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  • सुनील ग्रोवर बने कॉमेडी की धड़कन हर किरदार में ढलने वाला बेमिसाल हुनर

    सुनील ग्रोवर बने कॉमेडी की धड़कन हर किरदार में ढलने वाला बेमिसाल हुनर


    नई दिल्ली । छोटे पर्दे की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो सिर्फ अभिनय नहीं करते बल्कि अपने हुनर से पूरी इंडस्ट्री का स्तर ही बदल देते हैं और सुनील ग्रोवर उन्हीं में से एक हैं। हाल के समय में जहां एक ओर फिल्म धुरंधर द रिवेंज और उसके लीड स्टार रणवीर सिंह की चर्चा हर तरफ सुनाई दे रही है वहीं दूसरी ओर सुनील ग्रोवर अपने जबरदस्त टैलेंट के दम पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। अगर बड़े पर्दे पर किसी को गिरगिट कहा जाए तो छोटे पर्दे पर यह खिताब बिना किसी हिचक के सुनील ग्रोवर को दिया जा सकता है क्योंकि वह हर किरदार में इस तरह ढल जाते हैं कि असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

    कॉमेडी की दुनिया में सुनील ग्रोवर का सफर आसान नहीं रहा लेकिन उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के दम पर एक अलग मुकाम हासिल किया। कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में गुत्थी डॉक्टर मशहूर गुलाटी और रिंकू भाभी जैसे किरदारों ने उन्हें घर घर में पहचान दिलाई। इन किरदारों के जरिए उन्होंने यह साबित कर दिया कि कॉमेडी केवल हंसी तक सीमित नहीं होती बल्कि यह एक कला है जो दर्शकों के दिल में जगह बना लेती है।

    समय के साथ जब कपिल शर्मा का शो नए प्लेटफॉर्म पर पहुंचा और द ग्रेट इंडियन कपिल शो के रूप में सामने आया तो शुरुआत में दर्शकों की प्रतिक्रिया उतनी मजबूत नहीं रही लेकिन जैसे ही सुनील ग्रोवर की एंट्री हुई शो की पूरी तस्वीर बदल गई। उनकी मौजूदगी ने शो में नई जान फूंक दी और दर्शकों को फिर से वही पुराना जादू महसूस होने लगा। आज हालात यह हैं कि दर्शक शो देखने के लिए खास तौर पर सुनील ग्रोवर का इंतजार करते हैं।

    उनकी सबसे बड़ी खासियत उनकी मिमिक्री है। चाहे वह किसी मशहूर शख्सियत का अंदाज हो या किसी काल्पनिक किरदार का रूप सुनील उसे पूरी शिद्दत से निभाते हैं। उन्होंने कई बड़े कलाकारों की नकल इतनी सटीक तरीके से की है कि खुद असली कलाकार भी हैरान रह जाते हैं। मंच पर उनकी मौजूदगी दर्शकों को बांधे रखती है और हर परफॉर्मेंस एक नया अनुभव बन जाती है।

    सिर्फ कॉमेडी ही नहीं बल्कि सुनील ग्रोवर की सादगी भी उन्हें खास बनाती है। कैमरे के सामने जहां वह ऊर्जा और हास्य से भरपूर नजर आते हैं वहीं निजी जिंदगी में वह बेहद साधारण और जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। यही कारण है कि लोग उन्हें सिर्फ एक कलाकार नहीं बल्कि एक प्रेरणा के रूप में भी देखते हैं।

    आज के दौर में जब कंटेंट तेजी से बदल रहा है और दर्शकों की पसंद भी लगातार विकसित हो रही है ऐसे समय में सुनील ग्रोवर जैसे कलाकार का लगातार प्रासंगिक बने रहना उनकी काबिलियत का सबसे बड़ा सबूत है। वह न सिर्फ लोगों को हंसाते हैं बल्कि अपने अभिनय से उन्हें भावनात्मक रूप से भी जोड़ते हैं। सच कहा जाए तो सुनील ग्रोवर का टैलेंट अनुभव करना अपने आप में एक खास एहसास है और यही उन्हें टीवी का सच्चा लेजेंड बनाता है।

  • सऊदी प्रिंस सलमान को ईरान जंग से क्या फायदा: ट्रंप से कहा- युद्ध जारी रखें, अमेरिका फंस गया लंबी लड़ाई में?

    सऊदी प्रिंस सलमान को ईरान जंग से क्या फायदा: ट्रंप से कहा- युद्ध जारी रखें, अमेरिका फंस गया लंबी लड़ाई में?

