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  • कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की

    कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की


    नई दिल्ली । अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खुदरा व्यापारियों के हितों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। कैट का कहना है कि बजट में खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए और साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि व्यापारियों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े।
    कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक सीट से लोकसभा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को बताया कि संगठन ने वित्त मंत्री के समक्ष कुछ प्रमुख सुझाव रखे हैं। इन सुझावों में व्यापार के लिए सम्मान सरलता सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करने की बात की गई है। खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है जिनमें “आत्मनिर्भर भारत” “मेक इन इंडिया” “डिजिटल इंडिया” और “लोकल के लिए वोकल” जैसे अभियानों ने देश के व्यापारिक वातावरण को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अब आगामी बजट में इन पहलों को और भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि व्यापारियों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।

    सस्ते ऋण की आवश्यकता
    कैट ने यह स्पष्ट किया है कि खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की उपलब्धता व्यापार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वर्तमान में व्यापारियों को उच्च ब्याज दरों पर ऋण मिलता है जिससे उनके लिए व्यापार में वृद्धि करना और नई चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो जाता है। अगर सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है तो छोटे और मंझले व्यापारी अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से चला सकते हैं जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके अलावा व्यापारियों को ऋण के लिए कागजी प्रक्रिया में भी सरलता की आवश्यकता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि ऋण लेने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि व्यापारी समय और श्रम की बचत कर सकें और अपने व्यापार को गति दे सकें।
    ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की आवश्यकता
    कैट ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर बेईमानी से प्रतिस्पर्धा की वजह से खुदरा व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े पैमाने पर डिस्काउंट और भारी प्रमोशन करती हैं जिनका छोटे व्यापारियों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह अनुरोध किया कि ई-कॉमर्स के नियमों को सख्त किया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि यह प्लेटफॉर्म्स खुदरा व्यापारियों के लिए एक समान अवसर प्रदान करें न कि उन्हें नुकसान पहुँचाए। कैट का कहना है कि इन अनुचित प्रतिस्पर्धाओं के कारण खुदरा व्यापारियों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि उनका सम्मान भी प्रभावित हो रहा है। यदि ई-कॉमर्स कंपनियों को नियंत्रित किया जाता है तो पारदर्शिता और समता को बढ़ावा मिलेगा जिससे सभी व्यापारी एक समान तरीके से व्यापार कर सकेंगे।

    सरकारी पहलों का महत्व
    प्रवीन खंडेलवाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत छोटे और मंझले व्यापारियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए कई अवसर दिए गए हैं। वहीं मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों ने भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन पहलों को और भी मजबूत किया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों को अधिक प्रोत्साहन मिले और वे वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
    कैट का यह सुझाव है कि आगामी बजट में छोटे और मंझले खुदरा व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण भी सुनिश्चित किया जाए। यह कदम न केवल व्यापारियों के लिए अवसर पैदा करेगा बल्कि भारत के समग्र व्यापारिक वातावरण को भी एक नई दिशा दे सकता है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को और भी सशक्त किया जाए ताकि देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र में संतुलन बना रहे और छोटे व्यापारियों को भी समान अवसर प्राप्त हो सकें।

  • रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    नई दिल्ली। सोमवार को ऐतिहासिक ऊंचाई छूने के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी ने गिरावट से उबरते हुए मजबूती दिखाई।

    एमसीएक्स पर सोना कमजोर, चांदी में उछाल

    एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत टूटकर 1,41,577 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपये की तेजी के साथ 2,70,322 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। इससे साफ है कि रिकॉर्ड स्तर के बाद सोने में जहां दबाव बना, वहीं चांदी में खरीदारी लौटी।

    घरेलू बाजार में भी हल्की नरमी

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव घटकर 1,40,482 रुपये रह गया, जो पिछले कारोबारी दिन 1,40,499 रुपये था। यह गिरावट भले ही मामूली हो, लेकिन यह संकेत देती है कि ऊंचे दामों पर निवेशक फिलहाल सतर्क हो गए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला संकेत

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचा था। इसी रिकॉर्ड स्तर के बाद वैश्विक निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा। हालांकि भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है।

