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  • बांग्लादेश तुर्की से खरीदने जा रहा सिरिट लेजर मिसाइल

    बांग्लादेश तुर्की से खरीदने जा रहा सिरिट लेजर मिसाइल

    ढाका। भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई तल्खी के बीच ढाका अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में बांग्लादेश ने तुर्की का रुख किया है और सिरिट (Cirit) लेजर-गाइडेड मिसाइलों खरीदने का फैसला लिया है। ये ‘स्मार्ट’ मिसाइलें, जो पहले से बांग्लादेश के ड्रोनों और आने वाले हमलावर हेलीकॉप्टरों पर एकीकृत हैं, आधुनिक युद्ध में सटीक हमलों की क्षमता बढ़ाएंगी। दरअसल, शेख हसीना के कार्यकाल के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंध मजबूत हुए हैं। पाकिस्तान पहले से ही तुर्की से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदता है।

    गौरतलब है कि बांग्लादेश ने तुर्की से बायराकटार टीबी-2 ड्रोन पहले ही खरीद लिए हैं, जिनका उपयोग भारतीय सीमा की निगरानी में हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय की निविदा प्रक्रिया के बावजूद तुर्की की सिरिट मिसाइल प्रणाली चुने जाने की संभावना मजबूत है। तुर्की की कंपनी रोकेत्सन द्वारा निर्मित यह मिसाइल सटीक और किफायती है, जिसे हमलावर हेलीकॉप्टरों पर भी लगाया जा सकता है। यह स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है, जिसमें बख्तरबंद और गैर-बख्तरबंद वाहन शामिल हैं।

    अब सवाल है कि सिरिट मिसाइल का भारत पर क्या असर हो सकता है? दरअसल, यह मिसाइल छोटे रॉकेट और निर्देशित टैंक-रोधी मिसाइलों के बीच की कमी को पूरा करती है। निर्माता के अनुसार, इसे विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर आसानी से लगाया जा सकता है। बांग्लादेशी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह देश की सैन्य जरूरतों के लिए आदर्श है। ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टरों पर इसका परीक्षण हो चुका है। इन मिसाइलों से बांग्लादेश वायु सेना भारत के निकट चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में दुश्मन ठिकानों को निशाना बना सकती है।

    इतना ही नहीं, बांग्लादेश तुर्की से छह टी-129 अटैक हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदने की बातचीत कर रहा है। भविष्य में देश शक्तिशाली चौथी पीढ़ी के यूरोफाइटर जेट हासिल करना चाहता है।

  • पाकिस्तान की हालत खस्ता : एयरलाइंस के बाद अब बैंक, होटल बेचने की तैयारी में शरीफ सरकार

    पाकिस्तान की हालत खस्ता : एयरलाइंस के बाद अब बैंक, होटल बेचने की तैयारी में शरीफ सरकार


    इस्‍लामाबाद। बीते दिनों सरकारी एयरलाइंस की सार्वजनिक नीलामी के बाद अब पाकिस्तान की सरकार बैंकों और होटलों को भी बेचने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे PAK के पास निजीकरण के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और इस क्रम में शहबाज शरीफ की सरकार ने बैंक, होटल, बिजली कंपनियां, बीमा और यहां तक की रिटेल नेटवर्क तक को बेचने की योजना बना ली है।

    पाकिस्तानी हुकूमत के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों को पूरा करने और डिफॉल्ट से बचने के लिए सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है। पाकिस्तानी अफसरों ने तो यह तक कह दिया है कि स्थिति ‘करो या मरो’ जैसी बन गई है। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों और कैबिनेट मीटिंग्स का हवाला देकर बताया गया है कि 2026 के अंत तक कई बड़े सरकारी आउटलेट प्राइवेट हाथों में सौंपे जा सकते हैं। इनमें बिजली वितरण कंपनियां, बैंक, होटल, इंश्योरेंस और एनर्जी सेक्टर शामिल हैं।
    क्या है ‘एजेंडा-5’?

