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  • सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक

    सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक


    सूरत । गुजरात जिले की फैमिली कोर्ट ने 7 साल की एक बच्ची को जैन साध्वी बनने की दीक्षा लेने से रोक दिया है। यह फैसला बच्ची के पिता की याचिका पर लिया गया जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनकी अलग रह रही पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को दीक्षा दिलाना चाहती थी। अदालत ने मां से हलफनामा देने को कहा है कि वह बच्ची को साध्वी बनने की दीक्षा में शामिल न होने दे।

    सूरत फैमिली कोर्ट की जज एसवी मंसूरी ने आदेश दिया कि 8 फरवरी 2026 को मुंबई में होने वाले दीक्षा समारोह पर फिलहाल रोक रहेगी। याचिकाकर्ता पिता के वकील समाप्ति मेहता ने बताया कि अदालत ने अंतरिम रोक लगाने की मांग मान ली है। अदालत ने मां से लिखित में जवाब मांगा है जिसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि वह बच्ची को दीक्षा समारोह में शामिल नहीं होने देंगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।

    सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मां ने यह विवाद लगभग एक साल पहले उत्पन्न होने के बाद पति का घर छोड़ दिया था। महिला अपने माता-पिता के साथ रहने लगी साथ ही उसने अपनी बेटी और बेटे को भी साथ रखा। पिता ने 10 दिसंबर को कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को साध्वी बनाने का निर्णय ले रही है।

    पिता ने अदालत को बताया कि उन्होंने 2012 में शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं। 2024 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। पिता ने याचिका में कहा कि बच्ची के साध्वी बनने के मुद्दे पर दोनों ने पहले सहमति बनाई थी कि जब बच्ची बालिग हो जाएगी तभी वह साध्वी बनने का निर्णय लेगी। इसके बावजूद पत्नी चाहती थी कि बच्ची फरवरी 2026 में मुंबई में बड़े समारोह में साध्वी बने।

    पिता ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी पत्नी केवल तभी घर वापस आएगी जब वह बच्ची की दीक्षा के लिए रजामंद होगी। पिता ने अदालत से यह भी कहा कि वह गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट 1890 के तहत बच्ची के हितों की रक्षा के लिए उसका कानूनी अभिभावक बनाना चाहते हैं।

    अदालत ने पिता की याचिका पर मां को नोटिस जारी किया और 22 दिसंबर तक जवाब मांगा। जज मंसूरी ने स्पष्ट किया कि बच्ची की उम्र देखते हुए और उसके भविष्य के हित को ध्यान में रखते हुए दीक्षा पर रोक आवश्यक है। अदालत का यह निर्णय बच्चों के अधिकारों और उनकी इच्छाओं का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    जैन समुदाय में दीक्षा एक धार्मिक प्रक्रिया है लेकिन इस मामले ने दिखाया कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे बड़े निर्णय लेने के लिए मजबूर करना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में बच्चों की भागीदारी तभी होनी चाहिए जब वे पूरी तरह से अपनी मर्जी से निर्णय ले सकें।

    अदालत का यह निर्णय न केवल इस परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल बच्ची को साध्वी बनने की प्रक्रिया से रोक दिया गया है और मां से हलफनामा लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी 2026 को होगी जिसमें अदालत पूरी स्थिति की समीक्षा करेगी।

  • यूपी में मायावती-अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगे रामदास आठवले? इस दावे से तेज हुई सियासी हलचल UP Politics: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने यूपी में एंट्री की तैयारी कर ली है. सोमवार को उन्होंने यूपी पार्टी कार्यकर्ताओं

    यूपी में मायावती-अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगे रामदास आठवले? इस दावे से तेज हुई सियासी हलचल UP Politics: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने यूपी में एंट्री की तैयारी कर ली है. सोमवार को उन्होंने यूपी पार्टी कार्यकर्ताओं


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार में एनडीए की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी उत्तर प्रदेश में एंट्री करने की तैयारी कर रही हैं. जिससे आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दावा किया कि वो यूपी में डीपीए यानी दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक के साथ मिलकर बदलाव लाएंगे. रामदास आठवले ने दावा किया कि यूपी के 75 जिलों में से 62 जिलों में रिपब्लिकन पार्टी की कार्यकारिणी बन चुकी है. पार्टी अगले साल 5 अप्रैल 2026 को लखनऊ में एक बड़ी रैली करेगी, जिसमें 1 लाख से लोगों के शामिल होने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि अब बसपा की जगह रिपब्लिकन पार्टी ने ली है. दलितों और गरीब को न्याय दिलाने वाली पार्टी रिपब्लिकन पार्टी रहेगी.

    यूपी में सपा-बसपा की मुश्किल बढ़ाएंगे आठवले
    आठवले ने बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सत्ता में इतने लंबे समय तक रहने के बावजूद दलितों, शोषितों, वंचितों, गरीबों और महिलाओं के लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ. अखिलेश यादव द्वारा दिया गया पीडीए पिछड़ा वर्ग, दलित, अल्पसंख्यक का नारा सिर्फ एक चुनावी वादा बनकर रह गया है.

    पीडीए के जवाब में यूपी डीपीए की लड़ाई!

    आरपीआई आठवले अब डीपीए दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक की अवधारणा को जमीन पर मजबूती से लागू करेगी और असली बदलाव लाएगी. आठवले ने सोमवार को इस संबंध में उत्तर प्रदेश कार्यकारी समिति की समीक्षा बैठक की. इस बैठक में प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, दलित, शोषित और वंचित समुदायों की समस्याओं एवं पार्टी के संगठन के विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई. आठवले ने कहा कि आरपीआई इन मुद्दों पर सिर्फ नारे नहीं लगाती बल्कि जमीन पर प्रभावी ढंग से काम कर रही है. अखिलेश यादव द्वारा दिया गया पीडीए का नारा केवल चुनावी घोषणा बनकर रह गया. पार्टी अब डीपीए की अवधारणा को लेकर जमीन पर मजबूती से उतरेगी और वास्तविक बदलाव लाएगी.

  • भारत टैक्सी जो बदल देगी कैब बुकिंग की तस्वीर, जानें इसके बारे में वो सब कुछ जो आपके लिए है जरूरी

    भारत टैक्सी जो बदल देगी कैब बुकिंग की तस्वीर, जानें इसके बारे में वो सब कुछ जो आपके लिए है जरूरी

    नई दिल्ली
    ।भारत टैक्सी एक नई सहकारी राइड-हेलिंग सर्विस है जो 1 जनवरी, 2026 को भारत में आधिकारिक तौर पर लॉन्च होगी। उबर और ओला से उलट यह ड्राइवर-स्वामित्व वाले मॉडल के मुताबिक चलती है जो जीरो कमीशन, कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं और ड्राइवरों के लिए उचित कमाई का वादा करती है।
    1 जनवरी से शुरू हो रही है सर्विस
    देश में भारत टैक्सी सर्विस 1 जनवरी, 2026 से शुरू होने की घोषणा की गई है। यह एक इनोवेटिव टैक्सी सर्विस है जिसमें ग्राहकों को कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी बुक करने का ऑप्शन मिलेगा और यह सब एक विशेष रूप से डेवलप किए गए एप्लिकेशन के माध्यम से किया जा सकेगा। हालांकि यह Uber, Ola या Rapido जैसी दिखती है, लेकिन यह उनसे पूरी तरह अलग है। यह सर्विस दिल्ली और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में बीटा वर्जन में पहले ही शुरू हो चुकी है, जिससे यूजर्स को सर्विस का एक्जीक्यूशन कैसा रहने वाला है, इसका कुछ-कुछ अंदाजा मिल रहा है।

    भारत टैक्सी क्या है?

    भारत टैक्सी एक सहकारी टैक्सी सर्विस मॉडल पर काम करती है। इसका अर्थ है कि सर्विस का नियंत्रण ड्राइवरों के पास है ना कि किसी निजी कंपनी या निवेशक के पास। इसे ‘टैक्सी के लिए अमूल मॉडल’ भी कहा जा सकता है, जिसमें हजारों टैक्सियां मिलकर सर्विस ऑपरेट करती हैं। अन्य टैक्सी ऐप्स की तरह ही यह यूजर्स के लिए आसान राइड बुकिंग की सुविधा प्रदान करती है। यह ड्राइवरों को ज्यादा कंट्रोल और कमाई के मौके दिलाती है।

    भारत टैक्सी किसकी पहल है?

    यह सर्विस नई दिल्ली स्थित सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की तरफ से सपोर्टेड है। सहकारी समिति के चेयरमैन जयेन मेहता अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। इसके डेवलपमेंट और सर्विसेज में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय का भी सहयोग है। यह भारतीय परिवहन बाजार में अपनी तरह की एक बड़ी और पहली पहल है।

    भारत टैक्सी कैसे काम करती है?

    भारत टैक्सी कमीशन-फ्री बिजनेस मॉडल पर चलती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि ड्राइवरों को दिन के अंत में अपनी कमाई का 80 परसेंट से 100 परसेंट हिस्सा वापस मिल सके। यह ज्यादातर ऑनलाइन कैब सर्विसेज की तरफ से लिए जाने वाले कमीशन से उल्टा है। हालांकि ड्राइवरों को प्लेटफॉर्म का यूज करने के लिए एक छोटी सी फीस देनी होगी, लेकिन यह बहुत कम होगी और केवल ऑपरेशनल खर्चों के लिए उपयोग की जाएगी। यात्रियों के लिए इस मॉडल का अर्थ यह हो सकता है कि कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं होगी, और घर या दफ्तर जैसे रूट्स के लिए किराया स्थिर रहेगा।

    भारत टैक्सी को डाउनलोड और इस्तेमाल कैसे करें?
    भारत टैक्सी एप्लिकेशन गूगल प्ले स्टोर एंड्रॉइड और एप्पल ऐप स्टोर (आईफोन) पर उपलब्ध है। फिलहाल ऐप की बीटा टेस्टिंग चल रही है इसलिए इसकी सर्विसेज लिमिटेड हैं। इसके देशव्यापी लॉन्च के बाद ऐप का अंतिम संस्करण अलग हो सकता है। इस ऐप में ONDC से सपोर्टेड Namma Yatri ऐप जैसी ही बैकएंड सपोर्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

  • किसान दिवस 2025 जब मंत्री की पत्नी के हिस्से आई फटी धोतीचौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का वो किस्सा जो आज मिसाल है

    किसान दिवस 2025 जब मंत्री की पत्नी के हिस्से आई फटी धोतीचौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का वो किस्सा जो आज मिसाल है


    इंदौर । लखनऊ आज किसान दिवस है यह दिन देश के उन अन्नदाताओं को समर्पित है जिनकी मेहनत से हमारी थाली सजती है। लेकिन जब भी किसानों की बात होती हैदेश के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘किसानों के मसीहा’ चौधरी चरण सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। साल 2025 में भी उनके जीवन के किस्से राजनीति में शुचिता और ईमानदारी की सबसे बड़ी मिसाल माने जाते हैं।

    1966 का वो दौर: मंत्री पद और सादा जीवन

    किस्सा साल 1966 का है। उस वक्त चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में वन मंत्री जैसे कद्दावर पद पर थे। सत्ता और सुविधाओं की कोई कमी नहीं थीलेकिन उनका रहन-सहन किसी साधारण किसान जैसा ही था। उनकी सादगी का आलम यह था कि उनके घर में सुबह की शुरुआत आज के नेताओं की तरह तामझाम से नहींबल्कि अनुशासन और सादगी से होती थी।

    जब बेटी वन विभाग की जीप से घर आई

    एक सुबह उनकी बड़ी बेटी सत्यवती अपने बच्चों के साथ आगरा से लखनऊ अपने पिता से मिलने पहुंचीं। बातचीत के दौरान जब चौधरी साहब को पता चला कि सत्यवती सरकारी कार्य के लिए आवंटित ‘वन विभाग की जीप’ से आई हैंतो वे बेहद आहत हुए। उन्होंने अपनी बेटी को स्पष्ट समझाया कि सरकारी सुविधाएं जनता की अमानत हैंपरिवार के निजी उपयोग के लिए नहीं। उन्होंने अपनी बेटी से उस यात्रा का किराया तक सरकारी कोष में जमा करवाया था।

    पत्नी की फटी धोती और अटूट ईमानदारी

    चौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का सबसे भावुक कर देने वाला पहलू उनकी पत्नी गायत्री देवी से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब वे मंत्री थेतब भी उनकी पत्नी फटी हुई धोती को टांका लगाकर पहनती थीं। एक बार किसी ने टोका कि “चौधरी साहब मंत्री हैंआप नई धोती क्यों नहीं ले लेतीं?” इस पर सादगी भरा जवाब मिला कि जो है उसी में संतोष है। चौधरी साहब का मानना था कि यदि वे अपनी मेहनत की कमाई से अधिक खर्च करेंगेतो उन्हें भ्रष्टाचार का सहारा लेना पड़ेगाजो उनके उसूलों के खिलाफ था।

    आज के दौर में प्रासंगिकता

    चौधरी चरण सिंह के ये किस्से आज के दौर के राजनेताओं के लिए एक आईना हैं। उन्होंने न केवल किसानों के हक की लड़ाई लड़ीबल्कि यह भी सिद्ध किया कि सत्ता में रहकर भी इंसान अपनी जड़ों और सादगी से जुड़ा रह सकता है। यही कारण है कि आज दशकों बाद भी किसान दिवस पर उनकी ईमानदारी की गाथाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं। अवसर राष्ट्रीय किसान दिवस 2025। व्यक्तित्व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह। आदर्श सरकारी जीप के उपयोग पर बेटी से वसूला था किराया। सादगी मंत्री पद पर रहते हुए भी पत्नी पहनती थीं फटी धोती।

  • रीवा अस्पताल प्रबंधक ने मुंह में पिस्टल रखकर खुद को मारी गोलीवेंटिलेटर पर संघर्ष के बाद मौत

    रीवा अस्पताल प्रबंधक ने मुंह में पिस्टल रखकर खुद को मारी गोलीवेंटिलेटर पर संघर्ष के बाद मौत


    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा शहर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक युवक ने देर रात अपने घर के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में खुद को गोली मार ली। मृतक की पहचान प्रतीक सिंह उर्फ कुक्कू के रूप में हुई हैजो एक अस्पताल के प्रबंधनकार्य से जुड़े थे। घटना के बाद से पूरे शहर में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

    सोने से पहले गूंजी धमाके की आवाज

    जानकारी के मुताबिकयह दुखद घटना शहर के पीटीएस स्थित यूनियन बैंक के पीछे रहने वाले प्रतीक सिंह के घर पर हुई। रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 12 बजेजब पूरा परिवार सोने की तैयारी कर रहा थातभी अचानक प्रतीक के कमरे से गोली चलने की जोरदार आवाज आई। धमाके की आवाज सुनते ही घर में चीख-पुकार मच गई और परिजन बदहवास होकर प्रतीक के कमरे की ओर दौड़े।

    जमीन पर तड़पते मिले प्रतीक

    कमरे का दरवाजा खोलते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। प्रतीक सिंह लहूलुहान हालत में फर्श पर पड़े तड़प रहे थे। उन्होंने पिस्टल को अपने मुंह के भीतर डालकर फायर किया थाजिससे गोली सीधे सिर के पार निकल गई थी। परिजनों ने बिना एक पल गंवाए उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया।

    वेंटिलेटर पर तोड़ा दम

    अस्पताल में प्रतीक की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। अंदरूनी चोटें और अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

    जांच में जुटी पुलिस
    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर प्रतीक ने इतना बड़ा आत्मघाती कदम क्यों उठाया। मौके से पुलिस ने साक्ष्य जुटाए हैं और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अभी तक आत्महत्या के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही है।मृतकप्रतीक सिंह उर्फ कुक्कू अस्पताल प्रबंधकस्थान पीटीएस क्षेत्रयूनियन बैंक के पीछेरीवा। घटना का तरीका मुंह में पिस्टल रखकर खुद को मारी गोली। हालत इलाज के दौरान वेंटिलेटर पर हुई मौत।

  • करीना कपूर-सैफ अली खान और सोहा के लिए शुरू हुआ 'क्रिसमस' वीक, दादी शर्मिला के साथ दिखे क्यूट जेह और तैमूर

    करीना कपूर-सैफ अली खान और सोहा के लिए शुरू हुआ 'क्रिसमस' वीक, दादी शर्मिला के साथ दिखे क्यूट जेह और तैमूर


    नई दिल्ली ।सोहा अली खान हर साल क्रिसमस बड़ी ही धूम-धाम से मनाती आई हैं। इस बार उनका क्रिसमस वीक आज से शुरू हो चुका है। क्रिसमस पार्टी में सोहा के साथ दिखीं उनकी भाभी करीना कपूर खान, भाई सैफ अली खान, सोहा की मां शर्मिला टैगोर, क्यूट जेह और तैमूर अली खान।
    सोहा का पोस्ट
    सोहा अली खान के लिए क्रिसमस आज से शुरू हो चुका है। इस क्रिसमस वीक की शुरुआत उन्होंने अपने भाई सैफ अली खान और भाभी करीना कपूर खान के साथ की। इस दौरान इस पार्टी में जेह और तैमूर भी नजर आए। इस पार्टी में सोहा की मां शर्मिला टौगोर भी शामिल हुईं। इन तस्वीरों में सोहा की बेटी इनाया खेमू भी नजर आईं, लेकिन सभी का ध्यान खींचा सांता क्लॉज ने।
    सोहा के लिए आज से शुरू हुआ क्रिसमस
    सोहा ने इंस्टाग्राम पर क्रिसमस वीक की इन तस्वीरों को शेयर किया और साथ ही कैप्शन में लिखा कि उनके लिए आज से क्रिसमस वीक की शुरुआत हो चुकी है। यानी कि आज से 25 तारीख तक सोहा क्रिसमस सेलिब्रेट करती रहेंगी।

    करीना, सैफ और सोहा का करियर

    करीना कपूर जल्द ही फिल्म दायरा में नजर आएंगी। इस फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार कर रही हैं। इस फिल्म में करीना के साथ साउथ एक्टर पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आएंगे। वहीं सैफ अली खान की बात करें तो सैफ फिल्म ‘हैवान’ में नजर आएंगे। इस हॉरर फिल्म में उनके साथ अक्षय कुमार नजर आएंगे। सोहा की बात करें तो उन्हें आखिरी बार फिल्म ‘छोरी 2’ में देखा गया था।
  • 200 लोग लाओ 2 करोड़ के काम पाओ' ग्वालियर प्रभारी मंत्री का पार्षदों को बड़ा ऑफरअमित शाह के दौरे की तैयारी

    200 लोग लाओ 2 करोड़ के काम पाओ' ग्वालियर प्रभारी मंत्री का पार्षदों को बड़ा ऑफरअमित शाह के दौरे की तैयारी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने आगामी 25 दिसंबर को प्रस्तावित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर कमर कस ली है। इस महत्वपूर्ण दौरे को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रभारी मंत्री ने एक अनोखा ऑफर पेश किया है। उन्होंने भाजपा पार्षद दल की बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो पार्षद कार्यक्रम में 200 लोगों की भीड़ लेकर आएगाउसके वार्ड में 2 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्ताव पास कराए जाएंगे।

    बाल भवन में हुई पार्षद दल की बैठक

    नगर निगम के बाल भवन स्थित नवीन टीएलसी कक्ष में आयोजित इस बैठक में प्रभारी मंत्री ने पार्षदों के साथ सीधा संवाद किया। बैठक का मुख्य एजेंडा अमित शाह के भव्य स्वागत और जनसभा में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करना था। सिलावट ने प्रत्येक पार्षद को जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों से कम से कम 200-200 लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाना है।

    वाहनों की चिंता छोड़ेंहम करेंगे व्यवस्था

    बैठक के दौरान जब पार्षदों ने लोगों को लाने-ले जाने के संसाधनों पर सवाल उठाएतो प्रभारी मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया। उन्होंने कहा”वाहनों की चिंता आप लोग बिल्कुल न करेंवह सारी व्यवस्था हम सरकार संगठन कराएंगे। आपका काम बस लोगों को प्रेरित कर कार्यक्रम तक पहुंचाना है।

    कार्यकाल खत्म होने से पहले पूरे होंगे काम

    मंत्री तुलसीराम सिलावट ने पार्षदों को लुभाते हुए कहा कि अब आप लोगों के कार्यकाल में केवल डेढ़ साल का समय शेष रह गया हैइसलिए विकास की रफ्तार बढ़ाने का यह सही मौका है। उन्होंने प्रत्येक पार्षद को दो-दो करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। जब पार्षदों ने बजट और वित्तीय वर्ष को लेकर सवाल कियातो मंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया”आपका कार्यकाल समाप्त होने से पहले ये सभी काम जमीन पर उतर जाएंगे।

    सीएम से मुलाकात का भी बोनस ऑफर

    भीड़ जुटाने के इस टारगेट के साथ प्रभारी मंत्री ने एक और बड़ा दांव खेला है। उन्होंने पार्षदों को मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाने का भी ऑफर दिया। माना जा रहा है कि इस रणनीति के जरिए पार्टी स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना चाहती है ताकि केंद्रीय नेतृत्व के सामने ग्वालियर की ताकत दिखाई जा सके मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 दिसंबर । टारगेट प्रति वार्ड कम से कम 200 लोगों की उपस्थिति। इनाम प्रति पार्षद 2 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति। रणनीति कार्यकाल समाप्त होने से पहले विकास कार्यों को गति देना।

  • अमेरिका ने स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले अवैध प्रवासियों को 3,000 डॉलर और मुफ्त हवाई टिकट देने की घोषणा की।

    अमेरिका ने स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले अवैध प्रवासियों को 3,000 डॉलर और मुफ्त हवाई टिकट देने की घोषणा की।


    नई दिल्ली।अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग DHS ने अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे प्रवासियों के लिए बड़ा ऐलान किया है। इसमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। विभाग ने सेल्फ-डिपोर्टेशन यानी स्वेच्छा से अपने देश लौटने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 1,000 डॉलर से बढ़ाकर 3,000 डॉलर कर दी है। इसके साथ ही सरकार की ओर से मुफ्त हवाई टिकट भी दिया जाएगा, ताकि प्रवासी बिना किसी खर्च के अपने देश लौट सकें।

    31 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन करने पर मिलेगा लाभ

    DHS के अनुसार, जो प्रवासी 31 दिसंबर तक CBP One ऐप के जरिए सेल्फ-डिपोर्टेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराएंगे, वे इस योजना का पूरा लाभ उठा सकेंगे। ऐसे लोगों को 3,000 डॉलर नकद, सरकार द्वारा प्रायोजित यात्रा और वीजा अवधि से अधिक रुकने पर लगने वाले नागरिक जुर्माने या दंडों से छूट मिलेगी।

    तेज, मुफ्त और आसान प्रक्रिया

    गृह सुरक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को तेज, मुफ्त और आसान बताया है। इसके लिए केवल CBP One ऐप डाउनलोड कर अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। यात्रा की पूरी व्यवस्था अमेरिकी सरकार करेगी, जिससे प्रवासियों को किसी तरह की भागदौड़ न करनी पड़े।

    विकल्प नहीं चुना तो सख्त कार्रवाई

    DHS ने साफ चेतावनी दी है कि जो अवैध प्रवासी इस योजना का लाभ नहीं लेंगे, उन्हें गिरफ्तार कर निर्वासित किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में अमेरिका में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में चल रहे सख्त आव्रजन अभियान का हिस्सा है।

    निर्वासन खर्च में 70% तक कटौती का दावा

    विभाग का दावा है कि सेल्फ-डिपोर्टेशन से निर्वासन की लागत में करीब 70 प्रतिशत तक कमी आएगी। मई 2025 तक एक अवैध प्रवासी को गिरफ्तार करने, हिरासत में रखने और निर्वासित करने की औसत लागत 17,121 डॉलर आ रही थी।

    सीमित समय का मौका

    गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने इसे सीमित समय का अवसर बताते हुए कहा कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे बचाने के लिए यह प्रोत्साहन बढ़ाया गया है। उन्होंने अवैध प्रवासियों से अपील की कि वे इस मौके का लाभ उठाएं।

    2026 में और सख्ती की तैयारी

    DHS के मुताबिक जनवरी 2025 से अब तक करीब 19 लाख अवैध प्रवासी स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि 2026 में और सख्त आव्रजन अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत नई फंडिंग, अधिकारियों की भर्ती और हिरासत क्षमता बढ़ाने की योजना है।

  • पूर्व विधायक के पोते पर जूनियर डॉक्टरों का हमला शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में हंगामा

    पूर्व विधायक के पोते पर जूनियर डॉक्टरों का हमला शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में हंगामा


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के बाहर चाय की दुकान पर पूर्व विधायक ओम प्रकाश खटीक के पोते देबू खटीक और उनके साथ भाजपा नेता प्रशांत राठौर और कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष के बेटे नलिन पंडित पर जूनियर डॉक्टरों ने हमला कर दिया। यह घटना तब हुई जब ये तीनों युवक चाय पीने पहुंचे थे और जूनियर डॉक्टरों के साथ उनकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी।

    पुलिस के अनुसारविवाद की शुरुआत तब हुई जब जूनियर डॉक्टर अपनी एप्रेन एक कुर्सी पर रखकर चाय पी रहे थे। युवकों ने एप्रेन हटाने के लिए कहालेकिन जब डॉक्टरों ने ऐसा करने से मना कियातो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। इसके बादजूनियर डॉक्टरों ने मिलकर युवकों पर हमला कर दिया।

    युवक अपनी जान बचाने के लिए वहां से कार में भागेलेकिन जूनियर डॉक्टरों ने उनका पीछा किया और कार पर पथराव कर दिया। इस हमले में कार का कांच टूट गया और गेट भी डेमेज हो गए। पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है।

    घटना के बादजूनियर डॉक्टरों का एक दल कोतवाली थाने पहुंचाजहां उन्होंने अपनी ओर से बयान दिया कि युवकों ने पहले कुछ डॉक्टरों से मारपीट की थी। पुलिस ने पूछा कि अगर वे घायल थे तो वे थाने क्यों नहीं आएलेकिन इस पर जूनियर डॉक्टर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई जो पुलिस की मध्यस्थता से अधिक बढ़ नहीं पाई।

    टीआई कृपाल सिंह राठौड़ ने डॉक्टरों से समझाइश देने की कोशिश की और कहा कि इस तरह के बेवजह के झगड़े ठीक नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो पुलिस एफआईआर भी दर्ज कर सकती है। इस पर जूनियर डॉक्टरों ने कड़ी आवाज में प्रतिक्रिया दी कि क्रिया की प्रतिक्रिया तो होगीचाहे फिर कुछ भी हो। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों को सुरक्षा के लिए कोतवाली में बिठा लिया। इस घटना से मेडिकल कॉलेज परिसर में तनाव का माहौल बन गया हैऔर पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

  • उज्जैन स्टेशन पर यात्री को आया हार्ट अटैक, टीटीई ने दिया CPR; स्ट्रेचर न मिलने पर ट्रॉली से पहुंचाया गया अस्पताल

    उज्जैन स्टेशन पर यात्री को आया हार्ट अटैक, टीटीई ने दिया CPR; स्ट्रेचर न मिलने पर ट्रॉली से पहुंचाया गया अस्पताल


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन रेलवे स्टेशन पर रविवार शाम एक दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई जिसने रेलवे स्टेशनों पर आपात चिकित्सा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। ट्रेन में चढ़ते समय एक यात्री को अचानक दिल का दौरा पड़ गया। मौके पर मौजूद टिकट निरीक्षक ने तत्काल CPR देकर जान बचाने का प्रयास किया लेकिन समय पर चिकित्सा सुविधा और जरूरी संसाधन उपलब्ध न होने के कारण यात्री की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।यह घटना 21 दिसंबर की शाम करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है। उज्जैन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 18233 खड़ी थी। इसी दौरान संजू रजवाड़े नामक यात्री कोच A1 के पास से जनरल डिब्बे की ओर दौड़ते हुए ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही वह ट्रेन में चढ़ने के करीब पहुंचा अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह प्लेटफॉर्म पर गिर पड़ा।

    प्लेटफॉर्म पर मची अफरा-तफरी
    यात्री के गिरते ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद अन्य यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच मौके पर मौजूद इंदौर में पदस्थ मुख्य टिकट निरीक्षक कृपाशंकर पटेल ने बिना समय गंवाए यात्री की मदद शुरू की। उन्होंने तुरंत CPR देना शुरू किया जिससे कुछ देर बाद यात्री की पल्स में हल्का सुधार देखा गया। यात्रियों का कहना है कि अगर यह त्वरित प्रतिक्रिया नहीं होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

    डॉक्टर और स्ट्रेचर नहीं मिले समय पर

    CPR के बाद यात्री को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता थी। रेलवे अधिकारियों ने सीएमआई कंट्रोल रतलाम को सूचना देकर स्टेशन पर डॉक्टर भेजने का अनुरोध किया। हालांकि डॉक्टर समय पर स्टेशन नहीं पहुंच सका। इसी बीच एक और बड़ी समस्या सामने आई-प्लेटफॉर्म पर मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था।स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी। यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने काफी देर तक स्ट्रेचर का इंतजार किया लेकिन जब कोई व्यवस्था नहीं हो सकी तो उन्होंने खुद निर्णय लिया कि मरीज को और देर तक प्लेटफॉर्म पर रखना खतरे से खाली नहीं है।

    ट्रॉली से पहुंचाया गया अस्पताल

    मजबूरी में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने स्टेशन पर सामान ढोने में इस्तेमाल होने वाली लोहे की ट्रॉली का सहारा लिया। उसी ट्रॉली पर संजू रजवाड़े को लिटाकर स्टेशन परिसर से बाहर ले जाया गया और वहां से एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया लेकिन अत्यधिक समय बीत जाने और दिल का दौरा गंभीर होने के कारण यात्री की जान नहीं बचाई जा सकी।

    वीडियो वायरल उठे सवाल

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे की आपात व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि उज्जैन जैसे बड़े और व्यस्त रेलवे स्टेशन पर अगर समय पर डॉक्टर और स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हैं तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
    लोगों का यह भी कहना है कि यदि मौके पर मौजूद टिकट निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों ने तत्परता नहीं दिखाई होती तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।

    प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

    फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि यह घटना सार्वजनिक स्थानों खासकर रेलवे स्टेशनों पर त्वरित चिकित्सा सहायता प्रशिक्षित स्टाफ और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है।यह हादसा बताता है कि आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए रेलवे को अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करना होगा।