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  • जिनपिंग बनने जा रहे 'शांति दूत'; चीन की मदद से सुधरेंगे उत्तर और दक्षिण कोरिया के रिश्ते?

    जिनपिंग बनने जा रहे 'शांति दूत'; चीन की मदद से सुधरेंगे उत्तर और दक्षिण कोरिया के रिश्ते?


    वीजिंग। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उत्तर कोरिया के परमाणु संकट को सुलझाने और दोनों कोरियाई देशों के बीच बढ़ती शत्रुता को कम करने के लिए उन्होंने चीन से शांति मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आग्रह किया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग ने बुधवार को कहा कि उन्होंने उत्तर कोरियाई परमाणु संकट के समाधान और दोनों कोरियाई देशों के बीच शत्रुता कम करने में मदद के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया है।
    म्योंग ने कहा कि उन्होंने यह अनुरोध दोनों नेताओं के इस सप्ताह की शुरुआत में बीजिंग में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान किया था।

    दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि हम प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उत्तर कोरिया के साथ हमारे सभी संपर्क चैनल पूरी तरह से बंद हैं, इसलिए हम बिल्कुल संवाद नहीं कर पा रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि चीन का शांति के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाना अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हमारे प्रयासों की सराहना की और कहा कि धैर्य रखने की जरूरत है।

    चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख कूटनीतिक समर्थक है। दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने बार-बार चीन से अपने प्रभाव का उपयोग करके उत्तर कोरिया को लंबे समय से ठप पड़ी कूटनीति को फिर से शुरू करने या परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए मनाने का आग्रह किया है।

    चीन ने उत्तर कोरिया से जुड़े मुद्दों में शामिल सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है। उसने हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत प्रतिबंधित हथियारों के परीक्षणों के बावजूद उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध कड़े करने के अमेरिका और अन्य देशों के प्रयासों को रोक दिया है।

    उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया है और 2019 में उसके नेता किम जोंग उन की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उच्च स्तरीय परमाणु कूटनीति विफल होने के बाद से अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करने के कदम उठाए हैं।

  • कितनी ताकतवर है लैटिन अमेरिकी सेना? US को नाकों चने चबा सकते हैं ये देश

    कितनी ताकतवर है लैटिन अमेरिकी सेना? US को नाकों चने चबा सकते हैं ये देश


    वाशिंगटन । हाल ही में वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के ‘अपहरण’ के बाद लैटिन अमेरिका में तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब कोलंबिया, क्यूबा और मैक्सिको को भी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि यदि ये देश अपना रवैया नहीं सुधारते हैं तो अमेरिका कार्रवाई करेगा। उन्होंने इस रुख को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कदम और पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी हितों की सुरक्षा से जोड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन देशों की सेनाएं दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका का सामना करने में सक्षम हैं?

    सैन्य शक्ति में भारी असमानता
    इन बयानों ने लैटिन अमेरिका में अमेरिकी दखल को लेकर पुराने तनावों को फिर जीवित कर दिया है।

    जिन देशों को चेतावनी दी गई है, वे वॉशिंगटन के हस्तक्षेप के पक्षधर नहीं हैं, लेकिन उनकी सेनाओं की क्षमता अमेरिका के मुकाबले बेहद सीमित है। अमेरिका की सैन्य ताकत दुनिया में सबसे अधिक मानी जाती है। 2025 में उसका रक्षा बजट 895 अरब डॉलर रहा- जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 3.1 प्रतिशत है। 2025 की ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग के अनुसार ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे शक्तिशाली सेना है और वैश्विक स्तर पर 11वें स्थान पर है। सक्रिय सैनिकों की संख्या, लड़ाकू विमान, टैंक, नौसैनिक संसाधन और सैन्य बजट- हर पैमाने पर ये देश अमेरिका से काफी पीछे हैं। पारंपरिक युद्ध में अमेरिकी बढ़त स्पष्ट है। लैटिन अमेरिकी सेनाएं अमेरिकी हस्तक्षेप का प्रभावी मुकाबला करने में असमर्थ हैं। हालांकि, कुछ देशों में पैरामिलिट्री फोर्सेस (अर्द्धसैनिक बल) मजबूत हैं, जो असममित युद्ध (गुरिल्ला टैक्टिक्स) में इस्तेमाल हो सकते हैं।

