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  • यूपी में कफ सिरप रैकेट का बड़ा खुलासा: 700 से अधिक फर्जी फर्मों से अरबों की कमाई, ईडी ने कहा-ऐसा फर्जीवाड़ा पहले कभी नहीं देखा

    यूपी में कफ सिरप रैकेट का बड़ा खुलासा: 700 से अधिक फर्जी फर्मों से अरबों की कमाई, ईडी ने कहा-ऐसा फर्जीवाड़ा पहले कभी नहीं देखा


    नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश/ प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने उत्तर प्रदेश में कफ सिरप रैकेट को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। ईडी के अनुसार-इस रैकेट में 700 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए अरबों रुपये की कमाई की गई-और यह यूपी में अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा माना जा रहा है। जांच में यह सामने आया है कि अधिकांश फर्में केवल कागजों में ही मौजूद थीं और इनके अधिकृत अधिकारी भी केवल दस्तावेजों में थे। ईडी की टीम ने उत्तर प्रदेश-गुजरात और झारखंड में 25 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। इन तीन प्रदेशों में 40 घंटे से अधिक की जांच में रैकेट का पूरा नेटवर्क उजागर हुआ। शुरुआती साक्ष्यों के अनुसार-220 संचालकों के नाम से यह 700 से अधिक फर्जी फर्में बनाई गईं। इन फर्मों के माध्यम से अरबों रुपये की कमाई हुई-जबकि कई कंपनियों के अधिकारी इस अवैध कारोबार की जानकारी रखते हुए भी चुप्पी साधे रहे।

    ईडी ने मास्टरमाइंड्स पर शिकंजा कसा

    ईडी ने रैकेट के मुख्य आरोपियों-शुभम जायसवाल-पूर्व सांसद के करीबी आलोक सिंह और अमित टाटा-के ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। एसटीएफ की पिछले साल की जांच के दौरान ये आरोपी कुछ हद तक सुरक्षित महसूस कर रहे थे-लेकिन ईडी की कार्रवाई ने उनके खेमे में खलबली मचा दी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शुभम जायसवाल के पिता-भोला प्रसाद जायसवाल-के खातों में भी संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। दुबई में छिपे मास्टरमाइंड्स के अलावा इन खातों और फर्मों के माध्यम से अन्य नाम भी जांच में सामने आएंगे। रांची और धनबाद में भी कुछ फर्मों से रकम का आदान-प्रदान हुआ है-जिसकी गहराई से जांच जारी है।

    फर्जीवाड़े की तकनीक और प्रणाली पर सवाल
    ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से फर्जीवाड़ा किया गया-उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। फेंसेडिल सिरप बनाने वाली कंपनी के कई अधिकारियों ने रैकेट की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। फर्जी फर्मों और खातों के माध्यम से यह कारोबार पूरी तरह से कागजों तक सीमित नहीं रहा अरबों रुपये का लेन-देन हुआ और धन शुद्धिकरण का खेल खेला गया।

    आगे की कार्रवाई

    ईडी ने कहा है कि वे अब इन फर्जी फर्मों और संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू करेंगे। इसके अलावा-जीएसटी विभाग से फर्मों की सूची भी प्राप्त की जाएगी-जिससे जांच का दायरा और बढ़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि अभी कई और फर्जी फर्में और संदिग्ध नाम सामने आने बाकी हैं।उत्तर प्रदेश में कफ सिरप रैकेट का यह खुलासा न केवल अवैध कारोबार की जटिलता को दर्शाता है-बल्कि प्रशासनिक और कानूनी सिस्टम की कमजोरी को भी उजागर करता है। ईडी की इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस रैकेट के सभी मुख्य आरोपियों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे और अवैध कमाई की जाँच पूरी की जाएगी।

  • सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे खूबसूरत और रोमांटिक जगहें, अभी करें बुकिंग

    सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे खूबसूरत और रोमांटिक जगहें, अभी करें बुकिंग

    नई दिल्ली  शादी का सीजन और बैंड-बाजा-बरात का माहौल हो-तो नए जोड़ों के लिए हनीमून प्लान करना सबसे रोमांटिक अनुभव बन जाता है। सर्दियों में भारत के कई ऐसे खूबसूरत हनीमून डेस्टिनेशन हैं-जहां आप अपने पार्टनर के साथ यादगार पल बिता सकते हैं। यहाँ का मौसम, प्राकृतिक सुंदरता और रोमांटिक माहौल आपके हनीमून को और भी खास बना देंगेनई दिल्ली
    1. जम्मू और कश्मीर – बर्फ से ढकी रोमांस की दुनिया
    सर्दियों में हनीमून के लिए अगर आप ठंडी और बर्फ से ढकी जगहों को पसंद करते हैं तो जम्मू और कश्मीर परफेक्ट है। यहाँ आप गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग, पत्नीतॉप जैसी जगहों पर जा सकते हैं। बर्फीले पहाड़ और खूबसूरत घाटियां आपका रोमांस और बढ़ा देंगी। अगर आप धार्मिक यात्रा भी पसंद करते हैं तो वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा भी रोमांचक अनुभव देगी।

    2. जैसलमेर  -गिस्तानी रोमांस और सांस्कृतिक अनुभव

    अगर आपको ज्यादा ठंड पसंद नहीं है और आप कुछ अलग चाहते हैं तो राजस्थान का जैसलमेर अच्छा विकल्प है। यहाँ आप रेगिस्तानी सफारी का मज़ा ले सकते हैं और सुनहरी हवेलियों, किलों और ऐतिहासिक जगहों को देख सकते हैं। शाम के समय रेगिस्तान में सूरज ढलते हुए सुनहरा नजारा और रात में स्टार गेजिंग आपके हनीमून को रोमांचक बना देंगे।

    3. ऊटी, तमिलनाडु – हरियाली और पहाड़ी रोमांस
    हरियाली और ठंडी हवा के बीच अगर आप शांत और रोमांटिक पल बिताना चाहते हैं तो ऊटी आपके लिए सही है। नीलगिरी पहाड़ों के बीच बसे ऊटी में आप ऊटी लेक, रोज गार्डन, नीलगिरी माउंटेन रेलवे और पास के कुन्नूर घूम सकते हैं। यहाँ का मौसम और प्राकृतिक सुंदरता आपके हनीमून को यादगार बना देगा।

    4. दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल – चाय बागानों और पहाड़ियों का नजारा
    अगर आप अपने हनीमून को और भी रंगीन बनाना चाहते हैं तो दार्जिलिंग एक शानदार विकल्प है। यहाँ चाय के बागान, देवदार के जंगल और रंग-बिरंगे नदियों का संगम आपका मन मोह लेंगे। आप माउंट कैनिंग और टाइगर हिल जैसी जगहों की सैर कर सकते हैं, जहाँ से सूर्योदय का दृश्य बेहद रोमांटिक लगता है।

    हनीमून के लिए टिप्स

    बुकिंग जल्दी करें: सर्दियों में हनीमून डेस्टिनेशन जल्दी भर जाते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग कर लें।
    बजट का ध्यान रखें: चाहे आप लग्जरी होटल लें या बजट में रहें, हर जगह रोमांस का अनुभव शानदार रहेगा। सही मौसम का चुनाव: ठंडी जगहों के लिए गर्म कपड़े साथ रखें और हल्की ठंडी जगहों के लिए हल्के कपड़े पर्याप्त हैं।सर्दियों में हनीमून के लिए भारत के ये डेस्टिनेशन नए जोड़ों के लिए परफेक्ट हैं। चाहे बर्फीले पहाड़ हों, रेगिस्तान की सुनहरी धूप, हरियाली से भरे हिल स्टेशन हों या चाय के बागानों वाली पहाड़ियों का रोमांस, हर जगह अपने खास अनुभव के लिए यादगार बन सकती है। अपने हनीमून की योजना अभी बनाएं और अपने जीवन के सबसे रोमांटिक पलों का आनंद लें।

  • मनरेगा की जगह अब आएगा 'G Ram G'125 दिन रोजगार की गारंटी वाला नया बिल संसद में पेश होगाBJP ने जारी किया व्हिप

    मनरेगा की जगह अब आएगा 'G Ram G'125 दिन रोजगार की गारंटी वाला नया बिल संसद में पेश होगाBJP ने जारी किया व्हिप


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करने की योजना बनाई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा के स्थान पर एक नया विधेयक लाने की तैयारी हैजिसे ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण 2025’ नाम दिया गया है। इस विधेयक को संक्षेप में VB-G RAM G कहा जाएगा। इस नए बिल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका के लिए एक नया और अधिक मजबूत ढांचा तैयार करना हैजो गरीब और पिछड़े समुदायों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सके।

    मनरेगा की जगह VB-G RAM G

    मनरेगा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिरता देने वाला एक महत्वपूर्ण कानून माना जाता है। यह कानून ग्रामीण इलाकों के बेरोजगारों को कम से कम 100 दिन का रोजगार मुहैया कराता है। हालांकियह योजना कई मायनों में विफल रही है और सरकार ने अब इसे बदलने का निर्णय लिया है। नए विधेयक का मकसद रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिनों तक करना है और इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में नई रोजगार योजनाओं को लागू करना है।

    क्या है VB-G RAM G का उद्देश्य

    ‘VB-G RAM G’ विधेयक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और जीवन यापन को बेहतर बनाना है। यह विधेयक न केवल रोजगार की गारंटी देगाबल्कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर और स्वरोजगार के विकल्प भी पैदा होंगे। इसके अलावायह योजनाएं ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार करनेग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और महिलाओं तथा युवा वर्ग को रोजगार में अधिक शामिल करने पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी।

    125 दिन रोजगार की गारंटी

    VB-G RAM G के तहतसरकार अब ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिन का रोजगार देने का वादा कर रही है। इससे पहले मनरेगा में 100 दिन तक रोजगार की गारंटी दी जाती थी। यह कदम सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में स्थिर रोजगार और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया है। इसके तहत ग्रामीण कामकाजी वर्ग को लंबे समय तक रोजगार प्राप्त होगाजिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    BJP ने जारी किया व्हिप

    सूत्रों के मुताबिककेंद्र सरकार ने अपने विधायकों और सांसदों को इस विधेयक के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया है। भाजपा ने सुनिश्चित किया है कि इस विधेयक के समर्थन में पूरी पार्टी एकजुट रहेताकि इसे संसद में जल्दी से पास किया जा सके। पार्टी का मानना है कि यह नया विधेयक ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।

    नए विधेयक की संभावित विशेषताएं

    125 दिन रोजगार की गारंटी: यह मनरेगा से एक कदम आगे होगाजहां ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिन तक काम मिल सकेगा। स्वरोजगार को बढ़ावा: इस विधेयक में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं बनाई जाएंगी। ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार: इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करने का भी प्रस्ताव हैजिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता: महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष रोजगार अवसर दिए जाएंगे। नई परियोजनाओं की शुरुआत: ग्रामीण विकासजल संरक्षणशिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

    क्या होगा मनरेगा के स्थान पर

    मनरेगा को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जाएगाबल्कि इसे नए विधेयक के तहत अपडेट किया जाएगा। जहां मनरेगा में मुख्य रूप से फिजिकल कामों पर ध्यान केंद्रित किया गया थावहीं VB-G RAM G का उद्देश्य रोजगार के अवसरों को और विस्तारित करना हैताकि अधिक से अधिक लोगों को फायदा हो सके।

    आखिरकारइस विधेयक का क्या असर होगा

    ‘VB-G RAM G’ विधेयक के लागू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिरता में सुधार होगा और श्रमिकों को अधिक काम मिलेगा। इससे न केवल गांवों में आर्थिक सुधार होगाबल्कि यह राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देने के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम हैऔर यह देश के किसानों और श्रमिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकिइसे लेकर विपक्ष में विभिन्न विचार हो सकते हैंलेकिन इसे ग्रामीण विकास और रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

  • पहाड़ों का असली स्वाद: उत्तराखंड की रसोईजहां हर कौर में बसती है देवभूमि की खुशबू

    पहाड़ों का असली स्वाद: उत्तराखंड की रसोईजहां हर कौर में बसती है देवभूमि की खुशबू


    नई दिल्ली । उत्तराखंडजिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता हैएक ऐसी जगह है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। जब भी इस राज्य का नाम लिया जाता हैतो अक्सर हमारे दिमाग में बर्फ से ढके पहाड़शांत झीलें और ऐतिहासिक मंदिरों की छवियां उभर आती हैं। लेकिन इस राज्य की असली खूबसूरती केवल उसके दृश्य नहीं हैंबल्कि उसकी पारंपरिक रसोई में भी बसी हुई है। पहाड़ों का खाना सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं हैयह एक कला हैजो सादगीस्वाद और सेहत का बेहतरीन मिश्रण है।

    उत्तराखंड का जायका: सादगी और सेहत का अनोखा संयोजन

    उत्तराखंड के हर कोने में आपको एक अनोखा जायका मिलेगाजो परंपरा और प्रकृति से गहरे जुड़ा हुआ है। पहाड़ी इलाकों में जहां संसाधनों की कमी रहती हैवहां की रसोई ने सादगी में भी स्वाद का खजाना खोज निकाला है। यहां का खाना न केवल आपके शरीर को ताजगी और ऊर्जा देता हैबल्कि आपके स्वाद कलियों को भी एक नई यात्रा पर ले जाता है।

    पहाड़ी व्यंजन: सेहत से भरपूर और स्वादिष्ट

    उत्तराखंड की पारंपरिक रसोई में स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल प्रमुख होता है। यहां के भोजन में ताजे और प्राकृतिक सामान का भरपूर उपयोग किया जाता है। खासतौर पर गेंहूमक्काजौदालऔर फल-सब्जियां प्रमुख होती हैं। पहाड़ी खाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘भात’जो विभिन्न प्रकार से पकाया जाता हैजैसे ताजे घी के साथ ‘कढ़ी’ या ‘अलू के पकौड़े’ के साथ।
    यहां की सबसे प्रसिद्ध डिश है क्योंली जो जौ से बनी होती है और आलू के गुटके’जो आलू को मसाले और हरी मिर्च के साथ पकाकर बनाए जाते हैं। इन्हें आमतौर पर मक्के की रोटी के साथ खाया जाता है। इसके अलावा गड़ै और घोल भी बहुत लोकप्रिय हैंजो किसी विशेष मौके पर तैयार किए जाते हैं।

    जखिया और चूल्हे पर पकते व्यंजन

    उत्तराखंड की रसोई में जखिया जो एक प्रकार का धान का भोजन है और लकड़ी के चूल्हे पर पकने वाली डिशेज की खुशबू आपको कहीं भी नहीं मिलती। जब पहाड़ों में सुबह-सुबह ठंडी हवा का एहसास होता हैतो घी और लकड़ी के चूल्हे पर पकने वाले व्यंजनों की खुशबू आपके दिल को सुकून देती है। ये व्यंजनजो पूरी तरह से प्राकृतिक और स्थानीय होते हैंआपके शरीर के लिए बेहद पौष्टिक होते हैं और मन को शांति का अहसास कराते हैं।

    नैनीतालमसूरी और केदारनाथ के पारंपरिक व्यंजन

    उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलोंजैसे नैनीतालमसूरी और केदारनाथमें पर्यटकों के लिए विशेष प्रकार के व्यंजन उपलब्ध हैं। नैनीताल की ‘सूखी भिंडी’ और मसूरी के ‘पेटिस’ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। वहींकेदारनाथ में ‘भात-दाल’ का स्वाद यात्रा के बाद एक अलग ही आनंद देता है। इन जगहों पर यात्रा करते वक्त इन पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद आपको देवभूमि की असली आत्मा से जोड़े रखता है।

    पहाड़ी भोजन का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

    उत्तराखंड के पहाड़ी घरों में भोजन केवल पेट भरने का एक साधन नहीं होताबल्कि यह एक सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। यहां की रसोई में एक विशेष सादगी और प्रेम होता हैजो परिवार के हर सदस्य को जोड़ता है। स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों पर परिवार एक साथ बैठकर पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैंजो उनके रिश्तों में गर्माहट और प्यार की भावना पैदा करता है। पहाड़ी भोजन का महत्व सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है। यह हर कौर में प्रकृति और परिवार की मेहनत की महक को समेटे हुए है। इन व्यंजनों के सेवन से शरीर को पौष्टिकता मिलती है और आत्मिक शांति का अनुभव होता है।

    उत्तराखंड की रसोई: एक अद्भुत अनुभव

    अगर आप उत्तराखंड की यात्रा पर हैंतो सिर्फ पहाड़ों की सुंदरता और मंदिरों की ओर न भागें। उत्तराखंड का असली अनुभव तो उसकी रसोई में बसा है। यहां का हर कौरहर स्वाददेवभूमि की खुशबू और संस्कृति को महसूस कराने में सक्षम है। उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजन न सिर्फ खाने का अनुभव बल्कि एक सांस्कृतिक और आत्मिक यात्रा भी हैंजो आपको जीवनभर याद रहेगी।

  • मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…

    मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…


    नई दिल्ली/केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़ी नई डिजिटल पहल का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी अपने पीएफ खाते को UPI और एटीएम से लिंक कर सकेंगे। इसका मतलब यह होगा कि भविष्य में पीएफ निकालना अब पहले से कहीं आसान और डिजिटल हो जाएगा।

    पीएफ निकालने की मौजूदा प्रक्रिया में कठिनाई

    आज की तारीख में पीएफ निकालने के लिए कर्मचारियों को कई फॉर्म भरने और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई बार लोग फार्म भरते-भरते थक जाते हैं और प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते। मनसुख मांडविया ने कहा कि यही परेशानी ध्यान में रखकर सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। अब कर्मचारी अपने पीएफ का 75 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी वजह के निकाल सकेंगे।

    क्यों रखा जाएगा 25 प्रतिशत पीएफ?

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएफ में 25 प्रतिशत राशि इसलिए सुरक्षित रखी जाएगी ताकि कर्मचारियों की नौकरी की निरंतरता बनी रहे। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कर्मचारी 7 महीने काम करने के बाद पूरी राशि निकाल लेता है और बाद में नई नौकरी ज्वाइन करता है, तो उसकी पीएफ कंटिन्यूटी टूट जाती है। वहीं पेंशन के लिए 10 साल की लगातार नौकरी जरूरी होती है। 25 प्रतिशत राशि जमा रहने से कर्मचारी पेंशन के लिए पात्र बने रहेंगे और नई नौकरी मिलने तक सुरक्षा भी मिलती है।

    एटीएम और यूपीआई से पीएफ निकासी कैसे होगी

    मनसुख मांडविया ने बताया कि सरकार ने पीएफ खाते को बैंक खाता, आधार और यूएन से पहले ही जोड़ दिया है। अब इसमें डेबिट कार्ड और एटीएम फंक्शनैलिटी जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसका मतलब यह है कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी सीधे एटीएम से अपने पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे। इसके अलावा, पीएफ खाते को UPI से भी लिंक किया जा सकेगा। इससे कर्मचारियों को डिजिटल प्लेटफार्म पर पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा मिलेगी और उन्हें कागजी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। मंत्री ने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाने और डिजिटल सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

    सरल और डिजिटल भविष्य की ओर

    पीएफ से जुड़े यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बड़ा लाभ हैं। अब उन्हें बैंक, ऑफिस या सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डिजिटल प्लेटफार्म और एटीएम के माध्यम से कभी भी, कहीं भी पीएफ निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी। यह नई पहल सरकारी सेवाओं को और पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    सरकार की तैयारी और अगला कदम

    मनसुख मांडविया ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल शुरुआत है। भविष्य में और भी डिजिटल सुधार किए जाएंगे, जिससे पीएफ खाताधारकों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से पैसा निकालने की सुविधा मिले। यह पहल कर्मचारियों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • हनुक्का 2025: यहूदी रोशनी का पर्व और आठ दिनों तक मनाने का इतिहास

    हनुक्का 2025: यहूदी रोशनी का पर्व और आठ दिनों तक मनाने का इतिहास

    नई दिल्ली । हनुक्काजिसे यहूदी समुदाय में ‘फेस्टिवल ऑफ़ लाइट्स’ यानी रोशनी का पर्व कहा जाता हैयहूदी धर्म के प्रमुख त्योहारों में गिना जाता है। यह पर्व यहूदी कैलेंडर के किस्लेव महीने की 25 तारीख से शुरू होता है और लगातार आठ दिनों तक मनाया जाता है। हनुक्का केवल धार्मिक उत्सव नहीं हैबल्कि यह यहूदी समुदाय की आस्थासाहस और धार्मिक स्वतंत्रता की जीत का प्रतीक भी माना जाता है।

    इस पर्व की उत्पत्ति दूसरी सदी ईसा पूर्व की हैजब यहूदी लोगों ने सिरेस साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष किया। उस समय यहूदियों के मंदिर पर विदेशी हुकूमत का कब्ज़ा हो गया था और यहूदी धर्म के धार्मिक कृत्यों पर रोक लगा दी गई थी। मक्काबी विद्रोह के दौरान यहूदियों ने हेरोडियन और सिरीयन साम्राज्य के अधीन अपने मंदिर को वापस हासिल किया। मंदिर को फिर से शुद्ध करना और वहां पुनः पूजा करना यहूदियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।

    हनुक्का आठ दिनों तक इसलिए मनाया जाता है क्योंकि जब यहूदी मक्काबी युद्ध के बाद अपने मंदिर में लौटेतो उन्होंने तेल की कमी का सामना किया। मंदिर के मेनोराह दीपमाला में हमेशा प्रकाश जलता रहता थालेकिन उनके पास केवल एक दिन के लिए पर्याप्त शुद्ध तेल बचा था। चमत्कारिक रूप से यह तेल आठ दिनों तक जलता रहाजिससे यहूदियों को नया शुद्ध तेल तैयार करने का समय मिल गया। इस चमत्कारिक घटना के स्मरण में हनुक्का का उत्सव आठ दिनों तक मनाया जाता है।

    हनुक्का के दौरान यहूदियों के घरों में मेनोराह या हनुक्कियाह सजाई जाती है। इसमें नौ दीयों का विशेष प्रबंध होता है आठ दिन के लिए हर दिन एक अतिरिक्त दीपक जलाया जाता है और नौवां दीपक जिसे ‘शमाश’ कहते हैंदूसरों को जलाने के लिए इस्तेमाल होता है। इस उत्सव में पारंपरिक भोजन जैसे लेट्टुसेस आलू के पकौड़े डॉनट्स और अन्य तेल में तली हुई चीज़ें बनाई जाती हैंजो मंदिर में तेल के चमत्कार का प्रतीक हैं।

    हनुक्का का पर्व केवल धार्मिक आस्था तक ही सीमित नहीं है। यह यहूदी समुदाय के लिए एक सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है। इस दौरान परिवार और मित्र मिलकर हनुक्का गीत गाते हैंखेल खेलते हैं और बच्चों को गिफ्ट्स देते हैं। खासकर द्रेडेल नामक खेलजो छोटी घूमने वाली घूमती हुई वस्तु से खेला जाता हैइस पर्व की पहचान बन चुका है।

    इतिहास में हनुक्का ने यहूदी लोगों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की प्रेरणा दी है। यह पर्व हमें संघर्ष के समय में आशा बनाए रखने और अपने विश्वास पर अडिग रहने की शिक्षा देता है। यही वजह है कि हनुक्का न केवल धार्मिक उत्सव बल्कि स्वतंत्रता और साहस का प्रतीक भी माना जाता है।

    सन 2025 में हनुक्का 25 दिसंबर से शुरू होकर 1 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। यह समय विशेष रूप से विश्वभर में यहूदी समुदाय के लिए उत्सवरोशनी और सौहार्द का प्रतीक है। हर घर में दीप जलाकर और पारंपरिक व्यंजन बनाकर यहूदी लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हैं और आने वाली पीढ़ियों को इसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं।

    हनुक्का के इस पर्व से जुड़े संदेश आज भी प्रासंगिक हैं। यह हमें याद दिलाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ना संभव है। यह पर्व यहूदियों की पहचानसाहस और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक हैजो दुनिया भर में उनके समुदाय और सांस्कृतिक मूल्यों को जोड़ता है। इस प्रकार हनुक्का केवल आठ दिनों की रोशनी का उत्सव नहीं हैबल्कि यह यहूदियों के संघर्षआस्था और चमत्कारिक विश्वास का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष यह पर्व हमें यह सिखाता है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न होएक छोटी सी रोशनी भी आशा और जीत का मार्ग दिखा सकती है।

  • 16 साल की उम्र में घर छोड़ने वाले हर्षवर्धन राणे, वेटर से लेकर बॉलीवुड स्टार तक का संघर्षपूर्ण सफर

    16 साल की उम्र में घर छोड़ने वाले हर्षवर्धन राणे, वेटर से लेकर बॉलीवुड स्टार तक का संघर्षपूर्ण सफर


    नई दिल्ली / मुंबई बॉलीवुड अभिनेता हर्षवर्धन राणे आज अपनी मेहनत और टैलेंट की वजह से इंडस्ट्री के पॉपुलर स्टार्स में शामिल हैं। 16 दिसंबर को अपना जन्मदिन मना रहे हर्षवर्धन की जिंदगी की कहानी प्रेरणादायक है। 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए घर छोड़ दिया और मुंबई की सड़कों पर संघर्ष करना शुरू किया।

    सपनों की राह में संघर्ष
    छोटे से शहर से आए हर्षवर्धन राणे ने बताया कि शुरुआती दिनों में जिंदगी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। घर से भागने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी रोज़मर्रा का खर्च और खाने-पीने की व्यवस्था। शुरुआत में किसी ने भी उन्हें काम पर नहीं रखा। उन्होंने वेटर के रूप में काम किया, जहां उन्हें केवल 10 रुपये रोज़ाना और एक प्लेट छोले-चावल मिलता था। इसके बाद उन्होंने साइबर कैफे में रजिस्टर मेन्टेन करने का काम किया। इन छोटी-छोटी नौकरियों ने उन्हें जीवन के संघर्ष और मेहनत की असली सीख दी।

    बॉलीवुड में कदम
    हर्षवर्धन ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2007 में रिलीज हुई फिल्म लेफ्ट राइट लेफ्ट से की। इसके बाद उन्होंने तेलुगू फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई। उनकी प्रमुख तेलुगू फिल्में Thakita Thakita, Avunu, Prema Ishq Kaadhal और माया रही। हिंदी फिल्मों में उन्होंने पलटन, तैश, हसीन दिलरूबा और तारा वर्सेस बिलाल में काम किया। उनकी मेहनत और लगातार सीखने की ललक ने उन्हें इंडस्ट्री में मजबूती से जगह दिलाई।

    नेटवर्थ और ग्लैमरस लाइफ
    आज हर्षवर्धन राणे का जीवन ग्लैमरस है। Times of India के अनुसार उनकी नेटवर्थ लगभग 20-25 करोड़ रुपये है। फिल्मों, वेब शोज और ब्रांड एंडोर्समेंट से उनकी कमाई होती है। छोटे संघर्षपूर्ण दिनों से लेकर आज की शानदार लाइफस्टाइल तक का सफर दर्शाता है कि मेहनत और धैर्य सफलता की कुंजी हैं।

    सफलता की कहानी
    हर्षवर्धन का जीवन नए एक्टर्स के लिए प्रेरणादायक है। वेटर की नौकरी, साइबर कैफे में काम और छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स ने उन्हें यह सिखाया कि मेहनत और लगन से ही सफलता मिलती है। आज वह इंडस्ट्री में अपने अभिनय और मेहनत के दम पर स्थापित हैं। उनके संघर्ष की कहानी यह बताती है कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है।

    आज का हर्षवर्धन राणे

    आज हर्षवर्धन अपने अभिनय में विविधता लाते हैं और हर तरह की भूमिकाओं को सहजता से निभाते हैं। उन्होंने बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री दोनों में अपनी पहचान बनाई है। उनका सफर छोटे संघर्षपूर्ण दिनों से लेकर 20-25 करोड़ रुपये की नेटवर्थ और लग्जरी लाइफ तक पहुंचने का है, जो युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है।

  • IND vs SA: हार्दिक पंड्या ने रचा इतिहास, 1000 रन–100 विकेट पूरे; गिल बने 2025 के नंबर-1 बैटर, रिकॉर्ड्स की बरसात

    IND vs SA: हार्दिक पंड्या ने रचा इतिहास, 1000 रन–100 विकेट पूरे; गिल बने 2025 के नंबर-1 बैटर, रिकॉर्ड्स की बरसात


    नई दिल्ली /भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेली गई टी-20 सीरीज का तीसरा मुकाबला यादगार बन गया। धर्मशाला में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को 7 विकेट से हरा दिया। 118 रन के छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 15.5 ओवर में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया। इससे पहले साउथ अफ्रीका की पूरी टीम 20 ओवर में 117 रन पर सिमट गई थी।

    इस मैच की सबसे बड़ी उपलब्धि हार्दिक पंड्या के नाम रही। हार्दिक टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 1000 से ज्यादा रन बनाने और 100 विकेट लेने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि 1939 रन और 100 विकेट के साथ हासिल की। खास बात यह है कि हार्दिक इस क्लब में शामिल होने वाले पहले फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर भी हैं। उनसे पहले इस सूची में केवल शाकिब अल हसन, मोहम्मद नबी और सिकंदर रजा जैसे स्पिन ऑलराउंडर शामिल थे। इसके अलावा हार्दिक भारत के लिए टी-20 इंटरनेशनल में 100 विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज भी बन गए, उनसे पहले यह कारनामा जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह कर चुके हैं।

    मैच में शुभमन गिल ने भी एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। गिल ने 28 रनों की पारी खेलते हुए साल 2025 में तीनों फॉर्मेट टेस्ट, वनडे और टी-20) में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया। उनके कुल रन 1764 हो गए हैं, जिससे उन्होंने वेस्टइंडीज के शाई होप 1753 रन को पीछे छोड़ दिया। गिल ने यह मुकाम अपनी पारी का 18वां रन बनाते ही हासिल कर लिया। ओपनिंग में अभिषेक शर्मा ने एक बार फिर आक्रामक अंदाज दिखाया। उन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में तीसरी बार पारी की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा। इसके साथ ही वह ऐसा करने वाले इकलौते भारतीय बल्लेबाज बन गए। इससे पहले रोहित शर्मा, संजू सैमसन और यशस्वी जायसवाल यह उपलब्धि एक-एक बार हासिल कर चुके हैं।

    गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती ने भी खास उपलब्धि दर्ज की। उन्होंने सिर्फ 30 पारियों में अपने 50 टी-20 इंटरनेशनल विकेट पूरे किए और इस मामले में भारत के दूसरे सबसे तेज गेंदबाज बन गए। उनसे आगे केवल कुलदीप यादव हैं, जिन्होंने 29 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था। गेंदों के लिहाज से भी वरुण का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 672 गेंदों में 50 विकेट पूरे कर लिए और इमरान ताहिर तथा राशिद खान जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। अर्शदीप सिंह ने भी एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वे टी-20 इंटरनेशनल के पावरप्ले ओवरों में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज बन गए। उन्होंने शुरुआती छह ओवरों में अब तक 48 विकेट चटकाए हैं और भुवनेश्वर कुमार को पीछे छोड़ दिया।

    मैच के दौरान कई रोचक मोमेंट्स देखने को मिले। अर्शदीप सिंह ने पहले ही ओवर में रीजा हेंड्रिक्स को DRS के जरिए आउट कर भारत को शुरुआती सफलता दिलाई। वहीं 15वें ओवर में ऐडन मार्करम को जीवनदान मिला, जब हर्षित राणा उनका कैच नहीं पकड़ सके। इसके बावजूद मार्करम ने 18वें ओवर में छक्का जड़कर अपनी फिफ्टी पूरी की। साउथ अफ्रीका के लिए यह मैच निराशाजनक रहा। क्विंटन डी कॉक टी-20 इंटरनेशनल में नौवीं बार शून्य पर आउट हुए, जो उनके करियर का एक नकारात्मक रिकॉर्ड है। कुल मिलाकर यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए रिकॉर्ड्स और आत्मविश्वास से भरा रहा। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग-तीनों विभागों में भारत ने साउथ अफ्रीका पर पूरी तरह दबदबा बनाए रखा और सीरीज में अपनी मजबूती साबित की।

  • घने कोहरे से उत्तर भारत में हाहाकार यूपी-राजस्थान में बड़े हादसे दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स लेट

    घने कोहरे से उत्तर भारत में हाहाकार यूपी-राजस्थान में बड़े हादसे दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स लेट


    नई दिल्ली । भारत में घने कोहरे के कारण रविवार को जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कोहरे ने न केवल दृश्यता को कम किया बल्कि कई सड़क हादसों को भी जन्म दिया जिनमें कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। उत्तर प्रदेश राजस्थान और पंजाब में बड़े सड़क हादसे हुए हैं और दिल्ली एयरपोर्ट पर भी फ्लाइट्स में देरी की सूचना है।

    उत्तर प्रदेश में बड़े हादसे
    उत्तर प्रदेश में कोहरे के कारण कई बड़े सड़क हादसे हुए हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हमीरपुर के इचौली इलाके में रविवार सुबह करीब नौ बजे एक स्लीपर बस ने एक बोलेरो को टक्कर मार दी। इस हादसे में बोलेरो सवार दो भाइयों सहित चार लोगों की मौत हो गई। दोनों भाई अपनी मां की अस्थियां विसर्जित करने महोबा से प्रयागराज जा रहे थे। इस हादसे में अन्य दो लोग भी घायल हुए हैं जिनका इलाज जारी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 30 से ज्यादा वाहन आपस में टकरा गए जिससे कई लोग घायल हुए और कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। दुर्घटनाओं के कारण राज्यभर में यातायात ठप हो गया और कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं।

    राजस्थान और पंजाब में भी हादसे

    राजस्थान और पंजाब में भी कोहरे के कारण बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हुईं। पंजाब में एक कार पुल से गिर गई जिससे उसमें सवार दंपती की मौत हो गई। हादसा सोमवार सुबह हुआ जब कोहरे के कारण वाहन चालक नियंत्रण खो बैठा और कार पुल से गिर गई। इस हादसे में दंपती की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनका बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया है।

    दिल्ली एयरपोर्ट पर देरी
    कोहरे के असर से दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स में देरी हो रही है। खराब दृश्यता के कारण कई उड़ानें लेट हो गई हैं जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार कोहरे के कारण विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में देरी हो रही है और इस स्थिति में सुधार होने तक फ्लाइट्स की स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।

    मौसम की चेतावनी

    मौसम विभाग ने उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक घने कोहरे की संभावना जताई है। पंजाब उत्तर प्रदेश हरियाणा दिल्ली और राजस्थान में कोहरे के कारण आने वाली दोपहर तक दृश्यता में कमी रह सकती है। यातायात सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ने ड्राइवरों को सतर्क रहने और धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी है।

    उत्तर भारत में घने कोहरे ने एक बार फिर जानलेवा हादसों को जन्म दिया है। सड़क सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतना और मौसम की चेतावनियों का पालन करना अत्यंत जरूरी है खासकर इस समय में जब दृश्यता बहुत कम हो जाती है। वहीं दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स में देरी यात्रियों के लिए एक और चुनौती बन गई है। मौसम सुधारने तक यह स्थिति बनी रह सकती है।

  • तानसेन: संगीत सम्राट की कहानी जिनकी आवाज़ में अग्नि और बादल दोनों बसते थे

    तानसेन: संगीत सम्राट की कहानी जिनकी आवाज़ में अग्नि और बादल दोनों बसते थे


    नई दिल्ली । तानसेन जिनका नाम भारतीय संगीत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है उन्‍हें संगीत सम्राट माना जाता है। उनका जीवन और संगीत दोनों ही रहस्य और किवदंतियों से भरपूर हैं। कहा जाता है कि उनकी आवाज़ में एक विशेष प्रकार का जादू था जिससे अग्नि और बादल दोनों सक्रिय हो जाते थे। तानसेन का संगीत केवल एक कला नहीं था बल्कि यह प्रकृति के साथ एक संवाद था जो श्रोताओं के दिलों और प्रकृति दोनों को छूता था।

    तानसेन का जन्म ग्वालियर के पास स्थित बेहट गांव में हुआ था। बचपन में उनका नाम तन्ना था और वे एक शरारती और जिज्ञासु बालक थे। गांव वाले अक्सर उनकी आवाजों से चौंकते थे जो वह जानवरों और पक्षियों की तरह निकालते थे। कभी जंगल में शेर की दहाड़ सुनाई देती तो कभी पक्षियों की अजीब आवाजें आतीं। यह सब तन्ना की आवाज़ का ही जादू था। लेकिन इस प्रतिभा के साथ वह धीरे-धीरे संगीत की गहरी दुनिया में कदम रखने लगे जो अंततः उन्हें भारत के महानतम संगीतकारों में से एक बना देगा।

    तानसेन के संगीत से जुड़ी कई किवदंतियां प्रचलित हैं। उनकी आवाज़ इतनी प्रभावशाली थी कि कहा जाता है कि वह जो राग गाते थे वह न केवल श्रोताओं के दिलों में गूंजते थे बल्कि प्रकृति पर भी उनका प्रभाव पड़ता था। उनके बारे में यह किंवदंती है कि जब वह दीपक राग गाते थे तो बुझी हुई दीपक अपने आप जल उठती थीं। इसी तरह मेघ राग से वह ऐसा प्रभाव छोड़ते थे कि आसमान में बादल घिर आते और बारिश हो जाती। इसके अलावा उनके गायन से चट्टानें भी पिघलने का दावा किया जाता है।

    तानसेन का संगीत अकबर के दरबार में बहुत प्रसिद्ध हुआ। 1556 में वे अकबर के दरबार में आए और जल्द ही वह ‘नवरत्नों’ में से एक बन गए। उनकी गायन कला और संगीत में महारत के कारण उन्हें ‘संगीत सम्राट’ की उपाधि दी गई। वह दरबार में न केवल एक गायक थे बल्कि एक संगीत गुरु भी थे। अकबर और तानसेन के बीच की मित्रता और संगीत के प्रति उनका प्रेम अविस्मरणीय था। अकबर ने तानसेन के संगीत को इतना पसंद किया था कि वह अक्सर उनके रागों से मंत्रमुग्ध हो जाते थे।

    तानसेन की गायन शैली में भव्यता जटिलता और गहराई थी जो उन्हें अपने समकालीन संगीतज्ञों से अलग करती थी। वह मुख्य रूप से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के बड़े प्रवर्तक थे और उनकी गायन में ध्रुपद खयाल और ठुमरी जैसे विभिन्न शैलियों का संगम था। वह केवल एक गायक नहीं थे बल्कि उन्होंने भारतीय संगीत को एक नई दिशा दी। उनकी दी गई रचनाओं में कुछ ऐसे राग भी थे जो आज भी संगीतकारों द्वारा गाए जाते हैं और जिनका प्रभाव भारतीय संगीत पर सदियों तक रहेगा।

    तानसेन के संगीत के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपनी कला को न केवल अभ्यास बल्कि गहरी साधना और ध्यान के माध्यम से सीखा। उनका जीवन संगीत के प्रति समर्पण का प्रतीक था और इसीलिए उनकी कला ने उन्हें ‘संगीत सम्राट’ का दर्जा दिलवाया। उनके गायन की विशेषता थी कि वह केवल स्वर नहीं गाते थे बल्कि उनकी आवाज़ में एक ऐसी शक्ति थी जो श्रोताओं के दिलों को छू जाती थी।

    तानसेन के जीवन के बारे में कई रहस्यमयी कहानियाँ और किवदंतियाँ प्रचलित हैं लेकिन उनकी संगीत यात्रा हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनका संगीत भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का एक अमूल्य हिस्सा है। आज भी उनके रागों और गायन को श्रद्धा के साथ याद किया जाता है और संगीत प्रेमी उनके संगीत को हर पीढ़ी में जीवित रखने की कोशिश करते हैं।

    तानसेन का जीवन यह साबित करता है कि कला और प्रतिभा न केवल व्यक्ति के जीवन को संवारती है बल्कि वह समाज और संस्कृति को भी समृद्ध करती है। उनके गायन में जो जादू था वह आज भी लोगों के दिलों में गूंजता है और भारतीय संगीत के इतिहास में उनका नाम सदैव अमर रहेगा।