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  • कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत

    कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत


    नई दिल्ली।
    रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों (Public sector Refineries) द्वारा कच्चे तेल के आयात (Crude oil Imports) में भारी कटौती (Significant Reduction ) के बाद दिसंबर 2025 में रूस से इस ईंधन को खरीदने के मामले में भारत तीसरे स्थान पर आ गया है। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इसके अनुसार भारत द्वारा रूस से कुल हाइड्रोकार्बन आयात दिसंबर में 2.3 अरब यूरो रहा, जो पिछले महीने के 3.3 अरब यूरो से कम है।

    रिपोर्ट में कहा गया, तुर्की भारत को पीछे छोड़ते हुए दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया, जिसने रूस से दिसंबर में 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे। चीन शीर्ष खरीदार बना रहा, जिसकी रूस के शीर्ष पांच आयातकों से होने वाली निर्यात आय में 48 प्रतिशत (छह अरब यूरो) की हिस्सेदारी रही।

    सीआरईए ने कहा कि भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में मासिक आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई। रिपोर्ट के अनुसार इस कटौती की मुख्य वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी रही, जिसने दिसंबर में रूस से अपने आयात को आधा कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने भी दिसंबर में रूसी आयात में 15 प्रतिशत की कटौती की।


    तेल की कीमतें प्रभावित होने के आसार नहीं

    क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को कहा कि वेनेजुएला के हालिया घटनाक्रमों से कच्चे तेल की कीमतों पर निकट भविष्य में कोई ठोस प्रभाव पड़ने के आसार नहीं है क्योंकि वैश्विक आपूर्ति में इस लातिन अमेरिकी देश की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत बेहद कम है।

    वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में इस देश की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के दिनों में काफी हद तक स्थिर रही हैं जो 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ठीक ऊपर बनी हुई हैं। भारत के संदर्भ में, वेनेजुएला से होने वाला आयात भारत के कुल आयात का 0.25 प्रतिशत से भी कम है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए लगभग 14,000 करोड़ रुपये के आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक थी।

  • SC का बड़ा फैसला…. ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी अधिकार

    SC का बड़ा फैसला…. ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी अधिकार


    नई दिल्ली।
    विधवा महिलाओं (Widowed women) के हक में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण पोषण अधिनियम 1956 (Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956) के तहत ससुर की मौत के बाद विधवा बहू भी उनकी संपत्ति से मेंटिनेंस का दावा कर सकती है। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने दीवानी अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस ऐक्ट की धारा 21 (VII) में विधवा बहू को भी शामिल किया गया है। पति की मौत ससुर की मौत से पहले हुई हो या बाद में, विधवा बहू उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की हकदार है।


    क्या है पूरा मामला

    यह मामला डॉ. महेंद्र प्रसाद के वारिसों के बीच का था जिनकी दिसंबर 2021 को मौत हो गई थी। डॉ. महेंद्र प्रसाद की बहू गीता शर्मा उनकी संपत्ति से भरण पोषण की मांग कर रही थी। उनके पति की मौत 2023 में हो गई थी। फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए मेंटनिनेंस दिलाने से इनकार कर दिया था कि ससुर की मौत के समय उनके पति जीवित थे। हालांकि हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट को आदेश दिया कि उनकी जरूरत के हिसाब से मेंटिनेंस का निर्देश दे। हाई कोर्ट के आदेश को परिवार के बाकी सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इन सदस्यों में डॉ. प्रसाद के दूसरे बेटे की विधवा बहू और लंबे समय तक लिवइन पार्टनर के रूप में रहने का दावा करने वाली महिला भी शामिल है।

    इस कानून के सेक्शन 21 में डिपेंडेंट्स के बारे में बताया गया है। इसके सब सेक्शन VIII में कहा गया है कि किसी शख्स के बेटे की विधवा भी उसकी संपत्ति से मेंटिनें की हकदार है, जब तक कि वह दूसरा विवाह नहीं करती है। इसके लिए शर्त है कि वह पति की संपत्ति या अपने पुत्र या पुत्री की संपत्ति से भरण पोषण प्राप्त करने में असमर्थ होनी चाहिए।

