स्वच्छता अभियान का स्टिकर लगा कर पहुँची टीम
BJP नेता और माइनिंग किंग रडार पर
25 सदस्यों की टीम और भारी पुलिस बल
करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि ग्वालियर में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।वकील ने अदालत के सामने उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विनय सिंह नामक व्यक्ति को दी गई पुलिस सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हुए। यह साफ तौर पर पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा पाने वाले ही अपराधों में लिप्त हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।
हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार RTI के तहत जो जानकारी सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। RTI से खुलासा हुआ कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि इनमें से अधिकांश व्यक्ति सुरक्षा के पात्र ही नहीं थे। यह स्थिति तब है जब शहर में आम नागरिकों को पर्याप्त पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है।इससे पहले भी हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपना चुका है। दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई पुलिस सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती।
न्यायालय ने अपने पुराने आदेशों में यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि सुरक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वास्तविक और प्रमाणित खतरे वाले मामलों में ही होना चाहिए, न कि प्रभाव या रसूख के आधार पर।हाईकोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि जिन मामलों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या निजी कारणों से खतरे की आशंका हो, और संबंधित परिवार के पास लाइसेंसी हथियार उपलब्ध हों, वहां निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्ड कई बार पुलिसकर्मियों की तुलना में ज्यादा सजग और प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि पुलिस बल को कानून-व्यवस्था के मूल कामों में लगाया जाना चाहिए।
ताजा सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और अपात्र लोगों को दी जा रही सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अगला रुख इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

वाहनों पर सबसे पहला वार
चीन की रणनीति का पहला और सबसे अहम कदम था वाहन उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण। बीजिंग में यूरोपियन मानकों के बराबर कड़े उत्सर्जन नियम लागू किए गए। पुराने और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया गया। निजी वाहनों की संख्या सीमित करने के लिए लाइसेंस प्लेट लॉटरी सिस्टम ऑड-ईवन जैसी योजनाएं और सप्ताह के कुछ तय दिनों में गाड़ी चलाने पर रोक लगाई गई।इसके साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया गया। मेट्रो और बस नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया गया। आज बीजिंग में इलेक्ट्रिक बसों और टैक्सियों की संख्या लाखों में है जिससे प्रदूषण पर सीधा असर पड़ा।
उद्योगों पर सख्त फैसला
बीजिंग में प्रदूषण का बड़ा स्रोत भारी उद्योग भी थे। चीन ने इस मोर्चे पर भी कोई नरमी नहीं दिखाई। शहर से 3000 से अधिक बड़ी और प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को या तो बंद कराया गया या फिर शहर से बाहर स्थानांतरित किया गया। देश की बड़ी स्टील कंपनी शौगांग को हटाने से ही हवा में खतरनाक कणों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।दिलचस्प बात यह है कि जिन इलाकों में पहले फैक्ट्रियां थीं वहां अब पार्क व्यावसायिक क्षेत्र और तकनीकी हब विकसित किए गए। शौगांग का पुराना औद्योगिक परिसर 2022 के शीतकालीन ओलंपिक का प्रमुख स्थल बना जो पर्यावरणीय बदलाव का प्रतीक बन गया।
क्षेत्रीय सहयोग बना गेमचेंजर
चीन ने सिर्फ बीजिंग तक सीमित रहकर कदम नहीं उठाए। आसपास के 26 शहरों को साथ लेकर साझा प्रदूषण नियंत्रण रणनीति अपनाई गई। कोयले का उपयोग न केवल उद्योगों में बल्कि घरों में भी चरणबद्ध तरीके से खत्म किया गया। स्वच्छ ईंधन और गैस आधारित प्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।
भारत के लिए क्या सीख?