    भू-राजनीति और फेड पर टिकी नजर

    सोने में हालिया तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने का ऐलान और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी बड़ा कारण रही। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच की खबरों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के मुताबिक, निवेशकों की नजर अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दर नीति पर टिकी है।

    ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

    हालिया अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने से यह भरोसा मजबूत हुआ है कि इस साल के अंत तक फेड ब्याज दरों में दो बार कटौती कर सकता है। यही उम्मीद कीमती धातुओं को मध्यम अवधि में सहारा दे रही है।

    तकनीकी स्तर और आगे का रुख

    विश्लेषकों के अनुसार सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपये के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपये पर रेजिस्टेंस है। चांदी के लिए 2,60,810 से 2,54,170 रुपये सपोर्ट जोन है और 2,71,810 से 2,74,470 रुपये रेजिस्टेंस।

    चांदी की लंबी अवधि में चमक

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि उद्योगों और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में चांदी की कीमतें सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

  • सीहोर 2026 में होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने सड़कों पर उतरेगा कृषि रथ

    सीहोर 2026 में होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने सड़कों पर उतरेगा कृषि रथ


    सीहोर । सीहोर जिले में वर्ष 2026 को विशेष रूप से ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और नवाचारों की सीधी जानकारी देने के उद्देश्य से जिलेभर में कृषि रथ अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान रबी सीजन के दौरान जिले के हर विकासखंड में संचालित होगा, जिससे अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके।

    मंगलवार को कलेक्टर बालागुरु के. ने कृषि विभाग के अधिकारियों को राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप कृषि रथों के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना है।

    कृषि रथ बताएगा खेती के नए रास्ते
    कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, उन्नत बीजों का चयन, कीट एवं रोग प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। इसके साथ ही फसल विविधीकरण, कृषि आधारित उद्यमिता, ई-तकनीक से जुड़ी योजनाएं और पराली प्रबंधन जैसे अहम विषयों पर भी मार्गदर्शन किया जाएगा।

    अभियान की शुरुआत जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कृषि रथों को हरी झंडी दिखाकर की जाएगी, जिससे गांव-गांव तक इसका प्रभावी संदेश पहुंचे।

    जिला और ब्लॉक स्तर पर होगी सख्त निगरानी
    अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में और विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में विशेष क्रियान्वयन समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां रथों के संचालन, कार्यक्रमों की रूपरेखा और पूरे अभियान की निगरानी करेंगी।

    तकनीकी विशेषज्ञ देंगे मौके पर समाधान
    प्रत्येक कृषि रथ के साथ एक तकनीकी दल रहेगा, जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।

    यह दल गांवों में जाकर किसानों की समस्याएं सुनेगा और उन्हें मौके पर ही आधुनिक कृषि समाधान उपलब्ध कराएगा।

    कृषि रथ अभियान की दैनिक प्रगति की जिला स्तर पर समीक्षा की जाएगी और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से किसानों की आय में वृद्धि होगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और जिले में नवाचार आधारित खेती को नई दिशा मिलेगी।

    कृषि वर्ष 2026 सीहोर के किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और समृद्धि का नया अध्याय साबित होने की उम्मीद है।

  • मैरी कॉम पर संगीन आरोप: एक्स हसबैंड ओनलर बोले– 2013 में दूसरे शख्स से था रिश्ता

    मैरी कॉम पर संगीन आरोप: एक्स हसबैंड ओनलर बोले– 2013 में दूसरे शख्स से था रिश्ता

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का परचम लहराने वाली विश्व चैंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम इन दिनों अपनी खेल उपलब्धियों से ज्यादा निजी जीवन को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में मैरी कॉम ने अपने पूर्व पति ओनलर कोम पर धोखाधड़ी और आर्थिक गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए थे। अब ओनलर कोम ने इन आरोपों पर खुलकर जवाब दिया है और उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।

    ‘आरोप झूठे, सच्चाई कुछ और’

    आईएएनएस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में ओनलर कोम ने कहा कि मैरी कॉम द्वारा लगाए गए आरोप सच्चाई से कोसों दूर हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी में तनाव कोई नई बात नहीं थी, बल्कि यह समस्या एक दशक से भी अधिक समय पुरानी है। ओनलर के अनुसार, मैरी कॉम 2013 से ही अलग-अलग रिश्तों में थीं और 2017 से मैरी कॉम बॉक्सिंग एकेडमी से जुड़े एक व्यक्ति के साथ उनका रिश्ता रहा है।

