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  • ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ से बदली पर्यटन की दिशा, नई पीढ़ी के यात्रियों को लुभाने की बड़ी पहल

    ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ से बदली पर्यटन की दिशा, नई पीढ़ी के यात्रियों को लुभाने की बड़ी पहल


    नई दिल्ली ।अरुणाचल प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने अपना नया ब्रांड अभियान टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल लॉन्च किया है, जो अरुणाचल को पारंपरिक पहाड़ों और मठों की छवि से आगे ले जाकर अनुभव, संस्कृति और आत्मीयता की भारत की अंतिम खोज सीमा के रूप में प्रस्तुत करता है। इस अभियान का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित अरुणाचल हाउस में पर्यटन, शिक्षा, आरडब्ल्यूडी, पुस्तकालय एवं संसदीय कार्य मंत्री पासांग दोरजी सोना ने किया।

    यह नया अभियान अरुणाचल की ब्रांड पहचान बियॉन्ड मिथ्स एंड माउंटेन्स के तहत तैयार किया गया है, जिसमें यात्रियों को केवल प्राकृतिक सुंदरता देखने के बजाय यहां की जीवनशैली, जनजातीय परंपराओं और स्थानीय लोगों से जुड़ने का आमंत्रण दिया गया है। सरकार का मानना है कि आज की नई पीढ़ी का यात्री केवल डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण और प्रामाणिक अनुभव चाहता है, और अरुणाचल इस अपेक्षा पर पूरी तरह खरा उतरता है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री पासांग दोरजी सोना ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश हजारों वर्षों पुरानी विरासत, विविध जनजातीय संस्कृतियों, बौद्ध परंपराओं और अद्वितीय जैव-विविधता का जीवंत संगम है। उन्होंने कहा कि राज्य में साहसिक पर्यटन, आध्यात्मिक यात्राएं, वन्यजीवन, प्रकृति भ्रमण और सांस्कृतिक उत्सवों की असीम संभावनाएं हैं। मंत्री ने कहा, अरुणाचल की यात्रा केवल स्थलों तक सीमित नहीं रहती, यह एक ऐसा मानवीय अनुभव बन जाती है जो जीवनभर याद रहता है।

    पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कोविड महामारी के बाद अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन ने उल्लेखनीय उछाल देखा है। वर्ष 2023 और 2024 में राज्य में हर साल 10 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो महामारी-पूर्व स्तर से कहीं अधिक है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, आक्रामक ब्रांडिंग और अनुभव-आधारित पर्यटन मॉडल इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं।नई पर्यटन नीति के तहत राज्य सरकार कनेक्टिविटी सुधारने, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और आवासीय क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि पर काम कर रही है। साथ ही फार्म टूरिज्म, इको-टूरिज्म, जनजातीय पर्यटन, साहसिक पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन और सीमावर्ती पर्यटन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय समुदायों को भी सीधा लाभ मिल सके।

    टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल अभियान में गंतव्यों को कहानी-आधारित अनुभवों के रूप में पेश किया गया है। तवांग को आध्यात्मिक विरासत और हिमालयी सौंदर्य के प्रतीक के रूप में, जीरो को स्वदेशी संस्कृति की धड़कन के रूप में, अनिनी को झीलों और झरनों की धरती के रूप में, नामसाई को आध्यात्मिकता और नदी संस्कृति के संगम के रूप में, डोंग को भारत में प्रथम सूर्योदय के स्थल के रूप में और मेचुका को रोमांच व शांति के अद्भुत मेल के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। अभियान की फिल्मों और प्रिंट विजुअल्स में स्थानीय लोग, वास्तविक क्षण और प्राकृतिक दृश्य केंद्र में हैं, जो अरुणाचल की प्रामाणिक छवि को उभारते हैं।मंत्री सोना ने बताया कि पिछले वर्ष राज्य ने अपना लोगो और ब्रांड आइडेंटिटी बदली थी और यह अभियान उसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल अरुणाचल को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में भी मजबूती से स्थापित करेगी।

  • ग्वालियर गैंगवार35 गोलियां चलीं. 10 हजार के इनामी बदमाश की गिरफ्तारी

    ग्वालियर गैंगवार35 गोलियां चलीं. 10 हजार के इनामी बदमाश की गिरफ्तारी


    ग्वालियर। ग्वालियर में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं।

    इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
    में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।

    ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं। इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरारआरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।

    इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं। इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

  • Yash Birthday: ट्रक ड्राइवर का बेटा कैसे बना साउथ का रॉकिंग स्टार, KGF से पहले इन फिल्मों से पीटा डंका, क्या आप जानते हैं असली नाम?

