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  • IND vs PAK मैच विवाद पर श्रीलंका ने PCB को लिखा पत्र, भारत के साथ मुकाबले में भाग लेने की अपील

    IND vs PAK मैच विवाद पर श्रीलंका ने PCB को लिखा पत्र, भारत के साथ मुकाबले में भाग लेने की अपील


    नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर दिया है। 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला श्रीलंका के आर प्रेमदासा स्टेडियम में होना था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने बांग्लादेश के रुख का समर्थन करते हुए यह निर्णय लिया। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में अपने मैच खेलने से इनकार किया था और ICC के समझाने पर भी मान नहीं पाया।

    इस कदम से श्रीलंका को भी आर्थिक और लॉजिस्टिकल नुकसान होने की संभावना है। ऐसे में श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान को दो पेज का पत्र भेजा, जिसमें 2009 के आतंकी हमले और पाकिस्तान के कठिन समय में श्रीलंका के समर्थन को याद दिलाया गया। SLC ने PCB से इस मामले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।

    पत्र में कहा गया है कि अगर निर्धारित मैच नहीं होते, तो को-होस्ट देशों को वित्तीय, लॉजिस्टिकल और प्रतिष्ठान से जुड़ा बड़ा नुकसान होगा। SLC ने स्पष्ट किया कि ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए श्रीलंका पूरी तरह तैयार है और भारत-पाकिस्तान मैच के लिए टिकट बिक्री पहले ही तेज गति से हो चुकी है।

    SLC ने अपने पत्र में लिखा, श्रीलंका ICC पुरुष T20 वर्ल्ड कप 2026 का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। होस्ट वेन्यू के रूप में हमने कमर्शियल, ऑपरेशनल, लॉजिस्टिकल और सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए हैं। इस मैच में हॉस्पिटैलिटी प्लानिंग और टिकट बिक्री भी शामिल है। निर्धारित मैचों में भाग न लेने के दूरगामी नतीजे होंगे, जिसमें बड़े वित्तीय नुकसान और टूर्नामेंट की इंटरनेशनल अपील कम होना शामिल है।”

    श्रीलंका सरकार भी संभावित बॉयकॉट के असर पर नजर रख रही है, क्योंकि इन मैचों की मेजबानी से बड़ी आर्थिक उम्मीदें जुड़ी हैं। SLC ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि श्रीलंका ने कई बार पाकिस्तान का दौरा किया है, कठिन सुरक्षा परिस्थितियों और हमलों के बावजूद इंटरनेशनल मैचों में हिस्सा लिया। इसमें नेशनल टीम के काफिले पर हुए हमले भी शामिल हैं, जिनसे खिलाड़ियों और अधिकारियों को शारीरिक और मानसिक चोटें आईं।

    SLC ने PCB से सम्मानपूर्वक अनुरोध किया कि 15 फरवरी को भारत-पाकिस्तान मैच में भाग न लेने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। पत्र में जोर दिया गया कि क्रिकेट के व्यापक हित, दोनों बोर्डों के बीच सहयोग और खेल भावना को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान टीम निर्धारित सभी मैचों में शामिल हो। अंत में SLC ने PCB और पाकिस्तान सरकार को धन्यवाद देते हुए शीघ्र सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद जताई।

  • अभिषेक बच्चन का छलका दर्द: पिता अमिताभ की तारीफों और फिल्मी असफलताओं पर खुलकर बोले जूनियर बी

    अभिषेक बच्चन का छलका दर्द: पिता अमिताभ की तारीफों और फिल्मी असफलताओं पर खुलकर बोले जूनियर बी


    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन अक्सर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अपने बेटे अभिषेक बच्चन के अभिनय और उनकी मेहनत की सराहना करते नजर आते हैं। पिता का यह स्नेह जहां प्रशंसकों को पसंद आता है, वहीं कई बार अभिषेक को इसके कारण आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है। हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान अभिषेक बच्चन ने इन तमाम पहलुओं पर अपनी बेबाक राय रखी और बताया कि एक ‘सुपरस्टार’ पिता के साये में रहकर अपनी पहचान बनाना कितना चुनौतीपूर्ण होता है।

