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  • ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    नई दिल्ली। ईरान में महंगाई और आर्थिक तंगी के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाला रूप ले चुका है। देश के 31 प्रांतों और 111 शहरों-कस्बों में विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं। हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

    सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों और विरोधी संगठनों से प्रेरित बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेताया कि कोई भी विदेशी दबाव ईरान की सत्ता को नहीं झुका पाएगा। खामेनेई ने आरोप लगाया कि आंदोलन विदेशी एजेंडों के तहत देश में उथल-पुथल और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है।

    सड़कों पर नारे और इंटरनेट बंदी

    ईरान के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने “आजादी-आजादी” के नारे लगाए। ऐसे में सरकार को इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ी। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि कानून तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    खामेनेई का अमेरिका को चेतावनी संदेश

    सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी चेताया कि इतिहास में तानाशाहों का पतन तय रहा है और ट्रंप इससे अलग नहीं होंगे। उनका जोर था कि ईरान किसी भी विदेशी दबाव में नहीं झुकेगा और देश की सुरक्षा और एकता बनाए रखी जाएगी।

    रजा पहलवी का अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का आह्वान

    वहीं, निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लाखों ईरानी प्रदर्शनकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और संचार सेवाएं ठप हैं। रजा पहलवी ने खामेनेई पर आम जनता पर बर्बरता करने का आरोप लगाया और लोगों से एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।

    उन्होंने चेताया कि समय तेजी से निकल रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाना होगा, ताकि देश में जारी हिंसा और दमन को रोका जा सके।

  • हरमनप्रीत कौर ने बताई भूलें, मुंबई इंडियंस की जीत WPL 2026 में आखिरी ओवर तक फिसली

    हरमनप्रीत कौर ने बताई भूलें, मुंबई इंडियंस की जीत WPL 2026 में आखिरी ओवर तक फिसली

    नई दिल्ली। WPL 2026 के पहले मुकाबले में मुंबई इंडियंस को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के हाथों रोमांचक हार का सामना करना पड़ा। पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई ने 20 ओवरों में 154 रन बनाए, लेकिन आरसीबी की मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजी ने खेल का रुख बदल दिया। आरसीबी ने सिर्फ 65 रन पर पांच अहम विकेट खो दिए थे, और उस समय मैच मुंबई के पक्ष में दिखाई दे रहा था।

    लेकिन नादिन डि क्लार्क ने शानदार खेल दिखाया और टीम को अंतिम ओवर तक बनाए रखा। उनका आत्मविश्वास और पारी ने रोमांचक मोड़ ला दिया।

    18 रन, आखिरी ओवर और मुंबई की चूक

    मैच के निर्णायक अंतिम ओवर में आरसीबी को जीत के लिए 18 रन चाहिए थे। मुंबई इंडियंस ने यह ओवर नेट सेवियर ब्रंट को सौंपा। शुरुआती दो गेंदों में ब्रंट ने अच्छी नियंत्रण वाली गेंदें फेंकी, जिससे मुंबई की जीत लगभग तय लग रही थी। लेकिन इसके बाद उनकी लाइन और लेंथ लड़खड़ा गई, और नादिन ने लगातार चौके और छक्के जड़कर अपनी टीम को जीत दिला दी।

    हरमनप्रीत कौर ने स्वीकार की गेंदबाजी में चूक

    हार के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि टीम को नादिन डि क्लार्क की क्षमताओं का पहले से अंदाजा था, लेकिन अंतिम ओवर में गेंदबाजी सटीक नहीं रही। उन्होंने माना कि मुंबई ने नादिन को दो-तीन अवसर दिए, जिन्हें उन्होंने पूरी तरह भुनाया। हरमनप्रीत ने कहा, “सिर्फ एक सही गेंद डाली जाती तो नतीजा मुंबई के पक्ष में हो सकता था।”

    टीम की सीख और आगे की तैयारी

    हरमनप्रीत कौर ने यह भी कहा कि WPL में ऐसे करीबी मुकाबले आम हैं और टीम इस हार से सीख लेकर अगले मैचों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत रहने और दबाव में सही निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    इस रोमांचक शुरुआत से यह साफ हो गया है कि WPL 2026 में हर मैच दर्शकों के लिए बेहद रोमांचक और निर्णायक साबित होगा। मुंबई इंडियंस अब अपनी अगली चुनौती के लिए तैयारी में जुट जाएगी, जबकि आरसीबी ने जीत के साथ आत्मविश्वास बढ़ाया।

