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  • JNU नारेबाजी विवाद: ‘शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचलेंगे’ CM फडणवीस का तीखा हमला

    JNU नारेबाजी विवाद: ‘शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचलेंगे’ CM फडणवीस का तीखा हमला

    नई दिल्ली। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर लगाए गए विवादित नारों ने एक बार फिर देश की राजनीति को गरमा दिया है। इस घटना के बाद जहां JNU प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए FIR दर्ज कराई, वहीं अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान ने इस विवाद को और तीखा बना दिया है।

    JNU प्रशासन ने इस नारेबाजी को लोकतंत्र और राष्ट्रीय मूल्यों पर हमला करार देते हुए साफ कहा है कि विश्वविद्यालय किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का मंच नहीं बन सकता। प्रशासन की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है पूरा मामला

    दरअसल, यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शुरू हुआ। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद आरोपियों शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद JNU कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

    प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए, जिससे देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

    CM देवेंद्र फडणवीस का तीखा बयान

    JNU में हुई नारेबाजी पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा और विवादित बयान दिया है। नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि JNU में लगाए गए नारे देशविरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं।

    फडणवीस ने कहा, “ये शरजील इमाम की औलादें हैं, जो JNU में पैदा हुई हैं। देशद्रोहियों और देश को तोड़ने की भाषा बोलने वालों के इरादों को कुचलने का काम किया जाएगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है।

    उन्होंने यह भी साफ किया कि देश की एकता और अखंडता के खिलाफ किसी भी सोच को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    शिवाजी महाराज पर भी दिया बयान

    इसी दौरान देवेंद्र फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर भी अहम टिप्पणी की। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटील के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि महापुरुष किसी एक समाज या जाति के नहीं होते।

    फडणवीस ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे देश के थे। उन्हें किसी एक समाज से जोड़ना गलत है। महापुरुषों को बांटना देश के हित में नहीं है।”

    JNU विवाद और नेताओं के बयानों के बाद यह मुद्दा अब केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन गया है।

  • टीवी सुपरस्टार इरफान खान की सालगिरह: यादगार किरदारों में छोड़ा अपना असर

    टीवी सुपरस्टार इरफान खान की सालगिरह: यादगार किरदारों में छोड़ा अपना असर

    नई दिल्ली। अपनी दमदार ऐक्टिंग और आवाज के दम पर लोगों को एंटरटेन करने वाला हिंदी सिनेमा का हीरा यानी इरफान खान अब इस दुनिया में नहीं रहें। पिछले दो महीनों से उनकी तबियत खराब थी, जिसके बाद उन्हें कोलोन इंफेक्शन के कारण हाल ही मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन वहां वह अपनी जिंदगी की रेस हार गए।
    इरफान खान सिनेमा की दुनिया का वह हीरा थे, जिसकी चमक दिन-रात बढ़ती ही गई और हर निर्माता-निर्देशक उनके साथ काम करने को मचल उठा। सिर्फ फिल्मों ही नहीं बल्कि टीवी की दुनिया में भी इरफान ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। शायद ही लोग जानते हों लेकिन सिनेमा का स्टार बनने से पहले इरफान टीवी की दुनिया के सुपरस्टार बने।

    मुस्लिम पठानी परिवार में जन्म, यह था असली नाम
    7 जनवरी 1967 को जयपुर के मुस्लिम पठानी परिवार में जन्मे इरफान बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनका पूरा और असली नाम था साहबजादे इरफान अली खान, जिसे बाद में बदलकर इरफान खान कर लिया। इरफान खान कभी भी ऐक्टिंग में नहीं आना चाहते थे। उनकी ख्वाहिश तो क्रिकेटर बनने की थी, लेकिन नैशनल स्क्रूल ऑफ ड्रामा से स्कॉलरशिप मिली तो ऐक्टिंग का कीड़ा जाग गया।

    मुंबई आने पर एसी रिपेयर का काम किया
    ऐक्टिंग का चस्का लेकर इरफान खान मुंबई आ गए और यहां उन्होंने एसी रिपेयर करने का काम शुरू कर दिया। माना जाता है कि जिस शख्स के घर वह सबसे पहले एसी ठीक करने गए थे, वह सुपरस्टार राजेश खन्ना का घर था।