  • पाक-चीन की कारस्तानी पर भड़के लद्दाख के LG, बोले- ये 1962 नहीं, खुद हो जाएगा टुकड़े-टुकड़े

    पाक-चीन की कारस्तानी पर भड़के लद्दाख के LG, बोले- ये 1962 नहीं, खुद हो जाएगा टुकड़े-टुकड़े


    जम्मू
    । लद्दाख (Ladakh) के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता (Lieutenant Governor Kavinder Gupta) ने मंगलवार को शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) का पूरा क्षेत्र भारत का है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विस्तारवादी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शक्सगाम घाटी में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए चीन की आलोचना करते हुए गुप्ता ने कहा है कि यह इलाका भारत का हिस्सा है और ऐसी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए। भारत की आपत्तियों के मद्देनजर, चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहराते हुए जोर दिया कि इस क्षेत्र में चीनी अवसंरचना परियोजनाएं ‘संदेह से परे’ हैं।

    गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग भी भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं और जल्द ही पाकिस्तान ‘खुद टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा’। जम्मू में उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘पूरा कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से समेत) हमारा है। हमें नहीं पता कि पाकिस्तान ने चीन के साथ क्या सौदा किया है। चीन को यह समझना चाहिए कि उसकी विस्तारवादी नीति से कुछ भी हासिल नहीं होगा। भारत सक्षम है। यह 1962 का भारत नहीं, 2026 का भारत है। ऐसे किसी भी प्रयास को विफल कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय इसका संज्ञान ले रहा है।’’


    पहले से हम ज्यादा मजबूत, ये बात समझ ले चीन

    गुप्ता ने कहा कि ऐसे किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चीन को यह समझना होगा कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने पहले अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर भी दावा किया था। पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए राज्यपाल ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश अपने ही लोगों को छल चुका है और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है।


    बेचा जा रहा पाकिस्तान

    गुप्ता ने कहा, “पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे बेचा जा रहा है। उसे अपनी संप्रभुता या अपने लोगों की कोई परवाह नहीं है। बलूचिस्तान, सिंध और कराची में आवाजें उठ रही हैं और वहां पाकिस्तानी सेना द्वारा अत्याचार किए जा रहे हैं। उन क्षेत्रों पर वस्तुतः सेना का ही शासन है।’’ गुप्ता ने संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ बयानों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि पीओके पर संसद का स्पष्ट रुख है।


    ऐसे बयान नहीं दें जो भड़काऊ हो

    उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए जो भड़काऊ प्रकृति के हों। 1994 का एक संसदीय प्रस्ताव है जो स्पष्ट रूप से कहता है कि पूरा पीओके भारत का है।’’ सेना प्रमुख के हालिया बयान (जिसमें कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है) पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने कहा कि सशस्त्र बलों को पूर्ण राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश सेना के साथ खड़ा है। सेना प्रमुख ने एक जिम्मेदार बयान दिया है और मैं इसका स्वागत करता हूं।’’ पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से शक्सगाम घाटी में स्थित 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया था, जिसे उसने अवैध रूप से कब्जा करके हासिल किया था।

  • इस तरह की तुच्छ याचिका का कोई तुक नहीं… SC ने पूर्व अधिकारी को लगाई फटकार

    इस तरह की तुच्छ याचिका का कोई तुक नहीं… SC ने पूर्व अधिकारी को लगाई फटकार


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को संसद और अन्य सार्वजनिक स्थानों से विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) के चित्रों को हटाने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले पूर्व अधिकारी (Former officer) को याचिका वापस लेने की अनुमति देने से पहले भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। SC ने कहा कि इस तरह की याचिका का कोई तुक नहीं बनता।

    मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने सेवानिवृत्त भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी बी बालमुरुगन को इस तरह की याचिका दायर करने के प्रति चेतावनी दी और कहा कि अदालत का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इस तरह की तुच्छ याचिका… मानसिकता दर्शाती है।’’


    ‘आप खुद को क्या समझते हैं?

