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  • उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल क्या है? जानिए इससे शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलेगा और क्यों मचा है सियासी विवाद

    उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल क्या है? जानिए इससे शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलेगा और क्यों मचा है सियासी विवाद


    नई दिल्ली/केंद्र सरकार ने देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए लोकसभा में ‘विकसित भारत शिक्षा बिल 2025’ पेश किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा लाया गया यह बिल उच्च शिक्षा के लिए एक नए उच्च शिक्षा अधिष्ठान Higher Education Authority के गठन का प्रस्ताव करता है। सरकार का दावा है कि इससे देश की कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रणाली अधिक पारदर्शी, गुणवत्ता-आधारित और छात्र-केंद्रित बनेगी, जबकि विपक्ष और शिक्षा विशेषज्ञ इसे संस्थानों की स्वायत्तता पर खतरा बता रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून के तहत एक केंद्रीय आयोग बनाया जाएगा, जिसे देश की पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था की निगरानी का अधिकार होगा। इस आयोग को मुख्य रूप से यह तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी कि कॉलेज और विश्वविद्यालय किस स्तर की पढ़ाई करा रहे हैं, वे नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं और उन्हें कितनी शैक्षणिक स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

    आयोग की संरचना कैसी होगी?
    प्रस्तावित अधिष्ठान में एक अध्यक्ष, एक वरिष्ठ शिक्षाविद या विषय विशेषज्ञ, केंद्र सरकार का प्रतिनिधि और एक सचिव शामिल होंगे। इसके अलावा, आयोग के अंतर्गत तीन अलग-अलग परिषदें बनाई जाएंगी ताकि नियमन, मान्यता और मानक तय करने के काम आपस में टकराएं नहीं।

    तीन परिषदों की भूमिका क्या होगी?

    पहली है नियामक परिषद Regulatory Council । यह परिषद कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के संचालन पर नजर रखेगी। यह सुनिश्चित करेगी कि संस्थान शिक्षा को केवल मुनाफे का जरिया न बनाएं, फंड का सही इस्तेमाल हो और छात्रों व शिक्षकों की शिकायतों का समाधान समय पर हो।

    दूसरी है मान्यता परिषद Accreditation Council । इसका काम यह तय करना होगा कि कौन-सा संस्थान तय शैक्षणिक मानकों पर खरा उतरता है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मान्यता देना या वापस लेना इसी परिषद की जिम्मेदारी होगी। मान्यता से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    तीसरी है मानक परिषद Standards Council। यह परिषद पढ़ाई के स्तर, सिलेबस, क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम और शिक्षकों की योग्यता से जुड़े मानक तय करेगी। इसका मकसद यह होगा कि छात्रों को एक संस्थान से दूसरे संस्थान में जाने में दिक्कत न हो और शिक्षा की गुणवत्ता समान बनी रहे।

    किन संस्थानों पर लागू होगा यह कानून?

    यह बिल सभी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटी, IIT, NIT, कॉलेजों, ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा। हालांकि मेडिकल, कानून, फार्मेसी और नर्सिंग जैसे पेशेवर कोर्स सीधे इस कानून के दायरे में नहीं आएंगे, लेकिन उन्हें भी नए शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा।

    केंद्र सरकार की भूमिका क्या होगी?
    केंद्र सरकार इस अधिष्ठान को दिशा-निर्देश दे सकेगी, प्रमुख पदों पर नियुक्तियां करेगी और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में काम करने की मंजूरी देगी। जरूरत पड़ने पर आयोग या उसकी परिषदों को भंग करने का अधिकार भी सरकार के पास रहेगा। साथ ही, आयोग को हर साल संसद और ऑडिट के सामने जवाबदेह होना होगा।

    इससे क्या बदलाव और फायदे होंगे?
    सरकार का दावा है कि इससे उच्च शिक्षा अधिक छात्र-केंद्रित बनेगी, नए कॉलेज और कोर्स खोलना आसान होगा और रोजगार से जुड़ी स्किल्स पर जोर दिया जाएगा। शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत होगी और छोटे संस्थानों को भी गुणवत्ता सुधार का मौका मिलेगा।

    लेकिन विवाद क्यों है?