    टीवी की दुनिया में कदम रखते ही मचाया था तहलका
    खैर, इसके बाद इरफान खान की एंट्री ऐक्टिंग में हुई और पहला कदम टीवी की दुनिया में रखा। पहला टीवी शो ‘श्रीकांत’ था और इसके बाद उन्होंने ‘भारत एक खोज’, ‘कहकशां’ ‘सारा जहां हमारा’, ‘बनेगी अपनी बात’, ‘चाणक्य’, ‘अंगूरी’, ‘स्पर्श’ और ‘चंद्रकांता’ जैसे सीरियलों में काम किया और अपनी एक अलग पहचान बनाई।

    नीरजा गुलेरी के ‘चंद्रकांता’ में इरफान खान ने शिवदत्त के विश्वसनीय पात्र बद्रीनाथ का किरदार निभाया था। बद्रीनाथ के अलावा उन्होंने जुड़वां भाई सोमनाथ का किरदार भी प्ले किया। इस शो ने तो इरफान खान के करियर की दिशा ही बदल दी। उनके पास फिल्म और टीवी के बड़े ऑफरों की लाइन ही लग गई।
    इस बीच इरफान ने दूरदर्शन पर ‘लाल घास पर नीले घोड़े’ नाम का एक टेलिप्ले किया था, जिसमें उन्होंने लेनिन का किरदार निभाया। इसके अलावा इरफान ने टीवी सीरीज ‘डर’ में भी काम किा, जिसमें उन्होंने साइको किलर का रोल किया था। इस सीरीज में ऐक्टर के के मेनन भी थे। इरफान थिअटर और टीवी की दुनिया में कमाल किए जा रहे थे कि तभी मीरा नायर की नजर उन पर पड़ी और साल 1988 में इरफान को अपनी फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ में काम दिया। यहीं से इरफान के लिए बॉलिवुड के दरवाजे खुल गए।
    जब इरफान खान ने कर लिया था ऐक्टिंग छोड़ने का फैसला
    लेकिन इसी दौरान इरफान खान की जिंदगी में वह मोड़ भी आया था जब वह ऐक्टिंग छोड़ देना चाहते थे। यह तब की बात हैजब वह टीवी के साथ फिल्मों में भी काम कर रहे थे। टीवी शोज हिट हो रहे थे, लेकिन इरफान को मलाल था कि एक भी फिल्म चल नहीं रही है। लेकिन 2001 में आई आसिफ कपाड़िया की फिल्म ‘द वॉरियर’ ने उनका मन बदल दिया।
  • मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट

    मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में एक नए नवाचार करते हुए आज मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों को टैबलेट वितरण किया। उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद से संबंधित संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्रालय में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कैबिनेट के सदस्यों और मंत्रि-परिषद के भारसाधक सचिवों को टैबलेट प्रदाय करने की शुरूआत हुई। कैबिनेट के सदस्यों ने टैबलेट प्राप्त किए और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ई-कैबिनेट की पहल हुई है। ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में संबंधितों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह एप्लीकेशन आधुनिक तकनीक, पेपरलैस, सुरक्षित और ऐसी गोपनीय प्रणाली है, जिसे मंत्रि-परिषद सदस्य कभी भी और कहीं भी अपनी सुविधा के अनुसार अवलोकन कर सकते हैं। मुख्य रूप से मंत्रि-परिषद की कार्य सूची देखने, ई-कैबिनेट एप्लीकेशन द्वारा पूर्व की बैठकों में लिए गए निर्णयों का पालन-प्रतिवेदन देखने में सुविधा होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पारदर्शिता और समय की बचत के लिए मंत्रि-परिषद सदस्य नई व्यवस्था का पूरा लाभ लेंगे। प्रारंभ में मंत्रि-परिषद बैठक का एजेण्डा भौतिक एवं डिजिटल रूप दोनों फार्मेट में भेजा जाएगा, बाद में यह पूर्णता डिजिटल रूप में भेजा जाएगा। इस पेपरलैस व्यवस्था अर्थात ई-कैबिनेट एप्लीकेशन प्रारंभ होने से भौतिक रूप से होने वाले फोल्डर वितरण, कागज एवं समय की बचत हो सकेगी।

    मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बताया कि वर्ष 1960 से लेकर अब तक लिए गए मंत्रि-परिषद के निर्णयों को डिजिटलाइज किया गया है। गत 2 वर्ष के मंत्रि-परिषद के निर्णय एक क्लिक पर देखे जा सकते हैं। मंत्रि-परिषद की बैठक के अंत में एक प्रेजेंटेशन द्वारा मंत्रियों को टैबलेट के उपयोग को प्रारंभ करने के उद्देश्य, व्यापक उपयोगिता और टैबलेट के कार्य संचालन की बुनियादी जानकारी दी गई।

  • क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग

    क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में मंगलवार का दिन विशेष रूप से शक्ति भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। गोस्वामी तुलसीदास की काव्य कृति श्रीरामचरितमानस के किष्किंधा कांड में एक ऐसा भावुक प्रसंग मिलता हैजो श्री राम और हनुमान जी के अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस प्रसंग में श्री राम ने हनुमान जी को अपने छोटे भाई लक्ष्मण से भी दोगुना प्रिय बताया है। आइए जानेंआखिर क्यों हनुमान जी थे श्री राम के लिए लक्ष्मण से भी अधिक प्रिय।

    ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान जी से पहली मुलाकात

    जब श्री राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थेतो वे किष्किंधा के ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे। वहां वानरराज सुग्रीवजो पहले ही बाली से भयभीत थेउन्हें देखकर डर गए। उन्हें संदेह हुआ कि कहीं ये दोनों प्रभु श्री राम के विरोधी तो नहीं हैं। इस कारण सुग्रीव ने हनुमान जी को ब्राह्मण का रूप धारण कर भेजाताकि वह यह पता कर सकें कि ये दोनों व्यक्ति कौन हैं।हनुमान जी ने ब्राह्मण का रूप अपनाया और श्री राम से उनका परिचय पूछा। जब श्री राम ने कहा कि वे दशरथ के पुत्र हैं और माता सीता की खोज में निकले हैंतब हनुमान जी ने तुरंत अपना असली रूप प्रकट किया और श्री राम के चरणों में गिर पड़े। इस घटना ने श्री राम और हनुमान जी के बीच के अटूट प्रेम की शुरुआत की।

    मम प्रिय लक्ष्मण ते दूना – जब श्री राम भावुक हुए

    हनुमान जीजो अपने प्रभु से मिलकर अत्यधिक भावुक हो गए थेउन्होंने अपनी भूल के लिए श्री राम से क्षमा मांगी। हनुमान जी ने कहाहे भगवान! मैं मूर्ख हूंलेकिन आपने मुझे क्यों नहीं पहचाना? इस पर श्री राम ने हनुमान जी को गले से लगा लिया और कहा:सुनु कपि जियँ मानसि जनि ऊना। तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना॥ समदरसी मोहि कह सब कोऊ। सेवक प्रिय अनन्य गति सोऊ॥अर्थ: श्री राम ने कहाहे हनुमान! अपने मन में कोई ग्लानि मत लाओ। तुम मुझे लक्ष्मण से भी दो गुने प्रिय हो। भले ही दुनिया मुझे समदर्शी कहेलेकिन मुझे वह सेवक सबसे प्रिय है जो पूरी तरह से मेरे शरण में रहता है और अनन्य भाव से समर्पित होता है।

    हनुमान जी क्यों थे श्री राम के लिए इतने प्रिय

    लक्ष्मण जीश्री राम के छोटे भाई थे और वे हमेशा उनके साथ रहते थेलेकिन हनुमान जी ने स्वयं को एक सेवक के रूप में पूरी तरह से समर्पित कर दिया था। शास्त्रों के अनुसारजो भक्त अपना अहंकार त्यागकर पूरी तरह से ईश्वर के शरण में रहता हैवह उनके लिए परिवार से भी बढ़कर होता है। यही कारण है कि हनुमान जी को श्री राम ने भरत सम भाई और लक्ष्मण से दूना प्रिय कहा।

    मंगलवार और हनुमान जी का विशेष संबंध

    यह मान्यता है कि हनुमान जी और श्री राम की पहली मुलाकात मंगलवार के दिन हुई थीइसलिए यह दिन हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल जैसे पर्व भी इसी दिन के साथ जुड़ी हुई हैंजो दर्शाते हैं कि प्रभु और भक्त का यह मिलन उसी समय हुआ था। इस प्रसंग से यह साफ होता है कि हनुमान जी का श्री राम के प्रति समर्पण और प्रेम अत्यधिक गहरा थाऔर इसीलिए श्री राम ने उन्हें अपने हृदय से लगाया और उन्हें लक्ष्मण से भी प्रिय माना।

