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  • सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टक्कर मिलेगा नया विजेता

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टक्कर मिलेगा नया विजेता


    पुणे । सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टीमें आमने-सामने होंगी और इस बार यह टूर्नामेंट एक नया विजेता पैदा करने की ओर बढ़ रहा है। मंगलवार को हरियाणा ने अपनी शानदार बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ हैदराबाद को 124 रनों से करारी शिकस्त दी और फाइनल में अपनी जगह पक्की की। वहीं झारखंड ने भी अपनी शानदार प्रदर्शन से फाइनल में प्रवेश किया है। यह दोनों टीमें पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची हैं जो इस मैच को और भी रोमांचक बना देता है।

    हरियाणा की धमाकेदार जीत
    हरियाणा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 246 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। सलामी बल्लेबाज अंकित कुमार ने 27 गेंदों में 57 रन बनाये और अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। उन्होंने अर्श रंगा  के साथ मिलकर 81 रनों की साझेदारी की। अंकित की आक्रामक बल्लेबाजी में छह छक्के और एक चौका शामिल था। इसके बाद सामंत जाखड़ ने 22 गेंदों में आठ छक्कों और एक चौके की मदद से 60 रन बनाकर टीम को और ऊंचाई तक पहुंचाया। अंत में पार्थ वत्स ने भी 19 गेंदों में चार चौके और तीन छक्के जड़ते हुए 45 रन बनाये।

    हैदराबाद के लिए लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं था। हैदराबाद की टीम केवल 122 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। अमित राणा ने गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 रन पर तीन विकेट लिए वहीं सामंत जाखड़ इशांत भारद्वाज और अंशुल कंबोज ने भी दो-दो विकेट चटकाए।

    झारखंड की टीम भी फाइनल में

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 का फाइनल भी रोमांचक होने की संभावना है क्योंकि झारखंड की टीम ने भी शानदार क्रिकेट खेला है। ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और अब वे हरियाणा के खिलाफ खिताबी भिड़ंत के लिए तैयार हैं।

    फाइनल का रोमांच

    फाइनल में हरियाणा और झारखंड दोनों ही टीमों ने इस सीजन में अपने शानदार खेल से सभी को प्रभावित किया है। हरियाणा की ओर से अंकित कुमार और सामंत जाखड़ की तूफानी बल्लेबाजी ने उन्हें सेमीफाइनल में हैदराबाद को हराने में मदद की जबकि झारखंड ने भी अपने सामूहिक प्रदर्शन से फाइनल में जगह बनाई। इस मुकाबले में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हरियाणा अपना पहला सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खिताब जीत पाती है या फिर झारखंड अपने पहले खिताब के साथ इतिहास रचने में सफल होता है।

    मुकाबला पुणे में

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 का फाइनल मैच 18 दिसंबर को पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मैच दो शानदार टीमों के बीच होगा जो दोनों ही पहली बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची हैं और इस कारण इस मुकाबले का रोमांच काफी बढ़ चुका है। अब देखना यह है कि कौन सी टीम इस ऐतिहासिक खिताबी भिड़ंत में बाजी मारती है और नया विजेता बनता है!
  • यूपी में जल्द कैबिनेट विस्तार! छह नए मंत्रियों की एंट्री और तीसरे उपमुख्यमंत्री की संभावना तेज

    यूपी में जल्द कैबिनेट विस्तार! छह नए मंत्रियों की एंट्री और तीसरे उपमुख्यमंत्री की संभावना तेज


    नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार होने की अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि सरकार संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाने के लिए कैबिनेट में बड़े बदलाव कर सकती है। सूत्रों के अनुसारइस विस्तार में छह नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है और साथ ही प्रदेश को तीसरा उपमुख्यमंत्री भी मिल सकता है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकवर्तमान में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री हैंजबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्रियों की अनुमति है। ऐसे में छह पद खाली हैंजिन्हें भरने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया में केवल नए चेहरों की एंट्री ही नहीं होगीबल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है। इसका उद्देश्य सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना और आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करना है।

    तीसरे उपमुख्यमंत्री की चर्चा क्यों?

