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  • J&K: खामेनेई की मौत के बाद जारी प्रदर्शनों के बीच घाटी में तनावपूर्ण शांति, स्कूल-कॉलेज 7 मार्च तक बंद

    J&K: खामेनेई की मौत के बाद जारी प्रदर्शनों के बीच घाटी में तनावपूर्ण शांति, स्कूल-कॉलेज 7 मार्च तक बंद


    जम्मू।
    ईरान के सर्वोच्च नेता (Iran’s Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की हमले में मौत के विरोध में कश्मीर (Kashmir) में जारी प्रदर्शनों के बीच मंगलवार को तनावपूर्ण शांति रही। पाबंदियां लागू रहीं तो शिक्षण संस्थान बंद रहे। घाटी में स्कूल-कॉलेज की दो दिन की बंदी को एहतियात के तौर पर बढ़ाकर सात मार्च तक कर दिया गया है। राजोरी और पुंछ में बंद शांतिपूर्ण रहा। लद्दाख के कारगिल के बाजार भी बंद रहे।

    मंगलवार को श्रीनगर के सिविल लाइन इलाके में कुछ दुकानें खुली दिखीं और सड़कों पर वाहन चलते नजर आए। डाउनटाउन और शिया बहुल इलाकों में प्रदर्शन हुए। लाल चौक पर घंटा घर को अभी सील ही रखा गया है। इसके चारों ओर बैरिकेड लगे हुए हैं। शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को भी प्रतिबंध जारी रहेंगे। इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहेंगी। पुलिस ने लोगों से हिंसा और उकसावे से बचने की अपील की है।

    राजोरी शहर व आसपास के इलाकों में मुस्लिम संगठनों ने दुकानें बंद रखीं। पहाड़ी इलाकों में भी मुस्लिम समुदाय की ही दुकानें बंद रहीं। पुलिस की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रही। कहीं भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। पुंछ पूरी तरह से बंद रहा। इस दौरान हिंदू-सिख के धार्मिक, सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों ने भी बंद को अपना समर्थन दिया।

    शांति बनाए रखना और समाज की तरक्की को बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। अफसर हाई अलर्ट पर रहें। शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाए। -मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल

    कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों से गुजारिश है कि वे संयम रखें। गुस्सा-नाराजगी, दुख-दर्द का इजहार करें लेकिन कानून हाथ में न लें। -उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री

  • बॉम्बे HC का बड़ा आदेश….हिन्दू श्मशान में दफनाए गए मुसलमान के शव को निकालने का दिया आदेश

    बॉम्बे HC का बड़ा आदेश….हिन्दू श्मशान में दफनाए गए मुसलमान के शव को निकालने का दिया आदेश


    नागपुर।
    मृत्यु के बाद भी गरिमा का संवैधानिक अधिकार (Constitutional Right After Death) बना रहता है, इस बात की पुष्टि बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने की है। हाई कोर्ट ने नागपुर (Nagpur) के एक हिंदू श्मशान घाट में गलती से दफनाए गए एक मुस्लिम व्यक्ति के शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया। ट्रेन दुर्घटना के बाद मृतक को शुरू में अज्ञात माना गया था। हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के न्यायमूर्ति अनिल किलोर और राज वाकोडे की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिका मृतक के भाई जावेद खान ने दायर की थी। हाई कोर्ट ने नागपुर ग्रामीण के तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारी के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें पहले शव को कब्र से निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।

    अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागपुर नगर निगम की देखरेख में घाट रोड स्थित मोक्षधाम घाट से साजिद खान का शव निकाला जाए। शव याचिकाकर्ता को सौंप दिया जाए ताकि इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सके।


    25 जनवरी को नागपुर से लापता हुए थे साजिद खान

    मालेगांव निवासी साजिद खान 25 जनवरी को ताजुद्दीन बाबा के उर्स में शामिल होने के लिए दो मित्रों के साथ नागपुर गए थे। वे 26 जनवरी को लापता हो गए और बाद में बुटीबोरी के पास उनकी मृत्यु हो गई। उनकी पहचान तुरंत न हो पाने के कारण पुलिस ने शव को अज्ञात मानकर हिंदू श्मशान घाट मोक्षधाम घाट में दफना दिया।