    आलोचकों का कहना है कि यह बिल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है। उन्हें डर है कि शिक्षा पर केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा और अकादमिक फैसलों में शिक्षकों व छात्रों की भूमिका घट जाएगी। यह भी आशंका जताई जा रही है कि ग्रामीण और छोटे कॉलेज सख्त नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे और बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

    विपक्ष की आपत्ति क्या है?
    कांग्रेस, टीएमसी और वाम दलों ने इस बिल का विरोध किया है। उनका कहना है कि इतना बड़ा शिक्षा सुधार वाला बिल बिना पर्याप्त चर्चा के पेश किया गया। विपक्षी सांसदों ने इसे संयुक्त संसदीय समिति JPC को भेजने की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अब इस बिल पर विस्तृत जांच और चर्चा होगी।

  • कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम  बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है

    कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है


    नई दिल्ली । कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद और आंतरिक खींचतान को लेकर चल रही अटकलों के बीच वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी के साथ उनके रिश्ते पूरी तरह सामान्य हैं। हाल ही में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस की रैली में उनकी गैरमौजूदगी और कुछ अहम बैठकों में शामिल न होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

    इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने चर्चित समाचार एजेंसी  से बातचीत में साफ कहा कि उनकी तरफ से किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है। रैली में शामिल न हो पाने के सवाल पर उन्होंने कहा मैं जरूर अटेंड करता क्यों नहीं करता? लेकिन उस दिन मैं विदेश में था। यह कार्यक्रम मैंने करीब छह महीने पहले तय किया था। थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी गैरहाजिरी को पार्टी से दूरी या असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक है तो थरूर ने दो टूक जवाब दिया बिल्कुल ठीक है। मुझे यह कहने की जरूरत क्यों पड़े? मेरी तरफ से सब कुछ ठीक है। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व के प्रति भरोसे और प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    इस बीच सोशल मीडिया मंच ‘एक्स पर एक यूजर द्वारा किए गए विश्लेषण ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी। यूजर ने अपने लंबे पोस्ट में शशि थरूर और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच कथित वैचारिक विरोधाभास की बात कही थी। पोस्ट में यह तर्क दिया गया था कि यह विरोधाभास दरअसल कांग्रेस पार्टी के भीतर मौजूद दो अलग-अलग वैचारिक प्रवृत्तियों को दर्शाता है।

    यूजर के अनुसार समस्या थरूर और राहुल गांधी के सह-अस्तित्व में नहीं है बल्कि कांग्रेस की उस अक्षमता में है जिसमें पार्टी अलग-अलग विचारधाराओं को चुनने एकजुट करने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से लागू करने में सफल नहीं हो पा रही है। इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने इसे विचारशील विश्लेषण करार दिया।

    थरूर ने लिखा इस विचारशील विश्लेषण के लिए धन्यवाद। कांग्रेस पार्टी में हमेशा एक से अधिक प्रवृत्तियां रही हैं। आपका आकलन निष्पक्ष है और वर्तमान वास्तविकता की एक निश्चित धारणा को प्रतिबिंबित करता है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वे पार्टी के भीतर वैचारिक विविधता को एक स्वाभाविक और ऐतिहासिक प्रक्रिया मानते हैं न कि टकराव का कारण।

    गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस सांसदों की एक अहम बैठक में भी शशि थरूर शामिल नहीं हुए थे। इस पर भी सवाल उठे थे। हालांकि चर्चित सूत्रों के हवाले से बताया कि थरूर ने बैठक में शामिल न हो पाने की जानकारी पहले ही पार्टी को दे दी थी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय वह कोलकाता में प्रभा खैतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद थे।

    कुल मिलाकर शशि थरूर के हालिया बयानों और स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच किसी बड़े टकराव की बात फिलहाल केवल अटकलों तक सीमित है। थरूर ने न सिर्फ अपनी गैरहाजिरी के कारण गिनाए बल्कि यह भी जताया कि पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं का होना कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में उनके बयान कांग्रेस के भीतर एकता और संवाद के महत्व को रेखांकित करते हैं।

  • NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के सात 'गुनहगार' तीन आतंकवादी ढेर दो स्थानीय लोग गिरफ्तार

    NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के सात 'गुनहगार' तीन आतंकवादी ढेर दो स्थानीय लोग गिरफ्तार


    नई दिल्ली । 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के संबंध में अपनी चार्जशीट दायर कर दी है। इस चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रजिस्टेंस फ्रंट के सात प्रमुख आतंकवादियों को आरोपी ठहराया गया है। इनमें से तीन आतंकवादी मारे जा चुके हैं जबकि दो स्थानीय लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इस हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए थे जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आतंकवादी गतिविधियां और तनाव उत्पन्न हो गया था।

    चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और लश्कर-ए-तैयबा तथा के आतंकवादियों ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया। इसके अलावा पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी इसमें शामिल हैं जिनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी का नाम शामिल है। ये तीनों आतंकवादी श्रीनगर के जंगलों में चलाए गए ऑपरेशन महादेव के दौरान भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गए थे।

    चार्जशीट में एनआईए ने भारतीय दंड संहिता के तहत आर्म्स एक्ट 1969 और यूएपीए 1967 की धारा 13 18 और 20 के तहत आरोप लगाए हैं। इसके अलावा एनआईए ने दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी आरोपी बनाया है। इन दोनों को 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आतंकवादियों को पनाह देने और उन्हें मदद पहुंचाने का आरोप है। पूछताछ के दौरान इन दोनों ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान के ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे।

    एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दोनों स्थानीय कश्मीरियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान भी की। इससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठनों ने इस हमले की साजिश रची थी और इसमें स्थानीय कश्मीरियों का भी सहयोग था।

    चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर हमला करना शुरू कर दिया लेकिन भारतीय सेना के मजबूत डिफेंस सिस्टम के सामने पाकिस्तान की कार्रवाइयां नाकाम हो गईं। अंत में पाकिस्तान को युद्धविराम की ओर कदम बढ़ाना पड़ा।

    यह चार्जशीट आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति और पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को पनाह देने की निरंतर कोशिशों को उजागर करती है। एनआईए द्वारा किए गए इस खुलासे से यह स्पष्ट हो गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और TRF जैसे आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ लगातार साजिशें रच रहे हैं।

    एनआईए की चार्जशीट से यह भी संदेश जाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है और पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा। इस मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपी आतंकवादियों को पकड़ा जाने तक उनकी तलाश जारी रहेगी।

  • पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अमृतसर, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो बने ‘पवित्र शहर’, शराब-मांस पर लगेगी सख्त रोक

    पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अमृतसर, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो बने ‘पवित्र शहर’, शराब-मांस पर लगेगी सख्त रोक


    चंडीगढ़/पंजाब सरकार ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो श्री दमदमा साहिबको आधिकारिक रूप सेपवित्र शहर घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद इन तीनों धार्मिक नगरीयों में शराब तंबाकू नशीले पदार्थों और मांस की बिक्री व उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस संबंध में पंजाब सरकार की ओर से एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है जिसे राज्यपाल की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला इन शहरों के धार्मिक महत्व आस्था और पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

    पंजाब सरकार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक शेखर द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राज्यपाल को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि जिला अमृतसर का चारदीवारी क्षेत्र वॉल्ड सिटीजिला रूपनगर का श्री आनंदपुर साहिब नगर और जिला बठिंडा का तलवंडी साबो नगर अब पंजाब राज्य के पवित्र शहर घोषित किए जाते हैं। यह दर्जा मिलने के बाद इन इलाकों में कई तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण लागू होगा।सरकार ने सबसे पहले आबकारी विभाग को निर्देश जारी किए हैं। विभाग को कहा गया है कि इन तीनों पवित्र शहरों की नगरपालिका सीमाओं के भीतर शराब और उससे जुड़े सभी उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के आदेश तुरंत जारी किए जाएं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में मौजूद शराब के ठेकों को बंद करने या उन्हें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।

    इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। विभाग से अनुरोध किया गया है कि इन पवित्र शहरों में सिगरेट तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ धार्मिक वातावरण शुद्ध रहेगा बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।सरकार ने पशुपालन विभाग को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो की नगरपालिका सीमाओं के भीतर मांस और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री व उपयोग पर रोक लगाने के आदेश जारी किए जाएं। इस कदम को खास तौर पर धार्मिक भावनाओं के सम्मान और पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्थानीय सरकार विभाग को भी अधिसूचना भेजी गई है। साथ ही अमृतसर रूपनगर और बठिंडा के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में इस निर्णय को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी कदम उठाएं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थानीय प्रशासन विस्तृत दिशा-निर्देश और नियमावली जारी करेगा।सरकार के इस फैसले को सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों की पवित्रता से जोड़कर देखा जा रहा है। अमृतसर सिख धर्म का सबसे बड़ा केंद्र है जहां श्री हरमंदिर साहिब स्थित है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास में खालसा पंथ की स्थापना का साक्षी रहा है जबकि तलवंडी साबो जिसे श्री दमदमा साहिब भी कहा जाता है सिखों के पांच तख्तों में से एक है। पंजाब सरकार का कहना है कि इन ऐतिहासिक और धार्मिक शहरों की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला समय की जरूरत था।

  • श्रद्धा कपूर हुईं धुरंधर की फैन बोलीं– पार्ट 2 के लिए तीन महीने का इंतजार बहुत मुश्किल

    श्रद्धा कपूर हुईं धुरंधर की फैन बोलीं– पार्ट 2 के लिए तीन महीने का इंतजार बहुत मुश्किल


    नई दिल्ली
     /मुंबई रणवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित गैंगस्टर ड्रामा फिल्म धुरंधर इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने रिलीज के महज 11 दिनों में 379.75 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है और अब 400 करोड़ क्लब में शामिल होने की ओर तेजी से बढ़ रही है। फिल्म की कमाई ही नहीं बल्कि इसकी कहानी भव्य स्केल और दमदार अभिनय को भी दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री से खूब सराहना मिल रही है।इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे पहले ही धुरंधर की तारीफ कर चुके हैं। ऋतिक रोशन अक्षय कुमार विक्की कौशल सामंथा रूथ प्रभु अल्लू अर्जुन करण जौहर और अनुपम खेर जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं। अब इस कड़ी में बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर का नाम भी जुड़ गया है जिन्होंने फिल्म देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया के जरिए जाहिर की है।

    श्रद्धा कपूर ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर धुरंधर को लेकर अपनी एक्साइटमेंट शेयर करते हुए लिखा कि आदित्य धर जैसी फिल्म बनाकर दर्शकों को पार्ट 2 के लिए इंतजार करवाना इमोशन्स के साथ खेलने जैसा है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि तीन महीने का इंतजार उनके लिए बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं है और मेकर्स को रिलीज डेट पहले करनी चाहिए। श्रद्धा ने फिल्म को ज़बरदस्त अनुभव बताया और यह भी कहा कि अगर अगली सुबह शूट नहीं होता तो वह तुरंत दोबारा थिएटर जाकर फिल्म देखतीं।

    इतना ही नहीं श्रद्धा कपूर ने साल 2025 में रिलीज हुई फिल्मों छावा सैयारा और धुरंधर की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने इन फिल्मों को कंटेंट और मेकिंग के लिहाज से शानदार बताया। साथ ही श्रद्धा ने निर्देशक आदित्य धर की पत्नी और अभिनेत्री यामी गौतम की भी सराहना की जिन्होंने नेगेटिव पब्लिसिटी और विवादों के बावजूद फिल्म के समर्थन में मजबूती से खड़े रहने का काम किया।श्रद्धा की इस स्टोरी को खुद आदित्य धर ने रीपोस्ट किया और उन्हें ढेर सारा प्यार भेजते हुए धन्यवाद कहा। इससे साफ है कि फिल्म को मिल रही प्रतिक्रियाएं पूरी टीम के लिए उत्साह बढ़ाने वाली हैं और पार्ट 2 को लेकर तैयारियां पहले से ही जोरों पर हैं।

    हालांकि धुरंधर की सफलता के बीच कुछ विवाद भी सामने आए। अभिनेता ऋतिक रोशन ने फिल्म के राजनीतिक पहलुओं को लेकर अपनी असहमति जाहिर की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे फिल्म की राजनीति से सहमत न भी हों लेकिन एक सिनेमा के तौर पर उन्होंने इससे बहुत कुछ सीखा है। ऋतिक की इस प्रतिक्रिया पर आदित्य धर ने बेहद संतुलित जवाब दिया और कहा कि फिल्म को मिले प्यार से पूरी टीम का हौसला बढ़ा है और पार्ट 2 में वे दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे। कुल मिलाकर धुरंधर सिर्फ एक बॉक्स ऑफिस हिट फिल्म नहीं बनकर उभरी है बल्कि यह ऐसी फिल्म बन गई है जिसने दर्शकों और सेलेब्रिटीज़ दोनों के बीच गहरी छाप छोड़ी है। श्रद्धा कपूर जैसे सितारों की प्रतिक्रिया ने फैंस की उत्सुकता को और भी बढ़ा दिया है। अब सभी को बेसब्री से ईद 2026 का इंतजार है जब धुरंधर पार्ट 2 सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

