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  • पानी में ज्यादा देर रहते ही क्यों सिकुड़ने लगती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का साइंस

    पानी में ज्यादा देर रहते ही क्यों सिकुड़ने लगती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का साइंस

    नई दिल्ली।  पानी में उंगलियों का सिकुड़ना स्किन नहीं, दिमाग का कमाल है. यह शरीर की एक स्मार्ट ट्रिक है, जो गीली चीजें पकड़ने में हमारी मदद करती है. आइए जान लेते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
    पानी में उंगलियां सिकुड़ना
    आपने भी गौर किया होगा कि नहाते समय या ज्यादा देर तक पानी में रहने के बाद अचानक आपकी उंगलियां सिकुड़ जाती हैं और उन पर झुर्रियां सी बन जाती हैं. पहली नजर में लगता है जैसे त्वचा ने पानी सोख लिया हो, लेकिन असली कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. यह बदलाव सिर्फ त्वचा का नहीं, बल्कि हमारे दिमाग और नसों का कमाल है. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे शरीर की एक स्मार्ट ट्रिक मानते हैं.

    पानी में जाते ही उंगलियां क्यों बदल जाती हैं?

    जब हम लंबे समय तक पानी में रहते हैं, तो हाथों और पैरों की उंगलियों की त्वचा धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है. आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि स्किन ने पानी सोख लिया है, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि इसका कारण पानी नहीं, बल्कि हमारा नर्वस सिस्टम है. यह पूरी प्रक्रिया दिमाग के कंट्रोल में होती है और इसे एक न्यूरोलॉजिकल रिएक्शन माना जाता है.

    दिमाग कैसे देता है सिकुड़ने का सिग्नल?

    जैसे ही उंगलियां पानी में ज्यादा देर तक रहती हैं, वहां मौजूद नसें एक्टिव हो जाती हैं. ये नसें दिमाग को संकेत भेजती हैं, जिसके बाद ब्लड वेसल्स यानी खून की नलिकाएं सिकुड़ने लगती हैं. जब उंगलियों में खून की मात्रा कम हो जाती है, तो ऊपर की त्वचा अंदर की ओर खिंच जाती है. इसी खिंचाव की वजह से स्किन पर झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं.

    क्या यह कोई बीमारी है?

    नहीं, बिल्कुल नहीं. पानी में उंगलियों का सिकुड़ना पूरी तरह से सामान्य प्रक्रिया है. बल्कि डॉक्टर इसे इस बात का संकेत मानते हैं कि आपकी नसें सही तरीके से काम कर रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों की नसों में गंभीर नुकसान होता है, उनकी उंगलियां पानी में भी नहीं सिकुड़तीं हैं. यानी यह झुर्रियां दिखना शरीर के हेल्दी होने का एक इशारा भी है.

    सिकुड़ने से हमें क्या फायदा मिलता है?

    यह बदलाव सिर्फ देखने के लिए नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक फायदा भी छिपा है. सिकुड़ी हुई उंगलियों से गीली चीजों को पकड़ना आसान हो जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि झुर्रियों की वजह से स्किन पर ग्रूव्स बन जाते हैं, जिससे पानी बाहर निकल जाता है और पकड़ मजबूत हो जाती है. ठीक वैसे ही जैसे गाड़ी के टायरों में बनी ग्रिप गीली सड़क पर मदद करती है.

    शरीर की स्मार्ट डिजाइन

    इंसान का शरीर हालात के हिसाब से खुद को ढालने में माहिर है. पानी में उंगलियों का सिकुड़ना उसी का एक उदाहरण है. यह प्रक्रिया अपने आप शुरू होती है और पानी से बाहर आते ही धीरे-धीरे खत्म भी हो जाती है. इसमें किसी तरह की दवा या इलाज की जरूरत नहीं होती.

    कब हो सकता है चिंता का विषय?

    अगर लंबे समय तक पानी में रहने के बाद भी उंगलियां बिल्कुल नहीं सिकुड़तीं, तो डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है. यह नसों से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है. हालांकि ज्यादातर मामलों में यह पूरी तरह नॉर्मल होता है और चिंता की कोई बात नहीं होती है.

  • BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: आडवाणी और जोशी पहली बार नहीं कर पाएंगे वोटिंग,,, जानें वजह?

    BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: आडवाणी और जोशी पहली बार नहीं कर पाएंगे वोटिंग,,, जानें वजह?


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party – BJP) के इतिहास में 20 जनवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। 45 साल के नितिन नवीन (Nitin Naveen) का पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) के रूप में निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। हालांकि, इस चुनाव में एक चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के संस्थापक सदस्य लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) और मुरली मनोहर जोशी (Murali Manohar Joshi) पहली बार मतदान नहीं कर पाएंगे।

    दिसंबर 2025 से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन अब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नवीन भाजपा के दिग्गज नेता दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। आरएसएस (RSS) की पृष्ठभूमि वाले नवीन को संगठन में गहरी पैठ और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में पार्टी की चुनावी जीत में बड़ी भूमिका के लिए जाना जाता है।

    19 जनवरी को उनका नामांकन होगा और 20 जनवरी को उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उनके नामांकन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे।


    आडवाणी और जोशी मतदाता सूची से बाहर क्यों?

    1980 में भाजपा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब इन दोनों दिग्गजों का नाम अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में नहीं है। इसके पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि तकनीकी कारण हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनाव पूरा होना अनिवार्य है। आडवाणी और जोशी फिलहाल दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में चुनाव अभी लंबित हैं। जब तक दिल्ली में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव नहीं हो जाते वहां से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चयन नहीं हो सकता। इसी कारण दोनों नेताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।

    आपको बता दें कि इससे पहले आडवाणी गुजरात (गांधीनगर) और जोशी उत्तर प्रदेश (कानपुर) से परिषद सदस्य हुआ करते थे। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद वे दिल्ली से सदस्य बने थे। भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 19 जनवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक नामांकन होगा। 19 जनवरी को ही शाम तक नामांकन पत्रों की जांच और वापसी का समय है। 20 जनवरी को यदि आवश्यक हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा निर्विरोध चुनाव की घोषणा।

    जेपी नड्डा का स्थान लेने वाले नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को तैयार करना और आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल आदि) में पार्टी के प्रदर्शन को सुधारना होगी। युवा नेतृत्व के माध्यम से भाजपा अब अपनी अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

  • अमेरिका सांसदों ने ट्रंप से किया आग्रह… बोले- भारत से टैरिफ कम करवाने के लिए करें बात

    अमेरिका सांसदों ने ट्रंप से किया आग्रह… बोले- भारत से टैरिफ कम करवाने के लिए करें बात


    नई दिल्ली।
    पूरी दुनिया के देश जहां ट्रंप (Trump) से टैरिफ (Tariffs) कम करने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के सांसद (American MP) अपने राष्ट्रपति से आग्रह करते नजर आ रहे हैं कि वह भारत से बात करके टैरिफ कम करवाने की कोशिश करें। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के दो सांसद स्टीव डेंस (मोंटाना) और क्रेविन क्रेमर (नॉर्थ डकोटा) ने पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह होने वाले समझौते में भारत को दलहन के ऊपर से टैरिफ कम करने का आग्रह करें।

    अमेरिकी राष्ट्रपति (American President Donald Trump) को लिखे अपने पत्र में सांसदों ने बताया कि उनके क्षेत्र मोंटाना और नॉर्थ डकोटा दलहन उत्पान में अग्रणी है। इन क्षेत्रों के दलहन उत्पादन का सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत ही है। दलहन के क्षेत्र में भारत की कुल खपत वैश्विक खपत की 27 फीसदी है। लगातार चलते टैरिफ वॉर के बीच सांसदों ने कहा कि भारत ने अमेरिका से आने वाली पीली मटर पर 30 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की है। यह नवंबर 2025 से प्रभावी हो गया है। ऐसे में भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

    सांसदों ने ट्रंप से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से बात करें और टैरिफ को कम करने के लिए मनाएं। अगर भारत ऐसा करने के लिए तैयार हो जाता है, तो इससे अमेरिकी निर्यातकों को फायदा होगा और एक हद तक भारत के उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा। आपको बता दें,अमेरिकी सांसदों द्वारा ट्रंप को लिखा गया यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लागू किया हुआ है। इस 50 फीसदी में से 25 फीसदी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए दंड के रूप में लगाया है।


    भारत ने अमेरिकी दलहनों पर क्यों लगाया 30 फीसदी टैरिफ?