    ‘मेरे पास सबूत हैं, लेकिन चुप रहा’

    ओनलर कोम ने कहा कि उनके पास इन दावों से जुड़े व्हाट्सएप मैसेज और अन्य सबूत मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से बात नहीं की। उनका कहना है कि उन्हें मैरी कॉम के आगे बढ़ने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर उन्हें दोषी ठहराया जाना स्वीकार्य नहीं है।

    पैसों के आरोपों पर जवाब

    मैरी कॉम द्वारा लगाए गए पैसों की हेराफेरी के आरोपों पर ओनलर ने कहा कि अगर उन्होंने करोड़ों रुपये चुराए होते, तो आज उनकी जिंदगी की हालत कुछ और होती। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली में किराए के मकान में रह रहे हैं और उनके पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं है। उन्होंने चुनौती दी कि अगर प्रॉपर्टी या पैसे उनके नाम पर हैं, तो मैरी कॉम सबूत पेश करें।

    बच्चों को लेकर भावुक बयान

    ओनलर कोम ने अपने बच्चों को लेकर भावुक होते हुए कहा कि वे अपने बेटों से मिलना चाहते हैं, जो फिलहाल बोर्डिंग स्कूल में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की परवरिश में उन्होंने हमेशा भूमिका निभाई है और उन्हें सिर्फ “इस्तेमाल करके छोड़ दिया गया” महसूस होता है।

    तलाक के बाद भी विवाद जारी

    ओनलर और मैरी कॉम की शादी 2005 में हुई थी और उनके चार बच्चे हैं। दोनों का 2023 में तलाक हो चुका है, लेकिन कानूनी और भावनात्मक विवाद अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा। ओनलर ने साफ कहा कि वह कोर्ट में लंबी लड़ाई नहीं चाहते, लेकिन अपने ऊपर लगे आरोपों को यूं ही स्वीकार भी नहीं करेंगे।

    निजी विवाद, सार्वजनिक बहस

    यह मामला अब एक निजी रिश्ते से निकलकर सार्वजनिक बहस का रूप ले चुका है। जहां एक ओर मैरी कॉम की लोकप्रियता और उपलब्धियां हैं, वहीं दूसरी ओर ओनलर कोम का कहना है कि सच को जाने बिना एकतरफा राय बनाई जा रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस विवाद में कानूनी तौर पर क्या सच सामने आता है।

  • मकर संक्रांति  2026: मकर संक्रांति के दिन इन रंगों के कपड़े पहनना होता है शुभ यहां जानें कैसे

    मकर संक्रांति 2026: मकर संक्रांति के दिन इन रंगों के कपड़े पहनना होता है शुभ यहां जानें कैसे


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जो न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसका महत्व बहुत गहरा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य की गति और उनके मकर राशि में प्रवेश के साथ नई ऊर्जा का संचार होता है और पुराने को छोड़कर नए का स्वागत किया जाता है। इस दिन का आध्यात्मिक और भौतिक रूप से बड़ा महत्व है और यह जीवन में शुभ परिवर्तन और समृद्धि का संकेत माना जाता है।इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन एक और परंपरा है जो विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करती है और वह है इस दिन विशेष रंगों के कपड़े पहनने की मान्यता। माना जाता है कि सूर्य देव से जुड़े उज्ज्वल और ऊर्जावान रंग पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति का भाग्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं कि इस दिन कौन से रंग शुभ माने जाते हैं और क्यों।

    पीला रंग सूर्य देव का प्रिय रंग

    मकर संक्रांति के दिन पीला रंग पहनने की परंपरा है। पीला रंग सूर्य देव का प्रिय रंग माना जाता है और यह ज्ञान समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन पीला रंग पहनने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। पीला रंग ऊर्जा और उत्साह को बढ़ावा देता है और इसे शुभ और सौभाग्यवर्धक माना जाता है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन पीला रंग पहनकर हम सूर्य देव को सम्मान देते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।