    वहीं पीठ याचिकाकर्ता के इस निवेदन से भी नाराज थी कि वह वित्तीय बाधाओं के कारण व्यक्तिगत रूप से मामले की बहस करने नहीं आ सकते। मुख्य न्यायाधीश ने फटकार लगाते हुए कहा, ‘‘आप आईआरएस अधिकारी थे। आप दिल्ली आकर खुद पेश हो सकते हैं और बहस कर सकते हैं। हम आप पर भारी जुर्माना लगाना चाहेंगे। आप खुद को क्या समझते हैं?’’

    याचिका में क्या?
    बता दें कि बालमुरुगन ने अपनी जनहित याचिका में संसद के केंद्रीय कक्ष और अन्य सार्वजनिक स्थानों से सावरकर के चित्रों को हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। इसके अलावा याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि सरकार हत्या या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों जैसे जघन्य अपराधों के लिए आरोपित व्यक्तियों को तब तक सम्मानित न करे जब तक कि वे बरी ना हो जाएं।

    समाज में कुछ रचनात्मक भूमिका निभाएं- SC
    याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह मामला आगे बढ़ाना चाहते हैं या वापस लेना चाहते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘‘कृपया इन सब झंझटों में ना पड़ें। अब अपनी सेवानिवृत्ति का आनंद लें। समाज में कुछ रचनात्मक भूमिका निभाएं।’’ इसके बाद परिणाम को भांपते हुए बालमुरुगन ने याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

  • इस बार दो दिन मनेगी मकर संक्रांति…. पूजन आज और खिचड़ी का दान का शुभ महूर्त कल

    इस बार दो दिन मनेगी मकर संक्रांति…. पूजन आज और खिचड़ी का दान का शुभ महूर्त कल


    नई दिल्ली।
    मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्योहार इस बार दो दिन मनाया जाएगा। पहले दिन यानी आज बुधवार को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे साथ ही षटतिला एकादशी का शुभ संयोग भी बनेगा। तिथि को लेकर भ्रम दूर करते हुए ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत ने बताया कि संक्रांति का पूजन और व्रत 14 जनवरी को श्रेष्ठ रहेगा। खिचड़ी का दान 15 जनवरी को करना शास्त्र सम्मत होगा।


    दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल

    ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार, 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल प्रारंभ होगा, जो शाम 5:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान सूर्य पूजन, तिल-गुड़ का दान और भगवान विष्णु की आराधना श्रेष्ठ मानी गई है।


    सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा

    ज्योतिषाचार्य रुचि कपूर के अनुसार 14 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। इसी दिन खरमास की समाप्ति होगी और शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।


    14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित

    एकादशी के कारण 14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित रहेगा। प्रेरणा ज्योतिष अनुसंधान अध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बताया कि एकादशी तिथि 14 जनवरी को शाम 5:53 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद द्वादशी प्रारंभ होगी। ऐसे में श्रद्धालु संध्या के बाद दान कर सकते हैं, लेकिन 15 जनवरी की सुबह खिचड़ी दान करना उचित रहेगा। ज्योतिष अन्वेषक अमित गुप्ता भी इसी उपाय को अपनाने की सलाह देते हैं।


    मकर संक्रांति को उत्तरायण शुरू

    ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य एक राशि में एक माह तक गोचर करते हैं, फिर अगली राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य 12 राशियों के राशि चक्र को एक वर्ष में पूरा करते हैं। सूर्य जब भी एक राशि से निकलकर दूसरी में प्रवेश करते हैं इसे संक्रांति कहा जाता है। एक वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन इनमें मकर संक्रांति सबसे ज्यादा महत्व रखने वाली है। सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति को उत्तरायण शुरू होने से दिन बड़ा होने लगता है।

