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  • ‘भारत रत्न नीतीश कुमार’ केसी त्यागी की मांग पर जीतन राम मांझी ने जताया समर्थन

    ‘भारत रत्न नीतीश कुमार’ केसी त्यागी की मांग पर जीतन राम मांझी ने जताया समर्थन


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग चर्चा का विषय बन गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि समाजवादी आंदोलन के बचे अनमोल रत्न नीतीश कुमार इस सर्वोच्च सम्मान के योग्य हैं। त्यागी ने पत्र में लिखा कि नीतीश कुमार ने समाज सेवा, किसानों और हाशिए पर गए लोगों को संगठित करने में अनमोल योगदान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों को देखते हुए नीतीश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए, ताकि उनके योगदान का इतिहास लंबे समय तक सराहा जाए।
    हमें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने फैसले से सबको चौंकाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री को भारत रत्न से नवाजेंगे।” उन्होंने कहा कि यह सम्मान नीतीश कुमार के जीवन और राजनीति में किए गए योगदान को सही मायने में दर्शाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग कोई नई बात नहीं है। पहले भी कई नेताओं और समर्थकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि नीतीश कुमार के लंबे समय तक किए गए समाजसेवी और राजनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह सम्मान उनके व्यक्तित्व और योगदान का सही मूल्यांकन होगा।

    नीतीश कुमार की सादगी, समाज सेवा और समाजवादी आंदोलन में योगदान को देखकर समर्थक मानते हैं कि भारत रत्न उनके लिए उचित और न्यायसंगत सम्मान होगा। केसी त्यागी और जीतन राम मांझी की यह पहल दिखाती है कि बिहार में उनकी लोकप्रियता और उनके योगदान की राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के बीच भी सराहना की जाती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं और नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च सम्मान देने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इस मांग से न केवल राजनीतिक समर्थन दिखता है, बल्कि जनता के बीच नीतीश कुमार की छवि और योगदान भी मजबूत होता है।

    अंततः, केसी त्यागी की पहल और जीतन राम मांझी का समर्थन नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की दिशा में एक मजबूत संदेश है। यह मामला राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इस पर और चर्चाएं होने की संभावना है।

  • 38 शिक्षकों पर गिरी गाज, डीईओ ने किया निलंबित, देखें लिस्ट

    38 शिक्षकों पर गिरी गाज, डीईओ ने किया निलंबित, देखें लिस्ट


    कांकेर । कांकेर जिले में शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 38 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। इनमें से 29 महिला शिक्षक भी शामिल हैं। यह कार्रवाई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत की गई है, जिसके तहत अतिशेष शिक्षक थे, जिन्हें नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग करने के लिए कहा गया था। हालांकि इन शिक्षकों ने निर्धारित समय सीमा तक ज्वाइनिंग नहीं की, जिसके बाद विभाग ने यह कठोर कदम उठाया।

    युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया और निलंबन की वजह

    शिक्षा विभाग ने स्कूलों में शिक्षकों के समांतर समन्वय को सुनिश्चित करने के लिए युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत कई शिक्षक अतिशेष के रूप में सामने आए। विभाग ने इन अतिशेष शिक्षकों को जुलाई 2025 तक नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग करने का निर्देश दिया था। हालांकि, जनवरी 2026 तक जिले के 39 शिक्षकों ने नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की, जिसके कारण शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए इन शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। निलंबन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि विभाग ने ज्वाइनिंग न करने को गंभीर उल्लंघन मानते हुए इसे अनुशासनहीनता के तौर पर लिया है।

    डीईओ की कार्रवाई

    कांकेर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि यह कदम उन शिक्षकों के खिलाफ उठाया गया है जिन्होंने विभागीय निर्देशों का पालन नहीं किया। डीईओ ने कहा यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के तहत की गई है और संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर शिक्षकों को जानकारी दी गई थी। इन शिक्षकों के लिए अब कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    निलंबित शिक्षकों की सूची