    साल 2000 में फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक ने स्वीकार किया कि 25 साल बीत जाने के बाद भी पिता से उनकी तुलना का दबाव कम नहीं हुआ है। अब 50 वर्ष के हो चुके अभिनेता ने माना कि लगातार मिलती सार्वजनिक असफलताएं और आलोचनाएं किसी भी इंसान को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि जब आप हफ्ते दर हफ्ते जनता के बीच असफल साबित होते हैं, तो नकारात्मकता से दूर रहना और निराशावादी न होना बेहद मुश्किल हो जाता है। हालांकि, उन्होंने कड़वाहट पालने के बजाय हमेशा अपने काम पर ध्यान देने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है।

    अमिताभ बच्चन द्वारा उनकी प्रशंसा किए जाने पर अभिषेक ने बहुत ही मानवीय दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि दुनिया अक्सर उनके पिता को एक ‘लार्जर देन लाइफ’ व्यक्तित्व के रूप में देखती है और मानती है कि उन्हें एक सामान्य इंसान की तरह व्यवहार करने की अनुमति नहीं है। लेकिन वास्तविकता यह है कि वह भी एक इंसान हैं, एक पिता हैं और एक दादा हैं। उन्हें भी अपने बच्चों की उपलब्धि पर गर्व महसूस करने और एक सामान्य माता-पिता की तरह प्रतिक्रिया देने का पूरा हक है।

    अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके माता-पिता, अमिताभ और जया बच्चन, उनके बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के बजाय उनकी मेहनत और प्रयासों पर गर्व करते हैं। उनके लिए सफलता का पैमाना हिट फिल्में नहीं, बल्कि ईमानदारी से किया गया काम है। वर्कफ्रंट की बात करें तो हाल ही में ‘हाउसफुल 5’ में नजर आए अभिषेक अब बड़े पर्दे पर धमाका करने को तैयार हैं। वह शाहरुख खान और सुहाना खान की बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखेंगे, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

  • मैं हूं ना 2: शाहरुख खान और फराह खान की जोड़ी फिर मचाएगी धमाल, डबल रोल में नजर आएंगे 'किंग खान'

    मैं हूं ना 2: शाहरुख खान और फराह खान की जोड़ी फिर मचाएगी धमाल, डबल रोल में नजर आएंगे 'किंग खान'


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के गलियारों से शाहरुख खान के प्रशंसकों के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सोशल मीडिया पर हलचल तेज कर दी है। साल 2004 की ब्लॉकबस्टर फिल्म मैं हूं ना के सीक्वल को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है, वह किसी बड़े धमाके से कम नहीं है। खबर है कि शाहरुख खान और फराह खान एक बार फिर मैं हूं ना 2 के लिए साथ आ रहे हैं, और इस बार मनोरंजन का डोज़ दोगुना होने वाला है क्योंकि शाहरुख फिल्म में डबल रोल निभाते नजर आएंगे।

    पिंकविला की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फराह खान ने शाहरुख के सामने एक ऐसा कॉन्सेप्ट रखा है जिसमें सुपरस्टार दो विपरीत किरदारों को पर्दे पर जीवंत करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस सीक्वल का मूल विचार खुद शाहरुख खान ने ही दिया है। फिल्म की कहानी में देशभक्ति का जज्बा, हाई-वोल्टेज एक्शन और वही सिग्नेचर कॉमेडी होगी जिसके लिए पहली फिल्म जानी जाती थी। सूत्र बताते हैं कि फिल्म में भारत के सामने आने वाली एक नई और बड़ी धमकी को दिखाया जाएगा, जिससे निपटने के लिए पुरानी स्टार कास्ट एक बार फिर साथ आ सकती है।

    हालांकि, फैंस को थोड़ा इंतजार करना होगा क्योंकि शाहरुख खान फिलहाल अपनी आगामी फिल्म किंग की शूटिंग में व्यस्त हैं। बताया जा रहा है कि किंग की रिलीज के बाद ही वह फराह खान से मैं हूं ना 2 की पूरी स्क्रिप्ट सुनेंगे और उसके बाद ही इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे। किंग फिल्म भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है क्योंकि इसमें शाहरुख पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन शेयर करते दिखेंगे। साथ ही इस फिल्म में दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन और अनिल कपूर जैसे बड़े सितारे भी नजर आएंगे।

