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  • सेब पर छिड़क लें बस एक चुटकी सेंधा नमक, स्वाद के साथ सेहत के फायदे हो जाएंगे दोगुने, जानिए दादी-नानी का आजमाया नुस्खा

    सेब पर छिड़क लें बस एक चुटकी सेंधा नमक, स्वाद के साथ सेहत के फायदे हो जाएंगे दोगुने, जानिए दादी-नानी का आजमाया नुस्खा


    नई दिल्ली । एक सेब रोज खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ यह कहावत लगभग हर किसी ने सुनी है। सेब को सेहत का खजाना माना जाता है, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर सेब को सही तरीके से खाया जाए, तो इसके फायदे और भी बढ़ सकते हैं। दादी-नानी के जमाने से चला आ रहा एक सरल घरेलू नुस्खा आज फिर चर्चा में है सेब के स्लाइस पर एक चुटकी सेंधा नमक छिड़क कर खाना। यह न केवल स्वाद को बढ़ाता है, बल्कि शरीर पर इसके पोषक तत्वों का असर भी दोगुना कर देता है। न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, सेब और सेंधा नमक का संयोजन शरीर के लिए पावरहाउस से कम नहीं है। सेब में मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है। जब इसे नमक के साथ खाया जाता है, तो शरीर इसे तेजी से अवशोषित करता है। यही वजह है कि यह नुस्खा दोपहर की थकान, कमजोरी या वर्कआउट से पहले इंस्टेंट एनर्जी देने में बेहद कारगर माना जाता है।

    सेंधा नमक या हिमालयन पिंक सॉल्ट में सोडियम के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य ट्रेस मिनरल्स भी होते हैं। ये तत्व शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में, अधिक पसीना आने या भारी शारीरिक मेहनत के दौरान यह मिश्रण मांसपेशियों में ऐंठन और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी यह नुस्खा बेहद लाभकारी है। सेब फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है। वहीं सेंधा नमक पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है। दोनों मिलकर पेट फूलने, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं और गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।

    एसिडिटी से परेशान लोगों के लिए भी सेब और सेंधा नमक का यह संयोजन फायदेमंद माना जाता है। सेंधा नमक की क्षारीय प्रकृति सेब के कुछ एसिडिक तत्वों को संतुलित कर देती है, जिससे पेट में जलन और खट्टी डकार जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। अक्सर लोगों को यह महसूस होता है कि नमक लगाने से सेब और भी मीठा लगने लगता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। नमक जीभ पर मौजूद कड़वाहट महसूस करने वाले रिसेप्टर्स को दबा देता है, जिससे सेब की प्राकृतिक मिठास और अधिक उभर कर सामने आती है।

    सेवन के सही तरीके की बात करें, तो हमेशा साधारण रिफाइंड नमक की जगह सेंधा नमक या गुलाबी नमक का ही उपयोग करें। नमक की मात्रा सिर्फ एक चुटकी तक सीमित रखें, क्योंकि अधिक नमक से ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सेब को अच्छी तरह धोकर ताजे स्लाइस में काटें और तुरंत सेवन करें। यह आसान घरेलू नुस्खा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है। खासतौर पर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों के लिए यह एक बेहतरीन प्री-वर्कआउट स्नैक साबित हो सकता है। हालांकि, किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में इसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

  • देश की जेन-जी को भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी

    देश की जेन-जी को भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी


    नई दिल्ली। मालदा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मालदा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस सपने को साकार करने में पूर्वी भारत की भूमिका सबसे अहम है और अब यह क्षेत्र तेजी से विकास की राजनीति को अपना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक पूर्वी भारत को नफरत भ्रम और तुष्टिकरण की राजनीति में उलझाकर रखा गया जिससे यहां विकास की रफ्तार धीमी रही। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और जनता विकास सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है। पीएम मोदी ने दावा किया कि देश की जेन-जी भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रही है क्योंकि युवा वर्ग को अवसर रोजगार और स्थायी भविष्य चाहिए।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार बनी है त्रिपुरा कई वर्षों से भाजपा पर भरोसा जता रहा है और असम में लगातार पार्टी को मजबूत जनसमर्थन मिल रहा है। हाल ही में बिहार में भी भाजपा-एनडीए की सरकार बनी है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में भी सुशासन की बारी है।

