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  • मंगल दोष उपाय मंगल दोष से मुक्ति पाने के आसान उपाय जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

    मंगल दोष उपाय मंगल दोष से मुक्ति पाने के आसान उपाय जीवन में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल दोष जीवन में कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जैसे कि वैवाहिक जीवन में तनाव शारीरिक परेशानियां मानसिक तनाव या करियर में विघ्न। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष है तो समय रहते उसका निवारण करना बेहद जरूरी है। मंगल दोष के प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए कुछ आसान उपाय हैं जिनका पालन करके आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। इन उपायों को विशेष रूप से मंगलवार के दिन करना प्रभावी होता है क्योंकि मंगलवार को मंगल देव और हनुमान जी की पूजा का दिन माना जाता है।

    मंगल दोष और मंगल देव का महत्व

    मंगल देव को ज्योतिष में ऊर्जा साहस और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है। वे मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी होते हैं और मकर राशि में उच्च के माने जाते हैं। मंगल दोष का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में कई तरह की चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है लेकिन हनुमान जी की पूजा से इस दोष का निवारण संभव है। हनुमान जी की आराधना से व्यक्ति को साहस आत्मबल और करियर में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

    मंगल दोष के निवारण के उपायहनुमान जी की पूजा और व्रत

    मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हनुमान चालीसा का पाठ करें और शुद्ध मन से व्रत रखें। इससे मंगल दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

    चांदी के बर्तन में तांबे की छड़ी रखें

    अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो चांदी के बर्तन में तांबे की छड़ी रखें और उसे एक लाल कपड़े में बांधकर घर के पूजा स्थान पर रखें। यह उपाय मंगल दोष को नष्ट करने में सहायक होता है।

    तांबे का दान

    मंगल दोष से निवारण के लिए तांबे का दान करना बहुत फायदेमंद होता है। मंगलवार के दिन किसी मंदिर में तांबे के बर्तन तांबे की छड़ी या तांबे की वस्तुएं दान करें। इससे मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और दोष समाप्त हो सकता है।

    राहु और मंगल के दोष को कम करने के लिए विशेष उपाय

    यदि आपके जीवन में मंगल दोष के कारण तनाव और परेशानी है तो मंगलवार को उबटन करें और हल्दी और तिल के साथ स्नान करें। यह उपाय मंगल दोष को दूर करने में मदद करता है और मन को शांति प्रदान करता है।

    लाल रंग का पहनावा

    मंगल ग्रह का रंग लाल होता है इसलिए मंगलवार के दिन लाल रंग के वस्त्र पहनने से मंगल दोष में कमी आ सकती है। इसके साथ ही आप अपने घर में लाल रंग के फूल भी रख सकते हैं।

    पानी में तांबे का सिक्का डालें
    मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए पानी में तांबे का सिक्का डालकर उस पानी को घर के हर सदस्य को पिलाएं। यह उपाय मंगल दोष से राहत पाने में मदद करता है।

    सच्चाई और ईमानदारी का पालन करें

    ज्योतिष के अनुसार यदि आप अपने जीवन में सच्चाई और ईमानदारी का पालन करते हैं तो मंगल दोष का प्रभाव खुद-ब-खुद कम होने लगता है। मंगल देव को सच्चाई और कर्म के साथ जुड़ा हुआ माना जाता ह इसलिए आपके कार्यों में ईमानदारी से मंगल देव प्रसन्न होते हैंमंगल दोष के उपायों को अपनाकर आप अपने जीवन में आने वाली समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं। मंगल दोष के निवारण के लिए बुधवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा और तांबे के दान से आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

  • इंडिगो एयरलाइन को DGCA की दो टूक, तुर्की से लीज पर लिए विमान मार्च 2026 के बाद नहीं उड़ेंगे

    इंडिगो एयरलाइन को DGCA की दो टूक, तुर्की से लीज पर लिए विमान मार्च 2026 के बाद नहीं उड़ेंगे