    अर्धसैनिक बल: लैटिन अमेरिका का गुप्त हथियार
    ऊपर कुछ प्रमुख लैटिन अमेरिकी देशों के नाम दिए गए हैं। लेकिन मुख्य खतरा केवल चार देशों- क्यूबा, कोलंबिया, वेनेजुएला और मेक्सिको पर मंडरा रहा है। इनमें वेनेजुएला पर अमेरिका पहले ही हमला कर उसके राष्ट्रपति को पकड़ लाया है। हालांकि एक क्षेत्र ऐसा है जहां इन देशों के पास तुलनात्मक बढ़त मानी जाती है और वे अमेरिका को नाकों चने चबा सकते हैं।

    ये हैं उनके अर्धसैनिक (पैरामिलिट्री) बल। ये समूह अक्सर नियमित सेनाओं के समानांतर काम करते हैं और असममित युद्ध व अपरंपरागत रणनीतियों का सहारा लेते हैं।

    क्यूबा के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल बताया जाता है- करीब 11.4 लाख सदस्य। इनमें देश-नियंत्रित मिलिशिया और पड़ोस आधारित रक्षा समितियां शामिल हैं। सबसे बड़ा संगठन ‘टेरिटोरियल ट्रूप्स मिलिशिया’ है, जो बाहरी खतरों या आंतरिक संकट में नियमित सेना की सहायता के लिए नागरिक रिजर्व के रूप में काम करता है।

    वेनेजुएला में सरकार समर्थक नागरिक सशस्त्र समूह- जिन्हें “कोलेक्टिवोस” कहा जाता है पर राजनीतिक नियंत्रण लागू करने और विरोधियों को डराने के आरोप लगते रहे हैं। औपचारिक रूप से ये सशस्त्र बलों का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन व्यापक रूप से माना जाता है कि राष्ट्रपति मादुरो के शासन में इन्हें राज्य का संरक्षण मिलता रहा है।

    कोलंबिया में 1980 के दशक में दक्षिणपंथी अर्धसैनिक समूह उभरे थे, जिनका उद्देश्य वामपंथी विद्रोहियों से लड़ना था। 2000 के दशक के मध्य में इनके औपचारिक विमोचन के बावजूद, कई समूह बाद में आपराधिक या नियो-पैरामिलिट्री संगठनों के रूप में फिर सक्रिय हो गए। शुरुआती दौर में इनका गठन शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी काउंटर-इंसर्जेंसी सलाहकारों के मार्गदर्शन में कोलंबियाई सेना की भागीदारी से हुआ था।

    मेक्सिको में भारी हथियारों से लैस ड्रग कार्टेल- जैसे जेटास व्यवहार में अर्धसैनिक ताकत की तरह काम करते हैं।

    पूर्व सैनिकों द्वारा बनाए गए इन समूहों के पास सैन्य-स्तरीय हथियार हैं और वे कई इलाकों में क्षेत्रीय नियंत्रण रखते हैं, जिससे स्थानीय पुलिस पर भारी पड़ते हैं। इसी कारण मैक्सिकन सेना को कानून-व्यवस्था में तैनात करना पड़ा है।
    किस देश के पास कितने अर्द्धसैनिक बल?
    क्यूबा, वेनेजुएला, कोलंबिया और मैक्सिको दुनिया के कुछ सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री फोर्सेस) वाले देशों में शामिल हैं। ग्लोबल फायरपावर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में सबसे बड़ी पैरामिलिट्री फोर्सेस इस प्रकार हैं: सबसे ज्यादा बांग्लादेश में 68 लाख, भारत में 25.27 लाख, क्यूबा में 11.45 लाख, चीन में 6.25 लाख, सर्बिया में 6 लाख, पाकिस्तान में 5 लाख, मिस्र में 3 लाख, इंडोनेशिया में 2.5 लाख, रूस में 2.5 लाख, वियतनाम में 2.5 लाख, ईरान में 2.2 लाख, वेनेजुएला में 2.2 लाख, ब्राजील में 2 लाख, अल्जीरिया में 1.5 लाख, कोलंबिया में 1.5 लाख, फ्रांस में 1.5 लाख, सऊदी अरब में 1.5 लाख, तुर्की में 1.5 लाख, लाओस में 1.2 लाख और मैक्सिको में 1.2 लाख सदस्य हैं। इनमें क्यूबा की टेरिटोरियल ट्रूप्स मिलिशिया जैसी इकाइयां, वेनेजुएला के प्रो-गवर्नमेंट कोलेक्टिवोस, कोलंबिया के विभिन्न पैरामिलिट्री ग्रुप्स और मैक्सिको की सुरक्षा बल प्रमुख हैं, जो आंतरिक सुरक्षा और रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    अमेरिकी हस्तक्षेप का लंबा इतिहास
    पिछले दो सौ वर्षों में अमेरिका ने कई बार लैटिन अमेरिका में हस्तक्षेप किया है। 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में ‘बनाना वॉर्स’ के दौरान अमेरिकी सेनाएं मध्य अमेरिका में कॉरपोरेट हितों की सुरक्षा के लिए तैनात रहीं।
    1934 में राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने ‘गुड नेबर पॉलिसी’ के तहत गैर-हस्तक्षेप का वादा किया।