    Yash Birthday: ट्रक ड्राइवर का बेटा कैसे बना साउथ का रॉकिंग स्टार, KGF से पहले इन फिल्मों से पीटा डंका, क्या आप जानते हैं असली नाम?

    नई दिल्ली। कन्नड़ सुपरस्टार यश (Yash) आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। आज उनकी फैन फॉलोइंग ना केवल साउथ में बल्कि दुनियाभर में हैं। ‘केजीएफ’ के बाद से एक्टर का कद काफी बढ़ गया है। उन्होंने प्रशांत नील निर्देशित ‘केजीएफ चैप्टर 1’ से पूरे भारत में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है। इस फिल्म की रिलीज के बाद से ‘द रॉकिंग’ स्टार यश ‘केजीएफ’ एक ग्लोबल स्टार बन गए हैं। उन्हें ना केवल साउथ बल्कि हिंदी सिनेमा और पूरे देशभर से प्यार मिलता है। फैंस उनकी एक झलक पाने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। ऐसे में आज इसी ग्लोबल स्टार का जन्मदिन है। वो 38 साल के हो गए हैं। इस खास मौके पर आपको उनकी लाइफ के बारे में बता रहे हैं कि कैसे एक ट्रक ड्राइवर के बेटे होकर फिल्म इंडस्ट्री में आए और यहां अपना सिक्का जमाने में कामयाब हुए।

    किसी भी मिडिल क्लास फैमिली से आने वाले लड़के और लड़की के लिए फिल्म इंडस्ट्री में कदम जमाना आसान नहीं होता है। ऊपर से जब आपका कोई जानने वाला या गॉड फादर ना हो तो और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ठीक वैसे ही ‘केजीएफ’ स्टार यश भी कन्नड़ की एक मिडिल क्लास फैमिली से आते हैं। यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को कर्नाटक के हासन जिले के एक गांव भुवानाहल्ली में हुआ था। उनके पिता एक ट्रक ड्राइवर हैं। वो आज भी ट्रक चलाते हैं। यश के पिता कर्नाटक में KSRTC परिवहन सेवा में काम करते हैं। ऐसे में यश के लिए फिल्म इंडस्ट्री में आना आसान बात नहीं थी। उनका जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा। सालों की मेहनत के बाद वो इंडस्ट्री में आज अपनी धाक जमाने में सफल हो पाए हैं।

    टीवी सीरियल्स से शुरू किया करियर
    यश के बचपन का नाम नवीन कुमार गौड़ा है। उनका बचपन मैसूर में बीता। वहीं से स्कूली शिक्षा ली। इसके बाद वो बिनाका नाटक मंडली का हिस्सा बन गए। उन्होंने जाने माने ड्रैमिस्ट B.V Karnath के बनाए बेनका ड्रामा के ग्रुप के साथ काम किया। बाद में स्ट्रगल करते हुए आगे बढ़े और टीवी सीरियल में काम करने का मौका मिला। उन्होंने एक्टिंग में डेब्यू कन्नड़ टीवी सीरियल ‘नंदा गोकुला’ से की। इसके बाद वो कई टीवी शोज का हिस्सा रहे। छोटे पर्दे के बाद फिल्मों में काम करने का मौका मिला।
    वो तीन फिल्में, जिसने पलटी किस्मत
    यश ने अपने करियर में 21 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। पहली बार वो 2007 में कन्नड़ फिल्म ‘जंबाडा हुदुगी’ के जरिए बड़े पर्दे पर नजर आए। इसमें उनका सेकेंड लीड रोल था। इसके बाद उनके करियर में अच्छे दिन भी आ गए। पहली बार उन्होंने साल 2010 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘मोदालासाला’ के जरिए पहली हिट थी। फिर 2014 में ‘मिस्टर एंड मिसेस रामचारी’ में नजर आए और ये फिल्म उनके करियर की बड़ी हिट साबित हुई। इसके बाद 2018 में मौका मिला ‘केजीएफ’ में काम करने का और उन्होंने इस फिल्म से इतिहास ही रच दिया। फिल्म ना केवल ब्लॉकबस्टर रही बल्कि इसने यश की किस्मत ही पलट दी। यश की इस मूवी की दीवनगी हिंदी बेल्ट में भी कमाल की देखने के लिए मिली। इसके बाद 2022 में फिल्म का सीक्वल आया और कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए।
    बहरहाल, अब अगर यश की अपकमिंग फिल्मों की बात की जाए तो ‘केजीएफ 2’ के बाद एक्टर ने कोई फिल्म नहीं की। उनकी अपकमिंग फिल्मों का फैंस को बेसब्री से इंतजार है। ऐसे में उनकी अपकमिंग फिल्म ‘टॉक्सिक’ है, जिसमें वो एक बार फिर से रॉकिंग स्टाइल में नजर आने वाले हैं। उनका ‘केजीएफ’ वाला ही अंदाज देखने के लिए फैंस बेताब हैं। इसे जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा। फिल्म में उनके साथ एक्ट्रेस कियारा आडवाणी भी अहम रोल में हैं।