    भारत सरकार के राजस्व विभाग ने पीली मटर के आयात के ऊपर 30 प्रतिशत शुल्क की घोषणा पिछली साल अक्तूबर में कर दी थी। विभाग की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि इस 30 फीसदी टैरिफ में से 10 प्रतिशत मानक दर और 20 फीसदी कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर के रूप में था। नवंबर से जारी हुआ यह आदेश मार्च 2026 तक जारी रहने वाला है। इस आदेश से पहले भारत में पीली मटर के आयात पर कोई शुल्क नहीं था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार की तरफ से उठाया गया यह कदम सस्ते आयात की वजह से घरेलू दालों की गिरती कीमत की वजह था।


    अमेरिकी सांसदों ने किया भारत के कदम का विरोध

    नॉर्थ डकोटा और मोंटाना के सांसदों ने भारत के इस कदम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत में पीली मटर के निर्यात को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए 2020 में प्रधानमंत्री मोदी को उन्होंने स्वयं यह पत्र दिया था। लेकिन इसका ज्यादा कोई फायदा नहीं हुआ। भारत ने फिर से वही कदम उठाया है।

  • एआर रहमान के ‘सांप्रदायिक’ बयान पर भड़की कंगना रनौत, कहा- आप नफरत में इतने अंधे हो चुके हो…

    एआर रहमान के ‘सांप्रदायिक’ बयान पर भड़की कंगना रनौत, कहा- आप नफरत में इतने अंधे हो चुके हो…


    नई दिल्ली। म्यूजिक कंपोजर और सिंगर एआर रहमान हाल ही में चर्चा में आए क्योंकि उन्होंने कहा कि उन्हें बॉलीवुड में पिछले 8 साल से काम नहीं मिल रहा। उन्होंने इसका कारण सांप्रदायिक एंगल और बदलते पावर डायनेमिक्स बताया। इस बयान के बाद अब बॉलीवुड की विवादित अभिनेत्री कंगना रनौत ने एआर रहमान पर तीखा हमला बोला है।

    कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एआर रहमान का वही वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बॉलीवुड में काम न मिलने की बात कर रहे हैं। इस क्लिप के साथ कंगना ने लिखा कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन फिर भी उन्होंने एआर रहमान से ज्यादा घृणास्पद और पूर्वाग्रही व्यक्ति नहीं देखा।

    कंगना ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ के लिए एआर रहमान को नरेशन के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और फिल्म को प्रोपगंडा बताया।

    कंगना ने आगे लिखा कि इमरजेंसी को आलोचकों ने मास्टरपीस बताया, विपक्षी नेताओं ने भी तारीफ की, लेकिन एआर रहमान अपनी नफरत में अंधे हो चुके हैं। कंगना ने कहा कि उन्हें एआर रहमान पर दुख होता है क्योंकि वे खुद को ‘नफरत के शिकार’ बताते हैं, लेकिन उनकी नफरत और पूर्वाग्रह किसी से कम नहीं।

    कंगना ने अपने पोस्ट में एक और बात भी लिखी कि कुछ बड़े डिजाइनर्स जिन्होंने पहले उनके साथ दोस्ती का दावा किया, बाद में उन्होंने कंगना से दूरी बना ली और कपड़े-आभूषण देने से मना कर दिया। कंगना ने बताया कि जब वे मसाबा गुप्ता की साड़ी पहनकर राम जन्मभूमि जा रही थीं, तब एक डिजाइनर ने उनकी स्टाइलिस्ट से कहा कि वह राम जन्मभूमि पर उस साड़ी के साथ नहीं जा सकतीं। कंगना ने कहा कि उस अपमान के बाद वे अपनी कार में बैठकर रोई थीं।कंगना ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा कि आज एआर रहमान मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं, लेकिन उनकी खुद की नफरत और पूर्वाग्रह का क्या?
  • CG: बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 4 नक्सलियों को किया ढेर, हथियार बरामद