    लेकिन शीत युद्ध के दौरान स्थिति बदली। 1947 में स्थापित अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के समन्वय से अमेरिका ने कई निर्वाचित सरकारों को गिराने के अभियानों को फंड किया। पनामा एकमात्र लैटिन अमेरिकी देश है, जहां अमेरिका ने औपचारिक रूप से सैन्य हमला किया। इसने 1989 में राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश के नेतृत्व में Operation Just Cause चलाया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रपति मैनुअल नोरिएगा को हटाना था, जिन्हें बाद में ड्रग तस्करी सहित अन्य अपराधों में दोषी ठहराया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूर्ण युद्ध होता है, तो लैटिन अमेरिकी देशों की नियमित सेनाएं अमेरिकी तकनीक और वायु सेना का मुकाबला नहीं कर पाएंगी। हालांकि, इन देशों में मौजूद विशाल अर्धसैनिक नेटवर्क और छापामार लड़ाके अमेरिका के लिए किसी भी जमीनी कार्रवाई को बेहद जटिल और खूनी बना सकते हैं।

  • ड्रीम मिलिट्री बनाने ट्रंप का 1.5 ट्रिलियन बजट का ऐलान; भारत भी पीछे नहीं

    ड्रीम मिलिट्री बनाने ट्रंप का 1.5 ट्रिलियन बजट का ऐलान; भारत भी पीछे नहीं

    वाशिंगटन। अमेरिका 2027 में रक्षा पर पहले से ज्यादा खर्च करने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा बजट बढ़ाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने ज्यादा खर्च करने की क्षमता की वजह टैरिफ से होने वाली कमाई को बताया है। डिफेंस बजट बढ़ाए जाने की तैयारी ऐसे समय पर हो रही है, जब ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला पर ऐक्शन लिया है और कई देशों पर कार्रवाई के संकेत दे रहे हैं।
    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘सीनेटर्स, कांग्रेसमैन, सेक्रेटरी और अन्य राजनेताओं से लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद, मैंने तय किया है कि हमारी देश की भलाई के लिए 2027 के लिए सैन्य बजट 1 ट्रिलियन डॉलर की जगह 1.5 ट्रिलियन डॉलर होगा। खासतौर से ऐसे मुश्किल भरे और खतरनाक समय में।’

    उन्होंने कहा कि ज्यादा खर्च के जरिए अमेरिका ऐसी सेना तैयार कर सकता है, जो किसी भी दुश्मन से देश को सुरक्षित रख सके। अमेरिकी राष्ट्रपति इसे ‘ड्रीम मिलिट्री’ बता रहे हैं।
    टैरिफ को बताया वजह

    ट्रंप ने टैरिफ से होने वाली कमाई का हवाला देते हुए खर्च बढ़ाने की बात कही है। उन्होंने कहा, ‘अगर अन्य देशों से टैरिफ (सीमा शुल्क) के माध्यम से इतनी बड़ी मात्रा में राशि प्राप्त न हो रही होती, जिनमें से कई देशों ने अतीत में संयुक्त राज्य अमेरिका को ऐसे स्तरों पर ‘लूटा’ है जो पहले कभी नहीं देखे गए, तो मैं 1 ट्रिलियन डॉलर की संख्या पर ही टिका रहता।’

