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  • माघ मेले में बग्घी विवाद: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, जमीन आवंटन रद्द और आजीवन प्रतिबंध की धमकी

    माघ मेले में बग्घी विवाद: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, जमीन आवंटन रद्द और आजीवन प्रतिबंध की धमकी



    प्रयागराज।माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्राधिकरण के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। मेला प्रशासन ने अब दूसरी बार नोटिस जारी करते हुए उनकी संस्था को दी गई भूमि आवंटन रद्द करने और उन्हें मेले से आजीवन प्रतिबंधित करने की बात कही है।
    प्रशासन ने नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा है।

    नोटिस में क्या लिखा है?
    प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस में कहा है कि मौनी अमावस्या के दिन पुलिस ने संगम क्षेत्र में सभी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई थी। इसी दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बग्घी लेकर संगम नोड पर जाने का प्रयास किया, जिससे भगदड़ की संभावना बढ़ गई और मेला प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावित हुई।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उन्होंने मेले में अपने आप को शंकराचार्य बताकर बोर्ड लगवाए, जो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है।

    इसलिए प्राधिकरण ने पूछा है कि उनकी संस्था का भूमि आवंटन और सुविधाएं निरस्त कर उन्हें माघ मेले में हमेशा के लिए प्रतिबंधित क्यों न किया जाए।

    शंकराचार्य ने क्या जवाब दिया?
    मेला प्रशासन के नोटिस पर शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने प्रेस नोट जारी कर इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि नोटिस बैक डेट में चस्पा किया गया और प्रशासन अब कह रहा है कि जवाब नहीं दिया गया।

    शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, भ्रामक और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि जिस बग्घी का उल्लेख किया जा रहा है, वह उनके शिविर में कभी नहीं थी।

    उनका दावा है कि यह आरोप CCTV फुटेज से भी आसानी से गलत साबित किया जा सकता है।

    उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि धार्मिक कार्यों में मेला प्रशासन का दखल अस्वीकार्य है और यदि यह जारी रहा तो अंजाम बुरा हो सकता है।

    क्यों बढ़ रहा है विवाद?
    माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन संगम पर स्नान को लेकर पहले ही तनाव देखने को मिला था। इस विवाद ने शंकराचार्य और मेला प्राधिकरण के बीच रिश्तों में और खटास ला दी है। अब प्रशासन द्वारा भूमि आवंटन रद्द करने और आजीवन प्रतिबंध की धमकी से यह मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया है।

    अगला कदम क्या हो सकता है?
    प्रशासन ने नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा है।
    यदि शंकराचार्य की संस्था द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो मेला प्राधिकरण भूमि आवंटन रद्द और प्रतिबंध जैसे कदम उठा सकता है। इससे माघ मेले के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के मुद्दे और भी अधिक बढ़ सकते हैं।

  • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की 11 साल की यात्रा: पीएम मोदी के गुजरात मॉडल ने कैसे बदला एजुकेशन सिस्टम

    बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की 11 साल की यात्रा: पीएम मोदी के गुजरात मॉडल ने कैसे बदला एजुकेशन सिस्टम

    नई दिल्ली। भारत में बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए शुरू किया गया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान आज एक मजबूत जन आंदोलन का रूप ले चुका है। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की थी। अभियान के 11 साल पूरे होने पर ‘मोदी आर्काइव’ ने इसे लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक प्रयास बताया है।

    गुजरात से तैयार हुआ था राष्ट्रीय अभियान का खाका

    ‘मोदी आर्काइव’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा पोस्ट में बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने से पहले इस अभियान की नींव गुजरात में रखी गई थी। गुजरात में चलाए गए ‘कन्या केलवणी’ और ‘शाला प्रवेशोत्सव’ जैसे कार्यक्रमों ने आंकड़े बदलने से पहले समाज की सोच बदली। खराब महिला साक्षरता, स्कूल छोड़ने की ऊंची दर और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे राज्य में इन योजनाओं ने बड़ा बदलाव लाया।

    2001 की सच्चाई और बदलाव का संकल्प

    वीडियो में बताया गया कि साल 2001 में जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, तब महिला साक्षरता दर केवल 57.80 प्रतिशत थी। लगभग 38.92 प्रतिशत लड़कियां स्कूल बीच में छोड़ देती थीं, जबकि 42 हजार स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय तक नहीं थे। इन हालातों को बदलने के लिए मुख्यमंत्री मोदी ने ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया।