  • BCB डायरेक्टर ने तमीम इकबाल को कहा ‘भारतीय एजेंट’, खिलाड़ियों और फैंस में भारी गुस्सा

    BCB डायरेक्टर ने तमीम इकबाल को कहा ‘भारतीय एजेंट’, खिलाड़ियों और फैंस में भारी गुस्सा

    नई दिल्ली। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने हाल ही में भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों में मौजूदा तनाव को बातचीत से सुलझाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश क्रिकेट को 90-95 प्रतिशत फाइनेंस ICC से मिलता है और इसलिए किसी भी फैसले या बयान से पहले बांग्लादेश क्रिकेट के हितों और भविष्य पर विचार करना चाहिए।

    इसके बाद BCB डायरेक्टर एम नज़्मुल इस्लाम ने तमीम के इस बयान का एक फोटो शेयर करते हुए उन्हें “भारतीय एजेंट” कहकर मज़ाक उड़ाया। इस टिप्पणी ने क्रिकेट फैंस के बीच गुस्सा और नाराजगी फैल दी।

    खिलाड़ियों का विरोध

    तमीम इकबाल के खिलाफ BCB अधिकारी की टिप्पणी पर कई बांग्लादेशी क्रिकेटरों ने सोशल मीडिया पर गुस्सा जताया। मोमिनुल हक, तस्कीन अहमद और तैजुल इस्लाम सहित कई खिलाड़ियों ने डायरेक्टर के बयान का विरोध किया।

    तस्कीन ने लिखा, “क्रिकेट बांग्लादेश की जान है। एक पूर्व नेशनल कप्तान के खिलाफ की गई टिप्पणी ने कई लोगों को परेशान किया है।”

    तेज गेंदबाज मोहम्मद सैफुद्दीन और तैजुल इस्लाम ने भी डायरेक्टर की इस टिप्पणी का विरोध करते हुए इसे बांग्लादेश क्रिकेट की संस्कृति और खेल समुदाय के खिलाफ बताया। तैजुल ने जोर देकर कहा कि बीसीबी डायरेक्टर को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

    BCB और ICC के बीच तनाव

    पिछले दिनों BCB और BCCI के बीच भी तनाव देखा गया है। BCCI के निर्देश पर केकेआर ने मुस्तफिजुर रहमान को IPL से रिलीज किया था, जिसके बाद बांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर रोक लगाई और ICC से मांग की कि उनके T20 वर्ल्ड कप के मैच श्रीलंका में शिफ्ट किए जाएं, क्योंकि खिलाड़ी भारत नहीं जाना चाहते।

    तमीम का موقف साफ

    तमीम इकबाल ने अपने बयान में कहा कि वे मीडिया से ही जानकारी पा रहे हैं और अचानक टिप्पणी करना सही नहीं। उनका साफ संदेश था कि बातचीत और सहमति से ही किसी विवाद को सुलझाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार होना चाहिए ताकि पीछे हटना मुश्किल न हो।

    निष्कर्ष

    BCB डायरेक्टर के विवादित बयान ने बांग्लादेश क्रिकेट में हलचल मचा दी है। खिलाड़ियों और फैंस की नाराजगी के बाद अब अधिकारी पर माफी मांगने का दबाव बढ़ गया है। इस विवाद ने देश में क्रिकेट प्रशासनिक संस्कृति और पेशेवर आचरण पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • युवा कांग्रेस के अध्यक्ष को पुलिस ने घर से उठाया, बढ़ती अपराधों को लेकर था विरोध

    युवा कांग्रेस के अध्यक्ष को पुलिस ने घर से उठाया, बढ़ती अपराधों को लेकर था विरोध


    मुरैना । मुरैना जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पुलिस ने युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष अभिषेक पचौरी को उनके घर से उठा लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब पचौरी ने 10 तारीख को थाने के घेराव का ऐलान किया था। पचौरी और उनके समर्थक शहर में बढ़ते अपराधों, खासकर लूट, डकैती और हत्याओं के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनका कहना था कि पुलिस अपराधों पर काबू पाने में नाकाम रही है और इसका असर आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।

    इस घेराव से पहले, पुलिस ने अपनी ओर से सख्ती दिखाते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक पचौरी और उनके 3-4 समर्थकों को हिरासत में ले लिया। यह कदम तब उठाया गया जब पचौरी और उनके समर्थकों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे, खासकर हाल ही में हुए अंकित माहौर हत्याकांड के बाद। पचौरी का आरोप था कि पुलिस ने सही तरीके से इस मामले की जांच नहीं की, जिससे अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।

    युवा कांग्रेस नेता का यह भी कहना था कि बढ़ते अपराधों ने इलाके में भय का माहौल बना दिया है और पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा। इससे पहले, पचौरी ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने लूटपाट और डकैती के मामलों में लापरवाही बरती है, जिससे अपराधियों को खुला माहौल मिल रहा है। पचौरी का आंदोलन पुलिस की नीतियों के खिलाफ था और इसे लेकर कांग्रेस पार्टी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला था। साथ ही, पार्टी ने आरोप लगाया था कि सरकार अपने कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की सुरक्षा में असफल रही है।

    हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से नकारा और कहा कि वे सभी मामलों की जांच कर रहे हैं और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकने के लिए वे कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस घटनाक्रम ने मुरैना में राजनीतिक माहौल को और भी गरम कर दिया है। पुलिस ने अभिषेक पचौरी और उनके समर्थकों को रातोंरात हिरासत में लेकर यह संदेश दिया है कि अब कानून व्यवस्था के खिलाफ कोई भी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर अब राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगने की तैयारी कर रही है।

  • US का नया दावा… भारत-अमेरिका ट्रेड डील अटकने की वजह ऑपरेशन सिंदूर को बताया

    US का नया दावा… भारत-अमेरिका ट्रेड डील अटकने की वजह ऑपरेशन सिंदूर को बताया


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक (US Commerce Secretary Howard Lutnick) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US trade agreement) के सिरे न चढ़ पाने के पीछे एक नया दावा पेश किया है। लुटनिक के अनुसार, यह समझौता मई और जुलाई 2025 के बीच हस्ताक्षर के लिए लगभग तैयार था, लेकिन यह इसलिए विफल रहा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को व्यक्तिगत रूप से फोन कर सौदे को अंतिम रूप देने में असहजता दिखाई। हालांकि, इस घटनाक्रम के पीछे की असल वजह ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद पैदा हुई कूटनीतिक तल्खी बताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस समय यह समझौता होना था, उसी दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच भारी तनाव था। 7 मई को भारत ने पहलगाम हत्याओं के जवाब में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। 10 मई को दोनों देशों के बीच युद्ध विराम की घोषणा से ठीक पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा कर दिया कि उन्होंने इस युद्ध विराम में मध्यस्थता की है।

    भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि युद्ध विराम पाकिस्तान के अनुरोध पर द्विपक्षीय रूप से हुआ था। ट्रंप के बार-बार मध्यस्थता का श्रेय लेने की कोशिशों ने द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था। लुटनिक के अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका उम्मीद कर रहा था कि पीएम मोदी ट्रंप को फोन करें, जिसके लिए भारत तैयार नहीं था।


    क्या भारत ने वाकई ‘ट्रेन मिस’ कर दी?

    लुटनिक ने दावा किया कि भारत ने समझौते पर हस्ताक्षर करने में तीन हफ्ते की देरी कर दी और तब तक वह “ट्रेन मिस” कर चुका था। उन्होंने ट्रंप की ‘सीढ़ी’ नीति का हवाला दिया, जिसके तहत पहले आने वाले देश को सबसे कम टैरिफ मिलता है और बाद में आने वालों के लिए यह बढ़ता जाता है। हालांकि, व्यापारिक आंकड़े लुटनिक के दावों के विपरीत हैं। अमेरिका ने ब्रिटेन के साथ 10% और वियतनाम के साथ 20% टैरिफ पर समझौता किया। लेकिन वियतनाम के बाद हुए कई समझौतों (दक्षिण कोरिया, जापान, यूरोपीय संघ) में वाशिंगटन ने कम टैरिफ लगाए, जबकि भारत पर 50% का सबसे ऊंचा टैरिफ बरकरार रखा गया।