    स्थानीय अधिकारियों ने आवेदन किया खारिज

    पुलिस से पूछताछ के बाद याचिकाकर्ता ने अधिकारियों द्वारा दिखाई गई तस्वीरों के माध्यम से शव की पहचान की। उसके बाद शव को निकालने की अनुमति मांगी ताकि मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कब्रिस्तान, बड़ा ताजबाग में अंतिम संस्कार किया जा सके। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और उन्हें सक्षम न्यायालय से आदेश प्राप्त करने का निर्देश दिया।


    बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

    अदालत ने माना कि इस तरह के इनकार का कोई औचित्य नहीं था। हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की न्यायिक व्याख्या में गरिमा के अधिकार को भी शामिल किया गया है, जो मृत्यु के बाद भी लागू रहता है। न्यायालय ने आश्रय अधिकार अभियान बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए टिप्पणी की।

    अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसमें आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान करने का अधिकार भी शामिल है। इस न्यायालय के समक्ष ऐसा कोई वैधानिक निषेध नहीं दिखाया गया है जो कानूनी पर्यवेक्षण के तहत शव निकालने पर रोक लगाता हो।- बॉम्बे हाई कोर्ट बेंच


    बॉम्बे हाई कोर्ट अनुच्छेद 14, 21 और 25 का जिक्र

    पूर्व प्रशासनिक आदेशों को अस्पष्ट बताते हुए, न्यायालय ने फैसला सुनाया कि परिवार को शव की अभिरक्षा से वंचित करना अनुच्छेद 14, 21 और 25 के तहत संवैधानिक संरक्षणों का उल्लंघन होगा। पीठ ने नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक और बुटीबोरी पुलिस को शव निकालने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि शव मृतक के भाई को सौंप दिया जाए।

  • Bihar: सीमांचल में अबैध घुसपैठ, जाली नोट, नशा-तस्करी के खिलाफ चलेगा बड़ा ऑपरेशन…

    Bihar: सीमांचल में अबैध घुसपैठ, जाली नोट, नशा-तस्करी के खिलाफ चलेगा बड़ा ऑपरेशन…


    पटना।
    बिहार (Bihar) के सीमांचल में अवैध घुसपैठ (Illegal Intrusion) के साथ ही भारतीय जाली नोट, मानव व्यापार और नशे के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के तीन दिवसीय दौरे के बाद केन्द्रीय एजेंसियां समेकित रूप से इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने में जुट गयी हैं। अभियान में एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी, एनआईए, ईडी, आईबी सहित स्थानीय प्रशासन और बिहार पुलिस का आपसी सहयोग रहेगा।

    दरअसल, केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि नेपाल से जुड़े बिहार के सीमाई इलाकों में अवैध घुसपैठ के साथ ही जाली भारतीय नोट, मानव व्यापार और नशीली दवाओं की तस्करी का बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है। यह नेटवर्क भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के साथ ही क्षेत्रीय संतुलन भी बिगाड़ रहा है। इसके लिए केन्द्रीय एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश मिला है। सूत्रों के मुताबिक एसएसबी, आईबी, बीएसएफ और आईटीबीपी को इंटेलिजेंस शेयरिंग कर तस्करी रूटों के लाइव मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मिली है।

    एनआईए और ईडी जाली नोट, नारकोटिक्स और मानव व्यापार के नेटवर्कों की बड़े स्तर पर जांच करेंगे। इसमें बिहार पुलिस का भी सहयोग मिलेगा। बैठक के बाद केन्द्रीय एजेंसियां इन नेटवर्क के अहम कड़ियों की पहचान और इसके फंडिंग पैटर्न को समझने में जुटी है।


    मदरसों की फंडिंग और चीनी भाषियों पर नजर

    केन्द्रीय बल और जांच एजेंसियों की सीमाई क्षेत्रों के मदरसों की विदेशी फंडिंग पर भी नजर है। संदिग्ध मदरसों के फंडिंग की जांच कराने का निर्देश है। खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि सीमाई क्षेत्र में चीनी भाषा सीखने-सिखाने वाले कई संस्थान खुल गए हैं। पहले इन संस्थानों को सिर्फ शैक्षिक इकाई के रूप में देखा जाता था, लेकिन, अब चीनी इंफ्लुएंसर्स की पहचान करते हुए उनके बैकग्राउंड को खंगाला जा सकता है। आशंका है कि जासूसी या सॉफ्ट वारफेयर के लिए चीनी भाषा प्रभावित लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक बैठक में सीमा से सटे इलाके में सुनियोजित रूप से कई अवैध बस्तियां बसाये जाने की सूचना मिली है। केन्द्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर अब सीमा क्षेत्र के अंदर 10 किमी तक ऐसी अवैध बस्तियों को हटाया जाएगा। बॉर्डर इलाके में रोहिंग्याओं की बढ़ी हुई सक्रियता को देखते हुए किशनगंज इलाके में सैन्य संगठनों की तैनाती बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है।

  • SIR के बाद पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी, 63 लाख नाम कटे

    SIR के बाद पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी, 63 लाख नाम कटे


    कोलकाता।
    आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इस प्रक्रिया में करीब 63 लाख 66 हजार अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट नाम हटा दिए गए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि ड्राफ्ट सूची में दर्ज सात करोड़ 66 लाख मतदाताओं की संख्या अब सात करोड़ चार लाख रह गई है।

    अग्रवाल ने विस्तार से कहा, “विशेष गहन पुनरीक्षण के पहले चरण में ड्राफ्ट सूची से तीन लाख 75 हजार मतदाता हटाए गए, जबकि एक लाख 82 हजार नए मतदाता शामिल किए गए। इसके अलावा 60 लाख मतदाता ‘विचाराधीन’ श्रेणी में हैं, जिनके मताधिकार पर स्थानीय न्यायिक अधिकारी निर्णय लेंगे।”

    उन्होंने इस विशाल अभियान में हुई छोटी-मोटी गलतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि आयोग ने तुरंत सुधार किया। दिसंबर में जारी ड्राफ्ट सूची से पहले ही 58 लाख से अधिक नाम हटा चुके थे, और ‘विचाराधीन’ नामों के फैसले के बाद यह संख्या और बढ़ेगी।

    प्रक्रिया में कुल सात करोड़ आठ लाख लोगों ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किया था, जिनमें से एक करोड़ 50 लाख से अधिक मतदाताओं, जिनमें तार्किक विसंगतियों और अननियोजित श्रेणी वाले शामिल थे, की विभिन्न केंद्रों पर सुनवाई की गई। सूत्रों के अनुसार, शनिवार दोपहर से सभी जिलों में मतदाता सूची की भौतिक प्रतियां वितरित हो रही हैं, और शाम तक यह ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगी।

    ममता बनर्जी के भवानीपुर क्षेत्र में 47 हजार नाम हटे

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दक्षिण कोलकाता स्थित भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र (कुल एक लाख 61 हजार मतदाता) से 47 हजार 111 अनुपस्थित-स्थानांतरित-मृत-डुप्लिकेट नाम हटा दिए गए। साथ ही 14 हजार 154 नाम ‘विचाराधीन’ हैं, जिनका फैसला न्यायिक अधिकारियों को करना है। अप्रैल के अंत में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले यह तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो के लिए गंभीर चुनौती है। ममता ने हाल ही में स्थानीय नेताओं, बूथ स्तरीय एजेंटों और कार्यकर्ताओं के साथ कई बैठकें की हैं।