    CG: बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 4 नक्सलियों को किया ढेर, हथियार बरामद


    बीजापुर।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बीजापुर जिले (Bijapur district) में सुरक्षाबलों ने शनिवार को हुई मुठभेड़ के बाद चार नक्सलियों (Four Naxalites) को मार गिराया। इनमें से एक की पहचान नेशनल पार्क एरिया कमेटी (National Park Area Committee) के डीवीसीएम दिलीप बेज्जा के रूप में हुई है, वहीं अन्य तीन नक्सलियों की पहचान की कोशिश की जा रही है। सुरक्षाबलों ने इस कार्रवाई को उस सूचना के बाद अंजाम दिया, जिसमें उसे इलाके में नक्सलियों के बड़े नेता पापाराव समेत अन्य चार माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद डीआरजी, कोबरा और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया और कई बार हुई मुठभेड़ के बाद चार नक्सलियों को मार गिराया।

    इस मुठभेड़ की जानकारी देते हुए बस्तर रेंज के आईजी पी.सुंदरराज ने बताया कि ‘बस्तर संभाग के अंतर्गत प्रतिबंधित एवं गैरकानूनी माओवादी संगठन के विरुद्ध प्रभावी रूप से लगातार कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में 17 जनवरी शनिवार को जिला बीजापुर के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में माओवादी संगठन के पापाराव, DVCM दिलीप बेज्जा एवं अन्य माओवादियों की उपस्थिति की सूचना के आधार पर डीआरजी, कोबरा और एसटीएफ की संयुक्त टीम अभियान के लिए रवाना हुई।’

    आगे उन्होंने कहा, ‘इसके बाद तलाशी के दौरान दिन में कई बार माओवादियों एवं सुरक्षाबलों के बीच में मुठभेड़ हुई। फायरिंग खत्म होने के बाद जब इलाके की सर्चिंग की गई तो मौके से चार माओवादियों की डेडबॉडी, दो एके-47 राइफल, एक 303 राइफल और अन्य हथियार सुरक्षाबलों ने बरामद किए।’

    पुलिस अधिकारी ने बताया कि ‘मारे गए माओवादियों में से एक की पहचान डीवीसीएम दिलीप बेज्जा के रूप में हुई है, जो कि नेशनल पार्क एरिया कमेटी का इंचार्ज था, वहीं मुठभेड़ में मारे गए तीन अन्य माओवादियों की शिनाख्त की कोशिश जारी है।’

  • इंडिगो पर बड़ा एक्शन… DGCA ने लगाया 22.2 करोड़ का जुर्माना, अब शेयरों पर निवेशकों की नजर

    इंडिगो पर बड़ा एक्शन… DGCA ने लगाया 22.2 करोड़ का जुर्माना, अब शेयरों पर निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली।
    बीते दिसंबर महीने में इंडिगो एयरलाइन (Indigo Airlines) की ओर से की गई मनमानी पर अब सरकार ने बड़ा एक्शन (Big Action) लिया है। दरअसल, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिसंबर में बड़े पैमाने पर हुई दिक्कतों के लिए इंडिगो एयरलाइन पर ₹22.2 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इस खबर के बाद अब सोमवार को इंडिगो के शेयर (Share) पर निवेशकों (Investors) की नजर रहेगी। बता दें कि डीजीसीए ने 68 दिनों के लिए हर दिन ₹3 लाख का जुर्माना और इसके अलावा ₹1.80 करोड़ का एक बार का सिस्टमैटिक पेनल्टी लगाया है। इस तरह, इंडिगो पर लगाया गया कुल जुर्माना ₹22.2 करोड़ हो गया है।


    परफॉर्मेंस

    इंडिगो के शेयर की बात करें तो बीएसई पर 4738.70 रुपये पर है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर में मामूली तेजी आई थी। अब सोमवार को शेयर का कैसा परफॉर्मेंस रहेगा, ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन सरकार की कार्रवाई से निवेशक सहमे हुए हैं। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 6,225.05 रुपये है। वहीं, शेयर के 52 हफ्ते का लो 3,946.40 रुपये है।


