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  • मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय

    मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय


    नई दिल्ली।उत्तर भारत के घरों में मकर संक्रांति आते ही रसोई की खुशबू कुछ खास हो जाती है। सर्दियों की ठंड में गाजर मटर गोभी और अलग-अलग दालों के मेल से बनी गरमागरम खिचड़ी न सिर्फ स्वाद देती है बल्कि शरीर और मन को भी सुकून पहुंचाती है। यह व्यंजन केवल परंपरा या पर्व से जुड़ा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी स्वास्थ्य समझ भी छिपी हुई है जिसे आज आधुनिक चिकित्सा भी स्वीकार करती है।जनवरी का महीना आमतौर पर ऐसा समय होता है जब लोग शादी-पार्टियों त्योहारों और भारी भोजन के बाद अपने शरीर को दोबारा संतुलन में लाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में शरीर अपने-आप हल्के सादे और आसानी से पचने वाले भोजन की मांग करता है। शायद यही कारण है कि इस मौसम में खिचड़ी सबसे ज्यादा पसंद की जाती है और यह हमें अंदर से ग्राउंडेड महसूस कराती है।

    इस विषय पर भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने आईएएनएस से बातचीत में खिचड़ी के स्वास्थ्य लाभों को सरल शब्दों में समझाया। उनका कहना है कि आजकल यह गलत धारणा बन गई है कि खिचड़ी सिर्फ बीमार लोगों या कमजोरी के समय खाई जाती है जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।डॉ. मीरा पाठक के अनुसार खिचड़ी एक टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है और इसे संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड्स का संतुलन होता है। दाल में मौजूद लाइसीन और चावल में पाए जाने वाले मिथिओनीन अमीनो एसिड मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं जो शरीर की मरम्मत और ऊर्जा के लिए बेहद जरूरी है।

    डिटॉक्स डाइट की बात करें तो खिचड़ी सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। डॉ. मीरा बताती हैं कि खिचड़ी पचाने में बेहद हल्की होती है और शरीर व दिमाग को एक तरह का सॉफ्ट रीसेट देती है। कुछ दिनों तक सिंपल और हल्का भोजन करने से आंतों लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है जिससे शरीर खुद को रिपेयर कर पाता है।खिचड़ी की एक और खासियत यह है कि यह धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करती है। इससे ब्लड शुगर लेवल में अचानक उछाल नहीं आता जो आजकल की जूस डाइट या ट्रेंडी डिटॉक्स ड्रिंक्स में आम समस्या है। डॉ. मीरा के मुताबिक जूस कोम्बुचा या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स की तुलना में खिचड़ी कहीं ज्यादा संतुलित और पोषण से भरपूर विकल्प है।

    इसके अलावा खिचड़ी में हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो शरीर की सूजन थकान और अंदरूनी टूट-फूट को ठीक करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इसे रिकवरी और बीमारी के समय दिया जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि यह सिर्फ बीमारों का खाना है।खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सटाइल प्रकृति है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स अलग-अलग दालें मौसमी सब्जियां पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ का प्रतीक है जिसे आज मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह समर्थन देता है।

  • हरियाणा में बंद होगा ‘हरिजन-गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश

    हरियाणा में बंद होगा ‘हरिजन-गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश


    नई दिल्ली। हरियाणा सरकार ने अब ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों के आधिकारिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी आधिकारिक पत्राचार, अभिलेख या संचार में इन शब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें। यह निर्णय संवैधानिक निर्देशों और भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, क्योंकि संविधान में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का प्रयोग ही स्वीकार्य है।
    इतिहास की बात करें तो महात्मा गांधी ने अनुसूचित जातियों के लिए ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसका अर्थ है ‘ईश्वर के लोग’। वहीं, बी.आर. आंबेडकर इसके विरोधी थे और वे इन्हें ‘दलित’ कहना पसंद करते थे। वर्तमान में यह शब्द कुछ विभागों और अधिकारियों द्वारा अब भी आधिकारिक संचार में उपयोग किया जा रहा था। इसी कारण राज्य सरकार ने सख्त निर्देश जारी कर सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पूर्ण पालन करने का आदेश दिया है।

    सरकारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अब से सभी आधिकारिक दस्तावेज, पत्राचार और संचार में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों का प्रयोग पूरी तरह निषिद्ध होगा।

    यह कदम केवल शब्दों पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

    हरियाणा सरकार का यह निर्णय समाज में समानता, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। अब राज्य के सभी विभाग और अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी भाषा और अभिव्यक्ति संवैधानिक और सम्मानजनक हो, जिससे किसी भी समुदाय की भावनाओं को आघात न पहुंचे।

    सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारत का संविधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को दर्शाने के लिए ‘हरिजन’ या ‘गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता।

    राज्य सरकार ने भारत सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। आदेश में यह भी कहा गया कि कुछ विभाग अभी तक इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे, इसलिए सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

    इस निर्णय से न केवल संवैधानिक सटीकता सुनिश्चित होगी, बल्कि समाज में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना भी मजबूत होगी। अब से सरकारी और आधिकारिक संचार में केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का ही प्रयोग किया जाएगा।

    हरियाणा सरकार का यह कदम समाज में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके माध्यम से राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संवेदनशील शब्दावली का उपयोग न हो और सभी वर्गों के लिए सम्मानजनक भाषा अपनाई जाए।

  • थोक महंगाई में बढ़ोतरी, लेकिन रोजमर्रा की खाने की वस्तुएं नहीं हुईं महंगी

    थोक महंगाई में बढ़ोतरी, लेकिन रोजमर्रा की खाने की वस्तुएं नहीं हुईं महंगी


    नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में थोक कीमतों पर आधारित भारत की महंगाई दर (WPI) 0.83 प्रतिशत रही। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में इजाफे के कारण हुई। खाने-पीने की चीजों की थोक कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, इसलिए खाद्य महंगाई दर शून्य प्रतिशत रही। इसका मतलब यह है कि पिछले साल की तुलना में खाने की चीजें महंगी नहीं हुईं, जिससे आम जनता को राहत मिली।

    विनिर्मित वस्तुओं और अन्य समूहों का असर
    थोक महंगाई में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के समूह का वजन 64.23 प्रतिशत है। दिसंबर में इस समूह की कीमतों में 0.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस समूह में शामिल 22 उत्पादों में से 13 की कीमतें बढ़ीं, 8 उत्पादों की कीमतें घटीं और एक उत्पाद की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से मूल धातुएं, रसायन और रासायनिक उत्पाद, वस्त्र और गैर-धातु खनिज उत्पादों में हुई।

    वहीं, रबर और प्लास्टिक उत्पाद, खाद्य उत्पाद, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सामान, कागज और पेय पदार्थों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

    पिछले महीनों का रुझान
    नवंबर 2025 में थोक महंगाई दर -0.32 प्रतिशत थी, जबकि अक्टूबर में यह -1.21 प्रतिशत रही थी। पिछले साल नवंबर में थोक महंगाई 2.16 प्रतिशत थी। दिसंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत रही, जो नवंबर के 0.71 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है।
    खाद्य महंगाई लगातार सातवें महीने नकारात्मक रही (-2.71 प्रतिशत), जिससे आम लोगों के घर के बजट को स्थिरता और राहत मिली।

    आरबीआई की प्रतिक्रिया और आर्थिक संकेत
    भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि महंगाई घटने के कारण रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई है, जो अब 5.25 प्रतिशत हो गई है।

    उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई में गिरावट ने भारत को एक खास ‘सुनहरा समय’ दिया है, जिसमें विकास और स्थिरता दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

    कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 में महंगाई नियंत्रण में रही, विनिर्मित वस्तुओं में मामूली बढ़ोतरी और खाद्य महंगाई में लगातार कमी ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखी। आम लोगों के लिए खर्च करने की क्षमता बढ़ी और RBI ने रेपो रेट में कटौती कर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया।

  • 2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, आम बजट से मिलेगी नीतिगत स्थिरता

    2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, आम बजट से मिलेगी नीतिगत स्थिरता


    नई दिल्ली। बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार पिछले सालों की स्थिरता के बाद अब 2026 में निवेशकों के लिए बेहतर अवसर पेश कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयरों के मूल्यांकन ठीक हैं, कंपनियों की कमाई को लेकर उम्मीदें यथार्थवादी हैं और देश की आर्थिक नींव मजबूत है। हालांकि, वैश्विक घटनाएं निवेशकों के लिए कभी-कभी अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं।


    मजबूत आर्थिक नींव और संतुलित बाजार

    स्मॉलकेस मैनेजर्स का कहना है कि भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति अभी भी मजबूत है। देश में नियंत्रित महंगाई, ब्याज दरों में कटौती, टैक्स में राहत और जीएसटी में छूट के कारण आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह कदम उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता बढ़ाएंगे और कर्ज लेना आसान बनाएंगे।

    सोनम श्रीवास्तव, राइट रिसर्च की संस्थापक, बताती हैं कि 2026 में बाजार 2025 की तुलना में ज्यादा संतुलित और सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि निवेश से मिलने वाला लाभ कंपनियों की कमाई पर आधारित होगा, न कि केवल शेयरों की कीमत बढ़ने पर।


    लार्ज, मिड और स्मॉल कैप शेयरों का परिदृश्य

    वेल्थट्रस्ट कैपिटल की स्मॉलकेस मैनेजर और सीईओ स्नेहा जैन के अनुसार, 2025 में मूल्यांकन में गिरावट के बाद अब लार्ज कैप कंपनियों के शेयर मिड और स्मॉल कैप से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। लार्ज कैप कंपनियों की बैलेंस शीट, कैश फ्लो और कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत है। इसलिए अगले 6 से 8 महीनों में ये निवेशकों के लिए अपेक्षा से अधिक आकर्षक साबित हो सकते हैं।

    स्नेहा जैन बताती हैं कि लार्ज कैप को ज्यादा मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में स्थिरता और मजबूत आधार देने के लिए रखना चाहिए। इसके अलावा, सरकार की राजकोषीय अनुशासन नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई सेक्टर को समर्थन, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की स्पष्टता, अल्पकालिक प्रोत्साहनों से ज्यादा अहम हैं।


    बजट और निवेशकों की भागीदारी

    प्राची देउस्कर, लोटसड्यू वेल्थ एंड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की सह-संस्थापक, कहती हैं कि आगामी केंद्रीय बजट बुनियादी ढांचे, औपचारिक अर्थव्यवस्था और वित्तीय अनुशासन से जुड़े कदम बढ़ाएगा। इससे घरेलू निवेशकों की वित्तीय भागीदारी बढ़ सकती है।

    एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए फाइनेंस तक आसान पहुंच, क्रेडिट गारंटी और उत्पादकता बढ़ाने व बाजार तक पहुंच को मजबूत करने वाले कदम भी देखने को मिल सकते हैं।


    निवेशकों के लिए सलाह

    विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में निवेश करने वाले निवेशकों को सोच-समझकर कंपनियों के कमाई के आधार पर शेयर चुनने चाहिए। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक नींव और संतुलित बाजार संभावनाओं को बढ़ा रहे हैं। निवेशकों के लिए यह साल लंबी अवधि के फायदे के लिहाज से अवसरपूर्ण साबित हो सकता है।

  • एक दिन के लिए दिल्ली-NCR के आसपास कहां घूमने जाएं? न ज्यादा खर्च न टाइम की झंझट



