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  • Iran में उग्र प्रदर्शनों के बीच क्राउन प्रिंस का घर वापसी का ऐलान, शहरों पर कब्जा करने की अपील

    Iran में उग्र प्रदर्शनों के बीच क्राउन प्रिंस का घर वापसी का ऐलान, शहरों पर कब्जा करने की अपील


    तेहरान।
    ईरान में उग्र होते प्रदर्शनों (Iran’s Escalating Protests) के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी (Exiled Crown Prince Reza Pahlavi) ने घर वापसी का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने ईरान के लोगों से अपील की है कि वे अब सिर्फ सड़कों पर ना उतरें बल्कि शहरों के सिटी सेंटर्स को अपने कब्जे में ले लें। उन्होंने कहा है कि अगर खूनी सत्ता के शीर्ष पर बैठे अली खामेनेई को उतार फेंकना है तो और ज्यादा संगठित होकर प्रदर्शन को तेज करना होगा।

    बता दें कि पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने महंगाई और आर्थिक बदहाली को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसके बाद यह प्रदर्शन उग्र होता चला गया। वहीं ईरान की इस्लामिक सरकार ने भी ऐक्शन के आदेश दे दिए और सेना की गोलीबारी में कई प्रदर्शनकारी मारे गए। अब तक इन प्रदर्शनों में 2017 लोगों के मारे जाने की खबर है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में केवल 65 मौतें ही बताई गई हैं।


    खामेनेई ने दी मृत्युदंड की चेतावनी

    ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (86) ने प्रदर्शनकारियों को मृत्युदंड तक की चेतावनी द है। तेहरान में अपने परिसर में समर्थकों से कहा कि प्रदर्शनकारी अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने (ट्रंप ने) कहा है कि वह उनकी (प्रदर्शनकारियों की) मदद के लिए आगे आएंगे। इसके बजाय उन्हें अपने खुद के देश के हालात पर ध्यान देना चाहिए।”

    ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसिनी-इजेई ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को कोई कानूनी नरमी बरते बिना निर्णायक और अधिकतम सजा दी जाएगी। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ट्रंप की इस चेतावनी को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।


    ईरान पर हमले को तैयार बैठे हैं ट्रंप?

    ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि सैनिक जमीन पर भेजे जाएंगे, बल्कि इसका मतलब होगा कि दुश्मन को बहुत जोरदार तरीके से वहीं चोट पहुंचाई जाएगी जहां सबसे ज्यादा असर हो। ट्रंप ने कहा, “मैं ईरान के नेताओं से कहता हूं कि गोलियां चलाना शुरू मत करना, क्योंकि अगर तुमने ऐसा किया तो हम भी (तुम्हारे खिलाफ) करेंगे।”

    एसोसिएटेड प्रेस को मिले एक वीडियो में उत्तरी तेहरान के सादत आबाद इलाके में विरोध प्रदर्शन होते दिख रहे हैं और सड़कों पर हजारों लोग नजर आ रहे हैं इस दौरान एक व्यक्ति को खामेनेई मुर्दाबाद कहते हुए सुना गया है।

  • MP: बैतूल में दो मुस्लिम युवकों ने जलाए भगवा झंडे, दोनों गिरफ्तार… क्षेत्र में तनाव का माहौल

    MP: बैतूल में दो मुस्लिम युवकों ने जलाए भगवा झंडे, दोनों गिरफ्तार… क्षेत्र में तनाव का माहौल


    बैतूल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले (Betul district) में हिंदू सम्मेलन (Hindu Conference) के लिए लगाए गए भगवा झंडों को जलाने पर तनाव फैल गया। गंज क्षेत्र के लोहिया वार्ड में शुक्रवार रात कार से आए दो युवकों ने झंडे जलाए जिसकी जानकारी शनिवार सुबह प्रभात फेरी के दौरान मिली। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मुख्य आरोपी तौफीक और मुशर्रफ को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में भारी पुलिस बल तैनात है और एसडीएम के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।


    आरोपियों तक ऐसे पहुंची पुलिस

    जब हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं को इस घटना का पता चला, तो इलाके में काफी हंगामा हुआ और तनाव बढ़ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तुरंत पुलिस अधीक्षक और एसडीएम को मौके पर भेजा। पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। एक घर के बाहर लगे कैमरे की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई और दो मुख्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया।