    शुभेंदु के विधानसभा में कटे 11 हजार नाम

    वहीं, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम क्षेत्र से करीब 11 हजार नाम हटे। 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने ममता को महज 1900 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। कोलकाता उत्तर जिले से चार लाख से अधिक और कोलकाता दक्षिण (भवानीपुर सहित) से दो लाख 15 हजार नाम हटाए गए। कुल मिलाकर दो प्रमुख कोलकाता जिलों से छह लाख से अधिक मतदाता सूची से बाहर हो गए।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप-प्रत्यारोप

    केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री व पूर्व बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने मीडिया से कहा, “अभी तक हटे 65 लाख नामों में 24 लाख मृत मतदाता हैं। तृणमूल कांग्रेस इन मृत वोटरों के नाम पर झूठे वोट डलवाकर चुनाव जीतती रही है। इस बार सत्ताधारी दल की यह मशीनरी फेल हो जाएगी।” भाजपा ने इसे स्वच्छ चुनाव की दिशा में बड़ा कदम बताया।

    उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 से शुरू हुई यह तीन माह की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरे राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, सड़क प्रदर्शनों और अदालती लड़ाइयों के बीच संपन्न हुई। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध बनाना था, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव निष्पक्ष हों। निर्वाचन आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

  • राजस्थान के बालोतरा में भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत

    राजस्थान के बालोतरा में भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत


    जोधपुर/बालोतरा।
    जोधपुर संभाग के बालोतरा जिले के सरवड़ी गांव में नेशनल हाईवे-25 पर शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत हो गई और कई यात्री घायल हो गए, जिन्हेें बाद में जोधपुर रेफर किया गया। बस में ज्यादातर सवारियां जालोर और सांचौर की थीं। ट्रेलर-स्लीपर बस भिड़ंत इतनी भीषण थी कि बस का ड्राइवर साइड की तरफ का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। बस में सवार यात्रियों के शव लटके नजर आए। तीन और छह साल के दो सगे भाइयों के सिर धड़ से अलग हो गए। हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    हादसे में सांचौर निवासी अनुशा (22) पुत्री भगवाना राम दाता और जोधपुर में वाणिज्य कर विभाग में एलडीसी के पद पर तैनात नरपत (30) पुत्र सदराम की भी मौत हो गई। दोनों होली की छुट्टी पर गांव आ रहे थे। सूचना मिलते ही कल्याणपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया। घायलों को एंबुलेंस की मदद से कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया गया, जहां से 8 घायलों को जोधपुर रेफर कर दिया गया। शवों को बालोतरा के नाहटा अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया।

    बालोतरा एसडीएम अशोक कुमार ने बताया कि हादसा शाम चार बजे का है। बस जोधपुर से सांचौर की ओर जा रही थी, जबकि ट्रेलर जोधपुर की ओर आ रहा था। बस ड्राइवर आगे चल रही दो गाडिय़ों को ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान सामने से आ रहे ट्रेलर से ड्राइवर साइड का हिस्सा टकरा गया।

    हादसे में मृत 5 लोगों की पहचान नरपत (50) निवासी चितलवाना (जालोर), नगाराम (38) निवासी सायला (जालोर), अनुशा (22) निवासी दांता (जालोर), शिवराज (3) और युवराज (6) पुत्र धारूराम निवासी बागोड़ा (जालोर) के रूप में हुई है। शिवराज और युवराज सगे भाई थे।

  • Haryana: IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का घोटाला…. मास्टरमाइंड सहित 4 गिरफ्तार

    Haryana: IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का घोटाला…. मास्टरमाइंड सहित 4 गिरफ्तार


    चंडीगढ़।
    हरियाणा (Haryana) में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) में 590 करोड़ रुपये के घोटाला में बड़ी खबर है. इस मामले में एसीबी की टीम ने घोटाला के मास्टर मांइड (Master Mind) रिभव समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. फर्जीवाड़े में शामिल अभिषेक सिंगला, अभय और महिला स्वाति की गिरफ्तारी हुई है।