भारत में भी स्वच्छ ईंधन निजी वाहनों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की विशेषज्ञ अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि फर्क नीति के इरादे और उसके पैमाने का है। चीन ने सालभर सख्ती बरती जबकि दिल्ली में अधिकतर कदम आपात स्थिति में ही उठाए जाते हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली में उद्योगों को पूरी तरह हटाना मुश्किल है लेकिन बेहतर तकनीक साझा प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और लगातार निगरानी से हालात सुधारे जा सकते हैं। बीजिंग का अनुभव बताता है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो और नीतियां लंबी अवधि की हों तो प्रदूषण जैसे जटिल संकट पर भी काबू पाया जा सकता है।

इसी दौरान नई दिल्ली से लखनऊ जा रही तेजस एक्सप्रेस को एहतियातन गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया। ट्रेन करीब 27 मिनट तक वहां खड़ी रही। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर कई अन्य ट्रेनों को भी रोक दिया गयाजिससे कुछ समय के लिए इस रूट पर रेल यातायात प्रभावित हुआ।रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक की जांच की और सीमेंटेड स्लीपर को हटवाया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद रात लगभग 9:19 बजे ट्रैक को पूरी तरह क्लियर कर दिया गयाजिसके बाद तेजस एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों को रवाना किया गया।
आरपीएफ इंस्पेक्टर हरीश कुमार मीणा ने बताया कि मगरवारा स्टेशन के पास गिट्टी उतारने का कार्य चल रहा है। संभव है कि ट्रेनों की तेज धमक के कारण सीमेंटेड स्लीपर ट्रैक पर आ गया हो। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह किसी अराजक तत्व की शरारत हो। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।वहीं मगरवारा स्टेशन मास्टर शिव बहादुर ने बताया कि डाउन लाइन पर स्लीपर पड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह निर्माण कार्य के दौरान अपनी जगह से खिसक सकता हैलेकिन साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पीडब्ल्यूआई स्थायी मार्ग निरीक्षक- की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए स्लीपर हटाया और ट्रैक को सुरक्षित घोषित किया।
इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस एक्सप्रेस जैसी हाई-स्पीड और प्रीमियम ट्रेन को निशाना बनाए जाने की आशंका ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। रेलवे अब आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहा है और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।उधरप्रदेश के कई हिस्सों में घने कोहरे का असर भी रेल यातायात पर साफ दिखाई दिया। मुरादाबाद मंडल समेत उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार धीमी रही और कई प्रमुख ट्रेनें घंटों की देरी से चलीं। दृश्यता कम होने के चलते लोको पायलटों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।
बुधवार को 20505 डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस करीब सवा दो घंटे की देरी से मुरादाबाद पहुंची। वहीं जम्मूतवी-कोलकाता एक्सप्रेसदुर्गियाना एक्सप्रेसअमरनाथ एक्सप्रेस और जनसाधारण एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनें एक से सात घंटे तक लेट रहीं। ट्रेनों के विलंब से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और जंक्शनों पर वेटिंग हॉल यात्रियों से भरे नजर आए। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर लें। साथ ही ट्रैक की सुरक्षा को लेकर निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैंताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जर्मनी में हैं जहां उनकी तस्वीरें दिखाई दी हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए दुनिया भर में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेताओं को महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि वे अपनी आंतरिक लड़ाई में उलझे हुए हैं। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस की आंतरिक कलह का दावा किया था और इसे टीम प्रियंका बनाम टीम राहुल के रूप में पेश किया था। पूनावाला ने कहा था कांग्रेस की आंतरिक कलह अब बाहर आ गई है जो कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति के लिए चिंता का विषय है।
बिट्टू के बयान के बाद कांग्रेस से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर कोई बड़ा विवाद चल रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान न आने से अटकलें और भी तेज हो गई हैं। इस आंतरिक कलह को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाए हैं जबकि कांग्रेस के नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

क्या हैं नए नियम
द्वितीय श्रेणी 35 किग्रा तक सामान मुफ्त 70 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। स्लीपर श्रेणी 40 किग्रा तक मुफ्त 80 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। एसी थ्री टियर/चेयर कार 40 किग्रा तक सामान मुफ्त अधिकतम सीमा भी 40 किग्रा। प्रथम श्रेणी/एसी टू टियर 50 किग्रा तक मुफ्त 100 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। एसी प्रथम श्रेणी 70 किग्रा तक मुफ्त 150 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त अगर कोई यात्री 100 सेंटीमीटर लंबा 60 सेंटीमीटर चौड़ा और 25 सेंटीमीटर ऊंचा सामान लेता है तो उसे ब्रेकवैन या पार्सल वैन में बुक करना होगा। यह सामान यात्री डिब्बों में नहीं ले जाया जा सकेगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि कमर्शियल सामान को निजी सामान के रूप में डिब्बों में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इस नए नियम के लागू होने से यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिक सामान ले जाने के मामले में ध्यान रखना होगा ताकि उन्हें अतिरिक्त शुल्क का सामना न करना पड़े।
रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा प्रदान करना है और साथ ही रेलवे के संसाधनों का भी बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब बांग्लादेश में विजय दिवस मनाए जाने के ठीक एक दिन बाद माहौल संवेदनशील बना हुआ है। बुधवार को ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने भारत में तैनात बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब कर इस विषय पर स्पष्टीकरण मांगा। फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।इस बीच यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर लगातार बयानबाजी और आपसी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया था। यह तलबगी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा दिए गए कथिती भड़काऊ बयानोंको लेकर की गई थी।
पीटीआई-भाषा के अनुसार बांग्लादेश सरकार ने भारत के समक्ष यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि शेख हसीना को भारत में रहते हुए ऐसे बयान देने की अनुमति दी जा रही है जो बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति को अस्थिर कर सकते हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि हसीना अपने समर्थकों को कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसा रही हैं और उनका उद्देश्य आगामी संसदीय चुनावों को बाधित करना है।गौरतलब है कि शेख हसीना इस समय भारत में हैं। बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद से ही बांग्लादेश भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। इस मुद्दे ने भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है।
तनाव को और हवा देने वाले बयान बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी NCP के नेता हसनत अब्दुल्ला की ओर से सामने आए हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि यदि भारत बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश करता है तो ढाका को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘अलग-थलगकरने की दिशा में कदम उठाना चाहिए और क्षेत्र में अलगाववादी तत्वों को समर्थन देना चाहिए। उनके इस बयान को भारत में गंभीर उकसावे के रूप में देखा गया।इन बयानों पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि पिछले एक वर्ष से बांग्लादेश की ओर से बार-बार ऐसे बयान सामने आ रहे हैं जिनमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग कर बांग्लादेश का हिस्सा बनाने की बात की जाती है। मुख्यमंत्री ने इसे न केवल अव्यावहारिक बल्कि खतरनाक सोच करार दिया था।
हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में बांग्लादेश द्वारा इस तरह की बातें सोचना भी गलत मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह तक कहा कि इस तरह की सोच को किसी भी स्तर पर प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए और बांग्लादेश को दी जाने वाली मदद पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।फिलहाल ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली धमकी दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया जाना और तीखे राजनीतिक बयान-इन सबने भारत-बांग्लादेश संबंधों को एक संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस तनाव को कूटनीतिक बातचीत के जरिए कैसे संभालते हैं।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस मुद्दे पर कहा यह कोई निजी पारिवारिक दस्तावेज नहीं हैं। ये भारत के पहले प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय अभिलेख हैं और इन्हें सार्वजनिक अभिलेखागार में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन दस्तावेजों की अदला-बदली को लेकर संसद में कई बार चर्चा हो चुकी है लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया।
विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल उठाया कि क्या 2025 में पीएमएमएल के निरीक्षण के दौरान नेहरू के दस्तावेज गायब पाए गए थे। इसके जवाब में शेखावत ने साफ किया कि ये दस्तावेज लापता नहीं हैं बल्कि सोनिया गांधी के पास हैं और उनका स्थान पूरी तरह से ज्ञात है। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज 2008 में विधिवत तरीके से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन वे अब भी वापस नहीं किए गए हैं।
शेखावत ने आगे कहा सोनिया गांधी से यह पूछा जाना चाहिए कि क्यों ये दस्तावेज अब तक वापस नहीं किए गए जबकि कई बार पीएमएमएल की ओर से पत्र भेजे गए हैं। अगर कुछ छिपाया जा रहा है तो क्या यह सही है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतिहास को सही तरीके से समझने और उसमें सही दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इन दस्तावेजों तक सभी को पहुंच मिलनी चाहिए। विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए शेखावत से पूछा कि क्या अब वह माफी मांगेंगे क्योंकि यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज गायब नहीं थे। कांग्रेस ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए तूल दे रही है।
कुल मिलाकर यह मामला अब एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ सरकार ने नेहरू के दस्तावेजों को सार्वजनिक अभिलेखागार में रखने की जरूरत जताई है वहीं कांग्रेस और गांधी परिवार की ओर से इसे एक निजी और परिवारिक अधिकार बताया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी किस तरह की प्रतिक्रिया देती हैं और सरकार इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहाकांग्रेस का महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है। इनके लिए गांधी का मतलब सिर्फ प्रियंका गांधीराहुल गांधीइंदिरा गांधीराजीव गांधी और संजय गांधी तक सीमित रह गया है। उन्हें उस गांधी से समस्या है जो देश और समाज के लिए खड़ा था। बिट्टू ने दावा किया कि जनता अब उस नाम वाले गांधी को नकार चुकी हैजबकि महात्मा गांधी का सम्मान देश में हमेशा बना रहेगा।राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर बिट्टू ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का नाम रोशन करने के लिए विदेश जाते हैंजबकि राहुल गांधी सैर-सपाटे के लिए विदेश रवाना हो जाते हैं। उन्होंने कहा मैंने अभी राहुल गांधी की तस्वीरें जर्मनी से देखीं। सवाल यह है कि राहुल गांधी हैं कहां? देश के अहम मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिएलेकिन वो विदेश में घूमते नजर आते हैं।
इसके बाद बिट्टू ने राहुल और प्रियंका गांधी के बीच कथित टकराव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि संसद में हाल के दिनों में दिए गए भाषणों को लेकर दोनों के बीच तुलना होने लगी है। बिट्टू के मुताबिककई लोगों ने प्रियंका गांधी के भाषणों की तुलना राहुल गांधी से कीजिससे राहुल नाराज हो गए। उन्होंने कहादोनों गांधी के बीच बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। राहुल गांधी इसी नाराजगी में परिवार और पार्टी से झगड़ा कर विदेश चले गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर गंभीर समस्याएं हैं। उनके अनुसारराहुल गांधी का विदेश जाना केवल व्यक्तिगत दौरा नहींबल्कि पार्टी और परिवार के अंदरूनी तनाव का नतीजा है। हालांकिइन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस में अंदरूनी कलह का दावा किया हो। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस को लेकर ऐसे ही आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने लिखा था किटीम प्रियंका बनाम टीम राहुल अब खुलकर सामने आ गई है और कांग्रेस की आंतरिक कलह सार्वजनिक हो चुकी है।शहजाद पूनावाला ने ओडिशा से कांग्रेस के पूर्व नेता मोहम्मद मुकीम के पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि मुकीम ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मल्लिकार्जुन खरगे को हटाने और प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस समय संगठनात्मक और वैचारिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और आपसी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। दूसरी ओरकांग्रेस की चुप्पी ने इन आरोपों को और हवा दे दी है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन दावों पर सफाई आ सकती हैलेकिन फिलहाल भाजपा इन बयानों के जरिए विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रिश्तों को लेकर लगाए गए ये आरोप सियासी बयानबाजी का हिस्सा हैं या वास्तव में पार्टी के भीतर किसी बड़े बदलाव का संकेतयह आने वाला समय ही बताएगा।

भाजपा ने इस वीडियो पर त्वरित प्रतिक्रिया दी है और ममता बनर्जी से सवाल किया है कि उनके सांसद ने सदन के अंदर इस तरह का व्यवहार क्यों किया। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने वीडियो को शेयर करते हुए कहा यह व्यक्ति मानो संसद के अंदर नियमों और कानूनों को नजरअंदाज करने में कोई शर्म महसूस नहीं करता। उन्होंने कहा सदन में इस तरह का व्यवहार बिल्कुल अस्वीकार्य है। ममता बनर्जी को इस पर जवाब देना चाहिए।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखित शिकायत सौंपते हुए इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि कीर्ति आजाद लंबे समय से सदन में ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं जो सदन के नियमों के खिलाफ है।
यह घटना तब सामने आई जब पिछले हफ्ते लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान अनुराग ठाकुर ने एक TMC सांसद द्वारा ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया था। हालांकि उन्होंने उस वक्त सांसद का नाम नहीं लिया था लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया कि वह कीर्ति आजाद की ओर इशारा कर रहे थे। भाजपा ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा है कि संसद जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर इस तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि लोकसभा अध्यक्ष इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और ममता बनर्जी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।