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  • रूस- यूक्रेन युद्धः ट्रंप और जेलेंस्की यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत

    रूस- यूक्रेन युद्धः ट्रंप और जेलेंस्की यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत


    फ्लोरिडा।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने रविवार को संयुक्त बयान में कहा कि हम दोनों यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत हैं। दोनों नेताओं ने यहां के मार-ए-लागो में यूक्रेन-रूस के बीच शांति समझौते को लेकर अहम बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में यह बयान जारी किया। उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध और संभावित शांति समझौते पर चर्चा की।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, “यह बैठक शानदार रही। मैंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर लगभग दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। अब लग रहा है कि हम शांति योजना पर बहुत करीब आ गए हैं। पुतिन और मैंने अभी यूरोपीय नेताओं से भी बात की। हमने यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने पर बहुत प्रगति की है। यह लड़ाई दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे घातक है।” जेलेंस्की ने कुछ दिन पहले इस मसले पर अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से बातचीत कर चुके हैं।

    यहां यह महत्वपूर्ण है कि ट्रंप की 20 सूत्री योजना के मसौदे की अभी क्रेमलिन समीक्षा नहीं कर सका है। मॉस्को ने अब तक अपनी क्षेत्रीय मांगों पर कोई नरमी दिखाने के संकेत भी नहीं दिए हैं। जेलेंस्की ने जरूर रविवार को कहा कि वह और ट्रंप योजना पर 90 फीसद सहमत हैं। ट्रंप और जेलेंस्की ने डोनबास जैसे क्षेत्रीय मुद्दों को “बहुत कठिन सवाल” बताया। जेलेंस्की ने यूक्रेन के शुभचिंतक देशों से रूस के शनिवार को कीव पर हमला करने के बावजूद शांति योजना पर समर्थन जारी रखने का आग्रह किया।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति ट्रपं के जनवरी में वाशिंगटन में यूरोपीय नेताओं की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में वह भी मौजूद रहेंगे। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने और जेलेंस्की ने फ्रांस, फिनलैंड, पोलैंड, नॉर्वे, इटली, यूके और जर्मनी के नेताओं के साथ नाटो और यूरोपीय आयोग के नेताओं से भी बात की। जेलेंस्की ने इस दौरान यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी के महत्व पर जोर दिया। युद्ध खत्म होने संभावित समय-सीमा के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि ” इसमें कुछ हफ्ते लग सकते हैं।

    ट्रंप और जेलेंस्की के बीच चली लगभग ढाई घंटे की बातचीत के दौरान मार-ए-लागो के डाइनिंग रूम में विटकॉफ और कुशनर, व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध सचिव पीट हेगसेथ मौजूद रहे।

  • सागर के हिलगन के जंगल में मृत मिला बाघ, वन विभाग में मचा हड़कंप

    सागर के हिलगन के जंगल में मृत मिला बाघ, वन विभाग में मचा हड़कंप

    सागर। मध्‍य प्रदेश के सागर जिले के ढाना वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम हिलगन के जंगल में रविवार को एक बाघ मृत अवस्था में मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। दोपहर करीब 2 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच प्रक्रिया शुरू की गई।

    ग्रामीणों द्वारा दी गई सूचना पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव का एक ग्रामीण जंगल की ओर गया हुआ था। इसी दौरान उसकी नजर जंगल में पड़े एक मृत बाघ पर पड़ी। बाघ को इस हालत में देखकर वह घबरा गया और तत्काल गांव लौटकर अन्य ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को जानकारी दिए जाने पर अधिकारी और कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे।

    मृत शेर का शरीर काफी फूला हुआ पाया

    मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, मृत बाघ का शरीर काफी फूला हुआ पाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसकी मौत एक या दो दिन पहले हो चुकी होगी। हालांकि बाघ की मौत किन कारणों से हुई, इसका स्पष्ट खुलासा फिलहाल नहीं हो सका है। वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही संभव हो पाएगी