    नई दिल्ली। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनों के लिए वक्त निकाल पाना अपने आपमें एक बड़ी जंग है. ऑफिस से लंबी छुट्टी ले पाना कई लोगों के लिए बहुत मुश्किल होता है. लेकिन अगर आपको दिन की छुट्टी मिली है और आप कन्फ्यूज हैं कि इस एक दिन में आप अपने परिवार के साथ कहां जा सकते हैं, तो आपको हम 3 ऐसी जगहों के बारे में बताएंगे, जहां आप जा सकते हैं. इन सभी जगहों की यात्रा करना जेब पर भी कम भारी पड़ता है और साथ ही यह सभी जगहें दिल्ली के करीब में हैं.

    एक दिन की छुट्टी में कहां-कहां जा सकते हैं?
    हम जिन जगहों के बारे में बताएंगे, वहां जाना आसान भी हैं और परिवार व दोस्तों के साथ जाने में काफी मजा भी आएगा. इसी के साथ आप आराम से एकदिन में इन सभी जगहों की यात्रा कर वापस भी आ सकेंगे. तो चलिए जानते हैं कौन-कौनसी जगहें हैं इस लिस्ट में?

    दिल्ली के सबसे करीब अगर किसी टूरिस्ट प्लेस की बात हो तो सबसे पहले आगरा का नाम आता है. यहां मौजूद ताज महल (Taj Mahal) अपनी खूबसूरती से आपको इतिहास और मोहब्बत की एक शानदार झलक दिखाएगा. आप अपनी एक दिन की छुट्टी में यहां का एक छोटा ट्रिप प्लेन कर सकते हैं. इस ट्रिप के दौरान आप न सिर्फ ताज महल का दीदार कर सकेंगे, बल्कि आगरा के लाल किला और फतेहपुर सीकरी जैसे मशहूर प्लेसेस में अपनी फैमली और दोस्तो के साथ जा पाएंगे. इसी का साथ यहां स्थानीय खानपान आपको काफी पसंद आएगा.
    मथुरा-वृंदावन

    अगर आप अपनी एक दिन की छुट्टी को भगवान के करीब रहकर गुजारना चाहते हैं तो आप दिल्ली से 3-4 घंटे की दूरी में मौजूद मथुरा और Vrindavan जा सकते हैं. यहां की प्रचीन मंदिरें और वहां भक्ति और संस्कृति का अनोखा संगम आपके मन को न सिर्फ शांति देगा बल्कि एक यादगार सफर बनेगा.

    जयपुर भी बड़ा खास

    इन दोनों जगहों के अलावा आप Jaipur की भी यात्रा कर सकते हैं. 5-6 घंटे का सफर करके आप यहां मौजूद रंगीन बाजारों और महलों में जा सकते हैं और इतिहास को याद कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान का मशहूर खानपान आपको अपना दीवाना बना देगा.

  • Winter Skincare Routine: सर्दियों में सुबह चेहरे पर क्या लगाने से त्वचा मुलायम और सुंदर होती है? स्किनकेयर में ये चीजें सबसे असरदार

    Winter Skincare Routine: सर्दियों में सुबह चेहरे पर क्या लगाने से त्वचा मुलायम और सुंदर होती है? स्किनकेयर में ये चीजें सबसे असरदार

    नई दिल्ली। सर्दियों में चेहरे को चमकदार, मुलायम और सुंदर बनाए रखने के लिए उसकी एक्ट्रा केयर करने की जरूरत होती है। कुछ लोग सोने से पहले स्किन केयर करते हैं, तो कुछ सुबह उठते ही चेहरे पर निखार लाने के लिए रोजाना कुछ चीजें अप्लाई करते हैं। ऐसे में कई लोगों में यह कंफ्यूजन रहती है कि आखिरकार सर्दियों में सुबह चेहरे पर क्या लगाने से स्किन मुलायम और सुंदर होती है? साथ ही यह भी जानना चाहते हैं कि सर्दियों में स्किनकेयर में कौन सी चीजें सबसे ज्यादा असरदार होती हैं? ऐसे में अपनी स्किन के हिसाब से आप नेचुरल, हर्बल या स्किन केयर प्रॉडक्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं, आइए जानें इसके बारे में।

    सबसे पहले चेहरे को साफ करें
    सुबह उठने के बाद सबसे पहले चेहरे को पानी से साफ करें। पानी बहुत ज्यादा ठंडा या गर्म नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही Hydrating face wash यूज करें। इसके बाद चेहरे पर गुलाबजल का स्प्रे करें। गुलाबजल चेहरे पर लगाने से नेचुरल ग्लो आता है।

    Vitamin C Serum लगाएं
    स्किन को ब्राइट और टाइट बनाने के लिए आप सुबह चेहरा धोने के बाद Vitamin C Serum लगा सकते हैं। इससे दाग-धब्ददबे कम होते हैं। इसके बाद मॉइस्चराइज़र लगाएं। नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आप एलोवेरा जेल लगा सकते है। यह स्किन को अंदर से मॉइश्चराइज करता है। इसके उपयोग से स्किन सॉफ्ट भी बनी रहती है।
    Sunscreen लगाना सबसे जरूरी
    सर्दी के मौसम में अगर आप घर पर हैं तो ये न सोचें कि सनस्क्रीन लगाने की क्या जरूरत है। अपनी स्किन को लंबे समय तक जवान बनाए रखने के लिए आपको रोजाना इसे लगाना है। SPF 30–50 वाली सनस्क्रीन का चुनाव करें।

  • इंदौर में कोहराम पटेल ब्रिज के नीचे बस ने बाइक को मारी टक्कर आक्रोशित भीड़ ने बस को किया आग के हवाले

    इंदौर में कोहराम पटेल ब्रिज के नीचे बस ने बाइक को मारी टक्कर आक्रोशित भीड़ ने बस को किया आग के हवाले


    इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के व्यस्ततम इलाके पटेल ब्रिज के नीचे बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गईजब एक भीषण सड़क हादसे ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। शुक्ला ब्रदर्स की एक तेज रफ्तार यात्री बस ने एक बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दीजिसके बाद मौके पर मौजूद गुस्साई भीड़ ने कानून को हाथ में लेते हुए बस में आग लगा दी। देखते ही देखते बस आग के गोले में तब्दील हो गई और काले धुएं का गुबार पूरे आसमान में छा गया।

    टक्कर के बाद भड़का जन-आक्रोश यह घटना सुबह करीब 9:30 बजे की हैजब छोटी ग्वालटोली क्षेत्र में पटेल ब्रिज के नीचे यातायात का भारी दबाव था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसारशुक्ला ब्रदर्स की बस ने बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। गनीमत रही कि बाइक सवार को गंभीर चोटें नहीं आईंलेकिन इस हादसे ने वहां मौजूद लोगों के गुस्से को भड़का दिया। आरोप है कि चालक की लापरवाही से नाराज भीड़ ने बस को घेर लिया और उसमें आग लगा दी। आगजनी की आशंका इसलिए भी प्रबल है क्योंकि टक्कर के कुछ ही मिनटों बाद बस धू-धू कर जलने लगी थी।दमकल ने पाया काबूचालक मौके से फरार घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम और तुकोगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के सब इंस्पेक्टर शोभाराम मालवीय ने बताया कि आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि दूर से ही दिखाई दे रही थीं। दमकलकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए एक टैंकर पानी की मदद से आग पर काबू पायालेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। हैरानी की बात यह रही कि आग लगने के दौरान बस का चालक मौके पर नहीं मिला आशंका है कि वह भीड़ के डर से वाहन छोड़कर भाग खड़ा हुआ।

    पुलिस की पड़ताल: दुर्घटना या साजिश? तुकोगंज थाना प्रभारी जितेंद्र यादव ने बताया कि बाइक सवार को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया हैजहाँ उसकी हालत खतरे से बाहर है। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि बस में आग तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट से लगी या फिर इसे भीड़ ने जानबूझकर लगाया। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आगजनी करने वाले संदिग्धों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि यदि आगजनी की पुष्टि होती हैतो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यातायात हुआ बाधितलाखों का नुकसान ब्रिज के नीचे हुई इस घटना के कारण घंटों तक यातायात व्यवस्था चरमरा गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रूट को डायवर्ट किया और वैकल्पिक मार्गों से वाहनों को निकाला। इस अग्निकांड में बस पूरी तरह नष्ट हो गई हैजिससे बस ऑपरेटर को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। फिलहालपुलिस बस चालक की तलाश कर रही है और बाइक सवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

  • ICC ODI रैंकिंग 2026: विराट कोहली बने नंबर एक, रोहित शर्मा तीसरे स्थान पर खिसके, मिचेल ने लिया नंबर दो

    ICC ODI रैंकिंग 2026: विराट कोहली बने नंबर एक, रोहित शर्मा तीसरे स्थान पर खिसके, मिचेल ने लिया नंबर दो


    नई दिल्ली। आईसीसी ने 2026 की पहली वनडे रैंकिंग जारी की है, जिसमें भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर अपने शानदार फॉर्म का सबूत दिया है। साल के पहले ही मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ 93 रनों की दमदार पारी खेलकर कोहली ने अपनी रेटिंग 785 तक बढ़ा दी और लंबे 1403 दिनों बाद आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर एक बल्लेबाज बनने में सफल रहे। इस बदलाव के साथ ही न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल दूसरे नंबर पर हैं, जिनकी रेटिंग कोहली से केवल एक अंक कम यानी 784 है, जबकि रोहित शर्मा जो पहले शीर्ष स्थान पर थे, दो स्थान गिरकर तीसरे नंबर पर आ गए हैं।
    रोहित शर्मा ने साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड के खिलाफ 29 गेंदों में 26 रन बनाए, जो उनके उच्च मानक के अनुसार कम साबित हुआ और इसके कारण उनकी रेटिंग 775 तक गिर गई। कोहली की लगातार पांच मैचों में 50 या उससे अधिक रन की पारी ने उन्हें इस बार नंबर एक की कुर्सी पर पहुँचाया। इस रैंकिंग से साफ होता है कि कोहली ने लंबे समय के बाद अपनी सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजी छवि लौटाई है और उनकी निरंतरता ने उन्हें फिर से वनडे क्रिकेट के शीर्ष खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है।
    आईसीसी की यह नई रैंकिंग न केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन का संकेत देती है, बल्कि आगामी मैचों और सीरीज के लिए उनके मनोबल और टीम की रणनीति पर भी प्रभाव डालती है। आने वाले मैचों में कोहली, रोहित और मिचेल जैसे बल्लेबाजों के प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कोहली की यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए गर्व का विषय है और दर्शाती है कि वे अब भी दुनिया के टॉप बल्लेबाजों में अपनी जगह बनाए हुए हैं।
    इस रैंकिंग अपडेट ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह भर दिया है, वहीं रोहित शर्मा के लिए चुनौती और बढ़ गई है कि वे पुनः शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए अपने खेल में सुधार करें। ऐसे समय में जब भारत और न्यूजीलैंड की सीरीज जारी है, खिलाड़ियों का हर प्रदर्शन सीधे उनकी रेटिंग और रैंकिंग पर असर डाल रहा है। कोहली की वापसी नंबर एक पर उनकी मेहनत, अनुभव और निरंतर उच्च प्रदर्शन का परिणाम है, जो उन्हें भारतीय क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजी ताकत बनाता है।
  • सनातन धर्म की मुखर आवाज हर्षा रिछारिया का बड़ा फैसला, प्रचार कार्य से लिया पूर्ण विराम

    सनातन धर्म की मुखर आवाज हर्षा रिछारिया का बड़ा फैसला, प्रचार कार्य से लिया पूर्ण विराम


    ग्वालियर। अपनी ओजस्वी वाणी और प्रखर तर्कों के माध्यम से सोशल मीडिया पर सनातन धर्म का पक्ष रखने वाली चर्चित व्यक्तित्व हर्षा रिछारिया ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। हर्षा ने घोषणा की है कि वह अब सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के कार्यों से विराम ले रही हैं। लंबे समय से हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को युवाओं तक पहुँचाने में सक्रिय रहीं हर्षा के इस निर्णय ने उनके लाखों प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया है।

    अचानक लिए गए निर्णय के पीछे के संकेत हर्षा रिछारिया ने अपने आधिकारिक माध्यमों से जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह अब इस क्षेत्र से दूरी बना रही हैं। हालांकि उन्होंने इस फैसले के पीछे किसी एक विशिष्ट कारण का उल्लेख नहीं किया है लेकिन उनके इस कदम को उनके निजी जीवन और आत्ममंथन से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी इच्छा से यह विराम ले रही हैं और भविष्य में उनकी क्या योजनाएं हैं इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।

    सोशल मीडिया पर रहा है गहरा प्रभाव गौरतलब है कि हर्षा रिछारिया ने बहुत कम समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी। उनके वीडियो और वक्तव्य अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते थे जिनमें वे सनातन परंपराओं शास्त्रों और समसामयिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती थीं। उनके तर्कपूर्ण वीडियो के कारण ही वे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुईं। उनके इस विराम से उन लोगों में निराशा है जो उन्हें धर्म के एक सशक्त पक्षकार के रूप में देखते थे।

    क्या यह स्थाई विदाई है? हर्षा के इस फैसले के बाद इंटरनेट पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे उनकी निजी पसंद मान रहे हैं तो कुछ का मानना है कि वे किसी नए स्वरूप में वापसी कर सकती हैं। फिलहाल उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अभी किसी भी प्रकार के सार्वजनिक प्रचार कार्य का हिस्सा नहीं रहेंगी। उनके समर्थकों ने उनके इस निर्णय का सम्मान करते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की है।

  • भोपाल-इंदौर हाईवे पर बड़ा हादसा: भौरी जोड़ के पास 3-4 कारों की भिड़ंत, 6 से अधिक लोग घायल

    भोपाल-इंदौर हाईवे पर बड़ा हादसा: भौरी जोड़ के पास 3-4 कारों की भिड़ंत, 6 से अधिक लोग घायल


    भोपाल । भोपाल-इंदौर हाईवे पर मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भौरी जोड़ के पास तीन से चार कारों की आपस में जोरदार टक्कर हो गई, जिसमें 6 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसा इतना भीषण था कि कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और हाईवे पर कुछ समय के लिए ट्रैफिक पूरी तरह से ठप हो गया।
    घायलों को तुरंत घटनास्थल से एम्बुलेंस द्वारा नजदीकी अस्पताल भेजा गया जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की। घटना के बाद पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट किया जिससे सड़क पर लंबा जाम लग गया। पुलिस द्वारा स्थिति को नियंत्रित किया गया और यातायात को पुनः बहाल किया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह हादसा तेज रफ्तार या लेन बदलने की कोशिश के कारण हुआ हो सकता है। हालांकि पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है कि क्या हादसे का कारण ओवरस्पीडिंग लापरवाही या कोई अन्य वजह थी। हाईवे पर इस तरह के हादसे से यातायात प्रभावित होने के अलावा दुर्घटना में घायलों की बढ़ती संख्या ने सुरक्षा के मुद्दे को भी उजागर किया है। पुलिस और प्रशासन अब हादसे के कारणों का पता लगाने और भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए जरूरी कदम उठाने की योजना बना रहे हैं।