    इंडिगो पर सरकार की कार्रवाई

    दरअसल, डीजीसीए ने दिसंबर के पहले सप्ताह में इंडिगो संकट की उड़ानों में व्यवधान की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर उस पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही एक अधिकारी को कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया है। नियामक ने एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को भी इस मामले में आगाह किया है। बता दें कि 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द रही थीं और 1,852 उड़ानों में देरी हुई थी। इसके बाद भी कई दिन तक बड़े पैमाने पर व्यवधान था लेकिन डीजीसीए ने अपनी कार्रवाई के लिए सिर्फ इन्हीं तीन दिनों को आधार बनाया है। जांच समिति ने 26 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

    नियामक ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को आगाह करके छोड़ दिया है जबकि मुख्य परिचालन अधिकारी इसिडर पोरक्रस को विंटर शिड्यूल और फ्लाइट ड्यूटी से संबंधित नये नियमों के असर के आकलन में विफल रहने के लिए चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर) जैसन हर्टर को मौजूदा जिम्मेदारियों से मुक्त करने और कोई भी जिम्मेदारी का पद न देने का आदेश दिया गया है। इंडिगो से 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने के लिए भी कहा गया है। कंपनी जैसे-जैसे डीजीसीए के निर्देशों के अनुरूप लक्ष्यों को हासिल करती जाएगी, बैंक गारंटी की राशि उसे वापस मिलती जाएगी।

  • सोशल मीडिया की दोस्ती ने किया मानसिक बेहाल: बैतूल में हाईटेंशन टावर पर चढ़ा युवक, पुलिस ने बचाई जान

    सोशल मीडिया की दोस्ती ने किया मानसिक बेहाल: बैतूल में हाईटेंशन टावर पर चढ़ा युवक, पुलिस ने बचाई जान


    बैतूल मुलताई । सोशल मीडिया की आभासी दुनिया कभी-कभी हकीकत में जानलेवा साबित हो सकती है। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ ‘हेलो ऐप’ पर हुई एक दोस्ती एक युवक के लिए जी का जंजाल बन गई। इस दोस्ती से उपजे मानसिक तनाव के कारण युवक ने आत्महत्या की नीयत से एक हाईटेंशन विद्युत टावर पर चढ़कर पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और घंटों चली काउंसलिंग के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

    खुद कॉल कर दी टावर पर चढ़ने की सूचना घटना देर रात की है, जब ज्ञान मंदिर क्षेत्र के पास स्थित एक विशाल हाईटेंशन टावर पर युवक को चढ़ते देखा गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि युवक ने टावर पर चढ़ने के बाद खुद ही डायल 112 पर कॉल किया और पुलिस को बताया कि वह अपनी जीवनलीला समाप्त करने जा रहा है। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम और स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। अंधेरी रात होने के कारण युवक की सटीक लोकेशन ढूंढना मुश्किल था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी की मदद से युवक को काफी ऊंचाई पर चिन्हित किया।

    2 घंटे चला ‘हाई वोल्टेज’ ड्रामा टावर पर चढ़ा युवक बेहद भावुक और मानसिक रूप से परेशान था। पुलिस टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सीधे ऊपर चढ़ने के बजाय नीचे से ही युवक से फोन पर बातचीत जारी रखी। करीब दो घंटे तक पुलिसकर्मी उसे समझाते रहे और उसकी बातों को सुनकर उसे ढांढस बंधाया। इस मानसिक काउंसलिंग का सकारात्मक असर हुआ और युवक का इरादा बदल गया। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस की टीम उसे सुरक्षित नीचे उतारने में कामयाब रही।

    हेलो ऐप से शुरू हुई थी परेशानी पूछताछ में युवक की पहचान 27 वर्षीय अरविंद वाघने (पिता यशवंत), निवासी नागपुर के रूप में हुई है। अरविंद मुलताई के एक ढाबे पर अचारी रसोइया का काम करता है। उसने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले ‘हेलो ऐप’ के माध्यम से उसकी एक व्यक्ति से दोस्ती हुई थी। इस दोस्ती के बाद कुछ ऐसी परिस्थितियां बनीं कि वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगा। युवक का कहना था कि वह इस उलझन से इतना तंग आ चुका था कि उसे मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आ रही थी।
    पुलिस ने युवक को सुरक्षित बचाकर उसके परिजनों को सूचित कर दिया है और उसकी काउंसलिंग की जा रही है ताकि वह दोबारा ऐसा आत्मघाती कदम न उठाए। यह घटना सोशल मीडिया के बढ़ते खतरों और उनसे होने वाले मानसिक आघात की ओर एक गंभीर इशारा करती है।