    समीप ही रानी वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का क्षेत्र

    वन विभाग ने बताया कि जिस स्थान पर बाघ मृत मिला है, उसके समीप ही रानी वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का क्षेत्र आता है। इस रिजर्व में बाघ, तेंदुआ सहित कई बड़े वन्य जीवों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह बाघ टाइगर रिजर्व क्षेत्र से भटककर हिलगन के जंगल तक पहुंचा होगा।

    वरिष्ठ वन अधिकारी भी मौके पर

    घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ वन अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं। क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया है और आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वन विभाग द्वारा सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है।

    वन विभाग का क्या है कहना?वन विभाग के अनुसार प्राथमिक जांच में मृत बाघ के शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट या संघर्ष के निशान नहीं पाए गए हैं। ऐसे में बाघ की मौत को लेकर रहस्य बना हुआ है। फिलहाल मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। ढाना रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि मृत बाघ की उम्र करीब 8 से 10 वर्ष है और वह मादा है। बाघ का शव हिलगन गांव के पास जंगल क्षेत्र में मिला है। वन विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही शेर की मौत के कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी। फिलहाल यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • मप्र में खेती बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, टमाटर कर रहा किसानों को समृद्ध

    मप्र में खेती बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, टमाटर कर रहा किसानों को समृद्ध

     अब यह सिर्फ जीवन-यापन का साधन नहीं रही है, राज्‍य में खेती करना मतलब किसानों की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन बनना है। खासतौर पर टमाटर की खेती ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

    निरंतर बढ़ते रकबे, रिकॉर्ड उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते आज देश का सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक राज्य बनकर मप्र उभरा है। दिसंबर 2025 के संदर्भ में देखें तो मध्य प्रदेश सब्जी उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर अपनी स्थिति और मजबूत कर चुका है। प्रदेश में अब लगभग 13 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती हो रही है, जिसमें टमाटर का योगदान सबसे अधिक है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत तक टमाटर की खेती का रकबा बढ़कर करीब 1 लाख 35 हजार हेक्टेयर के आसपास पहुँच चुका था। अनुमान है कि इससे 38 से 40 लाख मीट्रिक टन तक टमाटर उत्पादन हो रहा है, जोकि देश की कुल सब्जी आपूर्ति में मध्य प्रदेश की अहम भूमिका को दर्शाता है। इसके साथ ही स्‍वभाविक तौर पर दिसम्‍बर तक उत्‍पादन का आंकड़ा ओर ऊपर गया है। पिछले पाँच वर्षों में टमाटर के रकबे में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में जहाँ टमाटर की खेती लगभग 1.10 लाख हेक्टेयर में होती थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह आंकड़ा लगभग 25 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी के साथ नए रिकॉर्ड पर पहुँच गया है। यह विस्तार सिर्फ क्षेत्रफल तक सीमित नहीं रहा है गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार में विश्वसनीयता का भी प्रमाण है।

    उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश के टमाटर की मांग महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और पूर्वी भारत के कई बड़े मंडी केंद्रों तक है। ताजगी, बेहतर आकार, लंबी शेल्फ लाइफ और स्वाद के कारण मध्य प्रदेश का टमाटर थोक व्यापारियों और प्रोसेसिंग उद्योगों की पहली पसंद बन गया है। उत्पादकता के मामले में भी राज्‍य ने अच्‍छी प्रगति की है। दिसंबर 2025 तक टमाटर की औसत उत्पादकता लगभग 29 से 30 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँच गई है, जोकि प्रदेश की औसत उद्यानिकी उत्पादकता से लगभग दोगुनी है। यह सफलता उन्नत बीजों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तथा समय पर तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम है।