    भारत का कितना था 2025 का बजट

    साल 2025-26 के लिए रक्षा मंत्रालय को 6.81 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। खास बात है कि आंकड़े में 2024-25 की तुलना में 9.53 प्रतिशत का इजाफा किया गया था।

    रक्षा मंत्रालय की 1 फरवरी 2025 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सशस्त्र बलों के पूंजीगत बजट के तहत 1.80 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। साथ ही घरेलू रक्षा उद्योगों से खरीद के लिए 1.12 लाख करोड़ रुपये निर्धारित हुए। रक्षा अनुसंधान और विकास बजट में 12% की बढ़त हुई थी। भारतीय तटरक्षक बल के पूंजी बजट में 43% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई थी।

  • अमेरिकी सेना ने रूसी तेल टैंकर को किया जब्त, हो सकता है महासंग्राम

    अमेरिकी सेना ने रूसी तेल टैंकर को किया जब्त, हो सकता है महासंग्राम

    वाशिंगटन। अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक और कैरिबियन में एक के बाद एक की गई कार्रवाइयों में वेनेजुएला से जुड़े दो प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त कर लिया है।
    अमेरिकी यूरोपीय कमान ने “अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन” के आरोप में व्यापारिक पोत बेला 1 को जब्त करने की घोषणा की। तटरक्षक बल के एक कटर ने टैंकर का पीछा करते हुए उसे स्कॉटलैंड और आइसलैंड के बीच के जलक्षेत्र में धकेल दिया, जब उसने वेनेजुएला के आसपास प्रतिबंधित तेल जहाजों पर अमेरिकी नाकाबंदी से बचने की कोशिश की।

    इसके बाद, गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने खुलासा किया कि अमेरिकी सेना ने कैरिबियन में टैंकर सोफिया पर भी नियंत्रण कर लिया है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि दोनों जहाज “या तो आखिरी बार वेनेजुएला में रुके थे या उसकी ओर जा रहे थे।”

    जानें अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा

    यूरोप की ओर मुड़ने के बाद बेला 1 को रूसी ध्वज के तहत पंजीकृत किया गया और उसका नाम बदलकर मरीनरा कर दिया गया।

    एक अमेरिकी अधिकारी ने, जिन्होंने संवेदनशील सैन्य अभियानों पर चर्चा करने के लिए नाम न छापने की शर्त पर बुधवार को एसोसिएटेड प्रेस से बात की, बताया कि अमेरिकी सेना ने इसे जब्त करने के बाद कानून प्रवर्तन अधिकारियों को इसका नियंत्रण सौंप दिया। ईरान समर्थित लेबनानी आतंकवादी समूह हिज़्बुल्लाह से जुड़ी एक कंपनी के लिए माल की तस्करी करने के आरोप में इस जहाज पर 2024 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाया गया था।

    एसोसिएटेड प्रेस ने अमेरिकी सेना के हवाले से बताया कि बुधवार को संयुक्त राज्य अमेरिका ने अटलांटिक महासागर में दो सप्ताह से अधिक समय तक चले पीछा करने के बाद वेनेजुएला से जुड़े एक रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया, जबकि एक रूसी पनडुब्बी और युद्धपोत भी पास ही थे।

    रूसी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

    रूसी विदेश मंत्रालय ने जहाज़ ज़ब्त किए जाने से पहले कहा था कि वह रूसी तेल टैंकर मेरिनेरा के आसपास पैदा हुई असामान्य स्थिति पर नज़र रख रहा है। आधिकारिक समाचार एजेंसी तास द्वारा प्रकाशित मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया कि “पिछले कई दिनों से अमेरिकी तटरक्षक बल का एक जहाज़ मेरिनेरा का पीछा कर रहा है, जबकि हमारा जहाज़ अमेरिकी तट से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है।” बुधवार को सार्वजनिक समुद्री ट्रैकिंग साइटों ने जहाज़ की स्थिति स्कॉटलैंड और आइसलैंड के बीच उत्तर की ओर बढ़ते हुए दिखाई। अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि जहाज़ उत्तरी अटलांटिक में था।

    रूस के परिवहन मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि अमेरिकी नौसेना बलों ने “किसी भी देश के क्षेत्रीय जलक्षेत्र के बाहर” मरीनरा टैंकर पर कब्जा कर लिया और “जहाज से संपर्क टूट गया।” मंत्रालय ने कहा कि 24 दिसंबर, 2025 को जहाज को “रूसी कानून और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जारी रूसी संघ का ध्वज फहराने का अस्थायी परमिट प्राप्त हुआ था।”

    जब्ती की खबर के तुरंत बाद, परिवहन मंत्रालय के बयान में कहा गया कि “किसी भी देश को अन्य देशों के अधिकार क्षेत्र में विधिवत पंजीकृत जहाजों के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है,” और इसके लिए 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का हवाला दिया गया।

  • अब ट्रंप भारतीय छात्रों से बोले- आपको अमेरिका से कभी भी निकाला जा सकता है

    अब ट्रंप भारतीय छात्रों से बोले- आपको अमेरिका से कभी भी निकाला जा सकता है

    वॉशिंगटन । भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में पिछले कुछ महीनों में दरार देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विभिन्न फैसलों और बयानों से दोनों देशों में तनाव और बढ़ा है। इस बीच, अमेरिका ने बुधवार को अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को चेतावनी दी है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने दो टूक कहा है कि अमेरिकी कानूनों को तोड़ने से स्टूडेंट वीजा रद्द हो सकता है और यहां तक कि आपको देश से भी निकाला जा सकता है।

    भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”अमेरिकी कानूनों को तोड़ने पर आपके स्टूडेंट वीजा के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

    अगर आपको गिरफ्तार किया जाता है या आप कोई कानून तोड़ते हैं, तो आपका वीजा रद्द किया जा सकता है, आपको देश से निकाला जा सकता है, और आप भविष्य में अमेरिकी वीजा के लिए अयोग्य हो सकते हैं। नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा को खतरे में न डालें। अमेरिकी वीजा एक सुविधा है, अधिकार नहीं।”

    अमेरिकी दूतावास समय-समय पर सोशल मीडिया के जरिए चेतावनियां जारी करता रहता है। पिछले दिनों उसने भारत से अमेरिका जाने वाले अवैध अप्रवासियों को एक सख्त पब्लिक चेतावनी जारी की थी।

    चेतावनी में साफ कहा गया कि इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन करने पर ‘बड़ी क्रिमिनल सजा’ हो सकती है। चेतावनी का यह मैसेज सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, और यह यूनाइटेड स्टेट्स के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में इमिग्रेशन पर बढ़ती सख्ती के दौरान आया।

    अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर लिखा था कि अगर आप अमेरिकी कानून तोड़ते हैं, तो आपको कड़ी क्रिमिनल सजा मिलेगी। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन अमेरिका में गैर-कानूनी इमिग्रेशन को खत्म करने और हमारे देश की सीमाओं और हमारे नागरिकों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वीजा नियमों के सख्त होने के कारण, पिछले साल नए इंटरनेशनल एनरोलमेंट में अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर आने वालों की संख्या में 17% की गिरावट आई है। इस बीच, H-1B वीजा आवेदकों को, जो कुशल इंटरनेशनल कर्मचारियों को अमेरिका में रोजगार खोजने की अनुमति देता है, अभूतपूर्व इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।

  • भोपाल में 40 साल पुरानी पाइपलाइन जर्जर, रसोई तक पहुंच रहा सीवेज का पानी

    भोपाल में 40 साल पुरानी पाइपलाइन जर्जर, रसोई तक पहुंच रहा सीवेज का पानी


    भोपाल। भोपाल नगर निगम ने शहर को स्मार्ट सिटी और सबसे स्वच्छ शहर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए हैं लेकिन असलियत में शहर की जलापूर्ति और सीवेज व्यवस्था आज भी पुराने और जर्जर ढांचे पर निर्भर है। चार से पांच दशक पुरानी पाइपलाइनें कई इलाकों में सीवेज और पानी की पाइपलाइन के एक साथ होने के कारण दूषित पानी की समस्या बढ़ गई है।

    हाल ही में नगर निगम ने शहर के विभिन्न इलाकों से पानी के नमूने लिए थे। इन नमूनों का परीक्षण करने पर बुधवार को 250 नमूनों में से चार में बैक्टीरिया पाया गया। इनमें से दो सैंपल आदमपुर खंती के पास, एक बाजपेयी नगर के पास नलकूप और एक खानूगांव में कुएं से लिया गया था। यह साफ करता है कि पानी की गुणवत्ता में भारी कमी है और नागरिकों को दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