    इस बार कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी चर्चा तीसरे उपमुख्यमंत्री को लेकर है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री हैं-केशव प्रसाद मौर्यओबीसी वर्ग और बृजेश पाठकब्राह्मण वर्ग। सूत्रों के अनुसारतीसरे उपमुख्यमंत्री का पद अनुसूचित जातिSC समुदाय को दिए जाने की संभावना हैजिससे सामाजिक संतुलन को और मजबूत किया जा सके। इस पद के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद साध्वी निरंजन ज्योति का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। यदि उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती हैतो यह भाजपा की सामाजिक समरसता की राजनीति को और मजबूती देगा। साथ ही दलित समुदाय में पार्टी के संदेश को भी बल मिलेगा।

    सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस

    भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय को साधने के लिए भी सरकार कैबिनेट में कुछ बड़े चेहरे शामिल कर सकती है। इस संदर्भ में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी चर्चा में है। वे पहले योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।

    बागी नेताओं को भी मिल सकता है मौका

    सूत्रों के मुताबिकइस कैबिनेट विस्तार में भाजपा के कुछ बागी नेताओंसमाजवादी पार्टी से अलगहोकर आएनेताओं और सहयोगी दलों-राष्ट्रीय लोक दलRLDऔर अपना दल-के प्रतिनिधियों को भी जगह दी जा सकती है। संभावित नामों में पूजा पालमनोज पांडेय और महेंद्र सिंह जैसे नेताओं की चर्चा है।राजनीतिक विश्लेषकों कामानना है कि बागीनेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा न सिर्फ विपक्ष की धार कमजोर करना चाहती हैबल्कि अपने राजनीतिक आधार को भी व्यापक बनाना चाहती है।

    चुनावी रणनीति से जुड़ा है विस्तार

    विशेषज्ञों के अनुसारयह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। इससे सरकार को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सामाजिकक्षेत्रीय और जातिगत संतुलन साधने में मदद मिलेगी। नए चेहरों को मौका देकर संगठन के भीतर भी उत्साह बढ़ाया जा सकता है।हालांकिमंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं हुई हैलेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इस पर मुहर लग सकती है। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

  • स्टीव स्मिथ की चोट ने उस्मान ख्वाजा को दिया करियर का आखिरी जीवनदान तीसरे टेस्ट में मिली जगह

    स्टीव स्मिथ की चोट ने उस्मान ख्वाजा को दिया करियर का आखिरी जीवनदान तीसरे टेस्ट में मिली जगह


    नई दिल्ली ।
    ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा को तीसरे एशेज टेस्ट मैच में एक ऐसा मौका मिला जिसका उन्होंने शायद कभी उम्मीद भी नहीं की थी। स्टीव स्मिथ की चोट ने ख्वाजा को क्रिकेट के बड़े मंच पर एक और जीवनदान दिया। जब ऑस्ट्रेलिया की टीम दो-शून्य से आगे थी और किसी को उम्मीद नहीं थी कि ख्वाजा को फिर से खेलने का मौका मिलेगा तब यह चोट उनके लिए वरदान साबित हुई।

    ख्वाजा की वापसी का चमत्कारी कारण

    उस्मान ख्वाजा ने 2022 में टेस्ट क्रिकेट में अपनी वापसी की थी। उस वक्त ट्रैविस हेड की चोट उनके लिए वरदान बनी थी। ख्वाजा की पिछली वापसी भी इसी तरह से हुई थी। अब 2022 में अपने करियर की दूसरी पारी में वो लगातार ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट स्क्वॉड का हिस्सा बने थे। लेकिन मौजूदा समय में उनकी फॉर्म और फिटनेस समस्याएँ उनके साथ थीं। इस बीच स्टीव स्मिथ को एडिलेड में तीसरे एशेज टेस्ट से पहले ट्रेनिंग के दौरान सिर में चोट लगी जिसके बाद उन्हें वर्टिगो की समस्या का सामना करना पड़ा। इसके चलते उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया और इसने ख्वाजा को टीम में मौका दिया।