    पीएम मोदी ने दावा किया कि जहां-जहां वर्षों तक भाजपा को लेकर गलत जानकारी फैलाई गई वहां भी अब लोग सच्चाई समझ रहे हैं और पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार बंगाल की जनता भी भाजपा को विजयी बनाएगी।प्रधानमंत्री ने हालिया शहरी निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है। खासतौर पर मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगमबीएमसी में पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर कभी भाजपा की जीत को असंभव माना जाता था वहां भी अब अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भाजपा का मेयर बनना देश की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत है।

    विपक्ष पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के हर गरीब परिवार को पक्का घर मिले और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार केंद्र से भेजे गए गरीबों के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं होने दे रही है।आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल देश का एकमात्र राज्य है जहां यह योजना लागू नहीं की गई है। इससे गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है और इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।

    प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत देशभर में लाखों परिवारों ने अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल शून्य किया है और इसके लिए केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के लाखों परिवार भी इसका लाभ उठाएं लेकिन राज्य सरकार इस दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है।मालदा और पश्चिम बंगाल के विकास को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जाएंगे। उन्होंने मालदा की ‘मैंगो इकोनॉमी’ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा किया।

    जूट किसानों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले जूट का समर्थन मूल्य करीब 2400 रुपये था जो अब बढ़कर साढ़े 5500 रुपये से अधिक हो गया है। पहले दस वर्षों में जूट किसानों को केवल 400 करोड़ रुपये मिले थे जबकि पिछले 11 वर्षों में यह राशि बढ़कर 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। पीएम मोदी ने कहा कि यह बदलाव भाजपा की किसान-हितैषी नीतियों का प्रमाण है।

  • वास्तु टिप्स : घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये 4 प्रकार की मूर्तियां, वरना रुक सकती है तरक्की और बढ़ सकता है गृह-क्लेश

    वास्तु टिप्स : घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये 4 प्रकार की मूर्तियां, वरना रुक सकती है तरक्की और बढ़ सकता है गृह-क्लेश


    नई दिल्ली । घर के मंदिर के लिए वास्तु टिप्स । हिंदू धर्म में घर का मंदिर सबसे पवित्र, शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से पूरे घर में शुभ ऊर्जा का संचार होता है और परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि अनजाने में पूजा स्थल पर कुछ गलत प्रकार की मूर्तियां या तस्वीरें रख दी जाएं, तो यही मंदिर वास्तु दोष का कारण भी बन सकता है। ऐसे दोष न केवल आर्थिक परेशानियां बढ़ाते हैं, बल्कि पारिवारिक कलह, मानसिक तनाव और निर्णय क्षमता में कमी का कारण भी बन सकते हैं।

    ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, घर के मंदिर में कुछ विशेष प्रकार की मूर्तियां रखना अशुभ माना गया है। सबसे पहले बात करते हैं खंडित या टूटी हुई मूर्तियों की। यदि किसी मूर्ति का हाथ, पैर, मुख या अन्य कोई हिस्सा टूटा हुआ है, या उस पर से रंग उतर चुका है, तो ऐसी मूर्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि खंडित प्रतिमाओं से सकारात्मक फल नहीं मिलता, बल्कि घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। ऐसी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या पीपल के वृक्ष के नीचे रख देना उचित माना गया है। दूसरी महत्वपूर्ण बात भगवान के रौद्र या उग्र स्वरूप से जुड़ी है। घर के मंदिर में हमेशा देवी-देवताओं के शांत, सौम्य और आशीर्वाद देने वाले स्वरूप की ही मूर्तियां या तस्वीरें रखनी चाहिए। भगवान शिव का तांडव स्वरूप, कालभैरव या अत्यधिक क्रोधित मुद्रा वाली प्रतिमाएं घर में मानसिक अशांति, भय और तनाव का कारण बन सकती हैं। वास्तु के अनुसार, सौम्य स्वरूप की प्रतिमाएं घर में शांति, प्रेम और सामंजस्य बनाए रखती हैं।

