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  • डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजहें और बचाव के उपाय

    डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजहें और बचाव के उपाय


    नई दिल्ली
    /भारतीय रुपया इन दिनों गंभीर दबाव में है और डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 91 के पार चला गया जिसने सरकार रिजर्व बैंक निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं बल्कि घरेलू और वैश्विक कारकों के संयुक्त असर से हुई है। सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली माना जा रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक FII भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 18 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपये की मांग कमजोर पड़ी है जिसका सीधा असर मुद्रा विनिमय दर पर दिख रहा है।

    दूसरा अहम कारण डॉलर की वैश्विक मजबूती है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और मजबूत आर्थिक संकेतों के चलते डॉलर दुनियाभर की मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है तो वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारत जैसे देशों की मुद्रा पर पड़ता है।भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर कुछ उत्पादों में ऊंची टैरिफ दरें लगाए जाने से भारतीय सामानों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा घटी है। इससे निर्यात से होने वाली डॉलर की आमद सीमित हुई है और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ी है।

    रुपये की गिरावट का असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ता है। कमजोर रुपये के कारण कच्चा तेल गैस इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और महंगाई में दोबारा तेजी आने का खतरा रहता है जिसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है।तेल आयात भी रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इससे व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है जो मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट को थामने में भारतीय रिजर्व बैंक RBIकी भूमिका बेहद अहम है। आरबीआई जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर बेचकर और तरलता का प्रबंधन कर रुपये की तेज गिरावट को रोक सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक आमतौर पर बहुत ज्यादा हस्तक्षेप से बचता है ताकि बाजार में अस्थिरता न बढ़े।लंबी अवधि में रुपये को स्थिर रखने के लिए सिर्फ मौद्रिक हस्तक्षेप काफी नहीं होगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश FDIऔर दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना होगा। मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से डॉलर की स्थायी आमद होगी।

    निर्यात बढ़ाना भी रुपये को सहारा देने का एक अहम तरीका है। आईटी फार्मा इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र के निर्यात में मजबूती आने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ संतुलित और स्पष्ट व्यापार समझौते विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ा सकते हैं।महंगाई पर नियंत्रण भी रुपये की स्थिरता के लिए जरूरी है। अगर महंगाई काबू में रहती है तो आरबीआई को नीतिगत समर्थन बनाए रखने में आसानी होती है और ब्याज दरों पर दबाव कम रहता है। मध्यम से लंबी अवधि में नीतिगत सुधार निवेश अनुकूल माहौल और निर्यात को बढ़ावा देने वाली रणनीतियां रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगा सकती हैं।

  • वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर रूस की ट्रंप को सख्त चेतावनी, कहा-घातक गलती से होंगे भयावह नतीजे

    वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर रूस की ट्रंप को सख्त चेतावनी, कहा-घातक गलती से होंगे भयावह नतीजे


    नई दिल्ली/वेनेजुएला संकट एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने के बाद रूस ने खुलकर चेतावनी दी है। मॉस्को ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगाह करते हुए कहा है कि वेनेजुएला में किसी भी तरह की घातक गलती पूरे पश्चिमी गोलार्ध में अप्रत्याशित और गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। रूस ने साफ संकेत दिया है कि वह वेनेजुएला को अपना करीबी सहयोगी मानता है और इस मुद्दे पर पूरी तरह सतर्क है।

    दरअसल, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ प्रतिबंधों को और सख्त करते हुए वहां से तेल ले जाने वाले टैंकरों की आवाजाही पर पूर्ण नाकाबंदी का आदेश दिया है। ट्रंप ने इसे “टोटल एंड कंपलीट ब्लॉकेड” करार दिया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है, जिसकी अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर तेल निर्यात पर निर्भर है।अमेरिका ने इस कार्रवाई के तहत एक तेल टैंकर को जब्त भी किया है और कैरेबियन सागर में भारी नौसैनिक तैनाती की है। इस सैन्य मौजूदगी ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की आशंकाएं तेज हो गई हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम पर रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगा, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए। रूस का मानना है कि वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य या आक्रामक कार्रवाई न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि इसके असर पूरे पश्चिमी गोलार्ध में महसूस किए जाएंगे।क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बयान जारी कर कहा, हम निश्चित रूप से क्षेत्र के सभी देशों से संयम बरतने का आग्रह करते हैं, ताकि किसी भी तरह के अप्रत्याशित घटनाक्रम से बचा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि कैरेबियन सागर में अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी के चलते हालात संवेदनशील बने हुए हैं और नाकाबंदी के परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं।

    रूस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने सहयोगी और साझेदार वेनेजुएला के साथ लगातार संपर्क में है। मॉस्को लंबे समय से वेनेजुएला की सरकार का समर्थन करता रहा है और आर्थिक व राजनीतिक संकट के दौर में काराकास को सहारा देता आया है। अतीत में रूस ने वेनेजुएला की कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्र में मदद की है।वहीं, वेनेजुएला ने अमेरिकी कदम को समुद्री डकैती करार देते हुए तीखी निंदा की है। मादुरो सरकार का कहना है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है और उसकी संप्रभुता पर हमला कर रहा है। वेनेजुएला ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग भी की है।

    गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप ने दावा किया था कि वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े नौसैनिक घेराव का सामना कर रहा है। इस बयान के बाद क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की आशंकाएं और गहरा गई हैं।इसी बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस महीने की शुरुआत में एक फोन कॉल के दौरान निकोलस मादुरो को अपना समर्थन दोहराया था। रूस के इस रुख से साफ है कि वेनेजुएला को लेकर अमेरिका और रूस के बीच टकराव और गहरा सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए तनाव की स्थिति बन सकती है।

  • H-1B वीजा चाहने वाले भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका ने इंटरव्यू डेट अक्टूबर 2026 तक टाली

    H-1B वीजा चाहने वाले भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका ने इंटरव्यू डेट अक्टूबर 2026 तक टाली

    नई दिल्ली
    /अमेरिका में काम करने और अपने परिवार के साथ बसने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों के लिए एक बार फिर निराशाजनक खबर सामने आई है। H-1B और H-4 वीजा के लिए इंटरव्यू का इंतजार कर रहे भारतीय आवेदकों की राह में नई अड़चन आ गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक, इन वीजा कैटेगरी के लिए इंटरव्यू की तारीखें अब आगे बढ़ाकर अक्टूबर 2026 तक कर दी गई हैं। इससे पहले इन्हें फरवरी और मार्च 2026 तक टाल दिया गया था, लेकिन अब देरी और लंबी होती नजर आ रही है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय आवेदकों को अमेरिकी दूतावासों और कांसुलेट्स की ओर से सूचित किया गया है कि पहले से तय कई इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स को रद्द या री-शिड्यूल किया जा रहा है। डेक्कन क्रॉनिकल के साथ-साथ अमेरिकी मीडिया संस्थान द अमेरिकन बाज़ार ने भी दावा किया है कि बड़ी संख्या में वीजा अप्लीकेंट्स की इंटरव्यू डेट्स 2026 की आखिरी तिमाही तक खिसका दी गई हैं।इस लगातार हो रही देरी का असर अब सीधे आवेदकों की योजनाओं पर पड़ने लगा है। जनवरी और फरवरी 2026 में इंटरव्यू के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके कई भारतीय अपनी अपॉइंटमेंट्स कैंसिल कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि दोबारा बुकिंग करने पर शायद पहले की कोई तारीख मिल जाए। हालांकि, इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है।

    हाल के हफ्तों में अमेरिकी कांसुलेट्स ने कई आवेदकों को ईमेल और नोटिस के जरिए बताया कि दिसंबर और जनवरी के लिए निर्धारित इंटरव्यू अब फरवरी या मार्च तक टाल दिए गए हैं। कुछ मामलों में यह देरी और ज्यादा बढ़कर 2026 के अंत तक पहुंच गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा जांच प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।बताया जा रहा है कि वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दी गई है। आवेदकों के डिजिटल फुटप्रिंट की गहन जांच की जा रही है, जिसके चलते प्रोसेसिंग टाइम बढ़ गया है। इसी अतिरिक्त जांच प्रक्रिया को इंटरव्यू में देरी की मुख्य वजह माना जा रहा है।

    इस स्थिति ने खासकर उन भारतीय प्रोफेशनल्स को ज्यादा प्रभावित किया है, जो पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं और अपने परिवार से अलग रह रहे हैं। H-4 वीजा का इंतजार कर रहे उनके जीवनसाथी और बच्चे महीनों से भारत में फंसे हुए हैं। बार-बार इंटरव्यू टलने से न केवल उनकी निजी जिंदगी प्रभावित हो रही है, बल्कि उनके करियर पर भी खतरा मंडराने लगा है। इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अपॉइंटमेंट्स का एक साथ कैंसिल होना असामान्य है। द अमेरिकन बाज़ार से बातचीत में कई वकीलों ने बताया कि जिन आवेदकों के इंटरव्यू पहले 2026 की शुरुआत में तय थे, उन्हें अब सीधे अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तारीखें दी जा रही हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी वीजा सिस्टम पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जो भारतीय टैलेंट पर काफी हद तक निर्भर हैं। टेक, आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में कुशल पेशेवरों की कमी और बढ़ सकती है।फिलहाल H-1B और H-4 वीजा आवेदकों के सामने अनिश्चितता का दौर बना हुआ है। सभी की नजरें अमेरिकी प्रशासन की अगली घोषणा पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि इंटरव्यू प्रक्रिया में यह देरी अस्थायी है या आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

  • यूक्रेन युद्ध रूस पर डाल रहा भारी आर्थिक बोझ, विशेषज्ञों की चेतावनी-आने वाले साल और कठिन

    यूक्रेन युद्ध रूस पर डाल रहा भारी आर्थिक बोझ, विशेषज्ञों की चेतावनी-आने वाले साल और कठिन