    निलंबन की सूची में 38 शिक्षकों के नाम शामिल हैं, जिनमें 29 महिला शिक्षक भी हैं। इन शिक्षकों के खिलाफ यह कार्रवाई उन्हें बार-बार चेतावनी देने के बावजूद ज्वाइनिंग न करने पर की गई है। यह कार्रवाई विभाग के अनुशासन और कार्यवाही की सख्त नीति को दर्शाती है।

    सम्बंधित अधिकारी और कदम

    सरकारी शिक्षा विभाग ने न केवल इन शिक्षकों को निलंबित किया है बल्कि साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि भविष्य में ऐसी स्थितियां उत्पन्न न हों। विभाग ने इस निलंबन को एक संदेश के तौर पर लिया है, ताकि भविष्य में अन्य शिक्षक अपने दायित्वों का पालन करें और शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहे। यह कदम शिक्षा विभाग द्वारा युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उठाया गया है। शिक्षकों के कार्यों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने और विभागीय नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करने से यह स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठाए हैं।

  • सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

    सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई


    कांकेर । कांकेर जिले के ग्राम मूंगवाल में स्थित सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब हो गया है। यह चावल स्थानीय राशन कार्ड धारकों को वितरण के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन चावल के गायब होने की जानकारी के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। मामले की जांच के आदेश तो दिए गए हैं, लेकिन तीन साल का समय गुजरने के बावजूद अब तक जांच में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    सेल्समैन का बयान

    दुकान के सेल्समैन, परमेश्वर तेता, ने कहा कि वह पिछले तीन साल से दुकान का संचालन कर रहे हैं और जब उन्हें यह दुकान सौंपी गई थी, तब से ही स्टॉक में कमी थी। उनका कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है। सेल्समैन का दावा है कि उन्होंने किसी भी तरह के घोटाले या अनियमितताओं में शामिल होने की बात से इनकार किया और कहा कि स्टॉक की कमी का कारण दुकान की शुरुआत में ही था।

    कलेक्टर का आश्वासन

    कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस मामले में शिकायत मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं। निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” कलेक्टर ने यह भी बताया कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और जांच के परिणाम के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित किया जाएगा।

    सरपंच की शिकायत

    ग्राम पंचायत के सरपंच, जैसारो कोर्राम ने भी इस मामले में खाद्य विभाग से शिकायत की है। उनका कहना है कि यह मामला ग्रामवासियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है और अगर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे उच्च अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाएंगे यह मामला सरकारी राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर घोटाले की ओर इशारा कर रहा है, जहां राशन कार्ड धारकों को निर्धारित चावल वितरित नहीं किया जा सका। इस मामले की तीन साल बाद भी सही से जांच नहीं हो पाई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी सिस्टम में यह तरह की अनियमितताएं सामान्य हो गई हैं। अब तक जांच की प्रक्रिया लंबी खींची गई है, लेकिन कलेक्टर के द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।

  • छत से धक्का देकर छात्रा की हत्या, आरोपी अस्पताल छोड़कर फरार

    छत से धक्का देकर छात्रा की हत्या, आरोपी अस्पताल छोड़कर फरार




    भोपाल।
    भोपाल के चूनाभट्टी इलाके में हुई एक दर्दनाक घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया है। एक छात्रा की इमारत की दूसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई, और पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह हादसा दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हत्या थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी युवक तुषार (कपिल) ने छात्रा को विवाद के दौरान छत से धक्का देकर नीचे गिरा दिया। वारदात के बाद आरोपी ने ऐसा भ्रामक प्रयास किया कि किसी को उस पर शक न हो, और वह खुद मृतक छात्रा को अस्पताल लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है।

    पुलिस के मुताबिक, घटना के दिन बीते बुधवार सुबह प्रिया कॉलेज जाने के बजाय अपने दोस्त तुषार के घर चली गई थी। तुषार चूना भट्टी इलाके की पारिका सोसाइटी में बने स्टे होम में केयर टेकर का काम करता है। दोपहर 12 बजे छात्रा की छत से गिरने की घटना हुई, और तुषार उसे अस्पताल छोड़कर भाग गया।