    शाहरुख और फराह की जोड़ी ने इससे पहले मैं हूं नाओम शांति ओम और हैप्पी न्यू ईयर जैसी सुपरहिट फिल्में दी हैं। ऐसे में मैं हूं ना 2 की घोषणा ने दर्शकों की उम्मीदों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। फैंस का कहना है कि शाहरुख को दोबारा मेजर राम प्रसाद शर्मा के अंदाज में देखना किसी सपने के सच होने जैसा होगा, और ऊपर से डबल रोल का तड़का फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने के लिए काफी है। अब देखना यह होगा कि कब आधिकारिक तौर पर इस प्रोजेक्ट का ऐलान होता है और किंग खान एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर अपना जादू बिखेरते हैं।

  • जब चमकदार परदे से संसद तक का सफर अधूरा रह गया: राजनीति में ज्यादा दिन टिक नहीं पाए ये बॉलीवुड स्टार्स

    जब चमकदार परदे से संसद तक का सफर अधूरा रह गया: राजनीति में ज्यादा दिन टिक नहीं पाए ये बॉलीवुड स्टार्स


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड और राजनीति का रिश्ता नया नहीं है। फिल्मों की लोकप्रियता और जनता के बीच गहरी पैठ के चलते कई सितारों ने सोचा कि वे सियासत में भी उतनी ही सफलता हासिल कर लेंगे। कुछ स्टार्स ने चुनाव जीते तो कुछ को हार का सामना करना पड़ा लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इनमें से कई ज्यादा समय तक राजनीति में टिक नहीं पाए और फिर वापस अपनी पुरानी दुनिया या निजी जिंदगी में लौट गए।

    महानायक अमिताभ बच्चन इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। साल 1984 में उन्होंने एक्टिंग से ब्रेक लेकर राजनीति में कदम रखा और इलाहाबाद सीट से रिकॉर्ड जीत दर्ज की। उस वक्त माना जा रहा था कि वह राजनीति में लंबी पारी खेलेंगे लेकिन तीन साल बाद ही 1987 में उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में कई मौकों पर बिग बी ने यह संकेत दिया कि राजनीति उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं थी।

    गोविंदा भी उन स्टार्स में शामिल हैं जिन्होंने राजनीति को लेकर खुलकर पछतावा जताया। साल 2004 में कांग्रेस के टिकट पर मुंबई नॉर्थ से लोकसभा चुनाव जीतने वाले गोविंदा ने 2009 में राजनीति से दूरी बना ली। कई इंटरव्यू में उन्होंने माना कि राजनीति ज्वाइन करना उनके जीवन की एक बड़ी गलती थी।

    उर्मिला मातोंडकर ने भी कांग्रेस के साथ राजनीति में एंट्री ली। उन्होंने मुंबई नॉर्थ सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के कुछ ही दिनों बाद उर्मिला ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से पूरी तरह किनारा कर लिया।

    साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत ने भले ही चुनाव नहीं लड़ा लेकिन उनकी राजनीतिक घोषणा ने देशभर में हलचल मचा दी थी। 2017 में उन्होंने रजनी मक्कल मंडराम पार्टी बनाने का ऐलान किया मगर 2021 में खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राजनीति में सक्रिय रूप से उतरने से इनकार कर दिया।

    संजय दत्त ने भी समाजवादी पार्टी के साथ सियासी सफर शुरू किया था। साल 2008 में पार्टी से जुड़े संजय को जनरल सेक्रेटरी बनाया गया लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने न सिर्फ पद छोड़ा बल्कि पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया।

    जावेद जाफरी ने 2014 में आम आदमी पार्टी ज्वाइन की और चुनाव लड़ा लेकिन हार के बाद वे राजनीति में सक्रिय नजर नहीं आए। वहीं शेखर सुमन ने 2009 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा हार के बाद 2012 में पार्टी छोड़ दी और बाद में साफ कहा कि वह दोबारा राजनीति में नहीं आएंगे।