  • सस्पेंस और डर का धमाका: 2026 में आने वाली हॉरर फिल्मों में अक्षय कुमार की धमाकेदार वापसी

    सस्पेंस और डर का धमाका: 2026 में आने वाली हॉरर फिल्मों में अक्षय कुमार की धमाकेदार वापसी

    नई दिल्ली। साल 2026 में बॉलीवुड(Bollywood) में सिर्फ एक्शन और ड्रामा(action and drama films) ही नहीं, बल्कि हॉरर फिल्मों(horror films)का भी जोरदार दौर देखने को मिलेगा। इस साल कई ऐसी हॉरर फिल्में रिलीज होने वाली हैं, जो दर्शकों का रोमांच और सस्पेंस का स्तर बढ़ा देंगी। आइए जानते हैं कौन-कौन सी फिल्में हैं जो इस साल पर्दे पर डर और थ्रिल लेकर आएंगी।
    1. द राजा साब

    साल की शुरुआत जनवरी 2026 में ही हुई ‘द राजा साब’ से। यह फिल्म हॉरर थ्रिलर है जिसमें प्रभास लीड रोल में हैं। फैंस इसे लेकर काफी उत्साहित हैं और फिल्म के सस्पेंस और ग्राफिक्स को लेकर पहले से ही चर्चा हो रही है।

    2. वीवन: फोर्स ऑफ द फोरेस्ट

    ‘वीवन’ एक हॉरर थ्रिलर फिल्म है, जिसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म को अरुनभ कुमार और दीपक कुमार डायरेक्ट कर रहे हैं और यह मई 2026 में रिलीज होने वाली है।

    3. शक्ति शालिनी

    मैडॉक फिल्म प्रोडक्शन की ‘शक्ति शालिनी’ भी इस साल हॉरर का तड़का लेकर आएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म में अनीत पड्डा लीड रोल में हैं और इसे लेकर फिल्म फैंस में पहले से ही उत्सुकता है।

    4. भेड़िया 2

    वरुण धवन की ‘भेड़िया’ का दूसरा पार्ट भी 2026 में रिलीज होने की उम्मीद है। हालांकि, अभी इसकी रिलीज डेट फाइनल नहीं हुई है। इस फिल्म में हॉरर और कॉमेडी का रोमांच दर्शकों को पसंद आने वाला है।

    5. तुम्बाड़ 2

    हॉरर मिस्ट्री ‘तुम्बाड़ 2’ को लेकर भी अटकलें हैं कि यह फिल्म इसी साल रिलीज होगी। पहले पार्ट की सफलता के बाद फैंस इसे लेकर काफी उत्साहित हैं।

    6. हॉन्टेड 3डी: घोस्ट ऑफ द पास्ट

    महेश भट्ट, विक्रम भट्ट और आनंद पंडित की ‘हॉन्टेड 3डी: घोस्ट ऑफ द पास्ट’ भी 2026 में हॉरर प्रेमियों के लिए खास है। यह फिल्म 3D एफ़ेक्ट्स और सस्पेंस के साथ डर का नया अनुभव देगी।

    2026 का साल हॉरर फिल्म फैंस के लिए बेहद रोमांचक होने वाला है। द राजा साब, वीवन, भेड़िया 2, तुम्बाड़ 2 और हॉन्टेड 3डी जैसी फिल्में स्क्रीन पर डर, रोमांच और थ्रिल का तड़का देंगी। इस साल हॉरर की दुनिया में अक्षय कुमार और प्रभास जैसी बड़ी हस्तियां वापसी कर दर्शकों का मनोरंजन और बढ़ाने वाली हैं।

  • भोपाल स्लॉटर हाउस विवाद: कांग्रेस का भाजपा पर तीखा प्रहार, पीसी शर्मा ने 'हिंदू हृदय सम्राटों' की चुप्पी पर उठाए सवाल