    परिजनों का आरोप है कि यह मामला सिर्फ विवाद तक सीमित नहीं था, बल्कि एक साल से चले आ रहे प्रेम संबंध और उत्पीड़न का परिणाम है। पहले तुषार ईश्वर नगर में रहता था और प्रिया से उसकी दोस्ती थी, लेकिन अब मामला गंभीर रूप ले चुका है। पुलिस आरोपी की तलाश में पूरी तरह सक्रिय है, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अंतिम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

    यह मामला भोपाल में छात्रों और युवाओं के बीच सुरक्षा की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है, और स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सक्रिय जांच के लिए प्रेरित करता है।

  • उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और भाजपा के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। नासिक में अपनी चचेरे भाई और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ आयोजित संयुक्त चुनावी रैली में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पार्टी इतनी बेशर्म हो गई है कि वह असुर सम्राट रावण को भी अपने खेमे में शामिल कर सकती है।

    चुनावी हिंदुत्व पर आरोप

    उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी का हिंदुत्व केवल चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने नासिक महानगरपालिका की उस योजना पर भी सवाल उठाया, जिसमें अगले साल के कुंभ मेले के लिए ‘साधुग्राम’ बनाने के लिए पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। उद्धव ने पूछा कि भाजपा का हिंदुत्व वास्तविक है या सिर्फ राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

    दागी नेताओं को प्राथमिकता देने का आरोप

    शिवसेना प्रमुख ने भाजपा के “दागी” नेताओं को पार्टी में प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया। उद्धव ने कहा कि कई वफादार नेताओं को नजरअंदाज किया गया है, जबकि पार्टी उन्हें सही अवसर नहीं दे रही। उन्होंने इस रवैये को दुखद बताया और भाजपा के आचरण पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी

    यह पहली बार नहीं है जब उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सीधे निशाना साधा हो। कुछ दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम पहले चुनाव में प्रचार कर रहे थे, लेकिन अब उनकी पार्टी को कमजोर करने में लगी हुई है।

    महाराष्ट्र में चुनावी हालात

    महाराष्ट्र में राजनीतिक परिस्थितियां इस समय उलझी हुई हैं। 15 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव होने हैं और मतगणना 16 जनवरी को होगी। इस बार शिवसेना को तोड़कर अलग पार्टी बनाने वाले एकनाथ शिंदे भी भाजपा के साथ चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिंदे दोनों पर निशाना साधा है और जनता के बीच अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की।

    उद्धव ठाकरे की नासिक रैली में भाजपा पर तंज और हिंदुत्व को लेकर सवाल, साथ ही शिंदे के सहयोग पर निशाना, महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है। चुनावों से पहले दोनों राजनीतिक धड़ों के बीच जुबानी जंग और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

  • 'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शुक्रवार को उस वक्त भड़क गईं जब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति से मिलने पहुंचीं मगर उनसे कोई मिलना नहीं आया. अपर्णा यादव, रमीज और धर्मांतरण के मामले को लेकर केजीएमयू पहुंचीं थीं. इसके बाद एक प्रेस वार्ता में अपर्णा ने कहा कि महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है? मैं तो कुछ जानकारी करने के लिए आई थी लेकिन मुझसे मिलने वॉइस चांसलर नहीं आईं. उन्होंने कहा कि पीड़िता से मेरी बात हुई थी उसने बताया केजीएमयू के एचओडी के बताने के बाद में भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

    यादव ने दावा किया कि पीड़िता को केजीएमयू के सीनियर डॉक्टर के द्वारा कहा गया कि आप महिला आयोग क्यों गई? उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को बचाने के लिए व्यक्ति विशेष काम कर रहे हैं.यादव ने विशाखा कमेटी के द्वारा जारी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बयान दिया है उनके बयान बदलने के लिए दबाव दिया जा रहा है. अपर्णा ने दावा किया कि विशाखा कमेटी को अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर बताए गए.

    उन्होंने पूछा कि क्या महिला आयोग, संवैधानिक संस्था नहीं है?