    रूस के साथ संबंध बने ‘कांटा’
    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में रूस के साथ भारत के ऊर्जा और रक्षा संबंध भी एक बड़ी बाधा बने। जुलाई 2025 तक भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 37% थी। अगस्त की शुरुआत में, रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगा दिया। लुटनिक ने पहले भी कहा था कि भारत का रूस से सैन्य उपकरण खरीदना और BRICS के माध्यम से डॉलर पर निर्भरता कम करना अमेरिका को नागवार गुजरा है।


    फोन कॉल नहीं, नीतियां थीं वजह
    थिंक टैंक GTRI के प्रमुख अजय श्रीवास्तव ने लुटनिक के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, “इतने बड़े स्तर के व्यापारिक समझौते महज एक नेता के फोन कॉल न करने से नहीं रुकते। यह दावा वास्तविक कारण के बजाय एक ‘तर्क’ जैसा लगता है।” उन्होंने कहा कि टैरिफ, कृषि, डिजिटल व्यापार और नियामक स्वायत्तता जैसे अनसुलझे नीतिगत मतभेद ही इस सौदे के न हो पाने की असली वजह थे।

  • पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाएं…. कई राज्यों में दिन में भी कांप रहे लोग.. यहां पारा 0 से नीचे

    पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाएं…. कई राज्यों में दिन में भी कांप रहे लोग.. यहां पारा 0 से नीचे


    नई दिल्ली।
    हिमालयी राज्यों (Himalayan states) से आ रही बर्फीली हवाओं (Icy winds) ने मैदानी राज्यों को सर्द बनाया हुआ है। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir), हिमाचल, उत्तराखंड में अधिकतर स्थानों पर तापमान शून्य से नीचे (Temperature below zero) बना हुआ है। वहीं, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा समेत सभी मैदानी राज्य शीतलहर से कांप रहे हैं। कुछ राज्यों में शुक्रवार को हल्की बारिश भी हुई। इसके बाद गलन वाली ठंड का अहसास हुआ।

    इस बीच मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगले 5-7 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में और अगले 2-3 दिनों के दौरान मध्य भारत, पूवोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग हिस्सों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की बहुत संभावना है। इसके अलावा, अगले 2-3 दिनों के दौरान राजस्थान, पंजाब, हररयाणा, चंडीगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में शीतलहर की स्थिति रहने की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, 10 और 11 तारीख को हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हररयाणा, चंडीगढ़, ओडिशा, उत्तरी कर्नाटक में; 10 तारीख को उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में और 11-14 जनवरी के दौरान राजस्थान में शीत लहर की स्थिति रहने की बहुत अधिक संभावना है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले 7 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है। वहीं, अगले 24 घंटों के दौरान मध्य भारत और महाराष्ट्र में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि इसके बाद अगले 4 दिनों में धीरे-धीरे 2-3°C की बढ़ोतरी दिखेगी।


    हरियाणा के कई इलाकों में बारिश
    शुक्रवार को हरियाणा में गुरुग्राम और फरीदाबाद के अलावा पानीपत, भिवानी और झज्जर में हल्की बारिश हुई। कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान में पांच डिग्री तक गिर गया। शनिवार को भी 17 जिलों में शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की गई है। उधर, राजस्थान के अनेक इलाकों में शीतलहर का दौर जारी है और बीते चौबीस घंटे में कई जगह हल्की बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग के अनुसार, 24 घंटों के दौरान राज्य में कहीं कहीं हल्की बारिश दर्ज की गयी। साथ ही राज्य के कुछ भागों में घना से अति घना कोहरा, शीत लहर व अति शीत दिन दर्ज किये गए। सर्वाधिक बारिश झुंझुनू में 5.0 मिलीमीटर हुई। इस दौरान अधिकतम तापमान जवाई बांध (पाली) में 24.4 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान जैसलमेर में 4.6 डिग्री दर्ज किया गया। राज्य में आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहने तथा आगामी 1-2 दिन राज्य के कुछ भागों में सुबह के समय अति घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।


    चंडीगढ़ में 13 जनवरी तक स्कूल बंद
    चंडीगढ़ में लगातार बढ़ती ठंड और प्रतिकूल मौसम को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सर्दी की छुट्टियां 13 जनवरी तक बढ़ा दी हैं। आदेश के अनुसार पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के साथ नॉन-बोर्ड 9वीं और 11वीं की पढ़ाई ‘फिजिकल मोड’ में नहीं होगी


    बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव
    दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार यह मौसम प्रणाली पिछले छह घंटों के दौरान लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ी है। यह मौसम प्रणाली आगे भी उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ती रहेगी। शनिवारदोपहर इसके त्रिंकोमाली और जाफना के बीच उत्तरी श्रीलंका तट को पार करने की प्रबल संभावना है।


    हरियाणा और पंजाब के कई इलाकों में भयंकर सर्दी
    हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर गया। मौसम विभाग ने बताया कि सिरसा, नारनौल, करनाल, भिवानी, हिसार और रोहतक में तापमान छह डिग्री से कम रहा। अंबाला में न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री और फरीदाबाद में 6.8 डिग्री रहा। पंजाब में बठिंडा, गुरदासपुर, अमृतसर, लुधियाना, फरीदकोट, पटियाला में न्यूनतम तापमान सात से चार डिग्री तक रहा। दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

    कश्मीर: भीषण ठंड का प्रकोप जारी
    कश्मीर में तापमान हिमांक बिंदु से कई डिग्री नीचे गिरने के कारण श्रीनगर में इस मौसम की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई, जिससे शुक्रवार को स्थानीय डल झील के कुछ हिस्से जम गए। न्यूनतम तापमान श्रीनगर में -6, पहलगाम में -7.6, गुलमर्ग में -7.2, सोनमर्ग में -5.4, काजीगुंड में -6.2, कोकेरनाग में -3.2 और कुपवाड़ा में -5.8 डिग्री रहा। 21 जनवरी तक मौसम शुष्क रहने के साथ आसमान में बादल छाए रहने की संभावना जताई है।

    छत्तीसगढ़ : 28 दिन में ठंड से तीन की मौत
    छत्तीसगढ़ में हिमालय क्षेत्र से आ रही सर्द हवाओं के असर से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग ने अगले दो दिन तक 18 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। गुरुवार रात कोरबा जिले के सरई सिंगार निवासी 55 वर्षीय हरप्रसाद भैना की ठंड लगने से मौत हो गई। उनका शव कसईपाली स्थित यात्री प्रतीक्षालय में मिला। पिछले 28 दिनों के भीतर राज्य में ठंड से तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।


    लद्दाख कड़ाके की ठंड की गिरफ्त में
    केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख इन दिनों शीत लहर के साथ कड़ाके की ठंड की गिरफ्त में है। न्यूनतम तापमान द्रास में -24.6, लेह में -14.4, कारगिल में -13.2, पदुम में -20.3, न्योमा में -21.6 डिग्री रहा। विभाग के अनुसार 10 जनवरी तक न्यूनतम तापमान में काफी गिरावट आने का अनुमान है।

  • MP: भोपाल भी पी रहा जहरीला पानी… 4 इलाकों के पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया, स्लॉटर हाउस सील

    MP: भोपाल भी पी रहा जहरीला पानी… 4 इलाकों के पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया, स्लॉटर हाउस सील


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) और आसपास के इलाकों में दूषित पानी (Contaminated water) को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच भोपाल नगर निगम की जांच में शहर के चार अलग-अलग स्थानों पर ई-कोलाई बैक्टीरिया (E. coli bacteria) की पुष्टि हुई है। नगर निगम द्वारा अब तक लिए गए कुल 1,810 सैंपलों में से ये चार नमूने फेल पाए गए, जो मुख्य रूप से ट्यूबवेल और ग्राउंड वॉटर से जुड़े थे। भोपाल की मेयर मालती राय ने साफ किया है कि यह दूषित पानी निगम की मुख्य पाइपलाइन से सप्लाई होने वाला पानी नहीं है, बल्कि कच्चा जल है। इस मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक स्लॉटर हाउस (बूचड़खाने) को भी सील कर दिया है क्योंकि वहां के नमूनों में गड़बड़ी पाई गई थी।

