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  • 81 प्रतिशत छूट वाला टेंडर बना बहस का मुद्दा एक्सपर्ट बोले इतनी कम कीमत पर जांच संभव नहीं

    81 प्रतिशत छूट वाला टेंडर बना बहस का मुद्दा एक्सपर्ट बोले इतनी कम कीमत पर जांच संभव नहीं

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी जांच को लेकर जारी एक बड़े टेंडर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी National Health Mission द्वारा जारी इस टेंडर में भोपाल की साइंस हाउस मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को ठेका दिया गया है जिसने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना की दरों से 81 दशमलव 2 प्रतिशत कम कीमत पर बोली लगाकर बाजी मार ली

    इसका सीधा अर्थ यह है कि जिस जांच की कीमत सामान्य रूप से 100 रुपए मानी जाती है वह अब लगभग 18 रुपए में की जाएगी यही बिंदु पूरे विवाद का केंद्र बन गया है क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पैथोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इतनी कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण जांच कर पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है

    प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 से सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाओं को निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित करना शुरू किया था इसी क्रम में 12 फरवरी 2026 को नया टेंडर जारी किया गया जो हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित है इस मॉडल में छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से सैंपल लेकर जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जांच की जाती है जिससे लागत और समय दोनों में कमी लाने का प्रयास किया जाता है

    टेंडर प्रक्रिया के अनुसार CGHS की दरों को आधार मूल्य माना गया और जो कंपनी सबसे अधिक छूट देगी उसे ठेका दिया जाना तय था 9 मार्च 2026 को टेंडर खुलने पर साइंस हाउस ने 81 प्रतिशत से अधिक छूट देकर पहला स्थान हासिल किया और उसे लगभग 36 करोड़ रुपए सालाना यानी पांच साल में करीब 180 करोड़ रुपए का ठेका मिल गया

    हालांकि इस निर्णय के बाद विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पद्माकर त्रिपाठी का कहना है कि CGHS की दरें पहले से ही बाजार मूल्य से काफी कम होती हैं ऐसे में यदि कोई कंपनी इन दरों से भी 80 प्रतिशत से अधिक छूट देती है तो यह सवाल खड़े करता है कि जांच की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी

    वे उदाहरण देते हुए बताते हैं कि कम्प्लीट ब्लड काउंट जैसी सामान्य जांच बाजार में 300 से 400 रुपए तक होती है जबकि CGHS दर लगभग 270 रुपए है इतनी दर पर 81 प्रतिशत छूट के बाद जांच की लागत करीब 50 रुपए रह जाती है जबकि केवल रिएजेंट की लागत ही लगभग 70 रुपए होती है इसके अलावा मशीनों का रखरखाव बिजली और स्टाफ का खर्च अलग होता है ऐसे में इतनी कम कीमत पर सटीक और विश्वसनीय जांच संभव नहीं मानी जा रही

    दूसरी ओर कंपनी के सीईओ पुनीत दुबे ने इस छूट को पूरी तरह व्यावहारिक बताया है उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डायग्नोस्टिक्स सेक्टर में तकनीकी विकास के कारण उपकरण और रिएजेंट की लागत में काफी कमी आई है अब कई चीजें देश में ही कम कीमत पर उपलब्ध हैं जिससे इस तरह की दरें संभव हो पाई हैं

    NHM की एमडी डॉ सलोनी सडाना ने भी टेंडर प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि सभी नियमों का पालन किया गया है और तकनीकी बिड में शामिल कई कंपनियों ने 60 प्रतिशत से अधिक छूट की पेशकश की थी ऐसे में सबसे कम दर देने वाली कंपनी को चयनित किया गया है

    इस बीच कंपनी का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है सितंबर 2025 में आयकर विभाग ने कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी वहीं कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भी कंपनी पर अनावश्यक जांचों के जरिए भारी भुगतान लेने के आरोप लगाए थे हालांकि कंपनी ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है

    कुल मिलाकर यह मामला अब सिर्फ एक टेंडर तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या जांच की गुणवत्ता को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान हो पाता है या नहीं

  • मिडिल ईस्ट तनाव कम होते ही सोना-चांदी में तेजी, गोल्ड 3% और सिल्वर 5% उछला

    मिडिल ईस्ट तनाव कम होते ही सोना-चांदी में तेजी, गोल्ड 3% और सिल्वर 5% उछला

     
    नई दिल्ली पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच बुधवार को कीमती धातुओं के बाजार में जबरदस्त तेजी से देखने को मिली। कमजोर डॉलर और महंगाई को लेकर महंगाई के चलते निवेशकों ने एक बार फिर सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोना और चांदी की ओर रुख किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के असर से घरेलू बाजार में भी शुरुआत से ही खरीदारी का माहौल बना रहा और दोनों धातुओं ने मजबूत उछाल दर्ज किया।

    एमसीएक्स पर चमका सोना-चांदी का भाव
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना करीब 3 प्रतिशत उछलकर 1,43,079 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला और कुछ ही समय में यह बढ़कर 1,44,410 रुपये तक पहुंच गया। वहीं मई वाली चांदी भी 5 प्रतिशत तक की तेजी के साथ 2,36,232 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। पिछले ट्रेजरी सत्र में दोनों धातुओं में हल्की गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन बुधवार को बाजार का रुख पूरी तरह बदल गया। दिन के दौरान सोना और चांदी दोनों ने अपने-अपने उच्च स्तर भी छुए, जिससे जनजातियों में उत्साह साफ नजर आया।

    डॉलर की कमजोरी और महंगाई की चिंता बनी वजह
    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि डॉलर में कमजोरी और वैश्विक महंगाई को लेकर आपसी चिंता इस तेजी की मुख्य वजह है। इसके अलावा, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता कम होने से भी जनजातियों का भरोसा बढ़ता है। जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम होती है, तो सोना और चांदी जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट ज्यादा आकर्षक बन जाते हैं। इसी के चलते बाजार में इनकी मांग बढ़ेगी है और कीमतों में तेजी से देखने को मिली है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत रुख
    वैश्विक स्तर पर हाजिर सोने की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई और यह 4,568 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वायदा बाजार में सोने के दाम करीब 3.8 प्रतिशत तक बढ़ा। चांदी भी पीछे नहीं रही और इसकी कीमतों में करीब 3.8 प्रतिशत की तेजी से दर्ज की गई। हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि सोना अभी भी अपने बचे उच्च स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी में पहले भारी गिरावट के बाद अब रिकवरी देखने को मिल रही है।

    आगे क्या रहेगा रुख, जींस की नजर हालात पर
    विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बावजूद बाजार में अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक आर्थिक संकेत भी जींस की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। जींस को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार के ट्रेंड और वैश्विक घटनाओं पर नजर रखते हुए ही निवेश के फैसले लें।

  • जियोपॉलिटिकल संकट का असर कम, भारत की अर्थव्यवस्था 7% से ऊपर बढ़ेगी

    जियोपॉलिटिकल संकट का असर कम, भारत की अर्थव्यवस्था 7% से ऊपर बढ़ेगी



    नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक अस्मिताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था के साथ आगे बढ़ती नजर आ रही है। एसएंडपी ग्लोबल की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह शिक्षक-शिक्षिकाएं दुनिया भर में शांतिप्रिय स्मारक बनाए रखने में सक्षम हैं। रिपोर्ट में भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती जनसंख्या वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताया गया है, जहां घरेलू मांग और निवेश प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

    घरेलू मांग और निवेश बनाने की ताकत का आधार
    रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आर्थिक संस्थानों के पीछे सबसे बड़ा कारण मजबूत घरेलू आवास और धीरे-धीरे बढ़ता निजी निवेश है। आर्टिस्ट भी स्थिर हो गया है, जिससे बाहरी झटकों का प्रभाव क्षेत्र सीमित हो रहा है। वैश्विक स्तर पर भले ही युद्ध, व्यापार तनाव और सम्राट चेन की बनी हुई हो, लेकिन भारत की उद्योग जगत में जोखिमों को काफी हद तक बढ़ावा मिल रहा है। आईटी और डिजिटल सेक्टर सहित सर्विस सेक्टर पर भारत का विकास को सहारा दिया जा रहा है।

    एशिया-पैसिफिक में भारत की जनसंख्या
    रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी बेहतर स्थिति में है और इसमें भारत अहम भूमिका निभा रहा है। चीन को इस क्षेत्र की विकास दर 2026 में लगभग 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके अलावा चीन में उद्योगों की हिस्सेदारी लगभग 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका कारण वहां की फ़्रैंचुअल मांग, प्रॉपर्टी सेक्टर के पहलू और वैश्विक चुनौतियां हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन में भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण है।

    तेल की सीमा का प्रभाव, लेकिन जोखिम नियंत्रण
    रिपोर्ट में कच्चे तेल की आबादी वाले क्षेत्र को वैश्विक उद्योग के लिए एक बड़ी चिंता बताई गई है। हालाँकि भारत के मामले में मजबूत सेवा संयुक्त और विविध स्रोत इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक से उम्मीद की जाती है कि वह संस्थागत नीति अपनाते हुए ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखेगा, जिससे विकास को स्थिरता और स्थिर नियंत्रण में बने रहने का समर्थन मिलेगा।

    वर्गीकरण, प्रौद्योगिकी सेक्टर होस्टिंग
    रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में भारत में फसल दर करीब 4.3 प्रतिशत रहने की संभावना है, जिसे एक तिमाही स्तर माना जाता है। वहीं एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में आर्टिफिशियल सोसाइटी और सेमीकंडक्टर जैसे टेक्नोलॉजी सेक्टर तेजी से उभर रहे हैं, जिससे व्यापार और आर्थिक वर्गीकरण को नई ताकत मिल रही है। भारत में भी इस प्रवृत्ति का लाभ उठाने की स्थिति है, जिससे आने वाले वर्षों में विकास की गति और मजबूती हो सकती है।

  • पेट्रोल-डीजल और LPG पर सरकार का बड़ा बयान-देश में पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं

    पेट्रोल-डीजल और LPG पर सरकार का बड़ा बयान-देश में पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं


    नई दिल्ली देश में पेट्रोल, डीजल और डीजल की कमी को लेकर तेल कंपनियों और सरकार के बीच स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो गई है। भारत फ्लिपकार्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान कॉर्पोरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने साफा कहा है कि देश में कहीं भी जेल की कमी नहीं है और ऑक्सफोर्ड पूरी तरह से सामान्य तरीके से जारी है। कंपनी ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल पंपों पर भीड़ न फैलाएं। उनका कहना है कि देश में साबुत स्टॉक मौजूद है और शॉर्ट चेन बिना किसी प्रतिबंध के फ़्राईक रूप से काम कर रही है।

    तेल का विश्वास, क्रिस्टोफर चेन पूरी तरह से मजबूत
    बीपीसीएल ने अपने बयान में यह भी बताया कि भारत पेट्रोल और डीजल का नेट एक्सपोर्टर है, यानि देश के अलावा अपने को भी शामिल करता है। ऐसे में कमी की बात बिल्कुल निराधार है। कंपनी के मुताबिक, कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन ईंधन के भंडार मौजूद हैं। वहीं एचपीसीएल ने भी इसी तरह की सलाह देते हुए कहा कि उनके नेटवर्क में प्लास्टिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी क्षमता से काम किया जा रहा है। कंपनी ने लोगों से केवल आधिकारिक जानकारी पर विश्वास करने की सलाह दी है, ताकि किसी भी तरह की आपत्ति-बिक्री की स्थिति न बने।

    सरकार भी सक्रिय, रिफाइनरियां पूर्ण क्षमता पर
    कॉपर एवं नेचुरल गैस मिनिस्ट्री ने भी स्थिति को लेकर स्पष्ट किया है कि देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, हाल ही में हजारों टन पेट्रोल पंपों की आपूर्ति की जा चुकी है और सचिवालय में 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा पाइप्ड पाइपलाइन कनेक्शन का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे घरेलू पाइपलाइन की संभावनाएं और मजबूत हो रही हैं। सरकार कॉन्स्टैंट नए पोर्टफोलियो को आपूर्ति तंत्र को और मजबूत बनाने में लगी हुई है।

    जमाखोरी पर रोक, कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई तेज
    सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की जमाखोरी या कालाबाजारी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इसमें सख्त सख्त कार्रवाई की जा रही है। सैकड़ों रिकार्डों की जेलें निकाली गईं, कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और हजारों छापों के माध्यम से बड़ी संख्या में गैस की डकैती की गईं। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि आम बाजार में मसाले तक के मसाले बिना किसी बाधा के चुनौती बने रहें और कृत्रिम संकट पैदा न हो।

  • स्वतंत्रता के महान सेनानी और निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को देश ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    स्वतंत्रता के महान सेनानी और निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को देश ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली: में बुधवार को महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की पुण्यतिथि के अवसर पर देश के कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि विद्यार्थी जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस और निर्भीक पत्रकारिता का अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

    केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपनी लेखनी के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने आगे कहा कि उनकी लेखनी ने जनमानस में राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि विद्यार्थी जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से ब्रिटिश शासन के अन्याय और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने उन्हें भारतीय पत्रकारिता का पुरोधा और महान स्वतंत्रता सेनानी बताया। साथ ही कहा कि उनके प्रखर विचार और आदर्श जीवन सदैव युवाओं को समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गणेश शंकर विद्यार्थी को निडर, नैतिक और जनपक्षधर पत्रकारिता का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जी का योगदान देश को हमेशा राष्ट्रसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें प्रखर राष्ट्रवादी विचारों और निर्भीक लेखनी के लिए याद करते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजी शासन को अपनी लेखनी से चुनौती दी। उनके सिद्धांत और आदर्श जीवन आज भी सत्य, न्याय और राष्ट्रसेवा के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और निर्भीक पत्रकारिता के अप्रतिम प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और जनजागरण के लिए उनका अटूट समर्पण सदैव याद रखा जाएगा। उनकी लेखनी ने समाज में चेतना का संचार किया और देश की एकता व अखंडता के प्रति उनकी निष्ठा अनुकरणीय है।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि वे न केवल महान स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि जनसेवा के लिए समर्पित एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने कहा कि अन्याय, शोषण और सांप्रदायिकता के विरुद्ध उनकी निडर आवाज आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रही है।

    इस प्रकार देश के विभिन्न शीर्ष नेताओं ने एक स्वर में गणेश शंकर विद्यार्थी के योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बताया।

  • गैस रिफिल नियमों पर साफ बयान-नहीं हुआ कोई बदलाव, घबराने की जरूरत नहीं

    गैस रिफिल नियमों पर साफ बयान-नहीं हुआ कोई बदलाव, घबराने की जरूरत नहीं


    नई दिल्ली एलपीजी सिलेंडर की रिफिल बुकिंग को लेकर सोशल मीडिया और कुछ खबरों में फैल रही भ्रम की स्थिति पर सरकार ने साफ रुख अपनाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और पुरानी व्यवस्था ही जारी है। मंत्रालय ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ पोस्ट में यह दावा किया जा रहा था कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों, सिंगल और डबल सिलेंडर उपभोक्ताओं के लिए नई समय-सीमा लागू की गई है, लेकिन ये सभी दावे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और बिना पुष्टि के जानकारी साझा करने से बचें।

    पुरानी व्यवस्था ही लागू, जानिए क्या हैं स्थिर नियम
    मंत्रालय के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट रिफिल शॉक के लिए पहले लागू होने वाले समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वर्तमान की व्यवस्था शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन का अंतर लागू है। यह नियम सभी कोचिंग पर समान रूप से लागू होता है, वायर वे जलाजा योजना के लाभार्थी हों या सामान्य कनेक्शन धारक। सरकार ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग वर्ग के लिए अलग-अलग समय-सीमा तय करने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। ऐसे में पढ़ाई को किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है और वे पहले किसी तरह ही अपना गैस शॉक करा सकते हैं।

    स्टॉक स्टॉक, पुरालेख में कोई कमी नहीं
    सरकार ने इस बात की गारंटी दी है कि देश में किसी भी तरह की कमी की स्थिति नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, सभी रिफाइनरियां पूर्ण क्षमता के साथ काम कर रही हैं और हाल ही में हजारों टन टन के सामान की आपूर्ति की गई है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल का भी स्वायत्त स्टॉक मौजूद है और एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि ऑर्थोडॉक्स में बाइबिल बुक से परहेज किया जा सकता है, क्योंकि इसका मतलब यह है कि ऑर्थोडॉक्स कट्टरपंथियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

    सरकार की तैयारी मजबूत, स्थिर जा रही क्षमता
    कंपनी ने बताया कि गियरबॉक्स को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। नए संसाधनों को जोड़ा जा रहा है और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्यों को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पाइप्ड पिज्जा गैस याने क्वालिटी कनेक्शन का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे घरेलू पिज्जा पर दबाव कम हो सके। एक ही दिन में हजारों नए गैजेट कनेक्शन जारी किए गए, जिसमें सरकार की तैयारी और क्षमताएं शामिल हैं।

  • कच्चे तेल में बड़ी गिरावट! मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद का असर

    कच्चे तेल में बड़ी गिरावट! मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद का असर


    नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब युद्धविराम की उम्मीदों ने वैश्विक बाजार को राहत दी है। रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की श्रेणी में वर्गीकरण दर्ज किया गया, जिससे निवेशकों और आयातक देशों को बड़ी राहत मिली है। ब्रेंट क्रूड भी 7 प्रतिशत से अधिक अनुपात 97.18 डॉलर प्रति शेयर के करीब इंट्राडे तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 6 प्रतिशत से अधिक मार्जिन 86.72 डॉलर प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि यह स्तर केवल तकनीकी नहीं बल्कि भू-राजनीतिक अध्ययन का है, जहां अब सीजफायर को बाजार में शामिल किया जा रहा है। पिछले हफ्ते जहां तेल 100 डॉलर के पार पहुंच गया था, वहीं अब इसमें तेज करेक्शन देखने को मिला है, जो यह दर्शाता है कि बाजार में तेजी से बदलाव की स्थिति पर प्रतिक्रिया दे रही है।

    भारत को राहत, बेरोजगारी और ब्याज पर असर
    कच्चे तेल की कीमत में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा फायदा भारत को सबसे बड़ा फायदा होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति डॉलर की कमी भारत के चालू खाते में 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। साथ ही रेस्टॉरेंट का सीधा असर यह होता है कि ग्राहक मूल्य में 20 से 30 बेसिस पॉइंट तक की राहत मिल सकती है। किशोरों से भारत का अधिकार बिल घटेगा, जिससे रुपयों पर दबाव कम होगा और अर्थव्यवस्था स्थिर रहेगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यह राहत में तेजी आ सकती है, क्योंकि अगर पश्चिम एशिया में फिर से गिरावट आती है तो जिले में नाममात्र की तेजी हो सकती है।

    टेक्नोलॉजी स्नातक पर रूक मार्केट, आगे कैसी रहेगी चाल
    मानको के अनुसार, कच्चे तेल की परतें अहम् तकनीकी स्तर के आसपास बनी हुई हैं। अमेरिकी कच्चा तेल 85 से 87 डॉलर का समर्थन जोन में है, जो बाजार की दिशा तय करेगा। यदि प्रतिस्पर्धी 92 से 94 डॉलर तक पहुंच सकते हैं, तो फिर से तेजी का नया दौर शुरू हो सकता है और 98 से 100 डॉलर तक पहुंच सकते हैं। दूसरी ओर, यदि यह 85 डॉलर से नीचे टूटता है, तो मूल्य 81 से 82 डॉलर तक गिर सकता है। ऐसे में अर्जियों के लिए ‘गिरावट में खरीदारी’ की रणनीति उद्यम मनी जा रही है, लेकिन जोखिम को मंजूरी नहीं दी जा सकती है।

    वैश्विक उद्यम में मिला-जुला रुख, वृश्चिक की झलकियाँ पर
    तेल की बिक्री में गिरावट का असर वैश्विक शेयरों पर भी देखने को मिला। जहां अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी से गिरावट दर्ज की गई और एसएंडपी 500 और नैस्डैक नीचे बंद हो गए, वहीं एशियाई शेयर बाजारों में तेजी से देखने को मिला। जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग सभी प्रमुख स्टोर्स के साथ बंद हो गए। यह संकेत देता है कि निवेशकों को राहत देने की खबरें भरोसेमंद लोगों पर हैं, लेकिन पूरी तरह से गलत धारणाएं नहीं हैं। बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, वैश्विक मांग और बाजारों की स्थिति और बड़े देशों के उद्यमों पर टिकी हुई है।

  • आरसीबी डील का छोटा हिस्सा भी काफी’-पॉल वैन मीकेरेन ने दिया दिलचस्प आइडिया

    आरसीबी डील का छोटा हिस्सा भी काफी’-पॉल वैन मीकेरेन ने दिया दिलचस्प आइडिया


    नई दिल्ली आईपीएल की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु एक बार फिर से रिपब्लिकन में है। हाल ही में टीम के स्वामित्व वाले आदित्य बिड़ला ग्रुप के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को करीब 16,600 करोड़ रुपये की आय हुई। इस बड़ी फिल्म के बाद अब नीदरलैंड के तेज गेंदबाज पॉल वैन मीकेरेन ने एक सुझाव दिया है, जो क्रिकेट के वैश्विक विकास से धूम मचा रहा है।

    छोटा हिस्सा भी बदल सकता है तस्वीर

    पॉल वैन माइकेरेन ने सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर इस दिल की कुल राशि का सिर्फ 0.5 प्रतिशत हिस्सा भी नीदरलैंड क्रिकेट को मिल जाए, तो वहां क्रिकेट का स्तर काफी ऊपर जा सकता है। उनका मानना ​​है कि इतनी बड़ी पूंजी का छोटा हिस्सा भी सहयोगी देशों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

    एसोसिएट और बैटरी बैलेंस शीट के बीच गैप कम करने की जरूरत है

    मिकेरन ने जोर देकर कहा कि एसोसिएटेड (गैर-टेस्ट प्रतियोगिता वाले) देश और फुल मेंबर के बीच का अंतर कम करना बेहद जरूरी है। छोटे देशों के रिकॉर्ड में बेहतर सपोर्टिंग, खिलाड़ियों और सबसे ज्यादा मैच कॉम्बिनेशन के मुकाबले बड़े स्तर पर दिखाए जा सकते हैं। इससे क्रिकेट को और अधिक वैश्विक पहचान मिल सकती है।

    अन्य खिलाड़ियों ने भी आवाज दी

    यह सुविधा केवल माइकेरेन तक सीमित नहीं है। ओमान के कैप्टन जतिंदर सिंह और नीदरलैंड्स के कैप्टन स्कॉट एडवर्ड्स ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल से अपील की है कि बड़े टूर्नामेंटों के अलावा मजबूत टीमों के खिलाफ मुकाबले के बारे में अधिक जानकारी दी जाए।

    नीदरलैंड का प्रदर्शन, लेकिन औपचारिक की कमी

    हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप में नीदरलैंड की टीम ने पाकिस्तान और भारत के बीच मजबूत मुकाबले की टक्कर दी थी। हालाँकि, सीमित संरचना और संरचना की कमी के कारण टीम ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ी। ऐसे में बेहतर फंडिंग और अवसर मिलने से इन टीमों का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता है।

    क्रिकेट का भविष्य क्या बदलेगा

    पॉल वैन माइकेरेन का यह सुझाव क्रिकेट को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखिए कि क्रिकेट की बड़ी संस्थाएं इस पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या सच में सहयोगी देशों को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाते हैं।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने दी मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं विकास कार्यों की सराहना

    प्रधानमंत्री मोदी ने दी मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं विकास कार्यों की सराहना


    मध्यप्रदेश । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को उनके जन्मदिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं इस मौके पर प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व और उनके द्वारा प्रदेश में किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना भी की

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है उन्होंने उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल कर रहे हैं जिनका सकारात्मक असर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जनकल्याण और विकास को केंद्र में रखकर किए जा रहे प्रयासों के कारण मध्यप्रदेश नई ऊंचाइयों को छू रहा है उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यों को प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभेच्छाएं भी व्यक्त कीं उनका यह संदेश राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है

    मुख्यमंत्री के जन्मदिवस पर प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल एक औपचारिक शुभकामना है बल्कि यह राज्य और केंद्र के बीच समन्वय और सहयोग का भी प्रतीक माना जा रहा है राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संदेश नेतृत्व के प्रति विश्वास और समर्थन को भी दर्शाते हैं

    कुल मिलाकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के जन्मदिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई शुभकामनाएं उनके कार्यों की सराहना और भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश के रूप में देखी जा रही हैं जो प्रदेश की राजनीति और विकास यात्रा दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती हैं

  • युवराज से सीखेंगे पंत? Yuvraj Singh के साथ जुड़ाव को लेकर आई बड़ी प्रतिक्रिया

    युवराज से सीखेंगे पंत? Yuvraj Singh के साथ जुड़ाव को लेकर आई बड़ी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली आईपीएल 2026 से पहले ऋषभ पंत को लेकर पूर्व भारतीय बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने बड़ा बयान दिया है। चोपड़ा का दावा है कि नेशनल सुपर जायंट्स के कैप्टन पंत को अपने खेल के तरीकों में बदलाव करना होगा, अन्यथा भविष्य में उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    रेप्युटेशन के कैदी बन गए हैं पंत

    आकाश चोपड़ा ने कहा कि पंत अपनी आक्रामक ऑलट्रॉयल स्टाइल के कारण खुद की बनाई छवि के कैदी बन गए हैं। वह हर स्थिति में जोखिम के खिलाफ गोलीबारी की कोशिश करती है, जो कई बार सामने आती है। चोपड़ा के अनुसार, अगर पंत को भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम टी20 में वापसी करनी है, तो उन्हें अपने खेल की तकनीक पर ध्यान देना होगा और स्थिति के अनुसार नाटकीय प्रदर्शन करना होगा।

    ख़राब फॉर्म और दाग़ चिंता का विषय

    पिछले आईपीएल सीजन में पंत के प्रदर्शन की उम्मीद नहीं जताई जा रही थी। वे 13 मैचों में सिर्फ 269 रन बनाए और उनका औसत 24.45 रहा। चोपड़ा का कहना है कि पंत को कई खिलाड़ी मिले, लेकिन उन्होंने अपने खेल में कोई बदलाव नहीं किया और लगातार शेयर बाजार में बने रहे। यही कारण है कि वह राष्ट्रीय टीम की टी-20 से बाहर हो गए हैं।

    द्रविड़ को भी पसंद नहीं था एप्रोच

    चोपड़ा ने यह भी बताया कि पंत के पूर्व ऑल-ऑथिक कोच राहुल द्रविड़ भी बिल्कुल पसंद नहीं थे, हालांकि टेस्ट क्रिकेट में उनके अच्छे नतीजे आ रहे हैं। इससे साफ है कि पंत को अपने शॉट सिलेक्शन और मैच सिचुएशन को इशारा करने पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

    यूके से दिशानिर्देश लेना सकारात्मक संकेत

    हालांकि, चोपड़ा ने पंत के वन स्टेप की शोभा भी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि युवराज सिंह की तरफ से पंत की तरफ से की गई सलाह एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाया गया है कि वह अपने खेल में सुधार करना चाहती हैं और अपनी प्रेमिकाओं पर काम करने के लिए तैयार हैं।

    आईपीएल 2026 में होगी असली परीक्षा

    अब बिजनेस नजर आईपीएल 2026 पर है, जहां लखनऊ सुपर जायंट्स को अपने कप्तान से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी। टीम अपना पहला मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 1 अप्रैल को खेलेगी।