    भोपाल स्लॉटर हाउस विवाद: कांग्रेस का भाजपा पर तीखा प्रहार, पीसी शर्मा ने 'हिंदू हृदय सम्राटों' की चुप्पी पर उठाए सवाल


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नगर निगम स्लॉटर हाउस में कथित तौर पर गौमांस मिलने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो गया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने इस मामले में भाजपा के हिंदूवादी दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है।

    पीसी शर्मा ने मीडिया से चर्चा के दौरान तीखे लहजे में कहा कि जो भाजपा नेता खुद को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ कहलाना पसंद करते हैं, वे आज इस गंभीर मामले पर खामोश क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति दोहरे मापदंडों पर टिकी है। शर्मा ने कहा एक तरफ माइनॉरिटी और मुस्लिम समाज से हर छोटी बात पर नफरत जताई जाती है, लेकिन जब पैसे लेने की बात आती है, तो वहां कोई परहेज नहीं दिखता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसकी शह पर नगर निगम के स्लॉटर हाउस में इस तरह की गतिविधियां संचालित हो रही थीं?

    कांग्रेस नेता ने इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि भोपाल की महापौर, नगर निगम आयुक्त और एमआईसी मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों की भूमिका की बारीकी से जांच होनी चाहिए। शर्मा ने मांग उठाई कि इन सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। मध्यप्रदेश में ‘बुलडोजर न्याय’ का जिक्र करते हुए पूर्व मंत्री ने सरकार को उन्हीं के अंदाज में घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गायों की हत्या के मामले में भाजपा सरकार का एक्शन कहीं नजर नहीं आ रहा है। शर्मा ने मांग की कि जिन लोगों ने इस स्लॉटर हाउस की अनुमति दी है और जो इसके संचालन के लिए जिम्मेदार हैं, उनके घरों पर भी सरकार को बुलडोजर चलाना चाहिए। उन्होंने वर्तमान सांसद और पूर्व महापौर द्वारा उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए कहा कि जब भाजपा के अपने ही लोग सवाल उठा रहे हैं, तो मुख्यमंत्री को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    केवल भोपाल ही नहीं, पीसी शर्मा ने इंदौर में हुई हालिया हिंसक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चाहे भोपाल में गौ माता की हत्या का मामला हो या इंदौर में कानून-व्यवस्था की विफलता के कारण हो रही नागरिकों की हत्याएं, सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन बनी हुई है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा केवल चुनावी लाभ के लिए हिंदुत्व का कार्ड खेलती है, लेकिन जब वास्तविक रूप से आस्था और कानून के संरक्षण की बात आती है, तो वह पीछे हट जाती है। फिलहाल, राजधानी का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। कांग्रेस इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक ले जाने की तैयारी में है, वहीं भाजपा की ओर से इस पर रक्षात्मक रुख देखने को मिल रहा है। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस मामले में कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करती है या यह मुद्दा भी केवल सियासी बयानबाजी की भेंट चढ़ जाएगा।

  • 45–54 साल की उम्र का अर्निंग रिपोर्ट कार्ड: आप कितना कमा रहे हैं और कितना होना चाहिए? समझें पूरा A to Z हिसाब

    45–54 साल की उम्र का अर्निंग रिपोर्ट कार्ड: आप कितना कमा रहे हैं और कितना होना चाहिए? समझें पूरा A to Z हिसाब

    नई दिल्ली।  ज़िंदगी की ‘हाफ सेंचुरी’ यानी 45 से 54 साल का दौर बाहर से जितना स्थिर दिखता है, भीतर से उतना ही उथल-पुथल भरा होता है। करियर के इस फेज़ में अनुभव आपकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका होता है, लेकिन जिम्मेदारियों का पहाड़ भी लगातार दबाव बढ़ाता है-बच्चों की महंगी कॉलेज फीस, होम लोन की भारी EMI और सिर पर मंडराती रिटायरमेंट की चिंता। इस उम्र में स्ट्रेस सिर्फ बढ़ता नहीं, बल्कि एक नए स्तर पर पहुंच जाता है।

    1. आप ‘कमाई’ की रेस में कहां खड़े हैं?