    नारंगी केसरिया रंग ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक

    नारंगी रंग जिसे केसरिया रंग भी कहा जाता है इस दिन एक और शुभ रंग है। नारंगी रंग ऊर्जा उत्साह और आध्यात्मिक शक्ति का संकेत देता है। यह रंग हमें जीवन में नयापन शक्ति और आत्मविश्वास का अहसास कराता है। मकर संक्रांति के दिन नारंगी रंग पहनने से न केवल हमारे भीतर ऊर्जा का संचार होता है बल्कि यह हमें मानसिक शांति और स्थिरता भी प्रदान करता है। इसके अलावा नारंगी रंग सूर्य के ऊर्जा से जुड़ा होता है और यही कारण है कि यह इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    लाल रंग शक्ति और साहस का प्रतीक

    लाल रंग जो शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है मकर संक्रांति पर पहनने के लिए एक और शुभ रंग है। यह रंग जीवन में उत्साह और नकारात्मकता से लड़ने की शक्ति को बढ़ाता है। लाल रंग पहनने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और यह उसे किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए मानसिक और शारीरिक ताकत देता है। मकर संक्रांति के दिन लाल रंग पहनकर हम अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर सकते हैं और जीवन में सफलता की ओर बढ़ सकते हैं।

    सुनहरा रंग वैभव और सफलता का प्रतीक

    सुनहरा रंग जो सूर्य देव के साथ जुड़ा हुआ है वैभव सफलता और तेज का प्रतीक है। मकर संक्रांति के दिन सुनहरा रंग पहनना शुभ माना जाता है क्योंकि यह न केवल सूर्य के उज्ज्वल प्रकाश से जुड़ा है बल्कि यह व्यक्ति को समृद्धि और सफलता की दिशा में प्रेरित करता है। सुनहरा रंग पहनने से व्यक्ति के जीवन में खुशहाली और सफलता आती है। इसके अलावा यह रंग किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए आदर्श माना जाता है।

    किन रंगों से बचें

    जहां मकर संक्रांति पर कुछ रंगों को पहनना शुभ माना जाता है वहीं कुछ रंगों से बचने की भी सलाह दी जाती है। काला और गहरा नीला रंग इस दिन पहनने से परहेज किया जाता है क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। इन रंगों का पहनना व्यक्ति की ऊर्जा को कमजोर कर सकता है और यह शुभता में कमी ला सकता है। इसलिए इस दिन काले और गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।

    मकर संक्रांति के दिन की अन्य परंपराएं

    मकर संक्रांति का त्योहार सिर्फ रंगों से जुड़ा नहीं है बल्कि इस दिन के साथ कई धार्मिक और सामाजिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देकर दान-पुण्य और स्नान करने से सुख-समृद्धि स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ के लड्डू भी बांटे जाते हैं जो एकता और मित्रता का प्रतीक होते हैं।मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जो सूर्य देव के प्रति आस्था और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन विशेष रंगों के कपड़े पहनकर हम अपनी जीवन शक्ति को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकते हैं और सूर्य देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पीला नारंगी लाल और सुनहरा रंग पहनने से न केवल शुभता और समृद्धि मिलती है बल्कि यह ऊर्जा और उत्साह से भी भर देता है। तो इस मकर संक्रांति इन रंगों के कपड़े पहनें और सूर्य देव से शुभ आशीर्वाद प्राप्त करें!

  • UP Politics: शिवसेना की एंट्री से सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल की मुश्किलें बढ़ीं, 2027 विधानसभा चुनाव में NDA में नया समीकरण

    UP Politics: शिवसेना की एंट्री से सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल की मुश्किलें बढ़ीं, 2027 विधानसभा चुनाव में NDA में नया समीकरण


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अब गर्म होती दिख रही हैं। एनडीए के घटक दलों में से शिवसेना (शिंदे गुट) ने राज्य में सक्रिय भूमिका निभाने का ऐलान कर दिया है, जिससे सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) की रणनीति पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है। शिवसेना ने साफ किया कि वह बीजेपी के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी और कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

    शिवसेना के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक अभिषेक वर्मा ने कहा कि पार्टी अब यूपी में मजबूत स्थिति में है और इसे और बेहतर किया जाएगा। वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना केवल विधानसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि जिला पंचायत, नगर पंचायत और निकाय चुनावों में भी सक्रिय होगी।

    उन्होंने कहा, “हम बीजेपी को बड़ा मानकर चुनाव लड़ेंगे, और कुछ सीटों पर हमारे उम्मीदवार उतारने की अनुमति भी मिल चुकी है।”

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना की एंट्री यूपी के राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल पैदा करेगी। सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे पंचायत चुनाव अकेले लड़ेंगे और विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस दल की रणनीति प्रभावित होती है और किस सीट पर खेल बदल सकता है।

    उत्तर भारतीयों के साथ महाराष्ट्र में कथित भेदभाव और मारपीट के सवाल पर वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना गुंडागर्दी नहीं करती।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट से जुड़ी हैं। वर्मा ने आगे कहा, “अगर उत्तर भारतीयों से इतनी ही दिक्कत है, तो इसे बॉलीवुड या अन्य सार्वजनिक मंचों पर भी उजागर किया जा सकता है।”

    शिवसेना की सक्रियता से उत्तर प्रदेश में हिंदू वोट बैंक में हलचल और एनडीए के गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर नई रणनीति बन सकती है। बीजेपी के लिए यह चुनौती और अवसर दोनों है, क्योंकि गठबंधन में सीटों का बंटवारा और उम्मीदवार चयन अब और अधिक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

    पार्टी पदाधिकारी ने कहा कि यूपी में संगठन को मजबूत किया जाएगा, स्थानीय नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़कर पार्टी का नेटवर्क हर जिले में फैलाया जाएगा। यह कदम शिवसेना को सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल के मुकाबले चुनावी मैदान में मजबूती देने के साथ ही बीजेपी के लिए भी नए समीकरण तैयार करेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि 2027 विधानसभा चुनाव में शिवसेना की भागीदारी राज्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। अब यह देखना रोचक होगा कि कौन सा दल इस नए मोड़ का फायदा उठाता है और किसकी रणनीति प्रभावित होती है। राजनीतिक हलचल और गठबंधन की राजनीति यूपी के मतदाताओं के लिए भी बेहद दिलचस्प और निर्णायक साबित हो सकती है।

  • सावधान! ये आदतें दे सकती हैं दांतों की इन जानलेवा बीमारियों को न्योता जानें सड़न से बचाने के उपाय

    सावधान! ये आदतें दे सकती हैं दांतों की इन जानलेवा बीमारियों को न्योता जानें सड़न से बचाने के उपाय


    नई दिल्ली । दांतों की सेहत से जुड़ी समस्याएं केवल असुविधा का कारण नहीं बनतीं बल्कि ये शरीर के अन्य हिस्सों पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। दांतों की समस्याएं जैसे सड़न कैविटी मसूड़ों से खून आना और मुंह की बदबू न केवल हमारे आत्मविश्वास को प्रभावित करती हैं बल्कि शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी खतरे की घंटी होती हैं। यदि आप यह समझते हैं कि आपकी कुछ आदतें दांतों की समस्याओं को जन्म देती हैं तो आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की आवश्यकता हो सकती है।

    मीठी चीजों जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से दांतों पर असर

    डेंटिस्ट डॉ. लीना गुलानी का कहना है कि अगर आप लगातार मीठे खाद्य पदार्थों जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं तो यह दांतों की सड़न और अन्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों में शुगर अस्वास्थ्यकर फैट्स और आर्टिफिशियल फ्लेवर होते हैं जो दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचाते हैं। शुगर के साथ बैक्टीरिया दांतों में जमा हो जाते हैं जिससे सड़न और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है। यदि लंबे समय तक ऐसा खानपान जारी रखा जाए तो यह मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं को भी जन्म दे सकता है। शुगर के अत्यधिक सेवन से दांतों में प्लाक और टार्टर का निर्माण होता है जिससे सड़न की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जंक फूड जो अक्सर तला हुआ और नमकीन होता है दांतों में फंसा रह जाता है और इसे समय पर साफ न करने पर यह दांतों में सड़न पैदा कर सकता है।

    तंबाकू का सेवन दांतों के लिए गंभीर खतरा

    तंबाकू का सेवन न केवल शरीर के लिए हानिकारक है बल्कि यह दांतों और मसूड़ों के लिए भी बेहद खतरनाक है। डॉ. लीना गुलानी के अनुसार तंबाकू से दांतों में सड़न मसूड़ों से खून आना मुंह में बदबू और गम रोग जैसे गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे हो सकते हैं। तंबाकू से दांतों में पीला रंग और काले दाग पड़ सकते हैं। यह मसूड़ों की सूजन और मसूड़ों की बीमारी का कारण भी बनता है। इसके अलावा तंबाकू के सेवन से मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