    प्रदेश में कुल उद्यानिकी फसलों का रकबा अब लगभग 27 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जिसमें सब्जियों का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। टमाटर के साथ-साथ धनिया और लहसुन के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश दिसंबर 2025 तक देश में प्रथम स्थान बनाए हुए है। इससे राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बहुआयामी मजबूती मिली है। राज्य सरकार की योजनाओं ने इस परिवर्तन में निर्णायक भूमिका निभाई है। टमाटर के प्रमाणित बीजों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं में सब्सिडी, फसल बीमा और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक विपणन ने किसानों का जोखिम कम किया है। साथ ही प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के तहत टमाटर आधारित प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या भी 2025 तक तेजी से बढ़ी है।

    अनूपपुर जिला इस सफलता की जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। दिसंबर 2025 तक जिले में लगभग 16 हजार किसान टमाटर की खेती से जुड़े हैं और उत्पादन 1.5 लाख मीट्रिक टन के करीब पहुँच गया है। जैतहरी, अनूपपुर और पुष्पराजगढ़ के क्लस्टरों से टमाटर अब मध्यप्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बड़े बाजारों में भेजा जा रहा है। किसानों की आमदनी में भी बड़ा बदलाव आया है। जहाँ पहले पारंपरिक फसलों से सीमित आय होती थी, वहीं अब टमाटर की खेती से प्रति एकड़ औसतन 80 हजार से एक लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ संभव हो रहा है। महिला किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है।

    कृषि विशेषज्ञों का इस संबंध में मानना है कि यदि दिसंबर 2025 के बाद कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, निर्यात और बड़े स्तर के प्रसंस्करण ढांचे को और सशक्त किया जाए, तो मध्य प्रदेश न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी टमाटर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इस तरह देखें तो दिसंबर 2025 में टमाटर मध्य प्रदेश के किसानों के लिए ‘लाल सोना’ साबित हुआ है, जिसने उनकी आय, आत्मविश्वास और भविष्य तीनों को नई दिशा दी है।

  • इंदौरः दो कारों के बीच जोरदार भिंड़त, एक की मौत और सात घायल

    इंदौरः दो कारों के बीच जोरदार भिंड़त, एक की मौत और सात घायल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में ग्राम उमरीखेड़ा के पास सोमवार सुबह दो कारों के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    तेजाजी नगर थाना पुलिस के अनुसार, उमरीखेड़ा के पास सोमवार सुबह दो कारों के बीच टक्कर हो गई। इनमें से एक कार सनावद से इंदौर आ रही थी। उसमें एक मरीज था, जिसे इलाज के लिए इंदौर लाया जा रहा था। वहीं दूसरी कार उज्जैन से ओंकारेश्वर जा रही थी। यहां उज्जैन की कार के ड्राइवर को झपकी लग गई। वह सामने से आ रही कार से जा टकराया। सूचना के बाद तेजाजी नगर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

    इंदौर के तेजाजी नगर थाना प्रभारी देवेन्द्र मरकाम ने बताया कि सोमवार सुबह उमरीखेड़ा के पास उज्जैन से ओंकारेश्वर जा रही कार और सनावद से इंदौर आ रही कार आपस में टकरा गई। हादसे में मुंबई निवासी निखिल कोठारी, उनकी पत्नी सलोनी, अमन पुत्र रशीद खान निवासी उज्जैन, ओमप्रकाश पुत्र आलोक चंद निवासी सनावद, चेतराम पुत्र बारेलाल निवासी सनावद, अरबाज निवासी सनावद और पवन निवासी सदरसर घायल हैं। वहीं भैयालाल (45 वर्ष) पुत्र लक्ष्मलाल निवासी सनावद की अस्पताल में मौत हो गई है।

    परिवार के लोगों ने बताया कि इंदौर आ रही कार में ओमप्रकाश, चेतराम और मरीज भैयालाल सवार थे। भैयालाल को इंदौर इलाज के लिए लाया जा रहा था। हादसे में भैयालाल की मौत हो गई है। वहीं ओमप्रकाश को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चेतराम और भैयालाल आपस में रिश्तेदार हैं। मुंबई के दंपत्ति ने बताया कि वह उज्जैन-ओंकारेश्वर में दर्शन करने आए थे। यहां पर उज्जैन में रविवार को रुके थे। टैक्सी किराए से ली थी और ओंकारेश्वर के लिए निकले थे, तभी रास्ते में हादसा हो गया। दंपत्ति मुंबई में ही जॉब करते हैं। वे मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं।

  • आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अयोध्या में किए श्रीरामलला के दर्शन

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अयोध्या में किए श्रीरामलला के दर्शन

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को रामजन्मभूमि में दर्शन पूजन कर श्रीरामलला का आशीर्वाद लिया। उन्होंने मन्दिर की यज्ञशाला के अनुष्ठान में भाग लिया और श्रीराम लला का दर्शन पूजन करने के साथ ही उन्होंने सम्पूर्ण निर्माण को उत्सुकता से निहारा।

    मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जगतगुरु माधवाचार्य का भी आशीर्वाद लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मुझे अयोध्या के दिव्य और भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और प्रार्थना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां एक बार फिर आना मेरे लिए शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी अनुभव रहा।

    भगवान श्रीराम के मूल्य और आदर्श हम सभी के लिए शाश्वत शिक्षा हैं। ईश्वर करे कि वे हमें सदा मार्गदर्शन और प्रेरणा देते रहें। राम जन्मभूमि में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महामंत्री चम्पत राय ने मुख्यमंत्री का स्वागत कर निर्माण की बारीकियों को बताया। इस अवसर पर ट्रस्ट सदस्य डाॅ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही उपस्थित रहे। इसके बाद मुख्यमंत्री आंध्र प्रदेश वापस लौट गए।

  • विदिशाः तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े डंपर में टकराई, तीन युवकों की मौत और तीन घायल

    विदिशाः तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े डंपर में टकराई, तीन युवकों की मौत और तीन घायल


    विदिशा।
    मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के कुरवाई थाना क्षेत्र में रविवार देर रात एक तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े डंपर से जा टकराई। इस हादसे में कार सवार तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि तीन युवक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, कुरवाई निवासी तन्मय शर्मा का रविवार को जन्मदिन था। वह अपने पांच दोस्तों के साथ शिवशंकर ढाबे में पार्टी करने गया था। सभी युवक दोस्त की जन्मदिन की पार्टी से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान रात्रि करीब 1.30 बजे कुरवाई रोड पर मेलुआ चौराहे पर कृष्णा ढाबा के पास उनकी कार सड़क किनारे खड़े डंपर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा डंपर के पिछले हिस्से में फंस गया और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। हादसे के बाद शवों को बाहर निकालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया और सीटें काटकर शवों को बाहर निकाला गया।।

    कुरवाई थाना प्रभारी शैलेंद्र नायक ने बताया कि मृतकों की पहचान 21 वर्षीय अंकित साहू, 19 वर्षीय तन्मय शर्मा और 30 वर्षीय जगदीश साहू के रूप में हुई। जगदीश साहू कार चला रहा था। अंकित साहू आगे की सीट पर और तन्मय शर्मा बीच की सीट पर बैठा था। हादसे में जगदीश गोंड, मोंटी अहिरवार और तन्मय श्रीवास्तव गंभीर रूप से घायल हैं। उन्हें पहले कुरवाई अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति के कारण विदिशा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है और मामले को जांच में लिया है।

  • उत्तर-पूर्व दिशा में पौधे लगाने से बढ़ेगी शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि: वास्तु विशेषज्ञों की सलाह

    उत्तर-पूर्व दिशा में पौधे लगाने से बढ़ेगी शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि: वास्तु विशेषज्ञों की सलाह