  • वॉशिंगटन में ईरान पर बन रहा खतरनाक प्लान, जानिए रजा पहलवी का ट्वीट

    वॉशिंगटन में ईरान पर बन रहा खतरनाक प्लान, जानिए रजा पहलवी का ट्वीट


    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान ने यदि प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की तो हम सैन्य हस्तक्षेप करेंगे।
    उन्होंने मंगलवार को ईरानी लोगों से अपील की और कहा कि वे प्रदर्शन करना जारी रखें। ईरान की सरकार के आगे झुकने की कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोगों को अपने संस्थानों पर कब्जा जमा लेना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को मारने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस तरह ईरान के लोगों को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं। एक तरफ वह प्रदर्शनकारियों से हर हाल में डटे रहने को कह रहे हैं तो वहीं सख्ती करने पर ईरान में हमले की धमकी भी दे रहे हैं।

    ऐसे ही सुर ईरान के विपक्षी नेता और दशकों से देश से बाहर बसे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के बोल भी डोनाल्ड ट्रंप जैसे ही हैं। एक तरफ ट्रंप ने अपील की है, ‘देशभक्त ईरानी आंदोलन करते रहें। आप अपने संस्थानों को कब्जे में लें। हत्यारों के नाम नोट कर लें। उन्हें बड़ी कीमत चुकानी होगी। मैंने ईरान के अधिकारियों से तब तक सारी मीटिंग कैंसिल कर दी हैं, जब तक कि बेगुनाह आंदोलनकारियों के कत्ल नहीं रुक जाते।’ वहीं दूसरी तरफ रजा पहलवी भी इसी अंदाज में ईरान के लोगों को उकसा रहे हैं।
    रजा पहलवी का ट्वीट- दुनिया सुन रही है आपकी आवाज
    रजा पहलवी ने ट्वीट किया, ‘मेरे साथियों। दुनिया आपकी आवाज सुन रही है और आपके साहस को देख रही है। आपने राष्ट्रपति ट्रंप की बात सुनी ही होगी। उनका कहना है कि मदद रास्ते में है।

    आप संघर्ष जारी रखिए, जैसा आप करते आए हैं। आप इस शासन को यह भ्रम पैदा ना कर दें कि ईरान में जिंदगी सामान्य है और पटरी पर है। यह नरसंहार की स्थिति है और ऐसा करने वालों को सजा दी जाएगी। इसके अलावा मेरा ईरान की सेना के लिए भी संदेश है। आप ईरान की राष्ट्रीय सेना हैं। आप इस्लामिक रिपब्लिक की आर्मी नहीं हैं। आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने देश के लोगों को बचाएं। आपके पास ज्यादा समय नहीं है और हम आपके साथ जल्दी ही जुड़ने वाले हैं।’
    आखिर वॉशिंगटन में ईरान पर बन रहा क्या प्लान
    इस तरह ट्रंप से लेकर रजा पहलवी तक दोनों की भाषा एक ही है।
    जानकारों का मानना है कि अमेरिका की ओर से ऐसा प्रचारित करने का प्रयास किया जा रहा है कि ईरान में बेगुनाह लोगों को मारा जा रहा है। ऐसे में उनकी रक्षा के लिए हम दखल रहे हैं। यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप और रजा पहलवी एक ही भाषा बोल रहे हैं। बता दें कि रजा पहलवी दशकों से अमेरिकी समर्थन से ही ईरान से बाहर रह रहे हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका को यह सही वक्त लग रहा है कि ईरान के अयातुल्लाह अली खामेनेई शासन को हटाकर रजा पहलवी को गद्दी पर बिठाया जा सकता है। यही अमेरिका की रणनीति है और इसी लिहाज से बयान भी दिए जा रहे हैं ताकि माहौल तैयार हो सके।
  • भारत की नदी में बहता था हीरा… इतना खजाना कि डच-ब्रिटिश हो गए मालामाल

    भारत की नदी में बहता था हीरा… इतना खजाना कि डच-ब्रिटिश हो गए मालामाल

    नई दिल्‍ली। भारत को सोने की चीड़िया कहा जाता था, पर क्या आपको पता है कि, इसी सोने की चीड़िया जैसे देश में एक ऐसी नदी थी जहां हीरे बहा करते थे. आज हम आपको भारत में बहने वाली हीरों के नदी के बारे में बताएंगे. कहा जाता है ये नदी जहां बहती है वहां समृद्धियों के स्रोत का कभी अंत नहीं हुआ. इस नदी और इसके आस-पास से निकालें हीरे, पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन माने जाते थे.

    हीरे की खानों की वजह से मिला नाम
    यह उपनाम नदी के पानी या बहाव के कारण नहीं बल्कि उसके आसपास के इलाके में हीरे की खानें और खनन के क्षेत्र होने की वजह से यह मिला था. सदियों तक कृष्णा नदी और उसके आसपास के इलाके दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक हीरा उत्पादक क्षेत्र रहे थे. व्यापारी, यात्री और शासक इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होते थे. इसने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया बल्कि भारत के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव को भी दूर-दराज के देशों तक पहुंचाने का काम करवाया था.
    कृष्णा नदी के किनारे खासतौर पर गोलकोंडा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से हीरे के लिए प्रसिद्ध था. गोलकोंडा के हीरे अपनी चमक, आकार और शुद्धता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थे.

    माना जाता है कि कोह-ए-नूर, होप डायमंड और दरिया-ए-नूर जैसे प्रसिद्ध हीरे इसी क्षेत्र से निकले थे. इन हीरों ने भारत को कई शताब्दियों तक दुनिया का प्रमुख हीरा स्रोत बनाए रखा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी ख्याति बढ़ाई थी.

    1,300 किलोमीटर लंबी नदी
    भूगोल की दृष्टि से कृष्णा नदी महाराष्ट्र के महाबलेश्वर के पास पश्चिमी घाट से निकलती है. यह नदी महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर बंगाल की खाड़ी में मिलती है. लगभग 1,300 किलोमीटर लंबी यह नदी कृषि, बस्तियों और व्यापार के लिए उपजाऊ बेसिन प्रदान करती रही है. यही वजह है कि हीरा व्यापार से जुड़े क्षेत्रों की समृद्धि में इसका बड़ा योगदान रहा है.

    गोलकोंडा केवल एक किला या खदान नहीं था बल्कि कृष्णा के ईलाकों से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापार केंद्र था. मध्यकाल में यहां से निकले हीरे भारत के पूर्वी तट के बंदरगाहों के जरिए एशिया,

    मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचते थे. डच, ब्रिटिश और अन्य यूरोपीय व्यापारी इन कीमती पत्थरों तक पहुंच बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहते थे. 18वीं शताब्दी में ब्राजील में हीरे की खोज से पहले तक भारत दुनिया का प्रमुख हीरा स्रोत माना जाता था.
  • मुस्लिम देश ने US को किया होशियार, ईरान पर किया हमला तो अंजाम…

    मुस्लिम देश ने US को किया होशियार, ईरान पर किया हमला तो अंजाम…


    तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच दूसरे पश्चिमी एशियाई देश कतर ने मंगलवार (13 जनवरी) को अमेरिका को आगाह किया है कि अगर उसने पड़ोसी देश ईरान पर हमला किया तो वह विनाशकारी होगा। दोहा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने दो टूक कहा, “हम जानते हैं कि कोई भी तनाव… क्षेत्र और उससे बाहर विनाशकारी परिणाम देगा और इसलिए हम इससे जितना हो सके बचना चाहते हैं।” लगे हाथ कतर ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच कोई भी तनाव क्षेत्र के लिए ‘विनाशकारी’ होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के क्षेत्र के लिए गंभीर परिणाम ला सकते हैं। उन्होंने ये बातें वॉशिंगटन द्वारा इस्लामिक गणराज्य में विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई के जवाब में हमले की धमकी देने के बाद कही है।
    दरअसल, पिछले साल जून में जब अमेरिका ने ईरानी परमाणु सुविधा केंद्रों पर हमले किए थे, तब इन हमलों के जवाब में ईरान ने कतर में संयुक्त राज्य अमेरिका के अल उदीद सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था। तब दोहा ने अपने क्षेत्र पर हुए इस अभूतपूर्व हमले का फायदा उठाकर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जल्द ही युद्धविराम कराने में मदद की थी। कतर को डर है कि अगर अमेरिका ने फिर से ईरान पर हमला किया तो ईरान अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने के लिए कतर पर हमला कर सकता है।
    विरोध-प्रदर्शन की आग में झुलस रहा ईरान
    बता दें कि ईरान इस वक्त विरोध-प्रदर्शन की आग में झुलस रहा है। इन हिंसक प्रदर्शनों में अब तक वहां 2000 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सुरक्षाकर्मी और आमजन शामिल हैं। इस बीच, व्हाइट हाउस ने सोमवार को दोहराया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकने के लिए ईरान पर हवाई हमले करने पर विचार कर रहे हैं।
    ईरान भी पलटवार करेगा