    गांव-गांव जाकर बदली सोच

    मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी खुद गांव-गांव पहुंचे। भीषण गर्मी में तीन दिन तक चलने वाले अभियानों में मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल और सैकड़ों वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते थे। हर साल 634 अधिकारी 18 हजार से अधिक गांवों में जाकर माता-पिता से अपील करते थे “अपनी बेटियों को स्कूल भेजिए।” इस अभियान का एक ही लक्ष्य था हर लड़की को स्कूल तक पहुंचाना।

    इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर आर्थिक सहायता तक

    इस दौरान सिर्फ बेटियों के लिए 42,371 शौचालय, 58,463 नई कक्षाएं और 22,758 स्कूलों में बिजली पहुंचाई गई। ‘कन्या केलवणी’ योजना के तहत 55 हजार से अधिक लड़कियों को आर्थिक सहायता दी गई। सरस्वती साइकिल योजना, विद्या लक्ष्मी बॉन्ड और छात्राओं को टैबलेट देने जैसे प्रयासों से शिक्षा को प्रोत्साहन मिला।

    आंकड़ों में दिखा असर

    इन प्रयासों का नतीजा यह रहा कि महिला साक्षरता दर 57.80 प्रतिशत से बढ़कर 70.73 प्रतिशत हो गई। स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या 38.92 प्रतिशत से घटकर 7.08 प्रतिशत रह गई। ‘मोदी आर्काइव’ के अनुसार, इस तरह राष्ट्रीय नारा बनने से पहले ही ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ एक सफल जमीनी आंदोलन बन चुका था।

  • अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच 19 साल बाद चारों शंकराचार्य एक मंच पर? दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है बड़ा आयोजन

    अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच 19 साल बाद चारों शंकराचार्य एक मंच पर? दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है बड़ा आयोजन



    नई दिल्ली। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कहा जा रहा है कि 19 साल बाद चारों चतुष्पीठों के शंकराचार्य एक मंच पर आ सकते हैं। यह आयोजन 10 मार्च 2026 को दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है, जिसमें ‘गो माता राष्ट्र माता अभियान’ के मंच पर चारों शंकराचार्य शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।अगर ऐसा होता है तो यह न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि ज्योतिषपीठ विवाद में नया मोड़ भी ला सकता है।

    क्या है खास बात?
    ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को पहले से दो पीठों का समर्थन मिल चुका है। उनके अनुसार द्वारका शारदा पीठ और शृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य उन्हें ज्योतिषपीठ के वैध शंकराचार्य के रूप में मान्यता देते हैं।
    उन्होंने यह भी कहा कि पिछले माघ मेले के दौरान इन दोनों पीठों के शंकराचार्यों ने उनके साथ संगम में स्नान किया था, जो उनकी मान्यता का प्रतीक माना जाता है।

    अब यदि तीसरी पीठ का समर्थन भी मिल जाता है, तो विवाद में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    हालांकि अभी तक पूरी पीठ की ओर से निश्चलानंद (और अन्य शंकराचार्यों) के नाम पर खुली सहमति सामने नहीं आई है, लेकिन माघ मेले में दो दिन पहले अविमुक्तेश्वरानंद को अपना ‘लाडला’ कहने की चर्चा ने संकेत दिया कि माहौल नरम पड़ रहा है।

    गो रक्षा आंदोलन और शंकराचार्यों की सक्रियता
    गो रक्षा आंदोलन को लेकर चारों शंकराचार्य पहले से ही सक्रिय हैं।
    गाय की रक्षा के व्रत के लिए शंकराचार्य निश्चलानंद ने सिंहासन और छत्र का त्याग भी कर रखा है। ऐसे में चारों शंकराचार्यों का एक मंच पर आना यह संकेत होगा कि अविमुक्तेश्वरानंद पर सभी शंकराचार्यों की सहमति बनती जा रही है।
    आयोजन के लिए सभी शंकराचार्यों को आमंत्रण भेजने की तैयारी भी बताई जा रही है।

    इतिहास में तीसरी बार होगा ऐसा दृश्य
    चारों शंकराचार्यों का एक मंच पर दिखना धार्मिक इतिहास में तीसरी बार होगा।
    पहली बार 1779 में श्रृंगेरी में पहला चतुष्पीठ सम्मेलन हुआ था।
    दूसरी बार 19 मई 2007 को बेंगलुरु में रामसेतु मुद्दे पर सम्मेलन में चारों शंकराचार्य एक साथ थे।
    इसके बाद जून 1993 में भी शृंगेरी में एक ऐतिहासिक बैठक हुई थी, जिसमें राष्ट्रीय अखंडता और शांति के लिए चारों शंकराचार्यों ने संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया था।