    मराठी सिनेमा के चर्चित नाम महेश मांजरेकर ने भी 2014 में चुनाव लड़ा लेकिन हार के बाद उनका राजनीतिक सफर वहीं थम गया। इन सभी उदाहरणों से साफ है कि फिल्मों की लोकप्रियता राजनीति में सफलता की गारंटी नहीं होती। राजनीति की जटिलताएं दबाव और जिम्मेदारियां हर किसी के बस की बात नहीं होतीं और यही वजह है कि कई सितारे जल्द ही इस दुनिया से दूरी बना लेते हैं।

  • दिल्ली का दूसरा साइड तो आपने देखा ही नहीं…5 ऐसी जगह जो राजधानी को दिखाती हैं औरों से अलग

    दिल्ली का दूसरा साइड तो आपने देखा ही नहीं…5 ऐसी जगह जो राजधानी को दिखाती हैं औरों से अलग


    नई दिल्ली । दिल्ली में हर मूड के इंसान के लिए कुछ ना कुछ है आप यहां इतिहास देख लें या यहां की संस्कृति सब कुछ एकदम अलग लगता है। दिल्ली केवल सैकड़ों साल पुराने किलों और इमारतों तक सीमित नहीं है बल्कि यहां पक्षियों से भरे वेटलैंड्स शांति-सुकून देने वाले पार्क और सलीके से बनाए गए गार्डन्स भी हैं जो टूरिस्ट ही नहीं बल्कि लोकल लोगों को भी बार-बार खींच लाते हैं। दिल्ली को देखना चाहते हैं तो चलिए जानते हैं यहां की कुछ ऐसी जगहों के बारे में जो उसे दूसरे शहरों से अलग बनाती हैं।

    ओखला बर्ड सैंक्चुरी

    अगर लगता है कि बर्ड वॉचिंग वाली जगहों पर देखने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है तो ओखला बर्ड सैंक्चुरी आपकी सोच बदल सकती है। ये शहर के बीच मौजूद एक खास वैटलैंड है जहां कंक्रीट की इमारतों के बैकग्राउंड आपको हैरान कर देंगे। यमुना के फ्लडप्लेन्स में फैली इस सैंक्चुरी में 300 से ज्यादा तरह के पक्षी पाए जाते हैं खासकर सर्दियों के मौसम में। यहां आप सुबह जा सकते हैं क्योंकि इस दौरान माइग्रेटरी बर्ड्स जैसे पेंटेड स्टॉर्क पेल्किन और कई तरह के शिकारी पक्षी आसानी से दिख जाते हैं।
    हौज खास विलेज
    अगर दोस्तों के साथ यादगार शाम बिताना चाहते हैं तो हौज खास विलेज से बेहतर ऑप्शन मिलना काफी मुश्किल है। ये वो जगह है जहां पुराने जमाने का इतिहास और आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल एक साथ देखने को मिलती है। यहां 13वीं सदी का हौज तालाब कब्रें और मदरसे के खंडहर हैं जो एक खूबसूरत झील को देखते हुए बनाए गए हैं। यहां कैफे बूटीक शॉप्स और आर्ट स्पेसेज की भरमार है।

    दिल्ली रिज जंगल ट्रेल
    दिल्ली रिज को अक्सर शहर की ग्रीन लंग्स कहते हैं यहां आते ही सच में खुलकर सांस लेने का एहसास होता है। यह जगह आपको कुछ देर के लिए शहर की भीड़-भाड़ और शोर से दूर जंगल जैसे माहौल में ले जाती है। सेंट्रल रिज और नॉर्थ रिज के आसपास के इलाके नेचर वॉक बर्ड वॉचिंग और शांत ट्रेक के लिए काफी पसंद किए जाते हैं। यहां के जमीन और रास्ते थोड़े आपको ऑफबीट लगेंगे।

    दिल्ली हाट

    दिल्ली हाट राजधानी में घूमने वाली बेहतरीन जगहों में शामिल है। ये एक ऐसी एयर मार्केट है जहां आपको भारत की कला शिल्प और खाने की झलक एक ही जगह पर मिल जाती है। यहां अलग राज्यों से आए कारीगर अपनी दुकानें लगाते हैं जिनमें हैंडलूम कपड़े जूलरी मिट्टी के बर्तन और लोक कला की चीजें मिलती हैं। खाने के शौकीनों के लिए भी ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं। मोमोज लिट्टी-चोखा डोसा से लेकर कबाब तक हर राज्य के फेमस स्वाद यहां चखने को मिल जाएंगे।

    लाल किला

    लाल किला दिल्ली की पहचान और भारत के सबसे मजबूत ऐतिहासिक प्रतीकों में से एक है। ये यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा बनवाया गया था। इसकी ऊंची-ऊंची लाल पत्थर की दीवारों के अंदर महल दीवाने आम दीवाने खास और म्यूजियम हैं जो भारत के इतिहास के कई अहम किस्से बताते हैं।
  • कुंभ 2027 का शंखनाद: हरिद्वार में बनेगा भव्य आयोजन का नया रिकॉर्ड, अखाड़ों ने कसी कमर

    कुंभ 2027 का शंखनाद: हरिद्वार में बनेगा भव्य आयोजन का नया रिकॉर्ड, अखाड़ों ने कसी कमर


    नई दिल्ली । धर्मनगरी हरिद्वार में होने वाले कुंभ 2027 को लेकर आध्यात्मिक जगत में हलचल तेज हो गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी कुंभ न केवल दिव्य और भव्य होगा, बल्कि यह प्रयागराज के आयोजनों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ने की तैयारी में है। सनातन समाज और संतों के बीच कुंभ को लेकर भारी उत्साह है और अभी से महीनों की गिनती शुरू हो चुकी है।

    सभी 13 अखाड़ों का एक सुर में समर्थन आयोजन की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अखाड़ों के बीच का आपसी समन्वय है। महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई बैठक में सभी 13 अखाड़ों ने एक स्वर में कुंभ के मेगा प्लान का समर्थन किया है। किसी भी स्तर पर कोई विरोध नहीं है। निरंजनी अखाड़े में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जहाँ आयोजन की बारीकियों पर चर्चा की जा रही है। इस बार का विशेष आकर्षण निरंजनी अखाड़े द्वारा बनाए गए जापानी महामंडलेश्वर होंगे, जो वैश्विक स्तर पर सनातन धर्म के विस्तार का प्रतीक बनकर उभरेंगे।

    प्रयागराज के फैसलों और सुरक्षा पर रुख प्रयागराज कुंभ के दौरान लिए गए कड़े फैसलों और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर बात करते हुए महंत रविंद्र पुरी ने धर्म की शुद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के समय में ‘जूस जिहाद’ और ‘थूक जिहाद’ जैसी घटनाओं ने संतों के मन को विचलित किया है। सनातन धर्म में आहार की शुद्धता सर्वोपरि है, ताकि किसी का धर्म भ्रष्ट न हो।

    हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में हम सबको एक समान दृष्टि से देखते हैं, लेकिन कुंभ की मर्यादा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। 2027 के कुंभ के लिए कौन से नियम और कड़े फैसले लागू होंगे, इसका अंतिम निर्णय सभी 13 अखाड़े सामूहिक बैठक में चर्चा के बाद लेंगे। उचित और अनुचित का विचार कर ही अंतिम गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

    भव्यता और प्रबंधन की नई मिसाल कुंभ 2027 को लेकर शासन और प्रशासन के साथ मिलकर एक ऐसी रूपरेखा तैयार की जा रही है जिससे श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित अनुभव मिल सके। हरिद्वार कुंभ को एक उत्सव के रूप में पेश करने की तैयारी है, जहाँ आस्था के साथ-साथ आधुनिक प्रबंधन का भी संगम देखने को मिलेगा।

  • एथलीट पेरेंट्स की दुविधा: जब बच्चे का मन न लगे मैदान में, तो दबाव नहीं 'डायरेक्शन' बदलें

    एथलीट पेरेंट्स की दुविधा: जब बच्चे का मन न लगे मैदान में, तो दबाव नहीं 'डायरेक्शन' बदलें


    नई दिल्ली । अक्सर देखा जाता है कि जिन घरों में माता-पिता खुद खेल की दुनिया के दिग्गज रहे हैं, वहां समाज और परिवार को उम्मीद होती है कि उनका बच्चा भी उसी विरासत को आगे बढ़ाएगा। लेकिन हकीकत इससे अलग हो सकती है। अगर आप एक एथलीट हैं और आपका बेटा स्पोर्ट्स में रुचि नहीं ले रहा, तो यह आपके लिए निराशाजनक हो सकता है, लेकिन यहाँ यह समझना जरूरी है कि ‘जबरदस्ती का खेल’ कभी चैंपियन पैदा नहीं करता।

    रुचि न होने के पीछे छिपे मनोवैज्ञानिक कारण अक्सर माता-पिता बच्चे की अरुचि को उसका ‘आलस’ मान लेते हैं, जबकि इसके पीछे कई गहरे मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण ‘परफॉर्मेंस प्रेशर’ होता है। जब बच्चा देखता है कि उसके माता-पिता खेल में सफल रहे हैं, तो उसे हारने से डर लगने लगता है। उसे लगता है कि अगर वह अच्छा नहीं खेला, तो वह अपने माता-पिता के नाम को छोटा कर देगा। इसके अलावा, खेल के मैदान पर होने वाला सोशल जजमेंट या एंग्जाइटी भी उसे पीछे धकेलती है। कभी-कभी कारण शारीरिक भी होते हैं, जैसे लो-एनर्जी लेवल या किसी खेल विशेष में रुचि की कमी। सख्त कोच का व्यवहार या साथी खिलाड़ियों से लगातार तुलना भी बच्चे के मन में खेल के प्रति नफरत पैदा कर सकती है।

    फोर्स करना क्यों हो सकता है खतरनाक? यदि आप बच्चे को उसकी इच्छा के विरुद्ध मैदान पर भेजते हैं, तो इसके परिणाम नकारात्मक हो सकते हैं। जबरदस्ती करने से बच्चा न केवल खेल से दूर होगा, बल्कि उसका आत्मविश्वास भी डगमगा सकता है। दबाव में खेलने से उसमें चिड़चिड़ापन, तनाव और माता-पिता के प्रति विद्रोह की भावना पैदा हो सकती है। खेल जो खुशी और मानसिक शांति का माध्यम होना चाहिए, वह उसके लिए एक ‘बोझ’ बन जाता है। लॉन्ग टर्म में, यह आपके और बच्चे के बीच के भावनात्मक रिश्ते को भी कमजोर कर सकता है।

    क्या करें कि वह खेलों में रुचि ले? बतौर पेरेंट्स आपकी पहली जिम्मेदारी यह पहचानना है कि बच्चा किस चीज में ‘बेस्ट’ है। यदि उसे क्रिकेट या फुटबॉल पसंद नहीं, तो शायद उसे तैराकी, बैडमिंटन या चेस जैसा कोई अन्य खेल पसंद आ सकता है। उसे विभिन्न खेलों के विकल्प दें और खुद फैसला करने का मौका दें। घर का माहौल ऐसा रखें जहाँ खेल केवल जीतने के लिए नहीं, बल्कि आनंद और सेहत के लिए खेला जाए।

    याद रखें, सही पेरेंटिंग का अर्थ बच्चे को अपनी परछाई बनाना नहीं, बल्कि उसे उसकी अपनी चमक खोजने में मदद करना है। अगर वह खेल में करियर नहीं बनाना चाहता, तो भी उसे फिजिकल एक्टिविटी के अन्य तरीकों जैसे डांस या योग के लिए प्रेरित किया जा सकता है। उसे स्पोर्ट्स के फायदे बताएं, लेकिन उसे अपनी विरासत ढोने के लिए मजबूर न करें। जब बच्चा खुद को सुरक्षित और बिना किसी जजमेंट के महसूस करेगा, तभी वह अपनी असली प्रतिभा को निखार पाएगा।

  • बुध-शनि का महासंयोग: 30 साल बाद बना 'द्विद्वादश योग', इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत..

    बुध-शनि का महासंयोग: 30 साल बाद बना 'द्विद्वादश योग', इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत..


