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3. ऊटी, तमिलनाडु – हरियाली और पहाड़ी रोमांस
हरियाली और ठंडी हवा के बीच अगर आप शांत और रोमांटिक पल बिताना चाहते हैं तो ऊटी आपके लिए सही है। नीलगिरी पहाड़ों के बीच बसे ऊटी में आप ऊटी लेक, रोज गार्डन, नीलगिरी माउंटेन रेलवे और पास के कुन्नूर घूम सकते हैं। यहाँ का मौसम और प्राकृतिक सुंदरता आपके हनीमून को यादगार बना देगा।
4. दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल – चाय बागानों और पहाड़ियों का नजारा
अगर आप अपने हनीमून को और भी रंगीन बनाना चाहते हैं तो दार्जिलिंग एक शानदार विकल्प है। यहाँ चाय के बागान, देवदार के जंगल और रंग-बिरंगे नदियों का संगम आपका मन मोह लेंगे। आप माउंट कैनिंग और टाइगर हिल जैसी जगहों की सैर कर सकते हैं, जहाँ से सूर्योदय का दृश्य बेहद रोमांटिक लगता है।
हनीमून के लिए टिप्स
बुकिंग जल्दी करें: सर्दियों में हनीमून डेस्टिनेशन जल्दी भर जाते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग कर लें।
बजट का ध्यान रखें: चाहे आप लग्जरी होटल लें या बजट में रहें, हर जगह रोमांस का अनुभव शानदार रहेगा। सही मौसम का चुनाव: ठंडी जगहों के लिए गर्म कपड़े साथ रखें और हल्की ठंडी जगहों के लिए हल्के कपड़े पर्याप्त हैं।सर्दियों में हनीमून के लिए भारत के ये डेस्टिनेशन नए जोड़ों के लिए परफेक्ट हैं। चाहे बर्फीले पहाड़ हों, रेगिस्तान की सुनहरी धूप, हरियाली से भरे हिल स्टेशन हों या चाय के बागानों वाली पहाड़ियों का रोमांस, हर जगह अपने खास अनुभव के लिए यादगार बन सकती है। अपने हनीमून की योजना अभी बनाएं और अपने जीवन के सबसे रोमांटिक पलों का आनंद लें।

मनरेगा की जगह VB-G RAM G
मनरेगा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिरता देने वाला एक महत्वपूर्ण कानून माना जाता है। यह कानून ग्रामीण इलाकों के बेरोजगारों को कम से कम 100 दिन का रोजगार मुहैया कराता है। हालांकियह योजना कई मायनों में विफल रही है और सरकार ने अब इसे बदलने का निर्णय लिया है। नए विधेयक का मकसद रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिनों तक करना है और इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में नई रोजगार योजनाओं को लागू करना है।
क्या है VB-G RAM G का उद्देश्य
‘VB-G RAM G’ विधेयक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और जीवन यापन को बेहतर बनाना है। यह विधेयक न केवल रोजगार की गारंटी देगाबल्कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर और स्वरोजगार के विकल्प भी पैदा होंगे। इसके अलावायह योजनाएं ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार करनेग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और महिलाओं तथा युवा वर्ग को रोजगार में अधिक शामिल करने पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी।
125 दिन रोजगार की गारंटी
VB-G RAM G के तहतसरकार अब ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिन का रोजगार देने का वादा कर रही है। इससे पहले मनरेगा में 100 दिन तक रोजगार की गारंटी दी जाती थी। यह कदम सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में स्थिर रोजगार और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया है। इसके तहत ग्रामीण कामकाजी वर्ग को लंबे समय तक रोजगार प्राप्त होगाजिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
BJP ने जारी किया व्हिप
सूत्रों के मुताबिककेंद्र सरकार ने अपने विधायकों और सांसदों को इस विधेयक के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया है। भाजपा ने सुनिश्चित किया है कि इस विधेयक के समर्थन में पूरी पार्टी एकजुट रहेताकि इसे संसद में जल्दी से पास किया जा सके। पार्टी का मानना है कि यह नया विधेयक ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।
नए विधेयक की संभावित विशेषताएं
125 दिन रोजगार की गारंटी: यह मनरेगा से एक कदम आगे होगाजहां ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिन तक काम मिल सकेगा। स्वरोजगार को बढ़ावा: इस विधेयक में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं बनाई जाएंगी। ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार: इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करने का भी प्रस्ताव हैजिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता: महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष रोजगार अवसर दिए जाएंगे। नई परियोजनाओं की शुरुआत: ग्रामीण विकासजल संरक्षणशिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
क्या होगा मनरेगा के स्थान पर
मनरेगा को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जाएगाबल्कि इसे नए विधेयक के तहत अपडेट किया जाएगा। जहां मनरेगा में मुख्य रूप से फिजिकल कामों पर ध्यान केंद्रित किया गया थावहीं VB-G RAM G का उद्देश्य रोजगार के अवसरों को और विस्तारित करना हैताकि अधिक से अधिक लोगों को फायदा हो सके।
आखिरकारइस विधेयक का क्या असर होगा
‘VB-G RAM G’ विधेयक के लागू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिरता में सुधार होगा और श्रमिकों को अधिक काम मिलेगा। इससे न केवल गांवों में आर्थिक सुधार होगाबल्कि यह राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देने के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम हैऔर यह देश के किसानों और श्रमिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकिइसे लेकर विपक्ष में विभिन्न विचार हो सकते हैंलेकिन इसे ग्रामीण विकास और रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

उत्तराखंड का जायका: सादगी और सेहत का अनोखा संयोजन
उत्तराखंड के हर कोने में आपको एक अनोखा जायका मिलेगाजो परंपरा और प्रकृति से गहरे जुड़ा हुआ है। पहाड़ी इलाकों में जहां संसाधनों की कमी रहती हैवहां की रसोई ने सादगी में भी स्वाद का खजाना खोज निकाला है। यहां का खाना न केवल आपके शरीर को ताजगी और ऊर्जा देता हैबल्कि आपके स्वाद कलियों को भी एक नई यात्रा पर ले जाता है।
पहाड़ी व्यंजन: सेहत से भरपूर और स्वादिष्ट
उत्तराखंड की पारंपरिक रसोई में स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल प्रमुख होता है। यहां के भोजन में ताजे और प्राकृतिक सामान का भरपूर उपयोग किया जाता है। खासतौर पर गेंहूमक्काजौदालऔर फल-सब्जियां प्रमुख होती हैं। पहाड़ी खाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘भात’जो विभिन्न प्रकार से पकाया जाता हैजैसे ताजे घी के साथ ‘कढ़ी’ या ‘अलू के पकौड़े’ के साथ।
यहां की सबसे प्रसिद्ध डिश है क्योंली जो जौ से बनी होती है और आलू के गुटके’जो आलू को मसाले और हरी मिर्च के साथ पकाकर बनाए जाते हैं। इन्हें आमतौर पर मक्के की रोटी के साथ खाया जाता है। इसके अलावा गड़ै और घोल भी बहुत लोकप्रिय हैंजो किसी विशेष मौके पर तैयार किए जाते हैं।
जखिया और चूल्हे पर पकते व्यंजन
उत्तराखंड की रसोई में जखिया जो एक प्रकार का धान का भोजन है और लकड़ी के चूल्हे पर पकने वाली डिशेज की खुशबू आपको कहीं भी नहीं मिलती। जब पहाड़ों में सुबह-सुबह ठंडी हवा का एहसास होता हैतो घी और लकड़ी के चूल्हे पर पकने वाले व्यंजनों की खुशबू आपके दिल को सुकून देती है। ये व्यंजनजो पूरी तरह से प्राकृतिक और स्थानीय होते हैंआपके शरीर के लिए बेहद पौष्टिक होते हैं और मन को शांति का अहसास कराते हैं।
नैनीतालमसूरी और केदारनाथ के पारंपरिक व्यंजन
उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलोंजैसे नैनीतालमसूरी और केदारनाथमें पर्यटकों के लिए विशेष प्रकार के व्यंजन उपलब्ध हैं। नैनीताल की ‘सूखी भिंडी’ और मसूरी के ‘पेटिस’ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। वहींकेदारनाथ में ‘भात-दाल’ का स्वाद यात्रा के बाद एक अलग ही आनंद देता है। इन जगहों पर यात्रा करते वक्त इन पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद आपको देवभूमि की असली आत्मा से जोड़े रखता है।
पहाड़ी भोजन का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
उत्तराखंड के पहाड़ी घरों में भोजन केवल पेट भरने का एक साधन नहीं होताबल्कि यह एक सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। यहां की रसोई में एक विशेष सादगी और प्रेम होता हैजो परिवार के हर सदस्य को जोड़ता है। स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों पर परिवार एक साथ बैठकर पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैंजो उनके रिश्तों में गर्माहट और प्यार की भावना पैदा करता है। पहाड़ी भोजन का महत्व सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है। यह हर कौर में प्रकृति और परिवार की मेहनत की महक को समेटे हुए है। इन व्यंजनों के सेवन से शरीर को पौष्टिकता मिलती है और आत्मिक शांति का अनुभव होता है।
उत्तराखंड की रसोई: एक अद्भुत अनुभव
अगर आप उत्तराखंड की यात्रा पर हैंतो सिर्फ पहाड़ों की सुंदरता और मंदिरों की ओर न भागें। उत्तराखंड का असली अनुभव तो उसकी रसोई में बसा है। यहां का हर कौरहर स्वाददेवभूमि की खुशबू और संस्कृति को महसूस कराने में सक्षम है। उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजन न सिर्फ खाने का अनुभव बल्कि एक सांस्कृतिक और आत्मिक यात्रा भी हैंजो आपको जीवनभर याद रहेगी।

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इस पर्व की उत्पत्ति दूसरी सदी ईसा पूर्व की हैजब यहूदी लोगों ने सिरेस साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष किया। उस समय यहूदियों के मंदिर पर विदेशी हुकूमत का कब्ज़ा हो गया था और यहूदी धर्म के धार्मिक कृत्यों पर रोक लगा दी गई थी। मक्काबी विद्रोह के दौरान यहूदियों ने हेरोडियन और सिरीयन साम्राज्य के अधीन अपने मंदिर को वापस हासिल किया। मंदिर को फिर से शुद्ध करना और वहां पुनः पूजा करना यहूदियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।
हनुक्का आठ दिनों तक इसलिए मनाया जाता है क्योंकि जब यहूदी मक्काबी युद्ध के बाद अपने मंदिर में लौटेतो उन्होंने तेल की कमी का सामना किया। मंदिर के मेनोराह दीपमाला में हमेशा प्रकाश जलता रहता थालेकिन उनके पास केवल एक दिन के लिए पर्याप्त शुद्ध तेल बचा था। चमत्कारिक रूप से यह तेल आठ दिनों तक जलता रहाजिससे यहूदियों को नया शुद्ध तेल तैयार करने का समय मिल गया। इस चमत्कारिक घटना के स्मरण में हनुक्का का उत्सव आठ दिनों तक मनाया जाता है।
हनुक्का के दौरान यहूदियों के घरों में मेनोराह या हनुक्कियाह सजाई जाती है। इसमें नौ दीयों का विशेष प्रबंध होता है आठ दिन के लिए हर दिन एक अतिरिक्त दीपक जलाया जाता है और नौवां दीपक जिसे ‘शमाश’ कहते हैंदूसरों को जलाने के लिए इस्तेमाल होता है। इस उत्सव में पारंपरिक भोजन जैसे लेट्टुसेस आलू के पकौड़े डॉनट्स और अन्य तेल में तली हुई चीज़ें बनाई जाती हैंजो मंदिर में तेल के चमत्कार का प्रतीक हैं।
हनुक्का का पर्व केवल धार्मिक आस्था तक ही सीमित नहीं है। यह यहूदी समुदाय के लिए एक सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है। इस दौरान परिवार और मित्र मिलकर हनुक्का गीत गाते हैंखेल खेलते हैं और बच्चों को गिफ्ट्स देते हैं। खासकर द्रेडेल नामक खेलजो छोटी घूमने वाली घूमती हुई वस्तु से खेला जाता हैइस पर्व की पहचान बन चुका है।
इतिहास में हनुक्का ने यहूदी लोगों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की प्रेरणा दी है। यह पर्व हमें संघर्ष के समय में आशा बनाए रखने और अपने विश्वास पर अडिग रहने की शिक्षा देता है। यही वजह है कि हनुक्का न केवल धार्मिक उत्सव बल्कि स्वतंत्रता और साहस का प्रतीक भी माना जाता है।
सन 2025 में हनुक्का 25 दिसंबर से शुरू होकर 1 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। यह समय विशेष रूप से विश्वभर में यहूदी समुदाय के लिए उत्सवरोशनी और सौहार्द का प्रतीक है। हर घर में दीप जलाकर और पारंपरिक व्यंजन बनाकर यहूदी लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हैं और आने वाली पीढ़ियों को इसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं।
हनुक्का के इस पर्व से जुड़े संदेश आज भी प्रासंगिक हैं। यह हमें याद दिलाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ना संभव है। यह पर्व यहूदियों की पहचानसाहस और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक हैजो दुनिया भर में उनके समुदाय और सांस्कृतिक मूल्यों को जोड़ता है। इस प्रकार हनुक्का केवल आठ दिनों की रोशनी का उत्सव नहीं हैबल्कि यह यहूदियों के संघर्षआस्था और चमत्कारिक विश्वास का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष यह पर्व हमें यह सिखाता है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न होएक छोटी सी रोशनी भी आशा और जीत का मार्ग दिखा सकती है।

आज का हर्षवर्धन राणे

इस मैच की सबसे बड़ी उपलब्धि हार्दिक पंड्या के नाम रही। हार्दिक टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 1000 से ज्यादा रन बनाने और 100 विकेट लेने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि 1939 रन और 100 विकेट के साथ हासिल की। खास बात यह है कि हार्दिक इस क्लब में शामिल होने वाले पहले फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर भी हैं। उनसे पहले इस सूची में केवल शाकिब अल हसन, मोहम्मद नबी और सिकंदर रजा जैसे स्पिन ऑलराउंडर शामिल थे। इसके अलावा हार्दिक भारत के लिए टी-20 इंटरनेशनल में 100 विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज भी बन गए, उनसे पहले यह कारनामा जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह कर चुके हैं।
मैच में शुभमन गिल ने भी एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। गिल ने 28 रनों की पारी खेलते हुए साल 2025 में तीनों फॉर्मेट टेस्ट, वनडे और टी-20) में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया। उनके कुल रन 1764 हो गए हैं, जिससे उन्होंने वेस्टइंडीज के शाई होप 1753 रन को पीछे छोड़ दिया। गिल ने यह मुकाम अपनी पारी का 18वां रन बनाते ही हासिल कर लिया। ओपनिंग में अभिषेक शर्मा ने एक बार फिर आक्रामक अंदाज दिखाया। उन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में तीसरी बार पारी की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा। इसके साथ ही वह ऐसा करने वाले इकलौते भारतीय बल्लेबाज बन गए। इससे पहले रोहित शर्मा, संजू सैमसन और यशस्वी जायसवाल यह उपलब्धि एक-एक बार हासिल कर चुके हैं।
गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती ने भी खास उपलब्धि दर्ज की। उन्होंने सिर्फ 30 पारियों में अपने 50 टी-20 इंटरनेशनल विकेट पूरे किए और इस मामले में भारत के दूसरे सबसे तेज गेंदबाज बन गए। उनसे आगे केवल कुलदीप यादव हैं, जिन्होंने 29 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था। गेंदों के लिहाज से भी वरुण का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 672 गेंदों में 50 विकेट पूरे कर लिए और इमरान ताहिर तथा राशिद खान जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। अर्शदीप सिंह ने भी एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वे टी-20 इंटरनेशनल के पावरप्ले ओवरों में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज बन गए। उन्होंने शुरुआती छह ओवरों में अब तक 48 विकेट चटकाए हैं और भुवनेश्वर कुमार को पीछे छोड़ दिया।
मैच के दौरान कई रोचक मोमेंट्स देखने को मिले। अर्शदीप सिंह ने पहले ही ओवर में रीजा हेंड्रिक्स को DRS के जरिए आउट कर भारत को शुरुआती सफलता दिलाई। वहीं 15वें ओवर में ऐडन मार्करम को जीवनदान मिला, जब हर्षित राणा उनका कैच नहीं पकड़ सके। इसके बावजूद मार्करम ने 18वें ओवर में छक्का जड़कर अपनी फिफ्टी पूरी की। साउथ अफ्रीका के लिए यह मैच निराशाजनक रहा। क्विंटन डी कॉक टी-20 इंटरनेशनल में नौवीं बार शून्य पर आउट हुए, जो उनके करियर का एक नकारात्मक रिकॉर्ड है। कुल मिलाकर यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए रिकॉर्ड्स और आत्मविश्वास से भरा रहा। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग-तीनों विभागों में भारत ने साउथ अफ्रीका पर पूरी तरह दबदबा बनाए रखा और सीरीज में अपनी मजबूती साबित की।

राजस्थान और पंजाब में भी हादसे
मौसम विभाग ने उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक घने कोहरे की संभावना जताई है। पंजाब उत्तर प्रदेश हरियाणा दिल्ली और राजस्थान में कोहरे के कारण आने वाली दोपहर तक दृश्यता में कमी रह सकती है। यातायात सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ने ड्राइवरों को सतर्क रहने और धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी है।
उत्तर भारत में घने कोहरे ने एक बार फिर जानलेवा हादसों को जन्म दिया है। सड़क सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतना और मौसम की चेतावनियों का पालन करना अत्यंत जरूरी है खासकर इस समय में जब दृश्यता बहुत कम हो जाती है। वहीं दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स में देरी यात्रियों के लिए एक और चुनौती बन गई है। मौसम सुधारने तक यह स्थिति बनी रह सकती है।