    अगर दिल्ली में 10 मार्च 2026 का यह आयोजन सफल होता है, तो इसे सनातन परंपरा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना जाएगा।

    क्या है आगे का परिदृश्य?
    हाल ही में महाकुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान शंकराचार्यों के एक साथ आने की चर्चा रही है, जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। गो रक्षा आंदोलन को लेकर पहले भी कई बड़े आंदोलन हुए हैं, और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी इस विषय पर कई बार खुलकर बोल चुके हैं।
    इसलिए दिल्ली में होने वाले संभावित आयोजन पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह न केवल धार्मिक एकता का संदेश देगा, बल्कि ज्योतिषपीठ विवाद में भी संतुलन और समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
  • सोशल मीडिया पर बॉक्स ऑफिस धमाल: राशिद खान ने कमेंट कर बढ़ाया Border-2 का क्रेज़, सितारों ने भी जताई प्रतिक्रिया

    सोशल मीडिया पर बॉक्स ऑफिस धमाल: राशिद खान ने कमेंट कर बढ़ाया Border-2 का क्रेज़, सितारों ने भी जताई प्रतिक्रिया

    नई दिल्ली। अफगानिस्तान के स्टार क्रिकेटर राशिद खान ने भी ‘बॉर्डर-2’ के सोशल मीडिया ट्रेंड में छलांग लगा दी है. इन दिनों लोग सोशल मीडिया पर इस तरह की रील बना रहे हैं कि अगर उनकी वीडियो (रील) पर अहान शेट्टी ने कमेंट किया तो वह बॉर्डर-2 फिल्म देखने थिएटर में जाएंगे. मजे की बात यह है कि लोगों की रील्स पर अहान शेट्टी जमकर कमेंट कर रहे हैं. बताते चलें कि फिल्म 23 जनवरी, शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

    अहान शेट्टी के अलावा उनके पिता सुनील शेट्टी का कमेंट भी लोगों की रील पर दिखाई दे रहा है. वहीं बात करें राशिद खान की, तो उनकी वीडियो पर अहान शेट्टी और सुनील शेट्टी ने तो कमेंट किया, लेकिन इसके अलावा उनकी रील पर एक और शख्स का कमेंट आया, जिसने सभी का ध्यान खींचा.

    बॉर्डर-2 जरूर देखने जाऊंगा
    गौर करने वाली बात यह है कि राशिद ने इस ट्रेंड को कुछ अलग अंदाज में फॉलो किया. जहां एक तरफ लोग अपनी वीडियो में लिख रहे हैं कि अगर अहान शेट्टी ने इस रील पर कमेंट किया तो वह फिल्म देखने जाएंगे, लेकिन राशिद ने पहले ही साफ कर दिया कि वह फिल्म देखने तो जरूर जाएंगे.

    वीडियो के कैप्शन में राशिद ने लिखा, “बॉर्डर-2 तो मैं जरूर देखने जाऊंगा. लेकिन देखते हैं कि क्या होता है अगर मैं यह पोस्ट करता हूं.” इसके साथ राशिद ने कैप्शन में सुनील शेट्टी, अहान शेट्टी, वरुण धवन और सनी देओल को टैग किया.
    वरुण धवन ने भी किया कमेंट
    वैसे इस ट्रेंड में ज्यादातर अहान शेट्टी ही लोगों की रील्स पर कमेंट कर रहे हैं. अहान के अलावा उनके पिता सुनील शेट्टी भी कमेंट के जरिए अपनी दस्तक दे रहे हैं. लेकिन, राशिद खान की वीडियो में वरुण धवन का भी कमेंट देखने को मिला. हालांकि सनी देओल का कमेंट अफगानी क्रिकेटर की वीडियो पर नहीं आया. राशिद ने सनी देओल को भी टैग किया था.

  • पुलिस अभिरक्षा से दो संदिग्ध फरार, थाने में मचा हड़कंप; मंदिर चोरी मामले में पूछताछ के लिए लाए गए थे

    पुलिस अभिरक्षा से दो संदिग्ध फरार, थाने में मचा हड़कंप; मंदिर चोरी मामले में पूछताछ के लिए लाए गए थे


    नई दिल्ली। देवास जिले के कांटाफोड़ थाना क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पुलिस अभिरक्षा में रखे गए दो संदिग्ध अचानक थाने से फरार हो गए। यह घटना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। फरार हुए दोनों संदिग्धों पर नगर के प्रसिद्ध गणेश मंदिर में कुछ माह पूर्व हुई चोरी सहित अन्य आपराधिक वारदातों में शामिल होने का संदेह है।

    जानकारी के अनुसार, पुलिस को हाल ही में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कुछ अहम सुराग हाथ लगे थे। इन्हीं फुटेज के आधार पर जानसूर निवासी दोनों संदिग्धों को पूछताछ के लिए कांटाफोड़ थाने लाया गया था। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान दोनों से मंदिर चोरी और अन्य मामलों को लेकर सवाल-जवाब किए जा रहे थे। इसी बीच दोनों संदिग्धों ने पानी पीने का बहाना बनाया और पुलिसकर्मियों की नजरों से ओझल होते हुए थाने से बाहर निकलकर फरार हो गए।घटना का पता चलते ही थाना परिसर में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिसकर्मियों ने आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की, लेकिन तब तक दोनों संदिग्ध काफी दूर निकल चुके थे। थाने से संदिग्धों के फरार होने की खबर फैलते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई और उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई।

    सूत्रों के मुताबिक, फरार संदिग्धों की तलाश के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है, ताकि फरार आरोपियों के भागने के रास्ते और दिशा का पता लगाया जा सके। हालांकि, खबर लिखे जाने तक दोनों संदिग्धों का कोई सुराग नहीं लग पाया है।इस पूरे मामले को लेकर पुलिस अधिकारी फिलहाल आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं। जब इस संबंध में कांटाफोड़ थाना प्रभारी सुरेखा निमोदा से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। वहीं, बागली एसडीओपी से जब फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें फिलहाल इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।

    थाने से दो संदिग्धों के फरार होने की घटना ने पुलिस की लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों पर सवालिया निशान लगा दिया है। आमजन के बीच भी इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि संदिग्ध पुलिस अभिरक्षा से ही फरार हो जाएं, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।फिलहाल पुलिस दोनों फरार संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और लापरवाही की भी जांच किए जाने की संभावना है। घटना ने एक बार फिर पुलिस की सतर्कता और थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

  • Weather Alert: दिल्ली-यूपी से राजस्थान तक बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी की चेतावनी, यात्रा में रखें सावधानी

    Weather Alert: दिल्ली-यूपी से राजस्थान तक बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी की चेतावनी, यात्रा में रखें सावधानी



    नई दिल्ली। देश के मौसम में बदलाव की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय होने के कारण 22 और 23 जनवरी 2026 को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है।

    उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी 23 जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश के संकेत हैं।

    इस दौरान तेज हवाओं, ओलावृष्टि और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी है।

    प्रमुख शहरों का हाल:
    दिल्ली: 23 जनवरी को बारिश, तेज हवाएं (30–40 किमी/घंटा), गरज-चमक की संभावना।
    लखनऊ: 23–24 जनवरी हल्की बारिश, बादलों की आवाजाही, बिजली चमक सकती है।
    जयपुर: 23 जनवरी को हल्की बारिश, मौसम ठंडा और बदला-बदला रहेगा।

    तापमान में उतार-चढ़ाव:
    26–28 जनवरी तक उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में 2–4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि, इसके बाद फिर गिरावट।
    मध्य भारत और गुजरात में अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान लगभग स्थिर, फिर थोड़ी बढ़ोतरी या गिरावट हो सकती है।
    महाराष्ट्र में रात का तापमान अगले दो दिनों में 2–4 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है।
    कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में देश के उत्तर-पश्चिम और मध्य हिस्सों में मौसम में उतार-चढ़ाव, बारिश और तेज हवाओं के साथ ठंड बनी रहेगी।

  • मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली।
    गुरुग्राम में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें एक महिला ने खुद को देश के प्रतिष्ठित मेदांता दी मेडिसिटी अस्पताल की डॉक्टर बताकर लोगों को किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का झांसा दिया। आरोपी महिला की पहचान प्रिया संतोष के रूप में हुई है जो सोशल मीडिया फर्जी वेबसाइटों और वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों से संपर्क कर रही थी। मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी की शिकायत पर सदर थाना पुलिस ने आरोपी महिला और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि आरोपी महिला ने अस्पताल के नाम और लोगो का अवैध इस्तेमाल कर एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। इस वेबसाइट पर दावा किया गया था कि मेदांता अस्पताल को किडनी की सख्त जरूरत है और जो व्यक्ति अपनी किडनी डोनेट करेगा उसे इसके बदले तीन करोड़ रुपये दिए जाएंगे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी खुद को मेदांता की डॉक्टर बताती थी और फर्जी स्टाफ आईडी भी दिखाती थी।पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए जरूरतमंद या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को टारगेट करता था। उन्हें बड़ी रकम का लालच देकर पहले रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे और फिर अलग-अलग बहानों से और रकम मांगी जाती थी। इस ठगी का पर्दाफाश तब हुआ जब एक महिला प्रतीक्षा पुजारी इस जाल में फंस गई।

    पीड़िता प्रतीक्षा पुजारी ने बताया कि प्रिया संतोष ने खुद को मेदांता की डॉक्टर बताकर उससे संपर्क किया और किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का वादा किया। शुरुआत में उससे पंजीकरण शुल्क के तौर पर आठ हजार रुपये लिए गए। इसके बाद ठगों ने उससे बीस हजार रुपये और जमा करने को कहा। जब महिला को संदेह हुआ तो उसने सीधे मेदांता अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया। यहीं से पूरा मामला उजागर हो गया।अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्पष्ट किया कि प्रिया संतोष नाम की कोई भी डॉक्टर मेदांता में कार्यरत नहीं है और न ही अस्पताल किसी प्रकार के किडनी डोनेशन के बदले पैसे देने जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी द्वारा दिखाई गई स्टाफ आईडी पूरी तरह फर्जी थी और वेबसाइट भी नकली थी।

    मेदांता अस्पताल की ओर से कहा गया है कि यह गिरोह न केवल आम लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है बल्कि अस्पताल की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और संदिग्ध कॉल वेबसाइट या मैसेज की तुरंत पुलिस को सूचना दें।फिलहाल गुरुग्राम पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी महिला व उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं।

  • इतने घंटे पहले ट्रेन के कंफर्म टिकट को रद्द कराने पर नहीं मिलेगा रिफंड… रेलवे ने बदला नियम

    इतने घंटे पहले ट्रेन के कंफर्म टिकट को रद्द कराने पर नहीं मिलेगा रिफंड… रेलवे ने बदला नियम


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने अपने नियमों में बड़े बदलाव (Big changes) किए हैं। इसके मुताबिक अब वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस (Vande Bharat Sleeper Express) और अमृत भारत (Amrit Bharat) 2 ट्रेनों के यात्री अगर निर्धारित प्रस्थान समय से आठ घंटे से पहले, अपने कंफर्म टिकट (Confirmed Ticket) रद्द करते हैं तो उन्हें एक भी पैसा वापस नहीं मिलेगा। रेल मंत्रालय द्वारा 16 जनवरी को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, इन ट्रेनों के टिकट रद्द करने का शुल्क किराये का 25 प्रतिशत होगा, बशर्ते कि ‘कंफर्म’ टिकट 72 घंटे से पहले रद्द किए जाएं।

    मंत्रालय ने रेल यात्री (टिकट रद्द करना और किराया वापसी) नियम, 2015 में संशोधन किया है और वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के साथ-साथ अमृत भारत 2 ट्रेनों के लिए सख्त नियमों को अधिसूचित किया है। अधिसूचना के अनुसार, ‘‘अगर ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से आठ घंटे से कम समय पहले टिकट रद्द किया जाता है, तो कोई रकम वापस नहीं दी जाएगी।’’ वहीं अन्य ट्रेनों के मामले में, अगर कंफर्म टिकट निर्धारित प्रस्थान समय से चार घंटे से कम समय पहले रद्द किए जाते हैं, तो रिफंड के पात्र नहीं होंगे।

    अधिसूचना के मुताबिक, ‘‘अगर ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 72 घंटे से पहले टिकट रद्द किया जाता है, तो रद्द करने का शुल्क किराए का 25 प्रतिशत होगा। वहीं अगर ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 72 घंटे से लेकर आठ घंटे पहले तक टिकट रद्द किया जाता है तो इसका शुल्क किराये का 50 प्रतिशत होगा।’’ अन्य ट्रेनों के लिए, अगर कंफर्म टिकट को निर्धारित प्रस्थान समय से 48 घंटे से 12 घंटे पहले रद्द किया जाता है तो किराये का 25 प्रतिशत नहीं लौटाया जाता है, जबकि ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 12 घंटे से 4 घंटे पहले टिकट रद्द किया जाता है तो 50 प्रतिशत शुल्क लागू होता है।

    संशोधित नियमों के बारे में बताते हुए रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह है कि टिकट कंफर्म होने के बाद, इसे रद्द करने का न्यूनतम शुल्क टिकट की कीमत का 25 प्रतिशत है और यह अवधि के आधार पर 100 प्रतिशत तक जा सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत 2 में, अन्य ट्रेनों के विपरीत, प्रत्येक यात्री को एक निश्चित बर्थ की गारंटी दी जाती है। अन्य ट्रेनों में, अगर छह सदस्यों के एक परिवार को केवल तीन निश्चित बर्थ (सीट) मिलती हैं, तो शेष तीन सदस्यों को प्रतीक्षा करनी पड़ती है और उन्हें अन्य परिवार के सदस्यों के साथ बर्थ साझा करनी पड़ती है। वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत 2 में, ऐसे परिवार को या तो छह निश्चित बर्थ मिलेंगी या एक भी नहीं।’’

    अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 2026 में शुरू होने वाली अमृत भारत ट्रेन का नाम अमृत भारत 2 रखा गया है और ये आरक्षण और रद्द करने के नियम उन पर भी लागू होंगे। इससे पहले रेलवे द्वारा 15 जनवरी 2025 को जारी एक परिपत्र में कहा गया था कि जनवरी 2026 या उसके बाद शुरू की जाने वाली अमृत भारत ट्रेन को अमृत भारत 2 के नाम से जाना जाएगा।

  • KCC: पैसे की कमी से खेती पर न लगे ब्रेक… बड़े काम की है मोदी सरकार की ये योजना

    KCC: पैसे की कमी से खेती पर न लगे ब्रेक… बड़े काम की है मोदी सरकार की ये योजना


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central government) की कई योजनाएं हैं जिसके तहत लोगों को क्रेडिट कार्ड (Credit Card) मुहैया कराया जाता है। ऐसी ही एक योजना किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) (केसीसी) है। इस योजना के तहत किसानों को अलग-अलग फसल के लिए बैंक की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है। सरकार का मकसद है कि पैसे की कमी की वजह से किसानों की खेती या अन्य गतिविधियों पर ब्रेक ना लगे।

    कब हुई थी शुरुआत
    वैसे तो इसकी शुरुआत साल 1998 में हुई थी लेकिन समय के साथ इसे मोडिफाई किया गया। साल 2019 में, केसीसी योजना को इससे जुड़ी गतिविधियों, जैसे पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की वर्किंग कैपिटल आवश्यकताओं को कवर करने के लिए विस्तारित किया गया था। आइए किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट समेत अन्य डिटेल से जान लेते हैं।


    कितनी है लिमिट

    लाभार्थी को संशोधित ब्याज सहायता योजना के अंतर्गत भारत सरकार बैंकों को 7% प्रति वर्ष की दर से 3 लाख रुपये तक के शार्ट टर्म वर्किंग कैपिटल लोन प्रोवाइड करने के लिए 1.5% की ब्याज सहायता प्रदान करती है। इसके अलावा, समय पर लोन चुकाने पर किसानों को 3% का त्वरित री-पेमेंट प्रोत्साहन भी दिया जाता है। इसलिए, किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर 4% है। केंद्रीय बजट 2025-26 में सरकार ने केसीसी के माध्यम से लिए गए लोन को संशोधित ब्याज छूट योजना (एमआईएसएस)के अंतर्गत लोन की सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। प्रोसेसिंग चार्ज की बात करें तो 3 लाख रुपये तक के लोन पर शून्य है।


    क्या-क्या दस्तावेज हैं जरूरी

    योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज आधार कार्ड अनिवार्य है। पहचान पत्र, पता प्रमाण, भूमि दस्तावेज, फोटो और बैंक खाता विवरण होना जरूरी है। एक स्व-घोषणा पत्र भी देना होगा कि अन्य बैंक से डिफॉल्ट नहीं है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया fasalrin.gov.in या jansamarth.in पर है। वहीं, ऑफलाइन अप्लाई करने के लिए बैंक ब्रांच जाना होगा।