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  • कोटद्वार में विवाद: मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े दीपक पर दर्ज हुई FIR

    कोटद्वार में विवाद: मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े दीपक पर दर्ज हुई FIR


    कोटद्वार । उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद के समर्थन में सामने आए जिम संचालक दीपक कुमार के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। दीपक के साथ उनके सहयोगी विजय रावत को भी इस FIR में शामिल किया गया है। यह कार्रवाई बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद की गई। दीपक कुमार का कहना है कि वे किसी भी हाल में नफरत के दबाव में नहीं आएंगे।

    पूरा मामला 26 जनवरी का है, जब बजरंग दल से जुड़े कुछ युवकों ने वकील अहमद की बाबा स्कूल ड्रेस नाम की दुकान पर आपत्ति जताई थी और नाम बदलने को लेकर दबाव बनाया गया। इस दौरान दीपक कुमार और कुछ स्थानीय लोगों ने दुकानदार का समर्थन किया। बाद में 31 जनवरी को देहरादून से आए कुछ लोगों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।

    सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दीपक कुमार यह कहते दिखाई दिए कि दुकान पिछले 30 वर्षों से इसी नाम से चल रही है और इसे बदला नहीं जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी और दीपक को संविधान व इंसानियत के लिए खड़ा होने वाला व्यक्ति बताया।

    दीपक कुमार ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विरोध के चलते उनका जिम बंद पड़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और अब भी उन्हें धमकियां मिल रही हैं। वहीं, कई स्थानीय लोग दीपक के समर्थन में सामने आए हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च भी किया है। हाल के महीनों में उत्तराखंड में इस तरह की सांप्रदायिक घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है।

  • ड्रीमलाइनर फ्यूल स्विच पर DGCA की जांच से राहत, तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित पाया गया विमान

    ड्रीमलाइनर फ्यूल स्विच पर DGCA की जांच से राहत, तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित पाया गया विमान


    नई दिल्ली। एयर इंडिया के ग्राउंड किए गए बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मंगलवार को राहत देने वाली जानकारी साझा की। मंत्रालय के मुताबिक विमान के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच पूरी तरह सही स्थिति में पाए गए हैं। इससे पहले पायलट ने इंजन स्टार्ट के दौरान एक स्विच के ‘RUN’ पोजिशन में ठीक से लॉक न होने की शिकायत की थी। यह तकनीकी जांच विमान निर्माता बोइंग की सिफारिश पर की गई, जिसे एयर इंडिया की इंजीनियरिंग टीम ने DGCA अधिकारियों की मौजूदगी में पूरा किया।

    जांच में क्या सामने आया

    मंत्रालय ने बताया कि बाएं और दाएं दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच की विस्तार से जांच की गई। जांच के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी खराबी नहीं पाई गई और दोनों स्विच सुरक्षित व संचालन योग्य पाए गए। DGCA ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि फ्यूल स्विच को सही तरीके से हैंडल न किया जाए, तो वह ‘RUN’ और ‘CUTOFF’ के बीच खिसक सकता है। उल्लेखनीय है कि एक फरवरी को लंदन में एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (VT-ANX) में इंजन स्टार्ट के समय इसी तरह की समस्या सामने आई थी।

    क्यों गंभीर माना गया मामला

    यह मामला इसलिए संवेदनशील हो गया क्योंकि जून 2025 में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया ड्रीमलाइनर हादसे में 260 लोगों की जान गई थी। उस दुर्घटना की शुरुआती जांच में पता चला था कि टेकऑफ के तुरंत बाद इंजन के फ्यूल स्विच ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ पोजिशन में चले गए थे, जिससे इंजन को ईंधन मिलना बंद हो गया। इसी पृष्ठभूमि में हालिया घटना को बेहद गंभीरता से लिया गया और विमान को तुरंत ग्राउंड कर दिया गया।

    मंत्रालय का रुख

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दोहराया कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पायलट की शिकायत मिलते ही विमान की उड़ान रोक दी गई और गहन तकनीकी जांच कराई गई। हालांकि फ्यूल स्विच सही पाए गए हैं, लेकिन विमान को सेवा में वापस लाने से पहले सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। DGCA और एयर इंडिया दोनों पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।राहत भरी जांच रिपोर्ट के बावजूद, पिछली दुर्घटना की वजह से ड्रीमलाइनर विमानों की तकनीकी निगरानी और सख्त कर दी गई है। यह घटना दिखाती है कि विमानन क्षेत्र में किसी भी छोटी तकनीकी आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाता।

  • गाजियाबाद में रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला, सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर की आत्‍महत्‍या

    गाजियाबाद में रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला, सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर की आत्‍महत्‍या


    गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ ‘भारत सिटी’ सोसाइटी की 9वीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों ने सामूहिक आत्महत्या कर ली। टीला मोड थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने न केवल पुलिस महकमे को हिला दिया है, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग के खतरनाक प्रभाव पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    देर रात मची चीख-पुकार
    घटना रात करीब 2 बजे की है, जब बी-1 टावर के फ्लैट नंबर 907 से गिरने की तेज आवाज सुनकर लोग सहम गए। मौके पर पहुँची पुलिस ने 16 वर्षीय निशिका, 14 वर्षीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी के शव बरामद किए। तीनों नाबालिग बहनों ने एक साथ मौत की छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

    सुसाइड या ‘गेम ओवर’? पुलिस को शक
    शुरुआती जांच में इस सामूहिक सुसाइड के तार ऑनलाइन गेमिंग की लत से जुड़ते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीनों बहनें मोबाइल पर किसी ‘कोरियन लवर’ नामक टास्क-बेस्ड गेम की आदी थीं। आशंका है कि इसी गेम के किसी आखिरी और घातक टास्क को पूरा करने के जुनून में उन्होंने यह कदम उठाया।

    पिता का छलका दर्द: ‘कोरोना काल से शुरू हुई थी लत

    मृतकाओं के पिता चेतन कुमार के अनुसार, लॉकडाउन और कोरोना काल के दौरान बच्चों के हाथ में मोबाइल आया और धीरे-धीरे उन्हें टारगेट-बेस्ड गेम्स का चस्का लग गया। पिता ने बताया कि तीनों बहनें हमेशा एक साथ रहती थीं चाहे पढ़ाई हो, खाना हो या सोना। उनकी यह एकजुटता अंत में इस भयानक हादसे का सबब बनेगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। पुलिस तीनों बहनों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच करा रही है। जांच में सामने आया है कि गेमिंग की लत के कारण वे नियमित स्कूल भी नहीं जा रही थीं। सोसाइटी के कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि घटना के समय की गतिविधियों का पता चल सके।

  • संपत्ति और मुआवजा विवाद पर शहडोल के परिवार में सड़क से थाने तक हाथापाई और गाली-गलौज

    संपत्ति और मुआवजा विवाद पर शहडोल के परिवार में सड़क से थाने तक हाथापाई और गाली-गलौज

    शहडोल / मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में पारिवारिक संपत्ति विवाद अचानक हाईवोल्टेज ड्रामा में बदल गया। बुढ़ार और धनपुरी थाना क्षेत्र के माली मोहल्ला निवासी परिवार के सदस्य सड़क पर आमने-सामने आ गए और थाने तक अपना विवाद लेकर पहुंचे। हाथापाई, झूमा-झपटी और गाली-गलौज के इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    मामले की शुरुआत बुढ़ार थाना क्षेत्र के जैन झरोखा के सामने सड़क पर हुई। माली मोहल्ला के अजय माली की कुछ साल पहले करंट लगने से मौत हो गई थी। उनकी पत्नी सोनम बाद में पुणे चली गई थी। अब सोनम के धनपुरी लौटने पर पति की मृत्यु के बाद मिली मुआवजा राशि और संपत्ति को लेकर देवर विजय और देवरानी के बीच विवाद शुरू हुआ।

    विवाद सड़क तक सीमित नहीं रहा और दोनों पक्ष थाने में पहुंचे। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी संघर्षरत पक्षों को शांत करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन हालात काबू में करना उनके लिए आसान नहीं रहा। पुलिस दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने में जुटी हुई है।

    यह विवाद और उसका वायरल वीडियो जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। परिवारिक संपत्ति और मुआवजा को लेकर शुरू हुआ मामूली झगड़ा हिंसक रूप लेने के बाद थाने तक पहुंच गया।

  • भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल /मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, आरपीएफ और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कछुए तस्करी का मामला पकड़ा है। रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान 311 कछुए बरामद किए गए और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

    भोपाल के बैरागढ़ के संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने बैग चेकिंग के दौरान दो बैगों में कुल 311 कछुए पकड़े। आरोपी अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि ढाई हजार रुपए की लालच में वह कछुओं को देवास और इंदौर भेजने के लिए ले जा रहा था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को जानकारी दी गई। तुरंत स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग का स्टाफ मौके पर पहुंचा और आरोपी को हिरासत में लिया। आरपीएफ की पूछताछ में यह सामने आया कि रविंद्र कश्यप नामक व्यक्ति ने ढाई हजार रुपए की लालच देकर आरोपी से कछुए तस्करी कराई।

    फिलहाल आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 पंजीबद्ध किया गया है। STF मामले की जांच में जुटी है और आरोपी से विस्तार से पूछताछ की जा रही है। आज उसे माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।यह मामला वन्यजीव तस्करी और रेलवे सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है

  • संघ प्रमुख मोहन भागवत का इंदौर-खरगोन प्रवास कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन लेकर आया

    संघ प्रमुख मोहन भागवत का इंदौर-खरगोन प्रवास कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन लेकर आया


    इंदौर /मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ मोहन भागवत का आगमन हुआ। वे इंदौर रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से खरगोन जिले के कसरावद के लिए रवाना हुए। सरसंघचालक का यह प्रवास संगठन कार्यकर्ताओं और समाज में सक्रिय लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कसरावद में डॉ मोहन भागवत श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन की ओर से आयोजित विचार-प्रेरक कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस आयोजन में सेवा कार्यों से जुड़े कार्यकर्ता और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय लोग उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्बोधन “मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के विषय पर केंद्रित रहेगा।

    इस दौरान डॉ भागवत समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, संगठन शक्ति और सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों पर मार्गदर्शन देंगे। संघ कार्यकर्ताओं के लिए यह प्रवास विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह सेवा और सामाजिक समरसता के आयामों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।

    कार्यक्रम के जरिए डॉ मोहन भागवत संगठन और समाज के बीच समन्वय बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने का प्रयास करेंगे। यह दौरा संघ के सेवा कार्य और सामाजिक योगदान को बढ़ावा देने में अहम माना जा रहा है।

  • मनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म के टाइटल पर क्यों मचा बवाल? लोग कर रहे नाम बदलने की मांग

    मनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म के टाइटल पर क्यों मचा बवाल? लोग कर रहे नाम बदलने की मांग


    नई दिल्ली । नेटफ्लिक्स ने मनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म घूसखोर पंडित का पहला लुक जारी कर दिया है। मनोज बाजपेयी एक पुलिसवाले की भूमिका में फैंस को काफी एंटरटेन करने वाले हैं। हालांकि, फिल्म की पहली झलक के साथ ही फिल्म के टाइटल को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है। लोग टाइटल को बदलने की मांग कर रहे हैं।

    टाइटल पर क्यों मच रहा बवाल

    फिल्म का टाइटल है घूसखोर पंडित। जैसे ही टाइटल वायरल हुआ लोग कहने लगे कि ये टाइटल समाज के एक वर्ग को टारगेट कर रहा है। एक यूजर ने एक्स पर लिखा- हेलो नेटफ्लिक्स इंडिया, पंडितों और ब्राह्मणों के खिलाफ नफरत फैलाने को नॉर्मल करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैं आपको कोर्ट में मिलूंगा।

    नाम बदलने की हो रही मांग

    एक दूसरे यूजर ने लिखा- मैं तो ब्राहम्ण भी नहीं हूं, लेकिन ब्राहम्णों के प्रति इतनी नफरत ये तो बहुत ज्यादा हो गया। सोचिए आप घूसखोर दलित या घूसखोर मुस्लिम जैसा टाइटल रखें और फिर सोचें कि क्या रिएक्शन होता। एक ने लिखा- बेहद शर्मनाक, अपनी कट्टरता फैलाने के लिए एक ऐसा समाज चुना जो सॉफ्ट टारगेट हैं। इसे अभी बदलिए या फिर बैन के लिए तैयार हो जाइए।

    क्या बोल रहे सोशल मीडिया यूजर्स

    एक ने लिखा- आपने घूसखोर पंडित नाम रखा, क्या आपके अंदर फिल्म का नाम घूसखोर मुस्लिम रखने की है? इसे बदलो या फिर मास बॉयकॉट के लिए तैयार हो जाओ। एक ने लिखा- ये लोग शो का नाम कुछ भी रख सकते थे, लेकिन एक नेरेटिव सेट करने के लिए उन्होंने खासकर ये नाम चुना। ये ठीक कैसे हो सकता है? शायद, इन्हें सबक सिखाने के लिए हमें इनका बहिष्कार करना शुरू कर देना चाहिए।

    फिल्म के बारे में जानिए

    फिल्म की बात करें तो फिल्म में मनोज बाजपेयी अजय दिक्षीत का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म को रितेश शाह ने डायरेक्ट किया है। वहीं, इस फिल्म को लिखा है नीरज पांडे ने।फिल्म में मनोज बाजपेयी के अलावा नुसरत भरूचा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय, श्रद्धा दास और किकू शारदा जैसे कलाकार नजर आएंगे।

  • सिस्टम से हारा सरपंच: नरसिंहपुर में पंचायत भवन के अंदर खुद को किया कैद, आत्मदाह की दी चेतावनी।

    सिस्टम से हारा सरपंच: नरसिंहपुर में पंचायत भवन के अंदर खुद को किया कैद, आत्मदाह की दी चेतावनी।


    नरसिंहपुर/ मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोकतंत्र के जमीनी स्तर पंचायती राज और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के चीचली जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली सीरेगांव ग्राम पंचायत के सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने व्यवस्था से हारकर एक आत्मघाती कदम उठाने का ऐलान किया है। मंगलवार की रात से ही सरपंच ने खुद को पंचायत भवन के एक कमरे में कैद कर लिया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो वे वहीं आत्मदाह कर लेंगे।

    क्या है पूरा मामला?
    सीरेगांव के सरपंच महेंद्र कुशवाहा का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी पंचायत में विकास कार्य कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों और अन्य विकास परियोजनाओं में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। सरपंच का कहना है कि उन्होंने ग्राम स्तर की समस्याओं के निराकरण के लिए कई बार जनपद पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दर्जनों बार लिखित आवेदन दिए, जनसुनवाई में अपनी बात रखी, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘आश्वासन’ का झुनझुना थमा दिया गया।

    सरपंच का दर्द यह है कि एक चुना हुआ जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र की जनता की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

    वीडियो संदेश और ‘अंतिम फैसला’
    पंचायत भवन में खुद को कैद करने के बाद सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने एक वीडियो जारी किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सरपंच काफी भावुक और व्यथित नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले दो साल से प्रशासन से निवेदन कर रहा हूं कि मुझे काम करने दिया जाए और विकास कार्यों में सहयोग किया जाए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पिछले मंगलवार की जनसुनवाई में भी मैंने गुहार लगाई थी, पर मुझे सिर्फ प्रताड़ना मिली।”

    सरपंच ने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि यह उनका ‘अंतिम फैसला’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हुआ, तो वे पंचायत भवन के भीतर ही खुद को आग लगा लेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

    प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
    जैसे ही सरपंच के कैद होने और आत्मदाह की चेतावनी की खबर फैली, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का चरम कदम उठाना जिले की कानून-व्यवस्था और छवि के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और तहसील स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सरपंच को समझाने-बुझाने का दौर शुरू हुआ।यह घटना केवल एक सरपंच की नाराजगी भर नहीं है, बल्कि यह उस नौकरशाही की तस्वीर पेश करती है जहाँ एक जनप्रतिनिधि को अपनी आवाज सुनाने के लिए मौत को गले लगाने जैसी धमकी देनी पड़ती है। सीरेगांव की जनता अब इस उम्मीद में है कि शासन उनकी पंचायत की समस्याओं पर ध्यान देगा और सरपंच को न्याय मिलेगा, ताकि गांव में विकास के पहिये फिर से घूम सकें। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन सरपंच को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों में जुटा है।

  • अभिषेक बच्चन की लाइफ में कैसे आईं ऐश्वर्या राय बच्चन? बॉलीवुड के परफेक्ट कपल की लव स्टोरी है खूबसूरत

    अभिषेक बच्चन की लाइफ में कैसे आईं ऐश्वर्या राय बच्चन? बॉलीवुड के परफेक्ट कपल की लव स्टोरी है खूबसूरत



    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड स्टार अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन की लव स्टोरी काफी फिल्मी रही है. दोनों सितारों को फिल्म इंडस्ट्री का परफेक्ट कपल कहा जाता है. दोनों की शादी को 19 साल पूरे हो गए हैं और आज इनकी मिसाल बॉलीवुड में दी जाती है. अभिषेक बच्चन 5 फरवरी को अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस खास मौके पर हम आपको उनकी लव स्टोर के बारे में बताते हैं. चलिए जानते हैं अभिषेक बच्चन को विश्व सुंदरी कैसे मिलीं थीं?

    कैसे हुई मुलाकात?

    अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन को इंडस्ट्री का आइडियल कपल कहा जाता है. दोनों की मुलाकात का किस्सा भी काफी दिलचस्प रहा है. पहली बार दोनों सितारों की मुलाकात स्विट्जरलैंड में हुई थी. ये वो वक्त था जब अभिषेक बच्चन एक्टिंग में नहीं बल्कि प्रोडक्शन में हाथ आजमा रहे थे. उस दौरान एक्टर अपनी फिल्म के लिए लोकेशन देखने गए थे और उसी वक्त ऐश्वर्या राय बच्चन भी अपनी फिल्म की शूटिंग कर रही थीं.
    लव स्टोरी में बॉबी देओल का अहम रोल
    ऐश्वर्या राय बच्चन स्विट्जरलैंड में बॉबी देओल के साथ अपनी फिल्म और प्यार हो गया की शूटिंग में बिजी थी. इसी दौरान अभिषेक बच्चन बॉबी देओल से मिलने उनके सेट पर चले गए और बॉबी देओल ने ऐश्वर्या राय की मुलाकात अभिषेक बच्चन से कराई. इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और साल 2000 में दोनों ढाई अक्षर प्रेम के मूवी में साथ नजर आए. वहीं साल 2006 में दोनों की लव लाइफ शुरू हुई, इस दौरान दोनों सितारों ने गुरु मूवी में काम किया था और इसी फिल्म से दोनों ने डेट भी करना शुरू कर दिया था. इसके बाद साल 2007 में दोनों ने परिवार की मौजदूगी में शादी कर ली.

  • भोपाल सागर छिंदवाड़ा में बड़ी कार्यकारिणी पर रोक कांग्रेस संगठन के नए फरमान से असमंजस्य

    भोपाल सागर छिंदवाड़ा में बड़ी कार्यकारिणी पर रोक कांग्रेस संगठन के नए फरमान से असमंजस्य


    मध्य प्रदेश /कांग्रेस संगठन में हाल ही में राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के निर्देश के बाद हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस के जिलों की कार्यकारिणी अब छोटी होगी और ज्यादा संख्या में सदस्यों की नियुक्ति पर रोक लगाई गई है। बड़े जिलों में 55 और छोटे जिलों में 35 सदस्य बनाए जाने की गाइडलाइन जारी की गई है।

    राष्ट्रीय महासचिव ने राज्यों की इकाई और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर यह निर्देश दिए हैं। इस गाइडलाइन को एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बैठक में तय किया गया था। इसके साथ ही 15 दिन के भीतर जिलों की कार्यकारिणी बनाने का निर्देश भी दिया गया।

    मध्य प्रदेश में लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी की परंपरा रही है ताकि अलग-अलग गुटों को संतुलित किया जा सके। लेकिन नई गाइडलाइन आने के बाद कई जिलों में असमंजस्य की स्थिति पैदा हो गई है। 30 जनवरी को मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी की थी, जिसमें गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए।

    छिंदवाड़ा जिला कार्यकारिणी में 240 सदस्य बनाए गए हैं जबकि सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी हैं। छोटे जिले मऊगंज में 40 पदाधिकारी हैं। वहीं भोपाल शहर की सूची में 106 और ग्रामीण क्षेत्र की सूची में 85 सदस्य बनाए गए हैं। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद यह लंबी सूची राष्ट्रीय संगठन के निर्देशों के खिलाफ मानी जा रही है और अब कांग्रेस में असमंजस्य की स्थिति बन गई है।सभी जिलों में जल्द ही नए निर्देश के मुताबिक कार्यकारिणी तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई है और संगठन स्तर पर इस पर निगरानी रखी जा रही है।