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  • इंदौर में 23 दिसंबर को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची ऑनलाइन देख सकेंगे अपना नाम; त्रुटि पर शिकायत का मौका

    इंदौर में 23 दिसंबर को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची ऑनलाइन देख सकेंगे अपना नाम; त्रुटि पर शिकायत का मौका


    इंदौर। इंदौर जिले में आगामी 23 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। यह कदम विशेष गहन पुनरीक्षण एसआइआर प्रक्रिया के तहत उठाया जा रहा है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करना है। इस सूची में इंदौर जिले के सभी मतदाता अपना नाम देख सकेंगे। यदि किसी का नाम सूची से कट गया है या उसमें कोई त्रुटि है तो वे उसे सुधारने के लिए शिकायत दर्ज करवा सकेंगे।

    इस प्रक्रिया के तहत जिले के सभी 2625 बूथों पर मतदाता सूची देखी जा सकेगी। इसके अलावा ऑनलाइन भी मतदाता अपनी जानकारी जांच सकते हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मतदाता सूची में शामिल सभी मतदाताओं के अलावा अनुपस्थित स्थानांतरित और मृतक मतदाताओं की जानकारी भी उपलब्ध होगी।

    नाम कटने या त्रुटि पर शिकायत की प्रक्रिया

    ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सभी बूथों पर बूथ लेवल आफिसर बीएओ दावे और आपत्तियों की सुनवाई करेंगे। यह प्रक्रिया 22 जनवरी तक चलेगी। जिन मतदाताओं का नाम सूची से हट गया है वे अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इआरओ और सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एइआरओ दस्तावेजों की जांच करेंगे और यदि आवश्यकता पड़ी तो संबंधित मतदाता के नाम को सूची में वापस जोड़ा जाएगा।

    राजनीतिक दलों के साथ बैठक

    अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पंवार ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की बैठक भी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा सूची को सभी मतदान केंद्रों पर चस्पा किया जाएगा और संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजकर जानकारी दी जाएगी।

    मैपिंग से बाहर रहने वाले मतदाता

    जिले में कुल 24 लाख 20 हजार 170 मतदाता हैं। इनमें से 1.33 लाख मतदाताओं की मैपिंग 2003 की सूची से नहीं हो पाई है। ऐसे मतदाताओं को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित 11 प्रकार के दस्तावेज दिखाने होंगे ताकि उनकी पहचान प्रमाणित हो सके। इन मतदाताओं को एक सप्ताह का समय दिया जाएगा और सात दिन बाद उनकी सुनवाई शुरू की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी मतदाता की जानकारी सही और अपडेटेड हो ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की त्रुटि या धोखाधड़ी की संभावना न रहे।

  • मध्य प्रदेश विधानसभा होगी पेपरलेस: दिल्ली से आए विशेषज्ञ विधायकों को देंगे ऑनलाइन कार्यवाही की ट्रेनिंग

    मध्य प्रदेश विधानसभा होगी पेपरलेस: दिल्ली से आए विशेषज्ञ विधायकों को देंगे ऑनलाइन कार्यवाही की ट्रेनिंग


    मध्य प्रदेश। विधानसभा को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य में विधानसभा की कार्यवाही को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी क्रम में मंगलवार को भोपाल में विधायकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें उन्हें ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से विधानसभा कार्यवाही संचालित करने की जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन NeVA परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है। विधानसभा सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह सत्र मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधानसभा परिसर स्थित मानसरोवर सभागार में होगा। इसमें प्रदेश के विधायक भाग लेंगे और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से जुड़े विभिन्न संसदीय कार्यों की प्रक्रिया समझाई जाएगी।

    दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम

    इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली से विशेषज्ञों की एक टीम भोपाल पहुंची है। ये विशेषज्ञ विधायकों को बताएंगे कि किस प्रकार मोबाइल टैबलेट, लैपटॉप या अन्य डिजिटल उपकरणों के माध्यम से विधानसभा की कार्यवाही में भाग लिया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान लाइव डेमो के जरिए डिजिटल सिस्टम का उपयोग भी दिखाया जाएगा, ताकि विधायकों को व्यवहारिक अनुभव मिल सके।विशेषज्ञों द्वारा विधायकों को यह सिखाया जाएगा कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रश्न कैसे दर्ज करें, विधेयकों का अध्ययन कैसे करें और सदन की कार्यसूची, रिपोर्ट एवं अन्य दस्तावेजों तक तुरंत कैसे पहुंचें।

    कागज से मिलेगी छुटकारा

    NeVA परियोजना के लागू होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही में कागजों का इस्तेमाल लगभग समाप्त हो जाएगा। प्रश्नोत्तर काल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, विधेयकों की प्रतियां, कार्यसूची, मतदान प्रक्रिया और उपस्थिति से संबंधित सभी जानकारियां डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि दस्तावेजों के रखरखाव और रिकॉर्ड प्रबंधन में भी आसानी होगी।विधानसभा सचिवालय का मानना है कि डिजिटल कार्यप्रणाली से सदन की पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यवाही अधिक सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।

    क्या है NeVA प्लेटफॉर्म

    NeVA यानी नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है, जिसके माध्यम से विधानसभा की पूरी कार्यवाही रियल-टाइम में दर्ज की जाती है। इस प्लेटफॉर्म पर विधायकों को व्यक्तिगत लॉगिन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे सदन से जुड़े सभी दस्तावेज, प्रस्ताव और रिपोर्ट तुरंत देख सकते हैं।यह परियोजना वन नेशन, वन एप्लिकेशन की अवधारणा पर आधारित है, जिसका उद्देश्य देश की संसद और सभी राज्य विधानसभाओं को एक समान डिजिटल प्रणाली से जोड़ना है।

    चरणबद्ध तरीके से होगा लागू
    विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण के बाद चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस कार्यप्रणाली को पूरी तरह लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में तकनीकी सहायता टीम भी तैनात रहेगी, ताकि विधायकों को किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी न हो।अधिकारियों का कहना है कि विधायकों की सुविधा और कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए डिजिटल सिस्टम को धीरे-धीरे पूरी तरह लागू किया जाएगा।

    क्यों अहम है यह कदम

    विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे विधानसभा की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। कागजों की खपत कम होने से लागत में भी कमी आएगी।मध्य प्रदेश विधानसभा का यह डिजिटल बदलाव आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है और देश की विधायी प्रक्रिया को आधुनिक स्वरूप देने में सहायक होगा।

  • इंडिगो की उड़ानें फिर से शुरू होने से भोपाल में हवाई यात्री बढ़े, टूटा पुराना रिकॉर्ड

    इंडिगो की उड़ानें फिर से शुरू होने से भोपाल में हवाई यात्री बढ़े, टूटा पुराना रिकॉर्ड


    भोपाल । इस माह इंडिगो की उड़ानों के अचानक रद्द होने के कारण भोपाल में हवाई यातायात पर गहरा असर पड़ा था। यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था और उन्होंने जमकर हंगामा भी किया था। हालांकि अब इंडिगो की सभी उड़ानें फिर से बहाल हो चुकी हैं और इसका सीधा असर यात्रियों की संख्या पर देखने को मिल रहा है। रविवार को भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर एक नया रिकॉर्ड बना जब एक ही दिन में 6000 से ज्यादा यात्रियों ने हवाई सफर किया।
    यह आंकड़ा एयरपोर्ट के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इंडिगो की उड़ानों के बहाल होने से यात्रियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इस महीने जब इंडिगो की उड़ानें रद्द हो रही थीं तब रोजाना के यात्री केवल 3000 के करीब थे लेकिन अब यह संख्या दोगुनी होकर 6000 के पार पहुँच गई है।

    भोपाल में अब हवाई यात्रा केवल उच्च वर्ग के नहीं बल्कि मध्यम वर्ग के लोगों में भी सामान्य हो गई है। पहले जहां लोग मुख्यत ट्रेन से यात्रा करते थे अब विमान में सफर करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। दरअसल तीन से चार साल पहले तक भोपाल से विमान यात्रा करने वाले यात्री कम हुआ करते थे लेकिन अब लोग बढ़े हुए किराए के बावजूद भी हवाई यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    भोपाल से दिल्ली तक की ट्रेन कनेक्टिविटी बहुत सरल और सुलभ है फिर भी हवाई यात्रा की ओर रुझान बढ़ा है। भोपाल से दिल्ली तक की पांच नियमित और एक साप्ताहिक उड़ानें उपलब्ध हैं जिनमें 90 प्रतिशत तक पैसेंजर लोड देखा जा रहा है। यह कनेक्टिविटी अब यात्रियों की प्राथमिकता बन गई है जो यात्री संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण है।

  • राजस्थान के जालोर में पंचायत का फरमान: 15 गांवों की बहुएं और लड़कियां नहीं रखेंगी स्मार्टफोन, सिर्फ कीपैड मोबाइल की अनुमति

    राजस्थान के जालोर में पंचायत का फरमान: 15 गांवों की बहुएं और लड़कियां नहीं रखेंगी स्मार्टफोन, सिर्फ कीपैड मोबाइल की अनुमति


    नई दिल्ली।राजस्थान के जालोर जिले से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परंपरा, तकनीक और महिलाओं की आज़ादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जिले की एक ग्राम पंचायत ने अपने क्षेत्र में आने वाले 15 गांवों की महिलाओं और लड़कियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। पंचायत के इस निर्णय के अनुसार अब बहुएं और बेटियां कैमरा फोन या स्मार्टफोन का उपयोग नहीं कर सकेंगी और केवल साधारण कीपैड मोबाइल ही रख पाएंगी।यह फैसला जालोर जिले के गाजीपुर गांव में आयोजित चौधरी समुदाय की एक बड़ी पंचायत बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता समाज के वरिष्ठ सदस्य सुजनाराम चौधरी ने की। पंचायत में मौजूद पंचों और समाज के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया, जिसे आगामी 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस से लागू किया जाएगा।

    सामाजिक कार्यक्रमों में मोबाइल पूरी तरह प्रतिबंधित

    पंचायत के फैसले के अनुसार महिलाओं और लड़कियों को न केवल स्मार्टफोन से दूर रहना होगा, बल्कि उन्हें किसी भी सामाजिक आयोजन, शादी-ब्याह, पारिवारिक समारोह या यहां तक कि पड़ोस के घर जाते समय भी मोबाइल फोन साथ ले जाने की अनुमति नहीं होगी। पंचायत का मानना है कि इससे सामाजिक मर्यादाओं का पालन होगा और पारिवारिक माहौल बेहतर बनेगा।

    पढ़ाई कर रही छात्राओं के लिए अलग नियम


    हालांकि पंचायत ने स्कूली छात्राओं के लिए कुछ शर्तों के साथ छूट भी तय की है। जो लड़कियां पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करती हैं, वे केवल अपने घर में ही फोन चला सकेंगी। स्कूल, ट्यूशन, सामाजिक कार्यक्रम या किसी रिश्तेदार के घर जाते समय मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह वर्जित रहेगा। पंचायत के पंच हिम्मतराम ने गांव में मुनादी कराकर इस निर्णय की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी है।

    आंखों की सेहत और बच्चों का हवाला

    पंचायत के इस फैसले को लेकर जब सवाल उठे, तो पंचायत अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने इसके पीछे तर्क पेश किया। उन्होंने कहा कि गांव की महिलाएं अक्सर घरेलू काम के दौरान बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल फोन दे देती हैं, जिससे बच्चों की आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, छोटे बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ रही है, जो भविष्य के लिए खतरा बन सकती है।
    उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। पंचायत का दावा है कि मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से पारिवारिक संवाद कम हो रहा है और सामाजिक मूल्यों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

    15 गांवों में होगा लागू

    यह निर्णय केवल गाजीपुर गांव तक सीमित नहीं है। पंचायत के अंतर्गत आने वाली 14 पट्टियों के 15 गांवों में इसे सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है। पंचायत ने साफ किया है कि सभी परिवारों को इस नियम का पालन करना अनिवार्य होगा और सामुदायिक स्तर पर इसकी निगरानी भी की जाएगी।

    उठने लगे सवाल

    हालांकि पंचायत के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया और सामाजिक संगठनों में सवाल भी उठने लगे हैं। कई लोग इसे महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे परंपरा और सामाजिक अनुशासन का मामला बता रहे हैं। फिलहाल पंचायत अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है और 26 जनवरी से इसे लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

  • क्रिसमस 2025: भारत की इन जगहों पर मनाएं त्योहार, जश्न बन जाएगा यादगार

    क्रिसमस 2025: भारत की इन जगहों पर मनाएं त्योहार, जश्न बन जाएगा यादगार


    नई दिल्ली/हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला क्रिसमस ईसाई समुदाय के लिए सबसे पवित्र और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह दिन ईसा मसीह के जन्म का प्रतीक है, जिसे पूरी दुनिया में रोशनी, सजावट, प्रार्थना और खुशियों के साथ मनाया जाता है। भारत में भी क्रिसमस का रंग देखते ही बनता है, खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों में, जहां यह पर्व पूरे उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। अगर आप इस क्रिसमस घूमने और कुछ अलग अनुभव करने का प्लान बना रहे हैं, तो उत्तर-पूर्व भारत की ये जगहें आपके सफर को खास बना सकती हैं।

    शिलांग: रोशनी और संगीत से सजा क्रिसमस शहर
    मेघालय की राजधानी शिलांग को ‘ईस्ट का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है और क्रिसमस के दौरान यह शहर किसी परी लोक से कम नहीं लगता। यहां के चर्च रंग-बिरंगी लाइट्स से सज जाते हैं और खास प्रार्थनाओं का आयोजन होता है। क्रिसमस ट्री, कैरोल सिंगिंग और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम शहर को जीवंत बना देते हैं। स्थानीय संगीत और नृत्य यहां के जश्न को और खास बना देते हैं।

    मेचुका: बर्फीली वादियों में सादगी भरा जश्न

    अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले में स्थित मेचुका उन यात्रियों के लिए है, जो शांति और प्रकृति के करीब रहकर क्रिसमस मनाना चाहते हैं। बर्फ से ढके पहाड़, साफ नदियां और शांत वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं। क्रिसमस के समय यहां ठंड काफी होती है, लेकिन यही ठंड इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देती है।

    असम: परंपरा, प्रकृति और आस्था का संगम

    असम अपने चाय बागानों, वन्यजीव अभयारण्यों और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। क्रिसमस पर यहां के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क, माजुली द्वीप और ऐतिहासिक शहरों की सैर के साथ क्रिसमस मनाना एक अनोखा अनुभव देता है।

    तवांग: शांति और आध्यात्म के बीच क्रिसमस

    अरुणाचल प्रदेश का तवांग अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बौद्ध संस्कृति के लिए मशहूर है। एशिया का दूसरा सबसे बड़ा तवांग मठ यहां स्थित है। क्रिसमस के दौरान बर्फ से ढका तवांग और उसका शांत माहौल सुकून और यादगार अनुभव देता है।

    गंगटोक: पहाड़ों में जश्न का अनोखा रंग

    सिक्किम की राजधानी गंगटोक क्रिसमस पर बेहद खूबसूरत नजर आती है। यहां के चर्चों में खास आयोजन होते हैं और शहर की सजी-धजी गलियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। त्सोमगो झील और रुमटेक मठ की सैर इस यात्रा को और खास बना देती है।उत्तर-पूर्व भारत की ये जगहें न सिर्फ क्रिसमस के जश्न को खास बनाती हैं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और शांति का ऐसा अनुभव देती हैं, जो लंबे समय तक याद रहता है।

  • बिना खर्च और बिना केमिकल, घर पर पाएँ खूबसूरत और दमकती त्वचा

    बिना खर्च और बिना केमिकल, घर पर पाएँ खूबसूरत और दमकती त्वचा

    नई दिल्ली
    ।महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के दौर में भी पुराने देसी नुस्खे अपनी जगह बनाए हुए हैं। बलिया में आज भी एक खास घरेलू उपाय चर्चा में है, जो त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बनाने में असरदार साबित हो रहा है। सरसों का उबटन सदियों से त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका रहा है। यह नुस्खा न केवल सस्ता है, बल्कि ठंड के मौसम में डेड स्किन हटाकर त्वचा को पोषण और नमी भी देता है।

    देसी नुस्खों की वापसी और महंगे प्रोडक्ट्स की तुलना

    आज बाजार में तरह-तरह के महंगे लोशन और क्रीम मौजूद हैं, लेकिन आम लोगों के लिए उनकी कीमत बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में पुराने समय से चले आ रहे देसी नुस्खे एक बार फिर भरोसे का विकल्प बनकर सामने आए हैं। बलिया के वरिष्ठ नागरिक आसिफ जैदी बताते हैं कि उनके बचपन में दादी और नानी के घरेलू नुस्खों में सरसों के उबटन का खास महत्व था। लोग इसे पूरे शरीर पर लगाकर धूप में बैठते और धीरे-धीरे मालिश करते थे, जिससे त्वचा की गहराई से सफाई होती थी।

    सरसों का उबटन: सदियों पुरानी परंपरा

    सरसों का उबटन कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। पुराने जमाने में जब बाजारू साबुन और क्रीम नहीं होती थीं, तब यही उबटन त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता था। जब यह उबटन शरीर पर सूखता है, तो डेड स्किन को अपने साथ हटाता है और त्वचा को साफ, कोमल और चमकदार बनाता है। खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते, जो इसे आधुनिक केमिकल युक्त उत्पादों से अलग बनाता है।

    घर पर ऐसे तैयार करें सरसों का उबटन

    सरसों के दानों को धीमी आंच पर हल्का भूनकर हल्दी के साथ पीस लें। तैयार पाउडर में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे पूरे शरीर पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें। जब उबटन सूख जाए, तो साफ पानी से नहा लें। इसके नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक ग्लो आता है, टैनिंग की समस्या कम होती है और त्वचा भीतर से मजबूत बनती है।

    स्वास्थ्य और रक्त संचार के लिए भी फायदेमंद

    सरसों का उबटन सिर्फ त्वचा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। मालिश से रक्त संचार बेहतर होता है, थकान दूर होती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। एड़ियों की फटने की समस्या में भी राहत मिलती है। एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे ठंड के मौसम में विशेष रूप से लाभकारी बनाते हैं।

  • दिल्ली में AAP के प्रदूषण वाले मजाक पर बीजेपी ने कसा तंजकहा जनता के दर्द से खेलना ठीक नहीं

    दिल्ली में AAP के प्रदूषण वाले मजाक पर बीजेपी ने कसा तंजकहा जनता के दर्द से खेलना ठीक नहीं


    नई दिल्ली । दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सियासत गरमा गई है आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के बयान पर दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कड़ा ऐतराज जताया है सचदेवा ने कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर मसले पर सुपरमैनस्पाइडरमैनबैटमैन और सैंटा क्लोज की बेहोशी का जिक्र कर हास्य व्यंग्य करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह दिल्ली की जनता की तकलीफ का मजाक उड़ाने जैसा है । वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आज दिल्लीवासी जिस प्रदूषण का दंश झेल रहे हैंवह अरविंद केजरीवाल की दिल्ली और पंजाब सरकारों की लापरवाही का सीधा परिणाम है उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद आम आदमी पार्टी ने प्रदूषण रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए ।

    सौरभ भारद्वाज के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल पर सवाल

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने सौरभ भारद्वाज के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थेतब भी उनकी सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया सचदेवा के मुताबिक दस साल में प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ और उसी दौरान दिल्ली सरकार के अस्पतालों में नकली दवाएं बांटे जाने के मामले सामने आए । वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी जिन मोहल्ला क्लीनिकों को अपनी उपलब्धि बताती रहीवे भी बाद में घोटालों के केंद्र बनकर सामने आए उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने केवल प्रचार पर ध्यान दिया ।

    गंभीरता से काम लें आप नेता

    बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि यह खेदपूर्ण है कि जब अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज सत्ता में थेतब उन्होंने प्रदूषण के कारकों को गंभीरता से नहीं संभाला अब विपक्ष में आने के बाद वही नेता हास्यास्पद बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि सत्ता में रहते काम न करके और अब प्रदूषण पर मजाकिया बयान देकर दोनों नेता जनता के बीच अपनी छवि खो रहे हैं । उन्होंने सलाह दी कि बेहतर होगा दोनों नेता गंभीरता से काम लें और प्रदूषण पर हास्य व्यंग्य की नौटंकी करने के बजाय दिल्लीवासियों और सरकार को प्रदूषण की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने दें ।

  • T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्यों नहीं हुआ रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान, BCCI सचिव ने बताई इसकी वजह

    T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्यों नहीं हुआ रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान, BCCI सचिव ने बताई इसकी वजह


    नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी गई है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया इस टूर्नामेंट में खेलेगी। सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल को टी20 वर्ल्ड कप के स्क्वॉड से बाहर कर दिया गया है। 20 दिसंबर को बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में टी20 वर्ल्ड कप 2026 के साथ-साथ न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 टी20 मैचों की सीरीज के लिए भी टीम इंडिया की घोषणा की।
    टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए नहीं हुआ रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान
    टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया का ऐलान तो हो चुका है लेकिन सेलेक्टर्स ने इस अहम ICC टूर्नामेंट के लिए रिजर्व प्लेयर्स की घोषणा नहीं की है। जब आईसीसी इवेंट के लिए टीम चुनी जाती है तो स्टैंडबाय या रिजर्व खिलाड़ी भी उसमें होते हैं। अब कोई खिलाड़ी टूर्नामेंट के दौरान चोटिल होता है तो बैकअप खिलाड़ियों में से उनकी जगह चुना जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि इस बार क्यों रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान नहीं किया गया है।

    इस वजह से नहीं हुआ प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान
    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि टी20 वर्ल्ड कप के लिए स्टैंडबाय खिलाड़ी क्यों नहीं चुने गए। उन्होंने कहा कि क्योंकि यह टूर्नामेंट भारत में खेला जाएगा, इसलिए वे किसी खास स्टैंडबाय खिलाड़ी का नाम नहीं बताना चाहते हैं। भारत में टूर्नामेंट है तो जरूरत पड़ने पर किसी भी खिलाड़ी को टीम में कभी भी शामिल किया जा सकता है। विदेश में होने पर खिलाड़ियों से यहां से भेजने में काफी समय लग जाता है। इसी वजह से इस बार रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान नहीं किया गया है।

    पिछले टी20 वर्ल्ड कप में कौन था स्टैंडबाय प्लेयर?
    आपको बता दें कि पिछले टी20 वर्ल्ड कप में शुभमन गिल के साथ रिंकू सिंह, खलील अहमद और आवेश खान स्टैंडबाय खिलाड़ी के रूप में मौजूद थे। इसी साल खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी में यशस्वी जयसवाल, मोहम्मद सिराज और शिवम दुबे स्टैंडबाय के रूप में चुने गए थे। लेकिन अगले साल खेले जाने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए किसी भी स्टैंड बाय या रिजर्व प्लेयर का चयन नहीं किया गया है।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया का स्क्वॉड
    सूर्यकुमार यादवकप्तान, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसनविकेटकीपर, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेलउपकप्तान, रिंकू सिंह, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, वॉशिंगटन सुंदर और ईशान किशनविकेटकीपर

  • स्मृति मंधाना ने रचा नया इतिहासT20I में 4000 रन पूरे करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

    स्मृति मंधाना ने रचा नया इतिहासT20I में 4000 रन पूरे करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं


    नई दिल्ली । वुमेंस क्रिकेट में भारत की स्टार ओपनर स्मृति मंधाना ने एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। श्रीलंका के खिलाफ खेले गए पहले महिला T20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भले ही उनकी पारी बड़ी नहीं रहीलेकिन इस मैच ने उन्हें भारतीय क्रिकेट इतिहास में अमर कर दिया। विशाखापट्टनम में खेले गए इस मुकाबले में स्मृति मंधाना ने T20I क्रिकेट में 4000 रन पूरे कर एक ऐसा रिकॉर्ड बना दियाजो इससे पहले कोई भी भारतीय महिला क्रिकेटर हासिल नहीं कर पाई थी।

    वुमेंस वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीतने के बाद भारतीय टीम पहली बार मैदान पर उतरी और कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टीम इंडिया ने श्रीलंका को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने अपने विजयी अभियान को आगे बढ़ायालेकिन मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण स्मृति मंधाना का ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा।

    श्रीलंका द्वारा दिए गए 122 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत कुछ खास नहीं रही। युवा ओपनर शेफाली वर्मा दूसरे ही ओवर में 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद स्मृति मंधाना ने एक छोर संभाला और 25 रन की संयमित पारी खेली। इस दौरान जैसे ही उन्होंने आवश्यक रन पूरे किएवह T20I क्रिकेट में 4000 रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला बल्लेबाज बन गईं।

    अब स्मृति मंधाना के नाम T20I क्रिकेट में कुल 4007 रन दर्ज हैंजो उन्होंने 154 मैचों की 148 पारियों में बनाए हैं। उनके T20I करियर में 1 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैंजो उनकी निरंतरता और क्लास को दर्शाता है। खास बात यह है कि मंधाना यह उपलब्धि हासिल करने वाली ओवरऑल दूसरी महिला क्रिकेटर हैं। इस सूची में शीर्ष पर न्यूजीलैंड की दिग्गज बल्लेबाज सूजी बेट्स हैंजिनके नाम 4716 रन का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है।

    भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर भी इस फेहरिस्त में पीछे नहीं हैं। वह 3669 रनों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं और लगातार इस रिकॉर्ड के करीब पहुंच रही हैं। इससे साफ है कि भारतीय महिला क्रिकेट मौजूदा दौर में किस ऊंचाई पर पहुंच चुका है।

    अगर मैच की बात करें तो टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंकाई टीम 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 121 रन ही बना सकी। ओपनर विश्मी गुणरत्ने 39 रन के साथ टीम की सबसे सफल बल्लेबाज रहींजबकि अन्य कोई भी बल्लेबाज 25 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका। श्रीलंका की पारी के दौरान तीन रनआउट हुएवहीं भारत की ओर से क्रांति गौड़दीप्ति शर्मा और श्री चरणी ने एक-एक विकेट झटका।

    122 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को दूसरा झटका 9वें ओवर में लगाजब स्मृति मंधाना 67 के स्कोर पर आउट हुईं। इसके बाद नंबर तीन पर आई जेमिमा रोड्रिग्स ने मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। जेमिमा ने शानदार नाबाद 69 रन की पारी खेली और भारत को 8 विकेट से जीत दिलाई। टीम इंडिया ने यह लक्ष्य 32 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ही भारत ने सीरीज की शुरुआत शानदार अंदाज में की और स्मृति मंधाना का ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस मैच को हमेशा के लिए यादगार बना गया।

  • भाजपा की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे की टेंशनविपक्ष और सहयोगियों पर होगा असर

    भाजपा की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे की टेंशनविपक्ष और सहयोगियों पर होगा असर


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के स्थानिक निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भा,ज,पा,शिवसेना और एनसीपी अजित पवार गुट के गठबंधन महायुति ने भारी जीत दर्ज की है। भाजपा ने 129 सीटों के साथ सबसे ज्यादा अध्यक्ष पद जीतेजबकि शिवसेना ने 51 और एनसीपी अजित पवार ने 35 अध्यक्ष पदों पर जीत हासिल की। कुल 288 निकायों में से महायुति ने 215 निकायों में जीत हासिल कीजिससे भाजपा का इस चुनाव में वर्चस्व साफ तौर पर दिखा।

    इन परिणामों के बाद भाजपा के लिए यह एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा ने इस चुनाव में अकेले प्रचार कियाजिससे पार्टी को यह जानने का मौका मिला कि वह अपनी शत-प्रतिशत भाजपा के लक्ष्य की दिशा में कितनी दूर तक बढ़ रही है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि इन नतीजों से कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगाखासकर 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव में।

    हालांकिइस जीत के साथ भाजपा के सहयोगी दलों के लिए चिंता भी बढ़ सकती है। भाजपा की बेजोड़ जीत यह संकेत देती है कि पार्टी अब अपनी राजनीतिक राह पर अकेले बढ़ सकती है और इसे अपने सहयोगियों की कम जरूरत हो सकती है। इस परिणाम के बाद कुछ समय पहले से ही कमजोर हो रही महाविकास अघाड़ी गठबंधन की स्थिति और भी अस्थिर हो सकती हैखासकर तब जब भाजपा अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे पर विचार करेगी।

    इसी तरहविपक्ष के लिए भी यह चुनाव परिणाम चिंता का कारण बन सकते हैं। विधानसभा चुनाव में पहले ही झटके झेल चुका विपक्ष इस बार भी पिछड़ता दिख रहा हैखासकर जब बीएमसी बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव नजदीक हैं। शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी दोनों ही अपनी सीटों के दोहरे आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं। यह परिणाम विपक्ष के लिए और भी समस्याएं पैदा कर सकते हैंक्योंकि फूट के कारण पहले से ही कमजोर पड़ चुकी पार्टियों को अब इस पर काबू पाना और भी मुश्किल हो सकता है। उद्धव ठाकरे गुट को लेकर भी असमंजस बना हुआ हैक्योंकि शिवसेना यूबीटी की स्थिति पहले से ही कमजोर हो चुकी है

    शिवसेना के 3 दशकों के प्रभाव को बनाए रखना अब चुनौतीपूर्ण हो सकता हैखासकर जब भाजपा की जीत से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को संगठन और सरकार के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस चुनाव में सकारात्मक विकास एजेंडे पर प्रचार किया और कभी किसी राजनीतिक नेता या पार्टी की आलोचना नहीं की। फडणवीस का मानना है कि यह पहली बार है जब पार्टी ने शत-प्रतिशत सकारात्मक वोट मांगे थेऔर उन्हें जनता का शत-प्रतिशत समर्थन मिला है। इस चुनाव परिणाम के बाद भाजपा अब राज्य की राजनीति में और भी दबदबा बना सकती हैलेकिन इसका असर महाविकास अघाड़ी गठबंधन और विपक्षी दलों पर भी होगा।