  • बायो मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार और सुनियोजित प्रबंधन सुनिश्चित करें: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल

    बायो मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार और सुनियोजित प्रबंधन सुनिश्चित करें: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल


    नई दिल्ली। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, चिकित्सा अधोसंरचना के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा कर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने रीवा, सिंगरौली, ग्वालियर, सागर एवं बुधनी मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, मानव संसाधन की नियुक्ति और शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय गतिविधियों के सुचारु संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बायो मेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक एवं सुनियोजित प्रबंधन सुनिश्चित के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाये, पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन एवं निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने और पर्यावरण संरक्षण के मानकों का पालन करने के निर्देश दिए।

    बैठक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीएचसी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी और जिला चिकित्सालयों के उन्नयन से संबंधित प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और गुणवत्ता में सुधार शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने उन्नयन प्रस्तावों को व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने ऐसे सभी विषयों एवं प्रस्तावों, जिनके लिए सक्षम समिति अथवा मंत्रि-परिषद की स्वीकृति अपेक्षित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अग्रेषित करने के निर्देश दिए, जिससे निर्णय प्रक्रिया में विलंब न हो और योजनाओं का लाभ आमजन तक समय पर पहुंच सके। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री तरुण राठी उपस्थित थे।

  • महाकाल दर्शन जा रहे 3 दोस्तों की दर्दनाक मौत, तेलंगाना से उज्जैन-अयोध्या की यात्रा में हादसा

    महाकाल दर्शन जा रहे 3 दोस्तों की दर्दनाक मौत, तेलंगाना से उज्जैन-अयोध्या की यात्रा में हादसा


    उज्जैन । उज्जैन के देवास रोड स्थित चंदेसरा इलाके में मंगलवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हुआ। तेलंगाना से महाकाल मंदिर और अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए आ रहे युवकों की टेंपो ट्रक्स (क्रमांक KA36N0688) ट्राले से जा टकराई। हादसा सुबह करीब चार बजे हुआ, जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई।

    तेलंगाना के फरीदपुर, मेहबूबनगर निवासी बी. नरसिम्हा (20 वर्ष) अपने सात दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे थे। दुर्घटना के समय ट्राले में पाइप भरे हुए थे।

    ट्राले के चालक ने अचानक ब्रेक लगाने के कारण ट्रक्स ट्राले में जा घुसी।

    हादसे में घायल सभी को तुरंत चरक अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने नरसिम्हा पिता बालचंद्रणा (20 वर्ष) और जगन्नाथ पिता बेंकेंटेस (26 वर्ष) को मृत घोषित किया। गंभीर रूप से घायल शिवा कुमार पिता एलप्पा (25 वर्ष) को इंदौर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

    अन्य घायल युवकों में के.बी. नरसिम्हा, रामप्पा, मलेन पिता नरसप्पा, अरतिद पिता लक्ष्मण (11 वर्ष), वाहन चालक बाल मंद्रप्पा, चिन्ना कुंधाकुंटा, जिया कुमार पिता एलव्या और काशष्या पिता चित्रा रामुनु शामिल हैं। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

    एडिशनल एसपी गुरु प्रसाद पराशर ने बताया कि यह हादसा धार्मिक यात्रा पर जा रहे युवकों के लिए दर्दनाक साबित हुआ। पुलिस ने ट्राले को जब्त कर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    यह हादसा न केवल परिवार और दोस्तों के लिए त्रासदी है, बल्कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन पर भी सवाल खड़ा करता है।