    नई दिल्ली।भारतीय घरों में वास्तुशास्त्र का महत्व समय के साथ और अधिक बढ़ा है। खासकर शहरी जीवन में बढ़ते तनाव और अस्थिरता के बीच लोग ऐसे उपायों की तलाश कर रहे हैं, जो घर के वातावरण को संतुलित और सकारात्मक बनाए रखें। इस क्रम में उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे वास्तु में ईशान कोण कहा जाता है, सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिशा में सही प्रकार के पौधे लगाने से घर में मानसिक शांति, पारिवारिक स्थिरता और आर्थिक संतुलन बन सकता है।उत्तर-पूर्व दिशा को ज्ञान, जल तत्व और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ा गया है। यह दिशा मानसिक शांति और स्पष्ट सोच का प्रतीक मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस स्थान को हल्का साफ और जीवंत रखा जाए तो घर में रहने वालों के निर्णय बेहतर होते हैं, अनावश्यक विवाद कम होते हैं और घर का वातावरण सकारात्मक रहता है। पौधे इस दिशा में जीवन तत्व और ऊर्जा को सक्रिय रखने का एक सरल और प्राकृतिक तरीका हैं।

    वास्तु विशेषज्ञ कुछ पौधों को विशेष रूप से उपयोगी मानते हैं। मोटे पत्तों वाला क्रासुला पौधा आर्थिक संतुलन से जुड़ा माना जाता है। इसे उत्तर-पूर्व या इसके आसपास रखने से घर में खर्च और आय के बीच संतुलन बन सकता है। अपराजिता का पौधा धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है और इसे रखने से मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास बढ़ता है।मोगरे जैसे खुशबूदार पौधे घर के वातावरण को शांत रखते हैं और तनाव कम करने में सहायक होते हैं। शमी का पौधा अनुशासन और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। इसे सही दिशा में रखने से घर में नकारात्मकता कम होती है। वहीं, गेंदे के फूल सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार इसके फूल घर के वातावरण को हल्का और प्रसन्न बनाते हैं।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। पौधों की नियमित देखभाल, पर्याप्त धूप और स्वच्छ मिट्टी जरूरी है। सूखे या खराब पौधे ऊर्जा को बाधित कर सकते हैं। इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा में भारी फर्नीचर या अव्यवस्था से बचना चाहिए। घर का यह क्षेत्र हमेशा हल्का खुला और साफ-सुथरा होना चाहिए।हाल के वर्षों में ग्रीन वास्तु की अवधारणा लोकप्रिय हुई है। अब लोग पौधों को सिर्फ सजावट के लिए नहीं बल्कि ऊर्जा संतुलन के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पौधों के साथ जीवनशैली में भी संतुलन रखा जाए, तो इसके सकारात्मक परिणाम लंबे समय तक बनाए रखे जा सकते हैं।

    हालांकि, किसी भी वास्तु उपाय को अपनाने से पहले व्यक्तिगत परिस्थितियों, घर के आकार और परिवार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। सही दिशा में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने से घर का माहौल न केवल स्वस्थ और शांत रहेगा बल्कि आर्थिक और मानसिक स्थिरता भी बढ़ेगी।इस प्रकार उत्तर-पूर्व दिशा में हरियाली का संतुलित उपयोग आधुनिक शहरी घरों में न सिर्फ सौंदर्य बढ़ाता है बल्कि घर की सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का माध्यम भी बन सकता है।

  • कांग्रेस में बयानबाज़ी से बढ़ा घमासान: दिग्विजय सिंह के इशारे पर रेवंत रेड्डी का सोनिया गांधी कार्ड

    कांग्रेस में बयानबाज़ी से बढ़ा घमासान: दिग्विजय सिंह के इशारे पर रेवंत रेड्डी का सोनिया गांधी कार्ड


    नई दिल्ली। कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के संगठन सुधार से जुड़े बयान ने पार्टी में अंदरूनी कलह को हवा दे दी है। RSS-BJP की कार्यशैली का उदाहरण देकर दिए गए उनके बयान पर कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति जताई, जिसके बाद यह मुद्दा खुलकर सियासी बहस में बदल गया।
    अब इस विवाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की एंट्री ने मामला और गरमा दिया है।

    रेवंत रेड्डी ने बिना नाम लिए दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस की विरासत और सोनिया गांधी के नेतृत्व का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के फैसलों ने यह साबित किया है कि कांग्रेस ने हमेशा योग्यता और अनुभव को महत्व दिया।

    रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि 1991 में तेलंगाना के एक छोटे से गांव से आने वाले पीवी नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाना और 2004 व 2009 में प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को देश की कमान सौंपना सोनिया गांधी का ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय था।

    तेलंगाना सीएम ने यह भी कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया, संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया।

    विविधताओं से भरे आधुनिक भारत के निर्माण में कांग्रेस का योगदान हर पन्ने पर दर्ज है। राजनीतिक हलकों में रेवंत रेड्डी के इस बयान को दिग्विजय सिंह की उस सोशल मीडिया पोस्ट का सीधा जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने RSS और जनसंघ में जमीनी कार्यकर्ताओं को शीर्ष पदों तक पहुंचने का उदाहरण दिया था।

    गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा था कि RSS-BJP में सामान्य कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने इस पोस्ट में राहुल गांधी को टैग कर संगठनात्मक सुधार की जरूरत पर इशारा किया था। इसी बयान के बाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की दिशा को लेकर बहस और तेज हो गई है।

  • 4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न

    4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न


    नई दिल्ली।पिछले 25 वर्षों में अगर किसी निवेश ने लगातार और मजबूत रिटर्न दिया है, तो वह सोना रहा है। वर्ष 1999 के अंत में सोने की कीमत लगभग ₹4,400 प्रति 10 ग्राम थी। दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर ₹1.4 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर चुकी है। इस दौरान सोने ने औसतन 14.3% सालाना रिटर्न दिया, जो भारतीय शेयर बाजार और अन्य पारंपरिक निवेश विकल्पों से कहीं अधिक है।विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में यह तेजी कई कारणों से आई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती ने सोने की मांग को बढ़ाया। ब्याज दरों में कमी से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे डॉलर में कारोबार होने वाली कीमती धातुएँ अन्य मुद्राओं के लिए सस्ती पड़ीं। इसका सीधा असर सोने की कीमतों और मांग पर पड़ा।

    वर्ष 2025 सोने और चांदी दोनों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। इस साल सोने की कीमतों में 70% से अधिक की तेजी आई, जबकि चांदी ने 160% तक का उछाल दिखाया। यह प्रदर्शन 1979 के बाद सबसे मजबूत सालाना बढ़त माना जा रहा है। न केवल भारत, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं ने निवेशकों को आकर्षित किया।इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। पिछले 25 वर्षों में सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः लगभग 11.5% और 11.7% का औसत सालाना रिटर्न दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेंसेक्स को चांदी के बराबर रिटर्न देना होता, तो आज इसका स्तर लगभग 1.6 लाख अंक के आसपास होता, जबकि वास्तविकता में यह करीब 85,000 के स्तर पर है।

    चांदी की तेजी के पीछे भी विशेष कारण हैं। सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल EV और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में इसकी बढ़ती मांग ने कीमतों को समर्थन दिया। द सिल्वर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता और औद्योगिक मांग के बीच चांदी की सप्लाई अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे कीमतों में और तेजी आई।भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और बचत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड से जुड़े विशेषज्ञ विक्रम धवन का कहना है कि सोने को पोर्टफोलियो में शामिल करना संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। गोल्ड ETF के जरिए निवेश करना आज एक सुरक्षित और आसान विकल्प बन चुका है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि अल्पकाल में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। फिर भी मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों में ये दोनों धातुएँ निवेशकों के लिए मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनी हुई हैं।निवेशक इस तथ्य को भी ध्यान में रखें कि सोना और चांदी लंबे समय में पूंजी सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का बेहतर माध्यम साबित हुए हैं। साथ ही, डिजिटल और म्यूचुअल फंड जैसे आधुनिक निवेश विकल्प ने इसे और भी सुलभ बना दिया है।

  • चोट का झटका: इंग्लैंड के तीसरे तेज गेंदबाज एटकिंसन सिडनी में नहीं खेलेंगे

    चोट का झटका: इंग्लैंड के तीसरे तेज गेंदबाज एटकिंसन सिडनी में नहीं खेलेंगे


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज गस एटकिंसन चोट के कारण एशेज 2025 की निर्णायक कड़ीसिडनी टेस्टसे बाहर हो गए हैं। बाएं जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव के चलते एटकिंसन 4 जनवरी से सिडनी में होने वाले मुकाबले में चयन के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। यह जानकारी इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने मेडिकल जांच के बाद साझा की।

    एटकिंसन को यह चोट मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट के दौरान लगी थी। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में अपने पांचवें ओवर की अंतिम गेंद डालते समय उन्होंने असहजता महसूस की और तुरंत मैदान छोड़ दिया। अगले दिन कराए गए स्कैन में मांसपेशियों में खिंचाव की पुष्टि हुई। टीम मैनेजमेंट ने सुरक्षित विकल्प के तौर पर उन्हें सिडनी टेस्ट से बाहर रखने का फैसला किया।इस सीरीज में एटकिंसन चोटों के कारण बाहर होने वाले इंग्लैंड के तीसरे तेज गेंदबाज हैं। इससे पहले मार्क वुड घुटने की समस्या और जोफ्रा आर्चर साइड स्ट्रेन के कारण स्वदेश लौट चुके हैं। लगातार चोटों ने इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी आक्रमण को कमजोर किया है। हालांकि टीम प्रबंधन का कहना है कि मौजूदा स्क्वॉड में पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि एटकिंसन की गैरमौजूदगी के बावजूद इंग्लैंड ने मेलबर्न टेस्ट में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। टीम ने ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में केवल 132 रन पर समेटा और 175 रनों का लक्ष्य चार विकेट शेष रहते हासिल किया। यह जनवरी 2011 के बाद विदेशी धरती पर इंग्लैंड की पहली एशेज टेस्ट जीत थीजिसने टीम का मनोबल काफी बढ़ाया।सिडनी टेस्ट के लिए टीम ने किसी नए खिलाड़ी को शामिल नहीं करने का निर्णय लिया है। टीम प्रबंधन के अनुसारमैथ्यू पॉट्स अब तक इस सीरीज में नहीं खेले हैं और तेज गेंदबाजी के विकल्प के तौर पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा मार्क वुड के बाहर होने के बाद मैथ्यू फिशर को पहले ही सीनियर स्क्वॉड में जोड़ा जा चुका है।

    स्पिन विभाग में भी रणनीतिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। यदि इंग्लैंड अतिरिक्त स्पिनर के साथ उतरने का फैसला करता हैतो शोएब बशीर को मौका मिल सकता है। हालांकि सिडनी की पिच को देखते हुए तेज गेंदबाजों पर निर्भरता बनाए रखने की संभावना अधिक मानी जा रही है।एटकिंसन के लिए चोटें नया विषय नहीं हैं। इससे पहले भी वह हैमस्ट्रिंग समस्या के कारण भारत के खिलाफ शुरुआती टेस्ट नहीं खेल पाए थे। हालांकि वापसी पर उन्होंने प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनका प्रदर्शन औसत रहा और तीन टेस्ट में कुल छह विकेट लिए।अब निगाहें सिडनी टेस्ट पर हैंजहां इंग्लैंड चोटों के बावजूद सीरीज का समापन मजबूती से करने की कोशिश करेगा। यह मुकाबला न केवल सीरीज के नतीजे के लिएबल्कि इंग्लैंड के भविष्य के तेज गेंदबाजी संयोजन के लिए भी अहम माना जा रहा है।