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  • लेक सिटी नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा… NGT ने दी चेतावनी

    लेक सिटी नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा… NGT ने दी चेतावनी


    नैनीताल।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) की सरोवर नगरी नैनीताल (Lake City Nainital) पर बढ़ते पर्यावरणीय खतरे को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal-NGT) ने बड़ा अलर्ट जारी किया है. मंगलवार को नैनीताल क्लब में आयोजित हाई लेवल समीक्षा बैठक में NGT के माननीय सदस्य और न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने साफ शब्दों में कहा कि यदि नदी-नाले, प्राकृतिक जलस्रोत और जलधाराएं नहीं बचीं तो पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिकी को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा.

    बैठक में नैनीताल के सामने खड़ी कई गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. इनमें नैनीझील का लगातार घटता जलस्तर, झील में बढ़ता प्रदूषण, कचरा प्रबंधन की समस्या, ड्रेनेज और सीवरेज नेटवर्क की स्थिति तथा जलस्रोतों पर बढ़ते अतिक्रमण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

    बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि नैनीझील का जलस्तर लगातार प्रभावित हो रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उन प्राकृतिक जलस्रोतों का कमजोर होना है जो सालों से झील को पानी उपलब्ध कराते रहे हैं. यदि समय रहते इन स्रोतों को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.


    वॉटर बॉडी और वेटलैंड से हटेगा अतिक्रमण

    अधिकारियों ने जानकारी दी कि नैनीताल शहर में कुल 13 वॉटर बॉडी और वेटलैंड मौजूद हैं. ये सभी बरसात के पानी को जमा करके धीरे-धीरे नैनीझील तक पहुंचाते हैं. यही जलस्रोत सर्दियों के मौसम में भी झील के जलस्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

    हालांकि समय के साथ इन वॉटर बॉडी और वेटलैंड पर अतिक्रमण बढ़ गया है. कई स्थानों पर पानी का प्राकृतिक प्रवाह और भराव भी बाधित हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि नैनीझील का घटता जलस्तर इसी समस्या से जुड़ा हुआ है.

    मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT सदस्य सचिव ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को सभी वॉटर बॉडी और वेटलैंड को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस दिशा में विशेष अभियान चलाया जा सकता है.

    बैठक में पर्यटन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों पर भी चर्चा की गई. अधिकारियों ने बताया कि पर्यटन सीजन के दौरान नैनीताल में लाखों लोग पहुंचते हैं. इससे शहर की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है, लेकिन कचरे और प्रदूषण का दबाव भी कई गुना बढ़ जाता है. NGT ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण सुनिश्चित किया जाए. साथ ही पर्यटन सीजन के लिए विशेष कचरा प्रबंधन योजना तैयार की जाए ताकि झील और आसपास के पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे.


    लाइट और ध्वनि प्रदूषण भी चिंता का विषय

    बैठक में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने लाइट पॉल्यूशन और ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया. विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कृत्रिम रोशनी और लगातार बढ़ता शोर वन्यजीवों, पक्षियों और पहाड़ की प्राकृतिक जीवनशैली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है. इसलिए इन दोनों समस्याओं पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत बताई गई.


    कचरा निस्तारण को लेकर तैयारी

    अधिकारियों ने बताया कि जिले के नगरीय क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 230 मीट्रिक टन कूड़ा गोलापार ट्रंचिंग ग्राउंड भेजा जा रहा है. वहां जल्द ही आधुनिक कचरा निस्तारण मशीन स्थापित की जाएगी. इसके अलावा पुराने कूड़े के बड़े हिस्से का निस्तारण भी किया जा चुका है.


    सिर्फ सरकार नहीं, जनता की भी जिम्मेदारी

    बैठक के अंत में डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है. इसके लिए आम लोगों की भागीदारी और जागरूकता सबसे अधिक जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह केवल नैनीताल की खूबसूरती बचाने का सवाल नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा मुद्दा है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहाड़ों के जलस्रोत सूख गए, झीलें प्रदूषित हो गईं और जंगलों को नुकसान पहुंचा तो आने वाले समय में पहाड़ों की पहचान और प्राकृतिक विरासत दोनों पर संकट गहरा सकता है. इसी वजह से NGT ने प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है.

  • पश्चिम बंगालः टूट की कगार पर ममता बनर्जी की पार्टी TMC…. अलग गुट बनाने चले 60 MLAs

    पश्चिम बंगालः टूट की कगार पर ममता बनर्जी की पार्टी TMC…. अलग गुट बनाने चले 60 MLAs


    कोलकाता।
    ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) टूट की कगार पर है। अटकलें हैं कि पार्टी के दो फाड़ हो सकते हैं और करीब 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को समर्थन देने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। संभावनाएं हैं कि बुधवार को विधायक एकजुट होकर पश्चिम बंगाल विधानसभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंप सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो पार्टी 60 और 20 के गुट में बंट जाएगी और ममता बनर्जी गुट से विपक्ष का दर्ज भी छिन जाएगा।

    कथित नए गुट के सदस्यों ने 80 में से 60 टीएमसी विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है। एक नेता ने अखबार से कहा, ‘मान्यता पाने के लिए हमारा पत्र तैयार है, क्योंकि असली टीएमसी तैयार है। हम बुधवार को बंगाल विधानसभा स्पीकर रतींद्रनाथ बोस को पत्र सौंप देंगे।’ कहा जा रहा है कि ये सभी विधायक ऋतब्रत बनर्जी की उम्मीदवारी को समर्थन दे रहे हैं।


    पश्चिम बंगाल के मंत्री ने बढ़ाई चर्चा

    पश्चिम बंगाल के मंत्री तापस रॉय ने मंगलवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस में महाराष्ट्र जैसी टूट होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।रॉय ने दावा किया कि तृणमूल ने कई ऐसे लोगों को शामिल किया, जिनका राजनीति से ज्यादा सरोकार नहीं था। उन्होंने दावा किया कि अब पार्टी के अंदरूनी मतभेद और अंतर्विरोध सतह पर दिखाई देने लगे हैं।


    ऋतब्रत बनर्जी विधायकों से मिले

    विधानसभा परिसर से बाहर आने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ऋतब्रत बनर्जी ने स्वीकार किया कि उनकी मुलाकात विधायक हॉस्टल में कुछ विधायकों से हुई और उनके साथ मुरमुरा खाया था। बनर्जी ने कहा कि वह ‘एक-एक दिन के हिसाब से आगे बढ़ने’ में विश्वास रखते हैं। उन्होंने 50 से ज्यादा विधायकों के उनके साथ आने की अटकलों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

    उन्होंने दावा किया कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता निर्वाचित करने संबंधी कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। बनर्जी के अनुसार, जिस कागज पर उनके हस्ताक्षर लिए गए थे, वह महज उपस्थिति दर्ज करने के लिए था। टीएमसी ने ऋतब्रत समेत दो विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था।


    विरोध प्रदर्शन में नहीं पहुंचे सांसद और विधायक

    ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद मंगलवार को पहली बड़ी राजनीतिक लामबंदी की, लेकिन एस्प्लेनेड के वाई-चैनल पर आयोजित धरना कार्यक्रम में कम भीड़ और कई सांसदों-विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। बनर्जी के विरोध प्रदर्शन के लिए वाई-चैनल के बस अड्डे के करीब एक धरना मंच तैयार किया गया था।

    यहां चंद्रिमा भट्टाचार्य, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, डेरेक ओ’ब्रायन, फिरहाद हकीम और अन्य वरिष्ठ नेता बनर्जी के साथ मौजूद रहे, लेकिन बड़ी संख्या में सांसदों और विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलों को और बल दिया।

  • कॉलोनियों में घुसा पानी, मथुरा समेत कई जिलों में बरसात का असर

    कॉलोनियों में घुसा पानी, मथुरा समेत कई जिलों में बरसात का असर


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार बदलते मौसम ने एक बार फिर तबाही और राहत दोनों के हालात पैदा कर दिए हैं। तड़के हुई मूसलाधार बारिश के चलते आगरा में हालात सबसे ज्यादा गंभीर रहे, जहां कुछ ही घंटों की बारिश ने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में जलभराव हो गया, सड़कें धंस गईं और वाहनों के फंसने की घटनाएं सामने आईं।

    आगरा में सबसे बड़ा हादसा उस समय हुआ जब एक फुटपाथ और सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। देखते ही देखते करीब 25 फीट गहरा गड्ढा बन गया, जिसमें ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली समा गई। वहीं, सड़क किनारे खड़ी कारें और अन्य वाहन भी गड्ढों में फंस गए या पलट गए। छीपीटोला इलाके में बारिश के दबाव से एक मकान भी गिर गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    शहर की कई कॉलोनियों में पानी घुस जाने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घरों के अंदर तक पानी भर गया और सड़कों पर घुटनों तक जलजमाव देखने को मिला। हालात इतने खराब हो गए कि कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना पड़ा।

    इसी तरह मथुरा में भी देर रात हुई बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालु घुटनों तक पानी में चलते नजर आए। बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी बाधित हुआ, हालांकि नमी के कारण लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के 9 जिलों में आंधी-बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी जारी है, हालांकि यह धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। इसके बावजूद अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 3 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जो 5 जून तक पूरे उत्तर प्रदेश को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी यूपी में छिटपुट बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। हवा की रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

    लखनऊ के मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल लू का खतरा नहीं है और आने वाले दिनों में भी तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि बारिश के कारण कहीं राहत है तो कहीं बाढ़ जैसे हालात ने चिंता बढ़ा दी है।

    कुल मिलाकर यूपी में मौसम का यह बदलाव लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आया है। जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर बारिश से हुई तबाही ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • IPL जीत के बाद आध्यात्मिक सफर पर विराट कोहली, पहुंचे वृंदावन आश्रम

    IPL जीत के बाद आध्यात्मिक सफर पर विराट कोहली, पहुंचे वृंदावन आश्रम


    मथुरा । आईपीएल 2026 में शानदार जीत दर्ज करने के बाद Virat Kohli एक बार फिर आध्यात्मिक यात्रा पर नजर आए। मंगलवार सुबह वे अपनी पत्नी Anushka Sharma के साथ वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने केली कुंज आश्रम में संत Premanand Maharaj के दर्शन किए।

    दोनों सुबह करीब 7 बजे आश्रम पहुंचे और मास्क पहनकर कार से उतरने के बाद नंगे पैर आश्रम परिसर में प्रवेश किया। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने उनका स्वागत किया। विराट और अनुष्का लगभग दो घंटे तक आश्रम में रुके और संत से मुलाकात की। बाहर निकलने पर विराट के माथे पर चंदन और त्रिपुंड लगा हुआ था, जबकि उनके हाथ में एक धार्मिक पुस्तक भी दिखाई दी।

    आश्रम दर्शन के बाद दोनों ने लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम का भी दौरा किया। खास बात यह रही कि इस दौरान भी वे नंगे पैर पैदल ही चलते नजर आए। इस यात्रा के दौरान उनकी सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव की झलक देखने को मिली।

    इससे पहले भी विराट और अनुष्का कई बार वृंदावन आ चुके हैं। इसी साल 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर भी दोनों ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए थे और सत्संग में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि पिछले तीन वर्षों में यह उनकी सातवीं मुलाकात है, जिसमें इस वर्ष की यह तीसरी यात्रा शामिल है।

    गौरतलब है कि हाल ही में Royal Challengers Bengaluru ने अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया था। इस मुकाबले में विराट कोहली ने अहम भूमिका निभाई थी और अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन भी बनाए थे।

    आईपीएल में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद कोहली का यह आध्यात्मिक दौरा एक बार फिर चर्चा में है, जहां क्रिकेट की सफलता के बाद उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्राथमिकता दी।

  • बंगाल: TMC में सब कुछ ठीक नहीं…. टूट की अटकलें तेज…. 50 MLA छोड़ सकते हैं पार्टी !

    बंगाल: TMC में सब कुछ ठीक नहीं…. टूट की अटकलें तेज…. 50 MLA छोड़ सकते हैं पार्टी !