  • सुबह खाली पेट पिएं ये 5 देसी ड्रिंक्स तेजी से घटेगा वजन

    सुबह खाली पेट पिएं ये 5 देसी ड्रिंक्स तेजी से घटेगा वजन


    नई दिल्ली । वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद रिजल्ट नहीं मिल रहा? तो आपकी सुबह की शुरुआत को बदलने का वक्त आ गया है। कई बार हम अपनी दिनचर्या पर ज्यादा ध्यान नहीं देते लेकिन सही तरीके से शुरुआत करना वजन घटाने में अहम भूमिका निभाता है। सुबह खाली पेट कुछ विशेष ड्रिंक्स से न केवल आपका मेटाबॉलिज्म तेज हो सकता है बल्कि ये शरीर को अंदर से साफ और स्वस्थ भी बनाए रखती हैं। आइए जानते हैं उन 5 देसी ड्रिंक्स के बारे में जिन्हें सुबह खाली पेट पीने से वजन घटाने में मदद मिल सकती है।
    गुनगुना नींबू पानी
    सुबह उठते ही गुनगुना नींबू पानी पीना वजन घटाने का एक बेहद आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है। नींबू में मौजूद विटामिन C मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इसके अलावा नींबू पानी शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। आप चाहें तो इसमें एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं जो इसकी प्रभावशीलता को और बढ़ा सकता है।
    नारियल पानी
    नारियल पानी कम कैलोरी और भरपूर पोषक तत्वों से भरपूर होता है। सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है जिससे ओवरईटिंग से बचाव होता है। यह शरीर को ठंडा रखता है और शरीर की इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है।
    ग्रीन टी
    ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और कैटेचिन्स शरीर में फैट बर्न करने में मदद करते हैं। सुबह खाली पेट ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वजन घटाने की प्रक्रिया को सपोर्ट मिलता है। अगर आप वजन घटाने में रुचि रखते हैं तो ग्रीन टी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
    जीरा पानी
    रातभर पानी में भिगोकर रखे हुए जीरे को सुबह उबालकर पीने से पाचन बेहतर होता है। जीरा पानी शरीर में जमा चर्बी को कम करने और गैस ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पेट को हल्का और साफ रखता है जिससे वजन कम करने में सहारा मिलता है।
    सेब का सिरका एप्पल साइडर विनेगर
    एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर पीने से फैट बर्निंग तेज होती है। यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने और भूख को कम करने में भी मदद करता है। एप्पल साइडर विनेगर शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया तेज होती है।

    ध्यान रखें ये बातें
    इन ड्रिंक्स को पीने के बाद कम से कम 20-30 मिनट तक कुछ न खाएं। यदि आपको एसिडिटी लो ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो इन ड्रिंक्स को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है। इन ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप वजन घटाने की दिशा में एक कदम और बढ़ा सकते हैं। याद रखें ये ड्रिंक्स न केवल फैट बर्न करने में मदद करती हैं बल्कि आपके शरीर को अंदर से भी स्वस्थ बनाती हैं।

  • विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ी हों शहरी विकास परियोजनाएं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ी हों शहरी विकास परियोजनाएं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वित किया जाए। नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को सुधारने, नगरीय क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ाने, नागरिक सेवा में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के अधिकाधिक उपयोग, अर्बन मोबिलिटी तथा ई-वाहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। ‘नमामि गंगा अभियान’ के समान ही ‘नमामि नर्मदे परियोजना’ पर कार्य आरंभ कर नर्मदा नदी तट की नगरीय बसाहटों के ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय सुधार और उपचारित जल के पुन:
    उपयोग के लिए कार्य योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी नगरीय निकायों में जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्थाओं के प्रति विशेष रूप से सजगता और सतर्कता बरती जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के संचालक मंडल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन तथा संचालक मंडल के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कंपनी के प्रबंधकीय, वित्तीय और लेखा परीक्षा तथा अंकेक्षण संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश में शहरी विकास के लिए म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी में 4 स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभागों के गठन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गई। इसमें परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी मोड, सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी गतिशीलता और नमामि नर्मदे तथा हरित एवं नदी संरक्षण के लिए प्रभागों का गठन प्रस्तावित है। परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी प्रभाग के अंतर्गत नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने, जन हित कार्यों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, वित्तीय अनुशासन, नीति आयोग तथा अन्य संबद्ध विभागों से समन्वय तथा मेट्रोपोलिटन एरिया डेवलपमेंट प्लानिंग को प्राथमिकता से लिया जाएगा। इसमें सोलर प्रोजेक्ट्स, हरित बांड, अप्रयुक्त परिसंपत्तियों के वैकल्पिक उपयोग जैसे नवाचार भी प्रस्तावित हैं। सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग के अंतर्गत ई-नगर पालिका प्रणाली, सीसीटीवी-जीआईएस आधारित निगरानी व्यवस्था, नागरिक सेवा प्लेटफार्म के उन्नयन, टोल संग्रह ई-पोर्टल एवं ऑनलाइन राजस्व संग्रहण जैसी स्मार्ट सिटी प्रणालियां संचालित की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नगरीय निकायों के आस-पास के क्षेत्रों के नियोजित विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नर्मदा और तापी नदी के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए नदियों के समग्र और सर्वांगीण विकास के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ‘नमामि गंगे’ के समान ‘नमामि नर्मदे परियोजना’ का क्रियान्वयन सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से करें। इसमें नगरीय विकास एवं आवास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विभाग, उद्योग विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    बैठक में बताया गया कि शहरी गतिशीलता प्रभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश ईवी पॉलिसी क्रियान्वयन, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, रोपवे, मल्टी लेवल पार्किंग, सार्वजनिक साइकिल सेवा, सिटी मोबिलिटी प्लान तथा ई-वाहन चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा।बैठक में अपर मुख्‍य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री संजय दुबे, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्री सुखबीर सिंह, श्री पी. नरहरि, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं आवास श्री संकेत भोंडवे तथा कंपनी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

  • IPL में खेलने से इनकार करना पड़ सकता है भारी, नीलामी की रकम भी जा सकती है, दो साल का बैन भी संभव

    IPL में खेलने से इनकार करना पड़ सकता है भारी, नीलामी की रकम भी जा सकती है, दो साल का बैन भी संभव


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) नीलामी किसी भी क्रिकेटर के करियर का बड़ा मोड़ होती है। करोड़ों की बोली लगना और रातों-रात स्टार बनना जितना आकर्षक है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर कोई खिलाड़ी नीलामी में बिकने के बाद अपनी मर्जी से IPL खेलने से इनकार कर दे, तो क्या उसे पूरी रकम मिलती है? IPL के नियम इस मामले में बेहद स्पष्ट हैं और काफी सख्त भी।

    IPL पूरी तरह BCCI द्वारा संचालित टूर्नामेंट है। नीलामी में भाग लेने वाला हर खिलाड़ी पहले से तय नियम और शर्तों को स्वीकार करता है।

    नीलामी में बिकने के बाद खिलाड़ी और फ्रेंचाइजी के बीच एक पेशेवर अनुबंध बन जाता है, जिसमें खिलाड़ी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह टूर्नामेंट में उपलब्ध रहे और टीम के लिए खेले।

    अगर कोई खिलाड़ी बिना वैध और ठोस कारण के खेलने से इनकार करता है, तो उसे नीलामी में मिली पूरी रकम नहीं दी जाती। IPL में लागू नियम ‘नो प्ले, नो पे’ के तहत स्पष्ट करते हैं कि यदि खिलाड़ी मैदान पर नहीं उतरता, तो उसे भुगतान का पूरा हक नहीं मिलता। इसका मकसद यह भी है कि फ्रेंचाइजी पर किए गए खर्च का नुकसान न हो।

    नीलामी में बिकने के बाद अचानक नाम वापस लेना BCCI के नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में खिलाड़ी पर अगले दो IPL सीजन और नीलामी से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यह प्रतिबंध केवल सजा नहीं है, बल्कि संदेश भी देता है कि खिलाड़ी नीलामी में शामिल होने से पहले पूरी गंभीरता से निर्णय लें।

    हालांकि, हर स्थिति में सजा तय नहीं होती। अगर खिलाड़ी किसी गंभीर चोट से जूझ रहा हो या राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जरूरी हो, तो उसे छूट दी जा सकती है। इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट या संबंधित बोर्ड की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होती है। बिना पुख्ता कारण या सबूत के इनकार मान्य नहीं होगा।

    फ्रेंचाइजी के लिए भी यह नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। नीलामी के दौरान टीम अपनी रणनीति खिलाड़ियों पर तैयार करती है। किसी खिलाड़ी पर बड़ी रकम खर्च करने के बाद यदि वह आखिरी वक्त पर खेलने से मना कर दे, तो टीम का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए BCCI ने सख्त नियम बनाए हैं ताकि लीग की विश्वसनीयता और फ्रेंचाइजी के हित सुरक्षित रह सकें।

    विदेशी खिलाड़ियों के मामले में यह नियम और भी जरूरी हो जाता है। कई विदेशी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल या निजी कारणों से IPL से हटना चाहते हैं। BCCI यह सुनिश्चित करता है कि कोई खिलाड़ी बिना ठोस वजह के लीग को हल्के में न ले।
    यदि कोई खिलाड़ी पूरे टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेता, तो आम तौर पर उसे पूरी रकम नहीं मिलती। हालांकि कुछ विशेष मामलों में फ्रेंचाइजी और खिलाड़ी के बीच आपसी सहमति से आंशिक भुगतान या अलग व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन यह पूरी तरह अनुबंध और नियमों पर निर्भर करता है।

    कुल मिलाकर, IPL नीलामी में बिकना केवल फायदे की बात नहीं है, बल्कि इसके साथ अनुशासन और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। बिना ठोस कारण IPL खेलने से इनकार करना खिलाड़ी के करियर और छविदोनों के लिए भारी पड़ सकता है। नियमों का पालन करना और टीम के प्रति प्रतिबद्ध रहना हर खिलाड़ी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

  • BCCL IPO: 9 जनवरी से खुलेगा सरकारी कंपनी का पब्लिक इशू, निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और जोखिम

    BCCL IPO: 9 जनवरी से खुलेगा सरकारी कंपनी का पब्लिक इशू, निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और जोखिम


    नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेडBCCL पहली बार शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है। कोल इंडिया लिमिटेड की इस सहायक कंपनी का इनिशियल पब्लिक ऑफरIPO 9 जनवरी 2026 को खुलेगा और 13 जनवरी तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। कंपनी ने इस पब्लिक इशू के लिए ₹21 से ₹23 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट में निवेश करने के लिए निवेशकों को कम से कम ₹13,800 लगाने होंगे। इस IPO को लेकर बाजार में काफी चर्चा है, क्योंकि यह एक बड़ी सरकारी कंपनी की लिस्टिंग मानी जा रही है।

    BCCL देश में कोकिंग कोल उत्पादन की अग्रणी कंपनी है। कोकिंग कोल का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टील निर्माण में किया जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। कंपनी को वर्ष 2014 में मिनी रत्नका दर्जा मिला था। इस IPO के जरिए कोल इंडिया लिमिटेड अपनी हिस्सेदारी घटा रही है, जिससे सरकार को विनिवेश के तहत पूंजी प्राप्त होगी।इस इशू के तहत निवेशकों को 600 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 8 जनवरी को खुलेगी, जबकि आम निवेशक 9 जनवरी से आवेदन कर सकेंगे। पात्र कर्मचारियों के लिए प्रति शेयर ₹1 का डिस्काउंट भी रखा गया है, जो सरकारी कंपनियों के IPO में आम तौर पर देखने को मिलता है। इशू बंद होने के बाद तय समय-सीमा के भीतर शेयरों का आवंटन और लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल(OFS आधारित है। इसके तहत कुल 46.57 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। चूंकि यह OFS है, इसलिए IPO से जुटाई गई पूरी रकम प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड को जाएगी, न कि BCCL को। इसका मतलब यह है कि इस इशू से कंपनी को सीधे तौर पर विस्तार, नई खदानों या प्रोजेक्ट्स के लिए कोई ताजा पूंजी नहीं मिलेगी। निवेशकों के लिए यह पहलू समझना बेहद जरूरी है।कंपनी की परिचालन स्थिति की बात करें तो वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, देश के घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में BCCL की हिस्सेदारी करीब 58.50% है। 1 अप्रैल 2024 तक कंपनी के पास लगभग 7,910 मिलियन टन कोयले का भंडार मौजूद था। BCCL झरिया और रानीगंज कोलफील्ड में फैली 34 खदानों का संचालन कर रही है, जो कुल 288.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हैं। कंपनी का प्रमुख ग्राहक आधार स्टील और पावर सेक्टर से जुड़ा हुआ है।

    उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए BCCL ने वर्ष 2021 से हैवी अर्थ मूविंग मशीनरीHEMM के इस्तेमाल को बढ़ाया है। इससे खनन कार्य की रफ्तार में सुधार हुआ है और परिचालन दक्षता भी बेहतर हुई है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का प्रदर्शन काफी हद तक सरकारी नीतियों, स्टील उद्योग की मांग और वैश्विक कोयला कीमतों पर निर्भर करता है। इन कारकों में उतार-चढ़ाव से मुनाफे पर असर पड़ सकता है।कोकिंग कोल को स्टील उद्योग की रीढ़ माना जाता है और भारत आज भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाली BCCL की भूमिका रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आने वाले वर्षों में स्टील सेक्टर की मांग मजबूत बनी रहती है, तो इसका सकारात्मक असर BCCL के कारोबार और निवेशकों की उम्मीदों पर भी दिख सकता है।