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति और उनकी स्थिति को मानवीय जीवन में बड़े बदलावों का कारक माना जाता है। इसी कड़ी में शुक्रवार 6 फरवरी 2026 की शाम एक ऐसी खगोलीय घटना घटने जा रही है जो करीब तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद दोहराई जा रही है। द्रिक पंचांग की गणनाओं के अनुसार इस दिन बुध ग्रह कुंभ राशि में विराजमान होंगे जबकि न्याय के देवता शनि देव मीन राशि में संचरण कर रहे होंगे। इन दोनों ग्रहों की यह स्थिति ज्योतिष में ‘द्विद्वादश योग’ का निर्माण करेगी जिसे आकस्मिक धन लाभ और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली योग माना जाता है।

    शास्त्रों के अनुसार जब दो ग्रह एक-दूसरे से दूसरे और बारहवें भाव की दूरी पर स्थित होते हैं तो इसे द्विद्वादश योग की संज्ञा दी जाती है। इस बार का संयोग इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें बुध की तार्किक बुद्धि और शनि की अनुशासनात्मक ऊर्जा का मिलन हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योग विशेष रूप से न्याय प्रणाली प्रशासन बड़े व्यापारिक घरानों और रणनीतिक योजना बनाने वाले लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

    इस दुर्लभ ग्रह दशा का सर्वाधिक सकारात्मक प्रभाव पांच विशेष राशियों पर देखने को मिलेगा। वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि उनके लिए नौकरी और व्यापार में अचानक लाभ के द्वार खुल सकते हैं। वर्षों पुराना अटका हुआ निवेश न केवल मुनाफा देगा बल्कि विरोधियों पर आपकी बढ़त भी सुनिश्चित होगी। वहीं कर्क राशि के लोगों के लिए यह योग आर्थिक मोर्चे पर बड़ी मजबूती लेकर आ रहा है। व्यापारिक निर्णयों में सूझबूझ और नई साझेदारियां भविष्य की राह आसान करेंगी और पुराने विवादों से छुटकारा मिलेगा।

    सिंह राशि के जातकों के लिए यह करियर की उड़ान का समय है। उन्हें कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति मिल सकती है जिससे समाज में उनकी प्रतिष्ठा और आय के स्रोतों में वृद्धि होगी। कन्या राशि के जातकों की बात करें तो उनके लिए यह परिवर्तन शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उम्मीदें लेकर आएगा। लंबे समय से रुकी हुई परियोजनाएं अब गति पकड़ेंगी और उनकी कार्यक्षमता में जबरदस्त सुधार होगा। अंत में मकर राशि के जातकों के लिए यह पेशेवर जीवन में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है जहाँ योजनाबद्ध तरीके से किए गए प्रयास उन्हें आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति प्रदान करेंगे। हालांकि ज्योतिषाचार्यों का यह भी कहना है कि इन शुभ प्रभावों की तीव्रता व्यक्ति की अपनी जन्म कुंडली और वर्तमान महादशा पर भी निर्भर करेगी इसलिए धैर्य और विवेक के साथ आगे बढ़ना ही श्रेयस्कर होगा।

  • Chocolate Day Special: चॉकलेट डे पर चाहिए दमकती त्वचा तो स्किन केयर में करें चॉकलेट का इस्तेमाल

    नई दिल्ली । वैलेंटाइन वीक तीसरे दिन यानी कि 9 फरवरी को चॉकलेट डे मनाया जाता है ऐसे में इस दिन कपल्स एक-दूसरे को चॉकलेट तोहफे में देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इसी खाने वाली चॉकलेट से आप अपने चेहरे को दमका भी सकते हैं। जी हां आपको ये जानने की जरूरत है कि डार्क चॉकलेट त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है?

    दरअसल इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्लेवोनॉयड्स और मिनरल्स स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करते हैं। खासतौर पर आजकल नेचुरल और होम रेमेडीज की डिमांड तेजी से बढ़ रही है ऐसे में चॉकलेट फेस पैक एक ट्रेंडिंग ब्यूटी हैक बन चुका है।तो अगर आप केमिकल प्रोडक्ट्स से दूर रहकर नेचुरल तरीके से ग्लोइंग स्किन पाना चाहती हैं तो चॉकलेट का सही इस्तेमाल जानना बेहद ज़रूरी है। आइए इस लेख में आपको इसी बारे में जानकारी देते हैं।

    चॉकलेट फेस पैक
    डार्क चॉकलेट में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं।
    जब इसमें शहद और दूध मिलाया जाता है तो यह स्किन को गहराई से मॉइश्चराइज करता है। ये फेस पैक ड्राई और डल स्किन के लिए बेहद फायदेमंद है। हफ्ते में 1–2 बार इसका इस्तेमाल करने से चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और स्किन सॉफ्ट व स्मूद बनती है।
    चॉकलेट स्क्रब
    चॉकलेट और ब्राउन शुगर से बना स्क्रब त्वचा की ऊपरी परत पर जमी डेड स्किन को हटाने में मदद करता है। ये ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाता है जिससे चेहरे पर तुरंत फ्रेशनेस नजर आती है।
    इस स्क्रब को हफ्ते में सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल करें ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे।

    चॉकलेट और कॉफी मास्क
    कॉफी में मौजूद कैफीन और चॉकलेट के पोषक तत्व मिलकर टैनिंग पिग्मेंटेशन और डार्क स्पॉट्स को हल्का करने में मदद करते हैं। गुलाब जल त्वचा को ठंडक देता है और पोर्स को टाइट करता है। ये मास्क ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वालों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है।
    बरतें ये सावधानी
    चेहरे पर लगाने से पहले हमेशा पैच टेस्ट करें ताकि किसी तरह की एलर्जी या जलन से बचा जा सके।
    स्किन के लिए केवल डार्क चॉकलेट का ही इस्तेमाल करें क्योंकि दूध या फ्लेवर वाली चॉकलेट में ज्यादा शुगर और केमिकल होते हैं।फेस पैक को 15–20 मिनट से अधिक समय तक चेहरे पर न रखें और स्क्रब करते समय त्वचा को जोर से न रगड़ें।अगर आपकी त्वचा सेंसिटिव या एक्ने-प्रोन है तो इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें। खुले घाव कट या एक्टिव मुंहासों पर चॉकलेट न लगाएं।

  • गुरुवार के उपाय: विष्णु और गुरु बृहस्पति की पूजा से बढ़ाएं सुख-समृद्धि..

    गुरुवार के उपाय: विष्णु और गुरु बृहस्पति की पूजा से बढ़ाएं सुख-समृद्धि..


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन ज्ञान, करियर, विवाह, धन और सामाजिक सम्मान से जुड़ा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, जिन जातकों की कुंडली में गुरु कमजोर होता है, उनके लिए गुरुवार के उपाय विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं गुरु बृहस्पति को धर्म, नीति, शिक्षा और सदाचार का कारक ग्रह माना गया है। यही कारण है कि गुरुवार को किए गए दान, पूजा और मंत्र जाप से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

    गुरुवार के प्रमुख उपाय
    धार्मिक परंपरा के अनुसार गुरुवार की शुरुआत स्नान से करनी चाहिए। स्नान के जल में हल्दी मिलाकर स्नान करना शुभ माना गया है। इसके बाद पीले वस्त्र पहनने की परंपरा है। पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, हल्दी और पीले फल अर्पित किए जाते हैं।केले के वृक्ष की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु केले के पेड़ की जड़ में जल, हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित कर दीपक जलाते हैं। ऐसा करने से गुरु दोष शांत होता है और आर्थिक अड़चनें दूर होती हैं।

    मंत्र जाप और दान
    गुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्र जाप अत्यंत प्रभावकारी है। 108 बार
    ॐ बृं बृहस्पतये नमः या ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नमः का जाप करना शुभ माना जाता है। दान की दृष्टि से गुरुवार को हल्दी, पीले वस्त्र, चने की दाल, गुड़ या केसर जरूरतमंदों को देना लाभकारी होता है। गाय को चने की दाल और गुड़ खिलाने से भी गुरु ग्रह मजबूत होता है।

    विशेष सावधानियां
    कुछ परंपराओं के अनुसार, गुरुवार की सुबह हल्दी और गंगाजल मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। वहीं इस दिन बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने, कपड़े धोने या हल्दी और पैसे उधार देने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से गुरु की स्थिति कमजोर हो सकती है।धार्मिक विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित श्रद्धा और संयम के साथ किए गए ये उपाय मानसिक शांति और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं।