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  • Tamil Nadu: CM विजय ने पूर्व सरकार के फैसले को पलटा… हिंदू मंदिरों के पैसे से बनने वाले 46 प्रोजेक्ट्स रद्द

    Tamil Nadu: CM विजय ने पूर्व सरकार के फैसले को पलटा… हिंदू मंदिरों के पैसे से बनने वाले 46 प्रोजेक्ट्स रद्द


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री ‘थलापति’ विजय (Chief Minister ‘Thalapathy’ Vijay) ने पूर्व की डीएमके (DMK) सरकार के फैसले को पलटते हुए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सीएम विजय (CM Vijay) ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के तहत 245.85 करोड़ रुपये की लागत वाले 46 प्रोजेक्ट्स की प्रशासनिक मंजूरी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है।

    फिल्म स्टार ‘थलापति’ सी. जोसेफ विजय ने जब राजनीति में एंट्री की थी तो लोगों ने शुरुआत में उनके प्रभाव पर शक जताया था और उन्हें सिर्फ ‘किंगमेकर’ माना था। लेकिन 4 मई 2026 को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने छह दशक बाद मुख्य द्रविड़ पार्टियों को सत्ता से बाहर कर दिया और जनता ने इस अभिनेता के नेतृत्व वाली पार्टी को चुना।

    10 मई को विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यकाल पूरा करने को लेकर संदेह बना हुआ था। हालांकि, पद संभालने के एक महीने से अधिक समय बाद, उनके कदमों से यह साबित हो रहा है कि वे सुशासन के जरिए जनता को सही संदेश दे रहे हैं।

    सोमवार को जिला कलेक्टरों और पुलिस प्रमुखों को निर्देश देते हुए विजय ने बिना किसी राजनीतिक दखल के अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सबसे प्रभावशाली अपराधियों को भी त्वरित और निष्पक्ष न्याय का सामना करना पड़े। इसके अलावा, उन्होंने घोषणा की कि तमिलनाडु की सभी सार्वजनिक परिवहन बसें वातानुकूलित (AC) होंगी।


    सीएम के रूप में पहले दिन से ही असरदार फैसले

    सत्ता संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर विजय ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली का ऐलान किया, जिससे राज्य के लगभग 2.4 करोड़ घरेलू बिजली कनेक्शन धारकों को फायदा होगा। नशीले पदार्थों की तस्करी और उपयोग को रोकने के लिए हर जिले में ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ का गठन किया गया, जिसकी निगरानी सीएम खुद करेंगे। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए ‘सिंगप्पेन (शेरनी) स्पेशल टास्क फोर्स’ बनाई गई।

    48 घंटों के भीतर, राज्य भर में धार्मिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों और बस स्टैंडों के 500 मीटर के दायरे में चल रही 717 ‘तस्माक’ शराब की दुकानों को दो सप्ताह के भीतर बंद करने का आदेश दिया गया।


    कॉर्पोरेट CEO जैसी कार्यशैली और समय की पाबंदी

    सीएम विजय हर सुबह एकदम सही समय पर सचिवालय पहुंचते हैं। पारंपरिक सफेद वेष्टि की बजाय वे काले रंग का शानदार सूट और सफेद शर्ट पहनते हैं, जो उन्हें एक आधुनिक प्रशासक के रूप में पेश करता है। वे सोमवार से शुक्रवार तक अपनी डेस्क पर लगभग सात घंटे बिताते हैं और वरिष्ठ नौकरशाहों से भी समय की पाबंदी की सख्त उम्मीद रखते हैं। काम के दौरान राजनीतिक बैठकों की बजाय वे घर से अपना लंच लाना और शांति से खाना पसंद करते हैं।


    नीति आयोग द्वारा प्रशंसा और केंद्र से तालमेल

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने 2035 तक तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को 1.5 ट्रिलियन डॉलर बनाने के विजय के विजन की तारीफ की है, जिसे राज्य को वैश्विक निवेश और तकनीकी डेस्टिनेशन बनाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर विजय ने मेकेदातु बांध परियोजना के खिलाफ कानूनी कदम उठाने, श्रीलंकाई नौसेना द्वारा पकड़े गए मछुआरों की रिहाई और रक्षा निर्माण एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट्स के लिए सहयोग की मांग की।


    भ्रष्टाचार विरोधी कदम और जन कल्याण

    विजय ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के 46 प्रोजेक्ट्स के लिए दी गई प्रशासनिक मंजूरी रद्द कर दी। इन प्रोजेक्ट्स की कुल कीमत 245.85 करोड़ रुपये थी और इनमें शादी-ब्याह के हॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल थे, जिन्हें पिछली DMK सरकार के समय मंजूरी मिली थी। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर के संसाधनों का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के बजाय मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में किया जाए। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि रद्द किए गए प्रोजेक्ट्स से बचे फंड का इस्तेमाल मंदिरों और श्रद्धालुओं के लिए नई योजनाएं शुरू करने में किया जाएगा।

    620 अम्मा कैंटीनों को आधुनिक बनाने, बर्तन बदलने और साफ-सफाई में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। गरीब कर्जदारों के लिए सहकारी बैंक ऋण माफी के पहले चरण की घोषणा की गई और जल जीवन मिशन के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू किया गया। कृषि क्षेत्र के समर्थन के लिए धान की खेती को बढ़ावा देने हेतु 134.83 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया गया। तमिलनाडु के वित्त पर एक श्वेत पत्र जारी कर राज्य के कर्ज के बोझ को उजागर किया गया और राजकोषीय पारदर्शिता का वादा किया गया।

  • उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत

    उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में बुधवार से मदरसा बोर्ड खत्म (Madrasa Board Abolished) हो गया। अब इसकी जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (State Minority Education Authority) ने ले ली है। इसके तहत मुस्लिम समेत सभी 5 अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थान आएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को अपनी ज्ञानधारा से सिंचित करने वाले उत्तराखंड की यह जिम्मेदारी है कि वह शिक्षा एवं संस्कार के मामले में एक आदर्श स्थापित करे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने समाज के सभी वर्गों को अच्छी, संस्कार युक्त और आधुनिक शिक्षा देने के लिए पहली जुलाई से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल उत्तराखंड ही नहीं वरन पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी के रूप में ‘वन नेशन वन लॉ’ की तरह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के रूप में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ की शुरुआत भी उतराखंड से हो रही है। उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि राज्य में हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय के बच्चे को अच्छे संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।


    सपनों को मिलेगी नई उड़ान

    सीएम धामी ने कहा कि जब एक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलती है तो वह न केवल अपने भविष्य को बेहतर बनाता है वरन अपने परिवार, समाज और देश को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देता है। आज हम मात्र एक संस्था की शुरूआत नहीं कर रहे हैं वरन ऐसे भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं जिसके जरिए राज्य के हर बच्चे के सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी।


    आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है मकसद

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान, परंपरा या अधिकारों को प्रभावित करने के लिए नहीं वरन समाज के सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए की गई है। हमारा मकसद आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है। हम चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय का हर बच्चा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहे और विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर, भाषा, और आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष बने।


    आएगा सकारात्मक बदलाव

    सीएम धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं वरन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा। सीएम धामी ने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण आने वाले समय में हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।

  • UP: अयोध्या में बड़ा हादसा…. एक ही परिवार की 5 महिलाएं सरयू में डूबीं

    UP: अयोध्या में बड़ा हादसा…. एक ही परिवार की 5 महिलाएं सरयू में डूबीं


    अयोध्या।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अयोध्या जिले (Ayodhya district) में मंगलवार को सरयू नदी (Saryu River) में स्नान के दौरान बड़ा हादसा हो गया। रौनाही थाना क्षेत्र के सनाहा गांव के पास एक ही परिवार की दो महिलाओं और तीन किशोरियों समेत पांच लोग नदी में डूब गए। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से तीन लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। देर शाम तक दो किशोरियों की तलाश जारी रही।

    जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब दो बजे एक ही परिवार की दो महिलाएं और तीन किशोरियां सरयू नदी के किनारे घूमने गई थीं। गांव से करीब एक किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद मीरापुर रुदौली निवासी मेराज की 35 साल पत्नी शाहीन नदी में नहाने उतरीं। इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए 16 साल नाजिया, 15 साल रशीदा, 18 वर्षीय मरियम और 40 वर्षीय सजरूल निशा भी नदी में उतर गईं, लेकिन तेज बहाव की चपेट में आने से सभी डूब गईं।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, गोताखोर और प्रशासन मौके पर पहुंच गया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद सजरूल निशा, शाहीन और मरियम को नदी से बाहर निकाला गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। सीओ सदर अरविंद सोनकर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि देर शाम तक नाजिया और रशीदा की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी रहा।

  • 25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

    25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा


    महोबा  महोबा जिले के कबरई विकासखंड के सबसे बड़े गांव ग्योंडी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब ग्रामीणों के सब्र की सीमा पार कर चुकी है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से डॉक्टरों और जरूरी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को न तो नियमित चिकित्सक मिलते हैं और न ही स्टाफ नर्स लैब टेक्नीशियन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

    स्वास्थ्य सुविधाओं की इसी बदहाली के विरोध में बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि ग्योंडी गांव ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं लेकिन पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है जबकि गंभीर मरीजों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं और प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवश्यक दवाइयों की कमी जांच सुविधाओं का अभाव और साफ सफाई बिजली तथा पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है।

    बुंदेलखंड नव निर्माण सेना ने प्रशासन के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखीं। संगठन ने अस्पताल के सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने नियमित डॉक्टरों और स्टाफ नर्स की तैनाती सुनिश्चित करने चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा शुरू करने आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा अस्पताल में साफ सफाई बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।

    संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जिले में चक्का जाम और बड़े स्तर पर प्रदर्शन भी किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा से लोगों को वंचित रखना गंभीर लापरवाही है और इसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनकी जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और स्टाफ की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान का इंतजार हजारों लोगों को है।

  • मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग

    मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मंदिर के पुजारी और संत सच्चिदानंद महाराज की हत्या के बाद नामदेव समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। घटना के विरोध में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यकर्ताओं ने महोबा में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ त्वरित तथा कठोर कार्रवाई की मांग की। संगठन ने कहा कि इस जघन्य वारदात ने पूरे समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

    बताया गया कि बांदा जिले के तिंदवारा गांव स्थित त्रिदेव शनि मंदिर में रहने वाले 68 वर्षीय संत बाल ब्रह्मचारी सच्चिदानंद महाराज मंदिर की छत पर विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान देर रात कुछ अज्ञात हमलावर वहां पहुंचे और लाठी डंडों तथा धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संत को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया।

    घटना ऐसे समय हुई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुंदेलखंड के दौरे पर थे। ऐसे में कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। नामदेव समाज के लोगों का कहना है कि प्रदेश में संत और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटना बेहद चिंताजनक है।

    महोबा में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अखिलेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्र हुए। उन्होंने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।

    संगठन ने यह भी मांग उठाई कि यदि आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह का खुलासा नहीं कर सकी है और अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना जांच की धीमी रफ्तार को दर्शाता है।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि मंदिर जैसे पवित्र स्थल में एक संत की हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि समाज की आस्था पर भी चोट है। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष और तेज जांच कर दोषियों को जल्द सजा दिलाने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अयोध्या में घमासान कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की सख्त कार्रवाई

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अयोध्या में घमासान कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की सख्त कार्रवाई


    अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जोरदार विरोध दर्ज कराया है और प्रदेश नेतृत्व के साथ कई सांसद और वरिष्ठ नेता अयोध्या पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे। इसी बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को देर रात एक होटल में नजरबंद कर दिया और बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में स्थानांतरित किया गया। इसके साथ ही कई अन्य कांग्रेस नेताओं को भी उनके आवास या ठहरने के स्थान पर ही रोक दिया गया जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।

    कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राम जन्मभूमि मंदिर जाकर कथित चढ़ावा प्रबंधन और चोरी के आरोपों की जांच और विरोध दर्ज कराना चाहता था। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। टेढ़ी बाजार क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का मुक्की की स्थिति भी देखने को मिली। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कुछ नेताओं को बस में बैठाकर हटाया गया जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई।

    कांग्रेस सांसदों और नेताओं का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार का लिखित आदेश नहीं दिया गया है और बिना आधिकारिक सूचना के इस तरह हाउस अरेस्ट करना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनका आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है और धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रण के लिए यह कदम आवश्यक था।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और कई आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से पूछताछ भी हुई है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक जाने का दावा कर रही हैं।

    उधर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रही है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।
    उधर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रही है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

    अयोध्या में बढ़ते तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं का विरोध प्रदर्शन तेज हुआ, कई नेता हाउस अरेस्ट किए गए, पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ा

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    Ayodhya Protest, Ram Mandir Issue, Congress Politics, Uttar Pradesh News, SIT Investigation

  • यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा ट्रेलर में घुसी वॉल्वो बस चार की मौत 27 घायल कंडक्टर चला रहा था बस

    यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा ट्रेलर में घुसी वॉल्वो बस चार की मौत 27 घायल कंडक्टर चला रहा था बस


    मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई जबकि 27 यात्री घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि तेज रफ्तार वॉल्वो बस का अगला हिस्सा ट्रेलर में करीब आठ फीट तक घुस गया। कई यात्री बस के अंदर फंस गए और उन्हें बाहर निकालने के लिए पुलिस और बचाव दल को गैस कटर की मदद लेनी पड़ी। हादसे के बाद मौके पर चीख पुकार और अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    यह दुर्घटना तड़के करीब साढ़े तीन बजे राया थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई। लखनऊ से दिल्ली जा रही गोला बस सर्विस की वॉल्वो बस में करीब 65 यात्री सवार थे। शुरुआती जांच के अनुसार गिट्टी से लदा ट्रेलर अपनी लेन में चल रहा था तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार बस उससे टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई यात्री सीटों के बीच फंस गए।

    मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि हादसे में बस चालक उपदेश यादव परिचालक क्लीनर और एक यात्री की मौत हुई है। मृतकों में तीन की पहचान अभी नहीं हो सकी है। वहीं 34 यात्रियों को सुरक्षित दूसरी बसों के माध्यम से उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका उपचार जारी है।

    पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे के समय नियमित चालक नहीं बल्कि बस का कंडक्टर वाहन चला रहा था। तेज रफ्तार और नियंत्रण खोने के कारण बस सीधे ट्रेलर के पिछले हिस्से में जा घुसी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि कंडक्टर को बस चलाने की अनुमति किस परिस्थिति में दी गई थी।

    हादसे के समय अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे इसलिए उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला। कई लोग सीटों के बीच दब गए और कुछ यात्रियों को बाहर निकालने के लिए बस के इमरजेंसी गेट और खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े। पुलिस स्थानीय लोगों एसडीआरएफ फायर सर्विस और एंबुलेंस टीमों ने करीब दो घंटे तक लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया।

    घायल यात्रियों ने बताया कि हादसे से कुछ देर पहले बस एक ढाबे पर रुकी थी। इसके बाद बस काफी तेज रफ्तार से चल रही थी और कुछ यात्रियों को वाहन के डगमगाने का भी एहसास हुआ था। टक्कर इतनी तेज थी कि आगे की सीटों पर बैठे यात्रियों को सबसे ज्यादा चोटें आईं जबकि पीछे बैठे कई लोग बाल बाल बच गए।

    मथुरा जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार सभी घायलों का इलाज जारी है। कुछ गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए आगरा और दिल्ली रेफर किया गया है। तीन यात्रियों की जांघ की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई है जबकि अन्य की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

  • पूर्वांचल से उत्तर प्रदेश में दाखिल हुआ मानसून 38 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम हुआ सुहाना

    पूर्वांचल से उत्तर प्रदेश में दाखिल हुआ मानसून 38 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम हुआ सुहाना


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। दक्षिण पश्चिम मानसून ने मंगलवार को पूर्वांचल के रास्ते प्रदेश में प्रवेश कर लिया। सोनभद्र और महराजगंज से शुरू हुई इसकी दस्तक के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मौसम पूरी तरह बदल गया। तेज हवाओं और बारिश ने गर्मी से राहत दिलाई जबकि मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के भीतर पूरे प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने का अनुमान जताया है।

    मानसून के प्रवेश के साथ ही प्रदेश के 20 से अधिक शहरों में बारिश का दौर शुरू हो गया। लखनऊ कानपुर नगर अयोध्या गोरखपुर बरेली देवरिया सीतापुर बहराइच पीलीभीत गोंडा रायबरेली ललितपुर चित्रकूट फर्रुखाबाद जौनपुर कानपुर देहात उन्नाव रामपुर और मुरादाबाद सहित कई जिलों में रुक रुककर बारिश दर्ज की गई। देवरिया और जौनपुर में अच्छी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे।

    मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें 38 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की भी आशंका व्यक्त की गई है। लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से लगभग 10 दिन की देरी से उत्तर प्रदेश पहुंचा है। आमतौर पर 20 जून तक प्रदेश में मानसून प्रवेश कर जाता है लेकिन इस बार यह करीब 19 दिनों तक उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा के आसपास ही सक्रिय रहा। इसके बाद मानसून ने सोनभद्र कुशीनगर महराजगंज सिद्धार्थनगर बलरामपुर श्रावस्ती और तराई क्षेत्रों से प्रदेश में प्रवेश किया।

    पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला रहा। लखनऊ समेत करीब 15 शहरों में बारिश दर्ज की गई जबकि आगरा सबसे गर्म शहर रहा जहां अधिकतम तापमान 42 दशमलव 9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बारिश के बाद कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज हुई और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और पूरे उत्तर प्रदेश को अपनी चपेट में ले लेगा। इसके साथ ही कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे खेती किसानी को भी बड़ा फायदा मिलेगा। धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई के लिए यह बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • मॉनसून की जोरदार बारिश से पानी-पानी हुई मुम्बई….. सड़कें बनी तालाब, ट्रैफिक हुआ ठप

    मॉनसून की जोरदार बारिश से पानी-पानी हुई मुम्बई….. सड़कें बनी तालाब, ट्रैफिक हुआ ठप


    मुंबई।
    मुंबई (Mumbai) में मॉनसून (Monsoon) की जोरदार बारिश (Heavy Rain) ने शहर के कई इलाकों को पानी-पानी कर दिया है. सड़कें तालाब बन गई हैं, ट्रैफिक ठप हो गया है. लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे (अंडरपास) में इतना पानी भर गया है कि उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।

    रातभर की बारिश से अंधेरी, बांद्रा, खार, मालाड, गोरेगांव, जुहू, वर्सोवा जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखा गया है. वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी पानी भरने से गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुताबिक, अंधेरी सबवे में पानी भर गया है, जिसके बाद उसे बंद करना पड़ा।

    बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं. मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में जलजमाव होना पुरानी समस्या है।

    शहर के निचले इलाकों में कई जगहों पर भारी जलभराव की तस्वीरें सामने आ रही हैं. जलजमाव को देखते हुए एहतियातन अंधेरी सबवे को देर रात 1:45 बजे से यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. किसी भी अप्रिय घटना या हादसे को रोकने के लिए सबवे के बाहर पुलिस बंदोबस्त किया गया है।

    एक तरफ जोरदार बारिश से मुंबईवासियों को उमस और गर्मी से तो बड़ी राहत मिली है, तो वहीं सुबह-सुबह दफ्तर और काम पर जाने वालों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है.

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाकों के लिए आज भी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है. बता दें कि मॉनसून इस बार 13 दिन देरी से मुंबई पहुंचा था।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में नया मोड़.. CCTV में पुलिस के साथ काला बैग ले जाते दिखा अविनाश शुक्ला

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में नया मोड़.. CCTV में पुलिस के साथ काला बैग ले जाते दिखा अविनाश शुक्ला

    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir Offering Theft Case) की जांच अब हर दिन नए मोड़ ले रही है. 24 सेकंड का एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें अविनाश शुक्ला (Avinash Shukla) पुलिस और बैंक कर्मियों के साथ एक सफेद रंग की कार की ओर जाता दिखाई दे रहा है. जिसमें उसके हाथ में मौजूद काले रंग के बैग है. सूत्रों का दावा है कि इसी बैग में वह नकदी थी, जिसे पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बरामद किया था. इधर, पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी कर तलाशी अभियान चलाया. इस दौरान कुछ घरों से जेवरात और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है. अब पुलिस इन दस्तावेजों का सत्यापन कर यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं चोरी के पैसों से कोई संपत्ति तो नहीं खरीदी गई।

    सामने आया CCTV फुटेज 5 जून 2026 की रात 8 बजकर 13 मिनट का बताया जा रहा है. वीडियो में पुलिस टीम, बैंक कर्मियों के साथ आरोपी अविनाश शुक्ला को एक सफेद कार तक ले जाती दिखाई देती है. फुटेज में अविनाश के हाथ में एक काला बैग भी साफ नजर आता है. सूत्रों के मुताबिक, जब ट्रस्ट को मंदिर से चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जानकारी मिली थी, तब पुलिस ने अविनाश शुक्ला के ठिकाने पर पहुंचकर कार्रवाई की थी. इसी दौरान उसके पास से लगभग पांच लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे. हालांकि पुलिस ने इस बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच से जुड़े सूत्र लगातार इस ओर इशारा कर रहे हैं.


    क्या ट्रस्ट को पहले से थी चोरी की जानकारी?

    जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की सूचना ट्रस्ट को पहले ही मिल गई थी. बताया जा रहा है कि 5 जून को ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देश पर प्रतिनिधियों ने पुलिस के साथ आरोपी के ठिकाने पर पहुंचकर प्रारंभिक कार्रवाई की थी. बताया जा रहा है कि पुलिस के संज्ञान में मामला 7 जून को सार्वजनिक होने से पहले ही आ चुका था. हालांकि उस समय पुलिस को ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं दी गई थी>


    रविवार सुबह सभी आरोपियों के घर पहुंची पुलिस

    मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए अयोध्या पुलिस ने रविवार सुबह एक साथ सभी गिरफ्तार आरोपियों के घरों पर छापेमारी की. इस दौरान पुलिस की अलग-अलग टीमें करीब डेढ़ घंटे से ढाई घंटे तक आरोपियों के घरों में मौजूद रहीं. पुलिस ने मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, उसके भतीजे मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, रमा शंकर मिश्रा सहित सभी सात आरोपियों के घरों की बारीकी से तलाशी ली. इस कार्रवाई की अगुवाई डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी ने की. तलाशी के दौरान परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई, जरूरी दस्तावेजों की जांच हुई और कई बिंदुओं पर लिखापढ़ी भी की गई.


    जिला प्रशासन की टीम भी रही साथ

    इस पूरी कार्रवाई की खास बात यह रही कि केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद रही. प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी तलाशी प्रक्रिया कराई गई. सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक टीम का उद्देश्य कार्रवाई की पारदर्शिता सुनिश्चित करना था. छापेमारी पूरी होने के बाद पुलिस दलों के बाहर निकलने की प्रक्रिया भी प्रशासन की निगरानी में हुई.


    घर-घर हुई बारीकी से तलाशी

    स्वर्गद्वार मोहल्ले में स्थित मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव के घर पुलिस ने कोना-कोना खंगाला. परिजनों की मौजूदगी में अलमारियां खोली गईं, बक्से देखे गए, पर्सों की जांच हुई और घर के अलग-अलग हिस्सों की तलाशी ली गई. करीब ढाई घंटे तक चली इस कार्रवाई के बाद पुलिस टीम वापस लौट गई. तलाशी के दौरान गवाह के रूप में मौजूद एक पड़ोसी ने बताया कि पुलिस ने घर का कोई हिस्सा नहीं छोड़ा. उसके अनुसार पुलिस ने अलमारियों से लेकर बक्सों और अन्य सामान तक की जांच की, लेकिन तलाशी के दौरान कोई बड़ी नकदी या संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई. पुलिस आवश्यक जानकारी और दस्तावेज जुटाकर वापस चली गई. हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.


    जेवरात और प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले

    जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुछ आरोपियों के घरों से जेवरात और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं. अब पुलिस इन दस्तावेजों का सत्यापन कराएगी. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि जिन संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं, वे कब खरीदी गईं, उनकी कीमत क्या है और खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था. यदि जांच में यह सामने आता है कि चोरी की रकम से कोई संपत्ति खरीदी गई है तो आगे की कानूनी कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।


    आर्थिक लेनदेन की भी होगी जांच

    पुलिस अब केवल बरामद नकदी या दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहती. जांच का अगला चरण आरोपियों के बैंक खातों, आर्थिक लेनदेन और हाल के वर्षों में हुई संपत्ति खरीद की जांच पर केंद्रित रहेगा. सूत्रों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो आय के स्रोत, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं. इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि कथित चोरी की रकम का उपयोग आखिर कहां और किस रूप में किया गया. हालांकि कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और लगातार छापेमारी भी चल रही है, लेकिन इस मामले में अभी कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं. जैसे:
    – यदि 5 जून को ही पुलिस को जानकारी मिल गई थी तो औपचारिक शिकायत बाद में क्यों दर्ज हुई?
    – CCTV में दिखाई देने वाला काला बैग क्या वास्तव में बरामद नकदी से जुड़ा था?
    – पांच लाख रुपये की बरामदगी का आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है?
    – जिन संपत्ति दस्तावेजों की जांच हो रही है, उनका इस मामले से क्या संबंध निकलता है?
    – क्या जांच में और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है?