  • ICC ने बांग्लादेश की भारत से बाहर मैच की मांग ठुकराई, T20 वर्ल्ड कप 2026 का शेड्यूल यथावत

    ICC ने बांग्लादेश की भारत से बाहर मैच की मांग ठुकराई, T20 वर्ल्ड कप 2026 का शेड्यूल यथावत




    नई दिल्ली।
    आईसीसी ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की भारत से बाहर मैच कराने की मांग को खारिज कर दिया है। पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर उठे इस विवाद में आईसीसी ने साफ कहा कि भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस खतरा नहीं है। इस कारण टूर्नामेंट के शेड्यूल या वेन्यू में किसी भी तरह का बदलाव फिलहाल जरूरी नहीं है।

    6 जनवरी को आईसीसी और बीसीबी के अधिकारियों के बीच ऑनलाइन बैठक हुई।

    आईसीसी ने बैठक में स्पष्ट किया कि उसके पास कोई ऐसा सुरक्षा आकलन नहीं है जिससे साबित हो कि भारत में खेलने के दौरान बांग्लादेशी टीम को कोई खास खतरा है। वहीं बीसीबी ने पहले 4 जनवरी को आपात बैठक कर आईसीसी को औपचारिक पत्र भेजा था, जिसमें खिलाड़ियों, टीम अधिकारियों और अन्य सदस्यों की सुरक्षा को देखते हुए भारत से बाहर मैच कराने की मांग की गई थी। हालांकि आईसीसी ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
    माना जा रहा है कि आईसीसी की औपचारिक प्रतिक्रिया 10 जनवरी तक सामने आएगी।

    मौजूदा शेड्यूल के अनुसार बांग्लादेश को ग्रुप सी में कोलकाता में अपने तीन मैच खेलने हैं। 7 फरवरी को बांग्लादेश वेस्टइंडीज से, 9 फरवरी को इटली से, 14 फरवरी को इंग्लैंड से और 17 फरवरी को नेपाल से भिड़ेगा।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब BCCI ने IPL फ्रेंचाइजी KKR को बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान को रिलीज करने का निर्देश दिया। मुस्ताफिजुर को IPL नीलामी में 9.2 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। इस फैसले के विरोध में BCB ने बांग्लादेश में IPL के प्रसारण पर रोक भी लगा दी थी।

    वहीं, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पुष्टि की कि मुस्ताफिजुर अब पाकिस्तान सुपर लीग में खेलेंगे।

    आईसीसी का रुख साफ है कि सुरक्षा की दृष्टि से भारत में बांग्लादेश के मैचों के वेन्यू में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। ICC के नियमों के मुताबिक टूर्नामेंट का शेड्यूल तय है और किसी भी टीम के अनुरोध पर बदलाव तभी किया जा सकता है जब सुरक्षा की स्थिति गंभीर खतरे का संकेत दे। फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।

    इस पूरे विवाद ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत में होने वाले मैचों की सुरक्षा और नियोजन को लेकर वैश्विक क्रिकेट जगत में ध्यान खींचा है। BCB और ICC के बीच बातचीत जारी है, लेकिन ICC ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में मैचों को शिफ्ट करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

  • 'अब जाति नहीं मेरिट जरूरी', जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला; किस पर पड़ेगा असर?

    'अब जाति नहीं मेरिट जरूरी', जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला; किस पर पड़ेगा असर?