    तीसरा वास्तु दोष तब उत्पन्न होता है जब एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां या तस्वीरें एक ही स्थान पर रख दी जाती हैं। वास्तु शास्त्र कहता है कि एक ही भगवान की दो या उससे अधिक प्रतिमाएं रखने से ऊर्जा का टकराव होता है। इसका प्रभाव घर के मुखिया और परिवार के सदस्यों की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है और अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है। चौथी महत्वपूर्ण गलती मूर्तियों को आमने-सामने रखना है। कई बार जगह की कमी या सजावट के कारण लोग देवी-देवताओं की मूर्तियों को एक-दूसरे के सामने रख देते हैं। वास्तु जानकारों के अनुसार, ऐसा करने से घर के सदस्यों के बीच मतभेद, विवाद और कलह की स्थिति बन सकती है। मूर्तियों की स्थापना इस प्रकार होनी चाहिए कि सभी एक ही दिशा में शांत भाव से विराजमान हों।

    इसके साथ ही मंदिर की नियमित साफ-सफाई और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। मूर्तियों पर धूल जमना, पुराने सूखे फूल, मुरझाई माला या जले हुए दीपक का अवशेष रखना वास्तु दोष को बढ़ाता है। यदि घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, तो उनकी नियमित सेवा, भोग और श्रृंगार करना विशेष रूप से आवश्यक माना गया है। कुल मिलाकर, घर का मंदिर केवल सजावट का स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा और ऊर्जा का केंद्र होता है। किसी भी शुभ तिथि या शनिवार के दिन अपने मंदिर का निरीक्षण कर वास्तु के अनुसार आवश्यक सुधार करें, ताकि आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता के मार्ग सदैव खुले रहें।

  • वडोदरा की चूक, अब नया मौका: कोहली के निशाने पर सहवाग और पोंटिंग का रिकॉर्ड

    वडोदरा की चूक, अब नया मौका: कोहली के निशाने पर सहवाग और पोंटिंग का रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों टीमें एक-एक मुकाबला जीतकर 1-1 की बराबरी पर हैं और रविवार को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में होने वाला तीसरा वनडे सीरीज का फैसला करेगा। इस अहम मुकाबले में भारतीय टीम के सीनियर बल्लेबाज विराट कोहली पर सभी की निगाहें टिकी होंगी, जिनसे एक बड़ी और यादगार पारी की उम्मीद की जा रही है।

    होल्कर स्टेडियम में विराट का साधारण रिकॉर्ड

    हालांकि इंदौर का यह मैदान विराट कोहली के लिए अब तक ज्यादा अनुकूल नहीं रहा है। कोहली ने होल्कर स्टेडियम में अब तक चार वनडे मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने महज 99 रन बनाए हैं। उनका औसत 33 का रहा है और इस मैदान पर उनका सर्वाधिक स्कोर सिर्फ 36 रन है। ऐसे में रविवार को विराट के पास इस रिकॉर्ड को बेहतर करने और आलोचकों को जवाब देने का सुनहरा मौका होगा। इंदौर के दर्शक भी चाहते हैं कि विराट इस मैदान पर एक ऐसी पारी खेलें, जिसे वे लंबे समय तक याद रख सकें, क्योंकि यह तय नहीं है कि भविष्य में वे यहां बतौर खिलाड़ी कब दोबारा खेलते नजर आएंगे।