  • गणपति को क्यों प्रिय है दूर्वा? आस्था के साथ विज्ञान भी मानता है इसके 5 चमत्कारी फायदे

    गणपति को क्यों प्रिय है दूर्वा? आस्था के साथ विज्ञान भी मानता है इसके 5 चमत्कारी फायदे


    नई दिल्ली/ भारत गणेश चतुर्थी का पर्व आते ही हर घर और मंदिर में भगवान गणेश की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। मोदक, लड्डू, फूल और दीप के साथ जिस चीज़ के बिना गणपति पूजा अधूरी मानी जाती है, वह है दूर्वा घास। धार्मिक मान्यताओं में दूर्वा को भगवान गणेश की सबसे प्रिय वस्तु माना गया है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दूर्वा का महत्व केवल आस्था तक सीमित नहीं है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान भी इसके स्वास्थ्य लाभों को स्वीकार करता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस ने देवताओं और ऋषियों को परेशान कर रखा था। सभी ने भगवान गणेश से सहायता की प्रार्थना की। गणेश जी ने उस राक्षस को निगल तो लिया, लेकिन इससे उनके पेट में अत्यधिक जलन और गर्मी उत्पन्न हो गई। तब कश्यप ऋषि ने उन्हें 21 गांठें दूर्वा घास खाने की सलाह दी। दूर्वा सेवन करते ही उनकी जलन शांत हो गई। तभी से दूर्वा को गणेश जी का प्रिय भोग माना जाने लगा और गणेश चतुर्थी पर इसे अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई।

    धार्मिक महत्व के साथ-साथ दूर्वा में औषधीय गुणों का भंडार भी छिपा है। आयुर्वेद में इसे  अमृत के समान बताया गया है। पहला और सबसे बड़ा फायदा पाचन तंत्र से जुड़ा है। दूर्वा का रस पेट की जलन, एसिडिटी, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है। यह पेट को ठंडक पहुंचाकर गैस और अल्सर जैसी परेशानियों को भी कम करता है।

    दूसरा बड़ा लाभ इम्यूनिटी बढ़ाने से जुड़ा है। दूर्वा में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। नियमित रूप से इसका सीमित सेवन करने से मौसमी बीमारियों से बचाव में मदद मिल सकती है।

    तीसरा फायदा त्वचा के लिए है। दूर्वा का लेप त्वचा पर लगाने से खुजली, रैशेज, एलर्जी और जलन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह त्वचा को ठंडक देती है और घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करती है। यही कारण है कि पारंपरिक घरेलू उपचारों में दूर्वा का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है।

    चौथा महत्वपूर्ण लाभ ब्लड शुगर कंट्रोल से जुड़ा है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा का रस रक्त में शुगर के स्तर को संतुलित करने में सहायक हो सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए इसे एक सहायक घरेलू उपाय माना जाता है, हालांकि सेवन से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    पांचवां और अंतिम फायदा है शरीर को ठंडक पहुंचाना। दूर्वा का स्वभाव शीतल होता है, जिससे गर्मियों में नकसीर, सिर दर्द, पेट की जलन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यही वजह है कि इसे प्राकृतिक कूलेंट भी कहा जाता है।इस गणेश चतुर्थी, जब आप बप्पा को श्रद्धा से दूर्वा अर्पित करें तो यह याद रखें कि यह सिर्फ पूजा की सामग्री नहीं बल्कि प्रकृति का दिया हुआ एक अनमोल औषधीय उपहार भी है। दूर्वा आस्था और विज्ञान के सुंदर संगम का प्रतीक है जो तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक है।

  • भोग व्यवस्था पर संकट: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में पहली बार नहीं लगा बाल और शयन भोग टूटी सदियों पुरानी परंपरा

    भोग व्यवस्था पर संकट: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में पहली बार नहीं लगा बाल और शयन भोग टूटी सदियों पुरानी परंपरा