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है, जिसका सीधा असर सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया और जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों पर पड़ता है। कोर्ट ने साफ किया है कि जनरल या ओपन कैटेगरी किसी जाति के लिए नहीं, बल्कि मेरिट के लिए होती है।

    अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी छूट के जनरल कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाता है, तो उसे जनरल कैटेगरी की सीट पर ही माना जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या साफ किया?

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ओपन या जनरल कैटेगरी सभी के लिए खुली होती है, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग का हो। अगर SC, OBC, MBC या EWS का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है तो उसे जनरल लिस्ट में शामिल किया जाएगा, न कि उसकी आरक्षित कैटेगरी में बांधा जाएगा।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि कई बार भर्ती में देखा गया है कि आरक्षित वर्ग का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा चला जाता है। ऐसी स्थिति में अगर आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ पार कर लेता है, तो उसे बाहर करना गलत है।

    ‘जनरल कैटेगरी किसी की निजी नहीं’

    कोर्ट ने दोहराया कि जनरल, ओपन या अनरिजर्व्ड शब्द का मतलब है- सभी के लिए खुला। यह किसी खास जाति, वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसलोंइंद्रा साहनी केस और सौरव यादव केस का हवाला देते हुए कहा, “ओपन कैटेगरी में आने की एक ही शर्त है- मेरिट। यह नहीं देखा जाएगा कि उम्मीदवार किस वर्ग से है।”

    ‘डबल फायदा’ वाला तर्क खारिज

    कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी कि ऐसे उम्मीदवारों को शामिल करने से उन्हें ‘डबल फायदा’ मिलेगा। साफ कहा गया कि अगर कोई रियायत नहीं ली गई है, तो यह कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म में अपनी जाति लिख देना अपने आप में आरक्षित सीट पाने का अधिकार नहीं देता, बल्कि सिर्फ यह बताता है कि उम्मीदवार आरक्षित सूची में भी दावेदार हो सकता है।

    क्या था मामला?

    यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की भर्ती से जुड़ा था। अगस्त 2022 में हाईकोर्ट ने 2756 पदों (जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II) के लिए भर्ती निकाली थी। लिखित परीक्षा के बाद मई 2023 में जब नतीजे आए तो SC, OBC, MBC और EWS का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा निकल गया। कुछ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने जनरल कट-ऑफ पार किया, लेकिन अपनी कैटेगरी का कट-ऑफ न होने के कारण उन्हें अगले राउंड से बाहर कर दिया गया।

    हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    इन उम्मीदवारों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले जनरल लिस्ट सिर्फ मेरिट के आधार पर बननी चाहिए और जो उसमें आ जाएं उन्हें अलग से आरक्षित लिस्ट में नहीं रखा जा सकता। अब दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी फैसले को सही ठहराते हुए राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की अपील खारिज कर दी।

    इस फैसले का मतलब क्या है?

    जनरल कैटेगरी किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि मेरिट की कैटेगरी है
    आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर बिना छूट जनरल कट-ऑफ पार करता है, तो वह जनरल सीट पर ही जाएगा
    इससे जनरल उम्मीदवारों के अधिकार नहीं छिने, बल्कि मेरिट का नियम मजबूत हुआ है

  • IIFL कैपिटल का दावा: 2025 की बड़ी कटौती के बाद भी 50 बेसिस पॉइंट्स की गुंजाइश

    IIFL कैपिटल का दावा: 2025 की बड़ी कटौती के बाद भी 50 बेसिस पॉइंट्स की गुंजाइश


    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंकRBI साल 2026 में एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। IIFL कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 1.25 प्रतिशत की बड़ी कटौती के बाद भी केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत दरों को 0.50 प्रतिशत यानी 50 बेसिस पॉइंट्स तक और घटाने की गुंजाइश बनी हुई है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो होम लोन ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की EMI और सस्ती हो सकती है जिससे आम लोगों को सीधी राहत मिलेगी।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल रेपो रेट और कोर इन्फ्लेशन के बीच का अंतर करीब 2.8 प्रतिशत है जो पिछले सात वर्षों के औसत 1.1 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है। जानकारों का मानना है कि महंगाई के नियंत्रण में रहने और इस बड़े अंतर के कारण RBI के पास तकनीकी और आर्थिक दोनों आधार मौजूद हैं जिनके सहारे वह ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। यही वजह है कि 2026 में रेट कट की संभावना को बाजार पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहा है।गौरतलब है कि साल 2025 में RBI ने आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के मकसद से ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। दिसंबर 2025 में आखिरी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया था। अब बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में रेपो रेट 5 प्रतिशत से नीचे या उसके आसपास पहुंच सकता है। यह स्तर कर्ज को और सस्ता बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    अगर 2026 में 0.50 प्रतिशत की अतिरिक्त कटौती होती है तो बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर लेंडिंग रेट घटाने का दबाव बढ़ेगा। इसका फायदा न सिर्फ नए लोन लेने वालों को मिलेगा बल्कि पहले से कर्ज चुका रहे लोगों की EMI भी कम हो सकती है। खासतौर पर होम लोन और कार लोन की मासिक किस्तें घटने से घरेलू बजट पर दबाव कम होगा। दूसरी ओर कंपनियों को सस्ता कर्ज मिलने से निवेश विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह है कि फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने वालों को ब्याज दरों में मामूली गिरावट झेलनी पड़ सकती है।

    IIFL कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार ब्याज दरों में नरमी और सरकार के सुधारात्मक कदम मिलकर देश की GDP ग्रोथ को मजबूती दे सकते हैं। बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ बेहतर रहने और वित्तीय हालात मजबूत बने रहने की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने का अनुमान है जिससे महंगाई पर नियंत्रण बना रह सकता है। यह स्थिति RBI के लिए रेट कट के पक्ष में एक मजबूत कारक मानी जा रही है।

    निवेशकों के लिहाज से भी यह संकेत अहम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में संभावित कटौती से शेयर बाजार को सहारा मिल सकता है। बैंकिंग रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। कुछ विश्लेषक निफ्टी में मौजूदा स्तर से करीब 15 प्रतिशत तक रिटर्न की संभावना जता रहे हैं जबकि स्मॉल कैप शेयरों में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। कुल मिलाकर 2026 में ब्याज दरों में कटौती की संभावना आम लोगों कारोबार और बाजार—तीनों के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।

  • भोपाल में सक्रिय हैं 6 ईरानी गैंग. चोरी-ठगी से लेकर नकली सोना खपाने तक के कारनामे

    भोपाल में सक्रिय हैं 6 ईरानी गैंग. चोरी-ठगी से लेकर नकली सोना खपाने तक के कारनामे

    भोपाल । भोपाल के ईरानी डेरे में अब तक की पुलिस जांच से यह खुलासा हुआ है कि यहां पर एक नहीं. बल्कि 6 से ज्यादा गैंग सक्रिय हैं। इन गैंग्स के पास अपनी-अपनी अपराधों की शृंखलाएँ हैं. और ये गैंग विभिन्न तरीकों से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इन गैंग्स का संचालन अलग-अलग लीडर्स करते हैं. लेकिन इन सभी गैंग्स के पीछे एक ही सरगना है राजू ईरानी. जो अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है
    ईरानी डेरे से पुलिस को एक बड़ी मात्रा में चोरी के सामान जैसे मोबाइल. लैपटॉप. सीपीयू. पैनड्राइव आदि मिले हैं. जिनका परीक्षण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि ये गैंग चोरी के मोबाइलों का सिक्योरिटी लॉक तोड़ने के लिए इन डिवाइसों का इस्तेमाल करते थे।

    काला ईरानी का प्रॉपर्टी कारोबार

    इसके अलावा. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ‘काला ईरानी’. जो निशातपुरा इलाके में लंबे समय से प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़ा था. पर भी पुलिस की नजर है। काला ने जनता नगर कॉलोनी में कई प्लॉटों को हेरफेर कर बेचा और करोड़ों की संपत्ति बना ली। पुलिस अब उसकी संपत्ति की बारीकी से जांच कर रही है। काले ईरानी के करीबी रहीम पर भी पुलिस की विशेष नजर है।

    सफर में होना और अपराधों का फैलाव

    ईरानी डेरे के अपराधी. जिनकी संख्या सैकड़ों में है. लंबे समय तक दूसरे शहरों और राज्यों में रहते हैं. ताकि वे विभिन्न आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे सकें। इस समय को गैंग “सफर में होना” कहते हैं। इसमें कबीले के युवा विभिन्न अपराधों को अंजाम देते हैं और पकड़े जाने पर माल को कबीले तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए दो अन्य लोग जिम्मेदार होते हैं। ये लोग बड़ी दूरी तय करने के लिए लग्जरी कार और बाइक का इस्तेमाल करते हैं।

    रिश्तेदारी का नेटवर्क और अपराध का फैलाव

    गैंग के कई सदस्य आपस में रिश्तेदार हैं. और इन रिश्तों के कारण उनका नेटवर्क महाराष्ट्र और राजस्थान तक फैला हुआ है। इस रिश्तेदारी का लाभ उठाते हुए यह गैंग दिल्ली. मुंबई. आंध्र प्रदेश. छत्तीसगढ़. राजस्थान. तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में आपराधिक गतिविधियाँ कर रहा है। ईरानी डेरा भोपाल में चोरों. ठगों और लुटेरों का पनाहगार बन चुका है। इस डेरा में रहने वाले करीब 70 परिवारों में हर परिवार में किसी न किसी का क्रिमिनल रिकॉर्ड है। यह गैंग न केवल मध्य प्रदेश में. बल्कि देश के 12 राज्यों में भी आपराधिक वारदातें अंजाम देता रहा है। वे गिरोह बनाकर दूसरे राज्यों में स्पेशल 26 फिल्म की तर्ज पर नकली सेल टैक्स. कस्टम. सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर लूट और ठगी की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    पुलिस पर हमला और हिंसा का सामना

    हाल ही में. भोपाल में पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने के लिए दबिश दी. तो स्थानीय महिलाओं ने पुलिस का रास्ता रोका और बाद में पुरुषों के साथ मिलकर पुलिस जवानों से झूमाझटकी की। इस बवाल के बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया और हंगामे को काबू किया। पुलिस ने इस हिंसक घटना में 24 पुरुषों और 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया। भोपाल का ईरानी डेरा अब अपराधियों के लिए एक कुख्यात ठिकाना बन चुका है. जहां से पूरे देश में आपराधिक गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। पुलिस द्वारा की जा रही जांच और दबिश के बावजूद. इस गैंग का सरगना राजू ईरानी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगातार उग्र विरोध और हिंसा भी हो रही है. लेकिन यह गैंग अब तक अपनी पकड़ बनाए हुए है।

  • मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असरदिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट. स्कूलों में छुट्टी जारी

    मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असरदिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट. स्कूलों में छुट्टी जारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में इस समय कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे का प्रभाव बहुत गहरा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया है. और कई इलाकों में यह और भी नीचे पहुंच चुका है। उमरिया में तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. जबकि राजगढ़. खजुराहो और शिवपुरी में 4.5 से 5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान गिरा है। वहीं. रीवा में भी 5.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बुधवार की सुबह कोहरे के कारण प्रदेश के आधे हिस्से में दृश्यता कम रही। विशेष रूप से सतना. दतिया. गुना. रीवा. ग्वालियर. राजगढ़. खजुराहो. नौगांव और सीधी जैसे इलाकों में कोहरे का असर सबसे ज्यादा रहा। इस कारण दिल्ली से आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें लेट हो गई हैं. जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    इसके साथ ही. इंदौर. रायसेन. ग्वालियर. मऊगंज. धार और नर्मदापुरम जिलों के स्कूलों में भी बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में कोल्ड वेव और शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले भी शाजापुर. शहडोल. सिवनी. मंदसौर. सीहोर में शीतलहर का असर देखा गया था. और भोपाल-राजगढ़ में तीव्र शीतलहर भी चली थी।

    प्रदेश में पिछले तीन दिन से लगातार कड़ाके की सर्दी पड़ रही है. जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस सर्दी की वजह से ही इंदौर. उज्जैन. मंदसौर. शाजापुर. विदिशा. ग्वालियर. अशोकनगर. रायसेन. आगर-मालवा. भिंड. टीकमगढ़. हरदा. नीमच. रतलाम. राजगढ़. मंडला. जबलपुर. दमोह. डिंडौरी. नर्मदापुरम. झाबुआ. छतरपुर. सीधी. बैतूल और कई अन्य जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है।

    इंदौर. रायसेन. ग्वालियर और नर्मदापुरम में बुधवार को भी स्कूलों की छुट्टियां जारी रही। वहीं. भोपाल. धार. सीहोर. अनूपपुर. बड़वानी. मुरैना और खरगोन में स्कूल सुबह 9 बजे के बाद ही खोले गए हैं। इस कड़ाके की ठंड ने बच्चों को स्कूलों तक पहुंचने में दिक्कतें दी हैं. खासकर छोटे बच्चों को सुबह-सुबह ठंड में स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी हो रही है।

    इस बार कड़ाके की ठंड का असर खास रहा है। नवंबर और दिसंबर के महीनों में प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी थी. और दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। जनवरी के पहले सप्ताह में भी प्रदेश में माइनस तापमान की स्थिति देखने को मिली।

    सर्दी का यह मौसम क्यों खास है

    मौसम विभाग के मुताबिक. दिसंबर और जनवरी में उत्तर भारत से सर्द हवाएं प्रदेश की ओर आती हैं. जिसके कारण इन महीनों में कड़ाके की ठंड होती है। इन दो महीनों में खासतौर पर शीतलहर और कोल्ड वेव जैसी स्थितियां बनती हैं। पिछले 10 सालों में ऐसे ही ट्रेंड देखे गए हैं. और इस बार भी जनवरी में मावठा हल्की बारिश का असर कुछ जिलों में देखा गया है।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में जनवरी के मौसम का ट्रेंड भी बहुत दिलचस्प है

    भोपाल18 जनवरी 1935 को यहां का रात का तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था। 26 जनवरी 2009 को दिन का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।इंदौरजनवरी में माइनस तापमान का रिकॉर्ड 16 जनवरी 1935 को माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस था।उज्जैन22 जनवरी 1962 को यहां पारा 0 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था।

    अंत में. मध्यप्रदेश में इस बार सर्दी और कोहरे का असर अत्यधिक देखा जा रहा है. जिससे न सिर्फ आम जनजीवन प्रभावित हुआ है. बल्कि स्कूलों और ट्रेनों की समय सारणी भी गड़बड़ाई है। ठंड और कोहरे के कारण कई ट्रेनें लेट हो रही हैं. और छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार. यह स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार जारी, चोरी के शक में नहर में छलांग लगाने से मौत

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार जारी, चोरी के शक में नहर में छलांग लगाने से मौत

    ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार दोपहर भंडारपुर गांव के निवासी मिथुन का शव बरामद किया।
    यह घटना पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तीव्र वृद्धि के बीच हुई है। मिथुन सरकार की मौत पिछले कुछ दिनों में सामने आई क्रूर हमलों की श्रृंखला में यह नई घटना है।

    हिंदू, बौद्ध और ईसाई एकता परिषद ने एक बयान जारी कर दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं का खुलासा किया है, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। परिषद ने आगजनी, बलात्कार और लूटपाट के मामलों का विस्तृत विवरण देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है कि ये अत्याचार 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होते हैं।

    परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना किया है, लेकिन वर्तमान समय में संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का खतरनाक संयोजन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब उस समय हो रहा जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।

    वहीं, मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया हत्याएं कोई छिटपुट त्रासदी नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता में आई व्यापक विफलता के संकेत हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है।

  • दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित

    दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित


     इंदौर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस गंभीर लापरवाही ने न सिर्फ आम नागरिकों की जान ली, बल्कि ‘देश के सबसे स्वच्छ शहर’ के रूप में पहचान बना चुके इंदौर की छवि को भी गहरा आघात पहुंचाया है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही अस्वीकार्य है। यदि जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों की सिविल के साथ-साथ आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

    हाईकोर्ट में दूषित पेयजल से संबंधित पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी संकेत दिया कि पीड़ित परिवारों को दिया गया मुआवजा यदि अपर्याप्त पाया गया, तो उसे बढ़ाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जवाब के साथ नई और अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या कार्ययोजना है।कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का अधिकार भी शामिल है। इस अधिकार की अनदेखी को अदालत ने गंभीर अपराध की श्रेणी में माना। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साफ है कि कोर्ट इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिनमें से 6 मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुल 110 मरीज फिलहाल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक 421 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, जिनमें से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 15 मरीज अभी भी आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि 31 दिसंबर को ही हाईकोर्ट ने स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद प्रभावित इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई जारी रही। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होती, तो यह जनहानि रोकी जा सकती थी।अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि वर्ष 2022 में नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पास किया गया था लेकिन फंड जारी न होने के कारण काम शुरू ही नहीं हो सका। इसके अलावा 2017-18 में लिए गए 60 जल नमूनों में से 59 नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सामने होने के बावजूद ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जिससे हालात लगातार बिगड़ते चले गए।