    शानदार फॉर्म में हैं कोहली

    रिकॉर्ड भले ही इंदौर में विराट के पक्ष में न हों, लेकिन मौजूदा फॉर्म भारतीय टीम के लिए राहत की खबर है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में खेली गई वनडे सीरीज में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे विराट ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में भी 93 रन की शानदार पारी खेलकर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि दूसरे वनडे में वे सिर्फ 23 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन उनकी लय और आत्मविश्वास बरकरार है।

    सहवाग-पोंटिंग को पीछे छोड़ने का मौका

    तीसरे वनडे में विराट कोहली के पास एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम करने का अवसर होगा। विराट, वीरेंद्र सहवाग और रिकी पोंटिंग—तीनों ने ही न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट में 6-6 शतक लगाए हैं। अगर विराट रविवार को शतक लगाने में सफल रहते हैं, तो वे कीवी टीम के खिलाफ वनडे में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे। पहले वनडे में यह मौका उनसे चूक गया था, लेकिन निर्णायक मुकाबले में वे इसे भुनाना चाहेंगे।

    रोहित शर्मा से भी बड़ी पारी की उम्मीद

    विराट के साथ-साथ रोहित शर्मा पर भी सबकी नजरें होंगी। रोहित ने पिछले दोनों मैचों में अच्छी शुरुआत की, लेकिन उसे बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। निर्णायक मुकाबले में कप्तान से एक विस्फोटक और मैच जिताऊ पारी की उम्मीद की जा रही है, जिससे भारत सीरीज अपने नाम कर सके।

  • US टैरिफ से तमिलनाडु के उद्योग बेहाल: कोयंबटूर–तिरुपुर में रोजगार और निर्यात को बड़ा झटका

    US टैरिफ से तमिलनाडु के उद्योग बेहाल: कोयंबटूर–तिरुपुर में रोजगार और निर्यात को बड़ा झटका

    नई दिल्ली। कभी भारत के प्रमुख औद्योगिक और निर्यात केंद्रों में गिने जाने वाले तमिलनाडु के कोयंबटूर और तिरुपुर इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद यहां के कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं, काम के घंटे घटाए जा रहे हैं और लाखों कामगारों की रोजी-रोटी संकट में पड़ गई है।

    50% टैरिफ ने बदले हालात

    उद्योग जगत के अनुसार, अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद से ही कोयंबटूर और तिरुपुर के उद्योगों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। ये दोनों शहर मिलकर तमिलनाडु समेत कई राज्यों के लाखों लोगों को रोजगार देते थे, लेकिन अब हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

    दो से तीन लाख नौकरियां जा चुकीं

    उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक कपड़ा और इंजीनियरिंग सेक्टर में दो लाख से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं। यदि कास्टिंग, पंप, औद्योगिक वाल्व और अन्य सहायक उद्योगों को भी शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा तीन लाख से अधिक हो सकता है। कई छोटी और मझोली इकाइयां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जबकि कई फैक्ट्रियां सीमित क्षमता पर काम कर रही हैं।

    अमेरिका को निर्यात में भारी गिरावट

    एक निजी मिल में परिधान निर्यात और व्यापार विकास के उपाध्यक्ष धनबालन के अनुसार, पहले कोयंबटूर और तिरुपुर से अमेरिका को हर साल करीब 1.7 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात होता था। लेकिन अब यह आंकड़ा लगभग एक अरब डॉलर घट चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 50 प्रतिशत टैरिफ जारी रहा, तो अगले एक साल में अमेरिका को कपड़ा निर्यात लगभग पूरी तरह बंद हो सकता है।

    डीडीपी कीमत ने बढ़ाई मुश्किल

    उद्योग जगत का कहना है कि समस्या सिर्फ 50 प्रतिशत टैरिफ तक सीमित नहीं है। इसके साथ अन्य शुल्क भी जोड़े जाते हैं, जिससे डिलीवर ड्यूटी पेड (DDP) कीमत काफी बढ़ जाती है। नतीजतन, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद बेहद महंगे हो जाते हैं। वहीं चीन और बांग्लादेश जैसे देश करीब 30 प्रतिशत कम लागत में अपने उत्पाद बेच रहे हैं, जिससे भारतीय सामान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है।

