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  • UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का एक्शन, आरोपियों के घरों पर मारे छापे

    UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का एक्शन, आरोपियों के घरों पर मारे छापे


    लखनऊ।
    अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir offering theft case) में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. इस केस की जांच कर रही टीमों ने रविवार को अयोध्या में रहने वाले सभी आरोपियों के घरों पर छापेमारी की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अपनी जांच में तेजी ला रही है, ताकि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों का पूरी तरह खुलासा हो सके. पुलिस इस मामले के हर एक पहलू को गहराई से देख रही है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

    जांच टीम ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए अयोध्या में रहने वाले आरोपियों के घरों पर कार्रवाई की है. पुलिस की अलग-अलग टीमें अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, करुणेश पांडे और रमा शंकर मिश्रा के घर पहुंचीं. इन सभी ठिकानों पर पुलिस पूरी बारीकी से तलाशी ले रही है, ताकि केस से जुड़े अहम सबूत जुटाए जा सकें. जांच टीमें एक-एक घर के कोने खंगाल रही हैं ताकि कोई भी सबूत छूटने न पाए।


    दो नाम छोड़कर बाकी सभी के परिवारों से पूछताछ

    कार्रवाई के दौरान लोकल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस इन आरोपियों के परिवार के सदस्यों से कड़ी पूछताछ कर रही है. हालांकि, जांच टीम सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और प्रतापगढ़ के रहने वाले अविनाश शुक्ला को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों के परिजनों से सवाल-जवाब करने में जुटी है. साथ ही पुलिस आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों से भी इन आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है. पुलिस यह जानना चाहती है कि इन लोगों की गतिविधियां पिछले कुछ समय में कैसी रही हैं।

    इस मामले की गहराई से जांच कर रही टीमें सिर्फ चोरी की कड़ियों को ही नहीं जोड़ रहीं, बल्कि आरोपियों की कमाई के जरियों का भी पता लगा रही हैं. अपराध के जरिए जो पैसा या संपत्ति जुटाई गई है, उसके सोर्स को ट्रेस किया जा रहा है. आरोपियों के पास मौजूद संपत्तियां कहां से आईं और उनके पास फंड कहां से आ रहा था, इसकी पूरी हिस्ट्री निकाली जा रही है. पुलिस बैंकों के खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि पैसे को कहां-कहां भेजा गया या किस काम में इस्तेमाल किया गया।

    इस मामले में गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और कैश को गिनने के काम से जुड़े हुए थे. जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इन्होंने वहीं से पैसों का हेरफेर किया. जांच टीमों ने अब तक इस मामले में करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं. इस मामले में पुलिस ने चोरी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया है।

    यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई तीन सदस्यों की SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है. कोर्ट ने दो दिन पहले ही सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए जेल भेजा था. पुलिस सोमवार को इन सभी आरोपियों को दोबारा कोर्ट में पेश करेगी. मामले की कड़ियों को जोड़ने और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस अदालत से इन सभी की कस्टडी रिमांड मांगेगी, ताकि बाकी की रकम और संपत्ति का भी पता लगाया जा सके।

  • UP: लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में चला विशेष अभियान, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील

    UP: लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में चला विशेष अभियान, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील


    कानपुर।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में कोचिंग संस्थान (Coaching Institute) से जुड़े हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान (Special Campaign) के दौरान फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया. जांच में इन संस्थानों में भवन और सुरक्षा संबंधी मानकों के उल्लंघन की बात सामने आने पर यह कार्रवाई की गई।

    केडीए अधिकारियों की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर उन संस्थानों को चिह्नित किया, जहां आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान संस्थानों को खाली कराया गया और बाद में उन्हें सील कर दिया गया।

    प्राधिकरण के अनुसार, अभियान के तहत विभिन्न जोनों में एक साथ कार्रवाई की गई. पहले चरण में 22 संस्थानों को चिह्नित किया गया है, जबकि अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मानकों की अनदेखी पाए जाने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

    सील किए गए संस्थानों में फिजिक्स वाला, वर्कस्पेस, महेंद्राज और केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। वहीं, इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि शहर में लंबे समय से अनेक कोचिंग संस्थान बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों और निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं की जाती।

    लोगों का आरोप है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग सक्रिय होता है और फिर कुछ समय तक अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण और नियमों के अनुपालन की समीक्षा होती रहे, तो ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले ही कमियों को दूर किया जा सकता है और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

  • प्रयागराज में जनगणना के पहले चरण का काम पूरा आंकड़ों को लेकर बड़ा अपडेट

    प्रयागराज में जनगणना के पहले चरण का काम पूरा आंकड़ों को लेकर बड़ा अपडेट


    प्रयागराज । उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में जनगणना के पहले चरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस चरण में मुख्य रूप से मकानों की गणना की गई जो किसी भी जनगणना प्रक्रिया की आधारभूत कड़ी मानी जाती है। प्रशासनिक स्तर पर यह कार्य कई दिनों तक लगातार चलाया गया और शनिवार को इसका अंतिम सत्यापन भी संपन्न हो गया। इस पूरे अभियान के दौरान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विस्तृत सर्वेक्षण किया गया ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या कमी न रह जाए।

    हालांकि मकानों की गणना से जुड़े आंकड़े पहले सार्वजनिक किए जाने की योजना थी लेकिन उच्च स्तर पर लिए गए निर्णय के बाद इन्हें फिलहाल जारी नहीं किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन आंकड़ों को फिलहाल गोपनीय रखा जाए। बताया जा रहा है कि प्रदेश सरकार आने वाले समय में इन आंकड़ों को औपचारिक रूप से जारी करेगी और उसके बाद ही इन्हें सार्वजनिक चर्चा के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

    जनगणना के इस पहले चरण के दौरान जिले भर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों और सर्वे टीमों को लगाया गया था। इन टीमों ने घर घर जाकर मकानों की स्थिति संख्या और अन्य बुनियादी जानकारी एकत्र की। चार दिन पहले ही अधिकांश क्षेत्रों में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका था। उस समय जिला जनगणना अधिकारी और एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह ने जानकारी दी थी कि जिले में मकानों की कुल संख्या लगभग बारह लाख बारह हजार तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा प्रयागराज जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते जिले की आवासीय संरचना को दर्शाता है।

    इसके साथ ही प्रारंभिक अनुमान के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या लगभग इकहत्तर लाख दस हजार के आसपास पहुंच चुकी है। हालांकि यह केवल प्रारंभिक आकलन है और वास्तविक जनसंख्या की गणना वर्ष दो हजार सत्ताईस में की जाएगी जब पूर्ण जनगणना प्रक्रिया के अंतिम आंकड़े सामने आएंगे।

    प्रशासन ने अब जनगणना के अगले चरण की शुरुआत भी कर दी है। इस चरण में मकानों से आगे बढ़कर विस्तृत सामाजिक और आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। इसके लिए नई टीमों को मैदान में उतारा गया है जो घर घर जाकर लोगों की स्थिति शिक्षा रोजगार और अन्य आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगी।

    जनगणना जैसे बड़े अभियान में सटीकता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पूरे जिले में विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या त्रुटि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर डेटा की जांच के बाद ही उसे आगे भेजा जाएगा।

    प्रयागराज जैसे बड़े और जनसंख्या बहुल जिले में इस तरह का सर्वेक्षण प्रशासनिक दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद पहले चरण का सफलतापूर्वक पूरा होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें अगले चरण पर हैं जहां और अधिक विस्तृत आंकड़े सामने आएंगे जो भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए आधार तैयार करेंगे।

  • महाराष्ट्र की सियासत में ओमराजे निंबालकर बने गेमचेंजर, उद्धव-शिंदे की बाजी पर टिकी नजरें

    महाराष्ट्र की सियासत में ओमराजे निंबालकर बने गेमचेंजर, उद्धव-शिंदे की बाजी पर टिकी नजरें


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर तीव्र सियासी हलचल के दौर में है जहां शिवसेना के दो धड़ों उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के बीच शक्ति संतुलन की जंग और तेज हो गई है। इस पूरे राजनीतिक समीकरण के केंद्र में इस समय धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर का रुख सबसे अहम माना जा रहा है जिनका संभावित फैसला दोनों खेमों की रणनीति को सीधे प्रभावित कर सकता है।

    ओमराजे निंबालकर को लेकर सस्पेंस इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि हाल ही में उनके परिवार से जुड़े पुराने पवनराजे निंबालकर हत्याकांड मामले में अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई है। उद्धव गुट के नेता लगातार उन्हें अपने साथ बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं जबकि शिंदे गुट भी इस समीकरण में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय दिखाई दे रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम के बीच ऑपरेशन टाइगर की चर्चा भी तेज है जिसके तहत कुछ सांसदों और विधायकों के पाला बदलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि यदि उद्धव गुट के कुछ सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो संख्या बल का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे में ओमराजे निंबालकर का रुख निर्णायक साबित हो सकता है।

    ओमराजे ने अभी तक किसी भी गुट के पक्ष में खुलकर बयान नहीं दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वे अपने भविष्य का फैसला अपने क्षेत्र के लोगों और समर्थकों से चर्चा के बाद ही करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे या आदित्य ठाकरे के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही भविष्य में ऐसी कोई बात करने का इरादा रखते हैं।

    इस बीच शिवसेना (यूबीटी) की ओर से उनके संपर्क में रहने की कोशिशें जारी हैं। वहीं पार्टी की ओर से जारी व्हिप के बावजूद उनकी अनुपस्थिति ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है। दूसरी ओर पार्टी ने कुछ सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्थिति को गंभीर बना दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की मौजूदा सियासी जंग में यह सिर्फ एक व्यक्ति का फैसला नहीं बल्कि पूरे शक्ति संतुलन का मुद्दा बन चुका है। उद्धव और शिंदे दोनों ही गुट इस समय रणनीतिक बढ़त लेने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और आने वाले दिनों में ओमराजे निंबालकर का रुख इस पूरे राजनीतिक खेल की दिशा तय कर सकता है।

  • कर्नाटक MLC चुनाव के बाद सियासी हलचल, BJP विधायकों की होगी मंदिर में कसम

    कर्नाटक MLC चुनाव के बाद सियासी हलचल, BJP विधायकों की होगी मंदिर में कसम


    नई दिल्ली । कर्नाटक में हाल ही में हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपनी ही पार्टी के विधायकों पर निगरानी और आंतरिक जांच के लिए एक अनोखा कदम उठाने का फैसला किया है।

    सूत्रों के अनुसार, बीजेपी नेतृत्व ने तय किया है कि पार्टी के सभी विधायकों को कर्नाटक के प्रसिद्ध धर्मस्थल मंदिर ले जाया जाएगा, जहां उन्हें भगवान शिव के समक्ष शपथ दिलाई जाएगी। इस शपथ प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग की थी।

    पार्टी के भीतर मचे इस राजनीतिक संकट के बाद नेतृत्व का मानना है कि यह कदम संगठन में एकजुटता बनाए रखने और अंदरूनी असंतोष को उजागर करने में मदद करेगा। बताया जा रहा है कि यह पूरी प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी की जा सकती है और इसके लिए शीर्ष स्तर पर बैठक के बाद तारीखों का ऐलान किया जाएगा।

    धर्मस्थल मंदिर, जिसे कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है, अपने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। लगभग 800 साल पुराने इस मंदिर को धार्मिक सद्भाव का प्रतीक भी माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    हाल ही में हुए एमएलसी चुनाव में कांग्रेस ने सात में से पांच सीटें जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि भाजपा को केवल दो सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं उसकी सहयोगी जेडीएस इस चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी। इसी चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण विपक्षी खेमे को नुकसान उठाना पड़ा और परिणाम अप्रत्याशित रूप से बदल गए।

    इसी घटना के बाद अब भाजपा संगठन अपने भीतर अनुशासन और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रहा है, जिससे भविष्य में इस तरह की राजनीतिक असहमति और क्रॉस वोटिंग को रोका जा सके।

  • यूरिया संकट से भड़के किसान, मोदीनगर में सहकारी समिति पर बड़ा बवाल

    यूरिया संकट से भड़के किसान, मोदीनगर में सहकारी समिति पर बड़ा बवाल

    गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में यूरिया खाद की किल्लत को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। मोदीनगर क्षेत्र के कादराबाद गांव स्थित साधन सहकारी समिति पर शनिवार सुबह उस समय स्थिति बेकाबू हो गई जब किसानों ने गोदाम से लगभग 350 यूरिया के कट्टे जबरन उठा लिए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया और प्रशासन को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े।

    किसानों का आरोप है कि उन्हें पिछले कई दिनों से यूरिया खाद नहीं मिल रही थी, जबकि समिति के अधिकारी कथित तौर पर ऊंचे दामों पर खाद की बिक्री कर रहे थे। धान की बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में खाद न मिलने से किसानों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा था।

    जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात को समिति के गोदाम में यूरिया का एक ट्रक पहुंचा था, जिसे उतारकर गोदाम में रख दिया गया। जैसे ही शनिवार सुबह समिति का कार्यालय खुला, बड़ी संख्या में किसान वहां पहुंच गए और खाद की मांग को लेकर विरोध शुरू कर दिया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब किसानों को तुरंत यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया।

    इसके बाद किसानों का सब्र टूट गया और वे नारेबाजी करते हुए गोदाम में घुस गए। देखते ही देखते हालात ऐसे हो गए कि किसानों ने गोदाम से यूरिया के लगभग 350 कट्टे उठा लिए। इस दौरान समिति के कर्मचारियों और सचिव के साथ धक्का-मुक्की की भी खबरें सामने आईं।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने किसानों को समझाकर शांत कराया और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उपजिलाधिकारी के अनुसार पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है।

    वहीं दूसरी ओर यह भी जानकारी सामने आई है कि समिति के सचिव और कर्मचारियों ने बाद में किसानों के घर-घर जाकर यूरिया के कट्टों की कीमत वसूली और लगभग 93 हजार रुपये की राशि जिला सहकारी बैंक में जमा कराई गई। इस पूरे मामले ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में खाद वितरण व्यवस्था और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रहा है।

  • लखनऊ में खुलेआम गुंडई, युवक पर बीच सड़क हमला CCTV वीडियो से हड़कंप

    लखनऊ में खुलेआम गुंडई, युवक पर बीच सड़क हमला CCTV वीडियो से हड़कंप

    लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कानून-व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है, जहां चौक थाना क्षेत्र में स्थित केजीएमयू के बाहर बीच सड़क एक युवक के साथ दबंगों द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।

    वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कुछ युवक मिलकर एक व्यक्ति को घेरकर बेल्ट और डंडों से लगातार पीट रहे हैं। मारपीट इतनी बेरहमी से की जा रही है कि वहां से गुजरने वाले लोग भी कुछ देर के लिए ठहर जाते हैं, लेकिन किसी ने बीच-बचाव करने की कोशिश नहीं की। यह घटना शनिवार की बताई जा रही है और केजीएमयू परिसर के बाहर हुई थी।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हमले के पीछे क्या कारण था। न ही अब तक यह जानकारी सामने आई है कि पीड़ित युवक की ओर से किसी तरह की शिकायत पुलिस को दी गई है या नहीं। घटना के कारणों को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है और पुलिस जांच का इंतजार किया जा रहा है।

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक हिंसा बेहद चिंताजनक है और पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। नागरिकों ने मांग की है कि वीडियो में दिख रहे सभी आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

    स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की खुलेआम गुंडई से आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। फिलहाल पुलिस की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जांच की उम्मीद जताई जा रही है।

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योगी का संदेश, योग को बनाएं जीवनशैली का हिस्सा

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योगी का संदेश, योग को बनाएं जीवनशैली का हिस्सा


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योग को भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया और इसे जीवन का नियमित हिस्सा बनाने पर जोर दिया। झांसी में आयोजित सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में शामिल होते हुए उन्होंने कहा कि योग केवल एक दिन या किसी विशेष अवसर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवनशैली में शामिल करना आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ राष्ट्र की नींव है और योग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने बताया कि भारतीय ऋषि परंपरा ने जो पर्व और परंपराएं विकसित की हैं, उनका उद्देश्य हमेशा प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन को संतुलित रखना रहा है। योग भी इसी सोच का विस्तार है, जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच योग और भी अधिक आवश्यक हो गया है। नियमित योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और एकाग्रता को भी बढ़ाता है।

    कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने योगाभ्यास में हिस्सा लिया और विभिन्न आसनों का प्रदर्शन किया। इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे योग को केवल कार्यक्रम या आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं ताकि एक स्वस्थ और मजबूत समाज का निर्माण हो सके।

  • UP में गर्मी का कहर जारी, मानसून लेट होने से 25 जून तक राहत के आसार नहीं

    UP में गर्मी का कहर जारी, मानसून लेट होने से 25 जून तक राहत के आसार नहीं

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज फिलहाल पूरी तरह बदला हुआ है और लोगों को भीषण गर्मी व उमस का सामना करना पड़ रहा है। मानसून की एंट्री में देरी के कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान लगातार परेशान कर रहा है। मौसम विभाग ने आज भी कई इलाकों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और अधिक कठिन बनी हुई है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम के तेवर इसी तरह बने रह सकते हैं। अनुमान है कि 24 जून तक अधिकतर जिलों में तेज गर्मी और उमस का असर जारी रहेगा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में आंधी और हल्की बारिश की संभावना जरूर जताई गई है, लेकिन यह राहत सीमित ही रहेगी।

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 से 25 जून तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जिससे वहां गर्मी और अधिक परेशान कर सकती है। वहीं 26 जून के आसपास कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने के संकेत हैं, लेकिन यह व्यापक राहत देने में सक्षम नहीं होगी। दूसरी ओर पूर्वी यूपी में भी 24 जून तक मौसम गर्म और उमसभरा बना रह सकता है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष मानसून की रफ्तार सामान्य से धीमी है, जिसके कारण इसकी एंट्री एक से दो सप्ताह तक लेट हो सकती है। उत्तर पश्चिम भारत में शुष्क हवाओं का प्रभाव बना हुआ है, जो बारिश के सिस्टम को कमजोर कर रहा है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से स्थिति में कुछ बदलाव की उम्मीद है।

    25 जून के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो सकती हैं, लेकिन पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश के लिए अभी लगभग दो सप्ताह का और इंतजार करना पड़ सकता है। राजधानी लखनऊ समेत अन्य जिलों में भी गर्मी से राहत मिलने में समय लगने की संभावना है।

    फिलहाल लोगों को सलाह दी जा रही है कि तेज धूप और हीटवेव से बचाव के उपाय अपनाएं और पर्याप्त पानी पीकर खुद को हाइड्रेट रखें, क्योंकि आने वाले दिनों में गर्मी का असर और बढ़ सकता है।

  • नीट यूजी री-एग्जाम 2026 उत्तर प्रदेश में आज, पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में

    नीट यूजी री-एग्जाम 2026 उत्तर प्रदेश में आज, पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में


    नई दिल्ली । नीट यूजी री-एग्जाम 2026 को लेकर देशभर में कड़े सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजाम किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में आज यह महत्वपूर्ण परीक्षा आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रदेश के 59 जनपदों में करीब 3.5 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है।

    यह परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक एक ही पाली में पेन और पेपर मोड में आयोजित की जा रही है। परीक्षा के सफल संचालन के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता को रोका जा सके।

    राजधानी लखनऊ में ही 75 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) के अनुसार प्रत्येक केंद्र पर सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। परीक्षा सामग्री को केंद्र तक पहुंचाने और आंसर शीट को सुरक्षित वापस लाने की जिम्मेदारी विशेष टीम को दी गई है, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के साथ स्थानीय पुलिसकर्मी शामिल हैं।

    परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए क्वेश्चन पेपर ले जाने वाली सभी गाड़ियों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है, ताकि हर गतिविधि पर रियल टाइम निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की सख्त जांच और तलाशी की व्यवस्था भी की गई है।

    सरकार की ओर से छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में एडमिट कार्ड दिखाने पर अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत किराया छूट दी जा रही है। साथ ही दूसरे जिलों से आने वाले छात्रों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।

    गौरतलब है कि इससे पहले 3 मई को NEET परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के चलते 12 मई को इसे रद्द कर दिया गया था। इसी कारण अब री-एग्जाम कराया जा रहा है, जिसे लेकर छात्रों में उत्साह और प्रशासन में सतर्कता दोनों देखने को मिल रही है।