    मथुरा । वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को एक ऐसी घटना सामने आईजिसने न केवल मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिएबल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी गहरी ठेस पहुंचाई। मंदिर के इतिहास में यह पहली बार हुआजब ठाकुर श्री बांके बिहारी जी को बाल भोग और शयन भोग अर्पित नहीं किया जा सका। यह स्थिति हलवाई को समय पर वेतन न मिलने के कारण उत्पन्न हुईजिसके चलते भोग का निर्माण ही नहीं हो पाया।
    श्री बांके बिहारी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहींबल्कि सनातन परंपराओं और भक्ति भावना का जीवंत केंद्र है। यहां प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ठाकुर जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार ठाकुर जी को दिन में चार बार भोग अर्पित किया जाता है। इसमें सुबह का बाल भोगदोपहर का राजभोगशाम का उत्थापन भोग और रात्रि का शयन भोग शामिल है। लेकिन सोमवार को सुबह और रात के दो प्रमुख भोग न लग पाने से यह परंपरा पहली बार टूटी।
    भोग न लगने के बावजूद मंदिर के पट खुले रहे और ठाकुर जी ने भक्तों को दर्शन दिए। यह दृश्य कई श्रद्धालुओं को भावुक कर गया। भक्तों का कहना था कि ठाकुर जी के दर्शन तो हुएलेकिन बिना भोग के सेवा अधूरी प्रतीत हुई। कई श्रद्धालुओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया। मामले की जड़ में भुगतान की समस्या सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंदिर की व्यवस्थाओं के संचालन के लिए गठित हाई पावर कमेटी के अंतर्गत भोग एवं प्रसाद निर्माण की जिम्मेदारी तय की गई है। ठाकुर जी के लिए भोग तैयार करने वाले हलवाई को प्रतिमाह लगभग 80 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। जानकारी के अनुसारपिछले कुछ महीनों से इस भुगतान में देरी हो रही थी। अंततः हलवाई ने वेतन न मिलने के कारण भोग बनाने से इनकार कर दियाजिससे यह अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हुई।
    इस घटना के बाद मंदिर के गोस्वामियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। गोस्वामियों का कहना है कि ठाकुर जी की सेवा सर्वोपरि है और उसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अव्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण मंदिर की गरिमा और परंपराओं को नुकसान पहुंचा है। गोस्वामियों ने मांग की है कि भविष्य में इस तरह की चूक न होइसके लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था की जाए।
    हाई पावर कमेटी की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई है। कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिलीतुरंत संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति से बातचीत की गई। हलवाई के लंबित भुगतान को शीघ्र करने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ हीभविष्य में भोग व्यवस्था बाधित न होइसके लिए कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है।
    यह मामला केवल एक प्रशासनिक चूक भर नहींबल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। बांके बिहारी मंदिर में भोग को ठाकुर जी की सेवा का अभिन्न अंग माना जाता है। ऐसे में इस परंपरा का टूटना भक्तों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। अब सभी की नजरें मंदिर प्रशासन और हाई पावर कमेटी पर टिकी हैं कि वे इस घटना से सबक लेकर व्यवस्था को कैसे मजबूत करते हैंताकि भविष्य में आस्था और परंपरा पर दोबारा कोई संकट न आए।

  • टीम इंडिया को दोहरा झटका: अक्षर पटेल टी20 सीरीज से बाहर, बुमराह की वापसी पर सस्पेंस बरकरार

    टीम इंडिया को दोहरा झटका: अक्षर पटेल टी20 सीरीज से बाहर, बुमराह की वापसी पर सस्पेंस बरकरार



    नई दिल्ली। लखनऊ / धर्मशाला में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज के बीच भारतीय क्रिकेट टीम के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। टीम के भरोसेमंद ऑलराउंडर अक्षर पटेल स्वास्थ्य समस्याओं के चलते सीरीज के बचे हुए दो मुकाबलों से बाहर हो गए हैं। यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब सीरीज निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है और टीम इंडिया बढ़त को बरकरार रखने की कोशिश में जुटी हुई है।

    बीसीसीआई की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि अक्षर पटेल धर्मशाला में खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले के दौरान प्लेइंग इलेवन के चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। उनकी तबीयत में अपेक्षित सुधार न होने के कारण मेडिकल टीम ने उन्हें आगे के मैचों में खेलने से रोकने का फैसला किया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अक्षर टीम के साथ लखनऊ जाएंगे, जहां उनकी नियमित मेडिकल जांच की जाएगी और रिकवरी पर नजर रखी जाएगी। अक्षर के बाहर होने के बाद भारतीय टीम प्रबंधन ने उनके विकल्प के तौर पर बंगाल के ऑलराउंडर शाहबाज अहमद को टीम में शामिल किया है। शाहबाज अहमद घरेलू क्रिकेट में अपने हरफनमौला प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं और पहले भी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। उन्होंने अब तक तीन वनडे और दो टी20 मुकाबले खेले हैं, हालांकि टी20 फॉर्मेट में उन्हें बल्लेबाजी का ज्यादा अवसर नहीं मिला है। इसके बावजूद टीम को उनसे गेंद और बल्ले दोनों से संतुलन देने की उम्मीद रहेगी।

