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  • कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश

    कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश


    नई दिल्ली: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का निर्देश मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह वही दफ्तर है जो लगभग 48 वर्षों तक कांग्रेस की पहचान बना रहा और पार्टी के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का गवाह रहा। सरकार की ओर से कांग्रेस को शनिवार तक इस भवन को खाली करने के लिए कहा गया है, जिससे यह मामला अब सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को केवल 24 अकबर रोड ही नहीं बल्कि 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस के दफ्तर को भी खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि कांग्रेस ने पिछले वर्ष कोटला मार्ग पर अपने नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ का उद्घाटन कर दिया था, लेकिन अब तक वह पूरी तरह से पुराने दफ्तर से शिफ्ट नहीं हो पाई है। पार्टी की गतिविधियां अभी भी अकबर रोड स्थित भवन में जारी हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

    कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे को लेकर मंथन चल रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि 24 अकबर रोड से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है, क्योंकि यह दफ्तर केवल एक कार्यालय नहीं बल्कि पार्टी के इतिहास और संघर्ष का प्रतीक रहा है।

    इस दफ्तर का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। ब्रिटिश शासन के समय यह भवन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास स्थान था। बाद में यह म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ खिन क्यी का निवास भी रहा, जिनकी बेटी आंग सान सू की ने आगे चलकर नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया। इस तरह यह भवन अंतरराष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

    कांग्रेस के लिए यह दफ्तर 1970 के दशक के अंत से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया। 1977 के चुनाव में हार के बाद जब पार्टी में विभाजन हुआ और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट को एक नए केंद्र की जरूरत थी, तब जी वेंकटस्वामी ने अपना बंगला पार्टी को उपलब्ध कराया। यहीं से कांग्रेस की राजनीतिक वापसी की कहानी शुरू हुई। इसके बाद यह दफ्तर इंदिरा गांधी के नेतृत्व से लेकर राजीव गांधी, पी वी नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक पार्टी का प्रमुख केंद्र बना रहा।

    समय के साथ इस भवन को पार्टी ने अपनी जरूरतों के अनुसार विस्तार भी दिया, लेकिन हाल के वर्षों में संगठन के पुनर्गठन के चलते पार्टी ने नया मुख्यालय बनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में कोटला मार्ग स्थित इंदिरा भवन’ का उद्घाटन किया गया, जो अब कांग्रेस का नया ठिकाना बन चुका है।

    अब जब सरकार ने पुराने दफ्तर को खाली करने का आदेश दिया है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक बदलाव भी माना जा रहा है। कांग्रेस इस आदेश को लेकर अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करने पर विचार कर रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस आदेश पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह अपने ऐतिहासिक दफ्तर को लेकर कोई कानूनी लड़ाई लड़ती है या फिर पूरी तरह से नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ से अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है।

  • 5वीं और 8वीं का वार्षिक रिजल्ट घोषित, पास प्रतिशत में दिखा शानदार प्रदर्शन

    5वीं और 8वीं का वार्षिक रिजल्ट घोषित, पास प्रतिशत में दिखा शानदार प्रदर्शन


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र ने इस साल कक्षा 5वीं और 8वीं का वार्षिक परीक्षा परिणाम जारी कर दिया है। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह वल्लभ भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बटन दबाकर परिणाम घोषित किए। इस साल कक्षा 5वीं का कुल पास प्रतिशत 95.14 प्रतिशत रहा जबकि कक्षा 8वीं में 93.83 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए। आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों ही कक्षाओं में छात्राओं का प्रदर्शन छात्राओं के मुकाबले बेहतर रहा है। कक्षा 5वीं में छात्राओं का पास प्रतिशत 96.19 प्रतिशत जबकि छात्रों का 94.15 प्रतिशत रहा। वहीं कक्षा 8वीं में छात्राओं ने 94.98 प्रतिशत सफलता दर के साथ बाजी मारी जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 92.74 प्रतिशत ही रहा।

    इस बार रिजल्ट देखने की प्रक्रिया को बेहद आसान और आधुनिक बनाया गया है। छात्र और उनके अभिभावक सीधे राज्य शिक्षा केंद्र के पोर्टल पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं। इसके अलावा, विभाग द्वारा जारी किए गए QR कोड को स्कैन करके भी विद्यार्थी अपना रिजल्ट तत्काल देख सकते हैं। स्कूल के प्राचार्य भी पोर्टल के माध्यम से अपने पूरे स्कूल के विद्यार्थीवार प्रदर्शन की जानकारी ले सकते हैं। इस आधुनिक प्रणाली ने न केवल परिणाम देखने में सुविधा बढ़ाई है बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित की है।