    नई दिल्‍ली / ।इंडिगो एयरलाइन की हालिया फ्लाइट रद्दीकरण की घटनाओं ने देशभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। हालाँकि अब एयरलाइन का परिचालन आंशिक रूप से सामान्य हो गया है, लेकिन विमानन नियामक DGCA की नजर अभी भी इंडिगो पर कड़ी है। सोमवार को इंडिगो ने तुर्की से लीज पर लिए गए अपने एयरक्राफ्ट्स की अवधि को लेकर स्पष्टीकरण दिया। DGCA ने इन विमानों के उपयोग के लिए एयरलाइन को मार्च 2026 तक का समय दिया, लेकिन साफ कर दिया कि इसके बाद कोई एक्सटेंशन नहीं होगा। इसका मतलब है कि एयरलाइन को निर्धारित समय में इन विमानों का परिचालन समाप्त करना होगा।

    तुर्की के 5 B737 विमान मार्च 2026 तक उड़ाने की अनुमति
    एविएशन रेगुलेटर DGCA ने IndiGo एयरलाइन को तुर्की की कोरेंडन एयरलाइंस से लीज पर लिए गए पांच नैरो-बॉडी बोइंग 737 विमानों का परिचालन केवल मार्च 2026 तक करने की अनुमति दी है। DGCA ने स्पष्ट किया है कि इन विमानों के लिए यह अंतिम एक्सटेंशन होगा और इसके बाद कोई भी अतिरिक्त अवधि नहीं दी जाएगी। एक वरिष्ठ DGCA अधिकारी के अनुसार, इंडिगो ने इस एक्सटेंशन के लिए अंडरटेकिंग प्रस्तुत की थी। इसके पीछे कारण यह था कि एयरलाइन के लॉन्ग-रेंज एयरक्राफ्ट A321-XLR फरवरी 2026 तक डिलीवर होने वाले हैं, इसलिए तब तक इन B737 विमानों की जरूरत बनी रहेगी। इसके साथ ही नियामक ने “सनसेट क्लॉज” के तहत साफ किया कि मार्च 2026 के बाद इन विमानों का संचालन बंद करना होगा।

    IndiGo के पास 15 विदेशी विमान, 7 तुर्की से

    IndiGo एयरलाइन वर्तमान में 15 विदेशी विमानों का परिचालन कर रही है, जिनमें से 7 तुर्की से लीज पर लिए गए हैं। अगस्त 2025 में DGCA ने टर्किश एयरलाइंस से लीज पर लिए गए दो बोइंग 777 विमानों के संचालन के लिए छह महीने का एक्सटेंशन दिया था, जो फरवरी 2026 तक वैध है। इससे पहले मई 2025 में DGCA ने इंडिगो को तीन महीने का सीमित एक्सटेंशन दिया था और स्पष्ट किया था कि आगे किसी अतिरिक्त एक्सटेंशन की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियामक ने यह भी कहा था कि एयरलाइन को भविष्य में किसी भी तरह का विस्तार नहीं मांगना है। यह निर्णय ऐसे समय आया जब तुर्की ने पाकिस्तान के समर्थन में भारत द्वारा पड़ोसी देश में आतंकवादियों के ठिकानों पर किए गए हमलों की आलोचना की थी।

    गौरतलब है कि केवल IndiGo नहीं, बल्कि SpiceJet जैसी एयरलाइंस भी अपने परिचालन के लिए 17 विदेशी विमानों का इस्तेमाल कर रही हैं, जो वेट/डैम्प लीज पर लिए गए हैं। DGCA के अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री में वेट लीजिंग आम प्रैक्टिस है। अधिकारियों ने बताया कि इंजन संबंधी तकनीकी दिक्कतों, ग्राउंडिंग और OEMs द्वारा एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में देरी के कारण भारतीय एयरलाइंस यात्रियों को समय पर सेवा देने के लिए विदेशी एयरलाइंस से वेट लीज का सहारा लेती हैं। यह व्यवस्था उन्हें बाइलेटरल सर्विस एग्रीमेंट के तहत उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करने में मदद करती है। वेट लीजिंग एयरलाइंस को अस्थायी अंतराल में विमान उपलब्ध कराने का तरीका है।

  • संघर्षों से भरा रहा अनिल से मिस्टर इंडिया बनने का सफर, आज हैं अपार संपत्ति के मालिक

    संघर्षों से भरा रहा अनिल से मिस्टर इंडिया बनने का सफर, आज हैं अपार संपत्ति के मालिक

    नई दिल्ली । मिस्टर इंडिया के नाम से मशहूर अभिनेता अनिल कपूर आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अभिनेता अभिनय के लिए ही नहीं बढ़ती उम्र के बावजूद चुस्ती और फुर्ती के लिए जाने जाते हैं। आज अनिल कपूर अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। अनिल कपूर का जन्म 24 दिसंबर 1956 को हुआ था। अनिल कपूर ने बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, लेकिन यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। इस मुकाम को हासिल करने के लिए अनिल ने जिंदगी में कई परेशानियों का सामना किया है। आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े कई अनसुने किस्से बताने जा रहे हैं..
    बॉलीवुड इंडस्ट्री मे आने से पहले अनिल कपूर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। अभिनेता जब मुंबई आए थे, तो उनके परिवार के पास पैसों की तंगी थी। अनिल तब अपने परिवार के साथ राज कपूर के गैरेज में रहे थे। दरअसल, अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर, राजकपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर के कजिन हैं। इसके बाद उन्होंने एक इलाके में कमरा किराए पर लिया था। लंबे समय तक वे किराए के कमरे में भी रहे थे। अभिनेता ने खुद इस बात का खुलासा एक इंटरव्यू में किया था।बॉलीवुड इंडस्ट्री मे आने से पहले अनिल कपूर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। अभिनेता जब मुंबई आए थे, तो उनके परिवार के पास पैसों की तंगी थी। अनिल तब अपने परिवार के साथ राज कपूर के गैरेज में रहे थे। दरअसल, अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर, राजकपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर के कजिन हैं। इसके बाद उन्होंने एक इलाके में कमरा किराए पर लिया था। लंबे समय तक वे किराए के कमरे में भी रहे थे। अभिनेता ने खुद इस बात का खुलासा एक इंटरव्यू में किया था।
    अनिल कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1979 में की, उन्होंने निर्देशक उमेश मेहरा की फिल्म हमारे तुम्हारे में कैमियो किया था। साल 1980 में आई तेलुगू फिल्म वामसा वृक्षम में अनिल कपूर मुख्य भूमिका में काम किया। इसके बाद अभिनेता ने 1983 में फिल्म वो सात दिन के जरिए बतौर लीड एक्टर बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद एक एक करके अनिल कपूर कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए और बेटा, मिस्टर इंडिया, मेरी जंग, कर्मा, तेजाब, कसम, राम लखन, हमारा दिल आपके पास है, लाडला और नायक जैसी कई बेहतरीन फिल्में की।
    अनिल कपूर की डायलॉग की तरह ही उनकी लव लाइफ भी झकास है। अभिनेता जब बॉलीवुड इंडस्ट्री में अभिनेता बनने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात मॉडल सुनीता से हुई। पहली नजर में ही मिस्टर इंडिया को सुनीता से प्यार हो गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन दिनों अनिल के खर्चे सुनीता ही उठाया करती थीं। अनिल कपूर ने सुनीता से साल 19 मई 1984 में शादी की थी।अभिनेता लग्जरी लाइफ जीने के लिए भी जाने जाते हैं। अनिल कपूर के पास मुंबई के अलावा दुबई, कैलिफोर्निया और लंदन में करोड़ों के घर हैं। अभिनेता के पास ल्गजरी कारों के कलेक्शन है, जिसमें बीएमडब्लयू, मर्सिडीज, बेंज एड क्लास, बेंटली, जगुआर और ऑडी है। मिस्टर इंडिया की नेेटवर्थ 134 करोड़ रुपये है।
  • रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स खाने से मिलेंगे 5 जबरदस्त फायदे जानें सही तरीका

    रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स खाने से मिलेंगे 5 जबरदस्त फायदे जानें सही तरीका


    नई दिल्ली । चिया सीड्स एक छोटे आकार के बीज होते हैं जो पोषण से भरपूर होते हैं और इन्हें सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। अगर आप रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स का सेवन करते हैं तो आपको एक महीने में ही कई शारीरिक बदलाव नजर आने लगते हैं। ये बीज शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं और सेहत में सुधार करते हैं। तो आइए जानते हैं चिया सीड्स के सेवन से मिलने वाले 5 जबरदस्त फायदे:

    वजन तेजी से कंट्रोल होता है

    चिया सीड्स में उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है। नियमित रूप से 1 चम्मच चिया सीड्स खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है और यह शरीर के मेटाबोलिज्म को भी बेहतर बनाता है।

    पाचन तंत्र मजबूत होता है

    अगर आपको कब्ज गैस या ब्लोटिंग की समस्या रहती है तो चिया सीड्स आपके लिए एक बेहतरीन उपाय हो सकते हैं। इन बीजों में प्रचुर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो आंतों की सफाई करते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं।

    ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है

    चिया सीड्स डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। ये ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकते हैं और शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में मदद करते हैं। इससे डायबिटीज का जोखिम कम होता है और ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

    दिल की सेहत में सुधार होता है

    चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं जो दिल के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। ये खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं जिससे दिल की सेहत बेहतर रहती है। इसके नियमित सेवन से हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी घटता है।

     त्वचा में नेचुरल ग्लो आता है

    चिया सीड्स में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और उसे चमकदार बनाते हैं। इसके सेवन से त्वचा स्वस्थ सॉफ्ट और ग्लोइंग नजर आने लगती है। इसके अलावा ये त्वचा को हाइड्रेट भी करते हैं जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं।

    चिया सीड्स खाने का सही तरीका

    चिया सीड्स को कभी भी सूखा न खाएं।  चम्मच चिया सीड्स को एक गिलास पानी में भिगोकर 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद आप इसे सुबह खाली पेट या किसी स्मूदी दही या सलाद में मिलाकर खा सकते हैं। चिया सीड्स का सेवन बहुत आसान है और अगर आप इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो आप एक महीने में इसके अद्भुत लाभ देख सकते हैं। तो बिना किसी मेहनत के अपनी सेहत में सुधार के लिए रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स जरूर शामिल करें।

  • 1 महीने तक सुबह खाली पेट खजूर खाने से क्या होंगे फायदे? जानें 7 हैरान कर देने वाले लाभ

    1 महीने तक सुबह खाली पेट खजूर खाने से क्या होंगे फायदे? जानें 7 हैरान कर देने वाले लाभ


    नई दिल्ली । खजूर एक सुपरफूड के रूप में जाना जाता है जो न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। अगर आप हर सुबह खाली पेट 1 महीने तक खजूर खाते हैं तो आपके शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खजूर में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं खजूर के सेवन से मिलने वाले 7 महत्वपूर्ण फायदे ।
    पाचन तंत्र को मजबूत बनाएं
    खजूर में उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर बनाता है। रोज सुबह खजूर खाने से आंतों की सफाई होती है और कब्ज गैस एसिडिटी जैसी समस्याएं कम होती हैं। इससे पेट साफ रहता है और पाचन क्रिया बेहतर होती है।

    शरीर को मिलती है भरपूर ऊर्जा
    खजूर में प्राकृतिक शुगर ग्लूकोज फ्रक्टोज और सुक्रोज होता है जो तुरंत शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इससे पूरे दिन थकान या कमजोरी का अनुभव नहीं होता और आप दिनभर सक्रिय रहते हैं।

    वजन बढ़ाने या घटाने में मदद

    जो लोग दुबले-पतले हैं उनके लिए खजूर वजन बढ़ाने में मदद करता है क्योंकि यह उच्च कैलोरी वाला होता है। वहीं सीमित मात्रा में सेवन करने पर खजूर मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

    खून की कमी एनीमिया को दूर करता है

    खजूर आयरन से भरपूर होता है जो खून की कमी को दूर करता है। रोजाना खजूर खाने से हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है जिससे एनीमिया चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

    दिल को स्वस्थ रखता है

    खजूर में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं। इसके सेवन से दिल की सेहत बेहतर रहती है और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।

    दिमाग और याददाश्त को तेज करता है

    खजूर में एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन्स होते हैं जो दिमाग को सक्रिय रखते हैं। इसका नियमित सेवन याददाश्त को बेहतर बनाता है और मानसिक तनाव को कम करता है। यह दिमाग को तेज रखने में भी सहायक होता है।

    हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनाता है
    खजूर में कैल्शियम फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसके सेवन से जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है और हड्डियां मजबूत होती हैं।

    खजूर खाने का सही तरीका

    सुबह खाली पेट 2–3 खजूर खाएं। आप चाहें तो रात में खजूर को पानी में भिगोकर सुबह इसका सेवन कर सकते हैं। इसके बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीना फायदेमंद होता है। अगर आपको डायबिटीज है तो खजूर का सेवन सीमित मात्रा में करें और डॉक्टर की सलाह लें। अगर आप सिर्फ 1 महीने तक सुबह खाली पेट खजूर खाना शुरू कर देते हैं तो शरीर में अंदर से मजबूत बदलाव दिखने लगेंगे और कई बीमारियों से भी राहत मिल सकती है।

  • जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार

    जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार


    नई दिल्ली ।जनवरी 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार एक विशेष महीना है क्योंकि इस महीने माघ माह की शुरुआत होती है जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीना विभिन्न व्रतों और त्योहारों से भरा होता है जिनका सामाजिक और धार्मिक जीवन में गहरा महत्व है। खासकर मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक इन दिनों का पालन लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी

    मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग तिल और गुड़ के साथ खिचड़ी बनाते हैं और दान पुण्य करते हैं। मकर संक्रांति का विशेष महत्व इस दिन सूर्य की उपासना और उत्तरायण के शुभारंभ के रूप में होता है।

    लोहड़ी 13 जनवरी

    लोहड़ी पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों में धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है। इसे सर्दी के मौसम के अंत और फसल के कटने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन लोग आग जलाकर उस पर तिल गुड़ और मूंगफली डालते हैं और इसके साथ ही गाते-बजाते हैं।

    सकट चौथ 19 जनवरी

    सकट चौथ को विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर संतान सुख और पारिवारिक सुख की कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और घर-घर खास पकवान बनते हैं। व्रत का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है।

    मौनी अमावस्या 20 जनवरी

    मौनी अमावस्या को विशेष रूप से उपवास और मौन रहने का दिन माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और तर्पण करने की परंपरा है। भक्तगण इस दिन उपवास रखते हुए अपनी बुराईयों और पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

    बसंत पंचमी 25 जनवरी

    बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और यह विशेष रूप से सरस्वती पूजा के रूप में मनाई जाती है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और नए ज्ञान की प्राप्ति के लिए लोग विशेष आयोजन करते हैं। पीले रंग की विशेषता के साथ यह दिन उल्लास और उत्सव का प्रतीक बन जाता है। जनवरी का महीना कई महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक अवसरों के साथ आता है। इस दौरान श्रद्धालु इन व्रतों और त्योहारों का पालन करके जीवन में सुख समृद्धि और पुण्य की कामना करते हैं।

  • शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!

    शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!


    नई दिल्ली । कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने सोमवार 22 दिसंबर को नीतीश कुमार सरकार की तरफ से बिहार में बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे कार्यों की जमकर सराहना की, जबकि कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ गठबंधन में है.नालंदा साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए बिहार आए शशि थरूर ने एक चैनल संग बातचीत में कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बुनियादी ढांचा पहले की तुलना में कहीं बेहतर है. सड़कें बेहतर हैं. लोग देर रात तक सड़कों पर दिखते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. अब तक बिजली, पानी और बाकी सब कुछ ठीक चल रहा है.
    नीतीश के बारे में पूछे जाने पर क्या बोले
    उन्होंने कहा कि मेरा मतलब है, इसमें कोई शक नहीं कि हाल के वर्षों में बहुत सी अच्छी चीजें हुई हैं. नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस सांसद ने टालमटोल करते हुए कहा कि मुझे यहां राजनीति में मत घसीटिए. मैं निश्चित रूप से इस प्रगति को देखकर बहुत खुश हूं. बिहार की जनता और उनके प्रतिनिधि इसके लिए श्रेय के पात्र हैं.

    कांग्रेस का क्या है रिएक्शन

    बिहार में थरूर के बीजेपी संग गठबंधन वाली सरकार की प्रशंसा करने वाली हालिया टिप्पणी पर कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. पिछले महीने दुबई में एक मीडिया कार्यक्रम में थरूर ने राजनीतिक परिदृश्य पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हर किसी को वैचारिक रूप से कट्टरपंथी होना पड़ता है और वे दूसरे पक्ष की अच्छाई को नहीं देखते या दूसरे पक्ष के किसी भी व्यक्ति से बात नहीं करते.

    हिजाब विवाद को लेकर क्या कहा था
    बता दें कि 4 बार के सांसद शशि थरूर, प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी की प्रशंसा करने वाले कई बयानों के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपने संबंध खराब होते देख रहे हैं. थरूर हमेशा से यह कहते रहे हैं कि उनकी टिप्पणियां केवल भारत की बेहतर सेवा करने की इच्छा को दर्शाती हैं. इससे पहले शशि थरूर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा था कि यह घटना अनुचित थी.

  • भारतीय खिलाड़ियों का बर्ताव गलत, आईसीसी के सामने उठाएंगे मुद्दा, मोहसिन नकवी की गीदड़भभकी

    भारतीय खिलाड़ियों का बर्ताव गलत, आईसीसी के सामने उठाएंगे मुद्दा, मोहसिन नकवी की गीदड़भभकी


    नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और एशियन क्रिकेट काउंसिल के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने कहा है कि अंडर-19 एशिया कप फाइनल के दौरान भारतीय खिलाड़ियों का पाकिस्तानी खिलाड़ियों के प्रति गलत व्यवहार रहा था और वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के सामने उठाएंगे.

    मोहसिन नकवी ने कहा कि अंडर-19 एशिया कप फाइनल के दौरान भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को उकसाते रहे. पाकिस्तान इस घटना की जानकारी आधिकारिक तौर पर आईसीसी को देगा. राजनीति और खेल को हमेशा एक दूसरे से अलग रखना चाहिए.अंडर-19 एशिया कप में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मेंटर रहे सरफराज अहमद ने कहा खेल के दौरान भारत का बर्ताव सही नहीं था और क्रिकेट की भावना के खिलाफ था. इसके बावजूद, हमने अपनी जीत का जश्न खेल की भावना के साथ मनाया. क्रिकेट हमेशा खेल भावना के साथ खेला जाना चाहिए.

    भारतीय खिलाड़ियों के खेल भावना से जुड़ा मुद्दा सबसे पहले सरफराज अहमद ने ही उठाया था.पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदुर के बाद एशिया कप के दौरान भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच पहली बार मैदान पर दूरी दिखी थी. भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली आगा से टॉस के दौरान हाथ नहीं मिलाया था. इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने भी मैच के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था. एशिया कप जीत के बाद भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से भी इनकार कर दिया था.

    अंडर-19 एशिया कप में भी भारतीय टीम का स्टैंड यही रहा. भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया. अंडर-19 एशिया 2025 दुबई में हाल ही में संपन्न हुई है. लीग स्टेज में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया था, लेकिन 21 दिसंबर को हुए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा. पाकिस्तान ने भारत को 348 रन का लक्ष्य दिया था. भारतीय टीम 156 पर सिमट गई और 191 रन से खिताबी मुकाबला हार गई.

  • आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी को मिलेगा वैश्विक मानक दर्जा WHO और आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल

    आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी को मिलेगा वैश्विक मानक दर्जा WHO और आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल


    नई दिल्ली । भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा।

    इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।

    प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।

    बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व
    बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।

    वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।

    भारत की प्रमुख भूमिका

    भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेशक सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार महानिदेशक सीसीआरएस और डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।

    WHO के वैश्विक प्रयास

    इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।

    पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल

    यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
    भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा। इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।

    प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।

    बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व

    बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।

    वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य-आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।

    भारत की प्रमुख भूमिका
    भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेश सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार सीसीआरएसऔर डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।

    WHO के वैश्विक प्रयास
    इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।

    पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल

    यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

  • BCCI ने बढ़ाई क्रिकेटरों की सैलरी घरेलू महिला खिलाड़ी और मैच अधिकारियों को मिलेगा बड़ा फायदा

    BCCI ने बढ़ाई क्रिकेटरों की सैलरी घरेलू महिला खिलाड़ी और मैच अधिकारियों को मिलेगा बड़ा फायदा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट बोर्ड BCCI ने घरेलू महिला क्रिकेटरों और मैच अधिकारियों के लिए वेतन में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है जो भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक वनडे विश्व कप 2025 की जीत के बाद किया गया है। इस फैसले से महिला क्रिकेटरों के लिए बेहतर वित्तीय सुरक्षा और सम्मान का रास्ता खुलेगा साथ ही मैच अधिकारियों को भी इससे बड़ा लाभ मिलेगा। BCCI ने घरेलू महिला क्रिकेटरों के लिए वेतन संरचना को सुधारने और समान वेतन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब घरेलू महिला क्रिकेटरों को पहले की तुलना में दोगुना या उससे अधिक मैच फीस मिलेगा जो कि पहले 20000 रुपये रिजर्व खिलाड़ियों के लिए 10000 रुपये प्रति मैच दिन था।

    महिला क्रिकेटरों की बढ़ी हुई सैलरी

    संशोधित वेतन संरचना के तहत सीनियर महिला क्रिकेटरों को घरेलू टूर्नामेंटों में एक मैच दिन के लिए 50000 रुपये से 60000 रुपये तक मिलेगा। रिजर्व खिलाड़ियों को 25000 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे। इस प्रकार यह वेतन वृद्धि एक बड़ी राहत और प्रेरणा का स्रोत बनेगी। राष्ट्रीय टी20 टूर्नामेंटों में एकादश में खेलने वाली खिलाड़ियों को प्रति मैच 25000 रुपये मिलेंगे जबकि रिजर्व खिलाड़ियों के लिए यह राशि 12500 रुपये होगी।बीसीसीआई के अधिकारियों का कहना है कि अगर एक महिला क्रिकेटर पूरे सत्र के दौरान सभी प्रारूपों में खेलती है तो उसे 12 लाख से 14 लाख रुपये तक मिल सकते हैं जो पहले के मुकाबले काफी अधिक है।

    जूनियर महिला क्रिकेटरों के लिए वेतन वृद्धि

    BCCI ने जूनियर महिला क्रिकेटरों के वेतन में भी वृद्धि की है। अब अंडर-23 और अंडर-19 श्रेणियों के खिलाड़ियों को प्रतिदिन 25000 रुपये का भुगतान किया जाएगा जबकि रिजर्व खिलाड़ियों को 12500 रुपये मिलेंगे। यह कदम जूनियर स्तर पर खिलाड़ियों को बेहतर वित्तीय अवसर देने और उनके खेल को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

    मैच अधिकारियों के लिए वेतन वृद्धि

    बीसीसीआई ने अंपायर और मैच रेफरी सहित मैच अधिकारियों के वेतन में भी इजाफा किया है। घरेलू टूर्नामेंटों के लीग मैचों के लिए अंपायरों और मैच रेफरी के लिए प्रस्तावित आय प्रतिदिन 40000 रुपये होगी। यह वेतन वृद्धि मैच अधिकारियों के लिए एक बड़ा फायदा साबित होगी और उनके योगदान को बेहतर तरीके से मान्यता दी जाएगी।

    BCCI के कदम की सराहना

    इस फैसले के बाद बीसीसीआई की प्रशंसा की जा रही है क्योंकि इसने महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने और उनके वेतन में सुधार करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। महिला क्रिकेटरों को समान वेतन और बेहतरवित्तीय अवसर देने से न केवल उनके प्रदर्शन में सुधार होगा बल्कि आने वाले समय में और अधिकप्रतिभाओं को आकर्षित भी करेगा। BCCI के इस कदम से यह साफ होता है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड महिला क्रिकेट को लेकर गंभीर है और वे इसे वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख खेल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

    बीसीसीआई का यह कदम महिला क्रिकेट और खेल अधिकारियों के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है। इस बढ़ी हुई वेतन संरचना से महिला क्रिकेटरों को बेहतर जीवन स्तर मिलेगा साथ ही वे अपनी क्रिकेट करियर को और अधिक गंभीरता से आगे बढ़ा सकेंगी। यह कदम न केवल भारतीय महिला क्रिकेट को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय महिला क्रिकेट की पहचान बनाएगा।