    देर रात पंचकूला के सेक्टर 6 हॉस्पिटल में सभी आरोपियों का मेडिकल करवाया गयया है. मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से मामला दर्ज किया गया है.गौर रहे है कि आरोपी रिषभ बैंक में पूर्व मैनेजर था, जिसे नौकरी से निकाल दिया गया था. हरियाणा सरकार के पंचायत विभाग के पैसों का गबन किया गया था।

    बताया जा रहा है कि मास्टरमाइंड रिषभ मोहाली का रहने वाला है और वह बैंक में मैनेजर के पद पर तैनात रहा था. गौरतलब है कि बैंक की तरफ से अब तक 578 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार को लौटा दिए गए हैं. इस पूरे घोटाले में प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 180 करोड़ रुपये थे।


    आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये के मास्टरमाइंड कौन

    दरअसल, हरियाणा सरकार के 18 विभागों के खातों से कुल 590 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई थी. आरोपी मास्टरमाइंड चंडीगढ़ में आईडीएफसी ब्रांच में तैनात था. 19 फरवरी को बैंक के हैडक्वार्टर में इस बारे में पता चला था. पिछले साल बैंक ने इंटर ऑडिट करवाया था और हेराफेरी की बात सामने आने पर मास्टरमाइंड पूर्व मैनेजर को नौकरी से निकाल लिया था. आरोपी ने दोस्तों और जानकारों के नाम पर कागजों में फर्जी कंपनियां बनाईं थी और सरकारी पैसे को इन खातों में ट्रांसफर किया. ये पैसा एफडी के रूप में दिया गया था. उधर, मामले को लेकर मंगलवार को बजट सत्र के दौरान हंगामा भी देखने को मिला था और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर सवाल उठाए थे. इस सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा था कि सारा पैसा वापस आ गया है और जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है।


    बैंक की प्रतिक्रिया भी आई

    आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों के खातों में मूलधन एवं ब्याज समेत पूरी राशि जमा करा दी है जो कुल मिलाकर 583 करोड़ रुपये है. बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, “मामले की जांच जारी होने के बावजूद बैंक ने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों की ओर से दावा की गई मूलधन और ब्याज की समूची राशि का भुगतान कर दिया है, जो शुद्ध रूप से 583 करोड़ रुपये है.” बैंक ने कहा कि वह कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और राज्य सरकार के विभागों के साथ मिलकर इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा और अपनी देनदारियों की वसूली के लिए प्रयासरत रहेगा. बैंक ने चंडीगढ़ की एक शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का रविवार को खुलासा किया था।

    सीएम सैनी को सदन में देना पड़ा जवाब
    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले पर विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक मामले में करीब 556 करोड़ रुपये की राशि वापस हासिल कर ली है. मुख्यमंत्री ने कहा, “लगभग 22 करोड़ रुपये के ब्याज समेत करीब 556 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर ही वापस आ गए.” उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार के विभागों से संबंधित पूरी राशि दोबारा खातों में जमा करा दी गई है और यह वसूली 24 घंटे के भीतर हुई है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, बैंक ने सरकार को सूचित किया है कि मामला चंडीगढ़ की एक शाखा से जुड़ा है, जिसमें मध्य और निचले स्तर के चार-पांच बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है. उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे बैंक कर्मचारी हों, निजी व्यक्ति हों या सरकारी कर्मचारी हों. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पहले कहा था कि यह धोखाधड़ी हरियाणा सरकार से जुड़े सीमित खातों तक ही सीमित है और चंडीगढ़ शाखा के अन्य ग्राहकों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है. मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ एयू स्माल फाइनेंस बैंक को भी सरकारी कामकाज की सूची से हटाने का निर्णय लिया है।

  • उत्तराखंड में 159 हिंदू शरणार्थियों को मिलेगी भारतीय नागरिकता, इनमें 153 पाकिस्तानी भी शामिल

    उत्तराखंड में 159 हिंदू शरणार्थियों को मिलेगी भारतीय नागरिकता, इनमें 153 पाकिस्तानी भी शामिल


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के तहत बड़ी पहल होने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने सोमवार को घोषणा की कि सिटिजनशिप अमेंडमेंट ऐक्ट 2019 (सीएए) के तहत राज्य में रह रहे 159 हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) प्रदान की जाएगी। इसके अलावा अमित शाह के सात मार्च को उत्तराखंड दौरे के दौरान कार्यक्रम में सम्मानित भी किया जाएगा।

    नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण लेने आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान किया है। यह कानून विशेष रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर चुके अल्पसंख्यक समुदायों को राहत देने के उद्देश्य से लाया गया था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर वर्षों से भारत में रह रहे शरणार्थी परिवारों की समस्याओं का समाधान किया है और उन्हें सम्मानजनक जीवन का अधिकार देने की दिशा में ठोस कदम उठाया है।

    अमित शाह के कार्यक्रम में सम्मानित होंगे
    एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात मार्च को उत्तराखंड के दौरे पर आएंगे। हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नागरिकता प्राप्त करने वाले परिवारों को सम्मानित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को राज्य सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए परिवार
    राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, नागरिकता पाने वाले 159 लोगों में से 153 पाकिस्तान और छह अफगानिस्तान से आए हैं। पाकिस्तान से आने वाले अधिकांश परिवार सिंध और बलूचिस्तान प्रांत के निवासी हैं। इन परिवारों के कई रिश्तेदार पहले से ही देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में निवास कर रहे हैं। जानकारी यह भी सामने आई है कि पाकिस्तान स्थित माता हिंगलाज मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार ने भी भारत में शरण ली थी, जिन्हें अब भारतीय नागरिकता दी जा रही है।

  • Tamilnadu : SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी… 97 लाख से ज्यादा नाम हटाए

    Tamilnadu : SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी… 97 लाख से ज्यादा नाम हटाए


    चेन्नई।
    चुनाव आयोग (Election Commission) ने तमिलनाडु (Tamilnadu) में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Voter Revision- SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) प्रकाशित कर दी है। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक ने सोमवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की, जिसके मुताबिक विभिन्न श्रेणियों के तहत 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कि राज्य में अब 5.67 करोड़ (5,67,07,380) मतदाता बचे हैं। इसमें 2,77,38,925 पुरुष, 2,89,60,838 महिलाएं और 7,617 तृतीय लिंग (थर्ड जेंडर) मतदाता शामिल हैं। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हटाए गए नामों में एक महत्वपूर्ण हिस्सा मृत मतदाताओं का है।

    पटनायक ने चेन्नई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या 6.41 करोड़ थी। उन्होंने बताया कि नयी सूची में 18-19 आयु वर्ग के 7.40 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया है जबकि विभिन्न श्रेणियों के तहत कुल 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। पटनायक ने कहा कि निरंतर अद्यतन करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी।


    SC के आदेश के अनुसार लिस्ट जारी

    संशोधन प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग के 30 जनवरी के उस निर्देश का भी पालन किया गया, जो उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जारी किया गया था। इस निर्देश में यह अनिवार्य किया गया था कि ‘तार्किक विसंगतियों’ की श्रेणी में हटाए गए नामों को हटाने के कारणों के साथ सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। ये सूचियाँ ग्राम पंचायत कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, तालुकों, उप-मंडल कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित की गईं। प्रभावित व्यक्तियों को आपत्ति दर्ज करने या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया था। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलेक्टरों) ने अपने-अपने जिलों में अंतिम मतदाता सूची जारी की।


    लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया

    इस बीच, विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण के दौरान नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया है। पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में, कुछ दिन पहले प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, कुल मतदाताओं की संख्या 9,44,211 है। वहीं शोलिंगनल्लूर में कुल 5,36,991 मतदाता हैं जिनमें से 2,62,621 पुरुष मतदाता, 2,74,254 महिला मतदाता और 116 तृतीय लिंग मतदाता हैं।

  • दिल्ली पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए बड़ा तोहफा, 20% आरक्षण और आयु में छूट लागू

    दिल्ली पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए बड़ा तोहफा, 20% आरक्षण और आयु में छूट लागू


    नई दिल्‍ली । दिल्ली पुलिस में भर्ती के नियमों में अहम बदलाव कर दिया गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने दिल्ली पुलिस (नियुक्ति एवं भर्ती) नियम, 1980 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव के तहत अब पूर्व अग्निवीरों के लिए पुरुष कांस्टेबल (एग्जीक्यूटिव) पदों पर भर्ती में विशेष प्रावधान लागू होंगे।
    20% आरक्षण और आयु में छूट
    नए संशोधन के अनुसार, पुरुष कांस्टेबल के पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण पूर्व अग्निवीरों के लिए रखा गया है। इसके अलावा, उन्हें फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) से छूट और सामान्य आयु सीमा में 3 वर्ष की राहत दी जाएगी। विशेष रूप से, अग्निवीर योजना के पहले बैच से जुड़े उम्मीदवारों को अधिकतम 5 वर्ष तक की आयु छूट मिलेगी।

    भर्ती के अवसर और पदों की संख्या
    दिल्ली पुलिस में वर्तमान में पुरुष कांस्टेबल (एग्जीक्यूटिव) के 42,451 स्वीकृत पद हैं। इन पदों पर सामान्य भर्ती की प्रक्रिया के तहत उम्र सीमा 18 से 25 वर्ष निर्धारित है। नए संशोधन के बाद बड़ी संख्या में पूर्व अग्निवीर इस भर्ती के लिए पात्र हो सकेंगे और कानून व्यवस्था में अपना करियर बना सकेंगे।

    अग्निवीर योजना का मकसद
    अग्निवीर योजना की शुरुआत 2022 में की गई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर प्रदान करना है। चार साल की सैन्य सेवा और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब पूर्व अग्निवीरों को कानून और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।

  • प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच

    प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच


    प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बाल यौन शोषण के गंभीर आरोपों पर FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है। मामला POCSO कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और पीड़ित शिष्यों ने अदालत में बच्चों के कथित शोषण के बयानों को दर्ज कराया था, जिनके आधार पर पुलिस ने देर रात FIR को औपचारिक रूप दिया।

    पुलिस की पांच सदस्यीय टीम, जिसका नेतृत्व डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य कर रहे हैं, ने घटना स्थल का नक्शा तैयार कर लिया है और पीड़ितों के मेडिकल परीक्षण के बाद साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। टीम ने माघ मेला शिविर और अन्य कथित घटनास्थलों का निरीक्षण भी किया है। पुलिस का मुख्य फोकस अब उन पीड़ितों और शिकायतकर्ता तक पहुंचकर कलम बंद बयान और सबूत दर्ज करना है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सके।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने FIR दर्ज होने के बाद कहा कि वे जांच से भागेंगे नहीं और उनके मठ के दरवाजे पुलिस के लिए हमेशा खुले हैं। उन्होंने बताया कि कई वकीलों ने उनका केस मुफ्त में लड़ने का प्रस्ताव दिया है और उनकी लीगल टीम अब अग्रिम कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है। वहीं, उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास पर सवाल उठाया और दावा किया कि वह कांधला थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी रह चुका है।

    इस हाई‑प्रोफाइल मामले में पुलिस ने स्पेशल टीम बनाई है जिसमें एसीपी और इंस्पेक्टर झूंसी समेत पांच वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम निष्पक्ष और तेज़ जांच सुनिश्चित कर रही है। POCSO Act के तहत यह मामला तीव्र और संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए पुलिस मेडिकल, फोरेंसिक और गवाह सबूत के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई तय करेगी।

    इस बीच समाज और धार्मिक जगत में भी इस मामले पर बहस जारी है। स्वामी ने आरोपों को झूठा और साजिशपूर्ण बताया है और कहा कि न्याय जल्द ही दोनों न्यायालयों में सही रूप से होगा। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बयानों का उन्होंने समर्थन करते हुए उन्हें जनता की आवाज बताया।