    राय ने कहा, नगर निगम को कई शिकायतें मिल रही हैं। नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी तुरंत संबंधित स्थानों पर जाकर जांच कर रहे हैं। शिकायत होने पर नगर निगम की टीम मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान कर रही है। रिसाव या सार्वजनिक शिकायतों की स्थिति में नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी जांच कर रहे हैं। वे लोगों की शिकायतों के आधार पर जांच कर रहे हैं और सैंपलों को संबंधित अधिकारियों को भेज रहे हैं।

    मेयर ने यह भी बताया कि शहर के एक स्लॉटर हाउस को उसके नमूनों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद सील कर दिया गया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्लॉटर हाउस के सैंपल गलत पाए गए हैं। नमूने गलत पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। संबंधित अधिकारी, निजी विक्रेता या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

    दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सीवेज प्रोजेक्ट में हुई लापरवाही के कारण गंदा पानी पीने के पानी के स्रोतों में मिल रहा है, जिससे जनता का स्वास्थ्य खतरे में है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जबलपुर के ग्वारीघाट में सीवेज का पानी नर्मदा नदी में मिलने और वहां से पीने के पानी की आपूर्ति होने पर गहरी चिंता जताई है। हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के बाद, अब पूरे प्रदेश में जल संकट और स्वच्छता को लेकर प्रशासन पर भारी दबाव है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

  • केवल दिल्ली ही नही, वायु प्रदूषण की चपेट में देश के 40 फीसदी शहर, देखें टॉप-10 की लिस्ट

    केवल दिल्ली ही नही, वायु प्रदूषण की चपेट में देश के 40 फीसदी शहर, देखें टॉप-10 की लिस्ट


    नई दिल्ली।
    सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (National Capital Delhi) ही नहीं बल्कि देश (India) के लगभग 44% शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण (44% Cities Affected Air Pollution) की चपेट में हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या अल्पकालिक घटनाओं के बजाय उत्सर्जन स्रोतों से लगातार जारी उत्सर्जन का नतीजा है। ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA)की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से वायु प्रदूषण का सामना कर रहे लगभग 44 फीसदी शहरों में से महज चार प्रतिशत राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के दायरे में आते हैं।

    CREA ने उपग्रह डेटा की मदद से भारत के 4,041 शहरों में पीएम 2.5 कणों के स्तर का आकलन किया है। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, “इन 4,041 शहरों में से कम से कम 1,787 शहरों (करीब 44%) में पीएम2.5 कणों का स्तर हाल के पांच वर्षों (2019, 2021, 2022, 2023 और 2024) में हर साल राष्ट्रीय वार्षिक मानक से अधिक दर्ज किया गया, जिनमें कोविड-19 से प्रभावित वर्ष 2020 शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि लगभग 44 फीसदी भारतीय शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या अल्पकालिक घटनाओं के बजाय उत्सर्जन स्रोतों से लगातार जारी उत्सर्जन का नतीजा है।”

    सर्वाधिक दस प्रदूषित शहर कौन-कौन?
    रिपोर्ट में वर्ष 2025 में पीएम2.5 कणों के स्तर के आकलन के आधार पर बायर्नीहाट (असम), दिल्ली और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) को भारत के तीन सर्वाधिक प्रदूषित शहर करार दिया गया, जहां वार्षिक सांद्रता क्रमशः 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर³, 96 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 93 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नोएडा चौथे, गुरुग्राम पांचवें, ग्रेटर नोएडा छठे, भिवाड़ी सातवें, हाजीपुर आठवें, मुजफ्फरनगर नौवें और हापुड़ दसवें स्थान पर है।


    NCAP के अंतर्गत केवल 130 शहर

    रिपोर्ट में कहा गया है, “इसके बावजूद वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए भारत की प्रमुख एनसीएपी योजना के दायरे में लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे महज चार फीसदी शहर आते हैं। एनसीएपी के अंतर्गत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है और इनमें से केवल 67 शहर ही उन 1,787 शहरों में शामिल हैं, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) पर खरा उतरने में लगातार कई वर्षों से विफल साबित हो रहे हैं।”


    मानकों का उल्लंघन करने वाले शहरों में सर्वाधिक UP में

    रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएएक्यूएस के मानकों का लगातार उल्लंघन करने वाले शहरों में सर्वाधिक 416 शहर उत्तर प्रदेश के हैं। इसमें कहा गया है कि राजस्थान के 158, गुजरात के 152, मध्यप्रदेश के 143, पंजाब के 136, बिहार के 136 और पश्चिम बंगाल के 124 शहर एनएएक्यूएस के मानकों पर खरा उतरने में विफल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीएपी में शामिल 130 शहरों में से 28 में अभी भी व्यापक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएएक्यूएमएस) मौजूद नहीं हैं, जबकि सीएएएक्यूएमएस से लैस 102 शहरों में से 100 शहरों में पीएम10 का स्तर 80 फीसदी या उससे अधिक दर्ज किया गया है।

    इसमें कहा गया है, “पीएम10 उत्सर्जन पर लगाम लगाने के मोर्चे पर प्रगति मिली-जुली रही है। 23 शहरों ने पीएम10 के स्तर में कमी का संशोधित 40 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया है, 28 शहरों में 21-40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, 26 शहरों में 1-20 प्रतिशत का मामूली सुधार हुआ है, जबकि 23 शहरों में कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से पीएम10 के स्तर में वास्तव में वृद्धि हुई है।”


    पीएम10 कणों के मामले में दिल्ली शीर्ष पर

    रिपोर्ट में कहा गया है, “पीएम10 कणों के मामले में दिल्ली शीर्ष पर है, जहां वार्षिक औसत स्तर 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय मानक से तीन गुना है। गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा इस मामले में दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं, जहां पीएम10 कणों का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 190 और 188 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा है।” इसमें कहा गया है कि सबसे ज्यादा पीएम10 सांद्रता वाले शीर्ष 50 शहरों में राजस्थान के सर्वाधिक 18 शहर शामिल हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (10), मध्यप्रदेश (5), बिहार (4) और ओडिशा (4) का स्थान आता है।


    पीएम2.5 के स्तर में कमी लाने को प्राथमिकता
    सीआरईए के भारत विश्लेषक मनोज कुमार के मुताबिक, लक्षित और विज्ञान-आधारित सुधारों के जरिये देश में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता हो सकता है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह है कि पीएम10 की तुलना में पीएम2.5 और इसकी पूर्ववर्ती गैसों (सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) के स्तर में कमी लाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, एनसीएपी के तहत मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले शहरों की सूची को संशोधित किया जाना चाहिए, उद्योगों एवं बिजली संयंत्रों के लिए सख्त उत्सर्जन मानक निर्धारित किए जाने चाहिए, स्रोत विभाजन अध्ययनों के आधार पर धन आवंटित किया जाना चाहिए तथा क्षेत्रीय स्तर पर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायुक्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।”


    सड़क पर धूल प्रबंधन पर सबसे ज्यादा 68 फीसदी राशि खर्च
    रिपोर्ट में कहा गया है कि एनसीएपी की शुरुआत से लेकर अब तक इस कार्यक्रम और 15वें वित्त आयोग के अनुदान के तहत 13,415 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 9,929 करोड़ रुपये (74 फीसदी) का इस्तेमाल किया जा चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क पर धूल प्रबंधन पर सबसे ज्यादा 68 फीसदी राशि खर्च की गई है। इसमें कहा गया है कि परिवहन प्रबंधन पर 14 प्रतिशत, अपशिष्ट एवं जैव ईंधन के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर 12 प्रतिशत, उद्योगों, घरेलू ईंधन उपयोग, जन जागरूकता अभियान संबंधी उपायों पर एक-एक प्रतिशत से कम और क्षमता निर्माण एवं निगरानी पर तीन प्रतिशत राशि खर्च की गई है।

  • संसद का Budget सत्र 28 जनवरी से होगा शुरू,  बजट Day पर सस्पेंस बरकरार

    संसद का Budget सत्र 28 जनवरी से होगा शुरू, बजट Day पर सस्पेंस बरकरार

    नई दिल्ली। बजट सत्र (Budget Session) के शुरू किए जाने की तारीख को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। सरकार द्वारा मंजूर किए गए एक प्रस्ताव के अनुसार संसद का बजट सत्र (Parliament’s Budget session) 28 जनवरी से 2 अप्रैल, 2026 तक दो चरणों में होगा। सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जिसके बाद अवकाश होगा। संसद के दूसरे चरण की शुरुआत 9 मार्च को होगी और 2 अप्रैल को समापन होगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है।