    जलाए भगवा झंडे

    बैतूल जिले के गंज क्षेत्र स्थित लोहिया वार्ड में हिंदू सम्मेलन के लिए लगाए गए भगवा झंडे शुक्रवार रात को जला दिए गए। शनिवार सुबह जब हिंदू संगठन की प्रभात फेरी वहां से गुजरी तो जले हुए झंडे देखकर लोग नाराज हो गए और इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस को पास के ही एक घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मिली जिसमें कार से आए दो युवक झंडे निकालते हुए दिखाई दिए। इन युवकों की पहचान तौफीक और मुशर्रफ के रूप में हुई।


    तौफीक और मुशर्रफ अरेस्ट

    पुलिस ने तुरंत तौफीक और मुशर्रफ को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल दोनों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस हालात पर नजर रखे हुए है। पुलिस ने घटनास्थल से लगभग दस जले हुए भगवा झंडे बरामद किए हैं। ये झंडे हिंदू सम्मेलन के थे। सहायक संचालक रोमित उइके ने सबसे पहले कलेक्टर को घटना की सूचना दी। बैतूल में अलग-अलग स्थानों पर हिन्दू सम्मेलन आयोजित होने हैं। इस के लिए गांव से लेकर शहर तक भगवा झंडे लगाए गए हैं।


    अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

    बैतूल के गंज क्षेत्र स्थित लोहिया वार्ड में शुक्रवार की रात ही भगवा झंडे लगाए गए थे। एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने कहा कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। पुलिस हिरासत में लिए गए युवकों से आगे की पूछताछ कर रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

  • Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

    Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

    नई दिल्ली। Makar Sankranti 2026 Places to Visit: सूर्य के उत्तरायण होते ही उत्सवों का मौसम शुरू हो जाता है। शुरुआत मकर संक्रांति के पावन पर्व से होती है जो 14 या 15 जनवरी 2026 को ंमनाई जाएगी। मकर संक्रांति पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन अलग-अलग नामों और तरीकों से। मकर संक्रांति का पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर और शीत से ऊर्जा की ओर बढ़ने का समय है।

    यह वही दिन है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिणायन से उत्तरायण की यात्रा शुरू होती है। भारतीय परंपरा में इसे अत्यंत शुभ माना गया है। खेतों में नई फसल की खुशी, घरों में तिल-गुड़ की मिठास और आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें, मकर संक्रांति हर रूप में उल्लास रचती है।

    लेकिन यह पर्व पूरे भारत में एक जैसा नहीं मनाया जाता। हर क्षेत्र इसे अपने रंग, नाम और संस्कार के साथ जीता है। आइए जानते हैं उन जगहों के बारे में, जहां मकर संक्रांति की धूम देखते ही बनती है।

    गुजरात
    गुजरात में मकर संक्रांति केवल त्योहार नहीं, बल्कि जन-उत्सव है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में अंतर्राष्ट्रीय पतंग फेस्टिवल का आयोजन होता है। छतों पर लोग “काई पो चे” के नारों के साथ पतंगबाजी करते हैं। ऊंधियू, जलेबी और चिक्की यहां की पहचान हैं। रात में टुक्कल (लैंप पतंग) आसमान को जादुई बना देते हैं।

    प्रयागराज
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम में आस्था की डुबकी लगाकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यूपी में मकर संक्रांति का अर्थ है पवित्र स्नान। प्रयागराज के संगम पर लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाते हैं। दान-पुण्य, खिचड़ी, तिल और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    तमिलनाडु
    तमिलनाडु में पोंगल के रूप में चार दिन का उत्सव मनाया जाता है। दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है। यह चार दिन तक चलने वाला पर्व है, भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल। नई फसल से बना मीठा पोंगल, गाय-बैलों की पूजा और घरों के सामने रंगोली, यह त्योहार किसानों के सम्मान का उत्सव है।

    राजस्थान
    यहां पतंगबाजी और लोक-संस्कृति का संगम है। जयपुर और अन्य शहरों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी प्रतियोगिताएं, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन त्योहार को खास बना देते हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