    Russia Ukraine War
    नई दिल्ली/रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब अपने चौथे वर्ष में प्रवेश करने वाला है। बीते लगभग चार वर्षों में इस संघर्ष ने न केवल हजारों सैनिकों और आम नागरिकों की जान ली हैबल्कि अरबों डॉलर के बुनियादी ढांचे को भी तबाह कर दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और आर्थिक विश्लेषक रूस को आगाह कर रहे हैं कि इस युद्ध की कीमत उसे लंबे समय तक चुकानी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही युद्ध आज समाप्त हो जाएरूस को आर्थिक रूप से इससे उबरने में कई साल लग सकते हैं। विश्लेषकों के अनुसारयूक्रेन युद्ध के चलते रूस के सैन्य खर्च में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। रक्षा बजट में 30 से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि ने सरकारी वित्त पर जबरदस्त दबाव डाला है। इसके साथ ही पश्चिमी देशोंखासकर अमेरिका और यूरोपीय यूनियन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने रूस की आमदनी के प्रमुख स्रोतों-तेल और गैस-को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। ऊर्जा निर्यात से होने वाली कमाई में गिरावट ने रूस की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।

    बढ़ते खर्च और घटती आय के बीच रूसी सरकार की कर्ज पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में रूसी सरकार ने बॉन्ड जारी कर करीब 108.9 अरब रूबल का कर्ज उठाया। इसके साथ ही 2025 में अब तक कुल कर्ज जारी करने का आंकड़ा 7.9 ट्रिलियन रूबल तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि सरकार के पास बजट घाटा पाटने के लिए सीमित विकल्प रह गए हैं। रूस की एक और बड़ी चिंता उसका नेशनल वेल्थ फंड या आपातकालीन रिजर्व है। रिपोर्ट्स के मुताबिकइस रिजर्व का आधे से ज्यादा हिस्सा पहले ही खर्च हो चुका है। ऐसे में भविष्य में किसी बड़े आर्थिक झटके से निपटने की रूस की क्षमता कमजोर होती जा रही है। बजट घाटा लगातार बढ़ रहा है और इसकी मुख्य वजह सैन्य अभियानों पर हो रहा भारी खर्च माना जा रहा है।

    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में रूस के सामने कई और चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। अगर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें दबाव में रहींरूबल मजबूत बना रहा और आर्थिक विकास अनुमान से कम रहातो सरकार की मुश्किलें और बढ़ेंगी। मजबूत रूबल निर्यात को महंगा बना देता हैजिससे विदेशी मुद्रा कमाने में दिक्कत आती हैजबकि ऊंची ब्याज दरें कर्ज को और महंगा कर देती हैं।विश्लेषकों के अनुसारयदि तेल और गैस से होने वाली आय में और गिरावट आती है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैंतो रूस के सामने केवल तीन ही विकल्प बचेंगे। पहलासरकार टैक्स बढ़ा सकती हैजिससे आम जनता और उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। दूसरासामाजिक कल्याण और विकास से जुड़े अन्य जरूरी खर्चों में कटौती की जा सकती हैजिसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। तीसरा विकल्प है और अधिक कर्ज लेनाजो भविष्य में आर्थिक संकट को और गहरा कर सकता है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि युद्ध ने रूस की अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर कर दिया है। लंबे समय तक चले इस संघर्ष ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है और विदेशी निवेश लगभग ठप हो चुका है। ऐसे में युद्ध के बाद भी रूस के लिए आर्थिक स्थिरता हासिल करना आसान नहीं होगा।कुल मिलाकरयूक्रेन युद्ध रूस के लिए सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहींबल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों की चेतावनी साफ है-इस जंग की कीमत रूस को आने वाले कई वर्षों तक चुकानी पड़ सकती है।

  • शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग की रेड 'बेस्टियन' कंपनी से जुड़े हैं मामले

    शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग की रेड 'बेस्टियन' कंपनी से जुड़े हैं मामले


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के लिए एक बार फिर मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आयकर विभाग ने हाल ही में उनके घर पर छापेमारी की है जो उनकी कंपनी बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी से जुड़ी है। यह रेड बेस्टियन रेस्टोरेंट और क्लब से संबंधित वित्तीय लेन-देन और टैक्स भुगतान में संभावित अनियमितताओं की जांच के तहत की गई। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की गहराई में जाकर क्या है सच।

    बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी और शिल्पा शेट्टी का रोल

    शिल्पा शेट्टी की कंपनी बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी मुंबई पुणे बेंगलुरु और गोवा में ‘बेस्टियन’ नाम से प्रसिद्ध क्लब और रेस्टोरेंट चलाती है। इस कंपनी की शिल्पा शेट्टी को-ओनर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक शिल्पा ने 2019 में इस वेंचर में 50% हिस्सेदारी खरीदी थी और इसके बाद से वह इसकी को-ओनर बन गईं। आयकर विभाग को संदेह है कि कंपनी के विभिन्न आउटलेट्स और उसके प्रमोटरों के वित्तीय लेन-देन में कोई गड़बड़ी हो सकती है विशेषकर टैक्स भुगतान के मामलों में।