    जानकारी के मुताबिक शरीफ सरकार ने निजीकरण के लिए अगले 12 महीनों में पांच बड़े सेक्टर चिन्हित किए हैं, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘एजेंडा-5’ का नाम दिया गया है। इनमें बिजली वितरण कंपनियां, बैंकिंग सेक्टर, होटल और रियल एस्टेट, एनर्जी जनरेशन कंपनियां और बीमा और रिटेल नेटवर्क के कुछ वर्टिकल शामिल हैं।

    यह पूरा प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम पाकिस्तान के हाइब्रिड पॉलिटिकल सिस्टम के तहत चल रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भूमिका अहम बताई जा रही है। हालांकि इस फैसले का पाकिस्तान में भारी विरोध भी हो रहा है। जहां समर्थकों का कहना है कि आर्थिक सुधार का यह इकलौता रास्ता है, वहीं दूसरी तरफ विरोधियों का आरोप है कि यह शहबाज शरीफ की सरकार की नाकामी दिखाती है। इसे देश की संप्रभुता से खिलवाड़ भी कहा जा रहा है।
    पाकिस्तान की हालत खस्ता

    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दिनों पाक को अपनी सरकारी एयरलाइंस, नेशनल एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की सार्वजनिक नीलामी करनी पड़ी। वहीं पाकिस्तान पर मौजूदा समय में करीब 131 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है। हालात यह हैं कि सरकार रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए भी उधार ले रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की स्थिति अगर यही बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान में श्रीलंका जैसे हालात पैदा हो जाएं।

  • पाक आर्मी चीफ मुनीर ने सगे भाई के बेटे से ही करा दिया बेटी का निकाह

    पाक आर्मी चीफ मुनीर ने सगे भाई के बेटे से ही करा दिया बेटी का निकाह

    लाहोर। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बेटी की शादी हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि मुनीर ने अपने ही सगे भाई के बेटे से अपनी बेटी की शादी कराई है। यह शादी पिछले हफ्ते रावलपिंडी में हुई और इसमें तमाम राजनीतिक हस्तियों और सैन्य अफसरों ने हिस्सा लिया। हालांकि हाई प्रोफाइल मेहमानों के बावजूद, इसे बिल्कुल निजी रखा गया था।

    पत्रकार ने की परिवार में शादी की पुष्टि
    पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि आसिम मुनीर की बेटी का निकाह उनके भाई के बेटे से हुआ है। एक अन्य पत्रकार रजा मुनीब ने भी इस बात की पुष्टि की है। रजा ने कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी बेटी की शादी, भाई कासिम मुनीर के बेटे से की है। यह शादी रावलपिंडी में हुई।

    पिछले हफ्ते हुआ निकाह
    अपने वीडियो में गिशकोरी ने बताया कि दूल्हे का नाम अब्दुर रहमान है। यह एक हाई प्रोफाइल शादी थी। उन्होंने आगे बताया कि रहमान पहले पाकिस्तान आर्मी में कैप्टन था। गिशकोरी ने इस वीडियो में आसिम मुनीर की बेटियों के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मुनीर की चार बेटियां हैं। यह उनकी तीसरी बेटी की शादी है, जिसका नाम महनूर है।

    क्या करता है दूल्हा?
    दूल्हे के बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए गिशकोरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना में कैप्टन रहने के बाद वह सिविल सर्विसेज की तरफ चला गया। फिलहाल वह आर्मी अफसरों के सिविल सर्विसेज कोटा के तहत असिस्टेंट कमिश्नर है। गिशकोरी ने बताया कि इस शादी में वर्तमान पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान स्थित पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ समेत कई रिटायर्ड जनरल्स और पूर्व आर्मी चीफ मौजूद रहे।
    पूरी तरह गोपनीय रखी गई शादी
    इस शादी में यूएई के राष्ट्रपति के शामिल होने की भी खबरें थीं। हालांकि गिशकोरी ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि यूएई के राष्ट्रपति वहां आए नहीं थे। उन्होंने बताया कि इस शादी में 400 से ज्यादा मेहमान मौजूद थे और सुरक्षा कारणों से शादी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था।

  • ‘धुरंधर’ की सफलता के बीच श्रीराम राघवन बोले- ऐसी फिल्में बनाना मेरा पागलपन होगा, 1 जनवरी को आएगी इक्कीस

