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  • राजधानी में कानून-व्यवस्था पर सवाल: CM आवास के नजदीक हत्या, सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला

    राजधानी में कानून-व्यवस्था पर सवाल: CM आवास के नजदीक हत्या, सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला

    नई दिल्ली। नई दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में पिछले सप्ताह एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। आम आदमी पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष रचना यादव को उनके घर के पास ही दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले उनसे नाम पूछा और पुष्टि होते ही गोलियां चला दीं। घटना के बाद आरोपी मोटरसाइकिल पर फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज में हमलावर साफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

    पति की हत्या के मामले में गवाह थीं रचना यादव

    रचना यादव की हत्या अकेली नहीं मानी जा सकती। वर्ष 2023 में उनके पति विजेंद्र यादव की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस मामले में रचना यादव प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी गवाह थीं। पुलिस का अनुमान है कि उनकी हत्या का मकसद पुराने मामले को कमजोर करना और गवाहों में डर का माहौल पैदा करना हो सकता है। रचना यादव ने अपने पीछे दो बेटियों का परिवार छोड़ा है, जिन्हें इस घटना से गहरा आघात पहुँचा है।

    AAP नेताओं ने जताया दुख और पुलिस पर उठाए सवाल

    मंगलवार को शालीमार बाग में रचना यादव की शोक सभा आयोजित की गई। इसमें आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा शामिल हुए। दोनों नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की और रचना यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हत्या के आरोपी सीसीटीवी में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, बावजूद इसके पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी है। उन्होंने इसे राजधानी की कानून-व्यवस्था के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वारदात स्थल मुख्यमंत्री के आवास से केवल 400 मीटर दूर है, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा।

    न्याय दिलाने के लिए AAP का संघर्ष

    AAP ने साफ किया कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। पार्टी ने दोहराया कि दोषियों को सख्त सजा दिलाने और परिवार को इंसाफ देने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इस घटना ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और लोगों में भय का माहौल पैदा किया है।

    रचना यादव की हत्या न सिर्फ दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह है, बल्कि यह पुराने हत्या मामलों में गवाहों की सुरक्षा की जरूरत को भी उजागर करती है। AAP नेताओं ने घटना को गंभीर बताते हुए दोषियों को तुरंत पकड़ने और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • हरियाणा में बंद होगा ‘हरिजन-गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश

    हरियाणा में बंद होगा ‘हरिजन-गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश


    नई दिल्ली। हरियाणा सरकार ने अब ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों के आधिकारिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी आधिकारिक पत्राचार, अभिलेख या संचार में इन शब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें। यह निर्णय संवैधानिक निर्देशों और भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, क्योंकि संविधान में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का प्रयोग ही स्वीकार्य है।
    इतिहास की बात करें तो महात्मा गांधी ने अनुसूचित जातियों के लिए ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसका अर्थ है ‘ईश्वर के लोग’। वहीं, बी.आर. आंबेडकर इसके विरोधी थे और वे इन्हें ‘दलित’ कहना पसंद करते थे। वर्तमान में यह शब्द कुछ विभागों और अधिकारियों द्वारा अब भी आधिकारिक संचार में उपयोग किया जा रहा था। इसी कारण राज्य सरकार ने सख्त निर्देश जारी कर सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पूर्ण पालन करने का आदेश दिया है।

    सरकारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अब से सभी आधिकारिक दस्तावेज, पत्राचार और संचार में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों का प्रयोग पूरी तरह निषिद्ध होगा।

    यह कदम केवल शब्दों पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

    हरियाणा सरकार का यह निर्णय समाज में समानता, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। अब राज्य के सभी विभाग और अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी भाषा और अभिव्यक्ति संवैधानिक और सम्मानजनक हो, जिससे किसी भी समुदाय की भावनाओं को आघात न पहुंचे।

    सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारत का संविधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को दर्शाने के लिए ‘हरिजन’ या ‘गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता।

    राज्य सरकार ने भारत सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। आदेश में यह भी कहा गया कि कुछ विभाग अभी तक इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे, इसलिए सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

    इस निर्णय से न केवल संवैधानिक सटीकता सुनिश्चित होगी, बल्कि समाज में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना भी मजबूत होगी। अब से सरकारी और आधिकारिक संचार में केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का ही प्रयोग किया जाएगा।

    हरियाणा सरकार का यह कदम समाज में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके माध्यम से राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संवेदनशील शब्दावली का उपयोग न हो और सभी वर्गों के लिए सम्मानजनक भाषा अपनाई जाए।

  • MP: बसंत पंचमी इस साल जुमे के दिन.. धार की ऐतिहासिक भोजशाला में टकराव की आशंका

    MP: बसंत पंचमी इस साल जुमे के दिन.. धार की ऐतिहासिक भोजशाला में टकराव की आशंका


    धार।
    इस साल बसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्योहार शुक्रवार 23 जनवरी को पड़ रहा है। जिसके चलते मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के धार शहर (Dhar city ) में स्थानीय पुलिस-प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। दरअसल यहां पर स्थित ऐतिहासिक महत्व की भोजशाला (Historical Bhojshala) में हर शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं, वहीं बसंत पंचमी के दिन हिंदू समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक माता सरस्वती के चित्र की पूजा-अर्चना करते हैं। अब इस बार बसंत पंचमी का पर्व शुक्रवार को होने की वजह से प्रशासन के लिए यहां पूजा व नमाज करवाना बेहद चुनौती पूर्ण कार्य बन गया है। ऐसे में दोनों समुदायों के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता भी बरत रहा है। इस बीच प्रशासन ने मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा की और लोगों से शांति व सौहार्द बनाए रखने की अपील की।


    हिंदू समाज करना चाहता है पूरे दिन पूजा-अर्चना

    दरअसल इस आशंका की वजह यह है कि भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति मांगी है, जबकि मुस्लिम समाज ने शुक्रवार होने के कारण दोपहर एक बजे से तीन बजे तक यहां कमाल मौला मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए ज्ञापन सौंपा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला में प्रत्येक मंगलवार व बसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को पूजा-अर्चना और शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज अदा करने की अनुमति दी हुई है।


    बसंत पंचमी पर हो अखंड पूजा; भोज उत्सव समिति

    भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारा लक्ष्य स्पष्ट है। किसी भी सूरत में 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर अखंड पूजा का आयोजन किया जाएगा। सूर्योदय से अखंड पूजा होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम संघर्ष का रास्ता अपनाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘किसी भी हालत में भोजशाला खाली नहीं करेंगे। पहले भी नहीं किया था और अब भी नहीं करेंगे।’


    मुस्लिमों ने ज्ञापन सौंपकर मांगी नमाज की इजाजत

    इस बीच, मुस्लिम समाज ने भोजशाला चौकी पर ASI के महानिदेशक के नाम ज्ञापन सौंपकर 23 जनवरी को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति देने की मांग की है। मुस्लिम समाज ने ज्ञापन में कहा कि इस समयावधि में जुमे की नमाज अप्रभावित, निर्बाध एवं विधिसम्मत रूप से किया जाना अपेक्षित है।


    IG ने किया धार का दौरा, लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा

    इंदौर ग्रामीण रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अनुराग ने मंगलवार को धार का दौरा किया और पुलिस नियंत्रण कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर का भी निरीक्षण किया।


    इतनी सख्त रहेगी सुरक्षा व्यवस्था, 8 हजार जवान रहेंगे तैनात

    अनुराग ने संवाददाताओं से कहा कि 23 जनवरी के मद्देनजर धार में भारी पुलिस बल तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा, ’23 जनवरी को बसंत पंचमी भी है और शुक्रवार भी। इसलिए लोग सौहार्द और शांति के साथ त्योहार मनाएं। बसंत पंचमी को लेकर लगभग 8,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे, जिनमें CRPF और त्वरित कार्रवाई बल सहित विभिन्न बल शामिल होंगे।’

    उन्होंने बताया कि इस दौरान नियमित गश्त की जाएगी और शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी जाएगी। संवेदनशील इलाकों और सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


    10 साल पहले भी शुक्रवार को पड़ी थी बसंत पंचमी

    इससे पहले वर्ष 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन थी, जब भोजशाला में पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन तथा झड़पें हुई थीं। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है।

    ASI की सात अप्रैल 2003 को जारी व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को हर मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमान हर शुक्रवार यहां नमाज पढ़ सकते हैं। पिछले 23 सालों से यह व्यवस्था है।

  • झारखंड BJP अध्यक्ष का ऐलान 14 जनवरी को, 13 जनवरी को होगा चुनाव और नामांकन प्रक्रिया

    झारखंड BJP अध्यक्ष का ऐलान 14 जनवरी को, 13 जनवरी को होगा चुनाव और नामांकन प्रक्रिया


    झारखंड । झारखंड भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा 14 जनवरी को की जाएगी। 13 जनवरी को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य के लिए नामांकन प्रक्रिया होगी, और उसके बाद दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। फिर दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। अगर कोई चुनाव की आवश्यकता पड़ी तो 14 जनवरी को दोपहर 2 बजे के बाद प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इस दौरान यदि मतदान की प्रक्रिया होती है, तो उसे भी पूरा किया जाएगा। फिलहाल, बाबूलाल मरांडी झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष हैं, और वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। हालांकि, पार्टी में कई बदलावों की संभावनाएं हैं, और इस बार आदित्य साहू का नाम सबसे आगे चल रहा है। आदित्य साहू अभी झारखंड बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और राज्यसभा के सांसद भी हैं, जिससे उनकी अध्यक्ष बनने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।

    झारखंड में बीजेपी के संगठनात्मक चुनाव

    9 जनवरी को झारखंड बीजेपी के 23 सांगठनिक जिलों के निर्वाचित जिलाध्यक्षों के नाम घोषित कर दिए गए हैं। प्रदेश चुनाव अधिकारी, बीजेपी के महामंत्री और सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा के अनुसार, इन चुनावों की प्रक्रिया प्रदेश स्तर से नियुक्त चुनाव अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की निगरानी में संपन्न कराई गई। खास बात यह है कि इन जिलाध्यक्षों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं, और सामाजिक दृष्टि से चार जिलाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति वर्ग से, एक अनुसूचित जाति वर्ग से, और बाकी पिछड़ा और सामान्य वर्ग के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा आठ जिलाध्यक्ष ऐसे भी हैं जिन्हें दोबारा निर्वाचित किया गया है।

    बीजेपी संगठन चुनाव का महत्व

    झारखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बीजेपी के संगठन चुनाव लंबे समय से लटके हुए थे। इनमें से यूपी और गुजरात को नए अध्यक्ष मिल चुके हैं, और राष्ट्रीय स्तर पर भी नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। अब, झारखंड, कर्नाटका, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बनने का इंतजार है, और 13-14 जनवरी को होने वाली चुनाव प्रक्रिया के बाद इन राज्यों में भी संगठनात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

  • नारायणपुर महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों की खरीदी, प्राचार्य समेत पांच निलंबित

    नारायणपुर महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों की खरीदी, प्राचार्य समेत पांच निलंबित


    रायपुर । छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों रुपये की खरीदी करने का मामला सामने आया है जिसे लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। इस वित्तीय अनियमितता और खरीदी नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में कॉलेज के प्राचार्य और तीन सहायक प्राध्यापकों समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह मामला महासमुंद जिले के बाद सामने आया है, जहां भी इसी तरह की अनियमितताएं पाई गई थीं। अब नारायणपुर जिले में भी बिना निविदा टेंडर प्रक्रिया अपनाए पीएम-उषा फंड से खरीदी की गई है जिससे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
    क्या है पूरा मामला
    नारायणपुर जिले के नवीन वीरांगना रमोतिन माड़िया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय में पीएम उषा फंड से खरीदी किए गए उपकरणों और सामग्रियों को लेकर सवाल उठ रहे थे। नियमों के अनुसार, जब सरकारी फंड से किसी प्रकार की खरीदारी होती है तो टेंडर प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी तरह से नजरअंदाज की गई। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योगेन्द्र कुमार पटेल और सहायक प्राध्यापकों भूषण जय गोयल, किशोर कुमार कोठारी, हरीश चंद बैद और नोहर राम को निलंबित कर दिया है। विभाग ने इन आरोपियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू करने का फैसला किया है।

    उच्च शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

    उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि विभाग लगातार भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में कड़ी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी फंड का सही उपयोग हो और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सभी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं। यह मामला उन लाखों छात्रों और शिक्षकों के लिए एक बड़ा संदेश है जिनका भविष्य सरकारी योजनाओं और फंड्स पर निर्भर करता है। इसके अलावा इससे यह भी साबित होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ विभाग की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी तरह के गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

  • बिहार कांग्रेस चीफ राजेश राम का बड़ा बयान, हमारे विधायक पूरी तरह एकजुट, राजनीति में जो होता है वो कहीं नहीं जाता

    बिहार कांग्रेस चीफ राजेश राम का बड़ा बयान, हमारे विधायक पूरी तरह एकजुट, राजनीति में जो होता है वो कहीं नहीं जाता


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मची है। हाल ही में बिहार कांग्रेस चीफ राजेश राम ने जेडीयू के दावों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि कांग्रेस के सभी छह विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। जेडीयू ने दावा किया था कि कांग्रेस के कुछ विधायक एनडीए के संपर्क में हैं, लेकिन राजेश राम ने इसे पूरी तरह खारिज किया और राजनीति की बारीकियों पर भी अपनी राय रखी।

    विधायक एकजुट, जेडीयू के दावे पर सख्त प्रतिक्रिया
    राजेश राम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे जो छह विधायक हैं, वे सभी एकजुट हैं। राजनीति में जो की जाती है वह अक्सर छिपी रहती है और जो कही जाती है, उसका पता किसी को नहीं चलता। आप कह सकते हैं कि जेडीयू और बीजेपी के विधायक हमारे संपर्क में हैं, लेकिन यह सिर्फ अफवाहें हैं।

    वास्तविकता यह है कि मेरे विधायक पूरी तरह साथ हैं।”

    उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में बुलाई गई बैठक में सिर्फ तीन विधायक ही उपस्थित हुए थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अन्य विधायक अलग हैं। राजेश राम ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस संगठन मजबूत और एकजुट है और आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और भी स्पष्ट होगी।

    राजनीति की बारीकियां: जो होता है वह कहीं नहीं जाता”
    राजेश राम ने राजनीति की जटिलताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “मैं लगातार दो टर्म में विधायक रहा हूं। लगातार यह चलता रहता है कि विधायक टूटने की बातें होती रहती हैं, लेकिन जो टूटने वाला होता है, उसका पता नहीं चलता। वोटों की चोरी या राजनीतिक चालाकियां इतनी सूक्ष्म होती हैं कि जनता को पता ही नहीं चलता।
    राजेश राम का यह बयान यह दर्शाता है कि कांग्रेस संगठनात्मक मजबूती और विधायक एकता पर पूरी तरह ध्यान दे रही है और किसी भी अफवाह या राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होगी।

    सीएम नीतीश कुमार की यात्रा पर तीखी टिप्पणी
    राजेश राम ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया यात्रा पर भी टिप्पणी की और कहा, “इसका कोई मतलब नहीं है। बिहार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। ऐसे में यात्रा निकालने से कोई फायदा नहीं होगा। जनता परेशान है और उन्हें वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।”

    इस बयान से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस का फोकस केवल राजनीतिक आरोपों या शोर-शराबे में फंसने पर नहीं है, बल्कि जनता और संगठन को मजबूत करने पर है।

    खरमास के बाद नई सोच के साथ संगठन को मजबूत करेंगे
    राजेश राम ने आगे कहा, “आज 12 बजे रात के बाद खरमास खत्म हो जाएगा। इसके बाद हम नई सोच के साथ पार्टी संगठन को मजबूत करेंगे। कई ऐसी योजनाएं और पहलें होंगी, जो पार्टी और जनता दोनों के बीच सकारात्मक प्रभाव डालेंगी।”

    इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस खरमास के बाद सक्रिय राजनीति में उतरने की तैयारी कर रही है। राजेश राम का जोर संगठन और विधायक एकता पर है, ताकि पार्टी आगामी चुनावों में मजबूत स्थिति में रहे।

    सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
    राजेश राम के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे कांग्रेस की मजबूती और ईमानदारी के संकेत के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे चुनावी रणनीति के तहत दिया गया बयान मान रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजेश राम का यह बयान बिहार की सियासत में कांग्रेस की स्थिति को स्पष्ट करने वाला है। उन्होंने साफ कर दिया कि पार्टी किसी भी तरह की राजनीतिक अफवाहों या जेडीयू के दावों से प्रभावित नहीं होगी।

    कुल मिलाकर, राजेश राम का बयान यह साबित करता है कि कांग्रेस के विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और पार्टी संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में गंभीर है। खरमास खत्म होने के बाद पार्टी की नई पहल और रणनीति बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैराजनीतिक हलचल और बयानबाजी के बीच, राजेश राम ने साफ संदेश दिया है कि कांग्रेस संगठनात्मक मजबूती और विधायक एकता पर ही अपनी प्राथमिकता रखती है, और यह आने वाले चुनावों में उसका बड़ा फायदा साबित हो सकता है।

  • मैं तुम्हें लात मारूंगा, UP और बिहार के लोगों को राज ठाकरे की चेतावनी; और क्या कहा

    मैं तुम्हें लात मारूंगा, UP और बिहार के लोगों को राज ठाकरे की चेतावनी; और क्या कहा

    महाराष्ट्र। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश और बिहार के अप्रवासियों को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर महाराष्ट्र में रह रहे अन्य राज्यों के लोग स्थानीय भाषा हिंदी का सम्मान नहीं करेंगे, तो उन्हें ‘लात मारकर’ बाहर किया जाएगा। इस बयान के साथ ही राज ठाकरे ने भाषा संरक्षण और स्थानीय अधिकारों पर अपनी सख्त नीति को स्पष्ट किया। रविवार को उन्होंने अपने चचेरे भाई और शिवसेना के वरिष्ठ नेता उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर मुंबई में एक रैली में हिस्सा लिया। ध्यान रहे कि बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 15 जनवरी को होने जा रहे हैं, ऐसे में यह बयान चुनावी माहौल को और गर्मा सकता है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने अपने बयान को और तीखा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मुझे किसी भाषा से नफरत नहीं है, लेकिन अगर हिंदी को जबरन थोपा गया, तो मैं आपको लात मारकर बाहर कर दूंगा।”

    राज ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि बाहर से आने वाले लोग हर दिशा से महाराष्ट्र में प्रवेश कर रहे हैं और यहां के स्थानीय लोगों का हक छीन रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर महाराष्ट्र की जमीन और भाषा दोनों हाथ से निकल गईं, तो यहां के मूल निवासियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है और भाषा व पहचान का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

    राज ठाकरे ने अपने संबोधन में भावनात्मक और सख्त लहजे में कहा कि यह चुनाव मराठी मानुष के लिए आखिरी मौका है। उन्होंने चेतावनी दी, “अगर आज भी मौका चूक गए, तो फिर खत्म हो जाओगे। मराठी और महाराष्ट्र के अस्तित्व के लिए अब एकजुट होने का समय है।” उन्होंने कहा कि मुंबई यूं ही नहीं मिली, इसके पीछे कई लोगों की कुर्बानियां हैं, और अगर आज चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियों को क्या जवाब देंगे।

    इसके साथ ही राज ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सुबह 6 बजे से तैनात बीएलए पूरी तरह तैयार, अलर्ट और चौकस रहें, किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति दोबारा वोट डालने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत बाहर कर दिया जाए। यह बयान चुनावी माहौल में और अधिक तीखापन ले आया है और महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ा रहा है।
    राज ठाकरे ने रैली में तीखे और भावनात्मक अंदाज़ में कहा कि यह चुनाव मराठी मानुष के अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा, “अगर अब भी मौका हाथ से निकल गया, तो फिर सब खत्म हो जाएगा। मराठी और महाराष्ट्र को बचाने के लिए आज एकजुट होना ही होगा।” उन्होंने याद दिलाया कि मुंबई किसी एक की नहीं, बल्कि बलिदानों से बनी है, और अगर आज आवाज़ नहीं उठाई गई तो आने वाली पीढ़ियों को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।

    इसके साथ ही राज ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सख्त संदेश देते हुए कहा कि सुबह 6 बजे से तैनात बीएलए पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी पर रहें, पूरी तरह अलर्ट और चौकस रहें, किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर कोई व्यक्ति दोबारा वोट डालने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत बाहर किया जाए। राज ठाकरे के इस बयान ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है और महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है
  • J&K: पाकिस्तान से सटे बॉर्डर इलाकों में उड़ते देखे गए संदिग्ध ड्रोन… सर्च ऑपरेशन जारी

    J&K: पाकिस्तान से सटे बॉर्डर इलाकों में उड़ते देखे गए संदिग्ध ड्रोन… सर्च ऑपरेशन जारी


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के सांबा, राजौरी और पुंछ जिलों में इंटरनेशनल बॉर्डर (आईबी) (International Border – IB) और लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control – LoC) के पास कई फॉरवर्ड इलाकों में रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने संदिग्ध ड्रोन (Suspicious drone) की हलचल देखी। उन्होंने बताया कि सभी उड़ने वाली चीजें पाकिस्तान की तरफ से आई थीं, और कुछ मिनट तक भारतीय इलाके के ऊपर मंडराने के बाद वापस चली गईं।

    अधिकारियों के अनुसार, फॉरवर्ड इलाकों में संदिग्ध ड्रोन गतिविधि देखने के बाद सुरक्षा बलों ने जमीन पर तलाशी अभियान शुरू किया है। उन्होंने बताया कि राजौरी में LoC के पास नौशेरा सेक्टर की रखवाली कर रहे सेना के जवानों ने शाम करीब 6.35 बजे गनिया-कलसियां ​​गांव के ऊपर ड्रोन की हलचल देखने के बाद मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की।

    राजौरी जिले के टेरियाथ के खब्बर गांव में शाम 6.35 बजे एक और ड्रोन देखा गया। अधिकारियों ने बताया कि चमकती रोशनी वाली यह उड़ने वाली चीज कालाकोट के धर्मसाल गांव की तरफ से आई और भरख की ओर चली गई। उन्होंने बताया कि सांबा के रामगढ़ सेक्टर में चक बबराल गांव के ऊपर शाम करीब 7.15 बजे चमकती रोशनी वाली ड्रोन जैसी एक चीज़ कई मिनट तक मंडराती हुई देखी गई। पुंछ जिले में LoC के पास मनकोट सेक्टर में शाम 6.25 बजे तैन की तरफ से टोपा की ओर एक और ड्रोन जैसी चीज जाती हुई देखी गई।

    इससे पहले, शुक्रवार रात को, सुरक्षा बलों ने सांबा जिले में बॉर्डर के पास घगवाल के पालूरा गांव में पाकिस्तान से आए एक ड्रोन द्वारा गिराए गए हथियारों का जखीरा बरामद किया। उन्होंने बताया कि बरामदगी में दो पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 राउंड और एक ग्रेनेड शामिल था। बता दें कि मई महीने में भी पाकिस्तान की ओर से कई ड्रोन भारतीय सीमा में आए थे। तब भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें नाकाम कर दिया था। भारतीय सेना ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था और चार दिनों तक दोनों देशों में बड़ा संघर्ष देखने को मिला। इसके बाद, फिर दोनों देशों के बीच सीजफायर का फैसला हो गया।

  • पीएम मोदी बोले- सोमनाथ को तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमट गए, मंदिर और भारत आज भी अडिग

    पीएम मोदी बोले- सोमनाथ को तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमट गए, मंदिर और भारत आज भी अडिग


    गुजरात। गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ऐतिहासिक और प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लगभग 1000 साल पहले जब आक्रमणकारियों ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी, तब उन्हें लगा कि उन्होंने हिंदुस्तान की शक्ति को खत्म कर दिया, लेकिन आज वही मंदिर खड़ा है और उसकी ध्वजा गर्व से फहरा रही है। पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि दुर्भाग्य से आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण और देश की एकता का विरोध करती हैं।
    मोदी ने याद दिलाया कि जब स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश हुई। 1951 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर में शामिल होने पर आपत्ति जताई थी। मोदी ने कहा कि देशवासियों को आज भी ऐसी ताकतों से सतर्क और एकजुट रहने की आवश्यकता है, जो देश को बांटने में लगी हैं।

    पीएम मोदी ने मंदिर में लगभग 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। उन्होंने शिवलिंग पर जल चढ़ाया, पंचामृत से अभिषेक किया और फूल अर्पित किए। इसके बाद उन्होंने कहा कि 1026 में पहले आक्रमण के बाद गजनवी ने सोमनाथ का वजूद मिटाने की कोशिश की थी, लेकिन मंदिर फिर से पुनर्निर्मित हुआ।

    इसके बाद खिलजी ने मंदिर को फिर तोड़ा, लेकिन जूनागढ़ के राजाओं ने इसे पुनः खड़ा किया। मोदी ने स्पष्ट किया कि न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत।

    पीएम ने कहा कि आज जब सोमनाथ मंदिर के आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ और इसके पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो रहे हैं, तो यह हमें हमारे गौरवशाली इतिहास और आस्था की शक्ति की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि यहां 72 घंटे तक अनवरत ओमकार और मंत्रोच्चार चलता रहा और इस हजार साल की गाथा को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह केवल समय और अनुभव ही संकलित कर सकता है।

    सद्भावना ग्राउंड में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह अद्भुत समय और वातावरण है। समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति इस दिव्य उत्सव को और भव्य बना रही है। मोदी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सेवा का अवसर मिला।

    उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारत अपने गौरव को नई बुलंदियों तक ले जाएगा और गरीबी, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के खिलाफ लगातार लड़ाई जारी रखेगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि जिस देश के पास अपनी विरासत होती है, वह उस पर गर्व करता है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने उस विरासत को भूलने की कोशिश की। सोमनाथ मंदिर ने यह साबित कर दिया कि आस्था, साहस और विश्वास किसी भी आघात के सामने टिक सकते हैं।

    सोमनाथ में पूजा-अर्चना और रैली के बाद पीएम मोदी ने रोड शो भी किया और लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने एकजुटता, स्वाभिमान और देशभक्ति का संदेश दोहराया।

  • ग्वालियर समेत MP के 7 जिलों में शीतलहर का अलर्ट, 20 जिले कोहरे की चपेट में; 3 दिन बाद फिर लौटेगी कड़ाके की ठंड

    ग्वालियर समेत MP के 7 जिलों में शीतलहर का अलर्ट, 20 जिले कोहरे की चपेट में; 3 दिन बाद फिर लौटेगी कड़ाके की ठंड


    नई दिल्ली! मध्यप्रदेश ठिठुर रहा है। ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में शीतलहर का असर महसूस हो रहा है। रविवार को ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और सतना में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, प्रदेश के 20 से अधिक जिले सुबह कोहरे की चपेट में हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिन तापमान में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन तीन दिन बाद फिर से कड़ाके की ठंड शुरू होगी। रविवार को ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और सतना में सर्द हवाएं चलेंगी, जिससे दिन का तापमान भी सामान्य से कम रहेगा।

    सुबह के समय ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, रायसेन, शाजापुर, देवास, सीहोर, गुना, अशोकनगर और विदिशा में कहीं घना तो कहीं मध्यम कोहरा रहा।

    सबसे ठंडा पचमढ़ी, पारा 5.8 डिग्री
    शनिवार-रविवार की रात में प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 5 बड़े शहरों में इंदौर सबसे ठंडा रहा, यहां तापमान 7 डिग्री तक गिरा।

    20 से अधिक जिलों में कोहरे के कारण दिल्ली से आने वाली ट्रेनों की टाइमिंग प्रभावित हुई।

    भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, पचमढ़ी, खजुराहो, नौगांव, मंडला, उमरिया, रीवा, राजगढ़, रायसेन, दतिया, मलाजखंड, दमोह, सतना, छिंदवाड़ा, खंडवा, सीधी, खरगोन और टीकमगढ़ में तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।

    वेस्टर्न डिस्टरबेंस से बढ़ेगी ठंड
    सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण अगले दो दिन ठंड और कोहरे का असर जारी रहेगा। यह सिस्टम आगे बढ़ने के बाद तापमान में गिरावट और तेज ठंड ला सकता है। वर्तमान में उत्तर-पश्चिम भारत पर समुद्र तल से 12.6 किलोमीटर ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम हवाएं 252 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से बह रही हैं, जिसका असर मध्यप्रदेश पर भी देखा जा रहा है।

    कोहरे से ट्रेनों की टाइमिंग प्रभावित
    दिल्ली से प्रदेश में आने वाली ट्रेनों की टाइमिंग कोहरा के कारण प्रभावित हो रही है। खासकर मालवा एक्सप्रेस, पंजाब मेल और जन शताब्दी जैसी ट्रेनें लगातार लेट हो रही हैं। मालवा एक्सप्रेस भोपाल में 5 से 6 घंटे तक देरी से पहुंच रही है।

    जनवरी में कड़ाके की ठंड का रिकॉर्ड
    इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी के रिकॉर्ड टूटे हैं। जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। भोपाल में इस साल ठंड ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। मौसम विभाग के अनुसार, दिसंबर और जनवरी में प्रदेश में उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाओं के कारण तापमान में भारी गिरावट आती है।

    एमपी के बड़े शहरों में ठंड का ट्रेंड
    भोपाल में जनवरी में रात का तापमान 0.6 डिग्री तक पहुंच चुका है। इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और भोपाल में दिन में भी ठंड का असर रहता है। पिछले 10 साल के आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर और जनवरी में सर्द हवाओं के कारण कड़ाके की ठंड और कोहरा सामान्य है।