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  • माइक्रो स्पेस लिविंग का बढ़ता क्रेज: छोटे घरों में स्मार्ट डिजाइन और स्टाइलिश जीवन का नया दौर

    माइक्रो स्पेस लिविंग का बढ़ता क्रेज: छोटे घरों में स्मार्ट डिजाइन और स्टाइलिश जीवन का नया दौर


    नई दिल्ली । तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सीमित जगह के कारण बड़े घरों का सपना अब हर किसी के लिए संभव नहीं रह गया है। महानगरों में बढ़ती जनसंख्या और महंगे रियल एस्टेट के बीच छोटे घरों यानी माइक्रो स्पेस लिविंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रो स्पेस लिविंग केवल मजबूरी नहीं बल्कि स्मार्ट और स्टाइलिश जीवनशैली का नया विकल्प बन चुका है।

    माइक्रो स्पेस लिविंग का मूल विचार है-कम जगह में अधिक सुविधा और आराम। छोटे घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि हर कोना उपयोगी बने। मल्टीफंक्शनल फर्नीचर इस ट्रेंड की सबसे बड़ी खासियत है। सोफा-बेड फोल्डिंग डाइनिंग टेबल वॉल-माउंटेड डेस्क और स्टोरेज-बेड जैसी चीजें न केवल जगह बचाती हैं बल्कि घर को व्यवस्थित और आधुनिक लुक भी देती हैं।मिनिमल डेकोर माइक्रो स्पेस लिविंग का अहम हिस्सा बन गया है। भारी फर्नीचर और ज्यादा सजावट की जगह हल्के रंग सिंपल डिजाइन और कम लेकिन उपयोगी चीजों को प्राथमिकता दी जा रही है। हल्के रंगों की दीवारें और बड़ी खिड़कियां घर को खुला और बड़ा महसूस कराती हैं। सही लाइटिंग खासकर नेचुरल और स्मार्ट लाइट्स छोटे घरों को आरामदायक और आकर्षक बनाती हैं।

    स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी ने माइक्रो स्पेस लिविंग को और आसान बना दिया है। स्मार्ट लाइटिंग ऑटोमेटेड क्लाइमेट कंट्रोल वॉइस-एक्टिवेटेड डिवाइस और स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम छोटे घरों में ज्यादा सुविधा प्रदान करते हैं। ये तकनीकें न केवल समय और ऊर्जा की बचत करती हैं बल्कि घर को भविष्य-अनुकूल भी बनाती हैं।छोटे घरों में काम और आराम के बीच संतुलन बनाना भी एक चुनौती होती है जिसे स्मार्ट डिजाइन के जरिए हल किया जा रहा है। मल्टीफंक्शनल वर्क डेस्क फोल्डिंग कुर्सियां और छुपा हुआ स्टोरेज कम जगह में होम ऑफिस और रिलैक्सेशन दोनों के लिए जगह तैयार करते हैं। इससे वर्क-फ्रॉम-होम करने वालों को भी सुविधा मिलती है।

    माइक्रो स्पेस लिविंग का एक बड़ा फायदा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली है। छोटे घरों में बिजली पानी और संसाधनों की खपत कम होती है जिससे यह ट्रेंड सस्टेनेबल लिविंग को बढ़ावा देता है। कम जगह कम सामान और स्मार्ट उपयोग से कार्बन फुटप्रिंट भी घटता है।युवाओं सिंगल प्रोफेशनल्स और छोटे परिवारों के बीच माइक्रो स्पेस लिविंग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्ट डिजाइन तकनीक और सस्टेनेबिलिटी के मेल से छोटे घरों का यह ट्रेंड और मजबूत होगा। माइक्रो स्पेस लिविंग यह साबित कर रहा है कि घर का आकार नहीं बल्कि उसकी समझदारी से की गई प्लानिंग जीवन को बेहतर बनाती है।

  • हिजाब विवाद खत्म, नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद जॉइन की नौकरी, CM ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त हटाया था नकाब

    हिजाब विवाद खत्म, नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद जॉइन की नौकरी, CM ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त हटाया था नकाब


    नई दिल्ली।  हिजाब विवाद में फंसी आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिन की देरी के बाद आखिरकार अपनी नौकरी जॉइन कर ली है। नुसरत ने अधिकारियों के दबाव के बावजूद सिविल सर्जन के पास जाने की औपचारिकता को छोड़कर सीधे विभाग में जॉइनिंग की।