    500% टैरिफ की आशंका से बढ़ी चिंता

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब खबरें सामने आईं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर विचार कर सकते हैं। इस पर धनबालन ने कहा कि जब 50 प्रतिशत टैरिफ ही उद्योगों को तोड़ रहा है, तो 500 प्रतिशत टैरिफ की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अगर ऐसा हुआ, तो निर्यात और रोजगार दोनों पर विनाशकारी असर पड़ेगा।

    नए बाजारों की तलाश की मांग

    अमेरिकी बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निर्यातक अब भारत सरकार और उद्योग संगठनों से नए बाजारों पर फोकस करने की मांग कर रहे हैं। उद्योग जगत का सुझाव है कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन को प्राथमिक बाजार बनाया जाए। उनका कहना है कि उद्योगों के अस्तित्व के लिए अब बाजारों में विविधता लाना बेहद जरूरी हो गया है।

    कामगारों का भविष्य अधर में

    वैश्विक व्यापार में बढ़ते तनाव और अमेरिकी टैरिफ नीति के चलते कोयंबटूर और तिरुपुर के लाखों कामगारों का भविष्य इस समय गंभीर संकट में नजर आ रहा है। अगर जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहराने की आशंका है।

  • मौनी अमावस्या 2026: 18 जनवरी को रवि मौनी अमावस्या, जानिए स्नान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    मौनी अमावस्या 2026: 18 जनवरी को रवि मौनी अमावस्या, जानिए स्नान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । मौनी अमावस्या 2026। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, लेकिन माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या को सभी अमावस्याओं में सर्वाधिक पुण्यदायी कहा गया है। इसे माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन स्नान, दान, पूजा, पितृ तर्पण और मौन व्रत करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म व्यक्ति के मन को शुद्ध करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं।

    इस वर्ष मौनी अमावस्या पर एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है। अमावस्या तिथि 18 जनवरी को मध्य रात्रि 12:03 बजे से प्रारंभ होकर 19 जनवरी को मध्य रात्रि 1:21 बजे तक रहेगी। चूंकि यह अमावस्या रविवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे “रवि मौनी अमावस्या” कहा जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रवि मौनी अमावस्या का संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    मौनी अमावस्या का विशेष संबंध पवित्र स्नान से है। माघ मास में गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, शिप्रा जैसी नदियों में स्नान का अत्यधिक महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान हजारों यज्ञों के बराबर फल देता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक सबसे उत्तम माना गया है। जो लोग किसी कारणवश नदी स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

    मौनी अमावस्या पितृ तर्पण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण दिन मानी जाती है। इस दिन पूर्वजों की शांति के लिए जल अर्पण, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया तर्पण पितृ दोष को शांत करता है और परिवार में सुख-शांति लाता है। स्नान और तर्पण के बाद सूर्य देव की पूजा का भी विशेष महत्व है। तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य को अर्घ्य देना, उसमें लाल फूल और अक्षत अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ होता है, आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु पूरे दिन मौन रखते हैं या बहुत कम बोलते हैं। मान्यता है कि मौन रहने से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। इस दिन जप, ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। कुल मिलाकर, मौनी अमावस्या 2026 न केवल स्नान और दान का पर्व है, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक जागरण का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

  • पीएम मोदी का बयान: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मां काली और मां कामाख्या की पावन भूमि को जोड़ रही है

    पीएम मोदी का बयान: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मां काली और मां कामाख्या की पावन भूमि को जोड़ रही है

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मालदा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को विकास की नई दिशा देने वाले कई अहम प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से बंगाल की प्रगति को और तेज करने का अभियान शुरू हो गया है, जिससे आम लोगों की जिंदगी आसान होगी और व्यापार-कारोबार को नई मजबूती मिलेगी।

    वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से बदलेगी लंबी दूरी की यात्रा

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज से भारत में स्लीपर वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत हो रही है, जो लंबी दूरी की यात्रा को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और यादगार बनाएंगी। यह ट्रेन ‘मां काली की धरती’ बंगाल को ‘मां कामाख्या की भूमि’ असम से जोड़ती है, जो सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में इस आधुनिक स्लीपर ट्रेन का विस्तार पूरे देश में किया जाएगा।

    चार अमृत भारत एक्सप्रेस से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आज बंगाल को चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी मिली हैं। इनमें न्यू जलपाईगुड़ी–नागरकोइल, न्यू जलपाईगुड़ी–तिरुचिरापल्ली, अलीपुरद्वार–बेंगलुरु और अलीपुरद्वार–मुंबई अमृत भारत एक्सप्रेस शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन ट्रेनों से खासतौर पर उत्तर बंगाल की दक्षिण और पश्चिम भारत से कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे यात्रियों को सुविधा और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

    रेलवे आधुनिकीकरण से बढ़े रोजगार के अवसर

    पीएम मोदी ने कहा कि रेल ट्रैक मेंटेनेंस से जुड़ी नई सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे युवाओं के लिए रोजगार और नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने इसे भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में ही रेल इंजन, डिब्बे और मेट्रो कोच तैयार हो रहे हैं, जो देश की तकनीकी क्षमता की पहचान बन चुके हैं।

    आत्मनिर्भर भारत की पहचान बनती भारतीय रेल

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज अमेरिका और यूरोप से भी ज्यादा लोकोमोटिव बना रहा है और कई देशों को पैसेंजर ट्रेन व मेट्रो कोच का निर्यात कर रहा है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय रेल का तेजी से विद्युतीकरण हो रहा है, स्टेशन आधुनिक बन रहे हैं और देशभर में 150 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है।

    विकास, रोजगार और भविष्य की मजबूत नींव

    प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि यह बदलाव सिर्फ ट्रेनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के विकास, रोजगार सृजन और बेहतर भविष्य की ओर एक मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक और हाई-स्पीड ट्रेनों का मजबूत नेटवर्क बंगाल के लोगों को सीधा लाभ पहुंचा रहा है।

  • खेल क्षेत्र में मौका: साई ने 26 खेलों के लिए 323 सहायक कोच पदों पर मांगे आवेदन

    खेल क्षेत्र में मौका: साई ने 26 खेलों के लिए 323 सहायक कोच पदों पर मांगे आवेदन

    नई दिल्ली। भारत में खेलों के बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन को और सशक्त बनाने की दिशा में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। साई ने देशभर में कोचिंग और एथलीट सपोर्ट को मजबूती देने के लिए 26 खेलों में 323 सहायक कोचों की सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए योग्य भारतीय नागरिकों से आवेदन मांगे गए हैं। यह भर्ती न केवल युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का अवसर है, बल्कि भारतीय खेलों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।

    रक्षा खडसे ने बताया साई को बेस्ट कोचिंग प्लेटफॉर्म

    युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि जो कोच सबसे ऊंचे स्तर पर आगे बढ़ना, योगदान देना और उत्कृष्ट प्रदर्शन करना चाहते हैं, उनके लिए साई से बेहतर कोई संस्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि साई एक ऐसा इकोसिस्टम उपलब्ध कराता है, जहां कोचिंग को स्पोर्ट्स साइंस, हाई-परफॉर्मेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, लगातार क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष एथलीटों के साथ काम करने का मौका मिलता है।