    महाराष्ट्र
    महाराष्ट्र में मकर संक्रांति सामाजिक सौहार्द का पर्व है। लोग एक-दूसरे को तिलगुल देकर कहते हैं, “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला।” यह संदेश है कि जैसे तिल और गुड़ मिलकर मिठास देते हैं, वैसे ही जीवन में भी कटुता छोड़कर मधुरता अपनाई जाए।

  • सर्दियों की बड़ी गलती! इन 5 चीजों का सेवन सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

    सर्दियों की बड़ी गलती! इन 5 चीजों का सेवन सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम जहां ठंड से राहत और गर्माहट भरे पकवानों का आनंद देता है, वहीं यह सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और कमजोर इम्युनिटी जैसी समस्याएं भी साथ लाता है। इस मौसम में सही खान-पान न अपनाया जाए, तो छोटी-सी लापरवाही भी बीमारी को बढ़ा सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप जानें किन चीजों से सर्दियों में परहेज करना चाहिए—खासकर तब, जब सर्दी-जुकाम ने घेर रखा हो।

    सर्दियों में इन 5 चीजों से बनाएं दूरी

    1. दूध और ज्यादा डेयरी प्रोडक्ट्स
    दूध आमतौर पर सेहतमंद माना जाता है, लेकिन जुकाम-खांसी के दौरान इसका सेवन नुकसानदायक हो सकता है। डेयरी से शरीर में बलगम (म्यूकस) बढ़ता है, जिससे खांसी और नाक बहने की समस्या तेज हो सकती है। ऐसे समय में दूध, पनीर, आइसक्रीम से दूरी रखें।

    2. ज्यादा शुगर (मीठा)
    सर्दियों में मीठा खाने की चाह बढ़ जाती है, लेकिन ज्यादा शुगर सूजन बढ़ाने और इम्युनिटी कमजोर करने का काम करती है। इससे संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता घट सकती है।

    3. कैफीन युक्त चीजें
    कॉफी, चाय और सॉफ्ट ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन गाढ़ा बलगम बना सकता है। सर्दी-जुकाम में इनके सेवन से खांसी और गले की परेशानी बढ़ सकती है।

    4. जंक फूड
    केक, बिस्कुट, बर्गर, पिज़्ज़ा, फ्राइड स्नैक्स जैसे जंक फूड सर्दियों में शरीर को पोषण नहीं देते, बल्कि पाचन कमजोर कर देते हैं। सर्दी-खांसी में ये चीजें समस्या को और गंभीर बना सकती हैं।

    5. ज्यादा तीखा और मसालेदार खाना
    तेल-मसाले से भरपूर भोजन सर्दियों में भले ही स्वादिष्ट लगे, लेकिन जुकाम के दौरान यह पेट में जलन, नाक से पानी और गले में खराश बढ़ा सकता है।

    क्या करें?

    सर्दियों में गुनगुना पानी, सूप, हल्दी-अदरक, शहद, मौसमी फल और हल्का-संतुलित भोजन अपनाएं। इससे इम्युनिटी मजबूत रहेगी और सर्दी-जुकाम से जल्दी राहत मिलेगी।

  • Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर मौन और स्नान क्यों बदल देता है जीवन की दिशा?

    Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर मौन और स्नान क्यों बदल देता है जीवन की दिशा?

    नई दिल्ली। Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या सनातन धर्म की सबसे पुण्यदायी तिथियों में मानी जाती है. माघ मास की इस अमावस्या पर गंगा स्नान और मौन व्रत को सबसे बड़ा तप कहा गया है. मान्यता है कि इस दिन मौन और संयम से किया गया स्नान आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन में सुख-शांति का मार्ग खोलता है.

    मौनी अमावस्या पर स्नान इतना पुण्यदायी क्यों माना जाता है?
    धर्मग्रंथों के अनुसार इस दिन किया गया स्नान हजारों यज्ञों के बराबर फल देता है. विशेषकर त्रिवेणी संगम में स्नान को मोक्षदायी माना गया है. ऐसा विश्वास है कि मौनी अमावस्या पर देवता और पितृलोक के दिव्य शक्तियां पृथ्वी के समीप होती हैं, जिससे स्नान, दान और जप का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसी कारण प्रयागराज, हरिद्वार और काशी जैसे तीर्थों में इस दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

    मौन व्रत को शास्त्रों में सबसे कठिन तप क्यों कहा गया है?
    “मौनी” शब्द का अर्थ है मौन धारण करने वाला. शास्त्रों में कहा गया है कि वाणी पर संयम रखना सबसे कठिन तप है. मौनी अमावस्या पर मौन रहने से व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता, क्रोध और अस्थिर विचारों को शांत कर पाता है. यह दिन आत्मचिंतन और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि मौन व्रत से किया गया जप और ध्यान सीधे आत्मा को स्पर्श करता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति होती है. यही कारण है कि ऋषि-मुनि इस दिन मौन साधना को सर्वोच्च तप बताते हैं.
    मौनी अमावस्या 2026 की सही तिथि क्या है? भ्रम दूर करें
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि में किया गया स्नान और दान कई गुना पुण्य फल देता है, इसलिए मौनी अमावस्या 2026 की तिथि जानना जरूरी है.

    मौनी अमावस्या 2026 के शुभ मुहूर्त
    सूर्योदय: प्रातः 07:15 बजे
    सूर्यास्त: सायं 05:49 बजे
    चंद्रास्त: सायं 05:20 बजे
    ब्रह्म मुहूर्त: 05:27 से 06:21 बजे तक
    अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 से 12:53 बजे तक
    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:17 से 3:00 बजे तक
    गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:46 से 06:13 बजे तक
    दान और पुण्य का विशेष योग
    मौनी अमावस्या पर अन्न, वस्त्र, तिल, घी और कंबल का दान विशेष फलदायी माना जाता है. पितरों के निमित्त तर्पण करने से पितृ दोष शांत होने की मान्यता भी जुड़ी है. कहा जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खोलते हैं.

    मौनी अमावस्या हमें सिखाती है कि शब्दों से अधिक शक्ति मौन में होती है. एक दिन का संयम और साधना व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है. यही कारण है कि इस दिन मौन रहना केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का सबसे बड़ा तप माना गया है.

    ये भी पढ़ें: कब है मौनी अमावस्या 18 या 19 जनवरी? जानें सही तिथि

    मौनी अमावस्या पर स्नान क्यों किया जाता है?
    धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है.

    मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का क्या महत्व है?
    इस दिन मौन धारण करने से वाणी पर संयम आता है, मन शांत होता है और इसे शास्त्रों में सबसे बड़ा तप माना गया है.

    मौनी अमावस्या 2026 कब है?
    मौनी अमावस्या 2026 की तिथि 18 जनवरी की रात से शुरू होकर 19 जनवरी तक रहेगी, इस दिन स्नान और दान विशेष फलदायी माने जाते हैं.

    अगर आप सनातन धर्म और पर्व-त्योहारों से जुड़ी ऐसी ही विश्वसनीय जानकारियां पढ़ना पसंद करते हैं, तो इस लेख को जरूर शेयर करें.

  • सूर्य देव का सात घोड़ों के रथ पर सवार होने का रहस्य: धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

    सूर्य देव का सात घोड़ों के रथ पर सवार होने का रहस्य: धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण


    नई दिल्ली ।14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। यह दिन सूर्य देव के उत्तरायण प्रवेश का प्रतीक है, जब वे धनु राशि को त्याग कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। भारतीय संस्कृति में सूर्य देव को एक दिव्य रथ पर सवार दिखाया जाता है, जिसे सात तेजस्वी घोड़े खींचते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन घोड़ों की संख्या सात ही क्यों है? इसके पीछे छिपा है एक गूढ़ धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य।
    धार्मिक दृष्टिकोण: सात घोड़े और वेदों के सात छंद
    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित सूर्य देव का रथ सात घोड़ों से खींचा जाता है। ये घोड़े मात्र पशु नहीं, बल्कि वेदों के सात प्रमुख छंदों का प्रतीक माने जाते हैं। इन छंदों में गायत्री, भ्राति, उष्णिक, जगती, त्रिस्तूप, अनुस्तूप और पंक्ति शामिल हैं। माना जाता है कि सूर्य की ऊर्जा इन छंदों के माध्यम से पूरे ब्रह्मांड में फैलती है और संपूर्ण सृष्टि को गति प्रदान करती है। रथ का पहिया काल चक्र का प्रतीक है, जो समय के निरंतर प्रवाह को दर्शाता है। इस तरह से, सात घोड़े सूर्य देव की दिव्य शक्ति और ब्रह्मांड की अनंत ऊर्जा को आकार देते हैं।
    ज्योतिषीय दृष्टिकोण: सप्ताह और समय का पहिया
    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ‘काल पुरुष’ कहा गया है। रथ के सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों का प्रतीक हैं। इन दिनों में रविवार से लेकर शनिवार तक का समय चक्र सूर्य की गति पर आधारित है। यह चक्र इस बात का प्रतीक है कि समय कभी ठहरता नहीं है और सूर्य देव की कृपा से ही संसार में दिन, रात और वर्षों की गणना संभव हो पाती है। ‘उत्तरायण’ के दौरान सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश से समय की गति और ऊर्जा को नया आयाम मिलता है, जो मानव जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकेत है।
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण: सूर्य की ऊर्जा और जीवन का आधार
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, सूर्य की ऊर्जा ही जीवन का आधार है। सूर्य से निकलने वाली रौशनी और गर्मी पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाती है। इन सात घोड़ों के माध्यम से यह प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है कि सूर्य देव की ऊर्जा सात प्रमुख स्रोतों से पृथ्वी पर पहुंचती है, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्व है। यह ऊर्जा न केवल हमारे शरीर के लिए, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के लिए भी अनिवार्य है।

    एक दिव्य संदेश

    सात घोड़ों का रथ न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समय और ऊर्जा के निरंतर प्रवाह का प्रतीक भी है। चाहे वह पौराणिक दृष्टिकोण हो या वैज्ञानिक, दोनों में सूर्य देव के रथ और सात घोड़ों के माध्यम से जीवन के अनंत चक्र और ऊर्जा के प्रभाव का गहरा संदेश छिपा हुआ है।

  • ‘भारत रत्न नीतीश कुमार’ केसी त्यागी की मांग पर जीतन राम मांझी ने जताया समर्थन

    ‘भारत रत्न नीतीश कुमार’ केसी त्यागी की मांग पर जीतन राम मांझी ने जताया समर्थन


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग चर्चा का विषय बन गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि समाजवादी आंदोलन के बचे अनमोल रत्न नीतीश कुमार इस सर्वोच्च सम्मान के योग्य हैं। त्यागी ने पत्र में लिखा कि नीतीश कुमार ने समाज सेवा, किसानों और हाशिए पर गए लोगों को संगठित करने में अनमोल योगदान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों को देखते हुए नीतीश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए, ताकि उनके योगदान का इतिहास लंबे समय तक सराहा जाए।
    हमें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने फैसले से सबको चौंकाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री को भारत रत्न से नवाजेंगे।” उन्होंने कहा कि यह सम्मान नीतीश कुमार के जीवन और राजनीति में किए गए योगदान को सही मायने में दर्शाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग कोई नई बात नहीं है। पहले भी कई नेताओं और समर्थकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि नीतीश कुमार के लंबे समय तक किए गए समाजसेवी और राजनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह सम्मान उनके व्यक्तित्व और योगदान का सही मूल्यांकन होगा।

    नीतीश कुमार की सादगी, समाज सेवा और समाजवादी आंदोलन में योगदान को देखकर समर्थक मानते हैं कि भारत रत्न उनके लिए उचित और न्यायसंगत सम्मान होगा। केसी त्यागी और जीतन राम मांझी की यह पहल दिखाती है कि बिहार में उनकी लोकप्रियता और उनके योगदान की राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के बीच भी सराहना की जाती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं और नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च सम्मान देने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इस मांग से न केवल राजनीतिक समर्थन दिखता है, बल्कि जनता के बीच नीतीश कुमार की छवि और योगदान भी मजबूत होता है।

    अंततः, केसी त्यागी की पहल और जीतन राम मांझी का समर्थन नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की दिशा में एक मजबूत संदेश है। यह मामला राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इस पर और चर्चाएं होने की संभावना है।