    इस बीच तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बुमराह तीसरे टी20 मैच के दौरान टीम चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे और निजी कारणों के चलते स्वदेश लौट गए थे। अब तक उनकी वापसी को लेकर बीसीसीआई या टीम मैनेजमेंट की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। उनकी अनुपस्थिति में युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा को मौका मिला, जिन्होंने अपनी ऊर्जा और गति से प्रभावित किया।सीरीज के मौजूदा हालात की बात करें तो भारतीय टीम ने तीसरे टी20 मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका को हराया और सीरीज में 2-1 की अहम बढ़त हासिल की। इस जीत ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया है, लेकिन अंतिम दो मैचों से पहले टीम संयोजन में बदलाव चुनौती बन सकता है।

    अंतिम दो मुकाबलों के लिए भारतीय टीम की कमान कप्तान सूर्यकुमार यादव के हाथों में रहेगी, जबकि उपकप्तान की भूमिका शुभमन गिल निभाएंगे। टीम में हार्दिक पंड्या, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, संजू सैमसन और विकेटकीपर जितेश शर्मा जैसे आक्रामक और संतुलित खिलाड़ी शामिल हैं। गेंदबाजी विभाग में वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, वाशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा और शाहबाज अहमद टीम की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    अक्षर पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ी की गैरमौजूदगी निश्चित रूप से टीम के संतुलन को प्रभावित कर सकती है, खासकर मिडिल ओवर्स में। ऐसे में शाहबाज अहमद के लिए यह खुद को साबित करने का सुनहरा मौका होगा। वहीं, अगर जसप्रीत बुमराह की वापसी होती है तो यह भारतीय टीम के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।अब सभी की नजरें लखनऊ में होने वाले अंतिम दो मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां टीम इंडिया सीरीज जीत की मुहर लगाने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

  • MP: बालाघाट के जंगल से नक्सली डंप से लाखों रुपये बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले

    MP: बालाघाट के जंगल से नक्सली डंप से लाखों रुपये बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले


    बालाघाट।
    मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) को हाल ही में उस वक्त एक बड़ी सफलता मिली, जब उसने बालाघाट (Balaghat) में नक्सलियों (Naxalites) से अबतक की सबसे बड़ी रिकवरी की। इस दौरान पुलिस ने जंगलों में छुपाकर रखी गई माओवादियों की करीब साढ़े ग्यारह लाख रुपए की नगद राशि बरामद (Cash Amount Recovered) की। पुलिस ने इस कार्रवाई को आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली गोपनीय जानकारी के आधार पर अंजाम दिया।

    इस बारे में एक प्रेस नोट जारी करते हुए बालाघाट पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से उनके सहयोगियों एवं जंगल मे छिपाए गए डंप के संबध मे लगातार पूछताछ की जा रही है। इसी दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों से पूछताछ के आधार पर बालाघाट के विभिन्न जंगलों में डम्प करके छिपाए गए 11 लाख 57 हजार 385 रुपए नगद की रिकवरी की गई, जो बालाघाट में नक्सलियों से की गई अब तक की सबसे बडी कैश रिकवरी है।

    पुलिस ने बताया कि इसके अलावा आत्मसमर्पण किए हुए नक्सलियों की निशादेही से बालाघाट के विभिन्न जंगल से भारी मात्रा मे डम्प किए गए रायफल, पिस्टल, एम्युनेशन, ग्रेनेड लॉन्चर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, IED निर्माण सामग्री एवं विस्फोटक सहित अन्य सामग्रियां जब्त की गई हैं।


    इन हथियारों व विस्फोटक सामग्री की हुई बरामदगी

    4 सेमीऑटोमैटिक राइफल, 1 ग्रेनेड लॉन्चर, 1 बोल्ट एक्शन राइफल, 8 पम्प एक्शन सिंगल शॉट राइफल, 1 हैंड मेड देशी कट्टा, 5 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 1 वोल्ट मीटर, 4 बैटरीसेल, 451 राउंड कारतूस, 26 मैगजीन, 1 क्लेमोर माइन्स पाइप, 500 ग्राम बारूद, 16 किलो विस्फोटक सामग्री, 22 नग मेटल स्पाइक्स, 2 किलो बोल्ट व छर्रे, 4 मोटोरोला मैन पैक सेट, 1 कैमरा व बड़ी संख्या में अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस।