    दूसरी तरफ, ईरान में दखल देने की ट्रंप की बार-बार की धमकियों के जवाब में, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि ईरान भी पलटवार करेगा। उन्होंने सरकारी टीवी द्वारा प्रसारित एक संदेश में कहा कि अमेरिकी सेना और शिपिंग ईरान के ‘वैध लक्ष्य’ होंगे। इस संदेश के बाद से इलाके में न सिर्फ तनाव गहरा गया है बल्कि युद्ध के हालात बने हुए हैं।

    इस बीच, वाशिंगटन ने यह भी कहा है कि कूटनीति के लिए रास्ता खुला है,लेकिन ईरान ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ निजी चर्चाओं में “काफी अलग लहजा” अपनाया है।
    कूटनीतिक समाधान निकल सकता है

    कुवैत विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अंसारी ने कहा, “हम अभी भी ऐसी स्थिति में हैं, जहां हमारा मानना ​​है कि इससे कूटनीतिक समाधान निकल सकता है।” उन्होंने कहा, “हम सभी पक्षों से बात करने में शामिल हैं, जाहिर है कि अपने पड़ोसियों और क्षेत्र में अपने भागीदारों के साथ एक कूटनीतिक समाधान खोजना चाहते हैं।” इस बीच, नॉर्वे स्थित एनजीओ ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने कहा कि उसने पुष्टि की है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान 648 लोग मारे गए, जिनमें नौ नाबालिग शामिल हैं, लेकिन चेतावनी दी कि मरने वालों की संख्या शायद बहुत अधिक है – “कुछ अनुमानों के अनुसार यह संख्या 6,000 से अधिक है।

  • रूस ने यूक्रेन पर फिर ढाया कहर; पावरग्रिड पर मिसाइलों से हमला

    रूस ने यूक्रेन पर फिर ढाया कहर; पावरग्रिड पर मिसाइलों से हमला

    कीव । रूस ने यूक्रेन पर एक और हमला बोला है। चार दिनों के अंदर यह यूक्रेन पर चौथा बड़ा ड्रोन हमला है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इस बार भी पावर ग्रिड पर निशाना लगाया गया। इन हमलों से अमेरिका द्वारा रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बंद कराने के प्रयासों को भी ठेस पहुंची है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच करीब चार साल से युद्ध जारी है।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि रूस ने करीब 300 ड्रोन, 18 बैलेस्टिक मिसाइल और सात क्रूज मिसाइल से हमला बोला है। रात भर चला यह हमला आठ क्षेत्रों पर हुआ। इसमें उत्तर पूर्व खारकीव में एक मेल डिपो में चार लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा कीव क्षेत्र में सैकड़ों घर अंधेरे में डूब गए। यूक्रेन की राजधानी में इन दिनों भीषण ठंड पड़ रही है। यहां पर दिन का तापमान माइनस 12 डिग्री सेल्सियस है।

    गलियां बर्फ से ढंकी हुई हैं और जेनरेटरों के शोर से शहर का बुरा हाल है।

    कई आवासीय भवनों को नुकसान
    स्थानीय अधिकारियों मुताबिक रूसी हमलों में यूक्रेन के खारकीव क्षेत्र में, 10 लोग घायल हुए। वहीं, दक्षिणी शहर ओडेसा में, छह लोग घायल हुए। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेह किपर ने कहा कि हमलों ने एनर्जी ग्रिड, एक अस्पताल, एक किंडरगार्टन, एक शैक्षिक संस्थान और कई आवासीय भवनों को नुकसान पहुंचाया। रूसी हमलों ने भीषण ठंड में यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रूस द्वारा पावर ग्रिड पर हमले से बिजली और पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। रूस चाहता है कि यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ाकर वह युद्ध में बढ़त हासिल कर ले। वहीं यूक्रेनी अधिकारियों ने इस रणनीति को सर्दी को हथियार बनाने की रणनीति बताया है।