  • लोहड़ी 2026: 13 जनवरी को सूर्यदेव बदलेंगे चाल, करियर और धन के लिहाज से मिलेगी गुड न्यूज

    लोहड़ी 2026: 13 जनवरी को सूर्यदेव बदलेंगे चाल, करियर और धन के लिहाज से मिलेगी गुड न्यूज


    नई दिल्ली । लोहड़ी 2026: एक ज्योतिषीय नजरिया लोहड़ी का पर्व सिर्फ एक लोक-परंपरा का उत्सव नहीं है, बल्कि यह ज्योतिष शास्त्र में भी विशेष महत्व रखता है। हर साल 13 जनवरी को मनाई जाने वाली यह तिथि सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश को लेकर होती है, जिसे उत्तरायण की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इस समय सूर्य की चाल बदलने के साथ ही पृथ्वी पर भी ऋतु परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होती है।

    सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
    सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही एक नई ऊर्जा का संचार होता है, जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लेकर आता है। मकर राशि में सूर्य का स्थान परिवर्तन करियर, धन, और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिहाज से बेहद शुभ होता है। इस दिन से शनि के साथ सूर्य का युति भी बनता है, जो स्थिरता और सफलता के नए मार्ग खोलता है।

    मंगलादित्य योग का निर्माण

    इस साल लोहड़ी के दिन विशेष रूप से एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योग बन रहा है, जिसे ‘मंगलादित्य योग’ कहा जा रहा है। यह योग सूर्य और मंगल की नौवें भाव में उपस्थिति से बनता है। नौवां भाव भाग्य और धर्म का कारक होता है, और जब सूर्य और मंगल इस भाव में मिलते हैं, तो यह व्यक्ति के साहस, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को बढ़ाता है।

    उच्च शिक्षा और विदेश यात्रा के लिए शुभ समय
    इस योग का प्रभाव विशेष रूप से उच्च शिक्षा और विदेश यात्रा के इच्छुक जातकों पर सकारात्मक रूप से पड़ने वाला है। यह समय उनके लिए अच्छे अवसर लेकर आ सकता है, जिनके मन में विदेश जाने या उच्च शिक्षा प्राप्त करने की योजना है। इसी प्रकार से, यदि आप नए बिजनेस के बारे में सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए सफल होने के योग लेकर आ सकता है।

    धन और करियर में प्रगति

    लोहड़ी का समय कई लोगों के लिए वित्तीय लाभ और करियर में प्रगति के लिहाज से बेहद शुभ रहेगा। विशेषकर वे जातक जिनका करियर लंबे समय से स्थिर था, उन्हें इस दिन के बाद नए अवसर मिल सकते हैं। यह समय नौकरी बदलने, प्रमोशन या अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त है।

    सामाजिक प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी
    लोहड़ी के दिन बने शुभ योगों से सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है। जो लोग समाज में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें इस समय में कोई खास सम्मान या पुरस्कार मिल सकता है। यही नहीं, आपके प्रयासों को लोगों से सराहना और समर्थन मिलेगा, जिससे आपके आत्मविश्वास में और भी बढ़ोतरी होगी।लोहड़ी 2026 का समय हर दृष्टि से खास होने वाला है, खासकर यदि आप अपने करियर, धन या सामाजिक जीवन में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। यह समय न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए उपयुक्त है, बल्कि यह सामूहिक रूप से भी समृद्धि और सफलता की ओर अग्रसर होने का संकेत दे रहा है। मंगलादित्य योग और सूर्य का मकर राशि में प्रवेश एक शुभ संकेत है, जिससे आने वाले समय में अच्छे अवसर और प्रगति के रास्ते खुल सकते हैं।
  • 38 शिक्षकों पर गिरी गाज, डीईओ ने किया निलंबित, देखें लिस्ट

    38 शिक्षकों पर गिरी गाज, डीईओ ने किया निलंबित, देखें लिस्ट


    कांकेर । कांकेर जिले में शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 38 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। इनमें से 29 महिला शिक्षक भी शामिल हैं। यह कार्रवाई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत की गई है, जिसके तहत अतिशेष शिक्षक थे, जिन्हें नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग करने के लिए कहा गया था। हालांकि इन शिक्षकों ने निर्धारित समय सीमा तक ज्वाइनिंग नहीं की, जिसके बाद विभाग ने यह कठोर कदम उठाया।

    युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया और निलंबन की वजह

    शिक्षा विभाग ने स्कूलों में शिक्षकों के समांतर समन्वय को सुनिश्चित करने के लिए युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत कई शिक्षक अतिशेष के रूप में सामने आए। विभाग ने इन अतिशेष शिक्षकों को जुलाई 2025 तक नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग करने का निर्देश दिया था। हालांकि, जनवरी 2026 तक जिले के 39 शिक्षकों ने नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की, जिसके कारण शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए इन शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। निलंबन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि विभाग ने ज्वाइनिंग न करने को गंभीर उल्लंघन मानते हुए इसे अनुशासनहीनता के तौर पर लिया है।

    डीईओ की कार्रवाई

    कांकेर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि यह कदम उन शिक्षकों के खिलाफ उठाया गया है जिन्होंने विभागीय निर्देशों का पालन नहीं किया। डीईओ ने कहा यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के तहत की गई है और संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर शिक्षकों को जानकारी दी गई थी। इन शिक्षकों के लिए अब कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    निलंबित शिक्षकों की सूची

    निलंबन की सूची में 38 शिक्षकों के नाम शामिल हैं, जिनमें 29 महिला शिक्षक भी हैं। इन शिक्षकों के खिलाफ यह कार्रवाई उन्हें बार-बार चेतावनी देने के बावजूद ज्वाइनिंग न करने पर की गई है। यह कार्रवाई विभाग के अनुशासन और कार्यवाही की सख्त नीति को दर्शाती है।

    सम्बंधित अधिकारी और कदम

    सरकारी शिक्षा विभाग ने न केवल इन शिक्षकों को निलंबित किया है बल्कि साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि भविष्य में ऐसी स्थितियां उत्पन्न न हों। विभाग ने इस निलंबन को एक संदेश के तौर पर लिया है, ताकि भविष्य में अन्य शिक्षक अपने दायित्वों का पालन करें और शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहे। यह कदम शिक्षा विभाग द्वारा युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उठाया गया है। शिक्षकों के कार्यों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने और विभागीय नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करने से यह स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठाए हैं।

  • सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

    सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई


    कांकेर । कांकेर जिले के ग्राम मूंगवाल में स्थित सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब हो गया है। यह चावल स्थानीय राशन कार्ड धारकों को वितरण के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन चावल के गायब होने की जानकारी के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। मामले की जांच के आदेश तो दिए गए हैं, लेकिन तीन साल का समय गुजरने के बावजूद अब तक जांच में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    सेल्समैन का बयान

    दुकान के सेल्समैन, परमेश्वर तेता, ने कहा कि वह पिछले तीन साल से दुकान का संचालन कर रहे हैं और जब उन्हें यह दुकान सौंपी गई थी, तब से ही स्टॉक में कमी थी। उनका कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है। सेल्समैन का दावा है कि उन्होंने किसी भी तरह के घोटाले या अनियमितताओं में शामिल होने की बात से इनकार किया और कहा कि स्टॉक की कमी का कारण दुकान की शुरुआत में ही था।

    कलेक्टर का आश्वासन

    कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस मामले में शिकायत मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं। निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” कलेक्टर ने यह भी बताया कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और जांच के परिणाम के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित किया जाएगा।

    सरपंच की शिकायत

    ग्राम पंचायत के सरपंच, जैसारो कोर्राम ने भी इस मामले में खाद्य विभाग से शिकायत की है। उनका कहना है कि यह मामला ग्रामवासियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है और अगर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे उच्च अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाएंगे यह मामला सरकारी राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर घोटाले की ओर इशारा कर रहा है, जहां राशन कार्ड धारकों को निर्धारित चावल वितरित नहीं किया जा सका। इस मामले की तीन साल बाद भी सही से जांच नहीं हो पाई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी सिस्टम में यह तरह की अनियमितताएं सामान्य हो गई हैं। अब तक जांच की प्रक्रिया लंबी खींची गई है, लेकिन कलेक्टर के द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।