    ‘धुरंधर’ की सफलता के बीच श्रीराम राघवन बोले- ऐसी फिल्में बनाना मेरा पागलपन होगा, 1 जनवरी को आएगी इक्कीस


    नई दिल्ली।बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर फिल्म की सफलता के चर्चे जोरों पर हैं। रणवीर सिंह की यह स्पाई थ्रिलर भारत और विदेश में रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर चुकी है। भारत में 700 करोड़ रुपये से अधिक और विदेश में 1100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी यह फिल्म 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शुमार हो चुकी है।लेकिन इस फिल्म की सफलता के बीच फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग इसे लेकर ज्यादा कम्फर्टेबल नहीं हैं। इक्कीस फिल्म के डायरेक्टर श्रीराम राघवन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में साफ कहा कि वह इस तरह की फिल्में कभी नहीं बनाएंगे। उन्होंने कहाअगर मैं ऐसी फिल्में करने लगा तो यह मेरा सबसे बड़ा पागलपन होगा।

    श्रीराम राघवन ने यह भी कहा कि धुरंधर अच्छी बनी फिल्म है और इसके परफॉर्मेंस भी शानदार हैं लेकिन यह उनकी शैली की फिल्म नहीं है। उन्होंने आगे कहाहमें समझना चाहिए कि सब अलग समय में अलग फॉर्मेट की फिल्में बना रहे हैं। धुरंधर शानदार कर रही है लेकिन यही मेरी फिल्में नहीं हैं। अगर मैं ऐसा करूं तो यह मेरा पागलपन होगा।डायरेक्टर ने धुरंधर के निर्देशक आदित्य धर की तारीफ भी की। उन्होंने कहाआदित्य का अलग सेंस और क्राफ्ट है और मुझे उनकी फिल्में देखना पसंद है लेकिन मैं ऐसा कुछ नहीं बना सकता।अब बात करें श्रीराम राघवन की फिल्म इक्कीस की। यह फिल्म सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी पर आधारित है जिन्हें सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र सम्मान प्राप्त हुआ था। फिल्म में अगस्त्य नंदा ने अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है। उनके अपोजिट सिमर भाटिया हैं जो अक्षय कुमार की भांजी हैं। दोनों की यह पहली फिल्म है जो थिएटर में रिलीज़ हो रही है।

    फिल्म में धर्मेंद्र जयदीप अहलावत और दीपक डोबरियाल भी अहम भूमिकाओं में हैं। रिलीज़ से पहले ही फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने इस मूवी की सराहना की है और इसे शानदार बताया।इक्कीस फिल्म 1 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है। फिल्म के रिलीज़ होते ही दर्शकों और समीक्षकों के बीच इसका क्रेज़ देखने को मिलेगा। इस फिल्म से दर्शकों को एक प्रेरणादायक कहानी देखने को मिलेगी और यह भारतीय वीरता की मिसाल पेश करेगी।

  • MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP

    MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP


    सतना।
    पद और प्रतिष्ठा मिल जाए, लेकिन इंसान को अपना अतीत और किसी का उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए। मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) के चर्चित और संवेदनशील अधिकारी DSP संतोष पटेल ने इस बात को साबित कर दिखाया है। वे अपने ऊपर चढ़े हुए 26 साल पुराने एक कर्ज (A 26-year-old Debt) को उतारने के लिए सतना (Santa) की तंग गलियों में मौजूद एक झुग्गी बस्ती (Slum) में पहुंचे। यह कर्ज पैसों का नहीं था, बल्कि खून का था। जिस सफाईकर्मी संतु मास्टर ने बचपन में अपना खून देकर संतोष पटेल की जान बचाई थी, वे उसी से मिलने के लिए शहर में आए थे। हालांकि यहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि संतु अब दुनिया में नहीं रहे, जिसके बाद वे उनके परिवार का पता लगाकर उनसे मिलने के लिए यहां आ गए। यहां संतु मास्टर की बेटियों से मिलकर वह भावुक हो गए और इस दौरान उन्होंने उनकी बड़ी बेटी के चरण स्पर्श कर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया।

    यहां पहुंचकर DSP संतोष पटेल ने एकबार फिर अपने बचपन का वो डरावना मंजर याद किया, जब उनकी जान पर बन आई थी। बात साल 1999 की है, जब वे महज 8-9 साल के थे। एक गंभीर बीमारी ने उन्हें जकड़ लिया था। शरीर का खून पानी बनकर मवाद में बदल गया था। इस दौरान उनके पिता और दादा ने 6 महीने झाड़-फूंक में गंवा दिए। हालत बिगड़ने पर उन्हें पन्ना जिला अस्पताल और फिर सतना के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि तत्काल ऑपरेशन करना होगा, और खून की सख्त जरूरत है।


    खून देने से पहले पिता को लगाई थी फटकार

    DSP ने बताया कि उस दौर में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां थीं और कोई डोनर नहीं मिल रहा था। लेकिन इसी बीच अस्पताल में एक अजीब संयोग बना। संतोष के पिता ने गलती से पान-सुपारी खाकर अस्पताल परिसर में थूक दिया। वहां सफाई कर रहे संतु ने उन्हें देखा और दौड़कर आया। इसके बाद उसने पिता को डांटा-फटकारा और चला गया। हालांकि इसी दौरान जब बेटे की हालत की वजह से संतोष के पिता जब वहां पर निराश बैठे हुए थे, तो उसी सफाईकर्मी संतु ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा था, ‘आप हताश मत हो, आपका बेटा जिंदा रहेगा।’

    इसी बीच जब संतु मास्टर को पता चला कि बच्चे को खून की जरूरत है, तो उसने बिना किसी स्वार्थ के अपना ब्लड डोनेट किया था। उसी खून से ऑपरेशन सफल रहा और आज संतोष पटेल जिंदा हैं और पुलिस अधिकारी है।

    ‘अधिकारी नहीं, बेटा बनकर आया हूं’
    DSP बनने के बाद संतोष पटेल सतना के उसी अस्पताल पहुंचे। वे संतु मास्टर को गले लगाना चाहते थे, लेकिन वहां पता चला कि उनका निधन हो चुका है और पत्नी भी नहीं रहीं। अस्पताल की एक बुजुर्ग महिला कर्मचारी ने बताया कि संतु की दो बेटियां झुग्गी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद DSP उनका पता लेकर तुरंत यहां पहुंचे। वर्दी पहने एक बड़े अफसर को अपनी झोपड़ी में देख बेटियां सहम गईं, लेकिन जब DSP ने झुककर उनके पैर छुए, तो सबकी आंखें नम हो गईं।


    DSP बोले- मैं करूंगा कन्यादान

    DSP ने संतु की बेटियों से कहा,मैं संतु मास्टर का मुंह नहीं देख पाया, इसका अफसोस जीवन भर रहेगा, लेकिन मेरी रगों में भी उनका खून दौड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे लोग अकेले नहीं हैं। DSP ने संकल्प लिया कि वे संतु मास्टर की छोटी बेटी की शादी धूमधाम से कराएंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर समय और संयोग रहा, तो मैं खुद भाई और पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान भी करूंगा’।

  • ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर मचा रही धमाल, लेकिन 10 मिलियन डॉलर का नुकसान क्यों?

    ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर मचा रही धमाल, लेकिन 10 मिलियन डॉलर का नुकसान क्यों?


    नई दिल्ली।रणवीर सिंह की हालिया फिल्म धुरंधर बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही है। 5 दिसंबर को रिलीज हुई यह फिल्म 30 दिसंबर तक आते-आते 709.65 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुकी है। इसके बावजूद फिल्म को 10 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ और इसके पीछे का कारण जानकर फैंस हैरान हैं।फिल्म के ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूटर प्रणब कपाड़िया ने हाल ही में दिए गए इंटरव्यू में बताया कि मिडिल ईस्ट के कई देशों में धुरंधर को बैन कर दिया गया। प्रणब ने कहा मुझे लगता है कि हमने कम से कम दस मिलियन डॉलर का बॉक्स ऑफिस गंवा दिया है क्योंकि एक्शन फिल्में मिडिल ईस्ट में हमेशा बहुत अच्छा परफॉर्म करती हैं। इसलिए हमें लगता है कि फिल्म को वहां रिलीज़ मिलनी चाहिए थी।

    हालांकि यह पहली बार नहीं है जब फिल्मों पर बैन लगा हो। प्रणब ने आगे कहा यह हमारी पहली फिल्म नहीं है जिसे वहां रिलीज़ नहीं दी गई। इससे पहले फाइटर और कई अन्य फिल्में भी इसी वजह से प्रभावित हुई हैं। हमने निश्चित रूप से पूरी कोशिश की कि फिल्म को वहां रिलीज़ मिल सके लेकिन परिस्थितियों ने अलग फैसला लिया।फिल्म की रिलीज़ का समय भी इसे फायदा पहुंचाने में मददगार रहा। प्रणब ने बताया मैं ऐसे लोगों को जानता हूं जिन्होंने छुट्टियों में गल्फ से यूरोप या अमेरिका यात्रा की और वहीं फिल्म देखी। फिल्म दिसंबर के दूसरे आधे हिस्से में रिलीज़ हुई जो छुट्टियों का समय होता है। लोग विदेश यात्रा कर रहे थे लेकिन उन्होंने अपने शेड्यूल में एक शाम धुरंधर देखने के लिए जगह बनाई।

    फिल्म धुरंधर को दो पार्ट्स में रिलीज़ किया जाएगा। पहला पार्ट सिनेमाघरों में रिकॉर्ड तोड़ रहा है और दर्शकों को लुभा रहा है। वहीं दूसरा पार्ट ईद 2026 पर रिलीज़ होने की संभावना है जिसे लेकर फैंस में उत्साह पहले से ही देखा जा रहा है।इस फिल्म की सफलता दर्शाती है कि रणवीर सिंह की पॉपुलैरिटी और एक्शन थ्रिलर की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि मिडिल ईस्ट में बैन के कारण हुए नुकसान ने इंडस्ट्री को यह भी याद दिलाया कि ग्लोबल मार्केट में रिलीज़ की प्लानिंग कितनी महत्वपूर्ण होती है।

  • 1 जनवरी से नए दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम अनिवार्य करने के फैसले में फंसा पेच

    1 जनवरी से नए दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम अनिवार्य करने के फैसले में फंसा पेच

    नई दिल्ली। देश में 1 जनवरी 2026 से सभी नए दोपहिया वाहनों (New two-wheelers) में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) (Anti-lock braking system – ABS) अनिवार्य करने के फैसले पर पेच फंस गया है। इसे लागू होने में सिर्फ एक दिन बचा है, लेकिन वाहन कंपनियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सरकार से इस नियम पर फिर विचार करने की मांग की है।

    माना जा रहा है कि एक जनवरी की समयसीमा को आगे बढ़ाया जा सकता है। गौरतलब है कि सरकार ने इस साल जून में यह प्रस्तावित किया था कि कंपनियों के लिए एक जनवरी 2026 से सभी नए दोपहिया वाहनों में एबीएस लगाना अनिवार्य होगा। इस मामले से जुड़े दो अधिकारियों ने बताया कि कंपनियों ने अब सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है।

    इनकी दलील है कि देश में नई ब्रेक प्रणाली से जुड़ी आपूर्ति अभी पर्याप्त नहीं है। अगर एक साथ सभी दोपहिया वाहनों में इसे अनिवार्य किया गया तो पुर्जों की कमी हो सकती है और उत्पादन पर असर पड़ेगा। इससे गाड़ियों की कीमतें भी बढ़ेंगी, जिसका सीधा बोझ आम ग्राहकों पर पड़ सकता है। उनका सुझाव है कि इस नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि वाहन उद्योग को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।

    क्या है मामला
    सरकार की योजना है कि सड़क हादसों को कम करने के लिए सभी दोपहिया वाहनों में एबीएस को अनिवार्य किया जाए। फिलहाल यह व्यवस्था सिर्फ 125 सीसी से अधिक क्षमता वाली बाइकों में लागू है, जबकि छोटी बाइकों और स्कूटरों में केवल कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम (सीबीएस) होता है। देश के कुल बाइक बाजार में लगभग 84% हिस्सेदारी इसी सस्ते श्रेणी की है।


    अधिसूचना जारी नहीं

    अधिकारियों के मुताबिक, एक जनवरी की समयसीमा नजदीक होने के बावजूद स्थिति अभी साफ नहीं है। सरकार ने इस संबंध में जल्द अधिसूचना जारी करने की बात कही थी लेकिन यह अब तक नहीं हुई है। यह संकेत माना जा रहा है कि नई समय सीमा तय की जा सकती है। केंद्र सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।


    ऐसे काम करता है एबीएस

    एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) एक उन्नत तकनीक है, जो अचानक ब्रेक लगाने पर पहियों को लॉक होने से रोकता है, जिससे वाहन का संतुलन बना रहता है और दुर्घटनाएं टल सकती हैं। यह प्रणाली ब्रेक लगाते समय पहियों पर बार-बार दबाव देकर वाहनों को फिसलने और घसीटने को रोकती है, जिससे चालक को वाहन को नियंत्रित करने और अवरोधों से बचने का समय मिल जाता है।


    क्या है सरकार का मकसद

    सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सड़क हादसों में 44% मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा में सुधार जरूरी है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य दोपहिया वाहनों से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को कम करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में देश में हुई कुल 1,51,997 सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 20% में दोपहिया वाहन शामिल थे।

  • ट्रंप के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने भी किया सीजफायर कराने का दावा

    ट्रंप के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने भी किया सीजफायर कराने का दावा


    बीजिंग।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के बाद अब चीन (China) भी भारत और पाकिस्तान में सीजफायर (India-Pakistan, ceasefire) कराने का दावा कर रहा है।  चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस वर्ष चीन द्वारा ‘मध्यस्थता’ किए गए प्रमुख संवेदनशील मुद्दों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी शामिल रहे। भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।

    भारत का यह कहना रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सात से 10 मई के दौरान संघर्ष का समाधान दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हुआ था। भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था।

    बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर संगोष्ठी में वांग ने कहा, ‘इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है।’ उन्होंने कहा, ‘स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।’

    उन्होंने कहा, ‘गतिरोध वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के इस दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, हमने उत्तरी म्यांमा, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के मुद्दों तथा कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।’


    पाकिस्तान को दी थी मदद

    इस वर्ष 7 से 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में चीन की भूमिका, विशेष रूप से उसके द्वारा पाकिस्तान को प्रदान की गई सैन्य सहायता, गंभीर जांच और आलोचना के दायरे में आ गई। कूटनीतिक मोर्चे पर, चीन ने सात मई को भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने का आह्वान किया था।

    चीन की विदेश नीति संबंधी पहल पर अपने संबोधन में वांग ने भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की अच्छी गति का जिक्र किया। साथ ही अगस्त में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बीजिंग द्वारा आमंत्रित किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘इस वर्ष हमने भारत और उत्तर कोरिया के नेताओं को चीन में आमंत्रित किया। चीन-भारत संबंधों में अच्छी गति देखने को मिली और उत्तर कोरिया के साथ पारंपरिक मित्रता और मजबूत हुई तथा उसे और बढ़ावा मिला।’ उन्होंने यह भी कहा कि एससीओ शिखर सम्मेलन एक शानदार सफलता थी। वांग यी ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ चीन का जुड़ाव अब साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के एक नए चरण में प्रवेश कर गया है, जो अब और तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

  • डॉन 3 में बड़ा बदलाव: रणवीर सिंह बाहर, फरहान अख्तर को मिला नया डॉन? ऋतिक रोशन का नाम चर्चा में..

    डॉन 3 में बड़ा बदलाव: रणवीर सिंह बाहर, फरहान अख्तर को मिला नया डॉन? ऋतिक रोशन का नाम चर्चा में..


    नई दिल्ली।बॉलीवुड की सबसे चर्चित फ्रेंचाइज़ी में से एक डॉन एक बार फिर सुर्खियों में है। फरहान अख्तर के निर्देशन में बनने वाली फिल्म डॉन 3 को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिकरणवीर सिंह अब इस फिल्म का हिस्सा नहीं हैं। इस खबर ने न सिर्फ उनके फैंस को चौंका दिया हैबल्कि इंडस्ट्री में भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    करीब डेढ़ साल पहले फरहान अख्तर ने आधिकारिक तौर पर डॉन 3 का ऐलान किया था। उस वक्त उन्होंने रणवीर सिंह को नए डॉन के रूप में पेश किया था। यह फैसला अपने आप में बड़ा थाक्योंकि शाहरुख खान द्वारा निभाया गया डॉन का किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है। रणवीर की एंट्री के बाद जहां एक वर्ग ने उत्साह दिखायावहीं सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। इसके बावजूद रणवीर सिंह ने फैंस से अपील की थी कि वे उन्हें इस किरदार में देखने से पहले एक मौका जरूर दें।हालांकि अब ताजा रिपोर्ट्स के अनुसाररणवीर सिंह ने डॉन 3 से दूरी बना ली है। बताया जा रहा है कि हाल ही में आई उनकी फिल्म धुरंधर की जबरदस्त सफलता के बाद रणवीर लगातार एक जैसे इंटेंस और डार्क किरदारों में खुद को नहीं दोहराना चाहते। यही वजह मानी जा रही है कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट से हटने का फैसला लिया। हालांकिइस पूरे मामले पर अभी तक रणवीर सिंह या फरहान अख्तर की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    रणवीर के बाहर होने की खबरों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि डॉन 3 का नया चेहरा कौन होगा? इसी बीच इंडस्ट्री से जुड़ी रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि फरहान अख्तर को अपना नया डॉन मिल सकता है। यह नाम है बॉलीवुड के ग्रीक गॉडकहे जाने वाले ऋतिक रोशन का।सूत्रों के मुताबिकरणवीर सिंह के बाहर होने के बाद फरहान अख्तर ने नए विकल्पों पर विचार शुरू किया और इसी दौरान ऋतिक रोशन का नाम सामने आया। हालांकि अभी कास्टिंग को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ हैलेकिन ऋतिक को डॉन के किरदार के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। अगर यह कास्टिंग फाइनल होती हैतो यह डॉन फ्रेंचाइज़ी के लिए एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ साबित हो सकता है।

    गौरतलब है कि ऋतिक रोशन का डॉन से पुराना कनेक्शन भी रहा है। वे शाहरुख खान स्टारर डॉन 2 में एक छोटे से कैमियो में नजर आ चुके हैं। ऐसे में दर्शकों के लिए उन्हें पूरे फोकस के साथ डॉन के किरदार में देखना बेहद खास अनुभव हो सकता है।फिलहाल डॉन 3 को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। रणवीर सिंह के बाहर होने और ऋतिक रोशन के संभावित चयन की खबरों ने फैंस की उत्सुकता और बढ़ा दी है। आने वाले समय में फरहान अख्तर या फिल्म की टीम की ओर से आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद की जा रही है। तब तक डॉन 3 बॉलीवुड की सबसे चर्चित फिल्मों में बनी हुई है।

  • राष्ट्रपति के 14 सवालों पर चर्चा.. अरावली से लेकर आवारा कुत्ते तक… 2025 में SC ऐतिहासिक फैसले

    राष्ट्रपति के 14 सवालों पर चर्चा.. अरावली से लेकर आवारा कुत्ते तक… 2025 में SC ऐतिहासिक फैसले


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के कुछ ऐतिहासिक फैसलों (Historic decisions) के साथ 2025 का अंत होने जा रहा है। इन फैसलों में अरावली की परिभाषा (Definition of Aravalli) तय करने से लेकर आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां, निठारी कांड में चौंकाने वाला फैसला, राष्ट्रपति के 14 सवालों पर बेहद जरूरी चर्चा के अलावा बहुत कुछ शामिल है।

    दूसरी ओर विधि मंत्रालय ने लगभग 50 पुराने कानूनों को इतिहास के पन्नों में समेट दिया, जिससे रोजमर्रा का कानूनी प्रशासन और सरल और जन-केंद्रित बन गया। मंत्रालय ने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों (एडीआर) को तेज करके लंबित मामलों को कम करने के लिए भी सराहनीय कोशिशें कीं। मंत्रालय ने इस साल न्यायपालिका के प्रति उदार रुख अपनाते हुए खुद सरकार द्वारा दायर किए गए बड़ी संख्या में लंबित मामलों को वापस ले लिया। ज्ञात हो कि अदालतों में सरकार सबसे बड़ी वादी है।


    राष्ट्रपति के अहम सवाल

    कार्यपालिका बनाम न्यायपालिका का एक पेचीदा मामला भी इस साल उच्चतम न्यायालय के सामने आया। इसमें मुख्य मुद्दा यह था कि क्या सुप्रीम कोर्ट किसी राज्यपाल को किसी विधेयक (बिल) पर निर्णय लेने का आदेश दे सकती है, जिसे राज्यपाल ने अपने विवेक से रोक कर रखा हो। इस मामले में अनुच्छेद 200 और 201 पर ‘राष्ट्रपति संदर्भ’ के माध्यम से भी राय मांगी गई थी। राष्ट्रपति यह जानना चाहते थीं कि क्या अदालतें राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिये विधेयक पर अपनी सहमति देने की समय-सीमा तय कर सकती हैं। SC ने फैसला सुनाया कि संवैधानिक अधिकारियों को उचित रूप से कार्य करना चाहिए, लेकिन अदालतें उन पर समय-सीमा नहीं थोप सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि ने यह भी कहा कि राज्यपाल के पास ‘पूर्ण वीटो’ की शक्ति नहीं है और वे अनिश्चितकाल तक विधेयकों को रोक कर नहीं रख सकते। यह फैसला शक्तियों के पृथक्करण और संवैधानिक संतुलन की पुष्टि करता है।


    जब दिल्लीवासी थे परेशान..

    प्रदूषण की मार झेल रहे दिल्लीवासियों की नाराजगी और बेबसी के बीच, चौतरफा आलोचनाओं का सामना कर रही दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि बीएस-4 से पुराने वाहनों पर की जाने वाली कार्रवाई पर लगी रोक हटायी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी अनुमति दे दी। वहीं इसी तरह के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से परहेज किया, लेकिन दिवाली पर निर्धारित घंटों के दौरान प्रमाणित ‘ग्रीन पटाखों’ के सीमित उपयोग की अनुमति दी।


    निठारी कांड में नया मोड़

    कुख्यात निठारी कांड में एक और नया मोड़ आया जब SC ने मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को हत्या और कथित तौर पर बच्चों का मांस खाने के आरोप के मामले में किसी विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इससे पहले सह-आरोपी मोनिंदर पंढेर को भी बरी कर दिया गया था।


    आवारा कुत्तों पर क्या बोला SC?

    आवारा कुत्तों के काटने और हमले के शिकार पीड़ितों के परिवारों और पशु प्रेमियों के बीच चल रही कानूनी जंग भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची। SC ने स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले आवारा कुत्तों के हमलों पर चिंता जताई। कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शिविरों में स्थानांतरित करने के साथ-साथ उनके नसबंदी और टीकाकरण के निर्देश दिए। जब न्यायालय ने पशु प्रेमियों से पूछा कि अगर वे इतने चिंतित हैं तो वे इन कुत्तों को गोद क्यों नहीं ले लेते, तो पशु प्रेमी रक्षात्मक मुद्रा में नजर आए।


    वक्फ मामला पहुंचा SC

    वक्फ बोर्ड से संबंधित मामले में, वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसमें धार्मिक बंदोबस्ती पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण का आरोप लगाया गया था। SC ने अधिनियम के कुछ चुनिंदा प्रावधानों पर रोक लगा दी, जबकि शेष अधिनियम को बहाल कर दिया।


    अरावली पर हुआ खूब विवाद

    अरावली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणविदों की उस चिंता पर ध्यान दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार ने चतुराई से नियमों में बदलाव किया है ताकि खनन कंपनियां इस पर्वत श्रृंखला में खनन कर सकें। SC ने अपने पुराने आदेश को पलट दिया जिसमें पिछली समिति की रिपोर्ट को स्वीकार किया गया था और इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को वैसी पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता नहीं है जैसी उच्च पहाड़ियों को है। कोर्ट ने इस विषय पर विशेषज्ञों की अपनी एक नयी समिति बनाने का निर्देश दिया है।