    क्या ख्वाजा इस मौके का फायदा उठा पाएंगे

    ख्वाजा के लिए यह मौका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका एडिलेड में टेस्ट क्रिकेट में रिकॉर्ड अच्छा रहा है। 39 साल की उम्र में उनका करियर अब अंतिम दौर में है और एशेज सीरीज के बाद शायद ही वह ऑस्ट्रेलिया की टीम में नजर आएं। 18 दिसंबर को उनका जन्मदिन है और यह उनकी उम्र के लिहाज से एक अहम मोड़ हो सकता है। अब यह देखना बाकी है कि ख्वाजा इस जीवनदान का कितना फायदा उठा पाते हैं और क्या वह अपनी वापसी को और भी यादगार बना सकते हैं।

    स्मिथ की अनुपस्थिति ने ख्वाजा के लिए दरवाजे खोले

    यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि स्टीव स्मिथ की अनुपस्थिति ने ख्वाजा के लिए टीम में जगह बनाई। ख्वाजा को मौका मिलने से उनकी वापसी को लेकर कुछ उम्मीदें बढ़ी हैं हालांकि उनका प्रदर्शन अभी तक उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है। लेकिन इस मौक़े को गंवाना उनके लिए बड़ा जोखिम हो सकता है क्योंकि इस समय उनका करियर एक मोड़ पर खड़ा है। ख्वाजा का यह जीवनदान उन्हें उन फैंस के लिए प्रेरणा बन सकता है जो मानते हैं कि क्रिकेट में कभी भी कुछ भी हो सकता है और एक चोट या एक मौके से करियर में नया मोड़ आ सकता है।

  • लियोनल मेसी ने GOAT इंडिया टूर के समापन पर भारत को धन्यवाद कहा फुटबॉल के भविष्य के प्रति जताई उम्मीद

    लियोनल मेसी ने GOAT इंडिया टूर के समापन पर भारत को धन्यवाद कहा फुटबॉल के भविष्य के प्रति जताई उम्मीद


    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत के महानतम खिलाड़ियों में शामिल लियोनल मेसी ने अपने भारत दौरे के समापन पर एक भावुक संदेश साझा किया। अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर ने भारत के विभिन्न शहरों में अपने शानदार अनुभवों को साझा करते हुए देशवासियों का आभार व्यक्त किया। “नमस्ते इंडिया इस शब्द के साथ मेसी ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश की शुरुआत की और भारत में बिताए गए समय को अविस्मरणीय बताया।

    दौरे की खासियतें

    लियोनल मेसी का GOAT इंडिया टूर भारत के चार प्रमुख शहरों – दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता में हुआ। इस दौरे ने भारत में फुटबॉल प्रेमियों के बीच एक नया उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। इन शहरों में मेसी को जहां जबरदस्त स्वागत मिला, वहीं उनकी यात्रा ने क्रिकेट और फुटबॉल के बीच एक अनोखा संबंध भी स्थापित किया। मेसी ने अपने दौरे के दौरान भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों से भी मुलाकात की, जिनमें क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव जय शाह और भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री शामिल थे। इन मुलाकातों ने मेसी के इस दौरे को और भी खास बना दिया।

    भारत में फुटबॉल का भविष्य

    मेसी ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि भारत में फुटबॉल का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत में फुटबॉल के प्रति बढ़ता प्यार और फुटबॉल के प्रति लोगों का जुनून देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने भारत के फुटबॉल प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा यहां मिले प्यार और समर्थन को कभी नहीं भूलूंगा। मुझे यकीन है कि भारत में फुटबॉल का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।

    भारत में फुटबॉल का महत्व

    भारत में फुटबॉल का इतिहास काफी लंबा और समृद्ध है लेकिन हाल के वर्षों में इस खेल के प्रति लोगों की रुचि में तेजी से वृद्धि हुई है। मेसी का दौरा इस बात का प्रतीक था कि भारत में फुटबॉल अब सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक जुनून बन चुका है। भारतीय फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह और मेसी के प्रति प्यार इसे साबित करता है। मेसी ने इस दौरे के दौरान भारतीय फुटबॉल का समर्थन करने और इसे बढ़ावा देने का वादा किया।

    भारत की मेहमाननवाजी ने किया भावुक

    मेसी ने अपनी यात्रा को एक व्यक्तिगत अनुभव के रूप में भी देखा, जहां उन्हें न सिर्फ फुटबॉल के प्रति भारतीयों का प्यार मिला बल्कि भारतीय संस्कृति और मेहमाननवाजी का भी खास अनुभव हुआ। उन्होंने कहा, भारत में जितना प्यार और अपनापन मुझे मिला, वह किसी और देश में नहीं मिला। यह मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहेगा।

    लियोनल मेसी का GOAT इंडिया टूर भारत के फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक घटना बन गया। मेसी का भारत में आना न केवल फुटबॉल के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कारण बना बल्कि इसने फुटबॉल और क्रिकेट के बीच की दूरी को भी खत्म किया। मेसी के इस दौरे से यह स्पष्ट है कि भारत में फुटबॉल का भविष्य मजबूत और उज्ज्वल है और अब भारत में इस खेल को लेकर और भी ज्यादा उत्साह देखने को मिलेगा।

  • नए NPS नियम लागू: रिटायरमेंट पर पैसा निकालते समय यह गलती पड़ सकती है भारी

    नए NPS नियम लागू: रिटायरमेंट पर पैसा निकालते समय यह गलती पड़ सकती है भारी

    नई दिल्ली।रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंता होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए नेशनल पेंशन सिस्टम NPS को देश की सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट स्कीम्स में गिना जाता है। साल 2025 से NPS के नए नियम लागू हो चुके हैं, जो निवेशकों को पहले से ज्यादा लचीलापन तो देते हैं, लेकिन साथ ही एक गलत फैसले का जोखिम भी बढ़ा देते हैं।पेंशन फंडरेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटीPFRDA द्वारा किए गए बदलावों का सही इस्तेमाल किया जाए तो रिटायरमेंट आरामदायक हो सकता है, लेकिन अगर निवेशक केवल एकमुश्त रकम निकालने के लालच में आ गए, तो भविष्य में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
    NPS के नए नियम क्या कहते हैं?
    PFRDA के नए नियम मुख्य रूप से नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स, यानी ऑल सिटिजन मॉडल और कॉरपोरेट NPS निवेशकों पर लागू होते हैं। सबसे बड़ा बदलाव अनिवार्य एन्युटी निवेश को लेकर किया गया है।पहले नियमों के तहत रिटायरमेंट पर कुल NPS कॉर्पस का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा एन्युटी में लगाना जरूरी था। अब इसे घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद निवेशकों को रिटायरमेंट के समय 80 प्रतिशत तक रकम एकमुश्तLump Sum निकालने की सुविधा मिल गई है। कुछ खास परिस्थितियों में 100 प्रतिशत तक निकासी की अनुमति भी दी गई है।

    एन्युटी को नजरअंदाज करना क्यों हो सकता है खतरनाक?
    एन्युटी वह व्यवस्था है, जिसके जरिए रिटायरमेंट के बाद निवेशक को हर महीने नियमित पेंशन मिलती है। नए नियमों में भले ही इसकी अनिवार्यता कम कर दी गई हो, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है।अगर किसी निवेशक का कुल NPS कॉर्पस 12 लाख रुपये से अधिक है, तो कम से कम 20 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होगा। यह नियम न सिर्फ 60 साल की उम्र में रिटायरमेंट लेने वालों पर लागू होता है, बल्कि 60 से 85 वर्ष के बीच NPS से एग्जिट करने वाले निवेशकों पर भी लागू रहेगा। यानी सरकार यह साफ संकेत दे रही है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    कॉर्पस के हिसाब से निकासी के विकल्प
    नए नियमों में NPS कॉर्पस के आधार पर अलग-अलग विकल्प तय किए गए हैं-अगर कुल NPS कॉर्पस 8 लाख रुपये तक है, तो पूरी राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है।अगर कॉर्पस 8 से 12 लाख रुपये के बीच है, तो अधिकतम 6 लाख रुपये लंपसम निकाले जा सकते हैं। बाकी राशि एन्युटी या किश्तों में मिलेगी।अगर कॉर्पस 12 लाख रुपये से ज्यादा है, तो कम से कम 20 प्रतिशत एन्युटी में निवेश जरूरी होगा और शेष 80 प्रतिशत एक साथ निकाला जा सकता है।

    सबसे बड़ी चूक कहां हो सकती है?
    ज्यादा लंपसम निकासी की सुविधा देखकर कई निवेशक पूरा पैसा एक साथ निकालने का फैसला कर लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्च, बढ़ती महंगाई और लंबी उम्र के कारण नियमित आय की जरूरत लगातार बनी रहती है। अगर पेंशन का स्थायी स्रोत नहीं होगा, तो कुछ ही सालों में एकमुश्त रकम खत्म हो सकती है।

    संतुलन बनाना है सबसे जरूरी 
    NPS के नए नियम निवेशकों को आज़ादी जरूर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि लंपसम और एन्युटी के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक हिस्सा एकमुश्त निकालकर जरूरी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं, लेकिन नियमित पेंशन के लिए पर्याप्त एन्युटी रखना रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाता है। NPS के नए नियम राहत देने वाले जरूर हैं, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया फैसला भारी नुकसान पहुंचा सकता है। समझदारी इसी में है कि रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय केवल आज नहीं, बल्कि आने वाले 20–25 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। सही संतुलन ही सुरक्षित और तनावमुक्त रिटायरमेंट की कुंजी है।

  • हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बोले– यह शर्मनाक और पिछड़ी सोच को दर्शाता है

    हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बोले– यह शर्मनाक और पिछड़ी सोच को दर्शाता है

    नई दिल्ली/श्रीनगर।एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम युवती का हिजाब हटाने को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार विवादों में घिरे हुए हैं। इस मामले ने अब राष्ट्रीय राजनीति में भी तूल पकड़ लिया है। जम्मूकश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश कुमार की आलोचना की है और इसे शर्मनाकअस्वीकार्य और पिछड़ी सोच का प्रतीक बताया है। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में किसी महिला के पहनावे को लेकर सार्वजनिक तौर पर दखल देना गलत है। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल महिला की गरिमा के खिलाफ हैबल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक आज़ादी पर भी सीधा हमला है।

    पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

    उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती से जुड़ी एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में सत्ता के दौरान ऐसी सोच पहले भी सामने आती रही है।उन्होंने कहा मेरे चुनाव के समय भी एक घटना सामने आई थीजब एक वैध महिला वोटर का पोलिंग स्टेशन के अंदर बुर्का हटवाया गया था। यह उसी मानसिकता का हिस्सा है। तब जो हुआवह दुर्भाग्यपूर्ण था और आज जो नीतीश कुमार के मामले में हुआ हैवह भी उतना ही शर्मनाक है।

    महिला का सार्वजनिक अपमान अस्वीकार्य

    नीतीश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में किसी महिला का सार्वजनिक रूप से अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद नियुक्ति पत्र नहीं देना चाहते थेतो वे ऐसा करने से इनकार कर सकते थेलेकिन किसी महिला को मंच पर इस तरह अपमानित करना पूरी तरह गलत है।उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को लंबे समय तक एक धर्मनिरपेक्षसंवेदनशील और समझदार नेता के रूप में देखा गयालेकिन इस तरह की घटनाएं उनकी छवि पर सवाल खड़े करती हैं।उन्होंने कहा धीरेधीरे नीतीश कुमार की असली सोच सामने आ रही हैजिसे अब तक लोग अलग नजरिए से देखते थे।

    लोकतंत्र और व्यक्तिगत आज़ादी पर सवाल
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसारयह विवाद केवल एक घटना तक सीमित नहीं हैबल्कि यह महिलाओं के अधिकारधार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद जैसे मुद्दों से जुड़ा हुआ है। उमर अब्दुल्ला का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि देश में सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं से संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। वित्तीय मुद्दों पर केंद्र सरकार को भी घेराइस दौरान उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की राज्यों के वित्तीय अनुशासन पर की गई टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जम्मूकश्मीर को विरासत में मिली आर्थिक चुनौतियों के साथ काम करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद जम्मूकश्मीर को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी नहीं मिल रही हैजिससे बजट पर दबाव बढ़ा है।उमर अब्दुल्ला ने कहाहम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हैं और केंद्र सरकार पर निर्भर हैं। इसके बावजूद हमने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है।

    वित्तीय जिम्मेदारी का दावा
    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले 15–16 महीनों में उनकी सरकार ने किसी भी तरह की वित्तीय लापरवाही नहीं की है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का एक भी मामला सामने आता हैतो वह खुद जवाबदेही लेने को तैयार हैं। हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का बयान न केवल नीतीश कुमार की आलोचना हैबल्कि यह महिलाओं की गरिमाव्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी है। यह मामला आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकता है।

  • मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

    मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार में खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने हाल ही में कोलकाता में हुए लियोनेल मेसी के GOAT टूर कार्यक्रम से जुड़ी घटनाओं को लेकर इस्तीफा दे दिया। मेसी के कार्यक्रम में कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अराजकता और तोड़फोड़ के बाद बिस्वास पर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे पर तनाव बढ़ने के बाद बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने खुद को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया।

    बिस्वास ने पत्र में कहा कि वे मेसी इवेंट की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उनका यह कदम इस विवाद की गंभीरता को दर्शाता है और टीएमसी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संदेश भेजता है खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है और अब खुद इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।

    इस विवाद के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल SIT का गठन किया है। SIT में चार वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को शामिल किया गया है। मुख्य सचिव मनोज पंत ने बताया कि एसआईटी की जांच में कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बिधाननगर के पुलिस उपायुक्त अनीश सरकार को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही बंगाल के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और सॉल्ट लेक स्टेडियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी के नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं।

    इस घटना के बाद टीएमसी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के विवाद या आलोचना से बचने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी जांच करेगी। इस मामले में बिस्वास का इस्तीफा और जांच के आदेश इस बात का संकेत हैं कि ममता बनर्जी की सरकार आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की अनावश्यक नकारात्मकता से बचना चाहती है। यह पूरा विवाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है जो आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।

  • मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज की मंजूरी

    मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज की मंजूरी


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस कदम से राज्य के कर्मचारियों को स्थिर रोजगार मिलने की संभावना है जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
    कैबिनेट ने अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में आवश्यक संशोधन करने को मंजूरी दी है। इस फैसले से न केवल कर्मचारियों की स्थिरता बढ़ेगी बल्कि विभागों में कामकाजी वातावरण भी सुधरेगा। यह निर्णय उन अस्थाई कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो वर्षों से अस्थायी पदों पर कार्यरत थे और स्थायिता का इंतजार कर रहे थे।
    इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने डूब प्रभावितों के लिए एक बड़ा राहत पैकेज भी मंजूर किया है। अपर नर्मदा परियोजना राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के तहत प्रभावित 13 873 परिवारों को 1 782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मिलेगा। इसके अलावा एससी और एसटी समुदाय के 50 000 परिवारों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी। प्रत्येक प्रभावित परिवार को 12.50 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। इन परियोजनाओं से 71 000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 125 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
    कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2025-26 के लिए 693 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 3810 कार्यों को पूरा किया जाएगा। इसके अलावा भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के मेंटिनेंस के लिए 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को भी स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत राज्य सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 905 करोड़ 25 लाख रुपये को मंजूरी दी है। यह योजना राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
    आखिरकार वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया है जो पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों से राज्य के विकास को नया मोड़ मिलेगा और साथ ही सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह कदम राज्य के नागरिकों की भलाई के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार ये काम करने से घर से चली जाती हैं मां लक्ष्मी, जानें पूरी सूची

    ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार ये काम करने से घर से चली जाती हैं मां लक्ष्मी, जानें पूरी सूची


    नई दिल्ली /मां लक्ष्मी, धन, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। हर कोई अपने घर में उनकी कृपा पाने के लिए पूजा-पाठ और साधनाओं का सहारा लेता है। लेकिन ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि कुछ ऐसी आदतें और व्यवहार हैं, जो घर में लक्ष्मी के वास को रोकते हैं। यदि कोई इनका पालन करता है, तो घर में धन और सुख की कमी हो सकती है।

    लक्ष्मी को नापसंद करने वाले कार्य
    पुराण के अनुसार, निम्नलिखित परिस्थितियों में लक्ष्मी का वास नहीं रहता:शंख ध्वनि न होना और तुलसी का न होना- जहां शंख की ध्वनि नहीं होती और तुलसी का पौधा नहीं होता, वहां लक्ष्मी नहीं रहती।शिव और ब्राह्मणों की अनदेखी- जहां शिवलिंग की पूजा और ब्राह्मणों को भोजन नहीं कराया जाता, वहां लक्ष्मी का मन नहीं लगता।भक्तों की निंदा- जिस घर में भक्तों की निंदा होती है, वहां लक्ष्मी का क्रोध उत्पन्न होता है और वे घर छोड़ देती हैं। एकादशी और जन्माष्टमी की अनदेखी- एकादशीऔर जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीहरि और कृष्ण का पूजन न करना भी लक्ष्मी को नाराज करता है अशुद्ध हृदय और क्रूरता- क्रूर, हिंसक, निराशावादी या निंदक व्यक्ति के घर लक्ष्मी नहीं टिकती। अतिथि अन्न का त्याग- यदि घर में अतिथियों को भोजन नहीं दिया जाता, तो लक्ष्मी का वास समाप्त हो जाता है। अनैतिक या अस्वच्छ आदतें- भिगे पैर या नंगे होकर सोना, बेसिर-पैर की बातें करना, निराशावादी होना, दिन में सोना और सूर्योदय के समय भोजन करना जैसी आदतें लक्ष्मी को दूर भगाती हैं। अनुचित व्यवहार और अपवित्रता- अपने सिर का तेल किसी पर लगाना, अपवित्रता और विष्णुभक्ति में कमी होना, ब्राह्मणों की निंदा करना, जीवों के साथ हिंसा करना, दयारहित होना आदि भी लक्ष्मी को नाराज कर देता है।

    लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले उपाय

    ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार घर में लक्ष्मी निवास करती हैं: भगवान श्रीहरि और श्रीकृष्ण का गुणगान- जहां इनके गुणों का गान और चर्चा होती है, वहां लक्ष्मी का वास होता है। शंख ध्वनि और पूजा- शंख की ध्वनि, शिवलिंग की पूजा, शालिग्राम और तुलसी के पौधे की स्थापना, कीर्तन और वंदना से लक्ष्मी हमेशा घर में रहती हैं। सकारात्मक और धार्मिक वातावरण- पवित्र कीर्तन, दुर्गा पूजा, भक्तों की सेवा और ध्यान से घर में लक्ष्मी की स्थायी उपस्थिति रहती है।

    ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह स्पष्ट किया गया है कि लक्ष्मी का वास केवल पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों पर नहीं बल्कि घर के वातावरण और रहन-सहन पर भी निर्भर करता है। सदाचार, अतिथियों का आदर, भक्तों की सेवा और घर में शुद्धता बनाए रखने से ही मां लक्ष्मी हमेशा प्रसन्न रहती हैं।हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक ग्रंथों परआधारित हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या धार्मिक गुरु से परामर्श लेना चाहिए।घर में सुख-समृद्धि बनाए रखना केवल पूजा का विषय नहीं है, बल्कि शुद्धता, दया और सही आचार-विचार से भी जुड़ा हुआ है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताए गए नियमों का पालन कर लोग घर में धन, सुख और संतोष का अनुभव कर सकते हैं।

  • किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला

    किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला


    उज्जैन/भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए लाई गई विवादास्पद लैंड पूलिंग योजना’ को आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया है। मंगलवार को सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद उन हजारों किसानों ने राहत की सांस ली है जो पिछले कई महीनों से अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

    विरोध की ज्वाला और आंदोलन की चेतावनी

    इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय किसान संघ का कड़ा रुख रहा। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन सरकार को स्थायी निर्माण के लिए नहीं देंगे। 18 नवंबर को हुए ‘डेरा डालो घेरा डालो’ आंदोलन के बाद सरकार ने मौखिक रूप से योजना निरस्त करने की बात कही थी लेकिन बाद में केवल संशोधन का पत्र जारी किया गया। इस वादाखिलाफी से नाराज किसानों ने 26 दिसंबर से पुनः उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी थी जिसके दबाव में अंततः सरकार को पूर्ण निरस्तीकरण का आदेश जारी करना पड़ा।

    अपनों ने भी उठाए थे सवाल

    सरकार के लिए स्थिति तब और असहज हो गई जब सत्तापक्ष के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर साफ कहा था कि यह योजना किसान हित में नहीं है। उन्होंने यहाँ तक चेतावनी दे दी थी कि यदि योजना रद्द नहीं हुई तो वे स्वयं किसानों के साथ आंदोलन में बैठने को मजबूर होंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इस दबाव ने सरकार को पुनर्विचार के लिए विवश किया।

    क्या थी लैंड पूलिंग योजना और क्यों था विरोध

    अगला सिंहस्थ मेला वर्ष 2028 में आयोजित होना है। इसके लिए सरकार चाहती थी कि सिंहस्थ क्षेत्र में आने वाली किसानों की निजी भूमि पर स्थायी निर्माण और बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए। इसके लिए लैंड पूलिंग नीति लाई गई थी।

    किसानों के विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे

    स्थायी कब्जा बनाम अस्थायी उपयोग दशकों से परंपरा रही है कि सिंहस्थ के लिए किसान केवल 5-6 महीनों के लिए अपनी जमीन सरकार को उपयोग हेतु देते थे और मेला समाप्त होने पर जमीन वापस मिल जाती थी। लैंड पूलिंग के तहत जमीन का स्वरूप स्थायी रूप से बदल जाता। रोजी-रोटी का संकट किसानों को डर था कि स्थायी निर्माण के बाद वे खेती नहीं कर पाएंगे जिससे उनकी आजीविका छिन जाएगी।
    अधिकारों का हनन किसान अपनी जमीन पर मालिकाना हक खोने को तैयार नहीं थे।

    निष्कर्ष पुरानी परंपरा ही रहेगी बरकरार

    अब योजना निरस्त होने के बाद 2028 के सिंहस्थ मेले के लिए पुरानी व्यवस्था ही लागू रहने की संभावना है। सरकार अब किसानों से आपसी सहमति और किराए के आधार पर ही मेले के समय जमीन का उपयोग कर सकेगी। यह निर्णय न केवल किसानों की बड़ी जीत माना जा रहा है बल्कि इसे आगामी चुनावों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के सरकारी प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।