    वॉशिंगटन । सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने हालिया बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने का आग्रह किया है। सूत्रों के अनुसार, युवराज का मानना है कि यह अमेरिका-इस्राइल के सैन्य अभियान के माध्यम से पश्चिम एशिया को फिर से आकार देने का एक ऐतिहासिक अवसर है।
    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध जारी रखने पर जोर पिछले सप्ताह हुई कई वार्ताओं में युवराज मोहम्मद ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट रूप से बताया है कि ईरान की कट्टरपंथी सरकार को समाप्त करने के लिए दबाव बनाना आवश्यक है। बातचीत से जुड़े लोगों का कहना है कि युवराज का तर्क है कि ईरान खाड़ी क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक खतरा है, जिसे केवल वहां की वर्तमान सरकार को हटाकर ही समाप्त किया जा सकता है।

    इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान को एक गंभीर खतरे के रूप में देखते हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस्राइल शायद एक ऐसे ईरान को पसंद करेगा जो आंतरिक कलह में इतना उलझा हो कि वह इस्राइल के लिए खतरा न बने। वहीं, सऊदी अरब एक असफल ईरानी राज्य को अपने लिए एक गंभीर और सीधा सुरक्षा खतरा मानता है।

    सऊदी अरब को किस बात का डर?
    विश्लेषकों का कहना है कि “भले ही युवराज मोहम्मद युद्ध से बचना चाहते हों, लेकिन उन्हें चिंता है कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप अब पीछे हटते हैं, तो सऊदी अरब और शेष पश्चिम एशिया को एक उग्र और क्रोधित ईरान का अकेले सामना करना पड़ेगा।

    ऐसी स्थिति में ईरान जलडमरूमध्य को समय-समय पर बंद करने की शक्ति भी हासिल कर सकता है। हालांकि सऊदी अरब जलडमरूमध्य के बंद होने से निपटने के लिए अन्य खाड़ी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, लेकिन यदि जलमार्ग जल्द ही नहीं खोला गया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    अमेरिका फंस गया लंबी लड़ाई में?
    सऊदी और अमेरिकी सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ईरान सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर और भी विनाशकारी हमले कर सकता है। साथ ही, संयुक्त राज्य अमेरिका एक कभी न खत्म होने वाले युद्ध में फंस सकता है।

    बदल रहा ट्रंप का रुख?
    राष्ट्रपति ट्रंप का रुख सार्वजनिक तौर पर युद्ध को लेकर बदलता रहा है। कभी वे युद्ध के जल्द खत्म होने का संकेत देते हैं, तो कभी इसे और भड़कता हुआ बताते हैं। हाल ही में राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनके प्रशासन और ईरान के बीच हमारे दुश्मनी के पूर्ण और अंतिम समाधान के संबंध में उत्पादक बातचीत हुई है, हालांकि ईरान ने बातचीत की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है।

    तेल बाजार में भारी संकट
    ईरान के साथ युद्ध के सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिका-इस्राइल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पहले ही तेल बाजार में भारी व्यवधान पैदा कर दिया है। युवराज मोहम्मद के साथ बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने तेल की कीमतों और अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में चिंता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों को सूचित किए गए लोगों के अनुसार, सऊदी नेता ने उन्हें आश्वासन दिया है कि यह केवल अस्थायी है।

    सऊदी सरकार का खंडन
    सऊदी अधिकारियों ने इस विचार को सिरे से खारिज कर दिया है कि युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने युद्ध को लंबा खींचने का दबाव डाला है। सरकार के एक बयान में कहा गया है “सऊदी अरब का साम्राज्य हमेशा से इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है, इससे पहले कि यह शुरू भी हुआ हो। हमारे अधिकारी ट्रंप प्रशासन के साथ निकट संपर्क में हैं और हमारी प्रतिबद्धता अपरिवर्तित है।”

    बयान में यह भी कहा गया है “आज हमारी मुख्य चिंता अपने लोगों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे दैनिक हमलों से खुद को बचाना है। ईरान ने गंभीर कूटनीतिक समाधानों के बजाय खतरनाक टकराव का रास्ता चुना है। इससे हर हितधारक को नुकसान होता है, लेकिन ईरान को सबसे ज्यादा।”

  • ईरान के दुश्मन बढ़े! युद्ध में उतर सकते हैं खाड़ी के ताकतवर देश; इस बात का सता रहा डर

    ईरान के दुश्मन बढ़े! युद्ध में उतर सकते हैं खाड़ी के ताकतवर देश; इस बात का सता रहा डर

    तेहरान। खाड़ी अरब देश ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। यदि तेहरान उनके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला करता है, तो उन्हें इसमें कूदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले कई लोगों के हवाले से ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
    सऊदी यूएई धैर्य खो रहे

    नाम न छापने की शर्त पर इन लोगों ने बताया कि खाड़ी के सबसे शक्तिशाली देश, विशेष रूप से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरानी हमलों से अपना धैर्य खो रहे हैं।

    ईरान ने इन देशों में पहले ही बंदरगाहों, ऊर्जा सुविधाओं और हवाई अड्डों को निशाना बनाया है। हालांकि, उन्होंने जोड़ा कि वे युद्ध में तभी शामिल होंगे जब तेहरान खाड़ी के महत्वपूर्ण बिजली और पानी के बुनियादी ढांचे पर हमला करने की अपनी धमकियों को हकीकत में बदल देगा।
    अधिकांश खाड़ी देश युद्ध में शामिल होने के पक्ष में

    सूत्रों के अनुसार, ओमान जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकांश खाड़ी देश इसी दिशा में बढ़ रहे हैं। फिर भी, वे युद्ध में शामिल होने से कतरा रहे हैं क्योंकि ईरान उन पर हमले तेज कर सकता है। एक यूरोपीय राजनयिक ने कहा कि वे ऐसी स्थिति में भी नहीं फंसना चाहते जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान के साथ कोई समझौता कर लें और उन्हें एक घायल व गुस्से से भरे ईरानी शासन के साथ अकेले निपटना पड़े।
    खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले

    पिछले 24 घंटों में बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई सभी ने ईरान द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को बीच में ही मार गिराया है। ईरान का दावा है कि खाड़ी देश वैध लक्ष्य हैं क्योंकि अमेरिका उनके हवाई क्षेत्र और क्षेत्रों का उपयोग उस पर हमला करने के लिए करता है।

    सूत्रों ने कहा कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद में पिछले सप्ताह हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में सैन्य कार्रवाई का विकल्प मेज पर था।

    इस बैठक में मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देश भी शामिल थे।

    मंगलवार को कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि खाड़ी देशों को ईरान के साथ मिल-जुलकर रहने के तरीके खोजने होंगे। उन्होंने कहा, यह युद्ध के बाद ईरानियों पर निर्भर करेगा कि वे विश्वास को फिर से कैसे बहाल करते हैं।
    खार्ग द्वीप पर खतरा

    सुरक्षा तंत्र के करीबी एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के अनुसार, यदि ट्रंप खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की अपनी धमकी पर आगे बढ़ते हैं तो इससे पूरे क्षेत्र में तेहरान की ओर से और भी बड़ी जवाबी कार्रवाई होगी।

    ईरानी अधिकारी ने कहा कि इस मिशन के लिए आवश्यक अमेरिकी सैनिकों को संभवतः यूएई से भेजा जाएगा, जहां अल धफरा एयर बेस स्थित है। अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि अमीरात ने इसकी अनुमति दी, तो ईरान इस खाड़ी देश पर भीषण हमला करेगा। अधिकारी ने यह भी जोड़ा कि यदि अमेरिका द्वीप पर कब्जा कर लेता है, तो ईरान इसे बम से उड़ाने में संकोच नहीं करेगा और जलडमरूमध्य व फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछा देगा।

    दुबई पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर के निदेशक मोहम्मद बहारून ने कहा, यह हमारा युद्ध नहीं है, लेकिन ईरान इसे हमारा बना रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ईरान यही रवैया जारी रखता है, तो क्षेत्रीय देशों को तेहरान के राज्य प्रायोजित आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक गठबंधन बनाना पड़ सकता है, जैसा कि ‘इस्लामिक स्टेट’ के खिलाफ बनाया गया था।
    5 हजार मिसाइलें दागी

    युद्ध की शुरुआत से अब तक ईरान ने खाड़ी देशों पर लगभग 5000 मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इसमें तेल-गैस सुविधाओं, अमेरिकी ठिकानों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया है, जिसमें यूएई ने सबसे ज्यादा मार झेली है। खाड़ी अरब देशों में अब तक कम से कम 20 लोग मारे जा चुके हैं।

  • ईरान युद्ध से भारत में बीयर की किल्लत जैसे हालात, कई ब्रांड हो सकते हैं महंगे

    ईरान युद्ध से भारत में बीयर की किल्लत जैसे हालात, कई ब्रांड हो सकते हैं महंगे

    तेहरान। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के शराब उद्योग पर भी दिखने लगा है। अब आशंका जताई जा रही है कि कई बड़े ब्रांड्स की किल्लत भारत में हो सकती है। कहा जा रहा है कि इसके चलते बीयर महंगी भी हो सकती हैं।
    वैश्विक बीयर कंपनियों हाइनेकेन, एबी इनबेव और कार्ल्सबर्ग ने भारत में बीयर की सप्लाई रुकने और कीमतों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी है।
    संकट के मुख्य कारण

    कांच और एल्युमीनियम की कमी: युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे कांच की बोतलें बनाने वाली भट्टियां बंद हो रही हैं। बोतलों की कीमतों में 20% तक का उछाल आया है। वहीं, शिपिंग में देरी से कैन बनाने के लिए जरूरी एल्युमीनियम का आयात भी प्रभावित हुआ है।

    गैस आपूर्ति पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत की 40% गैस कतर से मंगवाता है। ईरानी हमलों के कारण कतर की निर्यात क्षमता पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए गैस की भारी किल्लत हो गई है।

    पैकेजिंग लागत: बीयर की बोतलों के अलावा पेपर कार्टन (गत्ते) के दाम दोगुने हो गए हैं और लेबल-टेप जैसी सामग्रियों की लागत भी बढ़ गई है।

    कीमतों में 15% तक बढ़ोतरी की मांग

    ‘ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के महानिदेशक विनोद गिरी के अनुसार, उत्पादन लागत इतनी बढ़ गई है कि अब काम जारी रखना मुश्किल हो रहा है। एसोसिएशन ने राज्य सरकारों से बीयर की कीमतों में 12% से 15% तक की बढ़ोतरी की अनुमति मांगी है।

    भारत में गर्मियों का सीजन शुरू हो रहा है, जो बीयर की बिक्री का पीक समय होता है। यदि संकट जल्द नहीं सुलझा, तो इस साल शादियों और गर्मियों के सीजन में बीयर की भारी कमी देखने को मिल सकती है।
    राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को लगाया फोन

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद कहा कि भारत पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द तनाव कम करने, शांति बहाल करने और वैश्विक व्यापार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने का समर्थन करता है। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत है।

    इस बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला, सुरक्षित और सुलभ बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, और कहा कि यह वैश्विक शांति, स्थिरता एवं आर्थिक खुशहाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    पीटीआई भाषा के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि मोदी और ट्रंप के बीच फोन कॉल पर हुई बातचीत को भारत की उस पहल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसका मुख्य उद्देश्य जल्द से जल्द शत्रुता को समाप्त करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऊर्जा का आवागमन सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि जलमार्ग की नाकाबंदी जारी रहती है तो देश की खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

    उन्होंने कहा कि भारत इस संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है। साथ ही यह भी कहा कि शत्रुता के भयावह परिणाम होने वाले हैं क्योंकि यह जल्द ही अफ्रीका में खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ उर्वरक आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकता है।

  • हरीश की 13 साल के संघर्ष की जंग खत्म… दिल्ली के ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार, नम आंखों से दी गई अतिम विदाई

    हरीश की 13 साल के संघर्ष की जंग खत्म… दिल्ली के ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार, नम आंखों से दी गई अतिम विदाई


    Harish
    गाजियाबाद/दिल्ली।
    इच्छा मृत्यु के बाद बुधवार को हरीश राणा (Harish Rana) को अंतिम विदाई दी कई। ग्रीन पार्क (Green Park.) में सुबह नौ बसे उनका अंतिम संस्कार (Last rites) किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद और हरीश राणा को नमन किया।

    भारत में इच्छामृत्यु (Euthanasia.) की अनुमति पाने वाले हरीश राणा पहले शख्स रहे। मंगलवार को उनका निधन हो गया था। वह पिछले 13 वर्षों से कोमा जैसी अवस्था में थे और इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पूरी की गई। हरीश के पिता अशोक राणा के करीबी मित्र दीपांशु मित्तल ने बताया कि हरीश का जीवन जन्म से लेकर अंतिम यात्रा तक संघर्ष भरा रहा। दिल्ली में जन्मे हरीश पढ़ाई के दौरान चंडीगढ़ में हादसे का शिकार हुए। बीते 13 वर्षों का उनका संघर्ष शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है।


    कब क्या हुआ

    -20 अगस्त 2013: हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल
    -वर्ष 2022: माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की
    -8 जुलाई 2024: हाई कोर्ट ने इच्छामृत्यु याचिका खारिज की
    -15 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
    -11 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की अनुमति दी
    -14 मार्च 2026: हरीश को एम्स, दिल्ली में भर्ती कराया गया
    -24 मार्च 2026: एम्स में निधन

    हर दिल में एक ही सवाल, क्या यही अंत था उस लंबी पीड़ा का
    हरीश राणा के निधन ने राज एंपायर सोसायटी में ऐसा ही सन्नाटा छोड़ दिया है, जहां आंसू और राहत दोनों एक साथ महसूस किए जा रहे हैं। एक ओर एक युवा जीवन के चले जाने का गम है तो दूसरी ओर उस अंतहीन पीड़ा से मुक्ति की राहत, जिसे शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं। मंगलवार को हरीश के निधन की खबर मिलते ही सोसायटी का माहौल बदल गया। हर घर में शोक की परछाई दिखाई दी और लोग एक-दूसरे से सवाल करते नजर आए कि आखिर यह संघर्ष इतने लंबे समय तक क्यों चला और क्या इसका अंत इसी रूप में होना तय था।


    एक परिवार नहीं, पूरे समाज की पीड़ा

    स्थानीय निवासी दीपांशु मित्तल ने कहा कि यह केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है। उनके अनुसार, हरीश के माता-पिता ने जो सहा है, उसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं। एक अभिभावक होने के नाते वह इस दर्द को गहराई से महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में पूरी सोसायटी परिवार के साथ खड़ी है।


    पिता का संघर्ष एक योद्धा जैसा

    सोसायटी में रहने वाले तेजस चतुर्वेदी ने इस घटना को असाधारण त्रासदी बताया। उन्होंने कहा कि किसी पिता का अपने बेटे के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगना ही बताता है कि पीड़ा कितनी गहरी रही होगी। उनके अनुसार, अशोक राणा का संघर्ष किसी योद्धा से कम नहीं था, जो वर्षों तक अपने बेटे के लिए लड़ते रहे। उन्होंने कहा कि हरीश भले ही अब इस दुनिया में न हों, लेकिन उनकी कहानी लोगों के जेहन में लंबे समय तक जीवित रहेगी।


    समर्पण की मिसाल बने पिता

    सोसायटी निवासी सचिन शर्मा ने इसे एक पिता के समर्पण की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि हरीश के पिता ने अपने बेटे के लिए जो कुछ किया, वह असाधारण है। अंतिम समय तक उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और हर संभव प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि नवरात्र के दौरान हरीश का जाना इस घटना को और अधिक भावुक बना देता है।

  • अमेलिया केर का विस्फोटक शतक, एक ही मैच में अपने नाम किए टी20 के तीन बड़े रिकॉर्ड

    अमेलिया केर का विस्फोटक शतक, एक ही मैच में अपने नाम किए टी20 के तीन बड़े रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। न्यूजीलैंड महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर Amelia Kerr ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ क्राइस्टचर्च में खेले गए पांचवें टी20 मुकाबले में उन्होंने 55 गेंदों पर 105 रनों की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 19 चौके और 1 छक्का जड़ा और महज 52 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। उनकी इस पारी ने न सिर्फ टीम को मजबूती दी, बल्कि कई रिकॉर्ड भी उनके नाम कर दिए।

    सबसे तेज शतक और नया इतिहास

    अमेलिया केर ने इस मुकाबले में न्यूजीलैंड की ओर से टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। यह उनके करियर का दूसरा टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक भी है। इसके साथ ही वह न्यूजीलैंड महिला टीम की पहली बल्लेबाज बन गई हैं, जिन्होंने टी20 इंटरनेशनल में दो शतक लगाए हैं। इससे पहले Suzi Bates और Sophie Devine ने एक एक शतक लगाया था।

    लगातार शानदार प्रदर्शन, बना खास रिकॉर्ड

    अमेलिया ने एक और अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। वह टी20 इंटरनेशनल (महिला और पुरुष दोनों) में लगातार 11 पारियों में 30 या उससे अधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। यह उनकी निरंतरता और फॉर्म का सबसे बड़ा प्रमाण है। इतनी कम उम्र में इस तरह का प्रदर्शन उन्हें दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों में शामिल करता है।

    ऑलराउंड प्रदर्शन से सीरीज पर छाप

    इस सीरीज में अमेलिया केर का प्रदर्शन सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 5 मैचों में कुल 276 रन बनाने के साथ 5 विकेट भी हासिल किए। पांचवें मुकाबले में उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जबकि पूरी सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड भी मिला। उनकी इस ऑलराउंड परफॉर्मेंस ने न्यूजीलैंड को सीरीज में मजबूती दिलाई और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    कम उम्र में शानदार करियर, आगे बड़ी उम्मीदें

    महज 25 साल की उम्र में अमेलिया केर का करियर बेहद शानदार रहा है। टी20 इंटरनेशनल में उन्होंने 1900 से ज्यादा रन बनाने के साथ 100 से अधिक विकेट भी लिए हैं। वहीं वनडे क्रिकेट में भी उनके नाम दोहरा शतक दर्ज है, जहां उनका सर्वोच्च स्कोर 232 नाबाद है। अगर उनका यह प्रदर्शन जारी रहा, तो आने वाले समय में वह महिला क्रिकेट की महानतम ऑलराउंडर्स में गिनी जा सकती हैं।

  • अमेरिकियों के लिए भी अच्छा है मजबूत भारत, शांति बनाने में भूमिका अहम; US अधिकारी बोले

    अमेरिकियों के लिए भी अच्छा है मजबूत भारत, शांति बनाने में भूमिका अहम; US अधिकारी बोले

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के साथ-साथ एशिया में अनुकूल शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने के लिए भारत की भूमिका बेहद जरूरी है। उन्होंने भू-राजनीति में हो रहे व्यापक बदलाव के मद्देनजर दोनों पक्षों के बीच गहरे रक्षा संबंधों के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

    अमेरिकी युद्ध नीति के उप सचिव एलब्रिज कोल्बी ने अनंत केंद्र में अपने संबोधन में भारत-अमेरिका रणनीतिक जुड़ाव के महत्व को रेखांकित करते हुए चार प्रमुख बिंदु पेश किए और इस बात पर जोर दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक शक्ति का प्रभुत्व नहीं होना चाहिए।

    उनके इस बयान को परोक्ष रूप से चीन की तरफ संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
    भारत की भूमिका को जरूरी बताया

    उन्होंने कहा, ‘अमेरिका का मानना ​​है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अनुकूल शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने में भारत केंद्रीय भूमिका निभाएगा। इस संदर्भ में, एक मजबूत और आत्मविश्वासी भारत न केवल भारतीय जनता के लिए अच्छा है, बल्कि अमेरिकियों के लिए भी अच्छा है।’ पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कोल्बी की दो दिवसीय नई दिल्ली यात्रा का विशेष महत्व है।
    ‘भारत और अमेरिका को हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं’

    उन्होंने कहा, ‘सबसे पहली बात तो यह कि प्रभावी सहयोग के लिए अमेरिका और भारत को हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि हमारे हित और उद्देश्य मूलभूत मुद्दों पर तेजी से एक समान होते जा रहे हैं।’ कोल्बी ने कहा, ‘रणनीतिक मामलों पर सामंजस्य और सहयोग को गहरा करने के लिए मतभेद और यहां तक ​​कि विवाद भी पूरी तरह से अनुकूल हैं। हमारी साझेदारी की जड़ें दिखावे से कहीं अधिक गहरी और सतही सौहार्द से कहीं अधिक टिकाऊ हैं; ये स्थायी रणनीतिक और आपसी हित में गहराई से शामिल हैं।’
    किससे होगा फायदा

    उन्होंने कहा, ‘हमारे दोनों देशों को एक ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र से लाभ होता है जिसमें कोई भी शक्ति इस क्षेत्र पर हावी नहीं हो सकती।

    दोनों को खुले व्यापार और राष्ट्रीय स्वायत्तता से लाभ होता है।’ कोल्बी ने तर्क दिया कि ये ठोस और साझा हित हमारी स्थायी रणनीतिक साझेदारी की नींव हैं।

    अपने दूसरे बिंदु को स्पष्ट करते हुए कोल्बी ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही इस क्षेत्र में टिकाऊ संतुलन के लिए सैन्य शक्ति की रणनीतिक केंद्रीयता को पहचानते हैं, और इसलिए रक्षा सहयोग को केवल प्रतीकात्मक या निष्क्रियता से प्रेरित होने के बजाय वास्तविक क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित होना चाहिए।
    रक्षा संबंधों पर की बात

    कोल्बी ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के हवाले से कहा कि दोनों पक्षों के बीच रक्षा संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा औद्योगिक और प्रौद्योगिकी सहयोग को ‘नई गति’ मिल रही है। इस संदर्भ में उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में अंतिम रूप दिए गए ‘प्रमुख रक्षा साझेदारी’ ढांचे का भी उल्लेख किया।

    कोल्बी ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ मिलकर लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता, सुदृढ़ रसद आपूर्ति, पनडुब्बी रोधी युद्ध और उन्नत प्रौद्योगिकियों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को तेज करने और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
    तीसरा पॉइंट

    अपने तीसरे बिंदु में, अमेरिकी उप सचिव ने सैन्य हार्डवेयर के संभावित सह-उत्पादन और सह-विकास के महत्व पर जोर दिया। कोल्बी ने कहा कि अमेरिका भारत को सैन्य बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन साथ ही वह नई दिल्ली की ओर से स्वदेशी रक्षा उद्योग को विकसित करने की महत्वाकांक्षा को भी मान्यता देता है।

    उन्होंने कहा, ‘एक मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार संप्रभुता और लचीलेपन को बढ़ाता है। अमेरिका इस उद्देश्य का समर्थन करता है। भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।’ ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने कहा, ‘भारत के पास पहले से ही एक प्रभावशाली रक्षा औद्योगिक आधार है और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में भारत का नेतृत्व हमारे रक्षा सहयोग को और भी व्यापक बनाने में सहायक है।’

    कोल्बी ने अपने चौथे बिंदु में कहा कि अमेरिका और भारत हर मुद्दे पर सहमत नहीं होंगे, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि किसी भी असहमति से सहयोग में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।

  • कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा

    कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा


    नई दिल्ली:     देश के प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर Zerodha ने ट्रेडर्स को बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से इंट्राडे फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग के कुछ मामलों में ब्रोकरेज चार्ज ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति ऑर्डर कर दिया जाएगा। इस फैसले से खासतौर पर डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेड करने वाले निवेशकों की लागत बढ़ने वाली है

    यह बदलाव हर ट्रेडर पर लागू नहीं होगा। कंपनी के अनुसार, यह बढ़ा हुआ शुल्क केवल उन निवेशकों पर लगेगा जो Securities and Exchange Board of India के नियमों का पालन नहीं करते। सेबी के नियम के मुताबिक, किसी भी ट्रेड के लिए कुल मार्जिन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा कैश या कैश इक्विवेलेंट के रूप में होना जरूरी है

    अब तक Zerodha ऐसे मामलों में ग्राहकों की कमी को अपने फंड से पूरा कर देता था और इसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं लेता था। लेकिन अब कंपनी इस सुविधा की लागत वसूल करेगी। यानी अगर कोई ट्रेडर पर्याप्त कैश मार्जिन नहीं रखता और ब्रोकर के फंड का इस्तेमाल करता है, तो उसे ₹40 प्रति ऑर्डर देना होगा

    हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का असर इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग पर नहीं पड़ेगा। यह बदलाव केवल F&O यानी डेरिवेटिव ट्रेडिंग तक सीमित रहेगा

    इस फैसले के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एक तरफ बाजार में पहले से ही डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम पर दबाव है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का प्रस्ताव भी लागत बढ़ाने वाला है। बजट 2026 में फ्यूचर्स पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने की बात कही गई है

    कंपनी के सह संस्थापक और सीईओ Nithin Kamath ने भी इस फैसले को जरूरी बताया है। उनका कहना है कि ग्राहकों के कोलेटरल में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और कंपनी को मार्जिन फंडिंग के लिए उधार लेना पड़ सकता है जिसकी लागत होती है। ऐसे में यह कदम कंपनी के लिए जरूरी हो गया था

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Zerodha का यह फैसला पूरे ब्रोकरेज इंडस्ट्री पर असर डाल सकता है। अगर दूसरे ब्रोकर भी इसी राह पर चलते हैं तो आने वाले समय में ट्रेडिंग और महंगी हो सकती है

    यह बदलाव उन ट्रेडर्स के लिए चेतावनी है जो ज्यादा लीवरेज लेकर ट्रेड करते हैं। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और पर्याप्त कैश मार्जिन रखना होगा वरना ट्रेडिंग की लागत सीधे दोगुनी हो जाएगी

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  • ₹5500 से ज्यादा महंगा हुआ सोना, चांदी में 12,000 रुपये से अधिक उछाल

    ₹5500 से ज्यादा महंगा हुआ सोना, चांदी में 12,000 रुपये से अधिक उछाल

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹5500 से ज्यादा महंगा हो गया, जबकि चांदी के दाम में 12,000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई।
    दूसरी तरफ इंटरनेशनल मार्केट सोना 2% से अधिक बढ़ गया। रॉयटर्स के मुताबिक बुधवार को नरम डॉलर, युद्ध खत्म होने के संकेतों, कच्चे तेल में कमजोरी के कारणसोना हाजिर 2.1% बढ़कर 4,568.29 डॉलर प्रति औंस हो गया। अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी सोना वायदा 3.8% बढ़कर 4,569.40 डॉलर हो गया। जबकि, हाजिर चांदी 3.8% बढ़कर 73.94 डॉलर प्रति औंस हो गई।
    युद्ध के बीच शांति की उम्मीद से सोने को सपोर्ट
    सोने की कीमतों में यह उछाल अमेरिका-ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरों के कारण आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि मध्य पूर्व युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जल्द ही हाई-लेवल शांति वार्ता हो सकती है, हालांकि ईरान की ओर से अभी अंतिम प्रतिक्रिया का इंतजार है। इस खबर ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया।
    तेल गिरा, डॉलर कमजोर, सोना मजबूत
    ब्लूमबर्ग के मुताबिक सोने की तेजी के पीछे एक और कारण है, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर का कमजोर होना।
    डॉलर इंडेक्स करीब 0.2% गिरा, जिससे सोना निवेशकों के लिए सस्ता और आकर्षक हो गया। दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ हफ्तों में सोना शेयर बाजार के साथ चल रहा था, जबकि तेल के साथ इसका उल्टा संबंध देखने को मिला।
    फिर भी खतरा बरकरार: युद्ध और महंगाई का दबाव

    हालांकि सोने में तेजी आई है, लेकिन बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर पकड़ बनाए रखी है और इजरायल के हमले जारी हैं। अमेरिका ने भी करीब 2,000 सैनिकों को मध्य पूर्व भेजने का फैसला किया है। ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण महंगाई का खतरा बढ़ गया है, जिससे ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं और यह सोने के लिए नकारात्मक संकेत है।

  • गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून

    गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून


    अहमदाबाद।
    गुजरात सरकार (Gujarat Government.) ने विधानसभा (Assembly) से समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code.- UCC) बिल 2026 पास हो गया है। इस विधेयक का मकसद शादी, तलाक और विरासत जैसे विषयों के लिए सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था करना है। उत्तराखंड के बाद गुजरात ऐसा करने वाला दूसरा राज्य बनेगा। यह कानून राज्य के निवासियों और बाहर रह रहे गुजरातियों पर लागू होगा लेकिन अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है। बिल की मुख्य बातों में बहुविवाह पर रोक और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शामिल है।


    यूसीसी वाला दूसरा राज्य होगा गुजरात

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक विधानसभा से पारित होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पारित किया था।


    एक हफ्ते पहले सौंपी थी रिपोर्ट

    गुजरात सरकार की ओर से नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने यूसीसी के क्रियान्वयन पर एक हफ्ते पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक यह प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा। यही नहीं गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले राज्य के निवासियों पर भी यह कानून प्रभावी होगा।


    समान कानूनी ढांचा तैयार करना है मकसद

    यह प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं। विधेयक का मकसद राज्य में समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।


    एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक

    इस विधेयक में लिव-इन के रजिस्ट्रेशन और औपचारिक घोषणा के माध्यम से उनके समापन का प्रावधान किया गया है। यह बिल एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक लगाता है। इस विधेयक के मुताबिक, इस कोड के तहत शादी तभी मान्य मानी जाएगी जब शादी के समय दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी ना हो।


    अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन

    इस विधेयक का सड़कों पर विरोध भी शुरू हो गया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल के विरोध में अहमदाबाद के लाल दरवाजे पर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। इस कानून के विरोध में AIMIM भी है। AIMIM के कार्यकर्ता भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।