    एंट्री लेवल से हाई-परफॉर्मेंस कोच तक का सफर

    सहायक कोच का पद कोच कैडर के ग्रुप ‘बी’ में एंट्री लेवल पोस्ट है। चयनित उम्मीदवारों को साई के विभिन्न रीजनल सेंटर्स, नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) और देशभर के प्रशिक्षण केंद्रों में नियुक्त किया जाएगा। इन्हें लेवल-6 के अनुसार वेतन और भत्ते मिलेंगे। साई के भर्ती नियमों के अनुसार, सहायक कोच आगे चलकर कोच, सीनियर कोच, मुख्य कोच और अंततः हाई-परफॉर्मेंस कोच के पद तक प्रमोशन के लिए योग्य होंगे।

    किन खेलों में कितनी भर्तियां

    साई ने जिन 26 खेलों में सहायक कोच पदों के लिए आवेदन मांगे हैं, उनमें एथलेटिक्स (28), आर्चरी (12), बैडमिंटन (16), बास्केटबॉल (12), मुक्केबाजी (19), कैनोइंग (7), साइकिलिंग (12), फेंसिंग (11), फील्ड हॉकी (13), फुटबॉल (12), जिम्नास्टिक (12), हैंडबॉल (6), जूडो (6), कबड्डी (6), खो-खो (2), रोइंग (11), सेपक टकराव (3), निशानेबाजी (28), तैराकी (26), टेबल टेनिस (14), ताइक्वांडो (11), टेनिस (8), वॉलीबॉल (10), वेटलिफ्टिंग (10), रेसलिंग (22) और वुशु (6) शामिल हैं। यह वितरण दर्शाता है कि साई ओलंपिक और पारंपरिक भारतीय खेलों—दोनों को समान रूप से बढ़ावा देना चाहता है।

    योग्यता और आरक्षण व्यवस्था

    इन पदों पर भर्ती में भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। हर कैटेगरी में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जिससे महिला कोचों की भागीदारी बढ़ेगी। योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास साई एनएसएनआईएस, पटियाला, या किसी मान्यता प्राप्त भारतीय या विदेशी विश्वविद्यालय से डिप्लोमा या समकक्ष कोचिंग सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। इसके अलावा, जिन खिलाड़ियों ने ओलंपिक, पैरालिंपिक, एशियन गेम्स या वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लिया है और उनके पास संबंधित कोचिंग प्रमाणपत्र है, वे भी आवेदन के लिए पात्र हैं।

    चयन प्रक्रिया और नियुक्ति

    सहायक कोचों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा होगी, जबकि दूसरे चरण में कोचिंग दक्षता परीक्षण लिया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति पूरे भारत में कहीं भी की जा सकती है और उनका अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर मान्य होगा। यह भर्ती युवाओं को एक स्थायी और सम्मानजनक करियर देने के साथ-साथ भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद करेगी।

  • 17 जनवरी 2026 का पंचांग: माघ कृष्ण चतुर्दशी आज, शनिवार को शनि देव की पूजा का विशेष महत्व

    17 जनवरी 2026 का पंचांग: माघ कृष्ण चतुर्दशी आज, शनिवार को शनि देव की पूजा का विशेष महत्व


    नई दिल्ली । 17 January 2026 Panchang। आज 17 जनवरी 2026, शनिवार का दिन है और माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शनि देव की पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आती है तथा जीवन में स्थिरता और शांति का वास होता है। आज के दिन पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि पर मूल नक्षत्र और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में यह संयोग विशेष माना जाता है।
    मूल नक्षत्र को जहां एक ओर उग्र और तीव्र स्वभाव का माना जाता है, वहीं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र विजय और सफलता का प्रतीक है। ऐसे में आज का दिन कुछ कार्यों के लिए अनुकूल तो कुछ के लिए सावधानी बरतने वाला माना गया है। धार्मिक दृष्टि से माघ माह को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस महीने में स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व होता है। चतुर्दशी तिथि पर शिव आराधना का भी विशेष फल प्राप्त होता है। आज शनिवार होने के कारण शिव और शनि दोनों की पूजा करने से विशेष लाभ मिल सकता है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काले तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र और उड़द दाल का दान करना शुभ माना जाता है।

    आज के शुभ मुहूर्त

    आज के दिन कुछ विशेष समय ऐसे हैं, जिन्हें शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:15 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा। यह समय लगभग सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं अमृत काल सुबह 5:05 बजे से 6:49 बजे तक रहेगा, जो पूजा-पाठ और ध्यान के लिए श्रेष्ठ है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:37 बजे से 6:25 बजे तक रहेगा, इस समय साधना और आत्मिक चिंतन से विशेष फल प्राप्त होता है।

    आज के अशुभ काल
    आज के दिन कुछ समय ऐसे भी हैं, जिनमें शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। राहु काल सुबह 9:55 बजे से 11:16 बजे तक रहेगा। यम गण्ड दोपहर 1:57 बजे से 3:18 बजे तक रहेगा, जबकि कुलिक काल सुबह 7:14 बजे से 8:35 बजे तक माना जाएगा। इसके अलावा दुर्मुहूर्त सुबह 8:40 बजे से 9:23 बजे तक रहेगा। वर्ज्यम काल दो समय में रहेगा—सुबह 6:25 बजे से 8:11 बजे तक और शाम 6:36 बजे से 8:20 बजे तक।

    सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
    आज सूर्य का उदय सुबह 7:14 बजे और सूर्यास्त शाम 5:59 बजे होगा। चंद्रमा का उदय सुबह 6:02 बजे और चंद्रास्त शाम 4:41 बजे होगा। कुल मिलाकर 17 जनवरी 2026 का दिन धार्मिक कार्यों, शनि पूजा, दान-पुण्य और आत्मिक साधना के लिए उपयुक्त है। शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए कार्य करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

  • मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

    मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब


    नई दिल्ली/ प्रयागराज। माघ मेले का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण शाही स्नान मौनी अमावस्या के अवसर पर 18 जनवरी को संगम तट पर संपन्न होगा। इस पावन अवसर पर देशभर से लाखों श्रद्धालुओं साधु-संतों और कल्पवासियों के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी कारण इस स्नान पर्व को माघ मेले का सबसे पवित्र और प्रभावशाली स्नान माना जाता है।

    मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
    हिंदू पंचांग के अनुसार मौनी अमावस्या माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। हालांकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार पर्व 18 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन मौन व्रत रखने गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने तथा दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है।

    शुभ मुहूर्त और विशेष योग
    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक संगम स्नान को अमृत स्नान माना गया है। इस दिन पंचग्रही योग पूरे समय प्रभावी रहेगा जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:14 बजे से अगले दिन तक रहेगा। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार इन शुभ योगों में किया गया स्नान जप और दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

    अखाड़ों का शाही स्नान
    परंपरा के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन सबसे पहले अखाड़ों के साधु-संत नागा साधु और ऋषि-मुनि गाजे-बाजे और शाही ठाठ-बाट के साथ संगम में डुबकी लगाएंगे। इसके बाद कल्पवासी और आम श्रद्धालु संगम स्नान करेंगे। मान्यता है कि अखाड़ों के स्नान के बाद संगम जल में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

    प्रशासन की कड़ी तैयारियां
    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल ड्रोन निगरानी मेडिकल कैंप अस्थायी पुल स्वच्छता कर्मी और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें भीड़ प्रबंधन के नियमों का पालन करें और अफवाहों से बचें।

    महाशिवरात्रि तक चलेगा माघ मेला
    माघ मेला महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा। धार्मिक मान्यता है कि माघ माह में सभी देवी-देवता संगम तट पर वास करते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या का शाही स्नान पूरे माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी स्नान पर्व माना जाता है। आस्था श्रद्धा और अध्यात्म का यह महासंगम एक बार फिर संगम नगरी को दिव्य स्वरूप प्रदान करेगा।