    दांतों की समस्याओं के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

    यदि आपको दांतों में दर्द मसूड़ों में सूजन खून आना या मुंह से बदबू जैसी समस्याएं महसूस हों तो इसे हल्के में लेना बिल्कुल भी उचित नहीं है। डॉ. गुलानी का कहना है कि इन लक्षणों की अनदेखी करना दांतों की बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है जो बाद में गंभीर समस्याएं बन सकती हैं। समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श और इलाज लेने से बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है।

    सही टूथब्रश और डाइट का महत्व

    दांतों की सेहत को बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी चीज है सही टूथब्रश का चयन और उसे नियमित रूप से इस्तेमाल करना। डॉ. गुलानी के अनुसार दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना दांतों की सफाई और सड़न से बचाव में मदद करता है। इसके साथ ही बैलेंस्ड और हेल्दी डाइट का पालन करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। भोजन में शुगर की मात्रा कम करने से न केवल दांतों की सड़न से बचा जा सकता है बल्कि यह आपके पूरे शरीर के लिए भी फायदेमंद होता है।इसके अलावा ज्यादा मीठी चीजों और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने से बचें क्योंकि ये शरीर के लिए न केवल दांतों की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि आपके समग्र स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं।

    फल सब्जियां दूध और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ दांतों को स्वस्थ रखने के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं।दांतों की सेहत का ख्याल रखना हमारी जिम्मेदारी है और यह हमारे दैनिक जीवन की आदतों पर निर्भर करता है। यदि आप मीठे खाद्य पदार्थों जंक फूड या तंबाकू का सेवन करते हैं तो आपको दांतों की समस्याओं से बचने के लिए इन आदतों में बदलाव करने की आवश्यकता हो सकती है। समय पर विशेषज्ञ की सलाह और दांतों की सही देखभाल के जरिए आप इन समस्याओं से बच सकते हैं और लंबे समय तक स्वस्थ दांतों का आनंद ले सकते हैं।

  • कोहली की टीम का नया ठिकाना: चिन्नास्वामी में अब नहीं होंगे IPL मैच

    कोहली की टीम का नया ठिकाना: चिन्नास्वामी में अब नहीं होंगे IPL मैच

    नई दिल्ली। बेंगलुरु का एम चिन्नास्वामी स्टेडियम अब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का होम ग्राउंड नहीं होगा. IPL 2026 में आरसीबी अपने होम मैच नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम और रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में खेल सकती है. RCB के अलावा राजस्थान रॉयल्स भी अपना होम ग्राउंड बदल सकती है.

    रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने IPL 2025 का खिताब जीता था. उस ऐतिहासिक जीत के बाद चिन्नास्वामी स्टेडियम में विजेता टीम RCB के लिए जीत की परेड होने वाली थी. इसी दौरान स्टेडियम के बाहर भगदड़ मच गई थी, जिसके कारण 11 लोगों की मौत हो गई थी. उस दुखद घटना के बाद चिन्नास्वामी स्टेडियम में कोई उच्च स्तरीय क्रिकेट मैच नहीं खेला गया है.

    RCB को मिलेंगे 2 नए होमग्राउंड!
    खबर है कि RCB अगले सीजन यानी IPL 2026 में पांच मैच नवी मुंबई में खेल सकती है, जबकि 2 मुकाबले रायपुर में करवाए जा सकते हैं. आरसीबी मैनेजमेंट ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करके इस नतीजे पर पहुंचा है. पिछले साल चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ के बाद लगातार मैदान को लेकर सुरक्षा चिंताएं चर्चा का केंद्र बनी रही हैं. अभी तक चिन्नास्वामी स्टेडियम को किसी बड़े लेवल का मैच आयोजित करने की अनुमति नहीं मिल पाई है.

    रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पिछले सीजन बेहतरीन प्रदर्शन किया था. पॉइंट्स टेबल में RCB की टीम दूसरे स्थान पर रही थी. वहीं फाइनल में बेंगलुरु की टीम ने पंजाब किंग्स को 6 रनों से हराकर जीत दर्ज की थी. ये 18 साल में पहला मौका रहा जब RCB ने इंडियन प्रीमियर लीग का खिताब जीता.

    राजस्थान रॉयल्स का भी बदलेगा होमग्राउंड
    पिछले वर्ष राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव नहीं करवा पाई थी. उसके बाद आईपीएल चेयरमैन अरुण सिंह धूमल ने RCA से कहा था कि वह चुनाव नहीं करवा पाता है तो राजस्थान रॉयल्स की टीम अपने घरेलू मैच जयपुर में आयोजित नहीं करवा पाएगी.

  • इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए मूंगफली, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने

    इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए मूंगफली, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने


    नई दिल्ली । सर्दियों में धूप में बैठकर मूंगफली खाना एक लोकप्रिय शगल है खासतौर पर भारत में। यह न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि प्रोटीन फैट और फाइबर से भरपूर होने के कारण इसे गरीबों का बादाम भी कहा जाता है। हालांकि यह सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है लेकिन कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में मूंगफली का सेवन गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इस लेख में हम उन 5 खास परिस्थितियों पर प्रकाश डालेंगे जिनमें मूंगफली का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
    गंभीर एलर्जी से जूझ रहे लोग

    मूंगफली की एलर्जी दुनिया भर में सबसे आम और खतरनाक एलर्जी मानी जाती है। यह एलर्जी गंभीर परिणाम दे सकती है। यदि किसी व्यक्ति को मूंगफली से एलर्जी है तो उसे इससे बने उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए। एलर्जी की प्रतिक्रियाएं त्वचा पर चकत्ते खुजली दस्त और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों के रूप में सामने आ सकती हैं। गंभीर मामलों में एनाफिलेक्सिस एक प्रकार की जानलेवा एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है जो तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। इस कारण से मूंगफली या उससे बने उत्पादों से पूरी तरह से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

    वेट लॉस डाइट पर रहने वाले लोग
    मूंगफली पोषक तत्वों से भरपूर होने के बावजूद इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा भी अधिक होती है। यदि आप वजन घटाने के लिए डाइट पर हैं तो मूंगफली का अत्यधिक सेवन आपके प्रयासों पर पानी फेर सकता है। एक मुट्ठी मूंगफली में 160 से 180 कैलोरी होती हैं जो वेट लॉस डाइट के लिए अनुपयुक्त हो सकती हैं। अत्यधिक फैट और कैलोरी के सेवन से आपका वजन बढ़ सकता है जिससे वेट लॉस के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए यदि आप वजन घटाना चाहते हैं तो मूंगफली का सेवन नियंत्रित मात्रा में करना चाहिए।

    हाई ब्लड प्रेशर के मरीज

    सामान्य मूंगफली में सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है लेकिन बाजार में मिलने वाली अधिकतर मूंगफली ‘रोस्टेड और साल्टेड’ नमकीन होती हैं जिनमें अतिरिक्त नमक होता है। नमक का अत्यधिक सेवन उच्च रक्तचाप हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक हो सकता है। यह रक्तचाप को अचानक बढ़ा सकता है जो हृदय रोगियों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो नमकीन मूंगफली से बचें और केवल बिना नमक वाली मूंगफली का सेवन करें।

    शरीर में सूजन ,सूजन और जलन की समस्या

    मूंगफली में ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है जबकि ओमेगा-3 की कमी होती है। शरीर में इन फैटी एसिड्स का असंतुलन सूजन और जलन की समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है। जो लोग पहले से ही जोड़ों के दर्द आर्थराइटिस या शरीर में सूजन से पीड़ित हैं उन्हें मूंगफली का सेवन बहुत सोच-समझ कर करना चाहिए। ओमेगा-6 का अत्यधिक सेवन सूजन बढ़ा सकता है जिससे इन समस्याओं में वृद्धि हो सकती है। इसीलिए ऐसे लोग मूंगफली के सेवन में सावधानी बरतें और डॉक्टर से परामर्श लें।


    मिनरल्स की कमी वाले लोग

    मूंगफली में फाइटिक एसिड पाया जाता है जो शरीर में आवश्यक मिनरल्स जिंक आयरन कैल्शियम मैग्नीशियम के अवशोषण में बाधा डालता है। यदि आप इन मिनरल्स की कमी से जूझ रहे हैं तो मूंगफली का अत्यधिक सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यह फाइटिक एसिड शरीर में इन महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी को बढ़ा सकता है जिससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे लोगों को मूंगफली के सेवन में संयम बरतना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