    इस साल की परीक्षा बोर्ड पैटर्न के तहत आयोजित की गई थी। प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों के साथ ही मदरसों के लगभग 23.68 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। फरवरी में आयोजित इन परीक्षाओं का मूल्यांकन व्यापक स्तर पर किया गया। कुल 322 मूल्यांकन केंद्रों पर 1.10 लाख से अधिक शिक्षकों ने कॉपियों की जांच की और अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित की। इस बड़े पैमाने पर मूल्यांकन ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक छात्र का परिणाम समय पर और सही तरीके से घोषित हो।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल का पेपर पिछले वर्षों की तुलना में कठिन था। बावजूद इसके छात्रों ने सराहनीय प्रदर्शन किया। कक्षा 5वीं और 8वीं के रिजल्ट में दिखा यह उत्कृष्ट परिणाम न केवल विद्यार्थियों की मेहनत का प्रमाण है बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों की सहभागिता और तैयारी की भी सफलता को दर्शाता है। बोर्ड पैटर्न के कारण अभिभावकों और शिक्षकों में रिजल्ट को लेकर सुबह से ही उत्सुकता देखी गई।

    इस वर्ष छात्राओं का प्रदर्शन विशेष रूप से ध्यान खींचने वाला रहा। कई जिलों में छात्राओं ने छात्रों के मुकाबले बेहतर अंक प्राप्त किए और उच्च सफलता दर दर्ज की। यह संकेत है कि मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में लिंग अंतर को कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

    इस प्रकार, मध्यप्रदेश के वार्षिक परीक्षा परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कठिन परीक्षा और उच्च संख्या में प्रतिभागियों के बावजूद छात्र और छात्राएं शानदार प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। राज्य शिक्षा केंद्र की आधुनिक प्रणाली, शिक्षकों की मेहनत और विद्यार्थियों की लगन ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है।

  • TV मार्केट में नया ट्रेंड-कम ग्रोथ के बावजूद QLED और बिग स्क्रीन का जलवा

    TV मार्केट में नया ट्रेंड-कम ग्रोथ के बावजूद QLED और बिग स्क्रीन का जलवा

    नई दिल्ली। भारत का स्मार्ट टीवी बाजार साल 2025 में कुल मिलाकर स्थिर बना रहा, हालांकि साल के दौरान उपभोक्ताओं की पसंद और तकनीकी ट्रेंड में बड़ा बदलाव देखने को मिला। काउंटरपॉइंट रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पूरे साल शिपमेंट में कोई खास वृद्धि नहीं हुई, लेकिन चौथी तिमाही में बाजार ने जोरदार वापसी की और सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। साल की पहली छमाही में कमजोर मांग और उपभोक्ताओं की सतर्कता के कारण बाजार दबाव में रहा, लेकिन जैसे-जैसे त्योहारी सीजन और ऑफर्स बढ़े, बाजार में रफ्तार लौटती दिखी।

    मिड-रेंज टीवी की बढ़ी मांग, बड़े स्क्रीन बने पहली पसंद

    रिपोर्ट के मुताबिक, 40 हजार से 50 हजार रुपये की कीमत वाले स्मार्ट टीवी सेगमेंट ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। उपभोक्ता अब बेहतर फीचर्स और अनुभव के लिए थोड़ा ज्यादा खर्च करने को तैयार दिखे। खास तौर पर बड़े स्क्रीन साइज वाले टीवी की मांग तेजी से बढ़ी है। 43 इंच के टीवी सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडल रहे, जबकि 55 इंच और उससे बड़े स्क्रीन साइज वाले टीवी की बिक्री में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह ट्रेंड बताता है कि भारतीय उपभोक्ता अब घर पर बेहतर सिनेमाई अनुभव चाहते हैं।

    क्यूएलईडी और मिनीएलईडी टेक्नोलॉजी की जबरदस्त ग्रोथ

    तकनीक के स्तर पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। क्वांटम डॉट एलईडी यानी क्यूएलईडी टीवी की शिपमेंट 2025 में लगभग दोगुनी हो गई, जो इस सेगमेंट की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है। वहीं मिनीएलईडी तकनीक ने कम आधार से सबसे तेज वृद्धि दर्ज की। कंपनियां इसे ओएलईडी के किफायती विकल्प के रूप में पेश कर रही हैं, जिससे इसकी मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। 43 और 55 इंच जैसे लोकप्रिय साइज में क्यूएलईडी की उपलब्धता और मिड-रेंज सेगमेंट में इसकी मजबूत पकड़ ने इसे हर कीमत वर्ग में लोकप्रिय बना दिया है।

    जीएसटी कटौती और फेस्टिव ऑफर्स से बाजार को मिला सहारा

    रिपोर्ट में बताया गया कि साल की पहली छमाही में उपभोक्ताओं की कमजोर भावना और प्रमोशनल गतिविधियों की कमी के कारण मांग प्रभावित रही। लोग अपने खर्च को लेकर सतर्क थे और टीवी अपग्रेड करने का फैसला टाल रहे थे। हालांकि दूसरी छमाही में त्योहारी ऑफर्स, आसान फाइनेंसिंग विकल्प और बड़े स्क्रीन टीवी की बढ़ती किफायत ने बाजार को नई गति दी। इसके साथ ही 32 इंच और उससे बड़े टीवी पर जीएसटी दर में कटौती ने भी बिक्री को बढ़ावा दिया।

    2026 में बेहतर ग्रोथ की उम्मीद, लेकिन लागत बढ़ने की चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में स्मार्ट टीवी बाजार में स्थिर वृद्धि देखने को मिल सकती है। महामारी के दौरान खरीदे गए टीवी के लिए रिप्लेसमेंट साइकिल शुरू होने की संभावना है, जिससे नई मांग पैदा होगी। हालांकि, डीआरएएम और नैंड जैसे कंपोनेंट्स की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिससे मार्जिन पर दबाव आएगा और कीमतों में आक्रामक कटौती करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कंपनियों को संतुलित रणनीति अपनानी होगी।

  • लोकसभा में किसानों की आय पर बड़ा खुलासा सरकार ने बताए आंकड़े और योजनाओं से बदली तस्वीर

    लोकसभा में किसानों की आय पर बड़ा खुलासा सरकार ने बताए आंकड़े और योजनाओं से बदली तस्वीर


    नई दिल्ली :भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा में किसानों की आय को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया जिसमें यह पूछा गया कि क्या सरकार अपने उस लक्ष्य में सफल रही है जिसमें किसानों की आय को दोगुना करने की बात कही गई थी इस पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विस्तार से जवाब दिया और सरकार की नीतियों और योजनाओं के प्रभाव को सामने रखा

    सरकार की ओर से बताया गया कि कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना लागत कम करना और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है सरकार ने यह भी बताया कि कृषि बजट में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है वर्ष 2013 14 में यह बजट 21 हजार करोड़ रुपये के आसपास था जो अब बढ़कर वर्ष 2025 26 में एक लाख 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है

    सरकार ने यह भी दावा किया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने हजारों किसानों की सफल कहानियों का संकलन तैयार किया है जिसमें लगभग 75 हजार किसानों की आय विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दोगुनी या उससे अधिक होने का उल्लेख किया गया है ये कहानियां कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती हैं

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सर्वेक्षण के अनुसार किसान परिवारों की औसत मासिक आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है वर्ष 2012 13 में यह आय लगभग 6426 रुपये थी जो वर्ष 2018 19 में बढ़कर 10218 रुपये हो गई इस आंकड़े से यह संकेत मिलता है कि किसानों की आय में लगातार सुधार हुआ है हालांकि यह वृद्धि सभी किसानों के लिए समान नहीं है

    इसके अलावा उपभोग व्यय के आंकड़े भी इस बात को दर्शाते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक उपभोग व्यय 1430 रुपये से बढ़कर 4122 रुपये हो गया है जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2630 रुपये से बढ़कर 6996 रुपये तक पहुंच गया है यह वृद्धि आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार को दर्शाती है

    सरकार ने किसानों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं भी लागू की हैं जिनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता बीमा सुरक्षा और पेंशन सुविधा दी जा रही है

    कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार किसानों की आत्महत्या से संबंधित आंकड़ों को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के माध्यम से संकलित करती है और इन आंकड़ों को नियमित रूप से प्रकाशित किया जाता है राज्यों द्वारा प्रभावित परिवारों को राहत राशि भी प्रदान की जाती है

    सरकार का कहना है कि फसल विविधीकरण ड्रोन तकनीक प्राकृतिक खेती और कृषि स्टार्टअप जैसे कार्यक्रमों से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं बन रही हैं और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल रही है

     सरकार का दावा है कि विभिन्न योजनाओं बजट वृद्धि और तकनीकी सुधार के माध्यम से किसानों की आय में सुधार हुआ है हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी भी इस दिशा में और प्रयासों की आवश्यकता है ताकि सभी किसानों को समान रूप से लाभ मिल सके

  • गिरधारी यादव मामले में नया मोड़ जेडीयू के कदम पर आरजेडी ने दिया बया

    गिरधारी यादव मामले में नया मोड़ जेडीयू के कदम पर आरजेडी ने दिया बया


    नई दिल्ली:जेडीयू सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर उठाए गए कदम के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। जेडीयू की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। पार्टी का आरोप है कि गिरधारी यादव के बेटे ने 2025 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और इस दौरान खुद गिरधारी यादव ने भी प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी आधार पर जेडीयू ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का रुख अपनाया है।

    इस पूरे मामले पर आरजेडी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। आरजेडी सांसद मीसा भारती ने जेडीयू के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी का बेटा चुनाव लड़ता है तो वह एक वयस्क व्यक्ति है और उसे अपने फैसले लेने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर नागरिक को चुनाव लड़ने और अपनी राजनीतिक राह चुनने की आजादी है। मीसा भारती ने यह भी कहा कि किसी परिवार के भीतर अलग अलग लोग अलग दलों से जुड़ सकते हैं और यह पूरी तरह से व्यक्तिगत अधिकार का मामला है।

    उन्होंने आगे कहा कि चुनाव लड़ना किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी प्रकार से गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को वोट डालने और अपनी राजनीतिक पसंद रखने की स्वतंत्रता है। ऐसे में यदि किसी के परिवार का सदस्य किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ता है तो इसे आधार बनाकर कार्रवाई करना उचित नहीं है।

    मीसा भारती ने यह भी कहा कि कई अन्य नेता भी आरजेडी के लिए चुनाव प्रचार में शामिल रहे हैं और यदि आवश्यकता पड़ी तो पार्टी इसकी सूची भी सार्वजनिक कर सकती है। उनके इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि आरजेडी इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देख रही है और इसे पूरी तरह खारिज नहीं कर रही है।

    उधर जेडीयू की ओर से यह मामला लोकसभा अध्यक्ष के पास भेजा गया है और अब इस पर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। पार्टी का कहना है कि एक सांसद के तौर पर गिरधारी यादव का कर्तव्य है कि वे पार्टी के सिद्धांतों और अनुशासन का पालन करें। यदि उन पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    वहीं गिरधारी यादव ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वे अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि वे इस आरोप का जवाब विधिवत तरीके से देंगे।

    इस तरह गिरधारी यादव के खिलाफ जेडीयू के कदम और आरजेडी की प्रतिक्रिया के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का फैसला और दोनों दलों की अगली रणनीति इस मामले को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती है।
  • भोपाल में भीषण सड़क हादसा तीन युवकों की मौत भूसे से भरी ट्रॉली से टकराई तेज रफ्तार कार

    भोपाल में भीषण सड़क हादसा तीन युवकों की मौत भूसे से भरी ट्रॉली से टकराई तेज रफ्तार कार

    भोपाल । भोपाल में मंगलवार-बुधवार की देर रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल है यह दुखद घटना ईंटखेड़ी थाना क्षेत्र के बैरसिया रोड पर हुई जहां चार दोस्त रात में चाय पीने के लिए निकले थे

    बताया जा रहा है कि चारों दोस्त अपनी बलेनो कार में थे और अचानक भूसे से भरी ट्रॉली उनकी कार के सामने आ गई तेज रफ्तार और अंधेरे की वजह से कार ने ट्रॉली से जोरदार टक्कर मार दी इस टक्कर में कार के परखच्चे उड़ गए और तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ

    घायल युवक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है पुलिस ने हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है

    पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के समय ट्रॉली का ड्राइवर मौके से फरार हो गया है और उसकी तलाश की जा रही है वहीं मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है इस घटना ने सड़क सुरक्षा के सवाल भी उठाए हैं क्योंकि अंधेरे और तेज रफ्तार के कारण यह हादसा इतना भयंकर हुआस्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि इस सड़क पर रात के समय दुर्घटनाओं की संभावना अधिक रहती है और पर्याप्त चेतावनी संकेत नहीं होने से हादसे की गंभीरता और बढ़ जाती है

    कुल मिलाकर भोपाल के बैरसिया रोड पर हुए इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता को उजागर किया है पुलिस मामले की जांच कर रही है और ट्रॉली चालक की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की रणनीति-नागरिकों की सुरक्षा से लेकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता तक तैयारी

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की रणनीति-नागरिकों की सुरक्षा से लेकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता तक तैयारी

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, गैस और ईंधन की उपलब्धता, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर पूरी तरह सतर्क है और हर जरूरी कदम उठा रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में बताया कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा है। अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीयों को संघर्ष वाले क्षेत्रों से सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जिनमें ईरान से 700 से अधिक मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। प्रभावित परिवारों को हर जरूरी मदद और इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से दो बार बातचीत की है। भारत लगातार खाड़ी देशों, ईरान, इजरायल और अमेरिका के संपर्क में है ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोला जा सके।

    भारत ने साफ तौर पर नागरिकों, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा/परिवहन सिस्टम पर हमलों का विरोध किया है और सभी पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है। सरकार ने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। घरेलू एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी हुई, लेकिन सरकार ने इन अफवाहों को गलत बताया है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कच्चा तेल और एलपीजी लेकर आने वाले जहाज लगातार भारत पहुंच रहे हैं और सप्लाई बनाए रखने के लिए बैकअप प्लान भी तैयार किए गए हैं।

    ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने अपने तेल और गैस आयात के स्रोत 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिए हैं। इसके अलावा, 53 लाख टन से ज्यादा का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाया गया है, जिसे 65 लाख टन तक बढ़ाने की योजना है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और घरेलू एलपीजी उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

    विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने 70,000 करोड़ रुपए का ‘मेड इन इंडिया’ शिपबिल्डिंग मिशन शुरू किया है। इसके तहत जहाज निर्माण, मरम्मत और रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाई जा रही है। रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि उर्वरकों (खाद) की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों पर इस संकट का बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा। राज्यों से कहा गया है कि गरीबों और मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ लगातार मिलता रहे और जमाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

    सरकार ने रेस्तरां, ढाबों, कैंटीन और प्रवासी मजदूरों के लिए गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी है। पहले 20 प्रतिशत कमर्शियल एलपीजी सप्लाई बहाल की गई और अब इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया है।

    घरेलू पीएनजी और सीएनजी सप्लाई 100 प्रतिशत जारी है, जबकि औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर को लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जा रही है। एक ही दिन में 7,500 से ज्यादा पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं।

    इसके साथ ही सरकान ने कहा है कि जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक करीब 3,400 छापे मारे गए, 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए, 642 एफआईआर दर्ज हुईं और 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही, ऑयल कंपनियों ने 1,500 से ज्यादा औचक निरीक्षण किए हैं।

    समुद्री सुरक्षा की बात करें तो पर्शियन गल्फ में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। कोई भी भारतीय जहाज प्रभावित नहीं हुआ है। ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ नाम के दो एलपीजी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार करके भारत की ओर आ रहे हैं।

    नौवहन महानिदेशालय 20 भारतीय जहाजों और करीब 540 नाविकों की निगरानी कर रहा है। चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहा है, और अब तक 585 से ज्यादा नाविकों को वापस लाया जा चुका है।

    विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास भी 24 घंटे हेल्पलाइन चला रहे हैं और लोगों की मदद कर रहे हैं। 28 फरवरी से अब तक करीब 4.02 लाख लोग भारत लौट चुके हैं।

    यूएई, सऊदी अरब, ओमान और कतर से फ्लाइट्स जारी हैं, जबकि कुवैत, बहरीन, ईरान और इजरायल में फंसे भारतीयों को सऊदी अरब, आर्मेनिया, अजरबैजान और जॉर्डन के रास्ते वापस लाया जा रहा है।

  • शेयर बाजार में रौनक बरकरार, सेंसेक्स में जोरदार बढ़त के साथ शुरुआत

    शेयर बाजार में रौनक बरकरार, सेंसेक्स में जोरदार बढ़त के साथ शुरुआत


    नई दिल्ली ग्लोबल मार्केट से मिले पॉजिटिव स्टोर और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता की खबरों ने भारतीय शेयर बाजार को जगह दी है। रविवार को लगातार दूसरे समुद्र तट के बाजार में तेजी के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में ही किसी का भरोसेमंद सावा नजर आया। एनएसई स्ट्रेंथ 74,068.45 के पिछले बंद स्तर से 583.56 ए.एम.के. 74,652.01 के स्तर पर खुला, जबकि एन ए.एस. ए. 152 ए.के. 152 ए.सी. की बढ़त के साथ 23,064.40 के स्तर पर पहुंच गया। खुलते ही बाजार में खरीदारी का संतुलन बना रहा, जिससे कुछ ही देर में तेजी और तेजी से हो गई और बाजार 886 के कारोबार में 74,954.75 तक पहुंच गया, जबकि 23,216.75 के स्तर पर कारोबार हुआ।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी जबरदस्त उछाल

    बाजार में तेजी सिर्फ बड़े स्टॉक तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिड और स्मॉलकैप स्टॉक में भी स्टॉक शॉप देखने को मिली। 2.04 प्रतिशत और मैक्सिकन स्मॉलकैप में 2.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो व्यापक बाजार में रेस्तरां का संकेत है। सेक्टर प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी सेक्टर सबसे आगे चल रहा है और 3.55 फीसदी का उछाल आया है। इसके अलावा मेटल, मीडिया, ऑटो और पीएससी बैंक सेक्टर में भी 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। कंपनी और फार्मास्युटिकल सेक्टर में भी करीब 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली, जिससे बाजार में लगातार तेजी बनी रही।

    इन स्टॉक में रही सबसे ज्यादा तेजी

    मर्चेंडाइज50 के प्रमुख स्टॉक में श्रीराम फाइनेंस, ट्रेंट, अदाणी इंटरप्राइजेज, ग्रासिम, अदाणी पोर्ट्स और अल्ट्राटेक के स्टॉक में सबसे ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है। इन दिग्गज स्टॉकहोम ने मार्केट को नई पेट्रोलियम तक पहुंचाया, अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, मुद्रा बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के स्वामित्व में गिरावट के साथ 93.95 पर खुला, जबकि पिछले दिन यह 93.87 पर बंद हुआ था। हालांकि रुपये की इस गिरावट का बाजार पर ज्यादा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा और निवेशकों का रुख सकारात्मक बना हुआ है।

    तेल की उपज में गिरावट से बाजार में मिला सहारा

    पिछले कुछ दिनों से अमेरिका-ईरान में तनाव के कारण कच्चे तेल की भारी मात्रा में निकासी देखने को मिल रही थी, जिससे असमानता और आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। लेकिन अब सीजफायर की उम्मीदों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 7 प्रतिशत जनरेट 97.18 डॉलर प्रति शेयर और डब्लूटीआई क्रूड 6 प्रतिशत से ज्यादा जनरेट 86.72 डॉलर पर है। तेल की कमी से भारत जैसे देश के लिए राहत भरी खबर है और बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा में अर्थशास्त्रीय संस्थानों और संस्थाओं के प्रदर्शन पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि वर्तमान में तेजी से उत्साह बढ़ता जा रहा है, लेकिन अगर मेडिकल एहम रेजिस्टेंस ग्रुप को पार नहीं मिल पाता है, तो सामान्य स्तर पर उत्साहवसूली देखी जा सकती है। ऐसे में निवेशकों को साथ लेकर सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी गई है।

  • बिजली बिल वसूली के दौरान शहडोल में MPEB कर्मचारियों पर हमला मामला

    बिजली बिल वसूली के दौरान शहडोल में MPEB कर्मचारियों पर हमला मामला


    शहडोल । मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में बिजली बिल वसूली के लिए गई MPEB यानी मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड की टीम पर हमला होने का मामला सामने आया है घटना ने प्रशासन और जनता दोनों को सकते में डाल दिया है जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के गिरवा गांव में जूनियर इंजीनियर विकास गोंडुड़े अपनी टीम के साथ बकाया बिजली बिल वसूलने के लिए पहुंचे थे

    बताया जा रहा है कि इसी दौरान ग्राम गिरवा के पास कार सवार पवन यादव और नितिन रजक ने रास्ता रोक लिया और लाठी डंडों से लैस होकर कर्मचारियों को धमकाने लगे आरोप है कि उन्होंने गाली गलौज के साथ साथ कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी भी दी इस दौरान विभागीय गाड़ी सड़क किनारे खड़ी थी जिसे उन्होंने तेज रफ्तार कार से कुचलने का प्रयास भी किया

    घटना के समय वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरी कार्रवाई को वीडियो में कैद कर लिया और यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है वीडियो में दिख रहा है कि कैसे लाठी डंडों से लैस युवकों ने कर्मचारियों को घेरे में ले लिया और धमकाया

    मामले की जानकारी मिलते ही अमलाई पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है वहीं दूसरी ओर कार चालक की शिकायत पर विभागीय कर्मचारियों पर भी मामला दर्ज हुआ है फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और घटनास्थल पर जांच कर सबूत जुटा रही है

    स्थानीय लोग इस घटना से सहमति नहीं जता रहे हैं उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों पर इस तरह का हमला चिंता का विषय है और ऐसे हालात में विद्युत विभाग के कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन सुरक्षित तरीके से नहीं कर पाएंगे इस घटना ने शहडोल में बिजली वसूली की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं

    कुल मिलाकर शहडोल में MPEB टीम पर हमला न केवल गंभीर हिंसा का मामला है बल्कि यह यह दर्शाता है कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई करना क्यों जरूरी है पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घटना में कौन कौन दोषी हैं और क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी

  • वंदे मातरम मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कोई दंड नहीं केवल सलाह…

    वंदे मातरम मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कोई दंड नहीं केवल सलाह…

    नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने वंदे मातरम के गायन को अनिवार्य किए जाने से जुड़े एक सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने साफ किया कि इस मामले में अभी हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता क्योंकि याचिका समय से पहले यानी प्री मेच्योर है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के सर्कुलर में वंदे मातरम के गायन को लेकर केवल एक सुझाव या एडवाइजरी दी गई है न कि कोई बाध्यकारी आदेश या दंड का प्रावधान।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या 28 जनवरी को जारी सरकारी अधिसूचना में कहीं यह उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम नहीं गाता है तो उसे किसी तरह की सजा दी जाएगी या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी। इस पर अदालत ने यह समझने की कोशिश की कि याचिकाकर्ता की आशंका किस आधार पर है।

    याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने दलील दी कि भले ही सरकार ने सीधे तौर पर दंड का प्रावधान न किया हो, लेकिन इस तरह की एडवाइजरी के कारण सामाजिक दबाव उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को गाने या सम्मान करने के लिए मजबूर किया जाना उसके अधिकारों के खिलाफ हो सकता है और इस तरह की स्थिति में अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बन सकता है।

    इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए किसी एडवाइजरी की आवश्यकता होती है। वहीं अदालत ने इस मामले में स्पष्ट किया कि सर्कुलर में “may” यानी “सकते हैं” जैसे शब्द का उपयोग किया गया है, जो किसी भी प्रकार के अनिवार्य आदेश या दंड को इंगित नहीं करता।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी में यह भी सामने आया कि इस सर्कुलर में न तो किसी प्रकार की सजा का प्रावधान है और न ही किसी व्यक्ति को इसे गाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि अगर भविष्य में इस एडवाइजरी के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव किया जाता है या उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है, तो उस स्थिति में वह व्यक्ति न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह भी सलाह दी कि अभी उनके द्वारा उठाई गई आशंकाएं अस्पष्ट हैं और किसी ठोस आधार पर नहीं हैं। अदालत ने कहा कि यदि वास्तव में किसी के साथ अन्याय या भेदभाव होता है तभी वह कोर्ट में आए। यह कोई धमकी नहीं बल्कि एक स्पष्ट सलाह है।

    इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वंदे मातरम को लेकर जारी सर्कुलर में किसी प्रकार का दंडात्मक प्रावधान नहीं है और यह केवल एक सलाह के रूप में देखा जाना चाहिए।