    केजीएमयू वीसी से मुलाकात के संदर्भ में यादव ने कहा कि हमारी कुछ बात होती जिस पर हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचते. शायद तब मैं प्रेसवार्ता भी नहीं करती. मुझे लगता है कि प्रदेश सरकार विधि और न्याय सम्मत काम करेगी. सीएम योगी आदित्यनाथ इन मामलों में सचेत रहते हैं.

    महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा-केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रही है, यह सब क्या चल रहा है और यहां का प्रशासन मौन है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2 साल से बिना लाइसेंस के केजीएमयू में ब्लड बैंक चल रहा है.

    यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वो इस बात को जानेंगी तो वह भी इसे गंभीरतापूर्वक समझेंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जब रमीज मलिक यहां से भागा तब प्रोफेसर वाहिद अली और सुरेश बाबू के संपर्क में रहे. केजीएमयू प्रशासन ने उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

  • भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक

    भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक


    भोपाल। भोपाल नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पानी में कैंसर, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया मौजूद हैं। नल से आने वाला पानी कुछ ही मिनटों में लाल हो जाता है और बदबू इतनी तीव्र होती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स), कैल्शियम, टोटल हार्डनेस, सल्फेट और कोलीफॉर्म भी उच्च मात्रा में पाए गए हैं।

    स्थानीय लोग अब पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।

    आदमपुर खंती और पड़रिया के इलाकों में लोग भूजल का पानी पीने के बजाय, केवल फसलों की सिंचाई और साफ-सफाई में इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ इलाकों में तो हैंडपंप से लाल और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिसे देखकर लोग पीने से डर रहे हैं।

    पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष पांडे के मुताबिक, जनवरी 2018 से भोपाल का कचरा आदमपुर खंती में डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास के 7 गांवों का भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है। डंपिंग साइट पर फिलहाल 14 लाख टन कचरा जमा है, जिससे लिक्विड रसायन (लीचेट) निकलकर पानी को और दूषित कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल का भूजल इंदौर से भी ज्यादा गंभीर स्थिति में है। आदमपुर खंती और आसपास के इलाकों में भूजल में आयरन और क्रोमियम भी मिले हैं, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। CPCB और MPPCB की रिपोर्ट्स में भी यह तथ्य सामने आया है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें से 800 टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए खंती भेजा जाता है। लेकिन यूनिट की क्षमता केवल 420 टन है, जिससे कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है और आसपास के गांवों का पानी दूषित होता जा रहा है।

    भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर का पानी फेल सैंपल्स दे चुका है। पानी में पाया गया ई-कोलाई बैक्टीरिया वही है, जो इंदौर के भागीरथपुरा में पाया गया था और जिसके कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
    भोपाल का ग्राउंड वाटर वर्तमान में पीने योग्य नहीं है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित पानी की तत्काल आवश्यकता है। प्रशासन और पर्यावरण एजेंसियों को मिलकर पानी की सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि जनता की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय

    ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय


    ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे के बीच चल रहे संपत्ति विवाद में अब राजीनामा दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। यह मामला लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन है और इसके समाधान के लिए दोनों पक्ष समझौते की प्रक्रिया में हैं। ग्वालियर खंडपीठ में बुआओं की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को निर्धारित है।
    बुआओं की ओर से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि पहले से तय 90 दिनों की अवधि को बढ़ाकर अतिरिक्त 30 दिन दिया जाए, ताकि समझौते की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। कोर्ट ने इस आवेदन को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों पक्ष बिना किसी बाधा के विवाद का समाधान कर सकें और समझौते को विधिक रूप से अंतिम रूप दिया जा सके।

    यह संपत्ति विवाद मूल रूप से 2010 में जिला न्यायालय, ग्वालियर में दर्ज हुआ था। तब से लेकर अब तक यह मामला लंबित है और 2017 में इसे हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया। विवाद मुख्य रूप से सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर है। बुआओं और भतीजे दोनों पक्ष चाहते हैं कि यह विवाद समझौते के माध्यम से समाप्त हो जाए, ताकि लंबित कानूनी प्रक्रियाओं का बोझ खत्म हो सके।