    आयकर विभाग की रेड
    आयकर विभाग ने बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी के विभिन्न आउटलेट्स और प्रमोटरों के घरों पर बुधवार को छापेमारी शुरू की। इस छापेमारी में शिल्पा शेट्टी के घर भी शामिल थे। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे रेस्टोरेंट्स से जुड़े वित्तीय लेन-देन और टैक्स भुगतान को लेकर संभावित अनियमितताओं की जांच कर रहे हैं।

    यह जांच शिल्पा शेट्टी की कंपनी के संचालन के तरीके और टैक्स व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर केंद्रित है। विभाग का शक है कि रेस्टोरेंट के विभिन्न लेन-देन में कोई वित्तीय अनियमितता हो सकती है। इसके अलावा विभाग को यह भी संदेह है कि हो सकता है कि टैक्स की चोरी या उसके भुगतान में गड़बड़ियां हुई हों।

    शिल्पा शेट्टी का बयान

    हालांकि शिल्पा शेट्टी ने आयकर विभाग की रेड के बाद इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने इसे बेबुनियाद बताते हुए कहा कि वह जांच में पूरी तरह से सहयोग कर रही हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा “जांच में पूरा सहयोग करने के बाद हमें पूरा भरोसा है कि हमें न्याय मिलेगा। हम कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका पर पूरा विश्वास रखते हैं। हम मीडिया से संयम बरतने की अपील करते हैं क्योंकि मामला अभी कोर्ट में है।”

    शिल्पा शेट्टी की स्थिति

    हालांकि इस मामले में शिल्पा शेट्टी का कहना है कि वह पूरी तरह से सहयोग कर रही हैं लेकिन यह मामला अब तक विवादों में घिरा हुआ है। बॉलीवुड की दुनिया में शिल्पा शेट्टी एक स्थापित और सम्मानित अभिनेत्री हैं और उनकी छवि पर इस तरह के मामलों का असर पड़ सकता है। हालांकि शिल्पा का यह भी कहना है कि वह मीडिया से इस मामले को संयमित तरीके से रिपोर्ट करने की उम्मीद करती हैं क्योंकि मामला अभी अदालत में लंबित है और इसमें किसी तरह की जल्दबाजी में राय बनाना सही नहीं होगा।

    बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी और टैक्स अनियमितताएं

    आयकर विभाग का आरोप है कि बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी में जो वित्तीय लेन-देन हो रहे हैं वे पारदर्शी नहीं हैं और टैक्स भुगतान में भी अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे में विभाग ने इस मामले में एक गहरी जांच शुरू की है। इस छापेमारी में यह देखा जा रहा है कि क्या बेस्टियन रेस्टोरेंट के प्रमोटर्स और शिल्पा शेट्टी के बीच किसी प्रकार की वित्तीय धांधली हुई है। यह जांच सिर्फ शिल्पा शेट्टी के निजी घर तक ही सीमित नहीं है बल्कि उनके व्यवसाय से जुड़े सभी स्थानों पर जांच की जा रही है।

    इस रेड के बाद शिल्पा शेट्टी के फैंस और मीडिया की नजरें इस मामले पर टिकी हुई हैं। हालांकि शिल्पा ने आरोपों को नकारते हुए पूरी जांच में सहयोग देने की बात कही है लेकिन फिर भी इस प्रकार के मामलों से उनकी छवि पर असर पड़ सकता है। शिल्पा और उनके प्रमोटरों के लिए अब यह देखना होगा कि जांच के दौरान क्या निकलकर आता है और क्या आयकर विभाग के आरोप सही साबित होते हैं। अभी के लिए शिल्पा शेट्टी के समर्थकों को उम्मीद है कि यह मामला जल्द ही सुलझ जाएगा और अभिनेत्री को न्याय मिलेगा। इस समय सबकी नजरें इस मामले की जांच और आगे की कार्यवाही पर हैं।

  • 51 साल छोटी सारा अर्जुन को किस करने पर ट्रोल हुए राकेश बेदी बोले लोगों की आंख में गड़बड़ है

    51 साल छोटी सारा अर्जुन को किस करने पर ट्रोल हुए राकेश बेदी बोले लोगों की आंख में गड़बड़ है


    नई दिल्ली । हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मशहूर अभिनेता राकेश बेदी और युवा अभिनेत्री सारा अर्जुन के बीच एक दृश्य दिखाया गया था। इस वीडियो में राकेश सारा से स्टेज पर मिलने के दौरान उन्हें हग करते हैं और उनके कंधे पर किस करते हैं। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी और राकेश को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। हालांकि अब राकेश ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है और कहा है कि यह केवल एक सामान्य अभिवादन था।

