होगा। विधेयक में ज़बरदस्ती किसी व्यक्ति या ग्रुप को उसकी मर्जी के खिलाफ़ धर्म बदलने के लिए मजबूर करने के काम गैरकानूनी धर्म परिवर्तन बतलाया गया है।

    यह विधेयक गैर-हिंदू धर्म में बदलने की प्रोसेस में शामिल लोगों के रिश्तेदारों या करीबी परिवार के सदस्यों को गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करने की इजाज़त देता है, जिससे पुलिस जांच शुरू हो सकती है। कानून के तहत अपराध गैर-ज़मानती होंगे, जिससे पुलिस को ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन के आरोप में केस दर्ज करने और जांच शुरू करने की इजाज़त मिलेगी। विधेयक पुलिस स्टेशन के इंचार्ज के लिए किसी भी व्यक्ति की शिकायत दर्ज करना ज़रूरी बनाता है। बिल के सेक्शन 14 में गैर-हिंदू धर्मों में धर्म बदलने के लिए उकसाने वाले संगठनों पर बैन लगाने और उन्हें सज़ा देने के कानूनी प्रावधान हैं।

    दूसरे राज्यों में लागू ऐसे ही कानूनों के आधार पर बिल में शामिल कानूनी प्रावधानों में, जो लोग गैर-हिंदू धर्मों में धर्म बदलना चाहते हैं, उनके लिए एक तय सरकारी अथॉरिटी से पहले इजाज़त लेना, धर्म बदलने से 60 दिन पहले पहले से बताना और धर्म बदलने के बाद उसे रजिस्टर कराना शामिल है। महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026 के ड्राफ्ट के प्रावधानों के अनुसार, धर्म बदलने को रजिस्टर न करने या प्रक्रियाओं का पालन न करने पर कोई भी धर्म बदलना अमान्य हो सकता है। विधेयक के अनुसार, शादी का झांसा देकर गैर-कानूनी धर्म बदलने में शामिल पाए जाने वालों को सात साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा। किसी नाबालिग, पागल व्यक्ति या महिला या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का धर्म बदलने के लिए उकसाने की कोशिश करने पर सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। विधेयक के मुताबिक, बड़े पैमाने पर धर्म बदलने के लिए उकसाने वालों को सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा, जबकि बार-बार ऐसा करने वालों को 10 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा। विधेयक के मुताबिक, ज़बरदस्ती धर्म बदलने के दोषी पाए जाने वालों को 7 साल तक की जेल और 3 लाख रुपये का जुर्माना होगा।

    फडणवीस की महायुति सरकार का कहना है कि अल्पसंख्यकों के बनाए शिकारी धर्म बदलने के रैकेट से कमज़ोर बहुसंख्यक हिंदुओं को बचाने के लिए ऐसा धर्म बदलने के खिलाफ़ कानून ज़रूरी है। महाराष्ट्र धर्म की आज़ादी बिल, 2026 उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे दूसरे राज्यों के ऐसे ही धर्म बदलने के खिलाफ़ कानूनों पर आधारित है।

  • उत्तराखंड विधानसभा: 1.11 लाख करोड़ का बजट पास, सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

    उत्तराखंड विधानसभा: 1.11 लाख करोड़ का बजट पास, सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित


    भराड़ीसैंण)।
    उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में चल रहा विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के अंतिम दिन सदन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर आ प्रस्तुत 1,11,703 करोड़ रुपये के विनियोग विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के लिए आवंटित बजट पर भी सदन ने मुहर लगा दी।

    बजट सत्र के पांचवें और अंतिम दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई। शून्यकाल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को उठाया। वहीं नियम 58 के तहत कृषि, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाए गए।

    नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने नियम 310 के तहत भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया, जिसे बाद में नियम 58 के अंतर्गत सुना गया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर सामान्य चर्चा हुई और संसदीय कार्य मंत्री ने विभागवार अनुदान मांगें प्रस्तुत कीं।

    विभागवार बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक प्रीतम सिंह और भुवन कापड़ी समेत अन्य सदस्यों ने कई विभागों के बजट में कटौती कर केवल एक रुपये का प्रावधान करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि बहुमत के आधार पर ये सभी कटौती प्रस्ताव खारिज हो गए और सदन ने विभागवार बजट को पारित कर दिया।

    इसके बाद विनियोग विधेयक पर चर्चा हुई और देर रात करीब साढ़े बारह बजे इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। वित्त एवं नियोजन तथा शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण विभाग को सर्वाधिक बजट आवंटित किया गया है। विनियोग विधेयक पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

    नौ मार्च से शुरू हुए पांच दिवसीय बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अलावा चार अध्यादेश सदन के पटल पर रखे गए और 11 विधेयक भी पारित किए गए।


    प्रमुख विभागों को आवंटित बजट (रुपये में):

    विधानसभा खर्च – 137 करोड़ 28 लाख 98 हजार
    मंत्रीपरिषद – 170 करोड़ 92 लाख 1 हजार
    न्याय प्रशासन – 483 करोड़ 15 लाख 61 हजार
    निर्वाचन – 223 करोड़ 81 लाख 17 हजार
    राजस्व एवं सामान्य प्रशासन – 2731 करोड़ 15 लाख 23 हजार
    वित्त, कर, नियोजन व सचिवालय – 20,361 करोड़ 2 लाख 46 हजार
    पुलिस एवं जेल – 3524 करोड़ 69 लाख 58 हजार
    शिक्षा, खेल, युवा कल्याण व संस्कृति – 13,552 करोड़ 11 लाख 77 हजार
    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण – 4546 करोड़ 46 लाख 69 हजार
    जलापूर्ति, आवास एवं नगर विकास – 4243 करोड़ 34 लाख 68 हजार
    ग्राम्य विकास – 3860 करोड़ 21 लाख 70 हजार
    लोक निर्माण विभाग – 3580 करोड़ 57 लाख 61 हजार
    कृषि – 1495 करोड़ 81 लाख 93 हजार
    सिंचाई – 1591 करोड़ 48 लाख 29 हजार
    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति – 1648 करोड़ 78 लाख 87 हजार
    समाज कल्याण – 2912 करोड़ 49 लाख 98 हजार
    पर्यटन – 504 करोड़ 4 लाख 50 हजार
    वन – 1149 करोड़ 88 लाख 43 हजार
    पशुपालन – 925 करोड़ 49 लाख 37 हजार
    अनुसूचित जाति कल्याण – 2468 करोड़ 88 लाख 48 हजार
    अनुसूचित जनजाति कल्याण – 746 करोड़ 76 लाख 91 हजार

  • Uttarakhand: बदरीनाथ-केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर सनातनियों का प्रवेश वैन…

    Uttarakhand: बदरीनाथ-केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर सनातनियों का प्रवेश वैन…


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चारधाम मंदिरों (Chardham Temples) में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाले बदरीनाथ-केदारनाथ (Badrinath-Kedarnath) समेत 47 मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर पाबंदी का फैसला लिया गया है। मंदिर समिति बीकेटीसी (Temple Committee BKTC) ने हाल ही में यह कड़ा कदम उठाया। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह पाबंदी केवल उन लोगों पर लागू होगी जो सनातन धर्म में विश्वास नहीं रखते हैं और इसका मुख्य उद्देश्य चारधाम यात्रा और अन्य मंदिरों की पवित्रता और मर्यादा को बनाए रखना है। इस मामले में अब सरकार का रिएक्शन आया है।

    बदरीनाथ धाम, केदारनाथ में गैर सनातियों के प्रवेश पर रोक के बीकेटीसी के फैसले का सरकार अध्ययन करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि बीकेटीसी का फैसला अभी सरकार के पास नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जब यह प्रस्ताव सरकार के पास आएगा, उसका एक्ट के अनुसार अध्ययन किया जाएगा। सभी पक्षों से चर्चा के करने के बाद ही अंतिम निर्णय किया जाएगा।


    प्रतिबंध गर्भगृह और मुख्य परिसर में लागू

    समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि यह प्रतिबंध मंदिर के गर्भगृह और मुख्य परिसर के भीतर लागू होगा। उन्होंने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि केवल उन लोगों को ही धामों के दर्शन करने चाहिए जो सनातन धर्म में सच्ची श्रद्धा और विश्वास रखते हैं। गौरतलब है कि इस साल जनवरी में ही समिति ने ऐसे प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए थे, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है।


    चारधाम यात्रा के लिए 121 करोड़ बजट पास

    इसी बैठक में बीकेटीसी ने आगामी चारधाम यात्रा 2026-27 के लिए 121 करोड़ का बजट भी पास किया है। इस कुल राशि में से 57.5 करोड़ बदरीनाथ धाम और 63.6 करोड़ केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं के लिए आवंटित किए गए हैं। साथ ही, मंदिर के पुजारियों (तीर्थ पुरोहितों) की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए ‘तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष’ बनाने के फैसले को भी बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है। यह कोष पुजारियों को वित्तीय सहायता और अन्य कल्याणकारी लाभ प्रदान करेगा।


    19 अप्रैल को खुल रहे कपाट

    2026 की यात्रा के लिए कपाट खुलने की तारीखें भी तय हो चुकी हैं। केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे, जबकि बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को खुलेंगे। हर साल बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला…. पहली बार रिटर्निंग अफसर तैनात

    पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला…. पहली बार रिटर्निंग अफसर तैनात


    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पहली बार देश के अन्य हिस्सों की तरह 152 चुनाव क्षेत्रों में SDM या उसके बराबर या उससे ऊंचे लेवल के अधिकारियों को को रिटर्निंग ऑफिसर्स (Returning Officers) यानी निर्वाचन अधिकारी के पद पर अपग्रेड कर तैनाती को मंजूरी दी है। चुनाव आयोग की तरफ से आज (गुरुवार, 12 मार्च को) जारी एक नोटिफिकेशन में राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में SDM या उसके बराबर या उससे ऊंचे लेवल के रिटर्निंग ऑफिसर्स की लिस्ट जारी किए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया, जब चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए उचित रैंक के अधिकारियों को नामित करे, जो चुनाव कराने के लिए एक अनिवार्य शर्त है। इसके बाद, राज्य प्रशासन ने पात्र अधिकारियों की एक संशोधित सूची सौंपी, जिससे आयोग के लिए इन नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया।


    निर्वाचन अधिकारी के क्या काम?

    निर्वाचन अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया की निगरानी, उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच, मतदान की व्यवस्था, वोटों की गिनती और परिणामों की घोषणा जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निर्वाचन अधिकारी के कंधों पर ही होती हैं। चुनाव नियमों के तहत, चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आमतौर पर इन अधिकारियों को वरिष्ठ प्रशासनिक संवर्गों से चुना जाता है।


    आयोग ने अधिकारियों की लिस्ट पर जताई थी चिंता

    अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने पहले राज्य सरकार के प्रस्तावित अधिकारियों की वरिष्ठता के स्तर पर चिंता जताई थी और निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले अधिकारियों की मांग की थी। राज्य के इस आवश्यकता को पूरा करने और उचित रैंक के अधिकारी उपलब्ध कराने के बाद ही आयोग ने निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी की।


    चुनाव से पहले की तैयारी

    यह कदम पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण चरण है, जहां चुनाव आयोग संविधान के तहत अपनी देखरेख में राज्य प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर चुनाव कराता है। चुनाव की औपचारिक तारीखों की घोषणा से पहले निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति शुरुआती प्रशासनिक उपायों में से एक है, ताकि नामांकन, मतदान और मतगणना के प्रबंधन के लिए आवश्यक ढांचा चुनाव से काफी पहले तैयार हो सके।

  • राहुल गांधी का दो दिवसीय रायबरेली मेठी दौरा आज से, दिशा बैठक और जनता दर्शन कार्यक्रम

    राहुल गांधी का दो दिवसीय रायबरेली मेठी दौरा आज से, दिशा बैठक और जनता दर्शन कार्यक्रम


    अमेठी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज से दो दिवसीय दौरे पर रायबरेली और अमेठी पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे कई कार्यक्रमों में भाग लेने केसाथ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। उनके दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने व्यापक तैयारियां कर ली हैं और स्थानीय स्तर पर उत्साह का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार राहुल गांधी सबसे पहले फुरसतगंज एयरपोर्ट पहुंचेंगे। यहां से वे जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक में रायबरेली जिले में चल रहे विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की समीक्षाकी जाएगी। साथ ही अधिकारियों के साथ विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा भी की जाएगी। बैठक के बाद राहुल गांधी रायबरेली में ही रुकेंगे और शाम को भुएमऊ गेस्ट हाउसमें रात्रि प्रवास करेंगे।

    अपने दौरे के दूसरे दिन वे अमेठी पहुंचेंगे। यहां नैना रिसॉर्ट मेंकांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें पार्टी के विभिन्न फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी, ब्लॉक और जिला स्तर के नेता तथा वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल होंगे।दौरे के दौरान राहुल गांधी जनता दर्शनकार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में वे आम लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और उन्हें समाधान का भरोसा देंगे।

    कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने बताया कि राहुल गांधी के दौरे को लेकर पार्टीकार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है और पार्टी स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

  • नोएडा में गैस सिलेंडर संकट पर लोगों का फूटा गुस्सा, सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशन के पास लगाया जाम

    नोएडा में गैस सिलेंडर संकट पर लोगों का फूटा गुस्सा, सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशन के पास लगाया जाम


    नोएडा । उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में घरेलू गैस सिलेंडर की बढ़ती किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा गुरुवार को सड़कों पर दिखाई दिया। नाराज लोगों ने सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशनके पास जोरदार प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दी जिससे इलाके में कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हो गया।

    प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से गैस एजेंसियों पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इसके कारण घरों में खाना बनाना तक मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि एजेंसियों पर सिलेंडर खत्म होने की बात कही जा रही है लेकिन दूसरी ओर खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है और अधिक कीमत लेकर सिलेंडर बेचे जा रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कई उपभोक्ताओं ने गैस बुकिंग कराई थी लेकिन समय पर सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है। इससे आम परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की।

    जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि गैस एजेंसियों से बात कर समस्या का समाधान कराया जाएगा और यदि कहीं कालाबाजारी की शिकायत सही पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे शांतिपूर्वक अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समस्या का जल्द समाधान किया जा सके और शहर में सामान्य व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

  • टीईटी अनिवार्यता के आदेश का विरोध तेज, राज्य कर्मचारी संघ ने सरकार से कहा-फैसला वापस लें

    टीईटी अनिवार्यता के आदेश का विरोध तेज, राज्य कर्मचारी संघ ने सरकार से कहा-फैसला वापस लें



    भोपाल । मध्यप्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) पास करना अनिवार्य करने के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध मप्र राज्य कर्मचारी संघ ने स्कूल शिक्षा विभाग के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इस निर्देश से प्रदेश के लाखों शिक्षकों में असमंजस और असंतोष की स्थिति बन गई है।

    संघ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े आदेश को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की जाए, ताकि पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा की जा सके।

    सेवा में कार्यरत शिक्षकों को परीक्षा देने का निर्देश
    राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्देश में यह कहा गया है कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। जबकि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक कई वर्षों से नियमित रूप से सेवा दे रहे हैं।

    संघ का तर्क है कि यह आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के प्रावधानों की गलत व्याख्या के आधार पर जारी किया गया है। यदि इसे लागू किया गया तो हजारों शिक्षकों के सामने अनावश्यक संकट खड़ा हो सकता है।

    2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर नियम लागू नहीं
    पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता मूल रूप से प्राथमिक (कक्षा 1 से 5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) के लिए नए शिक्षकों की भर्ती के समय लागू की गई थी। यह नियम उन शिक्षकों के लिए बनाया गया था जो 2009 के बाद नियुक्त हुए हैं।

    संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक 2009 से पहले नियुक्त हुए थे और वे लंबे समय से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक टीईटी परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न केवल अनुचित है बल्कि उनके मनोबल को भी प्रभावित करेगा।

    तीन लाख शिक्षकों में बढ़ा असमंजस
    राज्य कर्मचारी संघ के अनुसार शिक्षा विभाग ने अपने निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला दिया है, लेकिन इस संबंध में राज्य सरकार या विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट नीति या आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी कारण प्रदेश के लगभग तीन लाख शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है।

    संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो शिक्षक वर्ग में व्यापक असंतोष फैल सकता है। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी पत्र पर तत्काल रोक लगाई जाए और शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।

    न्यायालय जाने की भी चेतावनी
    संघ ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यदि सरकार इस मामले में जल्द कोई स्पष्ट फैसला नहीं लेती, तो संगठन न्यायालय में पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर करने पर भी विचार करेगा। उनका कहना है कि प्रदेश के शिक्षकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर कानूनी विकल्प अपनाया जाएगा।

  • J&K: फायरिंग में बाल-बाल बचे फारूक अब्दुल्ला… उमर बोले- 'अल्लाह रहमदिल है…

    J&K: फायरिंग में बाल-बाल बचे फारूक अब्दुल्ला… उमर बोले- 'अल्लाह रहमदिल है…


    जम्मू।
    नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) पर बुधवार देर रात फायरिंग की गई. इस घटना में वह बाल-बाल बच गए. उनके बेटे उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है.

    जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि अल्लाह रहमदिल है. मेरे पिता बहुत बड़े खतरे से बाल-बाल बचे हैं. फिलहाल पूरी जानकारी साफ नहीं है लेकिन इतना पता चला है कि एक शख्स भरी हुई पिस्तौल के साथ बेहद करीब पहुंच गया था और उसने नजदीक से गोली चला दी. क्लोज प्रोटेक्शन टीम की सतर्कता की वजह से गोली का रुख मोड़ दिया गया और हत्या की कोशिश नाकाम हो गई।

    उन्होंने कहा कि इस समय सवाल-जवाबों से ज्यादा है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेड प्लस और एनएसजी सुरक्षा में रहने वाले एक पूर्व मुख्यमंत्री के इतने करीब कोई व्यक्ति आखिर कैसे पहुंच गया।

    बता दें कि फारूक अब्दुल्ला बुधवार रात को जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित होटल रॉयल पार्क में एक शादी समारोह में शामिल होने गए था. इस समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी समेत कई नेता मौजूद थे. इसी दौरान एक व्यक्ति ने चुपचाप फारूक अब्दुल्ला के बेहद करीब जाकर गोली चला दी. लेकिन गनीमत रही कि वह इस हमले में बाल-बाल बच गए।

    फायरिंग में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को छर्रे लगने से मामूली चोटें जरूरी आई हैं. इस घटना से हर तरफ हड़कंप मच गया. मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को तुरंत पकड़ लिया. इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

    पुलिस अब इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है. घटना से जुड़े तथ्यों को समझने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंघाली जा रही है. बताया जा रहा है कि आरोपी कमल सिंह जम्वाल खनन के कारोबार से जुड़ा हुआ है. हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में खनन गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है, जिससे वह नाराज बताया जा रहा है।

  • मेघायल में फिर भड़की हिंसा… पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत, आर्मी तैनात

    मेघायल में फिर भड़की हिंसा… पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत, आर्मी तैनात


    शिलॉन्ग।
    पूर्वोत्तर राज्य मेघालय (North Eastern State Meghalaya) के पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में मंगलवार तड़के गारो पर्वतीय स्वायत्त जिला परिषद (GHDC) चुनाव नामांकन प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद और तनाव के बीच हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। इससे इलाके में और तनाव पसर गया। हालात को देखते हुए न सिर्फ वहां कर्फ्यू लगाया गया है बल्कि सेना को भी तैनात किया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

    जिले के पुलिस अधीक्षक अब्राहम टी. संगमा (Superintendent of Police Abraham T. Sangma) ने बताया कि यह घटना चिबिनांग इलाके में हुई जहां जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच झड़प हो गई थी। संगमा ने कहा, “मारे गए दोनों व्यक्ति चिविनांग के निवासी थे। GHDC चुनावों को लेकर जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच झड़प हुई थी और यह गोलीबारी तब हुई जब हम जमा भीड़ को तितर-बितर कर रहे थे।” उन्होंने कहा कि इलाके में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने मंगलवार को पूरे पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में दिन भर के लिए कर्फ्यू लगा दिया है।


    वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाएं प्रभावित नहीं

    एसपी ने कहा, “हमने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है और वे आ रहे हैं।” यह घटना मेघालय सरकार द्वारा जिले में 10 मार्च से 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के आदेश के कुछ घंटों बाद हुई है। नामांकन प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था को खतरे में डालने वाली भीड़ जुटाने, हमलों और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार की खबरों के बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि, वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं।


    सेना से ‘फ्लैग मार्च’ करने का अनुरोध

    जिले के उपायुक्त विभोर अग्रवाल ने मंगलवार को पूर्वी कमान के 101 एरिया के कमांडिंग ऑफिसर को पत्र लिखकर जिले के मैदानी क्षेत्रों के गांवों में सेना से ‘फ्लैग मार्च’ करने का अनुरोध किया है। उपायुक्त ने पत्र में कहा, “सशस्त्र बलों की उपस्थिति से जनता को आश्वस्त करने, किसी भी अन्य अप्रिय घटना को रोकने और निवासियों के बीच विश्वास बहाल करने में बहुत मदद मिलेगी।” जीएचएडीसी चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 16 मार्च तक जारी रहेगी जिसे देखते हुए नामांकन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


    नामांकन के दौरान हमला

    यह अशांति तब शुरू हुई प्रदर्शनकारियों ने 10 अप्रैल को होने वाले जीएचएडीसी चुनावों के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने सोमवार को तुरा में उपायुक्त कार्यालय पहुंचे फूलबाड़ी के पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन पर हमला कर दिया था। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस चुनाव में गैर-जनजातीय लोग भाग न लें। जीएचएडीसी की कार्यकारी समिति ने 17 फरवरी को एक प्रस्ताव पारित किया था जिसके तहत उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करते समय वैध अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया था।

  • Assam: बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटेगा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम, हिमंता सरकार ने दी मंजूरी

    Assam: बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटेगा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम, हिमंता सरकार ने दी मंजूरी


    दिसपुर।
    असम सरकार (Assam Government) ने बरपेटा (Barpeta) स्थित फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (Fakhruddin Ali Ahmed Medical College and Hospital) का नाम बदलने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस संस्थान का नया नाम बरपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रखने को मंजूरी दे दी है।

    मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फखरुद्दीन अली अहमद (Fakhruddin Ali Ahmed) भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं और वे असम से देश के पहले राष्ट्रपति थे। ऐसे में उनके सम्मान को बनाए रखते हुए राज्य सरकार ने किसी अन्य संस्थान को उनके नाम पर समर्पित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि असम मंत्रिमंडल ने तय किया है कि राज्य में एक अन्य संस्थान को फखरुद्दीन अली अहमद के नाम से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके योगदान को उचित सम्मान दिया जा सके।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा ने मंगलवार को कहा कि असम के मुस्लिम ‘राजनीतिक रूप से’ मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय का एक तबका अब भाजपा का समर्थन कर रहा है। सरमा ने कहा कि असम के मुसलमानों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि उनका धर्म समान हो सकता है, लेकिन वे मियां मुसलमानों से सांस्कृतिक रूप से अलग हैं। उन्होंने यहां एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि इस बार असम के मुसलमानों ने मन बना लिया है कि वे एक अलग समुदाय हैं, भले ही धर्म समान हो।

    मुख्यमंत्री से पूछा गया था कि क्या धार्मिक अल्पसंख्यक आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का समर्थन करेंगे, इसके बाद उनका यह बयान आया है। दोनों समुदायों को उनकी मातृभाषा और मूल स्थान के आधार पर अलग करते हुए असम सीएम ने कहा कि राजनीतिक रूप से, असम के मुसलमान मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। कई लोग टीवी पर परिचर्चा में कहते हैं कि धर्म भले समान हो, लेकिन उनकी संस्कृति अलग-अलग हैं। बता दें कि ‘मियां’ मूल रूप से असम में बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, और गैर-बंगाली बोलने वाले लोग उन्हें आम तौर पर बांग्लादेशी प्रवासी बताते हैं।