    नुसरत की जॉइनिंग की आखिरी तारीख कई बार बढ़ाई गई। मूल रूप से 20 दिसंबर को जॉइनिंग की लास्ट डेट थी, जिसे 31 दिसंबर और फिर 7 जनवरी तक बढ़ाया गया।

    7 जनवरी को नुसरत ने अंतिम मौका लेकर अपना CHC जॉइनिंग पूरा किया।

    15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटते समय नुसरत का हिजाब हटाया था, जिसके बाद से उनकी लोकेशन और जॉइनिंग को लेकर अफसरों में भी सवाल उठ रहे थे।

    आयुष डॉक्टर की जॉइनिंग प्रोसेस:
    आयुष विभाग नियुक्ति पत्र जारी करता है। इसे लेकर कैंडिडेट को सिविल सर्जन के ऑफिस जाना होता है, जहां डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और बेसिक जानकारी ली जाती है। इसके बाद सिविल सर्जन जॉइनिंग लेटर जारी करते हैं, जिसे कैंडिडेट संबंधित CHC में दिखाकर जॉइन करता है।

    झारखंड ऑफर बनाम बिहार सैलरी:
    हिजाब विवाद के दौरान झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने नुसरत को 3 लाख रुपए मासिक वेतन, सरकारी फ्लैट और मनचाही पोस्टिंग का ऑफर दिया। वहीं बिहार में उनकी सैलरी 32 हजार रुपए प्रति माह तय है। मंत्री ने कहा कि झारखंड में डॉक्टरों, विशेषकर महिलाओं के मान-सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता।

    हिजाब विवाद की झलक:
    15 दिसंबर को CM नीतीश कुमार ने नुसरत को नियुक्ति पत्र थमाते हुए हिजाब पर सवाल उठाया और खुद अपने हाथ से नकाब हटाया। इस दौरान डिप्टी CM सम्राट चौधरी भी नुसरत को रोकने की कोशिश में लगे। नुसरत थोड़ी देर असहज हुईं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नियुक्ति पत्र थमाया और जाने का इशारा किया।

    इस प्रकार, नुसरत परवीन ने विवादों के बीच अपनी नौकरी जॉइन कर भारत में महिला डॉक्टरों के लिए पेशेवर अधिकार और सम्मान की मिसाल कायम की है।

  • प्रेमानंद महाराज की जीवन शिक्षाएं: सत्य, करुणा और ईश्वर-भक्ति से परम आनंद का मार्ग

    प्रेमानंद महाराज की जीवन शिक्षाएं: सत्य, करुणा और ईश्वर-भक्ति से परम आनंद का मार्ग


    नई दिल्ली
    प्रेमानंद महाराज का जीवन और उनके विचार आज के दौर में मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन की मिसाल बन गए हैं। उनके जीवन के सूत्र सरल हैं जटिल नहीं। वे मानते हैं कि जीवन का वास्तविक आनंद भौतिक सुखों में नहीं बल्कि मन की स्थिरता सही आचरण और ईश्वर के प्रति भावनात्मक जुड़ाव में छिपा है।

    महाराज का मूल संदेश सत्य और ईमानदारी पर आधारित है। उनका मानना है कि व्यक्ति तभी संतुष्ट और आत्मविश्वासी बन सकता है जब वह अपने शब्द और कर्म में सच्चा रहे। उनके अनुसार ईमानदारी केवल नैतिक मूल्य नहीं बल्कि आत्मिक शांति और जीवन की स्थिरता का आधार है। जब हम सच के मार्ग पर चलते हैं तो जीवन की उलझनें सरल हो जाती हैं और मन हल्का महसूस करता है।

    करुणा और प्रेम को महाराज जीवन का असली आभूषण मानते हैं। दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और मदद की भावना केवल समाज के लिए नहीं बल्कि अपने मन को भी प्रसन्नता और समृद्धि देती है। छोटे-छोटे अच्छे कर्म चाहे किसी की मदद करना हो या समय पर किसी का साथ देना जीवन को अर्थपूर्ण और सुखद बनाते हैं।मन पर नियंत्रण यानी क्रोध चिंता और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना महाराज के जीवन मंत्रों का अहम हिस्सा है। उनका कहना है कि धैर्य संयम और आत्म-अनुशासन से ही व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों में भी स्थिर रह सकता है। जब हम अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करना सीख जाते हैं तब जीवन सहज और संतुलित हो जाता है।

    समय और कर्म के महत्व को भी वे हमेशा रेखांकित करते हैं। समय का सम्मान करना और सही दिशा में लगातार प्रयास करना ही जीवन को सार्थक बनाता है। आलस्य और टालमटोल से बचकर किया गया नियमित और शांत कर्म न केवल परिणाम देता है बल्कि आत्मसंतोष भी प्रदान करता है।भौतिक सुख की तुलना में आंतरिक खुशी को वे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। जो व्यक्ति वर्तमान में अपनी उपलब्धियों और जीवन में प्राप्त चीजों के लिए कृतज्ञ रहता है वही वास्तव में आनंदित और संतुष्ट होता है। बाहरी उपलब्धियां क्षणिक हो सकती हैं लेकिन आंतरिक संतोष स्थायी और स्थिर रहता है।

    नाम-जप को वे जीवन का सबसे सरल और प्रभावी साधन बताते हैं। ईश्वर के नाम का स्मरण मन को स्थिर करता है और कठिन समय में मार्गदर्शन देता है। निस्वार्थ सेवा को महाराज भक्ति का सर्वोत्तम रूप मानते हैं जिसमें बिना किसी अपेक्षा के किए गए कर्म मन को हल्का और जीवन को सार्थक बनाते हैं।प्रेमानंद महाराज के जीवन के मंत्र यह संदेश देते हैं कि सादगी संयम और कोमल भाव के साथ जिया गया जीवन ही वास्तविक शांति संतुलन और आनंद प्रदान करता है। उनके विचार हमें दिखाते हैं कि बाहरी सुखों के पीछे भागने की बजाय सरल जीवन सही कर्म और ईश्वर-भक्ति ही परम आनंद का मार्ग हैं।

  • पेनकिलर को कहें बाय-बाय जानें क्यों फटता है आपका सिर? ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार

    पेनकिलर को कहें बाय-बाय जानें क्यों फटता है आपका सिर? ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार


    नई दिल्ली । आजकल की व्यस्त जीवनशैली में सिरदर्द एक आम समस्या बन चुकी है जिसे हम अक्सर पेनकिलर लेकर दबा देते हैं। हालांकि बार-बार होने वाला सिरदर्द हमारी रोजमर्रा की आदतों और लाइफस्टाइल से जुड़ा होता है। यदि हम इसके मूल कारणों को समझें तो दवाओं के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख कारणों के बारे में जिनकी वजह से सिरदर्द हो सकता है।

    ब्रेकफास्ट स्किप करना

    रातभर के अंतराल के बाद शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अगर सुबह का नाश्ता नहीं करते तो ब्लड शुगर का लेवल गिर सकता है जिससे दिमाग की नसों में खिंचाव आ सकता है और परिणामस्वरूप तेज सिरदर्द हो सकता है। खासकर जब शरीर को जरूरी कैलोरी और पोषण नहीं मिल पाता तो इससे सिर में दर्द शुरू हो जाता है। इसलिए सुबह का नाश्ता कभी न छोड़ें!

    लंबे समय तक भूखे रहना

    वजन घटाने के प्रयास या व्रत के कारण अगर आप लंबे समय तक भूखे रहते हैं तो शरीर में एसिडिटी और गैस बनने लगती है। यह गैस सिर के ऊपर की ओर चढ़कर भारीपन और दर्द का कारण बनती है। हेल्थ स्पेशलिस्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक भूखा रहने की बजाय थोड़ा-थोड़ा करके हल्का खाना खाना बेहतर होता है जिससे पेट में गैस बनने की संभावना कम हो जाती है और सिरदर्द से भी बचा जा सकता है।

    मानसिक तनाव

    आजकल का जीवन इतना तेज़ और व्यस्त है कि मानसिक तनाव एक सामान्य समस्या बन चुकी है। काम का बढ़ा हुआ बोझ और भविष्य की चिंता मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करती है जिसे ‘टेंशन हेडेक’ कहा जाता है। तनाव की वजह से दिमाग की नसें थक जाती हैं जो धीरे-धीरे गंभीर सिरदर्द का रूप ले सकती हैं। इसे कम करने के लिए नियमित रूप से योग मेडिटेशन या हल्की एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है।

    डिहाइड्रेशन

    शरीर में पानी की कमी होने पर ऊतक सिकुड़ने लगते हैं और नसों पर दबाव बढ़ने लगता है। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं तो सिरदर्द की समस्या और भी बढ़ सकती है। खासकर जब आप झुकते हैं या चलने की कोशिश करते हैं तो यह दबाव सिर में दर्द का कारण बन सकता है। डॉक्टर भी यह सलाह देते हैं कि दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और सिरदर्द से बचा जा सके।

    आंखों की थकावट

    लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने या मोबाइल और कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल करने से आंखों में थकावट हो सकती है जो सिर में दर्द का कारण बनती है। अगर आप देर तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करते हैं तो आंखों के सामने पिघलते हुए धब्बे या धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं जो सिरदर्द में बदल जाती हैं। इसके लिए स्क्रीन ब्रेक्स लेना और आंखों को आराम देना महत्वपूर्ण है।

    अगर सिरदर्द की समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे पेनकिलर से दबाने की बजाय अपनी आदतों और लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं। नियमित रूप से पानी पीना मानसिक तनाव को कम करना सही समय पर भोजन करना और आंखों को आराम देना आपके सिरदर्द को कम कर सकता है। अगर फिर भी समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।

  • भारत में आज सोने का भाव,सोने-चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे जानिए आज आपके शहर का भाव

    भारत में आज सोने का भाव,सोने-चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे जानिए आज आपके शहर का भाव


    नई दिल्ली । भारत में सोने और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और यह बढ़ोतरी लगातार तीसरे दिन देखने को मिल रही है। जियोपॉलिटिकल तनाव और बाजार की अनिश्चितता के कारण दोनों धातुओं की कीमतों में उछाल आया है। 7 जनवरी को सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी से निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।

    सोने की कीमत में बढ़ोतरी

    आज दिल्ली में 24-कैरेट सोना प्रति दस ग्राम ₹10 महंगा हो गया है और 22-कैरेट सोने की कीमत भी ₹10 बढ़ी है। पिछले दो दिनों में 24-कैरेट सोने की कीमत में ₹3010 और 22-कैरेट सोने की कीमत में ₹2760 की बढ़ोतरी हुई है। सोने की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन सकती हैं लेकिन इसके साथ ही सोने की मांग भी बढ़ रही है खासकर अस्थिर बाजारों में।

    चांदी की कीमत में उछाल

    चांदी की कीमतों में भी लगातार तीसरे दिन बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में एक किलोग्राम चांदी की कीमत में ₹12100 का इज़ाफा हुआ है। पिछले तीन दिनों में चांदी की कीमत में कुल ₹12100 की बढ़ोतरी हो चुकी है। इससे पहले चांदी की कीमत स्थिर थी लेकिन अब 7 जनवरी को दिल्ली में चांदी ₹2,53,100 प्रति किलोग्राम बिक रही है। इस दौरान चांदी की कीमतों में प्रति किलोग्राम ₹100 का इज़ाफा हुआ है।

    शहरों के हिसाब से सोने और चांदी के भाव

    भारत के प्रमुख शहरों में सोने और चांदी के दामों में भिन्नताएँ हैं। यहां 18-कैरेट 22-कैरेट और 24-कैरेट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमतें दी गई हैं:
    दिल्ली 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    मुंबई: 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    कोलकाता: 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    चेन्नई: 24-कैरेट सोना,₹57,550 ,22-कैरेट सोना,₹52,900

    चांदी की कीमतों में क्षेत्रीय अंतर

    चांदी के दाम में भी क्षेत्रीय अंतर दिखाई दे रहे हैं दिल्ली मुंबई और कोलकाता में चांदी का मूल्य ₹2,53,100 प्रति किलोग्राम है। चेन्नई में चांदी का मूल्य ₹2,71,100 प्रति किलोग्राम है जो चार प्रमुख महानगरों में सबसे महंगा है।

    कुल मिलाकर स्थिति

    सोने और चांदी के दामों में इस समय तेजी देखने को मिल रही है जो आने वाले दिनों में भी जारी रह सकती है खासकर वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक तनावों के कारण। इन बढ़ी हुई कीमतों का प्रभाव निवेशकों खरीदारों और व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा। सुझाव,अगर आप सोने या चांदी में निवेश करना चाहते हैं तो इन कीमतों के बढ़ने के साथ सतर्क रहना और संभावित गिरावट का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।

  • अंडर-19 क्रिकेट में नई सनसनी: वैभव सूर्यवंशी का शतक, कप्तानी पारी ने भारत को साउथ अफ्रीका पर दी जीत की बढ़त

    अंडर-19 क्रिकेट में नई सनसनी: वैभव सूर्यवंशी का शतक, कप्तानी पारी ने भारत को साउथ अफ्रीका पर दी जीत की बढ़त


    नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गई भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान वैभव सूर्यवंशी ने तीसरे वनडे मुकाबले में ऐसी पारी खेली कि वह चर्चा का केंद्र बन गए। बेनोनी के विलोमूर पार्क मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में वैभव ने अपने संयम और आक्रामकता के अद्भुत संतुलन से मैच की दिशा प्रारंभिक ओवरों में ही तय कर दी।

    भारतीय पारी की शुरुआत से ही वैभव ने शानदार खेल दिखाया। शुरुआती ओवरों में गेंद को भली-भांति समझने के बाद उन्होंने बड़े शॉट्स खेलना शुरू किया और मैदान के चारों ओर रन बटोरे। महज 63 गेंदों में शतक पूरा कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह केवल प्रतिभाशाली बल्लेबाज नहीं बल्कि मैच की परिस्थिति को समझने वाले लीडर भी हैं। उनकी 127 रन की पारी में लंबी हिटिंग सटीक टाइमिंग और आक्रामकता का शानदार मेल देखने को मिला।

    वैभव को इस पारी में ओपनिंग साथी आरोन जॉर्ज का भी साथ मिला। दोनों ने पहले विकेट के लिए 200 से अधिक रन की साझेदारी की, जिससे भारतीय टीम ने मजबूत स्कोर की नींव रखी। इस साझेदारी ने न केवल रन गति को तेज रखा, बल्कि दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस तरह की पारियों ने टीम के आत्मविश्वास को भी ऊँचाई पर पहुंचाया।तीसरे वनडे में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। अंडर-19 वनडे में उनके कुल रन अब भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। कम मैचों में लगातार रन बनाते हुए उनका औसत और खेल का संतुलन चयनकर्ताओं और क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

    इस सीरीज में भारत पहले ही दोनों मुकाबले जीतकर बढ़त बना चुका था। तीसरे वनडे में भी टीम ने अपनी संतुलित बल्लेबाजी और रणनीति से यह स्पष्ट कर दिया कि टीम में आत्मविश्वास और खेल भावना की कमी नहीं है। प्लेइंग इलेवन में किए गए बदलावों के बावजूद भारतीय बल्लेबाजी क्रम मजबूत और संतुलित नजर आया।वैभव सूर्यवंशी का यह प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय अंडर-19 टीम में नेतृत्व और व्यक्तिगत प्रतिभा का सही संतुलन है। उनकी कप्तानी में टीम का खेल और रणनीति दोनों बेहतर नजर आए। मौजूदा सीरीज में उनका लगातार योगदान भारत की सफलता में सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा है। युवा बल्लेबाज के रूप में उनकी यह पारी न केवल फैंस के लिए उत्साहजनक है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की संभावनाओं को भी उजागर करती है।

  • Diabetes में भूलकर भी न खाएं ये 7 चीजें वरना सेहत को होगा भारी नुकसान

    Diabetes में भूलकर भी न खाएं ये 7 चीजें वरना सेहत को होगा भारी नुकसान


    नई दिल्ली । डायबिटीज में ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित हो जाता है। अगर समय रहते खानपान और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी हार्ट अटैक किडनी फेल्योर आंखों की रोशनी जाने और स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं का कारण बन सकती है। डायबिटीज एक गंभीर और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है जिसमें ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित हो जाता है।
    अगर समय रहते खानपान और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी हार्ट अटैक किडनी फेल्योर आंखों की रोशनी जाने और स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं का कारण बन सकती हैखासतौर पर कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका सेवन डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में जिन्हें डायबिटीज के मरीजों को भूलकर भी नहीं खाना चाहिए।
    चीनी और मीठे पदार्थ
    डायबिटीज मरीजों के लिए सबसे बड़ा खतरा चीनी है। मिठाई केक पेस्ट्री चॉकलेट रसगुल्ला जलेबी और मीठे पेय पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा देते हैं। इससे शुगर लेवल अचानक हाई हो सकता है जो जान के लिए खतरा बन सकता है।
    मैदा और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट
    मैदा से बनी चीजें जैसे सफेद ब्रेड पिज्जा बर्गर नूडल्स और बिस्किट शरीर में जाकर तेजी से शुगर में बदल जाती हैं। इससे इंसुलिन का असर कम हो जाता है और ब्लड शुगर कंट्रोल से बाहर हो सकता है।

    तले-भुने और फास्ट फूड

    समोसा कचौरी फ्रेंच फ्राइज चिप्स और अन्य फास्ट फूड में ट्रांस फैट और कैलोरी अधिक होती है। ये न सिर्फ वजन बढ़ाते हैं बल्कि हार्ट डिजीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ाते हैं।

     मीठे फल और फ्रूट जूस

    आम चीकू केला अंगूर जैसे फलों में नेचुरल शुगर अधिक होती है। वहीं पैकेट वाले फ्रूट जूस में अतिरिक्त शुगर मिलाई जाती है। इनका अधिक सेवन ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है।

    शराब का सेवन

    शराब पीने से ब्लड शुगर कभी बहुत ज्यादा तो कभी बहुत कम हो सकता है। इससे हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ जाता है जो अचानक बेहोशी या जान जाने तक का कारण बन सकता है।

     ज्यादा नमक वाली चीजें

    अचार पापड़ नमकीन और प्रोसेस्ड फूड में नमक की मात्रा अधिक होती है। इससे हाई ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है जो डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है।

    मीठे डेयरी प्रोडक्ट्स

    फ्लेवर्ड योगर्ट मीठी लस्सी क्रीम और आइसक्रीम में शुगर और फैट दोनों ज्यादा होते हैं। ये ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।

    क्या करें डायबिटीज मरीज

    डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें सलाद कम शुगर वाले फल नियमित व्यायाम और समय पर दवा बेहद जरूरी है। साथ ही नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच कराते रहें।डायबिटीज में छोटी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। अगर ऊपर बताई गई चीजों से दूरी बनाई जाए और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाई जाए तो इस बीमारी को लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सकता है।

  • मुख्यमंत्री से कराया जनपद भवन का भूमिपूजन, भवन निर्माण के लिए जमीन की तलाश जारी, SDM ने किया विवाद खारिज

    मुख्यमंत्री से कराया जनपद भवन का भूमिपूजन, भवन निर्माण के लिए जमीन की तलाश जारी, SDM ने किया विवाद खारिज


    उज्जैन। उज्जैन के खाचरौद में नए बनने वाले जनपद भवन का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जनवरी 2026 को किया। इस दौरान अधिकारियों ने 5.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भवन का भूमि पूजन मुख्यमंत्री के हाथों करवा दिया। लेकिन इस महत्वपूर्ण खबर में एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि भवन के लिए आवश्यक जमीन पूरी तरह से उपलब्ध नहीं थी, जिससे निर्माण प्रक्रिया और योजना को लेकर सवाल उठने लगे।

    जनपद अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह ने मामले की शिकायत कलेक्टर और कमिश्नर से की। अध्यक्ष का आरोप था कि नए भवन निर्माण के लिए 2 एकड़ भूमि की जरूरत है, लेकिन जिस जमीन (सर्वे क्रमांक 984) पर तहसील और एसडीएम कार्यालय बन रहे हैं, वहां पर्याप्त जगह नहीं बची।

    इसके कारण अब नए जनपद भवन के निर्माण के लिए पांच किलोमीटर दूर अतिरिक्त जमीन तलाशने की स्थिति बन गई।

    इस मुद्दे पर SDM खाचरौद, नेहा साहू ने बयान दिया कि अधिकारियों को पर्याप्त जमीन उपलब्ध है और विवादित जानकारी गलत तरीके से फैल रही है। उन्होंने जनपद अध्यक्ष को ऑनलाइन आवेदन कर सही भूमि निर्धारित करने का विकल्प भी दिया।

    जानकारी के मुताबिक, जनपद भवन और तहसील कार्यालय दोनों के निर्माण का उद्देश्य स्थानीय प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना है।

    अधिकारियों की योजना के अनुसार नई इमारत में जनपद स्तर की सभी सुविधाएं मौजूद होंगी, लेकिन जमीन की सही व्यवस्था को लेकर अभी स्पष्टता जरूरी है।

    यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जनपद के विकास और सरकारी सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए भवन निर्माण और भूमि का सही प्रबंधन अहम है। वहीं, अधिकारियों ने भी कहा है कि परियोजना की समीक्षा के दौरान सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है और जल्द ही निर्माण कार्य सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा।

    इस घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के बीच जमीन आवंटन और योजना कार्यान्वयन में पारदर्शिता की
    आवश्यकता को उजागर किया है। जनता की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी और शीघ्र समाधान कैसे करेगा।

  • 24 साल की श्रीलीला बनी तीन बच्चों की मां, गोद लिए बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को बनाए रखा सर्वोच्च प्राथमिकता

    24 साल की श्रीलीला बनी तीन बच्चों की मां, गोद लिए बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को बनाए रखा सर्वोच्च प्राथमिकता


    नई दिल्ली ।  दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की उभरती अभिनेत्री श्रीलीला ने मात्र 24 साल की उम्र में मातृत्व का अनुभव कर अपने फैंस और इंडस्ट्री को हैरान कर दिया है। हालांकि, उनके तीनों गोद लिए बच्चे उनके साथ नहीं रह रहे हैं। अभिनेत्री ने साफ किया है कि उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा और संरक्षित माहौल में पालन-पोषण सुनिश्चित करना है।

    श्रीलीला ने 21 साल की उम्र में दो दिव्यांग बच्चों, गुरु और शोभिता को गोद लिया था। इसके बाद वर्ष 2025 में उन्होंने एक और बच्ची को अपनाया। तीनों बच्चों को फिलहाल आश्रम में रखा गया है ताकि उनकी देखभाल स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्थित ढंग से हो सके। अभिनेत्री नियमित रूप से बच्चों से फोन पर बात करती हैं और समय-समय पर उनसे मिलने भी जाती हैं। उनका कहना है कि बच्चों के सुरक्षित विकास को प्राथमिकता देना उनकी जिम्मेदारी का सबसे अहम हिस्सा है।हाल ही में दिए गए इंटरव्यू में श्रीलीला ने बताया कि व्यस्त पेशेवर जीवन और पालन-पोषण की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें बच्चों को अपने साथ रखना फिलहाल संभव नहीं है। उन्होंने कहा मेरी कोशिश हमेशा यही रहती है कि बच्चों को सुरक्षित और संरक्षित माहौल मिले। उनकी पढ़ाई स्वास्थ्य और खुशहाली मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह कदम बच्चों के भले के लिए है और वह हमेशा उनके जीवन में सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे।

    श्रीलीला की यह कहानी बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में उन अभिनेत्रियों की कतार में शामिल है जिन्होंने शादी से पहले मातृत्व अपनाया। रवीना टंडन ने 21 साल की उम्र में और सुष्मिता सेन ने 24 साल की उम्र में बच्चे गोद लिए थे। इसी तरह श्रीलीला ने भी समाज और इंडस्ट्री में बिन ब्याही मां के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है।सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में उनके इस निर्णय को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई लोग उनके कदम की सराहना कर रहे हैं और इसे जिम्मेदार मातृत्व का उदाहरण मान रहे हैं। वहीं  कुछ लोग युवा उम्र में मातृत्व के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीलीला ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनका बेहतर भविष्य उनके फैसले की मुख्य वजह है।

    भविष्य में श्रीलीला ने यह भी कहा कि वह बच्चों के साथ अधिक समय बिताने, उनकी शिक्षा और विकास पर विशेष ध्यान देने की कोशिश करेंगी। फिलहाल आश्रम में रहना उनके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प है ताकि बच्चे सुरक्षित और संरक्षित वातावरण में बड़े हों। अभिनेत्री लगातार बच्चों के पालन-पोषण में सक्रिय हैं और उनके जीवन में जिम्मेदारी और प्रेम दोनों बनाए रख रही हैं।श्रीलीला की कहानी न केवल युवा माताओं के लिए प्रेरणा है बल्कि यह दिखाती है कि मातृत्व में जिम्मेदारी, सुरक्षा और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। छोटे से छोटे बच्चे हों या तीनों गोद लिए गए हों, उनका पालन-पोषण और खुशहाली ही किसी भी मातृत्व निर्णय की सच्ची कसौटी होती है।