    भारत में 45–54 साल की उम्र को आमतौर पर ‘पीक अर्निंग इयर्स’ कहा जाता है। इस उम्र तक करियर अपने सबसे मजबूत फेज़ में होता है और कमाई भी जीवन की सबसे ऊंची सीढ़ी पर पहुंचने की उम्मीद होती है।

    बड़ी प्राइवेट कंपनियों में सीनियर या लीडरशिप पोज़िशन वालों की मासिक कमाई ₹2 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती है।

    20–25 साल के अनुभव वाले मिड से सीनियर लेवल प्रोफेशनल्स ₹80,000 से ₹1.5 लाख प्रति माह कमाते हैं।

    सरकारी नौकरी में यह आंकड़ा ₹70,000 से ₹1.4 लाख तक होता है, जिसमें पेंशन भी शामिल होती है।

    स्थिर और जमे हुए बिज़नेस ओनर की मासिक कमाई ₹1.2 लाख से ऊपर मानी जाती है।

    2. कमाई का ग्राफ गिरना क्या है?

    अगर आपकी कमाई पिछले 2–3 साल से वहीं की वहीं अटकी हुई है, तो यह अलर्ट है। बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल खर्च हर साल 8–10% की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इस उम्र में इनकम ग्रोथ ठहरना आगे चलकर रिटायरमेंट को टेंशन-फ्री बनाना मुश्किल कर सकता है।

    3. ‘सैलरी’ के साथ ‘नेट वर्थ’ भी समझें

    सैलरी सिर्फ खातों में आने वाला नंबर है, असली आर्थिक तस्वीर नेट वर्थ से मापी जाती है। 45–50 साल की उम्र तक आपकी संपत्ति-घर, सोना, म्यूचुअल फंड, पीएफ और अन्य सेविंग्स-आपकी सालाना कमाई का कम से कम 10 गुना होनी चाहिए।

    उदाहरण: अगर आपकी सालाना आय ₹15 लाख है, तो नेट वर्थ लगभग ₹1.5 करोड़ होना चाहिए।

    4. क्या आप पीछे रह गए हैं?

    AI और नई स्किल्स सीखें: डिजिटल टूल्स, डेटा एनालिटिक्स और AI सीखकर प्रोफेशनल डिमांड बढ़ाएं।

    साइड हसल शुरू करें: रोज़ सिर्फ 2 घंटे देकर कंसल्टेंसी या फ्रीलांसिंग शुरू करें।

    पैसिव इनकम बनाएं: पैसिव निवेश से पैसे को आपके लिए काम करने दें।

    5. 45–54 की उम्र ‘रेस्ट’ की नहीं, एक्टिव होने की है

    यह उम्र करियर की बेस्ट इनिंग खेलने का समय है। अनुभव, नेटवर्क और समझ—तीनों आपके पक्ष में हैं। दूसरों की कमाई देखकर निराश होने के बजाय रणनीति बदलें और धीरे-धीरे अपना लेवल ऊपर ले जाएँ। सही निर्णय लेने से 60 के बाद की जिंदगी सिर्फ आरामदायक नहीं, बल्कि किंग-साइज़ बन सकती है।

    FAQs

    Q1. 45–54 साल को ‘पीक अर्निंग इयर्स’ क्यों कहा जाता है?
    क्योंकि इस उम्र में अनुभव, सीनियरिटी और नेटवर्क मजबूत हो जाते हैं और कमाई अपने शीर्ष पर होती है।

    Q2. इस उम्र में औसत मासिक कमाई कितनी है?
    ₹80,000 से ₹5 लाख तक, प्रोफाइल और सेक्टर के आधार पर।

    Q3. क्या केवल सैलरी देखकर खुद को जज करना सही है?
    नहीं। नेट वर्थ-संपत्ति और निवेश-अधिक महत्वपूर्ण होती है।

    Q4. 50 की उम्र तक नेट वर्थ कितनी होनी चाहिए?
    सालाना आय का कम से कम 10 गुना।

    Q5. अगर कमाई ग्रोथ नहीं है, तो क्या करें?
    नई स्किल्स सीखें, साइड हसल शुरू करें और पैसिव इनकम पर फोकस करें।