    मूंगफली का सेवन सेहत के लिए कई लाभकारी हो सकता है लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। खासकर जिन लोगों को एलर्जी हाई ब्लड प्रेशर सूजन की समस्या या मिनरल्स की कमी है उन्हें मूंगफली से बचना चाहिए। किसी भी चीज की अति हानिकारक हो सकती है और यदि आप उपरोक्त में से किसी भी श्रेणी में आते हैं तो मूंगफली को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। इसके अलावा अगर आप सर्दियों में मूंगफली का आनंद लेना चाहते हैं तो सीमित मात्रा में और बिना नमक वाली मूंगफली का सेवन करना सबसे बेहतर रहेगा

  • शादी के बाद बॉलीवुड में पहली झलक: नूपुर सैनन और स्टेबिन बेन का पब्लिक डेब्यू

    शादी के बाद बॉलीवुड में पहली झलक: नूपुर सैनन और स्टेबिन बेन का पब्लिक डेब्यू

    नई दिल्ली।  सेलिब्रेशन ऑफिशियली खत्म हो गया है! नए शादीशुदा जोड़े नूपुर सैनन और स्टेबिन बेन ने आखिरकार एक शादीशुदा जोड़े के तौर पर पहली बार पब्लिक अपीयरेंस दी; दोनों को उदयपुर में अपनी स्टार-स्टडेड शादी की रस्मों के बाद घर लौटते समय एयरपोर्ट पर देखा गया।
    यह जोड़ा बहुत खुश दिख रहा था और उन्होंने साथ में पैपराज़ी को ग्रीट किया। नूपुर ने एक खूबसूरत नीले रंग का अनारकली पहना था, जिसके साथ उन्होंने अपना ब्राइडल चूड़ा और मंगलसूत्र पहना था। उनके बगल में, स्टेबिन सफेद मिरर-वर्क कुर्ते सेट में बहुत अच्छे लग रहे थे। सिंगर मुस्कुरा रहे थे और फोटोग्राफर्स से शादी की शुभकामनाएं खुशी-खुशी ले रहे थे।
    नूपुर की बहन, बॉलीवुड एक्टर कृति सैनन भी इस जोड़े के साथ वापस यात्रा के लिए शामिल हुईं। कृति ने चेक्ड कुर्ते सेट में एक आरामदायक लुक चुना था, और हाथ में एक जैकेट पकड़ी हुई थी। उन्हें अपने माता-पिता और कथित पार्टनर, कबीर बहिया के साथ अपनी फ्लाइट में चढ़ने से पहले एयरपोर्ट पर देखा गया।
    नूपुर और स्टेबिन की शादी के अंदर की बातें
    नूपुर और स्टेबिन का तीन दिन का सेलिब्रेशन परंपरा और हाई एनर्जी का मिश्रण था। शनिवार को एक सपनों जैसी क्रिश्चियन सेरेमनी के बाद, उन्होंने रविवार को एक पारंपरिक हिंदू शादी में सात फेरे लिए।

    HT सिटी से बात करने वाले एक सूत्र के अनुसार: “हिंदू फेरे की सेरेमनी एक शानदार बारात के साथ शुरू हुई, जिसमें लगभग सौ लोग पारंपरिक छतरियां लिए हुए थे। स्टेबिन, अपने दोस्तों के साथ, नाचते हुए वेन्यू तक पहुंचे, जिससे जुलूस एक हाई-एनर्जी सेलिब्रेशन में बदल गया।”

    नूपुर ने फूलों की सजावट के बीच एक इमोशनल ब्राइडल एंट्री की, जिसमें दूल्हा और दुल्हन दोनों ने कस्टम मनीष मल्होत्रा ​​के कपड़े पहने थे। फेरों के बाद पांच मिनट की आतिशबाजी और फूलों की बारिश हुई। दिशा पटानी, मौनी रॉय और करण कुंद्रा जैसे सेलिब्रिटी मेहमानों ने इस जश्न में हिस्सा लिया, जो बहुत सारे गाने और डांस के साथ खत्म हुआ।