    इसके अलावा दैनिक उपयोग कि सामग्री टेंट बनाने का सामान, नक्सल वर्दी, पिड्डु बैग, नक्सल साहित्य, राशन सामग्री, खाना पकाने का सामान, हथियार मेंटेनेंस सामग्री, ड्रिल मशीन, अन्य सामग्री भी बरामद हुई है।


    आखिरी दो नक्सलियों ने किया था आत्मसमर्पण

    बता दें कि मध्यप्रदेश में नक्सल विरोधी सर्चिग अभियान के दौरान मुठभेड़ में मारे जाने के डर से 11 दिसंबर को मध्यप्रदेश में बचे हुए अंतिम 2 नक्सलियों DVCM दीपक उर्फ सुधाकर एवं ACM रोहित उर्फ मंगलू ने भी आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने यह कदम शासन की नीतियों पर विश्वास जताते हुए किया था। पुलिस के अनुसार मध्यप्रदेश में इस साल अब तक सबसे ज्यादा 13 हार्डकोर सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों ने भारत के संविधान पर अपनी निष्ठा जताते हुए हथियार त्याग कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 10 हार्डकोर नक्सलियों को सुरक्षाबलों द्वारा धराशायी कर दिया गया है।

    भारत सरकार द्वारा नक्सलवाद के उन्मूलन हेतु मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पुलिस द्वारा लगातार चलाए जा रहे सर्चिंग अभियानों के परिणाम स्वरूप मध्य प्रदेश से सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त किया जा चुका है।

  • भोपाल में साकार हुआ कुंभलगढ़ दुर्ग जैसा 'महाराणा प्रताप लोक'मेवाड़ की वीरगाथा को मिलेगा नया रूप

    भोपाल में साकार हुआ कुंभलगढ़ दुर्ग जैसा 'महाराणा प्रताप लोक'मेवाड़ की वीरगाथा को मिलेगा नया रूप


    भोपाल । भोपाल में अब एक नई ऐतिहासिक धरोहर जुड़ गई है। राजधानी के तात्या टोपे नगर क्षेत्र में महाराणा प्रताप लोक का निर्माण पूरा हो गया है। यह परिसर लगभग चार एकड़ में फैला हुआ है और इसे जैसलमेर स्थित प्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग की प्रतिकृति के तौर पर डिजाइन किया गया है। इस स्थल पर मेवाड़ के राजपूत शासकोंखासकर महान योद्धा महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा को जीवंत किया जाएगा।

    मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कार्यकारी अभियंता बृजेश तिवारी के अनुसारमहाराणा प्रताप लोक का निर्माण कार्य अब पूरा हो चुका है। इस परिसर का मुख्य आकर्षण महाराणा प्रताप की 20 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा हैजो उन्हें उनके प्रिय घोड़े चेतक पर आक्रमण की मुद्रा में दिखाती है। यह प्रतिमा न केवल शौर्य और वीरता का प्रतीक हैबल्कि यह मेवाड़ की ऐतिहासिक धरोहर को भी सम्मानित करती है।

    प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार नीरज अहिरवार ने किया है। इस मूर्तिकला का वजन करीब 2.5 टन है और इसकी लागत लगभग 35 लाख रुपये आई है। यह मूर्ति महाराणा प्रताप के महान युद्ध कौशल और उनकी देशभक्ति को प्रदर्शित करती हैजिससे आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा ले सकेंगी।

    महाराणा प्रताप लोक में कई अन्य आकर्षण भी होंगेजिनमें मेवाड़ की वीर गाथाओं को दर्शाने वाले चित्रशिल्प और अन्य ऐतिहासिक सामग्री भी शामिल की जाएगी। यह स्थल न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर के रूप में उभरेगाबल्कि यह क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और लोगों को भारतीय वीरता और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करेगा।

    भोपाल में यह परियोजना न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगीबल्कि यह राज्य के सांस्कृतिक इतिहास और गौरव को भी प्रमोट करेगी। इस परिसर के उद्घाटन के बादमहाराणा प्रताप लोक की शौर्यगाथा को और अधिक लोगों तक पहुँचाने का रास्ता खुलेगा। यह स्थल न केवल स्थानीय लोगों के लिएबल्कि राज्य और देश भर के पर्यटकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।