    राकेश और सारा का रिश्ता

    राकेश बेदी जो कि फिल्म धुरंधर में एक शातिर राजनेता का किरदार निभा रहे हैं और सारा अर्जुन जो उनकी बेटी का रोल निभा रही हैं दोनों के बीच एक मजबूत और पेशेवर बॉन्ड है। राकेश ने इस वीडियो को लेकर ट्रोलिंग का जवाब देते हुए कहा सारा मेरी उम्र से आधी भी नहीं हैं और फिल्म में उन्होंने मेरी बेटी का किरदार निभाया है। जब भी वह सेट पर मुझसे मिलतीं तो वह मुझे वैसे ही गले लगातीं जैसे एक बेटी अपने पिता को गले लगाती है। हमारे बीच एक अच्छा और समझदारी से भरा हुआ रिश्ता है जो स्क्रीन पर भी दिखाई देता है।

    वीडियो की गलत प्रस्तुति

    राकेश बेदी ने कहा कि वायरल वीडियो में यह देखा गया कि उन्होंने सारा के कंधे पर किस किया लेकिन यह पूरी घटना गलत तरीके से पेश की गई। उन्होंने यह भी बताया कि उस इवेंट में दोनों हमेशा की तरह मिल रहे थे और किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार नहीं किया गया था। राकेश का कहना था लोगों की आंख में गड़बड़ है। जब तक आपको सही तरीके से चीजों को नहीं देखा जाएगा तब तक कोई गलतफहमी हो सकती है।

    सारा के माता-पिता भी थे मौजूद

    राकेश ने इस बात को स्पष्ट किया कि जिस समय यह घटना हुई सारा के माता-पिता भी वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा मैं क्यों उन्हें सार्वजनिक रूप से ऐसे स्टेज पर किस करूंगा? उनके माता-पिता वहां थे। यह सब एक सामान्य अभिवादन था और लोग इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। राकेश ने यह भी कहा कि इस तरह की बातें सिर्फ सोशल मीडिया पर मुद्दा बनाने के लिए की जा रही हैं और जो लोग इसे बढ़ा रहे हैं वे अपनी तरफ से गलतफहमियां फैला रहे हैं।

    फैंस का समर्थन

    जहां कुछ लोगों ने राकेश को ट्रोल किया वहीं उनके कई फैंस ने उनका समर्थन भी किया। राकेश ने अपनी सफाई में कहा मैं खुद की तारीफ नहीं कर रहा लेकिन हाल ही में जब मैं अपने दोस्तों के साथ डिनर पर गया था तो एक महिला मेरे पास आई। उसका बेटा शारीरिक और मानसिक रूप से चैलेंज था लेकिन उसे मेरा काम बहुत पसंद था। यह वह चीज है जो मेरे लिए मायने रखती है न कि सोशल मीडिया की नकारात्मक बातें।

    सोशल मीडिया और ट्रोलिंग

    यह घटना यह भी दर्शाती है कि सोशल मीडिया पर कुछ भी वायरल हो सकता है और कभी-कभी इसे गलत तरीके से पेश किया जाता है। ट्रोलिंग आजकल एक आम समस्या बन चुकी है जहां लोग बिना पूरी जानकारी के किसी भी घटना पर राय देते हैं और विवादों को बढ़ावा देते हैं। राकेश बेदी ने इस मामले में अपनी स्थिति को स्पष्ट कर दिया है और यह बताया कि उनका इरादा कभी भी किसी तरह का अनुचित व्यवहार करने का नहीं था।

    इस पूरे विवाद के बाद राकेश बेदी का कहना है कि उनके और सारा के बीच एक स्वस्थ और पेशेवर संबंध है और किसी भी गलतफहमी को जन्म देना गलत है। जहां तक सोशल मीडिया की बात है यह हमेशा एक दोधारी तलवार की तरह होता है जिसमें कभी-कभी चीजों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जाता है। लेकिन राकेश का मानना है कि उन्होंने अपनी भूमिका को पूरी तरह से निभाया है और उनके काम को लोग समझते हैं।

  • 2026 तक चांदी की कीमत ₹2.50 लाख तक पहुंचने का अनुमान, विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी जारी रहेगी

    2026 तक चांदी की कीमत ₹2.50 लाख तक पहुंचने का अनुमान, विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी जारी रहेगी


    नई दिल्ली । चांदी की कीमतों में इस समय लगातार वृद्धि हो रही है और यह रुझान आने वाले वर्षों तक जारी रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 तक चांदी की कीमत ₹2.25 लाख से ₹2.50 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुँच सकती है। इस वृद्धि के पीछे कई कारण हैं जिनमें औद्योगिक मांग वैश्विक आर्थिक बदलाव और ग्रीन एनर्जी पर बढ़ते निवेश जैसे कारक शामिल हैं।

    औद्योगिक मांग का प्रभाव

    चांदी की कीमतों में इस वृद्धि का सबसे बड़ा कारण है औद्योगिक मांग। सोलर पैनल इलेक्ट्रिक वाहन EV और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में चांदी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सोलर पैनल की उत्पादन क्षमता में वृद्धि और इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन में वृद्धि चांदी की मांग को बढ़ा रहे हैं। इस बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण चांदी की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। इसके साथ ही ग्रीन एनर्जी हरित ऊर्जा में निवेश में भी तेजी आई है। कई देशों में हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है जैसे सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा और इन सभी क्षेत्रों में चांदी का महत्वपूर्ण उपयोग हो रहा है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग में भी वृद्धि हुई है।

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता खासकर अमेरिका और यूरोप में चांदी की कीमतों के लिए एक सहायक कारक साबित हो रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बदलाव के संकेत और वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव निवेशकों को सुरक्षित निवेश के विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है क्योंकि ये दोनों धातुएं सुरक्षित निवेश के रूप में मानी जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होता है तो निवेशक चांदी और सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करेंगे। इसके साथ ही डॉलर की कमजोरी और अन्य वैश्विक आर्थिक कारक भी चांदी की कीमतों को सहारा देने वाले महत्वपूर्ण तत्व हैं।

    चांदी की मूल्यवृद्धि

    हाल ही में चांदी के भाव ₹2.07 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुँच चुके हैं जो कि एक नया रिकॉर्ड है। पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमत में 129.4% की वृद्धि हुई है जो 1 जनवरी 2025 को ₹90 500 प्रति किलोग्राम थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण व्यापारियों द्वारा निरंतर खरीदारी और वैश्विक मांग में वृद्धि है। इसके अलावा चांदी में निवेश के लिए विशेषज्ञों द्वारा लंबी अवधि के निवेश की सलाह दी जा रही है। निवेशकों को यह सलाह दी जा रही है कि वे एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करें। चांदी के बाजार में उथल-पुथल हो सकती है लेकिन लंबी अवधि में यह एक लाभकारी निवेश विकल्प साबित हो सकता है।

    सतर्कता और जोखिम

    हालांकि चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि इतनी तेजी के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव आ सकता है। मुनाफावसूली के चलते अल्पावधि में कीमतों में नरमी भी देखी जा सकती है। कुछ ब्रोकरेज और रिसर्च रिपोर्ट्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक चांदी ₹2.40 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर छू सकती है जबकि बाजार में 1.78 लाख रुपये तक की गिरावट का भी खतरा है।

    निवेशकों के लिए सलाह

    विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में निवेश करते समय सतर्कता बरतनी चाहिए। एक ओर जहां चांदी के दाम में वृद्धि की उम्मीद है वहीं निवेशकों को यह भी याद रखना चाहिए कि कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसीलिए चांदी में निवेश करते समय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना और एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाना सबसे सही रहेगा। कुल मिलाकर चांदी के भाव में तेज वृद्धि और आगामी वर्षों में इसकी कीमतों में और वृद्धि की संभावना को देखते हुए यह एक आकर्षक निवेश विकल्प बन सकता है। हालांकि निवेशकों को इसके साथ जुड़ी जोखिमों को भी समझना चाहिए और उन्हें अपनी निवेश रणनीतियों में सावधानी बरतनी चाहिए।

  • बीजिंग में फिर बढ़ा प्रदूषण का खतरा, घनी धुंध से ढका शहर; AQI 215 पर पहुंचा, येलो अलर्ट जारी

    बीजिंग में फिर बढ़ा प्रदूषण का खतरा, घनी धुंध से ढका शहर; AQI 215 पर पहुंचा, येलो अलर्ट जारी


    नई दिल्ली /चीन की राजधानी बीजिंग में एक बार फिर वायु प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार 18 दिसंबर 2025 को शहर घनी धुंध की चपेट में रहा जिसके चलते वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 215 के स्तर तक पहुंच गया। यह स्तरबेहद अस्वास्थ्यकारी श्रेणी में आता है और आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। वर्षों तक चले व्यापक सफाई अभियानों के बाद बीजिंग में इस तरह के प्रदूषण की वापसी को दुर्लभ लेकिन चिंताजनक माना जा रहा है।

    चीन की राष्ट्रीय वेधशाला ने हालात को देखते हुए बीजिंग समेत आसपास के कई इलाकों मेंयेलो अलर्ट जारी किया है। चेतावनी में कहा गया है कि मौसम की मौजूदा परिस्थितियों के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में फंसे हुए हैं जिससे धुंध और स्मॉग की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में ठंडी हवा के साथ स्थिर मौसम और कम हवा की गति प्रदूषण को फैलने से रोकती है जिससे हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ जाती है।गुरुवार सुबह से ही बीजिंग के कई हिस्सों में दृश्यता काफी कम दर्ज की गई। ऊंची इमारतें धुंध में लिपटी नजर आईं और सड़कों पर वाहन धीमी गति से चलते दिखे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों बुजुर्गों और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को घर के अंदर रहने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।

    राष्ट्रीय वेधशाला के मुताबिक बीजिंग के अलावा हेबेई तियानजिन हेनान अनहुई जियांग्सू हुबेई सिचुआन बेसिन और चोंगकिंग जैसे क्षेत्रों में भी भारी धुंध छाए रहने की संभावना है। इन इलाकों में भी वायु गुणवत्ता के स्तर में गिरावट दर्ज की जा सकती है। प्रशासन ने स्थानीय सरकारों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर आपात कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।गौरतलब है कि एक दशक पहले तक बीजिंग दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता था। भारी उद्योगों कोयले से चलने वाले संयंत्रों और तेजी से बढ़ते वाहनों के कारण यहां की हवा बेहद जहरीली हो गई थी। हालात को सुधारने के लिए चीनी सरकार ने 2016 के बाद से कई सख्त कदम उठाए। भारी प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को या तो बंद किया गया या शहर से बाहर स्थानांतरित किया गया जिस पर अरबों डॉलर खर्च किए गए।

    इसके अलावा सर्दियों में कोयले से चलने वाली सार्वजनिक हीटिंग प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक गैस और बिजली आधारित व्यवस्था में बदला गया। अधिकारियों के अनुसार इस बदलाव पर एक अरब डॉलर से अधिक की राशि खर्च हुई और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए। इन उपायों से बीजिंग की वायु गुणवत्ता में बीते वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ था जिससे घनी धुंध की घटनाएं काफी कम हो गई थीं।हालांकि मौजूदा हालात यह दिखाते हैं कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते प्रदूषण फिर से गंभीर रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही उत्सर्जन नियंत्रण में हों लेकिन सर्दियों के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही या प्राकृतिक परिस्थितियां भी हवा को बेहद खराब बना सकती हैं।प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मास्क का इस्तेमाल करें बाहरी गतिविधियों को सीमितरखें और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें। साथ ही स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त नियंत्रण उपाय लागू किए जा सकते हैं।

  • बहरीन में भारतीय जर्सी पहनकर उतरा पाकिस्तानी नेशनल खिलाड़ी, तिरंगा लहराने से मचा पाकिस्तान में बवाल

    बहरीन में भारतीय जर्सी पहनकर उतरा पाकिस्तानी नेशनल खिलाड़ी, तिरंगा लहराने से मचा पाकिस्तान में बवाल


    इस्लामाबाद/पाकिस्तान कबड्डी जगत में उस समय हड़कंप मच गयाजब देश के एक चर्चित अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उबैदुल्लाह राजपूत बहरीन में आयोजित एक निजी टूर्नामेंट में भारतीय टीम की जर्सी पहनकर खेलते और भारतीय तिरंगा लहराते नजर आए। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईंजिसके बाद पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। मामला इतना गंभीर हो गया कि पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन पीकेएफको जनरल काउंसिल की इमरजेंसी बैठक बुलानी पड़ी है।यह विवाद तीसरे जीसीसी कबड्डी कप से जुड़ा हैजिसका आयोजन 16 दिसंबर को बहरीन के सलमाबाद स्थित गल्फ एयर क्लब में किया गया था। इस टूर्नामेंट में बहरीनकुवैतदुबई और ओमान की टीमें शामिल थीं। हालांकियह कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं थीबल्कि एक निजी आयोजन थाजिसमें आयोजकों ने भारतपाकिस्तानकनाडा और ईरान जैसे देशों के नाम पर निजी टीमें बनाई थीं।

    पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन के सचिव राणा सरवर ने बताया कि फेडरेशन चेयरमैन चौधरी शफाय हुसैन के निर्देश पर 27 दिसंबर को आपात बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उबैदुल्लाह राजपूत समेत उन सभी खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगाजिन्होंने बिना अनुमति इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। सरवर ने साफ शब्दों में कहा कि किसी राष्ट्रीय खिलाड़ी का विदेशी टीम की जर्सी पहनना और उसका झंडा लहराना अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे पाकिस्तान के खेल नियमों और राष्ट्रीय गरिमा का गंभीर उल्लंघन बताया।

    सरवर के अनुसारबहरीन गए कुल 16 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन या पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड से कोई एनओसी या पूर्व अनुमति नहीं ली थी। इनमें राष्ट्रीय और नेशनल लेवल के खिलाड़ी शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह कोई आधिकारिक पाकिस्तानी टीम नहीं थीलेकिन पाकिस्तान के नाम और पहचान का इस तरह इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। फेडरेशन अब इन सभी खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रही है।फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि क्लब स्तर पर विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक साथ खेल सकते हैंलेकिन किसी अन्य देश का प्रतिनिधित्व करना और उसका राष्ट्रीय ध्वज लहराना पूरी तरह गलत है। इसके साथ हीफेडरेशन ने स्वघोषित प्रमोटर्स और आयोजकों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की बात कही हैताकि भविष्य में पाकिस्तान के नाम का इस तरह दुरुपयोग न हो।

    विवाद बढ़ने के बाद उबैदुल्लाह राजपूत ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट हर साल बहरीन में आयोजित होता है और वह पहले भी इसमें हिस्सा ले चुके हैं। इस बार उनकी पुरानी टीम ने उन्हें नहीं बुलायालेकिन दूसरी टीम के निमंत्रण पर वह खेलने चले गए। राजपूत के मुताबिकउन्हें पहले से जानकारी नहीं थी कि टीमें भारत और पाकिस्तान के नाम से बनाई जाएंगी।राजपूत ने दावा किया कि मैदान में उतरते समय दोस्तों ने उन्हें बताया कि वह भारतीय नाम वाली टीम का हिस्सा हैं। इसके बाद उन्होंने कमेंटेटर से यह अनाउंस भी करवाया कि यह भारत-पाकिस्तान मैच नहींबल्कि एक स्थानीय कप प्रतियोगिता है। उन्होंने कहा कि नारेबाजी और झंडे लहराने की उन्हें कोई उम्मीद नहीं थी।

    अपने बयान में राजपूत ने कहायह सिर्फ एक कप थाकोई विश्व कप नहीं। अगर यह आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट होतातो मैं केवल पाकिस्तान के लिए ही खेलता। मैं पाकिस्तानी हूं और मेरा जीवन पाकिस्तान पर कुर्बान है।उन्होंने फेडरेशनकोचप्रशंसकों और शुभचिंतकों से माफी मांगते हुए अपील की कि इस मामले को जरूरत से ज्यादा तूल न दिया जाए।अब सभी की नजरें 27 दिसंबर को होने वाली पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन की बैठक पर टिकी हैंजहां यह तय होगा कि उबैदुल्लाह राजपूत और अन्य खिलाड़ियों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।

  • बैंक और वॉलेट ऐप्स में बढ़ेंगे शुल्क सेवाएं होंगी सीमित; ग्राहकों के लिए मायूस करने वाली खबर

    बैंक और वॉलेट ऐप्स में बढ़ेंगे शुल्क सेवाएं होंगी सीमित; ग्राहकों के लिए मायूस करने वाली खबर


    नई दिल्ली । बैंकिंग सेवाओं और वॉलेट ऐप्स पर शुल्क लगातार बढ़ाए जा रहे हैं जिससे ग्राहकों को नए साल में और अधिक खर्च का सामना करना पड़ेगा। ICICI बैंक पेटीएम मोबिक्विक जैसे वॉलेट ऐप्स और एयरटेल पेमेंट बैंक ने अपनी सेवाओं में बदलाव की योजना बनाई है। इनमें शुल्क वृद्धि नई सेवाओं का शुल्क लगाना और कुछ सुविधाओं को बंद करना शामिल है।

    ICICI बैंक की नई शुल्क संरचना

    क्रेडिट कार्ड पर गेमिंग शुल्क 15 जनवरी 2026 से ICICI बैंक क्रेडिट कार्ड से गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए गए ट्रांजैक्शन्स पर 2% शुल्क लगाएगा।वॉलेट पर शुल्क थर्ड-पार्टी वॉलेट ऐप्स जैसे पेटीएम मोबिक्विक पर ₹5000 से अधिक राशि भेजने पर 1% शुल्क लिया जाएगा।क्रेडिट कार्ड का बिल भुगतान शाखा में जाकर क्रेडिट कार्ड बिल जमा करने पर 150 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा जो पहले 100 रुपये था। फिल्म के ऑफर में बदलाव 1 फरवरी 2026 से इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर फिल्म देखने के मुफ्त ऑफर को बंद कर दिया जाएगा और इसके लिए ₹25000 खर्च करने की शर्त रखी जाएगी।

    एयरटेल पेमेंट बैंक

    एयरटेल पेमेंट बैंक ने 1 जनवरी 2026 से अपने वॉलेट पर ₹75 प्रति वर्ष का रखरखाव शुल्क एएमसीलगाने का निर्णय लिया है। यदि वॉलेट में शेष राशि नहीं होगी तो यह शुल्क डेबिट कर लिया जाएगा।

    वॉलेट ऐप्स पर शुल्क वृद्धि

    भारत में वॉलेट सेवाएं 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट से शुरू हुईं लेकिन 2010 में पेटीएम के बाद वॉलेट ऐप्स ने काफी लोकप्रियता हासिल की। शुरुआती दौर में अधिकांश कंपनियां अपनी सेवाएं मुफ्त देती थीं लेकिन 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क और केवाईसी न कराने पर जुर्माना लगाना शुरू किया। अब कई वॉलेट कंपनियां क्रेडिट व डेबिट कार्ड से वॉलेट में पैसा डालने पर 1.5% सर्विस चार्ज लगा रही हैं।

    ग्रामीण बैंकों का एकीकरण

    इसके अलावा सरकार ने 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एक नया एकीकृत ब्रांड लोगो जारी किया है। यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक NABARDके सहयोग से तैयार किया गया है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और प्रगति को दर्शाता है।

    उपभोक्ताओं के लिए चिंता

    बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत के साथ उपभोक्ताओं को आने वाले समय में अतिरिक्त शुल्क और सीमित सेवाओं का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं।