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  • दिव्या भारती और श्रीदेवी की जिंदगी में छुपा है चौंकाने वाला कनेक्शन, मौत और फिल्म ‘लाडला’ तक का राज

    दिव्या भारती और श्रीदेवी की जिंदगी में छुपा है चौंकाने वाला कनेक्शन, मौत और फिल्म ‘लाडला’ तक का राज


    नई दिल्ली।80 और 90 के दशक में श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार थीं। उनकी खूबसूरती और अदाकारी के दीवाने पूरे देश में थे। 1992 में जब दिव्या भारती ने बॉलीवुड में कदम रखा, तो दर्शकों और इंडस्ट्री में उनकी तुलना श्रीदेवी से होने लगी। दोनों की शक्ल, बड़ी आंखें और कर्ली बाल इतने मिलते-जुलते थे कि दिव्या को ‘मिनी श्रीदेवी’ कहा जाने लगा।

    पहली मुलाकात और हॉलीवुड जैसी तारीखें

    दिव्या और श्रीदेवी की पहली मुलाकात केवल एयरपोर्ट पर हुई थी, जहां उन्होंने सिर्फ ‘हाय’ कहा। लेकिन उनके जीवन में संयोग और भी दिलचस्प थे। दिव्या का जन्म 25 फरवरी को हुआ और श्रीदेवी की मौत 24 फरवरी को, यानी दिव्या के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले।

    दुखद मौतें और रहस्य

    दिव्या भारती की मौत चौथी मंजिल से गिरने से हुई, लेकिन इसे लेकर आज तक रहस्य बना हुआ है कि यह हादसा था या हत्या। उनके पति और निर्माता साजिद नाडियाडवाला भी शक के घेरे में रहे। श्रीदेवी की अचानक बाथटब में डूबने और कार्डियक अरेस्ट से हुई मौत ने भी देश को हिला दिया। उनके पति और निर्माता बोनी कपूर पर भी शक जताया गया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

    ‘लाडला’ फिल्म का कनेक्शन

    फिल्म ‘लाडला’ भी दोनों की जिंदगी से जुड़ी है। शुरुआत में इसे दिव्या भारती अनिल कपूर के साथ करने वाली थीं और शूटिंग का आधा हिस्सा पूरा हो चुका था। दिव्या की मौत के बाद यह फिल्म श्रीदेवी के हाथ में चली गई। दोनों का लुक, डायलॉग और अंदाज इतना समान था कि सेट पर लोग दंग रह जाते थे।

    करियर और निजी जिंदगी में समानताएं

    दोनों ने दक्षिण भारतीय फिल्मों से करियर की शुरुआत की और बाद में बॉलीवुड पर राज किया। इसके अलावा, दोनों ने फिल्म निर्माता से शादी की थी। इस तरह उनके जीवन और करियर में कई अनजाने और रहस्यमय संयोग देखने को मिलते हैं।

    दिव्या भारती और श्रीदेवी के जीवन में संयोग और समानताएं लगातार नजर आती हैं—जन्म और मौत की तारीख, फिल्म ‘लाडला’, करियर की शुरुआत और निजी जीवन। हालांकि दोनों की मौत ने बॉलीवुड को हिला दिया, उनके योगदान और यादें आज भी जीवंत हैं।

  • सफर से सिनेमा तक! दिल्ली-मुंबई यात्रा में मनोज कुमार ने जन्म दी ‘उपकार’ की कहानी

    सफर से सिनेमा तक! दिल्ली-मुंबई यात्रा में मनोज कुमार ने जन्म दी ‘उपकार’ की कहानी


    नई दिल्ली।आज हम याद कर रहे हैं मनोज कुमार को, जिनकी पुण्यतिथि है। उन्हें देशभक्ति और किसान-जवान-कहानी कहने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता था। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना गया।

    बचपन से संघर्ष और अभिनय की राह

    मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को ऐबटाबाद में हुआ था। असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। 1947 के बंटवारे के समय उनका परिवार दिल्ली आ गया और शरणार्थी कैंप में रहने लगा। बचपन से ही वे दिलीप कुमार के बड़े प्रशंसक थे और उनकी नकल किया करते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने सिलाई मशीन का काम भी किया।

    मुंबई की शुरुआत और पहले सफलता

    अभिनय का सपना लेकर मनोज कुमार मुंबई पहुंचे। साल 1957 में फिल्म ‘फैशन’ से उन्होंने शुरुआत की। पांच साल बाद विजय भट्ट की ‘हरियाली और रास्ता’ से उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली। 1965 में आई ‘हिमालय की गोद में’ ने उन्हें और मजबूती दी।

    उसी साल उन्होंने भगत सिंह पर फिल्म ‘शहीद’ बनाने का फैसला किया। प्रेम चोपड़ा और गीतकार प्रेम धवन के साथ यह फिल्म भगत सिंह के जीवन पर सबसे प्रामाणिक मानी गई।

    ‘उपकार’ की रचना: दिल्ली से मुंबई की ट्रेन में

    मनोज कुमार के करियर में दो पहलू थे रूमानी नायक और देशभक्ति से ओत-प्रोत ‘भारत कुमार’। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनसे कहा था, “क्या मेरे नारे ‘जय जवान जय किसान’ पर फिल्म नहीं बन सकती?”

    दिल्ली से मुंबई लौटते समय मनोज कुमार ने रजिस्टर और नए पेन खरीदे और ट्रेन की यात्रा में कहानी लिख डाली। दिल्ली से मुंबई पहुंचते-पहुंचते फिल्म ‘उपकार’ की पूरी कहानी तैयार हो गई।

    गाने की पृष्ठभूमि: ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’

    ‘उपकार’ के गानों में सबसे खास है ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’। गीतकार गुलशन बावरा रेलवे में क्लर्क थे और पंजाब से आने वाली गेहूं की बोरियां उतारते समय उनकी डायरी में यह पंक्ति दर्ज हुई। बाद में मनोज कुमार ने इसे फिल्म में शामिल किया। महेंद्र कपूर की आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया।

    बाद की उपलब्धियां

    1970 में मनोज कुमार ने ‘पूरब और पश्चिम’ बनाई, जो भारतीय परंपरा और पश्चिमी संस्कृति के टकराव पर आधारित थी। यह फिल्म भी खूब सराही गई।

    मनोज कुमार ने देशभक्ति और आम आदमी की कहानियों को पर्दे पर जीवंत किया। ट्रेन में लिखी ‘उपकार’ की कहानी और ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ जैसे गाने आज भी उनके योगदान की याद दिलाते हैं।

  • राज कपूर के एक बयान से टूटा सपना लता ने छोड़ी फिल्म जो बाद में बनी ब्लॉकबस्टर

    राज कपूर के एक बयान से टूटा सपना लता ने छोड़ी फिल्म जो बाद में बनी ब्लॉकबस्टर


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो समय के साथ और भी दिलचस्प हो जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है सुरों की मलिका लता मंगेशकर और शोमैन राज कपूर की महत्वाकांक्षी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम से। यह फिल्म साल 1978 में रिलीज हुई और अपने अनोखे विषय और प्रस्तुति के कारण सुपरहिट साबित हुई लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म के लिए पहली पसंद जीनत अमान नहीं बल्कि खुद लता मंगेशकर थीं।

    फिल्म की कहानी रूपा नाम की एक ऐसी लड़की के इर्दगिर्द घूमती है जिसका चेहरा बचपन में जल जाता है लेकिन उसकी आवाज इतनी मधुर होती है कि हर कोई उसका दीवाना बन जाता है। राज कपूर ने इस किरदार की कल्पना एक साधारण चेहरे और दिव्य आवाज वाली महिला के रूप में की थी और उनके मन में इस छवि के लिए लता मंगेशकर बिल्कुल फिट बैठती थीं। यही वजह थी कि वह उन्हें इस फिल्म में कास्ट करना चाहते थे और यह किरदार उनके इर्दगिर्द ही गढ़ा गया था।

    लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब राज कपूर का एक बयान गलत तरीके से लिया गया। उन्होंने सुंदरता को लेकर एक दार्शनिक बात कही थी जिसमें उन्होंने यह समझाने की कोशिश की थी कि असली सुंदरता बाहरी रूप में नहीं बल्कि दृष्टिकोण में होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी कभी बेहद खूबसूरत आवाज सुनने के बाद जब हम उस व्यक्ति को देखते हैं तो वह हमारी कल्पना से अलग हो सकता है। इस बात को लता मंगेशकर से जोड़कर देखा गया और यह उन्हें बेहद चुभ गया।

    इस टिप्पणी ने उन्हें इतना आहत किया कि उन्होंने फिल्म में काम करने से साफ इनकार कर दिया। बात यहीं नहीं रुकी उन्होंने फिल्म के लिए गाना गाने से भी मना कर दिया जो अपने आप में एक बड़ा झटका था क्योंकि उनकी आवाज इस कहानी की आत्मा मानी जा रही थी। राज कपूर और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी क्योंकि फिल्म की परिकल्पना ही लता की आवाज के इर्दगिर्द बनी थी।

    हालांकि बाद में काफी मनाने और समझाने के बाद लता मंगेशकर इस बात के लिए राजी हुईं कि वह फिल्म का टाइटल ट्रैक गाएंगी। उनके गाए इस गीत ने फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई दी और आज भी वह गाना लोगों के दिलों में खास जगह रखता है।

    दूसरी ओर फिल्म में रूपा का किरदार जीनत अमान को मिला और उन्होंने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से इस भूमिका को यादगार बना दिया। उनके साथ शशि कपूर की जोड़ी ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता बनकर उभरी।

    यह घटना न केवल फिल्म इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय है बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी कभी एक छोटी सी बात किस तरह बड़े फैसलों को प्रभावित कर देती है। अगर उस वक्त हालात अलग होते तो शायद यह फिल्म और इसकी पहचान कुछ और ही होती लेकिन यही अनिश्चितता सिनेमा को इतना खास बनाती है।

  • Dhurandhar के ‘रहमान डकैत’ रोल पर हुआ ड्रामा! तीन स्टार्स ने कहा ‘ना’, कास्टिंग डायरेक्टर ने सब बताया


    नई दिल्ली। फिल्म जगत में अक्सर देखा जाता है कि कई ऐसी फिल्में होती हैं जो बड़े-बड़े सेलेब्स को ऑफर की जाती है।लेकिन उनमें से कई उसे ठुकरा देते हैं। बीते साल 2025 के दिसंबर में रिलीज हुई फिल्म Dhurandhar ने काफी तबाही मचाई थी इस फिल्म ने काफी अच्छा खासा कलेक्शन किया था। इस फिल्म में Ranveer Singh और Akshaye Khanna की बेहतरीन एक्टिंग देखने को मिला था। आज भी इसका दूसरा पार्ट लगातार सिनेमाघरों में तूफान लेकर आया है और जबरदस्त कलेक्शन करता जा रहा है।

    रहमान डकैत के किरदार में छाए थे अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna)
    आपको बता दें, इसके पहले पार्ट में अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna) ने रहमान डकैत का किरदार निभाया था इसलिए उनकी काफी तारीफ हुई लोगों ने उन्हें काफी पसंद किया। अक्षय खन्ना ने अब तक कई बेहतरीन फिल्में की है लेकिन इस फिर मैं उनके करियर में चार चांद लगा दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं इस फिल्म में इस किरदार को उनसे पहले कई बड़े एक्टर्स को ऑफर किया गया था लेकिन उन्होंने इस किरदार को करने से मना कर दिया था अब इसका खुलासा फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने खुद किया है।

    तीन कलाकारों ने ठुकराया था यह किरदार
    हाल ही में फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने इस बारे में दिलचस्प खुलासा किया है, जिसने फैंस को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड हंगामा के साथ एक इंटरव्यू में कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बताया कि रहमान डकैत का रोल पहले तीन अलग-अलग एक्टर्स को ऑफर किया गया था, लेकिन सभी ने इसे करने से मना कर दिया। इनमें से एक एक्टर साउथ इंडस्ट्री से थे और दो बॉलीवुड के थे. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने बताया कि सब ने यह कहकर मना कर दिया कि यह फिल्म रणवीर सिंह की है तो इसमें उनका किरदार उतना खास नहीं दिखेगा।

    डायरेक्टर ने अक्षय खन्ना की तारीफ की
    इसके बाद उन्होंने अक्षय खन्ना के बारे में सोचा। खास बात ये रही कि अक्षय ने तुरंत स्क्रिप्ट सुनी और एक ही दिन में फिल्म के लिए हां कर दी। मुकेश ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि अक्षय उन कलाकारों में से हैं, जो दिल से फैसले लेते हैं।

    फिल्म की कहानी किरदार
    धुरंधर’ की कहानी कराची के लयारी इलाके पर है, जो अपराध के लिए जाना जाता है. फिल्म में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया. वहीं रणवीर सिंह एक स्पाई एजेंट के रोल में दिखे, जो पाकिस्तान में घुसकर मिशन को अंजाम देता है। फिल्म में अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन और राकेश बेदी भी नजर आए हैं। ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था।

  • दिल दहला देने वाला अनुभव यह फिल्म आपके दिमाग और आत्मा दोनों को झकझोर देगी

    दिल दहला देने वाला अनुभव यह फिल्म आपके दिमाग और आत्मा दोनों को झकझोर देगी


    नई दिल्ली । वीकेंड की शुरुआत अक्सर आराम और एंटरटेनमेंट के साथ होती है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुकून नहीं बल्कि सिहरन चाहिए होती है अगर आप भी उन्हीं में से हैं और ऐसी हॉरर फिल्म की तलाश में हैं जो सिर्फ डराए नहीं बल्कि आपके अंदर तक उतर जाए तो यह फिल्म आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित हो सकती है

    साल 2023 में रिलीज हुई यह फिल्म आज भी लोगों के बीच चर्चा में बनी हुई है और इसे देखने के बाद लोग अपने दोस्तों को इसे जरूर सुझाते हैं इस फिल्म की कहानी पारंपरिक भूतिया घरों या पुराने खंडहरों से हटकर एक बेहद अनोखे कॉन्सेप्ट पर आधारित है जो इसे बाकी हॉरर फिल्मों से अलग बनाता है

    कहानी एक रहस्यमयी हाथ के इर्द गिर्द घूमती है जो ममीफाइड है यानी उस पर प्लास्टर चढ़ा हुआ है जब कोई व्यक्ति इस हाथ को पकड़कर एक खास वाक्य बोलता है तो उसके सामने एक मृत आत्मा प्रकट हो जाती है यह सिर्फ शुरुआत होती है असली डर तब शुरू होता है जब उस आत्मा को अपने शरीर में आने की अनुमति दी जाती है इसके बाद जो होता है वह दर्शकों को भीतर तक हिला देता है

    फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका रियलिस्टिक ट्रीटमेंट है इसमें जरूरत से ज्यादा वीएफएक्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि मेकअप साउंड डिजाइन और माहौल के जरिए डर को इस तरह रचा गया है कि हर सीन असली लगता है यही वजह है कि फिल्म देखते समय दर्शक खुद को उस स्थिति में महसूस करने लगते हैं और डर कई गुना बढ़ जाता है

    कई ऐसे दृश्य हैं जो अचानक आते हैं और दर्शक को चौंका देते हैं यह फिल्म धीरे धीरे आपको अपने जाल में फंसाती है और फिर एक ऐसा अनुभव देती है जिससे निकलना आसान नहीं होता खास बात यह है कि यह सिर्फ डराने तक सीमित नहीं रहती बल्कि इंसानी जिज्ञासा और उसके खतरनाक परिणामों को भी दिखाती है

    फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है इसकी कहानी निर्देशन और एक्टिंग की खूब तारीफ हुई है यह फिल्म इस बात का उदाहरण है कि अगर कॉन्सेप्ट मजबूत हो और उसे सही तरीके से पेश किया जाए तो बिना भारी तकनीक के भी गहरा असर छोड़ा जा सकता है

    दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म को बनाने वाले निर्देशक पहले यूट्यूब पर डरावने वीडियो बनाया करते थे उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए फिल्म के सेट पर ऐसा माहौल तैयार किया कि कलाकारों का डर पूरी तरह असली लगे यही वजह है कि फिल्म के कई सीन बेहद नैचुरल और प्रभावशाली महसूस होते हैं

    अगर आप इस वीकेंड कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आपके दिमाग में लंबे समय तक बना रहे और आपको अंधेरे से डराने लगे तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए लेकिन इसे देखने से पहले खुद को तैयार कर लें क्योंकि यह अनुभव हल्का नहीं होने वाला है

  • HDFC बैंक का वित्तीय अलर्ट! जमा और लोन के बीच बढ़ा अंतर, 18 अप्रैल को बोर्ड बैठक

    HDFC बैंक का वित्तीय अलर्ट! जमा और लोन के बीच बढ़ा अंतर, 18 अप्रैल को बोर्ड बैठक


    नई दिल्ली।एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही में अपने कर्ज और जमा के बीच अंतर और बढ़ने की जानकारी दी है। बैंक के अनुसार, लोन की ग्रोथ जमा से तेज रही, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट (C-D) रेशियो 106-108 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

    लोन की ग्रोथ: रिटेल और SME का योगदान

    31 मार्च तक बैंक के कुल लोन (ग्रॉस एडवांस) सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपए हो गए, जबकि एक साल पहले यह 21.4 लाख करोड़ रुपए थे। तिमाही आधार पर लोन की ग्रोथ मध्यम रही, जिसमें मुख्य रूप से रिटेल और SME सेगमेंट ने योगदान दिया। कॉरपोरेट लोनिंग सीमित और संतुलित रही।

    जमा की धीमी बढ़त और सीएएसए पर दबाव

    बैंक की कुल जमा राशि लगभग 23.5 लाख करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले 20.5 लाख करोड़ रुपए थी। हालांकि, डिपॉजिट की ग्रोथ लोन के मुकाबले धीमी रही, जिससे C-D रेशियो ऊंचा बना रहा। कम लागत वाले डिपॉजिट (CASA) की ग्रोथ भी धीमी रही, जिससे CASA रेशियो 37-38 प्रतिशत पर आ गया। इससे स्पष्ट होता है कि कड़े लिक्विडिटी माहौल में सस्ते फंड जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    बोर्ड बैठक और डिविडेंड

    एचडीएफसी बैंक का बोर्ड 18 अप्रैल को बैठक करेगा, जिसमें मार्च तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के ऑडिटेड नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इस बैठक में FY 2026 के लिए डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा और इसके लिए रिकॉर्ड डेट तय की जाएगी।

    आगे की रणनीति

    विश्लेषकों का मानना है कि बैंक के लिए डिपॉजिट ग्रोथ बढ़ाना, CASA बढ़ाना और मार्जिन को स्थिर बनाए रखना सबसे अहम होगा। बैंक वर्तमान में कुछ गवर्नेंस मामलों को भी संभाल रहा है और आंतरिक सिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, खासकर थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स की बिक्री प्रक्रिया में।

    कानूनी और आंतरिक कार्रवाई

    पूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई फिलहाल शुरू नहीं की गई है। इसके अलावा, 2018-19 में एटी-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग मामले में बैंक ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया और 12 अन्य कर्मचारियों पर जुर्माना लगाया।

    एचडीएफसी बैंक में मार्च तिमाही में लोन की ग्रोथ जमा से तेज रही, जिससे C-D रेशियो ऊंचा बना। बोर्ड बैठक 18 अप्रैल को होगी, जिसमें ऑडिटेड नतीजे और डिविडेंड पर निर्णय लिया जाएगा। बैंक CASA बढ़ाने और आंतरिक सिस्टम मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

  • बैंक घोटाले पर कसा शिकंजा सोनी इस्पात लिमिटेड डायरेक्टर गिरफ्तार दो आरोपी फरार

    बैंक घोटाले पर कसा शिकंजा सोनी इस्पात लिमिटेड डायरेक्टर गिरफ्तार दो आरोपी फरार

    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने करोड़ों रुपए के बैंक घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सोनी इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर राजीव लोचन सोनी को गिरफ्तार कर लिया है आरोपी को इंदौर से पकड़ा गया जहां वह जांच एजेंसी की नजर में था इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर बैंकिंग सिस्टम में फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

    जांच एजेंसियों के अनुसार राजीव लोचन सोनी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय स्टेट बैंक से करीब 13 करोड़ रुपए का लोन हासिल किया था यह लोन वर्ष 2006 से 2011 के बीच कंपनी के नाम पर लिया गया था आरोप है कि लोन लेने के दौरान दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई और नियमों का उल्लंघन किया गया बाद में यह लोन खाता एनपीए घोषित हो गया जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ

    मामले की शुरुआत तब हुई जब बैंक ने अपने स्तर पर खाते की समीक्षा की और अनियमितताएं सामने आईं इसके बाद वर्ष 2022 में एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि लोन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की गई थी

    सीबीआई ने इस मामले में राजीव लोचन सोनी के अलावा विजय सोनी और जगदीश चन्द्र सारंग को भी आरोपी बनाया है हालांकि फिलहाल राजीव लोचन की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि अन्य दोनों आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है जांच एजेंसी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा

    गिरफ्तारी के बाद राजीव लोचन सोनी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर मिलीभगत हुई थी ऐसे मामलों में अक्सर कई स्तरों पर साजिश और सहयोग की परतें सामने आती हैं इसलिए जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है

    यह मामला सिर्फ एक कंपनी या व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे वित्तीय तंत्र के लिए चेतावनी है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे बड़े लोन हासिल करना और फिर उसे चुकाए बिना छोड़ देना किस तरह बैंकिंग व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगा सकती है

    सीबीआई की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ एजेंसियां सक्रिय हैं और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं जो इस घोटाले की परतें और खोल सकते हैं

  • FTL सिलेंडर योजना: बिना स्थायी पते के भी घर लाएं 5 किलो का LPG, आसान प्रक्रिया

    FTL सिलेंडर योजना: बिना स्थायी पते के भी घर लाएं 5 किलो का LPG, आसान प्रक्रिया


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार की एलपीजी उपलब्धता बढ़ाने की पहल के तहत, सरकारी तेल वितरण कंपनियां अब 5 किलोग्राम के एफटीएल (फ्री-ट्रेड) एलपीजी सिलेंडर को आसानी से उपलब्ध करा रही हैं। खास बात यह है कि इस सिलेंडर को पाने के लिए अब स्थायी पते की आवश्यकता नहीं है; केवल एक सरकारी आईडी दिखाकर आप इसे अपने नजदीकी एलपीजी एजेंसी या वितरक से ले सकते हैं।

    छात्रों और प्रवासी कामगारों के लिए सुविधा

    सरकार की यह सुविधा विशेषकर उन लोगों के लिए है जो अपने शहरों से दूर रहते हैं और उनके पास स्थायी पता नहीं है। छात्र और प्रवासी कामगार अब बिना किसी पते की बाधा के घर से दूर भी एलपीजी सिलेंडर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

    इंडियन ऑयल ने पोस्ट करते हुए बताया, “अगर आप घर से दूर रहते हैं, आपके पास स्थायी पता नहीं है, और एलपीजी कनेक्शन लेने में कठिनाई हो रही है, तो अब इसका आसान समाधान है।”

    ‘छोटू’ – छोटा, सुविधाजनक और भरोसेमंद

    इंडियन ऑयल ने इस सिलेंडर को ‘छोटू’ नाम दिया है। पोस्ट के अनुसार, यह छोटा और सुविधाजनक सिलेंडर खासकर छात्रों और प्रवासी कामगारों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें तुरंत और भरोसेमंद खाना पकाने का समाधान चाहिए।

    एलपीजी आपूर्ति सामान्य, डिजिटल प्लेटफॉर्म से बुकिंग

    कंपनी ने कहा कि देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और प्रतिदिन लगभग 28 लाख सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद परिचालन सामान्य रूप से चल रहा है।

    87 प्रतिशत एलपीजी बुकिंग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे एसएमएस और IVRS के माध्यम से हो रही हैं। सिलेंडर की डिलीवरी को डीएसी ओटीपी से प्रमाणित किया जाता है, जिससे ग्राहकों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिलती है।

    ग्राहकों को आश्वासन

    इंडियन ऑयल ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया कि किसी भी कमी की संभावना नहीं है और घबराहट में बुकिंग या जमाखोरी करने की जरूरत नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि आधिकारिक सहायता चैनलों के जरिए ग्राहकों की चिंताओं का सक्रिय समाधान किया जा रहा है।

  • चांद के करीब इंसान की वापसी! आर्टेमिस II मिशन से सामने आया धरती का अद्भुत नजारा

    चांद के करीब इंसान की वापसी! आर्टेमिस II मिशन से सामने आया धरती का अद्भुत नजारा


    नई दिल्ली। मानव अंतरिक्ष इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। NASA का Artemis II मिशन आधी सदी बाद इंसानों को फिर से चंद्रमा के करीब ले गया है। इस ऐतिहासिक मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष से पृथ्वी की ऐसी शानदार तस्वीरें भेजी हैं, जिन्हें देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो रहा है।

    ओरियन कैप्सूल से दिखी ‘ब्लू मार्बल’ की खूबसूरती

    मिशन के कमांडर Reid Wiseman द्वारा ली गई तस्वीरों में पृथ्वी का अद्भुत नजारा देखने को मिला। Orion spacecraft की खिड़की से ली गई एक तस्वीर में धरती का घुमावदार हिस्सा दिखाई देता है, जबकि दूसरी तस्वीर में पूरी पृथ्वी नजर आती है नीले महासागर, सफेद बादल और हरे रंग की चमकती ऑरोरा के साथ। इन तस्वीरों में पृथ्वी की खूबसूरती और उसकी नाजुकता दोनों साफ झलकती हैं, मानो अंतरिक्ष से ‘ब्लू मार्बल’ जीवंत हो उठी हो।

    ‘टर्मिनेटर’ लाइन ने खींचा ध्यान

    एक अन्य तस्वीर में दिन और रात के बीच की स्पष्ट सीमा दिखाई देती है, जिसे ‘टर्मिनेटर’ कहा जाता है। यह वह रेखा होती है जहां सूरज की रोशनी और अंधेरा मिलते हैं। इस दृश्य ने वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों को आकर्षित किया है।

    तकनीक का कमाल: शटर स्पीड से बदली तस्वीरों की कहानी

    इन तस्वीरों को अलग-अलग शटर स्पीड पर कैद किया गया है। एक तस्वीर में ज्यादा शटर स्पीड के कारण धरती की रोशनी अधिक चमकदार दिख रही है, जबकि दूसरी में कम शटर स्पीड के जरिए रात में चमकती मानव बस्तियों और प्राकृतिक रोशनी को बेहतर तरीके से दिखाया गया है। यह अंतरिक्ष फोटोग्राफी की तकनीकी खूबसूरती को भी दर्शाता है।

    1972 के बाद पहली बार इतना करीब

    यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि 1972 में Apollo 17 के बाद पहली बार कोई मानव मिशन चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। लगभग 50 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद के पड़ोस तक पहुंचा है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए रास्ता खोलता है।

    चार अंतरिक्ष यात्री, एक साझा सपना

    इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। एक्सप्लोरेशन सिस्टम लीडर लकीशा हॉकिन्स ने कहा, “इस तस्वीर को देखते हुए यह एहसास होता है कि हमारे चार अंतरिक्ष यात्रियों को छोड़कर पूरी मानवता इसमें शामिल है।” यह बयान इस मिशन की भावनात्मक गहराई को भी दर्शाता है।

    चंद्रमा की ओर बढ़ता कदम

    रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 1,80,000 किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं और उन्हें चंद्रमा तक पहुंचने के लिए करीब 2,40,000 किलोमीटर और सफर तय करना है। मिशन की योजना चंद्रमा की परिक्रमा कर ‘यू-टर्न’ लेकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटने की है, बिना लैंडिंग के।

    भविष्य के मिशनों की नींव

    Artemis II मिशन को आने वाले समय में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह मिशन न सिर्फ तकनीकी परीक्षण है, बल्कि मानवता के अंतरिक्ष में आगे बढ़ने के सपनों को नई उड़ान भी देता है।

  • हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप

    हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक सड़क हादसा उस समय हिंसक रूप ले बैठा जब एक युवक की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा कर दिया घटना गरोठ नेशनल हाईवे पर बीती रात की है जहां दिल्ली से उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए आ रही एक मिनी बस और ट्रैक्टर के बीच जोरदार टक्कर हो गई इस हादसे में 21 वर्षीय युवक विजय सोलंकी की दर्दनाक मौत हो गई जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी बस तेज रफ्तार में थी और तुलाहेड़ा टोल प्लाजा के पास उसने ट्रैक्टर को पीछे से टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर पलट गया और विजय सोलंकी उसके नीचे दब गया बताया जा रहा है कि वह करीब एक घंटे तक ट्रैक्टर के नीचे फंसा रहा और समय पर राहत नहीं मिलने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई इस हादसे में उसका साथी राजेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया वहीं बस चालक शिवकुमार और यात्री बॉबी व धर्मेंद्र कुमार भी घायल हुए हैं गंभीर घायलों को निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है

    हादसे के बाद जैसे ही युवक की मौत की खबर गांव में फैली लोगों में आक्रोश फैल गया बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने मिनी बस पर पथराव शुरू कर दिया देखते ही देखते गुस्सा इतना बढ़ गया कि बस में आग लगा दी गई आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बस और उसमें रखा यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए और उनकी जान बच गई बाद में उन्हें अन्य वाहनों के जरिए उज्जैन रवाना किया गया

    घटना के बाद ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया और टोल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की उनका आरोप था कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के कारण राहत कार्य में देरी हुई और यदि समय पर मदद मिल जाती तो विजय सोलंकी की जान बचाई जा सकती थी इस आरोप ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की भारी पुलिस बल तैनात किया गया और समझाइश के बाद जाम खुलवाया गया प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है

    यह घटना न केवल एक सड़क हादसे की त्रासदी को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर राहत और जिम्मेदारी की कमी कैसे हालात को और बिगाड़ सकती है एक तरफ जहां एक युवक की मौत ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया वहीं दूसरी ओर गुस्से की आग ने एक और नुकसान की तस्वीर सामने ला दी अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं