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  • भिलाई में बोरी में बंद मिली अज्ञात महिला की लाश पुलिस ने शुरू की जांच

    भिलाई में बोरी में बंद मिली अज्ञात महिला की लाश पुलिस ने शुरू की जांच

    भिलाई । भिलाई के चंद्रा मौर्या अंडरब्रिज के पास शुक्रवार सुबह एक बोरी में बंद अज्ञात महिला की लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। यह घटना उस समय घटी जब सुबह के समय अंडरब्रिज से गुजर रहे लोगों की नजर बोरी से बाहर लटकते एक हाथ पर पड़ी। स्थानीय नागरिकों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद घटनास्थल पर पुलिस और जांच एजेंसियां पहुंची। पुलिस को मौके पर पहुंचते ही शव की स्थिति को देखकर यह साफ हो गया कि महिला की मौत किसी हिंसक तरीके से हुई हो सकती है। बोरी में बंद महिला का शव बहुत बुरी तरह से सड़ चुका था जिससे उसकी पहचान करना फिलहाल संभव नहीं हो सका है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मर्ग कायम कर लिया और घटनास्थल की छानबीन शुरू कर दी।

    पुलिस की जांच और फॉरेंसिक टीम की मदद

    पुलिस ने शव की जांच के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड को भी घटनास्थल पर बुलाया। डॉग स्क्वायड के साथ पुलिस ने आसपास के इलाके की तलाशी ली ताकि किसी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन की पहचान की जा सके। साथ ही आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि महिला की पहचान के लिए आसपास के सभी गांवों और इलाकों में तफ्तीश की जा रही है। पुलिस ने यह भी कहा कि शव मिलने के बाद घटनास्थल के पास के लोग भी चौंक गए हैं। फिलहाल आसपास के लोगों से पूछताछ जारी है ताकि कोई सुराग मिल सके। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है जहां विशेषज्ञ इसकी मौत के कारणों का पता लगाएंगे।

    अज्ञात महिला की पहचान में मुश्किलें

    पुलिस को शव से कोई ऐसी पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य सुराग नहीं मिले हैं जिससे महिला की पहचान हो सके। शव की स्थिति को देखकर माना जा रहा है कि महिला की मौत कुछ दिनों पहले ही हुई होगी। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी पता चला है कि महिला का शव बोरी में बंद होने के कारण उसे यहां लाकर फेंका गया हो सकता है। इस मामले में पुलिस ने हत्या की आशंका जताई है और जांच की दिशा में विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

    इलाके में बढ़ी सुरक्षा जांच में सहयोग की अपील

    इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें घटनास्थल या किसी अन्य स्थान पर इस संदर्भ में कोई जानकारी मिले तो वे तत्काल पुलिस से संपर्क करें। साथ ही पुलिस ने यह भी बताया कि इस मामले में जल्द ही कुछ ठोस सुराग मिल सकते हैं और जांच जारी रहेगी। चंद्रा मौर्या अंडरब्रिज के आसपास के इलाके में पहले भी छोटी-मोटी घटनाएं घटित हो चुकी हैं लेकिन इस प्रकार का गंभीर अपराध इलाके में पहली बार हुआ है। स्थानीय नागरिकों में इस हत्या के बाद भय और चिंता का माहौल है और पुलिस को उनके सहयोग की उम्मीद है।

    निवारण के उपाय और पुलिस की ओर से कदम

    इस घटना के बाद पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को कड़ा किया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वे जनता से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं और जो भी व्यक्ति किसी संदिग्ध गतिविधि को देखे उसे तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए। पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि इलाके में सीसीटीवी कैमरों की मदद से हर अपराधी तक पहुंच बनाई जा सके।

  • CG सरकार ने शुरू की 24×7 तूहर टोकन ऐप सुविधा अब किसानों को मिलेगा बिना समय की बाध्यता के टोकन

    CG सरकार ने शुरू की 24×7 तूहर टोकन ऐप सुविधा अब किसानों को मिलेगा बिना समय की बाध्यता के टोकन


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के किसान बिना किसी निर्धारित समय की बाध्यता के दिन-रात कभी भी अपनी पसंदीदा समय में तूहर टोकन ऐप के माध्यम से टोकन बुक कर सकेंगे। यह निर्णय किसानों के हित में लिया गया है जिससे उन्हें धान विक्रय की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।

    राज्य सरकार ने घोषणा की है कि तूहर टोकन ऐप को अब 24×7 उपलब्ध करवा दिया जाएगा। पहले किसानों को केवल निर्धारित समय में ही टोकन बुक करने की अनुमति थी लेकिन अब यह सुविधा उन्हें किसी भी समय उपलब्ध होगी। यह कदम धान खरीदारी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस फैसले को लेकर कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। उन्होंने बताया कि यह कदम किसानों को अपनी सुविधानुसार टोकन बुक करने की स्वतंत्रता देगा और इससे उनकी दिनचर्या में कोई भी व्यवधान नहीं होगा। इसके अलावा इस बदलाव से धान विक्रय के दौरान होने वाली भीड़ और तकनीकी दबाव की समस्या भी कम होगी जो पहले किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण थी।

    अब किसान 13 जनवरी तक आने वाले 20 दिनों के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे जिससे उन्हें धान विक्रय की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे किसानों को टोकन काटने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी।

    एक और महत्वपूर्ण कदम के तहत राज्य सरकार ने 2 एकड़ या उससे कम रकबा वाले छोटे किसानों के लिए भी अतिरिक्त राहत दी है। ये किसान अब 31 जनवरी तक तूहर टोकन ऐप के माध्यम से अपना टोकन बुक कर सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर यह सुविधा लघु किसानों को विशेष रूप से प्रदान की गई है ताकि वे भी समय पर धान विक्रय कर सकें।

    राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक सहकारी समिति को केवल उसकी निर्धारित सीमा के भीतर ही टोकन आबंटित किए जाएंगे। इस प्रकार से व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी और योजनाबद्ध रहेगी। सरकार ने किसानों से यह अपील की है कि वे समय रहते तूहर टोकन ऐप के माध्यम से अपना टोकन प्राप्त करें ताकि वे किसी भी असुविधा से बच सकें और धान विक्रय में कोई परेशानी न हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठा रही है और उनकी मेहनत का पूरा सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को धान विक्रय की प्रक्रिया में कोई भी कठिनाई न हो और वे बिना किसी दबाव के अपनी फसल को उचित मूल्य पर बेच सकें।

    छत्तीसगढ़ राज्य में कृषि और धान की खेती महत्वपूर्ण है और यह फैसला किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनकी मेहनत को उचित मान्यता देने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। किसानों की सुविधा के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में धान खरीदी में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों का समय भी बच सकेगा।

  • NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर

    NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर


    मध्य प्रदेश / मुरैना  के मुरैना जिले में नेशनल हाईवे-44 पर स्थित छौंदा टोल प्लाजा इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही की पहचान बन चुका है। यहां लगने वाला रोज़ाना जाम अब केवल ट्रैफिक समस्या नहीं रहा बल्कि यह मानव संवेदना और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर रहा है। शुक्रवार शाम हालात इतने बिगड़े कि हाईवे पर 4 से 5 किलोमीटर लंबा महाजाम लग गया जो करुआ गांव तक फैल गया। हाईवे होने के कारण चंद मिनटों में ही वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में आम वाहन ही नहीं बल्कि एंबुलेंस मरीजों की गाड़ियां और बुजुर्ग यात्री भी फंसे रहे। कई घंटे बीतने के बावजूद जाम खुलवाने की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई।

    कैंसर पीड़ित मां की हालत बिगड़ी
    इस जाम की सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आई जब मुरैना निवासी अरविंद सिंह अपनी कैंसर पीड़ित मां उर्मिला के साथ फंस गए। अरविंद ने बताया कि उनकी मां की हाल ही में 14 घंटे लंबी सर्जरी कीमोथेरेपी और रेडिएशन हुआ है। वे ग्वालियर से नियमित चेकअप कराकर लौट रहे थे तभी शाम के समय छौंदा टोल पर जाम में फंस गए। अरविंद के मुताबिक “जाम करुआ गांव के विक्टर स्कूल तक था। घंटों खड़े रहने से मां की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं लेकिन न टोल प्रबंधन ने मदद की और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा।
    परिजनों ने कई बार मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

    1 दिसंबर से नई कंपनी बढ़ी अव्यवस्था

    गौरतलब है कि 1 दिसंबर से छौंदा टोल प्लाजा का संचालन शिवा कॉर्पोरेशन कंपनी के पास है। इससे पहले यह टोल पथ इंडिया द्वारा संचालित किया जा रहा था। नई कंपनी के टेकओवर के बाद से ही यहां अव्यवस्था बढ़ गई है।स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि शाम होते ही यहां जाम लगना आम हो गया है। टोल बूथ पर स्टाफ की कमीतकनीकी खामियां और सुस्त प्रबंधन इसकी बड़ी वजह मानी जा रही हैं।

    टोल मैनेजर का गैर-जिम्मेदाराना बयान

    जब इस अव्यवस्था पर टोल मैनेजर अनुराग तोमर से सवाल किया गया तो उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहाजाम लगता है तो हम ही खुलवाते हैं। अभी नया चार्ज संभाला है सिस्टम में थोड़ी समस्या है ठीक करवा रहे हैं। इस बयान से साफ है कि यात्रियों की परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

    पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    सिविल लाइन थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि छौंदा टोल पर जाम की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।उन्होंने चेतावनी दी-टोल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि जाम की स्थिति नहीं बननी चाहिए। अगर सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।छौंदा टोल पर लग रहा जाम सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का आईना है। जब मरीज और एंबुलेंस तक फंसे रहें तो यह सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।
  • नीमच से लौट रहे दंपती की सड़क दुर्घटना में मौत तीन लोग मारे गए

    नीमच से लौट रहे दंपती की सड़क दुर्घटना में मौत तीन लोग मारे गए


    नीमच । राजस्थान के निंबाहेड़ा बायपास पर शुक्रवार रात को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में नीमच जिले के एक दंपती सहित तीन लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना नेशनल हाईवे 56 पर बडौली माधोसिंह मार्ग के चौराहे पर हुई जब एक मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे दंपती की कार पिकअप से टकराई और उसके बाद पीछे से आ रही थार ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों दंपती के सदस्यों और पिकअप चालक की मौके पर ही मौत हो गई।
    सभी मृतक नीमच जिले के सरवानिया महाराज क्षेत्र के निवासी थे। दुर्घटना का शिकार हुआ दंपती लखन मालू 40 वर्ष और उनकी पत्नी सविता डॉली मालू 36 वर्ष चित्तौड़गढ़ जिले में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। उनकी मारुति वेन नेशनल हाईवे पर बायपास पर एक खड़ी पिकअप से टकराई जो पंचर होने के कारण वहां रुकी हुई थी।
    इस दौरान एक थार जीप पीछे से तेजी से आई और वेन को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वेन बुरी तरह पिचक गई और उसमें सवार दोनों दंपती की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा पिकअप चालक बसंतीलाल प्रजापत 30 वर्ष भी इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठा। वह ग्राम भूनियाखेड़ी का निवासी था। पिकअप में सवार एक अन्य व्यक्ति हस्तीमल पामेचा को गंभीर चोटें आईं जिसे उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
    निंबाहेड़ा पुलिस ने घटना के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस दुर्घटना में शामिल सभी वाहनों का सही तरीके से निरीक्षण किया जा रहा है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
    सदर थाना प्रभारी संजय शर्मा ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल घायलों को अस्पताल भेजा। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटवाकर यातायात को सुचारू किया गया। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इसके कारणों का पता लगाया जाएगा।
    यह हादसा क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह हादसा उस समय हुआ जब लोग मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे थे और यह घटना उस समय हुई जब सड़क पर गाड़ी की स्थिति बिगड़ गई थी।
    स्थानीय लोग इस हादसे को लेकर गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले दंपती और पिकअप चालक के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
    सड़क हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने नेशनल हाईवे पर सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता जताई है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है और लोगों से आग्रह किया गया है कि वे यात्रा के दौरान अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

  • अमरिंदर सिंह का बयान: कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं

    अमरिंदर सिंह का बयान: कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं


    ई दिल्‍ली । पंजाब(Punjab) के पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister)और भारतीय जनता पार्टी(Bharatiya Janata Party) के नेता अमरिंदर सिंह(Amarinder Singh) ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। भाजपा के कामकाज की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विपरीत, पार्टी उनसे परामर्श नहीं कर रही है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस में लौटने की संभावना को पूरी तरह खारिज किया।

    मीडिया को दिए इंटरव्यू में अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्हें जिस तरह से मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था, उससे वह अब भी आहत हैं, इसलिए कांग्रेस में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि भाजपा में सभी निर्णय दिल्ली में लिए जाते हैं और जमीनी नेताओं से परामर्श नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन मैं खुद को उन पर थोप नहीं सकता।’

    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मोदी का पंजाब के लिए विशेष स्नेह है और वह राज्य के लिए कुछ भी करेंगे। नवजोत कौर सिद्धू के इस बयान पर कि पंजाब में 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देने वाला मुख्यमंत्री बनता है, सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी को अस्थिर बताया और सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। सिंह ने कहा कि भाजपा पंजाब में तभी मजबूत हो सकती है जब वह शिरोमणि अकाली दल के साथ हाथ मिलाए। उन्होंने दावा किया कि दोनों दल अंततः एक साथ आएंगे, क्योंकि पंजाब में गठबंधन के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसा
    वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब आतंकवाद के वर्षों के बाद सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसते हुए कहा कि वह केवल टीवी पर आते हैं और चुटकुले सुनाते हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि मुफ्त की योजनाओं के कारण पंजाब भिखारी राज्य बन गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मान केवल नाममात्र के मुखिया हैं, जबकि पंजाब के असली फैसले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ले रहे हैं। सिंह ने लोगों से स्थिरता के लिए भाजपा पर विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि भारत की सुरक्षा पंजाब के हितों से जुड़ी हुई है।

  • बगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्थल पर जुटी भीड़, सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज

    बगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्थल पर जुटी भीड़, सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल (West Bengal)के मुर्शिदाबाद (Murshidabad)जिले में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शैली वाली मस्जिद के स्थल पर सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार की नमाज अदा की। निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)ने 6 दिसंबर को इस मस्जिद की नींव रखी थी। यह तारीख वही है जब 1992 में अयोध्या(Ayodhya) की बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था। आज सुबह से ही आसपास के गांवों से लोग खेतों के रास्ते इस स्थल की ओर आने लगे थे। नमाज के समय नजदीक आने पर आयोजकों ने लाउडसर्स के जरिए भीड़ को निर्देश दिए। तस्वीरों में दिख रहा है कि नमाजियों की लंबी-लंबी कतारें खेतों से होते हुए खुले मैदान तक पहुंच रही थीं।

    पहले से क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पिछले हफ्ते तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित किए गए हुमायूं कबीर भी नमाज में शामिल हुए। किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल बढ़ा दिया गया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। आयोजकों ने करीब 1 हजार लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की थी, लेकिन भीड़ उससे कहीं अधिक थी। पड़ोस के प्लासी से आए लोगों ने करीब डेढ़ क्विंटल चावल से खिचड़ी बनाई। खाना बनाने वाली कमेटी के एक सदस्य ने कहा, ‘हम ये सवाब के लिए कर रहे हैं। पता नहीं कितने लोग आएंगे, लेकिन उन्हें खिलाना बड़ा पुण्य है।’

    राजनीतिक बयानबाजियां तेज
    नींव रखे जाने के बाद से बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनने वाली इस मस्जिद के लिए भारी चंदा आ रहा है। स्थल पर रखे दान-पात्र तेजी से भरते दिखे और डिजिटल योगदान के लिए क्यूआर कोड भी लगाए गए थे। नींव समारोह ने तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं। भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक तुष्टिकरण का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि यह सारा मामला भाजपा के इशारे पर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र को ध्रुवीकृत करने की साजिश है। हुमायूं कबीर ने कहा कि वे सिर्फ लोगों की मांग पर ऐसा कर रहे हैं।

  • सेवा, शिक्षा और संवेदना की मिसाल: डॉ. रश्म-जो इलाज को सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी मानती हैं

    सेवा, शिक्षा और संवेदना की मिसाल: डॉ. रश्म-जो इलाज को सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी मानती हैं


    भोपाल आज के समय में जब चिकित्सा को अक्सर सिर्फ एक पेशे के तौर पर देखा जाता है, वहीं डॉ. रश्मि जैसी चिकित्सक उम्मीद की एक अलग तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और संवेदना से न सिर्फ मरीजों का इलाज किया, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को भी समान महत्व दिया। डॉ. रश्मि ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर से जनरल मेडिसिन में एमडी की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने डायबिटीज में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया, जिससे मेटाबॉलिक और लाइफस्टाइल डिजीज़ के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई।

    अपने करियर की शुरुआत से ही डॉ. रश्मि ने प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दी हैं। उन्होंने एम्स भोपाल में तीन वर्षों तक सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे एलएन मेडिकल कॉलेज और पीएमएस भोपाल जैसे संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहीं। मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में उन्हें पांच साल का टीचिंग अनुभव प्राप्त है, जहां उन्होंने सैकड़ों मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण दिया। वर्तमान में डॉ. रश्मि मेडिकल एजुकेशन और आईसीएमआर ICMR रिसर्च से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। वे सिर्फ क्लीनिकल प्रैक्टिस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रिसर्च और अकादमिक गतिविधियों के जरिए चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

    प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी उनकी भूमिका अहम रही है। वे बेसिक लाइफ सपोर्ट BLS प्रोग्राम, नर्सिंग ट्रेनिंग सेशन TEM में फैकल्टी इंचार्ज के रूप में कार्य कर चुकी हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने इमरजेंसी स्थितियों में त्वरित और सही उपचार के लिए मेडिकल व नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षित किया। डॉ. रश्मि के प्रोफेशनल इंटरेस्ट में डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, पेलिएटिव केयर, इमरजेंसी मेडिसिन और इमरजेंसी केयर इंटरवेंशन शामिल हैं। विशेष रूप से गंभीर और जरूरतमंद मरीजों के लिए उनका दृष्टिकोण बेहद मानवीय रहा है।

    साथी डॉक्टरों के अनुसार, डॉ. रश्मि ने अब तक कई गरीब और असहाय मरीजों के इलाज का खर्च स्वयं उठाया है। इसके साथ ही वे मरीजों को अन्य संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक मदद दिलाने में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उनके लिए मरीज सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि एक इंसान होता है।उनकी यही सोच उन्हें एक संवेदनशील चिकित्सक के रूप में अलग पहचान दिलाती है-जहां इलाज के साथ भरोसा, सहानुभूति और सहयोग भी उतना ही जरूरी माना जाता है। डॉ. रश्मि की यात्रा यह साबित करती है कि एक अच्छा डॉक्टर वही है जो ज्ञान के साथ करुणा भी रखे। शिक्षा रिसर्च और समाजसेवा का संतुलन उन्हें चिकित्सा क्षेत्र की प्रेरणादायक शख्सियत बनाता है।

  • सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश: याचिकाकर्ताओं और वकीलों को न्यायपालिका को बदनाम न करने की चेतावनी

    सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश: याचिकाकर्ताओं और वकीलों को न्यायपालिका को बदनाम न करने की चेतावनी


    नई दिल्‍ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने शुक्रवार को एक अर्जी पर नाराजगी जताते हुए याचिकाकर्ता (Petitioner)को फटकार लगाई और एक लाख रुपये का जुर्माना भी ठोक दिया। यह याचिका अल्पसंख्यक स्कूलों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों (Provisions)के तहत छूट देने के सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की याचिका दायर करके न्यायपालिका को बदनाम न करें।

    जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की पीठ यूनाइटेड वॉयस फॉर एजुकेशन फोरम एनजीओ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को दी गई छूट असंवैधानिक है, क्योंकि यह उन्हें आरटीई दायित्वों से पूरी तरह से छूट देती है। पीठ ने कहा कि अगर वकील इस तरह की सलाह दे रहे हैं तो उन्हें भी दंडित करना होगा। कोर्ट ने जुर्माना लगाते हुए कहा कि सख्त संदेश देना जरूरी है। आप कानून के जानकार और पेशेवर हैं और आप अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर करते हैं? आप कोर्ट के महत्व को समझते नहीं हैं। 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में आरटीई एक्ट को आर्टिकल 30(1) के तहत अल्पसंख्यक स्कूलों पर लागू नहीं माना था।

    इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि ‘म्यूचुअल फंड सही है’ जैसे लोकप्रिय विज्ञापन अभियान निवेशकों को गुमराह करते हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ इस साल सितंबर में बॉम्बे हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया को निवेशक शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम चलाने के लिए दी गई छूट को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

    साथ ही, देश में सभी इमारतों को भूकंप रोधी बनाने और भूकंप की स्थिति से निपटने के लिए समाधान की मांग करने वाली याचिका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि पहले यह माना जाता था कि दिल्ली सबसे ज्यादा भूकंप संभावित क्षेत्र है, लेकिन नई रिपोर्ट में पता चला है कि देश का 75 प्रतिशत क्षेत्र भूकंप संभावित है। इस पर जज ने कहा तो क्या सभी लोगों को चांद पर रहने भेज दिया जाए? इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि वह भूकंप से कम नुकसान के उपाय अपनाने की बात लेकर कोर्ट पहुंचे हैं। देश में भूकंप के खतरे को ध्यान में रखते हुए भवन और दूसरे निर्माण होने चाहिए।

    याचिकाकर्ता ने जापान में हाल ही में आए भूकंप का जिक्र किया। उन्होंने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए वहां पर होने वाले विशेष किस्म के भवन निर्माण पर चर्चा करनी चाही, लेकिन पीठ ने उन्हें रोका। कोर्ट ने कहा कि मीडिया में कौन सी रिपोर्ट प्रकाशित हो रही है, उसके आधार पर कोर्ट में सुनवाई नहीं होती। यह विषय नीतिगत है।

  • अल्पसंख्यकों से जुड़े मामले पर भड़कीं जस्टिस नागरत्ना, याचिकाकर्ता पर लगाया 1 लाख का जुर्माना

    अल्पसंख्यकों से जुड़े मामले पर भड़कीं जस्टिस नागरत्ना, याचिकाकर्ता पर लगाया 1 लाख का जुर्माना


    नई दिल्‍ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने शुक्रवार (12 दिसंबर) को उस रिट याचिकाकर्ता(Petitioner) को कड़़ी फटकार लगाई, जिसने अल्पसंख्यक(minority) विद्यालयों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत छूट देने के शीर्ष न्यायालय के पूर्व के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस रिट पिटीशन को देश की न्यायपालिका को नीचा दिखाने और उसे ध्वस्त करे की एक कोशिश करार दिया और याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।

    जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की, “आप सुप्रीम कोर्ट के साथ ऐसा नहीं कर सकते। हम गुस्से में हैं। अगर आप ऐसे मामले दायर करना शुरू कर देंगे तो यह इस देश की पूरी न्याय प्रणाली के खिलाफ होगा। आपको अपने मामले की गंभीरता का पता नहीं है। हम खुद को 1 लाख रुपये के जुर्माने तक ही सीमित रख रहे हैं। ऐसे मामले दायर करके इस देश की न्यायपालिका को नीचा न दिखाएं।”

    न्यायपालिका को बदनाम मत कीजिए
    कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि वकील सुप्रीम कोर्ट के अपने ही फैसलों के खिलाफ ऐसी याचिकाएं दायर करने की सलाह कैसे दे रहे हैं? याचिका दायर करने के लिए वकील को फटकार लगाते हुए पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह के मामले दायर करके देश की न्यायपालिका को बदनाम मत कीजिए। यहां क्या हो रहा है? क्या वकील इस तरह की सलाह दे रहे हैं? हमें वकीलों को दंडित करना होगा।’’ पीठ ने कहा, “हम केवल एक लाख रुपये का जुर्माना ही लगा रहे हैं।’’

    आप देश की न्यायपालिका को ध्वस्त करना चाहते हैं
    न्यायालय ने कहा, ‘‘आप कानून के जानकार लोग और पेशेवर हैं और आप अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर करते हैं? घोर दुरुपयोग। हम संयम बरत रहे हैं। हम अवमानना ​​का आदेश जारी नहीं कर रहे हैं। आप इस देश की न्यायपालिका को ध्वस्त करना चाहते हैं।’’

    किस NGO ने दायर की थी याचिका?
    उच्चतम न्यायालय गैर-सरकारी संगठन ‘यूनाइटेड वॉइस फॉर एजुकेशन फोरम’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को दी गई छूट असंवैधानिक है क्योंकि यह उन्हें शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के दायित्वों से पूर्ण रूप से छूट प्रदान करती है। न्यायालय ने 2014 में दिए फैसले में कहा था कि आरटीई अधिनियम अनुच्छेद 30(1) के तहत अल्पसंख्यक विद्यालयों पर लागू नहीं होता है, जो धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और शासन का अधिकार प्रदान करता है।

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    फर्स्ट एसी बोगी में दिखा चूहा, पूर्व विधायक ने मारकर वीडियो किया शेयर, मोदी सरकार पर साधा निशाना


    नई दिल्‍ली । भाजपा (BJP)छोड़ राजद में शामिल हुए पीरपैंती (भागलपुर) के पूर्व विधायक ललन पासवान ने शुक्रवार को बांका इंटरसिटी (Banka Intercity)एक्सप्रेस ट्रेन में चूहे को मारकर अपना वीडियो शेयर किया। उन्होंने ट्रेनों में चूहे के आतंक और यात्रियों की परेशानी का जिक्र करते हुए रेलवे में मेंटेनेंस, (Maintenance)हाउसकीपिंग(Housekeeping) सहित अन्य काम के निजीकरण पर सवाल उठाया। ललन ने बताया कि वह गुरुवार की रात बांका इंटरसिटी से फर्स्ट एसी कोच में पटना से भागलपुर आ रहे थे। जब फर्स्ट एसी बोगी में इतने बड़े-बड़े चूहे यात्रियों को काट रहे हैं तो स्लीपर और सेकेंड और थर्ड एसी जैसी बोगियों की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

    पूर्व विधायक ने बताया कि ट्रेन खुलने के बाद वह अपनी सीट पर सो रहे थे तो इसी दौरान एक घंटे तक चूहे के आतंक से परेशान रहे। चूहा चेहरे पर आ-जा रहा था। ट्रेनों में अव्वल दर्जे की बोगियों में हाउसकीपिंग की यह स्थिति है। ठेका लेने वाली प्राइवेट एजेंसियों की कोई निगरानी नहीं है। यात्री ट्रेनों में परेशान हैं। चूहा किसी का सामान काट रहा है तो किसी के शरीर पर कूद रहा है और काट रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

    उन्होंने आशंका जताई कि जब ये ट्रेनें यार्ड में खड़ी होती हैं तो इसके पीछे सांप और अन्य जीव भी बोगियों में आ सकते हैं। चूहा स्वयं कई बीमारियों का कारण है। रेलवे और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार यात्रियों की इन परेशानियों पर संज्ञान ले। उन्होंने बताया कि वह एक बोनाफाइड यात्री के रूप में टिकट लेकर यात्रा कर रहे थे और उनका हक है कि सुरक्षित और सुलभ यात्रा रेलवे उपलब्ध कराए। इस बाबत मालदा रेल मंडल के पीआरओ रसराज माजी ने कहा कि बांका इंटरसिटी का मेंटनेंस दानापुर डिवीजन से होता है।

    भाजपा ने टिकट काटा तो राजद में शामिल हुए थे
    बीते विधानसभा चुनाव में पीरपैंती के सीटिंग विधायक ललन पासवान का अंतिम समय में भाजपा से टिकट कट गया। इससे नाराज ललन पहले तो राजद प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में जुट गए फिर चुनाव के दौरान ही पटना में जाकर पूर्व सीएम राबड़ी देवी से आशीर्वाद लेकर राजद में शामिल हो गए। पाला बदलने के बाद वह भाजपा को लगातार निशाने पर ले रहे हैं।