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC ) में सब ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने सोमवार को ही दो विधायकों को निष्कासित कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ, जब पार्षदों लगातार पद छोड़ रहे हैं। वहीं, टीएमसी के कार्यक्रमों से बड़े नेता दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। अब अटकलें ये भी हैं कि टीएमसी के 50 विधायक (50 MLAs) टूट सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

    संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट के अनुसार, अटकलें हैं कि 50 विधायक तृणमूल कांग्रेस छोड़ सकते हैं और पार्टी टूट सकती है। विधायकों के निष्कासन के बाद टीएमसी के बाद विधानसभा में सदस्यों की संख्या 78 पर आ गई है। चर्चाएं हैं कि रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा के जरिए नई तृणमूल बनाई जा सकती है। हालांकि, इसे लेकर किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से अब तक कुछ नहीं कहा है।


    महाराष्ट्र जैसा होगा हाल

    अगर टीएमसी के 50 विधायक अलग होकर दूसरा धड़ बनाते हैं तो बंगाल में महाराष्ट्र की राजनीति का रीकैप देखने को मिल सकता है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना से जब एकनाथ शिंदे (अब उप मुख्यमंत्री) विधायकों के साथ अलग हुए थे, तो ठाकरे ने शिवसेना का नाम और चिह्न गंवा दिए थे। ऐसा ही दिग्गज नेता शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ हुआ था।


    क्यों 2 विधायकों पर हुआ ऐक्शन

    दोनों विधायकों को भेजे गए पत्र में कहा गया है, ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के संज्ञान में सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से यह बात लाई गई है कि तृणमूल की तरफ से नामित उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के बावजूद आप पार्टी के अधिकृत नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठकों में शामिल होने में बार-बार विफल रहे हैं और आपने खुद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल किया है।’

    पार्टी उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है, ‘यह भी पाया गया है कि आप ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आपने ऐसे बयान दिए हैं, जो तृणमूल कांग्रेस के हितों के प्रतिकूल हैं।’ पत्र में कहा गया है कि मामले पर समुचित विचार-विमर्श के बाद ‘तृणमूल कांग्रेस के सक्षम प्राधिकारी ने आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने का फैसला किया है।’


    शुभेंदु अधिकारी ने किया 2 विधायकों का जिक्र

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दो टीएमसी विधायकों का जिक्र किया था। इनमें हावड़ा के उलुबेरिया पूर्व सीट जीतने वाले रीताब्रत बनर्जी और मध्य कोलकाता के एंटाली से विधायक संदीपन साहा थे। उन्होंने कहा था कि इनकी तरफ से दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर ही विधानसभा सचिवालय ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता घोषित करने के लिए तृणमूल विधायक दल के जाली हस्ताक्षर का मामला हरे स्ट्रीट पुलिस थाने में दर्ज कराया था।

    मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह जांच भाजपा द्वारा शुरू नहीं की गई थी। यह तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों द्वारा 27 मई को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दर्ज कराई गई शिकायत के बाद की कार्रवाई थी। विधायकों ने आरोप लगाया था कि छह मई को हुई उनकी पार्टी की बैठक में विपक्ष के नेता के चयन के संबंध में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। उन्होंने शिकायत की थी कि 70 विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित उनकी पार्टी का समर्थन पत्र फर्जी और मनगढंत है, जिसमें से 14 हस्ताक्षर बड़े अक्षरों में किए गए हैं।’

  • कर्नाटक HC की सख्त टिप्पणी…. कहा- मिडिल-ईस्ट की तरह हाथ-पैर काटे… तभी लोग मानेंगे कानून

    कर्नाटक HC की सख्त टिप्पणी…. कहा- मिडिल-ईस्ट की तरह हाथ-पैर काटे… तभी लोग मानेंगे कानून


    बेंगलुरु।
    देश में अपराध के मामले जिस तरह से बढ़ रहे हैं और लोग कानून को हल्के में ले रहे हैं, उस पर कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। एक रेप आरोपी की जमानत याचिका (Bail Petition) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में लोग अपने अधिकारों का गलत फायदा उठा रहे हैं। अगर खाड़ी (मिडिल-ईस्ट-Middle East) देशों की तरह अपराधियों के हाथ-पैर काटने जैसी कड़ी सजा दी जाए, शायद तभी लोग कानून का पालन करना सीखेंगे।


    ‘कानून ने अपने दांत खो दिए हैं’

    कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस आर. नटराज की बेंच 23 वर्षीय रेप आरोपी गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान जस्टिस नटराज ने बेहद तल्ख मौखिक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा, “हम अपराधियों से सख्ती से नहीं निपट रहे हैं, इसी वजह से कानून ने अपने दांत खो दिए हैं (प्रभावहीन हो गया है)। मिडिल-ईस्ट के उलट यहां अपराध करना बहुत आसान हो गया है। अगर हाथ या पैर काट दिए जाएं, तो शायद तभी लोगों को समझ आएगा कि कानून का पालन करना है। क्योंकि हमारे यहां लोकतंत्र है, इसलिए हर कोई इसे हल्के में लेता है।”

    ‘नमक खाया है, तो पानी पीना पड़ेगा’
    जज ने आरोपी को फिलहाल जमानत देने से इनकार करते हुए कहा, “अगर आपने नमक खाया है, तो पानी पीना ही पड़ेगा। उसे (आरोपी को) और चार-पांच दिन वहीं रहने दो। उसे जेल की आदत पड़ने दो। क्या पता, अगर उसे सजा हो गई तो वापस वहीं जाना पड़ सकता है।” कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जून की तारीख तय की है।


    क्या है पूरा मामला?

    आरोपी गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का छात्र है और रेप के आरोप में 5 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पीड़िता और आरोपी मणिपाल में क्लासमेट थे। जुलाई 2023 में आरोपी ने लड़की से अपने प्यार का इजहार किया था, जिसे शुरुआत में लड़की ने भी मान लिया, लेकिन बाद में शक होने पर उसने आरोपी से दूरी बना ली।

    शिकायत के अनुसार, 12 सितंबर 2023 को आरोपी रिश्ते पर बात करने के बहाने लड़की को अपने फ्लैट पर ले गया और वहां उसकी इच्छा के खिलाफ उसका यौन उत्पीड़न किया। इस घटना से पीड़िता गहरे सदमे और डिप्रेशन में चली गई, जिसके लिए उसने केएमसी (KMC) मणिपाल में अपना इलाज भी कराया।

    पीड़िता ने पहले बेंगलुरु में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का दरवाजा खटखटाया और फिर उडुपी महिला पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 375(ए) और 376 के तहत केस दर्ज कराया।

    बचाव पक्ष की क्या रही दलील?
    बचाव पक्ष की वकील अयानतिका मंडल ने कोर्ट में दलील दी कि उनका मुवक्किल लगभग 2 महीने से जेल में बंद है और उसने कोई अपराध नहीं किया है। वकील की तरफ से यह भी तर्क दिया गया कि ये आरोप करीब 3 साल पुरानी घटना से जुड़े हैं और अगर आरोपी को आगे भी जेल में रखा गया, तो इससे उसका पेशेवर भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल कोई राहत नहीं दी है।

    कोर्ट ने रेड्डी को जमानत देने से इनकार करते हुए टिप्पणी की, “अगर आप नमक खाते हैं, तो आपको पानी भी पीना होगा। उसे चार-पांच दिन और रहने दीजिए। उसे जेल की आदत डालने दीजिए। कौन जानता है, अगर आपको सजा हुई तो आपको वापस जाना पड़ सकता है।” अदालत ने रेड्डी की जमानत याचिका पर राज्य को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि इस मामले पर आगे विचार के लिए 8 जून को सुनवाई की जाए।

  • CM बनने से पहले तीखे तेवर… डीके शिवकुमार बोले- गुजरात नहीं ले जाने दूंगा कर्नाटक का हक

    CM बनने से पहले तीखे तेवर… डीके शिवकुमार बोले- गुजरात नहीं ले जाने दूंगा कर्नाटक का हक


    बेंगलुरु।
    डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) कर्नाटक (Karnataka) के अगले मुख्यमंत्री (Chief Minister) बनने वाले हैं। हालांकि मुख्यमंत्री बनने से पहले ही उन्होंने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहाकि सरकार में आते ही वह तय करेंगे कि कर्नाटक का हक गुजरात नहीं चला जाए। शिवकुमार ने आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bangalore) की खिताबी जीत के बाद यह बयान दिया है। गौरतलब है आरसीबी ने आईपीएल के खिताबी मुकाबले में गुजरात टाइटंस को हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है।


    गुजरात पर प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप

    डीके शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत में कहाकि कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) को आईपीएल फाइनल की मेजबानी करनी थी। राज्य सरकार ने भी इसकी अनुमति दी थी। लेकिन गुजरात ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और फाइनल की मेजबानी कर्नाटक से छीन ली। बुधवार को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे डीके ने कहाकि यह हमारे क्रिकेट प्रशंसकों को निराश कर सकता है। हम जरूरी कदम उठा रहे हैं ताकि यह फिर कभी न हो। हालांकि, इसमें कुछ समय लगेगा।


    अहमदाबाद में हुआ था फाइनल

    आरसीबी और जीटी के बीच यह फाइनल मुकाबला गुजरात के अहमदाबाद शहर स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जीत पर राजधानी बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य शहरों में जश्न का माहौल है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) ने पिछले महीने अहमदाबाद को आईपीएल फाइनल की मेजबानी के लिए नए वेन्यू के तौर पर चुना था। इससे पहले बेंगलुरु को इस फाइनल की मेजबानी करनी थी। लेकिन सांसदों और विधायकों के लिए टिकटों की मांग को लेकर विवाद के बाद यह फैसला लिया गया।


    दिल्ली पहुंच गए डीके

    गौरतलब है कि कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया राज्य के अगले मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी आलाकमान से चर्चा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया सोमवार दोपहर दिल्ली पहुंचे। शिवकुमार बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। कांग्रेस नेतृत्व के कहने पर सिद्धरमैया के इस्तीफा देने के बाद वह इस जिम्मेदारी को संभालने जा रहे हैं।


    कब है शपथ ग्रहण

    कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार तीन जून को शाम चार बजकर पांच मिनट पर लोक भवन परिसर में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस दौरान कुछ विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। शिवकुमार को शनिवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्रियों को शामिल किए जाने का प्रावधान है।

  • गाजियाबाद में जघन्य वारदात: पहले बुलाया, फिर चाकू से हमला-नाबालिग की मौत से बवाल

    गाजियाबाद में जघन्य वारदात: पहले बुलाया, फिर चाकू से हमला-नाबालिग की मौत से बवाल


    उत्तर प्रदेश। गाजियाबाद जिले के खोड़ा इलाके में बकरीद के दिन एक दर्दनाक और जघन्य वारदात ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। 17 वर्षीय युवक सूर्या प्रताप की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, गुरुवार को सूर्या प्रताप अपने दोस्तों के साथ मौजूद था, तभी किसी बात को लेकर दूसरे पक्ष के युवकों से उसका विवाद हो गया। शुरुआती कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि इसी दौरान एक युवक ने चाकू निकालकर सूर्या पर हमला कर दिया और वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गया।

    गंभीर रूप से घायल सूर्या को तुरंत स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए नोएडा के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया। लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।

    परिजनों ने इस मामले में कई लोगों को नामजद करते हुए आरोप लगाया है कि यह हमला पुरानी रंजिश का नतीजा है। उनका कहना है कि पहले युवक को बुलाया गया और फिर उस पर जानलेवा हमला किया गया। परिजनों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग उठाई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान जुटाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और लोग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन:

    गाजियाबाद के खोड़ा में 17 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और पुलिस बल तैनात किया गया।

  • यूपी में मौतों के आंकड़ों पर बवाल, अफसर के विदेश दौरे से उठे सवाल

    यूपी में मौतों के आंकड़ों पर बवाल, अफसर के विदेश दौरे से उठे सवाल


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान से हुई भीषण जनहानि के बीच राज्य प्रशासन में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 13 मई को प्रदेश के कई जिलों में आए तूफान और आंधी के कारण 117 लोगों की मौत हुई, जबकि कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। इसी गंभीर स्थिति के बीच राज्य के राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद के विदेश दौरे पर जाने की जानकारी सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

    सूत्रों के अनुसार, राहत कार्यों की समीक्षा और प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरण से जुड़ी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत आयुक्त से तलब की थी। लेकिन जब अपेक्षित रिपोर्ट समय पर नहीं मिली, तो जांच में यह सामने आया कि राहत आयुक्त डॉ. यशोद 15 मई से 23 मई तक लगभग 9 दिनों के लिए विदेश यात्रा पर थे। इससे आपदा प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    13 मई को प्रदेश में आए आंधी-तूफान ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। पेड़ गिरने, तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं में सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए और 117 लोगों की जान चली गई थी। ऐसे संवेदनशील समय में शीर्ष राहत अधिकारी के अनुपस्थित रहने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर असंतोष गहराता जा रहा है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव एसपी गोयल से सीधे जवाब तलब किया है। यह माना जा रहा है कि यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ अधिकारी की छुट्टी मंजूरी को लेकर सीएम ने सीधे मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है। सीएम ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जब प्रदेश आपदा जैसी स्थिति से गुजर रहा था, तब इतने महत्वपूर्ण पद पर तैनात अधिकारी की विदेश यात्रा को कैसे मंजूरी दी गई।

    सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहले ही बिना आवश्यक कारण के विदेश यात्राओं से बचने की अपील की गई थी, ऐसे में राज्य में गंभीर आपदा के दौरान इस तरह की अनुमति देना उचित नहीं था।

    वहीं, मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा है कि राहत आयुक्त की विदेश यात्रा की अनुमति प्रधानमंत्री की अपील से पहले ही स्वीकृत कर दी गई थी, इसलिए उस समय नियमों के तहत उन्हें रोका नहीं जा सकता था।

    इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में पहले ही प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान हो चुका है और अब इस विवाद ने सरकार के भीतर जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • सहारनपुर में दिन में छाया अंधेरा, तेज आंधी-तूफान से यूपी में तबाही-कई जिलों में अलर्ट

    सहारनपुर में दिन में छाया अंधेरा, तेज आंधी-तूफान से यूपी में तबाही-कई जिलों में अलर्ट


    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में नौतपा के दौरान मौसम ने अचानक करवट ले ली है और पिछले दो दिनों से आंधी-तूफान, बारिश और तेज हवाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शनिवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में आसमान में घने बादल छाए रहे और कई स्थानों पर रुक-रुककर बारिश दर्ज की गई। ठंडी हवाओं के कारण गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन मौसम का यह बदलाव कई जिलों में भारी तबाही का कारण बन गया है।

    सहारनपुर में शनिवार दोपहर करीब 3 बजे अचानक मौसम पूरी तरह बदल गया। तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई और कुछ ही समय में आसमान में काले बादल छा गए, जिससे दिन में ही अंधेरा जैसा माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, दृश्यता काफी कम हो गई और सड़कें भीग गईं। यह बदलाव अचानक होने के कारण लोग असहज और सतर्क नजर आए।

    मौसम विभाग ने पूरे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिनमें से लगभग 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। विभाग के अनुसार यह मौसम प्रणाली अगले तीन दिनों यानी 2 जून तक सक्रिय रह सकती है, जिससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रुक-रुककर बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रहेगा।

    इस मौसम परिवर्तन का सबसे बड़ा असर तापमान पर पड़ा है। प्रदेश में कई जगहों पर अधिकतम तापमान में लगभग 10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। जहां कुछ दिन पहले बांदा में तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, वहीं अब यह घटकर लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तक आ गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह गिरावट अस्थायी राहत तो है, लेकिन आंधी-तूफान के कारण खतरा बढ़ गया है।

    बीते गुरुवार रात और शुक्रवार को भी पश्चिमी और पूर्वी यूपी के कई जिलों में तेज बारिश और आंधी देखने को मिली थी। कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई, जिससे कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा और टिनशेड उड़ गए। पेड़ गिरने की घटनाएं भी बड़े पैमाने पर सामने आईं। चित्रकूट में तेज आंधी के कारण लगभग 500 तोतों की मौत की भी सूचना है, जिसने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया।

    प्रदेश में आंधी-तूफान और बिजली गिरने से अब तक कुल 31 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान बुंदेलखंड क्षेत्र में हुआ है, जहां हमीरपुर, बांदा, महोबा, उरई और जालौन जैसे जिलों में कई लोगों की जान गई। इसके अलावा कौशांबी, सहारनपुर, देवरिया, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, बलिया, महाराजगंज, मथुरा, उन्नाव, फतेहपुर और रामपुर जैसे जिलों में भी जानमाल का नुकसान हुआ है।

    मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी भरी हवाओं के कारण यह स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी इस मौसम परिवर्तन का कारण है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी यूपी और तराई क्षेत्रों में तूफान का खतरा सबसे अधिक है, जहां हवा की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

    राज्य सरकार ने हालात पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं और जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं। मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न हों तथा सावधानी बरतें।