    बजट-डे पर सस्पेंस बरकरार

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आम बजट एक फरवरी को ही पेश किया जाएगा या नहीं लेकिन मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इसी तारीख को बजट पेश होगा। दरअसल, देश का आम बजट आगामी एक फरवरी को ही पेश किया जाता रहा है लेकिन इस बार इस तारीख को रविवार है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि रविवार के दिन बजट पेश किया जाएगा या नहीं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के सोशल मीडिया पोस्ट में भी जिक्र नहीं है।

    बजट सत्र के दौरान पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है और उसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों की परंपरा के अनुसार, इसके अगले दिन एक फरवरी को बजट पेश किया जाता है। पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर और बजट पर चर्चा होती है। इसके बाद अवकाश के दौरान संसद की समितियां बजट पर मंत्रालय-वार विस्तृत चर्चा करती हैं। दूसरे चरण में वित्त विधेयक और अनुदान मांगों पर चर्चा होती है और उन्हें पारित किया जाता है।

  • FASTag Annual Pass के नाम हो रही धोखाधड़ी, सतर्क रहें…. NHAI ने जारी की चेतावनी

    FASTag Annual Pass के नाम हो रही धोखाधड़ी, सतर्क रहें…. NHAI ने जारी की चेतावनी


    नई दिल्ली। अगर आप भी फास्टेग एनुअल पास (FASTag Annual Pass) खरीदने की सोच रहे हैं या पहले से इसे रिन्यू (Renew) करने का प्लान बना रहे हैं, तो बेहद सतर्क रहिए। NHAI ने हाल ही में एक बड़े धोखाधड़ी (fraud) चेतावनी जारी की है जिसमें फर्जी वेबसाइट्स और अनधिकृत लिंक के जरिए वाहन मालिकों को फंसाया जा रहा है। NHAI के अधिकारियों का कहना है कि कुछ फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और लिंक “Annual Pass” की बिक्री का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में वे धोखाधड़ी के जाल हैं। इन झूठे ऑफर्स पर भरोसा करने से न सिर्फ आपका पैसा लगभग 3,000 रुपए तक तथा इसे खरीदते समय दर्ज की गई व्यक्तिगत और वाहन संबंधित जानकारी का दुरुपयोग होने का खतरा भी बढ़ जाता है।


    वार्षिक FASTag पास क्या होता है?

    FASTag Annual Pass एक वार्षिक सुविधा है जिसे NHAI ने उन निजी वाहनों के लिए पेश किया है जो राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर अक्सर यात्रा करते हैं। इसके तहत एक ₹3,000 का एक-बार शुल्क देकर वाहन मालिक एक साल या 200 टोल (जो पहले पूरा हो) तक टोल शुल्क के बिना यात्रा कर सकता है।

    यह Annual Pass Rajmargyatra App या आधिकारिक NHAI वेबसाइट के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। जैसे ही पास सक्रिय होता है, SMS के जरिए इसकी पुष्टि भी मिलती है। इसे टीकरी और निजी एक्सप्रेसवे जैसे कुछ टोलों पर लागू नहीं किया जा सकता इसलिए यात्रा से पहले मार्ग और टोल लिस्ट चेक करना महत्त्वपूर्ण है।


    क्या है Scam का तरीका?
    NHAI ने पाया है कि कुछ फर्जी वेबसाइट्स, अनधिकृत लिंक्स और अनधिकृत ऐप्स “FASTag Annual Pass” बेचने का दावा करते हैं। ये प्लेटफॉर्म अपने नकली विज्ञापनों और आकर्षक ऑफर्स के साथ लोगों को लुभाते हैं। जैसे ही यूज़र इन फर्जी लिंक्स पर क्लिक करता है और अपनी वाहन और व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करता है, कई बार पैसा पहले ही कट जाता है और पास कभी एक्टिव नहीं होता।

    कुछ यूजर्स ने ऑनलाइन पर ऐसे अनुभव भी साझा किए हैं जहां आधिकारिक ऐप पर भुगतान पेज फ्रीज़ हो जाता है या वाहन विवरण VAHAN डेटाबेस में ना होने के कारण पास नहीं बन पाता। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना आवश्यक है।