    सितंबर 2025 में जिला न्यायालय ने याचिका का निस्तारण करते हुए दोनों पक्षों को 90 दिनों में समझौता पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित केस के कारण यह समय पूरा नहीं हो पाया। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबित मामले के निस्तारण के बाद दोनों पक्षों को समझौता दाखिल करने के लिए अतिरिक्त 30 दिन का समय मिलेगा।

    इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी औपचारिकताएं और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हों और किसी भी तरह का विवाद भविष्य में न उभरे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम पारिवारिक विवादों के शीघ्र समाधान के लिए अहम है। अक्सर लंबित कानूनी मामले सालों तक अटके रहते हैं और दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के मामले में भी यह समय वृद्धि पारिवारिक समझौते को सुरक्षित और न्यायसंगत तरीके से पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    इस मामले से जुड़े जानकार बताते हैं कि समझौते की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

    इसमें संपत्ति के बंटवारे, कानूनी अधिकारों की पुष्टि और किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक बाधा का समाधान शामिल है। अतिरिक्त 30 दिन की अवधि दोनों पक्षों को ये सुनिश्चित करने का अवसर देती है कि समझौते में सभी औपचारिकताएं और दस्तावेज़ सही तरीके से तैयार किए जाएं।

    कुल मिलाकर, यह कदम ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच लंबित संपत्ति विवाद को शांतिपूर्ण और कानूनी ढंग से समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कोर्ट की अनुमति से दोनों पक्ष बिना किसी दबाव के समझौता अंतिम रूप दे सकेंगे। इससे परिवार के बीच तनाव कम होगा और लंबित न्यायिक प्रक्रियाओं का बोझ भी घटेगा।

    इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में होगी, जिसके बाद अतिरिक्त 30 दिनों में समझौते की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूर्ण होने से परिवार के सभी सदस्यों के बीच संपत्ति विवाद का स्थायी समाधान निकलने की संभावना है।

  • ग्वालियर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड का कहर: 25 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त, न्यूनतम तापमान 5 डिग्री, जनजीवन बेहाल

    ग्वालियर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड का कहर: 25 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त, न्यूनतम तापमान 5 डिग्री, जनजीवन बेहाल


    ग्वालियर । ग्वालियर में कड़ाके की ठंड ने इस बार सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। जनवरी में बीते 25 साल का रिकॉर्ड टूट गया, जब अधिकतम तापमान गिरकर सिर्फ 10.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी लुढ़ककर 5 डिग्री दर्ज किया गया।
    मौसम विभाग के अनुसार बीते 100 साल में यह दूसरी बार है जब जनवरी के महीने में ग्वालियर में इतनी गंभीर ठंड दर्ज की गई है। घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के चलते सुबह से लेकर दिन तक ठंड का असर बना हुआ है और लोगों को दिन में भी रात जैसा एहसास हो रहा है।

    शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे तक पूरा शहर कोहरे की मोटी चादर में लिपटा रहा। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। पिछले आठ दिनों से सुबह देर तक और शाम को जल्दी घना कोहरा छा रहा है। दृश्यता घटकर 60 से 100 मीटर रह गई, जिससे वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।

    ठंड के प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्राइमरी और मिडिल स्कूलों की छुट्टियां 10 जनवरी तक बढ़ा दी हैं।

    मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 11.1 डिग्री कम रहने के कारण दिन को ‘कोल्ड सीवियर डे’ घोषित किया गया। इससे पहले साल 2019 में अधिकतम तापमान 8.3 डिग्री तक गिरा था। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही जेट स्ट्रीम हवाओं के कारण घना कोहरा बना हुआ है। वहीं कश्मीर की ओर से करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही बर्फीली हवाएं हिमालय की बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक ला रही हैं, जिससे ठंड और ज्यादा बढ़ गई है।

    ठंड से राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने शहर के प्रमुख चौराहों पर अलाव जलवाए हैं, ताकि राहगीरों और बेसहारा लोगों व जानवरों को कुछ राहत मिल सके।

    इसके बावजूद धूप न के बराबर दिखाई दे रही है और सूरज के तेवर पूरी तरह ढीले पड़े हुए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ठंड से राहत की कोई उम्मीद नहीं है। अगले 48 घंटों में न्यूनतम तापमान और गिर सकता है और घना कोहरा भी बना रहेगा।

    कड़ाके की ठंड और कोहरे का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और ग्वालियर आने वाली कई ट्रेनें 5 से 6 घंटे तक देरी से चल रही हैं। दिल्ली से आने वाली पंजाब मेल करीब 4 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस लगभग 2 घंटे और मंगला एक्सप्रेस करीब 5 घंटे लेट रही। वहीं भोपाल से आने वाली मंगला एक्सप्रेस भी साढ़े तीन घंटे की देरी से पहुंची, जबकि केरल और समता एक्सप्रेस भी अपने निर्धारित समय से काफी देर से चल रही हैं।

    हवाई यातायात पर भी कोहरे का असर पड़ा है। ग्वालियर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स 2 से 3 घंटे तक देरी से संचालित हो रही हैं। गुरुवार को इंडिगो की मुंबई और दिल्ली फ्लाइट्स और एयर इंडिया की बेंगलुरु फ्लाइट कोहरे के कारण देर से आईं और रवाना हुईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर ग्वालियर में ठंड ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया है और आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

  • मां ने लगाया मौत को गले पास बैठी बिलखती रही 2 साल की मासूम मंजर देख कांप उठी रूह

    मां ने लगाया मौत को गले पास बैठी बिलखती रही 2 साल की मासूम मंजर देख कांप उठी रूह


    कानपुर । उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। शहर के रावतपुर थाना क्षेत्र के आनंद नगर इलाके में एक महिला ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना उस वक्त और भी दर्दनाक हो गई जब मृतका की दो साल की मासूम बेटी अपनी मां को फंदे पर लटका देख वहीं बैठकर बिलखती रही। जिस मां की गोद में वह सुकून पाती थी उसी मां को बेजान हालत में देख बच्ची की चीखें पूरे घर में गूंजती रहीं।

    शोर सुनकर जब कमरे में पहुंचे परिजन जानकारी के मुताबिक आनंद नगर निवासी प्रॉपर्टी डीलर राकेश तिवारी की पत्नी संध्या तिवारी 38 ने बुधवार देर शाम अज्ञात कारणों के चलते कमरे में पंखे के कुंडे से दुपट्टे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के वक्त घर के अन्य सदस्य अपने कामों में व्यस्त थे। काफी देर तक जब संध्या कमरे से बाहर नहीं निकली और अंदर से छोटी बेटी नायरा के रोने की लगातार आवाजें आने लगीं तो परिवार को अनहोनी की आशंका हुई। संध्या की 14 वर्षीय बड़ी बेटी भूमि जैसे ही कमरे के भीतर पहुंची वहां का खौफनाक मंजर देख उसकी चीख निकल गई। उसकी आंखों के सामने उसकी मां का शव फंदे से लटक रहा था और पास ही उसकी दो साल की छोटी बहन नायरा अपनी मां के शव के पास बैठी रो रही थी।

    पुलिस जांच और परिजनों का हाल भूमि की चीख पुकार सुनकर घर के अन्य सदस्य और आस-पड़ोस के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद रावतपुर थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घर में मचे इस कोहराम से हर किसी की आंखें नम हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि संध्या ने आखिर इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।

    अनसुलझे सवाल और मासूम की सिसकियां इस घटना ने कई सवाल भी पीछे छोड़ दिए हैं। पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है कि आखिर सुसाइड के पीछे की मुख्य वजह क्या थी? क्या यह घरेलू कलह का मामला है या फिर कोई और मानसिक तनाव। हालांकि सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात वह दृश्य था जिसमें एक दो साल की मासूम को यह भी समझ नहीं आ रहा था कि उसकी मां उसे हमेशा के लिए छोड़कर जा चुकी है। वह बस अपनी मां को उठने की उम्मीद में निहारती रही। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के सही कारणों और समय की पुष्टि हो सके। इस घटना ने पूरे आनंद नगर इलाके में मातम पसरा दिया है।