    पुराने शहर के कई इलाकों में सीवेज और पानी की पाइपलाइनें एक साथ बिछाई गई हैं, जिससे यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि रसोई तक पहुंचने वाला पानी पूरी तरह से साफ और सुरक्षित हो। यही कारण है कि भोपाल के नागरिक पेट से संबंधित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि 80% बीमारियां दूषित पानी के कारण होती हैं, और यह समस्या भोपाल में दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

    इसके बावजूद केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम अधूरा पड़ा हुआ है। राजधानी में दूषित पानी पीने से इंदौर में 20 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन भोपाल में इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। नगर निगम लीकेज सुधार और सीवेज चैंबर की सफाई का दिखावा कर रहा है लेकिन असल में स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।यह समस्या जितनी गंभीर है, उतनी ही उपेक्षित भी है, और यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो शहर में पानी की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर और गंभीर संकट आ सकता है।

  • इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में नर्स की लापरवाही से डेढ़ महीने के बच्चे का अंगूठा कटकर गिरा

    इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में नर्स की लापरवाही से डेढ़ महीने के बच्चे का अंगूठा कटकर गिरा


    इंदौर । सरकारी अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधाओं का दावा किया जाता है, लेकिन कभी-कभी यहां इलाज के दौरान लापरवाही के गंभीर मामले सामने आ जाते हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के न्यू चेस्ट वार्ड में एक शर्मनाक घटना सामने आई जहां डेढ़ महीने के एक बच्चे का अंगूठा नर्स की लापरवाही से कटकर गिर गया।

    घटना तब घटी जब नर्स इंट्राकेथ बदलने के दौरान बच्चे का हाथ पकड़ रही थी और टैप को काटते समय उसने कैंची से बच्चे के अंगूठे को काट दिया। इसके परिणामस्वरूप बच्चे का अंगूठा कटकर जमीन पर गिर गया। इस घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यूनिट के डॉक्टरों ने अस्पताल के अधीक्षक को इस घटना की जानकारी नहीं दी जिससे यह लापरवाही छिपी रही।

    सौभाग्य से बच्चे को तुरंत सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल भेजा गया जहां सर्जरी कर बच्चे के कटे हुए अंगूठे को जोड़ा गया। हालांकि इस घटना ने अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता और नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना न केवल अस्पताल की लापरवाही का प्रतीक बन गई, बल्कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही लापरवाही की ओर भी इशारा करती है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से मरीजों की जान बचाई जा सके।

  • UPI से जुड़ा नया नियम लागू… गलती पर यूजर्स को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान

    UPI से जुड़ा नया नियम लागू… गलती पर यूजर्स को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में डिजिटल पेमेंट (Digital payments.) का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय माध्यम बन चुका UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है। सब्ज़ी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग (Online shopping), बिजली बिल (Electricity bills), स्कूल फीस (School Fees) और ट्रैवल बुकिंग (Travel Bookings) तक हर जगह UPI का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन अब इसी UPI को लेकर एक नया और सख्त नियम लागू किया गया है, जिसकी जानकारी न होने पर यूजर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


    इस वजह से होता है UPI ब्लॉक

    इस नए नियम का सीधा असर UPI अकाउंट की सुरक्षा और वैधता से जुड़ा है। अगर कोई यूजर लापरवाही करता है, गलत या पुरानी जानकारी का इस्तेमाल करता है, या जरूरी अपडेट्स को नजरअंदाज करता है, तो उसका UPI अकाउंट अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक उनका पेमेंट अचानक फेल न होने लगे।


    UPI का नया नियम क्या है?

    UPI से जुड़े नए नियम के तहत यह जरूरी किया गया है कि हर UPI अकाउंट एक सक्रिय, वैध और सही मोबाइल नंबर से जुड़ा होना चाहिए। अगर किसी यूज़र का मोबाइल नंबर इनएक्टिव है, बंद हो चुका है, या लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं है, तो उस नंबर से जुड़ी UPI ID को जोखिम भरा माना जाएगा। इसके अलावा, अगर बैंक या UPI सिस्टम को यह लगता है कि किसी अकाउंट से जुड़ी जानकारी अपडेट नहीं है, पहचान वेरिफिकेशन अधूरा है या यूजर लंबे समय से इनएक्टिव है, तो उस अकाउंट पर पाबंदी लगाई जा सकती है।


    यह नियम क्यों लाया गया?

    इस नियम के पीछे सबसे बड़ा कारण है डिजिटल फ्रॉड और गलत लेन-देन को रोकना। कई मामलों में देखा गया है कि: – बंद मोबाइल नंबर किसी और को दोबारा मिल जाता है – उसी नंबर से जुड़ा UPI अकाउंट पुराना रहता है – नया यूजर अनजाने में पुराने बैंक अकाउंट से लिंक हो जाता है ऐसी स्थिति में धोखाधड़ी, गलत ट्रांजैक्शन और डेटा मिसयूज़ की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इसीलिए UPI सिस्टम को साफ और सुरक्षित रखने के लिए यह नियम लाया गया है।


    आम यूजर पर इसका क्या असर पड़ेगा?

    इस नए नियम का असर सीधे तौर पर हर UPI यूजर पर पड़ता है। UPI पेमेंट अचानक बंद हो सकता है अगर आपका अकाउंट नियमों के अनुरूप नहीं है, तो पेमेंट करते समय ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है।


    UPI अकाउंट ब्लॉक या सस्पेंड हो सकता है

    लगातार नियमों की अनदेखी करने पर UPI ID को अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। Google Pay, PhonePe, Paytm सब पर असर यह नियम किसी एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी UPI प्लेटफॉर्म पर लागू होता है। रोजमर्रा के काम रुक सकते हैं बिल पेमेंट, पैसे ट्रांसफर, ऑनलाइन खरीदारी सब कुछ प्रभावित हो सकता है।


    UPI अकाउंट ब्लॉक होने से कैसे बचें?

    अगर आप चाहते हैं कि आपका UPI अकाउंट सुरक्षित रहे, तो इन बातों का खास ध्यान रखें:
    – बैंक अकाउंट से जुड़ा मोबाइल नंबर हमेशा एक्टिव रखें
    – मोबाइल नंबर बदला है तो तुरंत अपडेट करें
    – समय-समय पर UPI का इस्तेमाल करते रहें
    – UPI ऐप में प्रोफाइल और KYC पूरी रखें
    – किसी अनजान लिंक या कॉल से UPI जानकारी शेयर न करें


    कैसे पता करें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं?

    इस वक्त कोई सार्वजनिक लिस्ट नहीं है जिससे आप सीधे जान सकें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं। लेकिन अगर आप नीचे दिए गए लक्षण देख रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए: लगातार UPI फेल हो रहा है, “Transaction under review” या “Could not process” जैसे मैसेज आ रहे हैं, QR कोड स्कैन करने पर भी पेमेंट नहीं हो पा रहा तो ऐसी स्थिति में अपने बैंक या UPI ऐप की हेल्पलाइन से संपर्क करें।

  • विदिशा 90 वर्षीय मां के रख-रखाव को लेकर चार बेटों में विवाद, पुलिस पंचायत ने किया समाधान

    विदिशा 90 वर्षीय मां के रख-रखाव को लेकर चार बेटों में विवाद, पुलिस पंचायत ने किया समाधान


    विदिशा । एक दिल को झकझोर देने वाली घटना बुधवार को पुलिस पंचायत में सामने आई, जहां 90 वर्षीय महिला ने अपने चार बेटों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया कि उसने अपनी जमा पूंजी से सभी बेटों को पांच-पांच लाख रुपये दिए थे, लेकिन अब जीवन के अंतिम पड़ाव पर कोई भी बेटा उसे अपने पास रखने को तैयार नहीं है।

    चारों बेटों के बीच पारिवारिक विवाद के कारण, उन्होंने तय किया था कि प्रत्येक बेटा एक-एक माह के लिए मां को रखेगा। लेकिन अब महिला का आरोप है कि पहले बेटे के एक माह पूरे होने के बाद दूसरा बेटा भी उन्हें रखने को तैयार नहीं है।

    इस गंभीर मामले को पुलिस पंचायत ने तुरंत संज्ञान में लिया और आदेश दिया कि एक बेटा अपनी मां को स्थाई रूप से रखेगा, जबकि बाकी तीन बेटे उन्हें हर माह एक-एक हजार रुपये खर्च के लिए देंगे। इस फैसले से महिला को कुछ राहत मिली है।

    पुलिस पंचायत में इस प्रकार के मामलों की सुनवाई नियमित रूप से होती है, और बुधवार को भी इस जैसे चार से पांच मामले सुने गए। एक अन्य मामले में दो सीनियर सिटीजन मित्रों के बीच भूमि किराए पर लेकर खेती करने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था, जिसका समाधान भी पंचायत ने किया।

  • संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन

    संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) में परिवर्तन की प्रक्रिया जोरों पर है। दिसंबर 2025 में बिहार के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नितिन नबीन (Nitin Nabin) (45 वर्ष) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Executive Chairman) नियुक्त किया गया है। वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा नेता हैं जो इस शीर्ष संगठनात्मक पद तक पहुंचे हैं। नितिन नबीन बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक हैं और नीतीश कुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे पार्टी के युवा मोर्चा में लंबे समय तक सक्रिय रहे तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर हैं। अब जनवरी 2026 के मध्य तक नितिन नबीन को औपचारिक रूप से भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन के चुनाव को भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अनुमोदित किया जाएगा, जो इस महीने के अंत तक होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद नितिन नबीन द्वारा अपनी नई टीम बनाने के लिए संगठनात्मक फेरबदल किए जाने की उम्मीद है, जो एक ‘समावेशी’ प्रक्रिया होगी। भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम भाजपा और संघ परिवार के बीच तालमेल और समन्वय को दर्शाएगी।


    मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद

    एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के संगठनात्मक स्तरों में व्यापक फेरबदल से जुड़ी इस प्रक्रिया के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने यह भी बताया कि जून 2024 में इसके गठन के बाद से इसमें कोई फेरबदल नहीं हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद है, जिसमें युवा नेतृत्व के साथ-साथ जाट समुदाय के चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार और संगठन दोनों में जाट समुदाय का घटता प्रतिनिधित्व भी हमारे उच्च कमान के विचार-विमर्श के बिंदुओं में से एक है।


    सरकार और संगठन में आएंगे संघ परिवार से जुड़े लोग

    पार्टी सूत्रों ने कहा कि नबीन ने भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस के बीच संबंधों और समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, इससे यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे केंद्र सरकार और पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच ‘सक्रिय समन्वय’ सुनिश्चित करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और आरएसएस पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के कामकाज की समीक्षा करने जा रहे हैं और संगठन तथा सरकारी या अर्ध-सरकारी निकायों, जिनमें विभिन्न आयोग भी शामिल हैं, में कई नई नियुक्तियों पर चर्चा करेंगे। एक पार्टी नेता ने कहा कि इससे राज्य के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लिए केंद्रीय स्तर पर संगठनात्मक या सरकारी भूमिकाएं निभाने का रास्ता खुल जाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं।

    भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे कई नेताओं को समायोजित किए जाने की संभावना है, जिनमें वे नेता भी शामिल हैं जो अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में पार्टी के साथ रहे हैं। ये नेता बिहार जैसे राज्यों के साथ-साथ उन राज्यों से भी होंगे जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और आरएसएस की हालिया समन्वय बैठकों के दौरान, आरएसएस ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे नेताओं की पहचान की जानी चाहिए जो तीन-चार दशकों से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं लेकिन संगठन, सरकार या किसी अन्य सार्वजनिक संस्था में उन्हें स्थान नहीं मिला है। नितिन नबीन उन वरिष्ठ भाजपा नेताओं के समूह में शामिल हैं जो इस प्रक्रिया का समन्वय कर रहे हैं।


    मकर संक्रांति के बाद फेरबदल की संभावना

    भाजपा सूत्रों ने बताया कि हमारा ध्यान उन लोगों को महत्वपूर्ण भूमिकाएं देने पर है जिन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा और संघ के लिए समर्पित कर दिया है। यह प्रक्रिया जारी है, लेकिन घोषणाओं के लिए सीमित अवसर ही उपलब्ध होंगे। सूत्रों ने बताया कि अधिकांश महत्वपूर्ण नियुक्तियां मकर संक्रांति के बाद से लेकर बजट सत्र के प्रारंभ होने तक होने की उम्मीद है, जो फरवरी की शुरुआत से शुरू होगा। इस प्रक्रिया के लिए एक और समयसीमा आगामी राज्य चुनावों की घोषणा से पहले होने की संभावना है।