    चार दिन पहले भी निशाना
    चार दिन पहले रूस ने यूक्रेन पर सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइल से बड़ा हमला किया था। इस युद्ध में सिर्फ दूसरी बार ऐसा हुआ जब ताकतवर हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया।

    पश्चिमी यू्क्रेन पर हुए इस हमले के जरिए रूस ने यू्क्रेन के नाटो सहयोगियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि पीछे हटने वाला नहीं है। सोमवार को ही अमेरिका ने रूस पर आरोप लगाया है कि वह युद्ध को गैरजरूरी ढंग से भड़का रहा है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस कोशिश में जुटे हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बंद हो जाए।
  • कनाडा में एयरपोर्ट से 400 किलो सोना उड़ा ले गए थे चोर, एक गिरफ्तार

    कनाडा में एयरपोर्ट से 400 किलो सोना उड़ा ले गए थे चोर, एक गिरफ्तार

    नई दिल्‍ली। कनाडा में हुए अब तक के सबसे बड़े गोल्ड हाइस्ट मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कनाडा के पील रीजन की पुलिस ने बताया है कि करीब 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के सोने की चोरी से जुड़े मामले में 43 साल के अरसलान चौधरी को गिरफ्तार किया लिया गया है। बता दें को यह मामला 2023 के प्रोजेक्ट 24K से जुड़ा है, जब चोरों ने करीब 400 किलो सोना चुराकर पूरी दुनिया में सनसनी मचा दी थी।
    दरअसल 17 अप्रैल 2023 को एक फ्लाइट स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख से टोरंटो पहुंची थी। इस फ्लाइट में करीब 400 किलो शुद्ध सोना लाया गया था, जिसकी कीमत 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा थी। इसके साथ ही करीब 2.5 मिलियन डॉलर की विदेशी करेंसी भी थी। सोने की यह खेप एयरपोर्ट से उतारकर एक अलग जगह ले जाई गई।
    हालांकि कुछ ही घंटों बाद इसके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

    इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और अब तक इस मामले में 10 लोगों की पहचान कर उन्हें आरोपी बनाया गया है। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है। पुलिस ने अरसलान चौधरी पर भी 5,000 डॉलर से ज्यादा की चोरी, अपराध से हासिल संपत्ति रखने और गंभीर अपराध की साजिश रचने के आरोप लगाए हैं और सोमवार को उसे टोरंटो के पियर्सन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया।
    एक आरोपी भारत में?

    इन आरोपियों में 33 साल का सिमरन प्रीत पनेसर भी शामिल है, जो ब्रैम्पटन का रहने वाला है और पहले एयर कनाडा में काम करता था। पुलिस का कहना है कि पनेसर ने एयरलाइन सिस्टम में हेरफेर कर सोने की खेप को डायवर्ट करने में मदद की थी।

    पुलिस को शक है कि वह इस समय भारत में है। पिछले साल उसे चंडीगढ़ के बाहरी इलाके में एक किराए के फ्लैट में ट्रेस किया गया था। उसके खिलाफ पूरे कनाडा में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
    अब तक कई गिरफ्तार

    इस मामले में एक अन्य आरोपी आर्चित ग्रोवर को मई 2024 में टोरंटो एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था, जब वह भारत से लौट रहा था। अब तक गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में ओंटारियो के रहने वाले पूर्व एयर कनाडा कर्मचारी परमपाल सिद्धू और अमित जलोटा भी शामिल हैं। इसके अलावा ब्रैम्पटन के प्रसाथ परमलिंगम और टोरंटो के अली रजा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। ब्रैम्पटन के ही अम्मद चौधरी और 27 साल के दौराने किंग मैकलीन को भी हिरासत में लिया गया है। किंग मैकलीन इस समय अमेरिका में हथियारों की तस्करी से जुड़े मामले में जेल में है।